Wednesday, January 28, 2026
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Ram Raksha Stotra PDF – श्री राम रक्षा स्तोत्रम् 2024-25

श्री राम रक्षा स्तोत्रम् (Ram Raksha Stotra) एक अत्यंत शक्तिशाली और पवित्र स्तोत्र है, जिसकी रचना महर्षि बुधकौशिक ने की थी। यह स्तोत्र भगवान श्रीराम की कृपा और सुरक्षा प्राप्त करने के उद्देश्य से गाया जाता है। श्री राम, जिन्हें मर्यादा पुरुषोत्तम कहा जाता है, हिन्दू धर्म के प्रमुख देवताओं में से एक हैं और आदर्श मानव के रूप में उनकी प्रतिष्ठा है। उनके नाम का स्मरण करने मात्र से भक्तों के जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और सभी प्रकार के कष्ट और संकट दूर होते हैं। आप यहाँ पर सूर्य आदित्य हृदय स्तोत्रम् | श्री हनुमान चालीसा | श्री काल भैरव अष्टकम् | श्री नारायण कवच भी पढ़ सकते हैं

“राम” नाम स्वयं में एक मंत्र है, जो ध्यान, भक्ति और आत्मशांति का प्रतीक है। श्री राम रक्षा स्तोत्रम् का पाठ नियमित रूप से करने से भक्तों को मानसिक, शारीरिक और आध्यात्मिक सुरक्षा प्राप्त होती है। इस स्तोत्र में भगवान राम के विभिन्न रूपों और उनकी महिमा का वर्णन किया गया है, जो साधक को जीवन के विभिन्न संकटों से उबारने में सहायक होता है।

श्री राम रक्षा स्तोत्रम् का पाठ विशेष रूप से उन लोगों के लिए अत्यंत फलदायी माना जाता है, जो जीवन में भय, अशांति और कठिनाइयों का सामना कर रहे होते हैं। यह स्तोत्र रामभक्तों के बीच अत्यधिक लोकप्रिय है और इसे दैनिक रूप से श्रद्धा के साथ पढ़ने पर जीवन में अद्भुत परिवर्तन और सुरक्षा का अनुभव होता है।


  • हिंदी
  • English

Ram Raksha Stotra in Hindi

॥ श्री राम रक्षा स्तोत्रम् लिखित॥

श्रीगणेशायनम:।
अस्य श्रीरामरक्षास्तोत्रमन्त्रस्य।
बुधकौशिक ऋषि:।
श्रीसीतारामचन्द्रो देवता
अनुष्टुप् छन्द:।
सीता शक्ति:।
श्रीमद्हनुमान् कीलकम्।
श्रीसीतारामचन्द्रप्रीत्यर्थे जपे विनियोग:॥

– अथ ध्यानम –

ध्यायेदाजानुबाहुं धृतशरधनुषं बद्धपद्मासनस्थं।
पीतं वासो वसानं नवकमलदलस्पर्धिनेत्रं प्रसन्नम्॥
वामाङ्कारूढ-सीता-मुखकमल-मिलल्लोचनं नीरदाभं।
नानालङ्कारदीप्तं दधतमुरुजटामण्डनं रामचन्द्रम्॥

– इति ध्यानम् – 

चरितं रघुनाथस्य शतकोटिप्रविस्तरम्।
एकैकमक्षरं पुंसां महापातकनाशनम्॥1॥

ध्यात्वा नीलोत्पलश्यामं रामं राजीवलोचनम्।
जानकीलक्ष्मणोपेतं जटामुकुटमण्डितम्॥2॥

सासितूणधनुर्बाणपाणिं नक्तं चरान्तकम्।
स्वलीलया जगत्त्रातुमाविर्भूतमजं विभुम्॥3॥

रामरक्षां पठेत्प्राज्ञ: पापघ्नीं सर्वकामदाम्।
शिरो मे राघव: पातु भालं दशरथात्मज:॥4॥

कौसल्येयो दृशौ पातु विश्वामित्रप्रिय: श्रुती।
घ्राणं पातु मखत्राता मुखं सौमित्रिवत्सल:॥5॥

जिव्हां विद्यानिधि: पातु कण्ठं भरतवन्दित:।
स्कन्धौ दिव्यायुध: पातु भुजौ भग्नेशकार्मुक:॥6॥

करौ सीतापति: पातु हृदयं जामदग्न्यजित्।
मध्यं पातु खरध्वंसी नाभिं जाम्बवदाश्रय:॥7॥

सुग्रीवेश: कटी पातु सक्थिनी हनुमत्प्रभु:।
ऊरू रघूत्तम: पातु रक्ष:कुलविनाशकृत्॥8॥

जानुनी सेतुकृत्पातु जङ्घे दशमुखान्तक:।
पादौ बिभीषणश्रीद: पातु रामोSखिलं वपु:॥9॥

एतां रामबलोपेतां रक्षां य: सुकृती पठेत्।
स चिरायु: सुखी पुत्री विजयी विनयी भवेत्॥10॥

पाताल-भूतल-व्योम-चारिणश्छद्मचारिण:।
न द्र्ष्टुमपि शक्तास्ते रक्षितं रामनामभि:॥11॥

रामेति रामभद्रेति रामचन्द्रेति वा स्मरन्।
नरो न लिप्यते पापै: भुक्तिं मुक्तिं च विन्दति॥12॥

जगज्जेत्रैकमन्त्रेण रामनाम्नाऽभिरक्षितम्।
य: कण्ठे धारयेत्तस्य करस्था: सर्वसिद्धय:॥13॥

वज्रपञ्जरनामेदं यो रामकवचं स्मरेत्।
अव्याहताज्ञ: सर्वत्र लभते जयमङ्गलम्॥14॥

आदिष्टवान् यथा स्वप्ने रामरक्षामिमां हर:।
तथा लिखितवान् प्रात: प्रबुद्धो बुधकौशिक:॥15॥

आराम: कल्पवृक्षाणां विराम: सकलापदाम्।
अभिरामस्त्रिलोकानां राम: श्रीमान् स न: प्रभु:॥16॥

तरुणौ रूपसम्पन्नौ सुकुमारौ महाबलौ।
पुण्डरीकविशालाक्षौ चीरकृष्णाजिनाम्बरौ॥17॥

फलमूलशिनौ दान्तौ तापसौ ब्रह्मचारिणौ।
पुत्रौ दशरथस्यैतौ भ्रातरौ रामलक्ष्मणौ॥18॥

शरण्यौ सर्वसत्वानां श्रेष्ठौ सर्वधनुष्मताम्।
रक्ष:कुलनिहन्तारौ त्रायेतां नो रघूत्तमौ॥19॥

आत्तसज्जधनुषा विषुस्पृशावक्षया शुगनिषङ्ग सङिगनौ।
रक्षणाय मम रामलक्ष्मणावग्रत:पथि सदैव गच्छताम्॥20॥

संनद्ध: कवचीखड्गी चापबाणधरो युवा।
गच्छन् मनोरथोSस्माकंराम: पातु सलक्ष्मण:॥21॥

रामो दाशरथि: शूरोलक्ष्मणानुचरो बली।
काकुत्स्थ: पुरुष: पूर्ण:कौसल्येयो रघूत्तम:॥22॥

वेदान्तवेद्यो यज्ञेश: पुराणपुरुषोत्तम:।
जानकीवल्लभ: श्रीमानप्रमेयपराक्रम:॥23॥

इत्येतानि जपेन्नित्यंमद्भक्त: श्रद्धयान्वित:।
अश्वमेधाधिकं पुण्यंसम्प्राप्नोति न संशय:॥24॥

रामं दूर्वादलश्यामं पद्माक्षं पीतवाससम्।
स्तुवन्ति नामभिर्दिव्यैर्न ते संसारिणो नर:॥25॥

रामं लक्ष्मण-पूर्वजंरघुवरं सीतापतिं सुंदरं।
काकुत्स्थं करुणार्णवंगुणनिधिं विप्रप्रियं धार्मिकम्।

राजेन्द्रं सत्यसन्धं दशरथ-तनयंश्यामलं शान्तमूर्तिं।
वन्दे लोकाभिरामं रघुकुलतिलकंराघवं रावणारिम्॥26॥

रामाय रामभद्राय रामचन्द्राय वेधसे।
रघुनाथाय नाथाय सीताया: पतये नम:॥27॥

श्रीराम राम रघुनन्दन राम राम।
श्रीराम राम भरताग्रज राम राम।
श्रीराम राम रणकर्कश राम राम।
श्रीराम राम शरणं भव राम राम॥28॥

श्रीरामचन्द्रचरणौ मनसा स्मरामि।
श्रीरामचन्द्रचरणौ वचसा गृणामि।
श्रीरामचन्द्रचरणौ शिरसा नमामि।
श्रीरामचन्द्रचरणौ शरणं प्रपद्ये॥29॥

माता रामो मत्पिता रामचन्द्र:।
स्वामी रामो मत्सखा रामचन्द्र:।
सर्वस्वं मे रामचन्द्रो दयालुर्।
नान्यं जाने नैव जाने न जाने॥30॥

दक्षिणे लक्ष्मणो यस्य वामे च जनकात्मजा।
पुरतो मारुतिर्यस्य तं वन्दे रघुनन्दनम्॥31॥

लोकाभिरामं रणरङ्गधीरंराजीवनेत्रं रघुवंशनाथम्।
कारुण्यरूपं करुणाकरन्तंश्रीरामचन्द्रं शरणं प्रपद्ये॥32॥

मनोजवं मारुततुल्यवेगंजितेन्द्रियं बुद्धिमतां वरिष्ठम्।
वातात्मजं वानरयूथमुख्यंश्रीरामदूतं शरणं प्रपद्ये॥33॥

कूजन्तं राम-रामेतिमधुरं मधुराक्षरम्।
आरुह्य कविताशाखांवन्दे वाल्मीकिकोकिलम्॥34॥

आपदामपहर्तारं दातारं सर्वसम्पदाम्।
लोकाभिरामं श्रीरामं भूयो भूयो नमाम्यहम्॥35॥

भर्जनं भवबीजानामर्जनं सुखसम्पदाम्।
तर्जनं यमदूतानां रामरामेति गर्जनम्॥36॥

रामो राजमणि: सदाविजयते रामं रमेशं भजे।
रामेणाभिहता निशाचरचमूरामाय तस्मै नम:।

रामान्नास्ति परायणं परतरंरामस्य दासोऽस्म्यहम्।
रामे चित्तलय: सदा भवतुमे भो राम मामुद्धर॥37॥

राम रामेति रामेति रमे रामे मनोरमे।
सहस्रनाम तत्तुल्यं रामनाम वरानने॥38॥

॥ इति श्रीबुधकौशिकमुनिविरचितं श्रीरामरक्षास्तोत्रं सम्पूर्णम् ॥

॥ Shri Rama Raksha Stotram ॥

Shri Ganeshaya-namah।
Asya Shri Ramraksha-stotra-mantrasya।
Budhakaushika Rishih।
Shri Sitaramachandro Devata।
Anushtup Chhandah।
Sita Shaktih।
Shrimadhanuman Kilakam।
Shri Sitaramachandra-prityarthe Jape Viniyogah॥

Atha Dhyanama

Dhyayedajanubahum Dhritashara-dhanusham Baddhapadmasanastham।
Pitam Vaso Vasanam Navakamala-dalaspardhinetram Prasannam
Vamankarudha-sita-mukhakamala-milallochanam Niradabham।
Nanalankaradiptam Dadhatamurujata-mandanam Ramachandram॥

– Iti Dhyanam –

Charitam Raghunathasya Shatakotipravistaram।
Ekaikamaksharam Punsam Mahapataka-nashanam॥1॥

Dhyatva Nilotpalashyamam Ramam Rajivalochanam।
Janakilakshmanopetam Jatamukutamanditam॥2॥

Sasituna-dhanurbanapanim Naktam Charantakam।
Svalilaya Jagattratumavirbhutamajam Vibhum॥3॥

Ramaraksham Pathetpragyah Papaghani Sarvakamadam।
Shiro Me Raghavah Patu Bhalam Dasharathatmajah॥4॥

Kausalyeyo Drishau Patu Vishvamitrapriyah Shruti।
Ghranam Patu Makhatrata Mukham Saumitrivatsalah॥5॥

Jivham Vidyanidhih Patu Kantham Bharata-vanditah।
Skandhau Divyayudhah Patu Bhujau Bhagneshkarmukah॥6॥

Karau Sitapatih Patu Hridayam Jamadagnyajit।
Madhyam Patu Kharadhvansi Nabhim Jambavadashrayah॥7॥

Sugriveshah Kati Patu Sakthini Hanumatprabhuh।
Uru Raghuttamah Patu Rakshah Kulavinashkrit॥8॥

Januni Setukritpatu Janghe Dashamukhantakah।
Padau Bibhishanashridh Patu Ramoskhilam Vapuh॥9॥

Etam Ramabalopetam Raksham Yah Sukriti Pathet।
Sa Chirayuh Sukhi Putri Vijayi Vinayi Bhaveta॥10॥

Patala-Bhutala-Vyoma-Charinashchadmacharinah।
Na Drashtumapi Shaktaste Rakshitam Ramanamabhih॥11॥

Rameti Ramabhadreti Ramachandreti Va Smaran।
Naro Na Lipyate Papaih Bhukti Muktim Cha Vindati॥12॥

Jagajjetraikamantrena Ramanamna-bhirakshitam।
Yah Kanthe Dharayettasya Karasthah Sarvasiddhayah॥13॥

Vajrapanjaranamedam Yo Ramakavacham Smaret।
Avyahatagyah Sarvatra Labhate Jayamangalam॥14॥

Adishtavan Yatha Svapne Ramarakshamima Harah।
Tatha Likhitavan Pratah Prabuddho Budhakaushikah॥15॥

Aramah Kalpavrikshanam Viramah Sakalapadam।
Abhiramastrilokanam Ramah Shriman Sa Nah Prabhuh॥16॥

Tarunau Rupasampannau Sukumarau Mahabalau।
Pundarika-vishalakshau Chirakrishnajinambarau॥17॥

Phalmulashinau Dantau Tapasau Brahmacharinau।
Putrau Dasharatha-syaitau Bhratarau Ramalakshmanau॥18॥

Sharanyau Sarvasatvanam Shreshthau Sarvadhanushmatam।
Rakshah Kulanihantarau Trayetam No Raghuttamau॥19॥

Attasajjadhanusha VishusprishaVakshaya Shuganishanga Sandiganau।
Rakshanaya Mama RamalakshmanavagratahPathi Sadaiva Gachchhatam॥20॥

Sannaddhah KavachiKhadgi Chapabanadharo Yuva।
Gachchhan ManorathoasmakamRamah Patu Salakshmanah॥21॥

Ramo Dasharathih ShuroLakshmananucharo Bali।
Kakutsthah Purushah PurnahKausalyeyo Raghuttamah॥22॥

Vedantavedayo Yagyeshah Puranapurushottamah।
Janakivallabhah Shrimanaprameya-parakramah॥23॥

Ityetani JapennityamMadbhaktah Shraddhayanvitah।
Ashvamedhadhikam PunyamSamprapnoti Na Sanshayah॥24॥

Ramam Durvadalashyam Padmaksham Pitavasasam।
Stuvanti Namabhirdivyairna Te Sansarino Narah॥25॥

Ramam Lakshmana-PurvajamRaghuvaram Sitapatim Sundaram।
Kakutstham KarunarnavamGunanidhim Viprapriyam Dharmikam।

Rajendram Satyasandham Dasharatha-TanayamShyamalam Shantamurtim।
Vande Lokabhiramam RaghukulatilakamRaghavam Ravanarim॥26॥

Ramaya Ramabhadraya Ramachandraya Vedhase।
Raghunathaya Nathaya Sitayah Pataye Namah॥27॥

Shrirama Rama Raghunandana Rama Rama।
Shrirama Rama Bharatagraja Rama Rama।

Shrirama Rama Ranakarkasha Rama Rama।
Shrirama Rama Sharanam Bhava Rama Rama॥28॥

Shriramachandra-charanau Manasa Smarami।
Shriramachandra-charanau Vachasa Grinami।
Shriramachandra-charanau Shirasa Namami।
Shriramachandra-charanau Sharanam Prapadye॥29॥

Mata Ramo Matpita Ramachandrah।
Svami Ramo Matsakha Ramachandrah।
Sarvasvam Me Ramachandro Dayalur।
Nanyam Jane Naiva Jane Na Jane॥30॥

Dakshine Lakshmano Yasya Vame Cha Janakatmaja।
Purato Marutirayasya Tam Vande Raghunandanam॥31॥

Lokabhirama RanarangadhiramRajivanetram Raghuvanshanatham।
Karunyarupam KarunakarantamShriramachandram Sharanam Prapadye॥32॥

Manojavam MarutatulyavegamJitendriyam Buddhimatam Varishtham।
Vatatmajam VanarayuthamukhyamShriramadutam Sharanam Prapadye॥33॥

Kujantam Rama-RametiMadhuram Madhuraksharam।
Aruhya KavitashakhamVande Valmiki-kokilam॥34॥

Apadamapahartaram Dataram Sarvasampadam।
Lokabhiramam Shriramam Bhuyo Bhuyo Namamyaham॥35॥

Bharjanam Bhavabijana-marjanam Sukhasampadam।
Tarjanam Yamadutanam Ramarameti Garjanam॥36॥

Ramo Rajamanih SadaVijayate Ramam Ramesham Bhaje।
Ramenabhihata NishacharachamuRamaya Tasmai Namah।

Ramannasti Parayanam ParataramRamasya Dasoasmyaham।
Rame Chittalayah Sada BhavatuMe Bho Rama Mamuddhara॥37॥

Rama Rameti Rameti Rame Rame Manorame।
Sahasranama Tattulyam Ramanama Varanane॥38॥

॥ Iti Shribudhakaushikamunivirachitam Shriramaraksha Stotram Sampurnam ॥



श्री राम रक्षा स्तोत्रम् का हिंदू धर्म में अत्यधिक महत्व है, क्योंकि इसे भगवान श्री राम की कृपा और सुरक्षा प्राप्त करने के लिए एक सशक्त साधन माना जाता है। यह स्तोत्र भक्तों को मानसिक, शारीरिक और आध्यात्मिक स्तर पर सुरक्षा प्रदान करता है और जीवन के सभी प्रकार के संकटों, कष्टों और भय से रक्षा करता है।

  1. सुरक्षा का कवच: “रक्षा” शब्द ही बताता है कि यह स्तोत्र भगवान राम के आशीर्वाद से भक्त को हर प्रकार की विपत्ति और संकट से बचाता है। इसे एक दैवीय कवच की तरह माना जाता है, जो हर विपरीत परिस्थिति में भी व्यक्ति को सुरक्षित रखता है।
  2. भय और संकट से मुक्ति: श्री राम रक्षा स्तोत्रम् का नियमित रूप से पाठ करने से व्यक्ति के मन में छिपे सभी भय दूर हो जाते हैं। यह स्तोत्र मानसिक शांति प्रदान करता है और जीवन में आने वाली कठिनाइयों का सामना करने की शक्ति प्रदान करता है।
  3. मानसिक और आत्मिक शांति: भगवान राम के नाम का स्मरण करने और इस स्तोत्र का पाठ करने से भक्त को मानसिक शांति मिलती है। यह ध्यान और भक्ति का श्रेष्ठ माध्यम है, जिससे व्यक्ति की आत्मिक उन्नति होती है।
  4. कर्मों का शुद्धिकरण: इस स्तोत्र का नियमित पाठ करने से नकारात्मक विचार, दु:ख, और दुखद घटनाओं से मुक्ति मिलती है। यह व्यक्ति के विचारों और कर्मों को शुद्ध करता है।
  5. ईश्वरीय कृपा और सफलता: श्री राम रक्षा स्तोत्रम् व्यक्ति के जीवन में भगवान राम की अनुकंपा लाता है, जिससे वह जीवन में स्थायित्व, समृद्धि और सफलता प्राप्त करता है।

इस प्रकार, श्री राम रक्षा स्तोत्रम् का पाठ भक्तों के लिए आत्मिक उन्नति, मानसिक शांति और ईश्वरीय सुरक्षा प्राप्त करने का अद्वितीय माध्यम है।


राम रक्षा स्तोत्र मंत्र क्या है?

राम रक्षा स्तोत्र एक पवित्र और शक्तिशाली स्तोत्र है, जिसकी रचना महर्षि बुधकौशिक ने भगवान श्रीराम की कृपा और सुरक्षा प्राप्त करने के लिए की थी। इसमें भगवान राम के विभिन्न रूपों और गुणों का वर्णन है, जो भक्तों को मानसिक, शारीरिक और आध्यात्मिक सुरक्षा प्रदान करता है।

राम रक्षा स्तोत्र का पाठ कब करना चाहिए?

राम रक्षा स्तोत्र का पाठ सुबह या शाम के समय, शुद्ध मन और शुद्ध स्थान पर बैठकर करना चाहिए। हालांकि, इसका पाठ किसी भी समय किया जा सकता है, लेकिन ब्रह्ममुहूर्त (सुबह 4 से 6 बजे के बीच) का समय विशेष फलदायी माना जाता है।

राम रक्षा स्तोत्र में कितने श्लोक हैं?

राम रक्षा स्तोत्र में कुल 38 श्लोक होते हैं। ये श्लोक भगवान राम के विभिन्न गुणों और लीलाओं का गुणगान करते हैं और साथ ही उनकी कृपा और रक्षा की प्रार्थना भी करते हैं।

राम रक्षा स्तोत्र के रचयिता कौन थे?

राम रक्षा स्तोत्र के रचयिता महर्षि बुधकौशिक थे। उन्होंने भगवान शिव के आशीर्वाद से इस स्तोत्र की रचना की थी, जिसे भगवान राम की कृपा और सुरक्षा प्राप्त करने के लिए अत्यंत प्रभावशाली माना जाता है।

राम जी का प्रिय मंत्र कौन सा है?

भगवान राम का प्रिय मंत्र “श्री राम जय राम जय जय राम” है। यह मंत्र भक्तों के बीच अत्यधिक लोकप्रिय है और इसे ध्यान, पूजा, और भक्ति के समय जपने से विशेष फल की प्राप्ति होती है।

राम जी का मूल मंत्र क्या है?

भगवान राम का मूल मंत्र “राम” है। इस एकाक्षरी मंत्र का जप अत्यंत प्रभावशाली माना जाता है और इसे नियमित रूप से जपने से भक्त को शांति, भक्ति, और आध्यात्मिक उन्नति की प्राप्ति होती है।

पार्वती चालीसा आध्यात्मिक शक्ति और भक्ति – Parvati Chalisa PDF 2024-25

पार्वती चालीसा (Parvati Chalisa Pdf) माँ पार्वती को समर्पित एक भक्तिपूर्ण स्तोत्र है, जिसे हिंदू धर्म में अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। यह चालीसा देवी पार्वती के गुणों, लीलाओं और महिमा का वर्णन करती है और उनके भक्तों द्वारा श्रद्धा और भक्ति के साथ गाई जाती है। आप हमारी वेबसाइट से श्री सरस्वती चालीसा | श्री दुर्गा चालीसा | साई चालीसा | हनुमान चालीसा का पाठ भी कर सकते हैं।

पार्वती चालीसा की शुरुआत में माँ पार्वती का ध्यान किया जाता है, फिर उनके विभिन्न रूपों और अवतारों का वर्णन होता है। माँ पार्वती को शक्ति, सौंदर्य, और करुणा की देवी माना जाता है और वे भगवान शिव की अर्धांगिनी हैं। यह चालीसा न केवल भक्तों को आध्यात्मिक शांति और संतोष प्रदान करती है, बल्कि उन्हें माँ पार्वती की कृपा और आशीर्वाद प्राप्त करने में भी मदद करती है।

पार्वती चालीसा का नियमित पाठ करने से व्यक्ति की सभी प्रकार की समस्याओं का समाधान होता है और उन्हें सुख, शांति और समृद्धि प्राप्त होती है। इसे भक्तों द्वारा सुबह और शाम दोनों समय गाया जा सकता है, विशेष रूप से नवरात्रि, शिवरात्रि और अन्य विशेष त्योहारों और पूजाओं के अवसर पर।


  • हिंदी / संस्कृत
  • English

|| पार्वती चालीसा ||

॥ दोहा ॥
जय गिरी तनये दक्षजे
शम्भू प्रिये गुणखानि ।
गणपति जननी पार्वती
अम्बे! शक्ति! भवानि ॥

॥ चौपाई ॥
ब्रह्मा भेद न तुम्हरो पावे ।
पंच बदन नित तुमको ध्यावे ॥

षड्मुख कहि न सकत यश तेरो ।
सहसबदन श्रम करत घनेरो ॥

तेऊ पार न पावत माता ।
स्थित रक्षा लय हिय सजाता ॥

अधर प्रवाल सदृश अरुणारे ।
अति कमनीय नयन कजरारे ॥

ललित ललाट विलेपित केशर ।
कुंकुंम अक्षत शोभा मनहर ॥

कनक बसन कंचुकि सजाए ।
कटी मेखला दिव्य लहराए ॥

कंठ मदार हार की शोभा ।
जाहि देखि सहजहि मन लोभा ॥

बालारुण अनंत छबि धारी ।
आभूषण की शोभा प्यारी ॥

नाना रत्न जड़ित सिंहासन ।
तापर राजति हरि चतुरानन ॥

इन्द्रादिक परिवार पूजित ।
जग मृग नाग यक्ष रव कूजित ॥ 10

गिर कैलास निवासिनी जय जय ।
कोटिक प्रभा विकासिनी जय जय ॥

त्रिभुवन सकल कुटुंब तिहारी ।
अणु अणु महं तुम्हारी उजियारी ॥

हैं महेश प्राणेश तुम्हारे ।
त्रिभुवन के जो नित रखवारे ॥

उनसो पति तुम प्राप्त कीन्ह जब ।
सुकृत पुरातन उदित भए तब ॥

बूढ़ा बैल सवारी जिनकी ।
महिमा का गावे कोउ तिनकी ॥

सदा श्मशान बिहारी शंकर ।
आभूषण हैं भुजंग भयंकर ॥

कण्ठ हलाहल को छबि छायी ।
नीलकण्ठ की पदवी पायी ॥

देव मगन के हित अस किन्हो ।
विष लै आपु तिनहि अमि दिन्हो ॥

ताकी तुम पत्नी छवि धारिणी ।
दुरित विदारिणी मंगल कारिणी ॥

देखि परम सौंदर्य तिहारो ।
त्रिभुवन चकित बनावन हारो ॥ 20

भय भीता सो माता गंगा ।
लज्जा मय है सलिल तरंगा ॥

सौत समान शम्भू पहआयी ।
विष्णु पदाब्ज छोड़ि सो धायी ॥

तेहि कों कमल बदन मुरझायो ।
लखी सत्वर शिव शीश चढ़ायो ॥

नित्यानंद करी बरदायिनी ।
अभय भक्त कर नित अनपायिनी ॥

अखिल पाप त्रयताप निकन्दिनी ।
माहेश्वरी हिमालय नन्दिनी ॥

काशी पुरी सदा मन भायी ।
सिद्ध पीठ तेहि आपु बनायी ॥

भगवती प्रतिदिन भिक्षा दात्री ।
कृपा प्रमोद सनेह विधात्री ॥

रिपुक्षय कारिणी जय जय अम्बे ।
वाचा सिद्ध करि अवलम्बे ॥

गौरी उमा शंकरी काली ।
अन्नपूर्णा जग प्रतिपाली ॥

सब जन की ईश्वरी भगवती ।
पतिप्राणा परमेश्वरी सती ॥ 30

तुमने कठिन तपस्या कीनी ।
नारद सों जब शिक्षा लीनी ॥

अन्न न नीर न वायु अहारा ।
अस्थि मात्रतन भयउ तुम्हारा ॥

पत्र घास को खाद्य न भायउ ।
उमा नाम तब तुमने पायउ ॥

तप बिलोकी ऋषि सात पधारे ।
लगे डिगावन डिगी न हारे ॥

तब तब जय जय जय उच्चारेउ ।
सप्तऋषि निज गेह सिद्धारेउ ॥

सुर विधि विष्णु पास तब आए ।
वर देने के वचन सुनाए ॥

मांगे उमा वर पति तुम तिनसों ।
चाहत जग त्रिभुवन निधि जिनसों ॥

एवमस्तु कही ते दोऊ गए ।
सुफल मनोरथ तुमने लए ॥

करि विवाह शिव सों भामा ।
पुनः कहाई हर की बामा ॥

जो पढ़िहै जन यह चालीसा ।
धन जन सुख देइहै तेहि ईसा ॥ 40

॥ दोहा ॥
कूटि चंद्रिका सुभग शिर,
जयति जयति सुख खानि
पार्वती निज भक्त हित,
रहहु सदा वरदानि ।

॥ इति श्री पार्वती चालीसा ॥

Parvati Chalisa PDF in English

॥ Doha ॥
jay giree tanaye dakshaje
shambhoo priye gunakhaani ॥
ganapati jananee paarvatee
ambe! shakti! bhavaanee ॥

॥ Chaupai ॥
brahma bhed na tummharo paave ॥
panchabandan nit tumako dhyaave ॥

shadmukh kahi na sakat yash tero ॥
sahasabadan shram karat ghanero ॥

teu paar na paavat maata ॥
sthit raksha lay hay sajaata ॥

adhar pravaal sadrsh arunaare ॥
ati kaamanaay nayan kajaraare ॥

lalit lailaat vilepit keshar ॥
kunkum akshat sobha manahar ॥

kanak basan kanchuki dande ॥
katee mekhala divy prakate ॥

kanth madaar haar kee shobha ॥
jaahi dekhi sahajahi man lobha ॥

baalaarun anant chhabee daaree ॥
aabhooshanon kee shobha pyaaree ॥

naana ratnajatit sinhaasan ॥
taapar raajati hari chaturaanan ॥

indraadik parivaar poojit ॥
jag mrg naag yaksh rav kujit ॥10 ॥

gir kailaas nivaasinee jay jay ॥
kotik prabha vikaasinee jay jay ॥

tribhuvan sakal kutumb tihaaree ॥
ati atyan mahan vivaah ujiyaaree ॥

hain mahesh praneshaphe ॥
tribhuvan ke jo nit rakhavaare ॥

unaso pati tumhen praapt kinh jab ॥
sukrt puraan udit bhe tab ॥

boodha bail prototaip ॥
mahima ka gaave kooo tinakee ॥

sadaabahaar shmashaan bihaaree shankar ॥
aabhooshan hain bhujang bhayankar ॥

kanth halaahal ko chhabi chhaayee ॥
neelakanth kee padavee khoj ॥

dev magan ke hit as kinho ॥
vish aap laiu tinahi ami dinho ॥

taakee tumhaaree patnee chhavi dhaarinee ॥
durit vidaarinee mangal kaarinee ॥

dekhi param saundary tihaaro ॥
tribhuvan chakit banaavan haaro ॥20 ॥

bhay bheeta so maata ganga ॥
lajja may hai salil taranga ॥

saut samaan shambhoo pahaayee ॥
vishnu padabaj chhodi so dhaayi ॥

tehi kon kamal badan murajhaayo ॥
lakkhee satvar shiv sheesh chaadayo ॥

nityaanand kari baradaayinee ॥
abhay bhakt kar nit anapaayinee ॥

sampoorn paap trayataap nikandinee ॥
maaheshvaree himaalay nandinee ॥

kaashee puree sada man bhaayee ॥
siddh prshn tehi aapu bagena ॥

bhagavatee dainik bhiksha daatree ॥
krpa raam saneh vidhaatree ॥

ripukshay kaarinee jay jay ambe ॥
vaacha siddh kari avalambe ॥

gauree uma shankaree kaalee ॥
annapoorna jag pratipaalee ॥

sab jan kee eeshvaree bhagavatee ॥
patipraana bhagavaanee satee ॥30 ॥

too kathin tapasya keenee ॥
naarad son jab shiksha leenee ॥

ann na neer na vaayu ahaara ॥
asthi maraatan bhayu gareeb ॥

patr ghaas ko bhojan na bhayau ॥
uma naam tab ho paayau ॥

tap biloki rshi saat padhaare ॥
laage digaavan digee na haare ॥

tab tab jay jay jay uraareu ॥
saptrshi nij geh siddhaareu ॥

sur vishnu paas tab aaen ॥
var dene ke vachan sunae ॥

majhuma var pati tum tinason ॥
chaahat jag tribhuvan nidhi jinson ॥

evamastu kahi te dou gaye ॥
suphal manorath maange ॥

kari vivaah shiv son bhaama ॥
punah kahaay har kee baama ॥

jo padhihai jan yah chaaleesa ॥
dhan jan sukh deihai tehi eesa ॥40 ॥

॥ Doha ॥
kutee chandrika subhag shree,
jayati jayati sukh khaani
paarvatee nij bhakt hit,
rahahu sada bhooshanee ॥

॥ iti shree paarvatee chaaleesa ॥



पार्वती चालीसा के 40 श्लोक विभिन्न पहलुओं को संबोधित करते हैं, जैसे देवी पार्वती की विशेषताएं, उनके दिव्य कार्य, और भक्तों की समस्याओं को दूर करने की उनकी शक्ति। इन श्लोकों में देवी पार्वती की पूजा की विधियाँ, उनके प्रति श्रद्धा और आस्था, और उनकी विशेष कृपा प्राप्त करने के उपाय शामिल हैं।

श्लोक 1-10: देवी पार्वती की महिमा

पहले दस श्लोक देवी पार्वती की दिव्य महिमा का वर्णन करते हैं। इनमें उनकी शक्ति, सौंदर्य, और उनके दिव्य गुणों का विशद विवरण होता है। इन श्लोकों में देवी पार्वती के रूप और स्वरूप की पूजा की जाती है और उनके प्रति भक्ति और सम्मान प्रकट किया जाता है।

श्लोक 11-20: भक्तों की समस्याओं का समाधान

अगले दस श्लोक उन भक्तों के लिए हैं जो देवी पार्वती से व्यक्तिगत समस्याओं का समाधान चाहते हैं। इन श्लोकों में समस्याओं के समाधान के लिए देवी पार्वती से प्रार्थना की जाती है, और उनके आशिर्वाद प्राप्त करने के उपाय बताए जाते हैं।

श्लोक 21-30: पार्वती की विशेष कृपा

इस खंड में, देवी पार्वती की विशेष कृपा और आशीर्वाद प्राप्त करने के उपायों का वर्णन किया गया है। इन श्लोकों में उनकी दया, प्रेम, और भक्ति की शक्ति को समझाया गया है, और उनके आशीर्वाद से जीवन में सुख-समृद्धि की प्राप्ति के तरीके बताए गए हैं।

श्लोक 31-40: आराधना और उपासना की विधियाँ

अंतिम दस श्लोक देवी पार्वती की आराधना और उपासना की विधियों पर केंद्रित हैं। इनमें पूजा की विधि, भजन और आरती का विवरण है, जो भक्तों को सही तरीके से देवी पार्वती की पूजा करने में मदद करता है।

पार्वती चालीसा का पाठ विधि

पार्वती चालीसा का पाठ करने के लिए कुछ विशेष विधियाँ हैं जिन्हें अनुसरण करना चाहिए:

  1. स्नान और स्वच्छता: पूजा करने से पहले स्वच्छता बनाए रखना आवश्यक है। स्नान करें और पवित्र वस्त्र पहनें।
  2. पाठ स्थान की सजावट: एक स्वच्छ स्थान पर देवी पार्वती की तस्वीर या मूर्ति स्थापित करें और उसे फूल, दीपक, और फल अर्पित करें।
  3. शांति और एकाग्रता: पाठ करते समय मन को शांत रखें और पूरी एकाग्रता के साथ चालीसा का पाठ करें।
  4. पाठ विधि: चालीसा को अपने स्वर में पढ़ें और हर श्लोक को ध्यानपूर्वक समझते हुए पाठ करें।
  5. आरती और भजन: पाठ समाप्त करने के बाद देवी पार्वती की आरती करें और भजन गाएँ।

पार्वती चालीसा का महत्व

पार्वती चालीसा का पाठ भक्तों के जीवन में अनेक प्रकार की भौतिक और आध्यात्मिक लाभ प्रदान करता है:

स्वास्थ्य लाभ: स्वास्थ्य समस्याओं से निपटने के लिए देवी पार्वती की पूजा से लाभ होता है।

मन की शांति: नियमित पाठ करने से मानसिक शांति प्राप्त होती है और तनाव दूर होता है।

सुख और समृद्धि: देवी पार्वती की कृपा से जीवन में सुख और समृद्धि प्राप्त होती है।

परिवार में Harmony: पार्वती चालीसा के पाठ से पारिवारिक जीवन में शांति और सामंजस्य बना रहता है।


पार्वती चालीसा के लाभ

पार्वती चालीसा (Parvati Chalisa Pdf) हिंदू धर्म में एक महत्वपूर्ण और आध्यात्मिक ग्रंथ है, जो देवी पार्वती की महिमा और उपासना के लिए रचा गया है। इसे पढ़ने और सुनने से अनेक लाभ होते हैं, जिनका उल्लेख इस लेख में किया जाएगा।

मानसिक शांति और ध्यान:

पार्वती चालीसा का नियमित पाठ करने से मानसिक शांति प्राप्त होती है। इसे पढ़ते समय व्यक्ति ध्यानमग्न हो जाता है और उसका मन शांत हो जाता है। इससे तनाव और चिंता में कमी आती है और मानसिक संतुलन बना रहता है।

आध्यात्मिक उन्नति:

पार्वती चालीसा का पाठ करने से व्यक्ति की आध्यात्मिक उन्नति होती है। यह चालीसा देवी पार्वती की महिमा का गुणगान करती है, जिससे भक्त के हृदय में भक्ति और श्रद्धा का संचार होता है। इससे आत्मज्ञान और आत्मविकास की प्राप्ति होती है।

समस्याओं का समाधान:

पार्वती चालीसा का नियमित पाठ करने से जीवन की विभिन्न समस्याओं का समाधान मिलता है। देवी पार्वती को संकटमोचक माना जाता है, और उनकी कृपा से भक्त के जीवन की कठिनाइयाँ दूर होती हैं। आर्थिक, स्वास्थ्य, पारिवारिक या किसी भी प्रकार की समस्या हो, पार्वती चालीसा का पाठ करने से समाधान मिल सकता है।

सकारात्मक ऊर्जा:

पार्वती चालीसा का पाठ करने से सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह होता है। यह चालीसा सकारात्मक विचारों और भावनाओं का संचार करती है, जिससे व्यक्ति का आत्मविश्वास बढ़ता है और उसे जीवन में सफलता प्राप्त होती है।

कुटुंब में सुख-शांति:

पार्वती चालीसा का नियमित पाठ करने से परिवार में सुख-शांति बनी रहती है। देवी पार्वती को गृहलक्ष्मी माना जाता है, और उनकी उपासना से घर में शांति और समृद्धि का वास होता है। परिवार के सदस्य एक दूसरे के प्रति प्रेम और सम्मान का भाव रखते हैं।

मनोकामनाओं की पूर्ति:

पार्वती चालीसा का पाठ करने से भक्त की मनोकामनाएँ पूरी होती हैं। देवी पार्वती को वरदायिनी माना जाता है, और उनकी कृपा से भक्त की सभी इच्छाएँ पूरी होती हैं। चाहे वह विवाह, संतान, नौकरी या किसी भी अन्य इच्छा की पूर्ति हो, पार्वती चालीसा का पाठ करने से वह पूरी हो सकती है।

स्वास्थ्य लाभ:

पार्वती चालीसा का पाठ करने से स्वास्थ्य लाभ भी होता है। देवी पार्वती को औषधियों की देवी माना जाता है, और उनकी कृपा से शारीरिक और मानसिक रोगों से मुक्ति मिलती है। नियमित रूप से पार्वती चालीसा का पाठ करने से रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है और व्यक्ति स्वस्थ रहता है।

आत्मबल और धैर्य:

पार्वती चालीसा का पाठ करने से आत्मबल और धैर्य की प्राप्ति होती है। यह चालीसा देवी पार्वती की अपार शक्ति और धैर्य का गुणगान करती है, जिससे भक्त में भी ये गुण उत्पन्न होते हैं। इससे वह जीवन की कठिनाइयों का सामना साहस और धैर्य के साथ कर पाता है।

अध्यात्मिक संबंध:

पार्वती चालीसा का पाठ करने से देवी पार्वती के साथ भक्त का गहरा आध्यात्मिक संबंध स्थापित होता है। इससे भक्त को देवी की कृपा और आशीर्वाद की प्राप्ति होती है, जिससे उसका जीवन सुखमय और सफल होता है।

नकारात्मक शक्तियों से रक्षा:

पार्वती चालीसा का पाठ करने से नकारात्मक शक्तियों से रक्षा होती है। देवी पार्वती को शक्ति और सुरक्षा की देवी माना जाता है, और उनकी कृपा से भक्त सभी प्रकार की नकारात्मक शक्तियों और बुरी दृष्टि से सुरक्षित रहता है।


1. पार्वती का मंत्र क्या है?

पार्वती माता का एक प्रसिद्ध मंत्र है:
“ॐ ह्रीं क्लीं महादुर्गायै नमः”
इस मंत्र का जाप करने से देवी पार्वती की कृपा प्राप्त होती है। यह मंत्र उनके शक्ति रूप, महादुर्गा, की स्तुति करता है। पार्वती का यह मंत्र साधकों को शक्ति, साहस, और आंतरिक शांति प्रदान करता है। इसके नियमित जाप से भक्तों को मानसिक शांति और संकटों से मुक्ति मिलती है। विशेष रूप से, यदि कोई व्यक्ति जीवन में कठिनाइयों या समस्याओं का सामना कर रहा हो, तो इस मंत्र का जाप करना शुभ माना जाता है। इस मंत्र के साथ एकाग्रता और भक्ति का होना अनिवार्य है, क्योंकि पार्वती जी भक्तों की सच्ची श्रद्धा से प्रसन्न होती हैं। जाप के दौरान मन को शांत रखना और नियमित रूप से देवी की उपासना करना आवश्यक होता है। पार्वती माता के मंत्र का जाप किसी भी शुभ अवसर, विशेष पूजा, या रोजमर्रा के जीवन में किया जा सकता है।

2. पार्वती देवी को खुश कैसे करें?

पार्वती देवी को खुश करने के लिए सच्चे मन से उनकी पूजा और भक्ति करनी चाहिए। उनकी कृपा पाने के लिए भक्त को विनम्रता और श्रद्धा के साथ उनके नामों का जप करना चाहिए। नियमित रूप से शिव-पार्वती की पूजा करने से देवी पार्वती प्रसन्न होती हैं। उन्हें लाल फूल, खासकर कमल और गुड़हल, अर्पित करना बहुत शुभ माना जाता है। विशेष रूप से, सोमवार का दिन देवी पार्वती की पूजा के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि यह दिन उनके पति भगवान शिव को समर्पित है। पार्वती माता को सोलह श्रृंगार प्रिय हैं, इसलिए पूजा के दौरान उन्हें सुहाग का सामान, जैसे चूड़ियां, सिंदूर, और बिंदी, अर्पित करने से वह प्रसन्न होती हैं। इसके साथ ही, माता पार्वती को प्रसन्न करने के लिए नियमित रूप से शिव चालीसा या दुर्गा चालीसा का पाठ करना भी शुभ माना जाता है।

3. पार्वती जी को क्या पसंद है?

पार्वती जी को सोलह श्रृंगार और महिलाओं का सौंदर्य प्रतीक बहुत प्रिय है। उन्हें लाल रंग के वस्त्र, चूड़ियां, सिंदूर, और बिंदी विशेष रूप से पसंद हैं। पार्वती माता को लाल फूल, जैसे कि गुड़हल और कमल, अर्पित करना बहुत शुभ माना जाता है। उन्हें दूध और शहद से बनी मिठाइयां भी अर्पित की जाती हैं। इसके अलावा, माता पार्वती को बेलपत्र और कुमकुम भी चढ़ाया जा सकता है। उनकी आराधना में शिवलिंग पर जल और दूध अर्पित करना भी विशेष फलदायी माना जाता है। माता पार्वती को सुहाग का प्रतीक, जैसे कि लाल चूड़ियां, चुनरी, और सिंदूर, अर्पित करने से वह विशेष रूप से प्रसन्न होती हैं और अपने भक्तों को समृद्धि और सौभाग्य का आशीर्वाद देती हैं। उनके प्रिय भोगों में खीर, मिठाई, और फल शामिल होते हैं।

4. पार्वती का असली रूप क्या है?

पार्वती देवी का असली रूप एक करुणामयी, मातृस्वरूपा देवी के रूप में है, जो सृष्टि की शक्ति और पालनकर्ता हैं। वह प्रेम, करुणा, और सौंदर्य की देवी मानी जाती हैं, लेकिन उनके कई रूप और अवतार भी हैं। देवी पार्वती का सबसे शांत और सौम्य रूप “गौरी” के रूप में प्रसिद्ध है, जहां उन्हें स्नेह, ममता और परिवार का प्रतीक माना जाता है। इसके विपरीत, उनके उग्र और शक्तिशाली रूपों में “दुर्गा” और “काली” भी शामिल हैं, जो दुष्टों का नाश करती हैं और अपने भक्तों की रक्षा करती हैं। पार्वती को शक्ति का प्रतीक माना जाता है, जो भगवान शिव की अर्धांगिनी हैं और सृजन, पालन, और विनाश की शक्ति को संतुलित करती हैं। उनका सौम्य और उग्र रूप दोनों ही जीवन के विभिन्न पहलुओं को दर्शाते हैं, जिससे वे मातृशक्ति और युद्ध की देवी दोनों के रूप में पूजी जाती हैं।

5. पार्वती के 108 नाम कौन से हैं?

पार्वती देवी के 108 नाम उनके विभिन्न गुणों, शक्तियों और रूपों को दर्शाते हैं। इन नामों में से कुछ प्रमुख नाम हैं: शिवामहेश्वरीगौरीदुर्गाकालीशिवप्रियाशिवाननीसतीअंबिकाचंडीजगदंबाकात्यायनीभवानीउमा, और शैलपुत्री। पार्वती के 108 नाम उनके विविध स्वरूपों को प्रतिबिंबित करते हैं और हर नाम उनकी महिमा और शक्ति का परिचायक है। प्रत्येक नाम उनकी विभिन्न भूमिकाओं को व्यक्त करता है, जैसे कि प्रेममयी माता, शक्ति का अवतार, और विनाशकारी शक्ति। इन नामों के जप से भक्तों को आंतरिक शांति, सुख, और समृद्धि प्राप्त होती है। पार्वती के विभिन्न नाम उनके भक्तों के लिए उनकी असीम कृपा और शक्ति का प्रतीक हैं।

6. पार्वती की जाति क्या है?

पार्वती देवी को पौराणिक कथाओं में एक राजकुमारी के रूप में वर्णित किया गया है, जो हिमालय के राजा हिमावन और रानी मैना की पुत्री थीं। इसलिए, पार्वती का संबंध एक राजपरिवार से है, और उनका जन्म एक क्षत्रिय परिवार में हुआ था। उनका विवाह भगवान शिव से हुआ, जो तपस्वी और सृष्टि के विनाशकर्ता हैं। पार्वती का जीवन और उनके विभिन्न रूप, जैसे सती, दुर्गा, और काली, यह दर्शाते हैं कि वह समाज में हर वर्ग और जाति से ऊपर हैं। उन्हें माता के रूप में सभी जातियों और समाजों में समान रूप से पूजा जाता है। पार्वती देवी शक्ति और प्रेम की प्रतीक हैं, जो जाति और वर्ग की सीमाओं से परे हैं। उनकी पूजा हर वर्ग के लोग श्रद्धा और भक्ति से करते हैं, और उन्हें सृष्टि की शक्ति और पालनहार माना जाता है।


Saraswati Chalisa PDF – सरस्वती चालीसा हिंदी में PDF 2024-25

सरस्वती चालीसा (Saraswati Chalisa Pdf) एक भक्ति स्तोत्र है जो माँ सरस्वती को समर्पित है। माँ सरस्वती, जिन्हें विद्या, कला, संगीत और ज्ञान की देवी माना जाता है, को इस चालीसा के माध्यम से भक्तों द्वारा प्रशंसा किया जाता है। सरस्वती चालीसा माँ सरस्वती की कृपा, उनकी दिव्यता, और उनके आशीर्वाद का वर्णन करती है। दुर्गा चालीसा के लिए क्लिक करें रिद्धि सिद्धि के दाता सुनो गणपति 

यह चालीसा उन भक्तों के लिए विशेष महत्व रखती है जो विद्या, शिक्षा और कला में अपने जीवन को समर्पित करते हैं। सरस्वती चालीसा के पाठ से भक्तों को बुद्धि, विचारशीलता, और कला के क्षेत्र में सफलता प्राप्त होती है। आप लक्ष्मी चालीसा के लिए क्लिक करें| इस चालीसा में माँ सरस्वती की महिमा, उनके विभिन्न रूपों, और उनके द्वारा की गई विभिन्न लीलाओं का वर्णन किया गया है। सरस्वती चालीसा का पाठ करने से भक्तों का मन शांत होता है, उन्हें बुद्धि की प्राप्ति होती है और वे अपने जीवन में सफलता की ओर अग्रसर होते हैं।

सरस्वती चालीसा को विशेष अवसरों पर जैसे वसंत पंचमी, विद्या प्राप्ति के शुभ मुहूर्त में और परीक्षा के समय पढ़ा जाता है, जिससे भक्तों को विद्या और बुद्धि के अनुग्रह से लाभ मिलता है। आप शनि चालीसा | Hanuman Chalisa MP3 Download के लिए क्लिक करें


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|| सरस्वती देवी चालीसा ||

सरस्वती चालीसा हिंदी में PDF

॥ दोहा ॥
जनक जननि पद्मरज,
निज मस्तक पर धरि ।
बन्दौं मातु सरस्वती,
बुद्धि बल दे दातारि ॥

पूर्ण जगत में व्याप्त तव,
महिमा अमित अनंतु।
दुष्जनों के पाप को,
मातु तु ही अब हन्तु ॥

॥ चालीसा ॥
जय श्री सकल बुद्धि बलरासी ।
जय सर्वज्ञ अमर अविनाशी ॥

जय जय जय वीणाकर धारी ।
करती सदा सुहंस सवारी ॥

रूप चतुर्भुज धारी माता ।
सकल विश्व अन्दर विख्याता ॥4॥

जग में पाप बुद्धि जब होती ।
तब ही धर्म की फीकी ज्योति ॥

तब ही मातु का निज अवतारी ।
पाप हीन करती महतारी ॥

वाल्मीकिजी थे हत्यारा ।
तव प्रसाद जानै संसारा ॥

रामचरित जो रचे बनाई ।
आदि कवि की पदवी पाई ॥8॥

कालिदास जो भये विख्याता ।
तेरी कृपा दृष्टि से माता ॥

तुलसी सूर आदि विद्वाना ।
भये और जो ज्ञानी नाना ॥

तिन्ह न और रहेउ अवलम्बा ।
केव कृपा आपकी अम्बा ॥

करहु कृपा सोइ मातु भवानी ।
दुखित दीन निज दासहि जानी ॥12॥

पुत्र करहिं अपराध बहूता ।
तेहि न धरई चित माता ॥

राखु लाज जननि अब मेरी ।
विनय करउं भांति बहु तेरी ॥

मैं अनाथ तेरी अवलंबा ।
कृपा करउ जय जय जगदंबा ॥

मधुकैटभ जो अति बलवाना ।
बाहुयुद्ध विष्णु से ठाना ॥16॥

समर हजार पाँच में घोरा ।
फिर भी मुख उनसे नहीं मोरा ॥

मातु सहाय कीन्ह तेहि काला ।
बुद्धि विपरीत भई खलहाला ॥

तेहि ते मृत्यु भई खल केरी ।
पुरवहु मातु मनोरथ मेरी ॥

चंड मुण्ड जो थे विख्याता ।
क्षण महु संहारे उन माता ॥20॥

रक्त बीज से समरथ पापी ।
सुरमुनि हदय धरा सब काँपी ॥

काटेउ सिर जिमि कदली खम्बा ।
बारबार बिन वउं जगदंबा ॥

जगप्रसिद्ध जो शुंभनिशुंभा ।
क्षण में बाँधे ताहि तू अम्बा ॥

भरतमातु बुद्धि फेरेऊ जाई ।
रामचन्द्र बनवास कराई ॥24॥

एहिविधि रावण वध तू कीन्हा ।
सुर नरमुनि सबको सुख दीन्हा ॥

को समरथ तव यश गुन गाना ।
निगम अनादि अनंत बखाना ॥

विष्णु रुद्र जस कहिन मारी ।
जिनकी हो तुम रक्षाकारी ॥

रक्त दन्तिका और शताक्षी ।
नाम अपार है दानव भक्षी ॥28॥

दुर्गम काज धरा पर कीन्हा ।
दुर्गा नाम सकल जग लीन्हा ॥

दुर्ग आदि हरनी तू माता ।
कृपा करहु जब जब सुखदाता ॥

नृप कोपित को मारन चाहे ।
कानन में घेरे मृग नाहे ॥

सागर मध्य पोत के भंजे ।
अति तूफान नहिं कोऊ संगे ॥32॥

भूत प्रेत बाधा या दुःख में ।
हो दरिद्र अथवा संकट में ॥

नाम जपे मंगल सब होई ।
संशय इसमें करई न कोई ॥

पुत्रहीन जो आतुर भाई ।
सबै छांड़ि पूजें एहि भाई ॥

करै पाठ नित यह चालीसा ।
होय पुत्र सुन्दर गुण ईशा ॥36॥

धूपादिक नैवेद्य चढ़ावै ।
संकट रहित अवश्य हो जावै ॥

भक्ति मातु की करैं हमेशा ।
निकट न आवै ताहि कलेशा ॥

बंदी पाठ करें सत बारा ।
बंदी पाश दूर हो सारा ॥

रामसागर बाँधि हेतु भवानी ।
कीजै कृपा दास निज जानी ॥40॥

॥दोहा॥
मातु सूर्य कान्ति तव,
अन्धकार मम रूप ।
डूबन से रक्षा करहु,
परूँ न मैं भव कूप ॥

बलबुद्धि विद्या देहु मोहि,
सुनहु सरस्वती मातु ।
राम सागर अधम को,
आश्रय तू ही देदातु ॥

Saraswati Chalisa PDF In English

॥ Doha ॥
Jan Janani Padmaraaj,
Nij Mastak Par Dhari ॥
Bandaun Maatu Sarasvatee,
Buddhi Bal De Daataari ॥

Poorn Jagat Mein Vyaapt Teevee,
Mahima Amit Anantu ॥
Dushjanon Ke Paap Ko,
Maatu Tu Hee Ab Hantu ॥

॥ Chalisa ॥
Jay Shree Sakal Buddhi Balaraasee ॥
Jay Sarvagy Amar Avinaashee

Jay Jay Jay Veenaakar Dhaaree ॥
Sada Suhans Savaaree Detee Hai ॥

Roop Chaturbhuj Dhaaree Maata ॥
Sakal Vishv Svaamitv Sangrahaalay ॥4 ॥

Jag Mein Paap Buddhi Jab Hotee Hai ॥
Tab Hee Dharm Kee Pheekee Jyoti ॥

Tab Hee Maatu Ka Nij Avataar ॥
Paap Heen Dat Mahataaree ॥

Vaalmikee The Hatyaare ॥
Tav Prasaad Jaanai Sansaara ॥

Raamacharitr Jo Rache ॥
Aadi Kavi Kee Padavee Paee ॥8 ॥

Kaalidaas Jo Bhaye Saakshaat ॥
Teree Krpa Drshti Se Maata ॥

Tulasee Soor Aadi Vidvaan ॥
Bhaye Aur Jo Gyaanee Naana ॥

Tinh Na Aur Rahau Avalamba ॥
Kev Krpa Aapakee Amba ॥

Karahu Krpa Soi Maatu Bhavaanee ॥
Dukhit Deen Nij Dasahi Jini ॥12 ॥

Putr Karahin Aparaadh Bahuta ॥
Tehi Na Dharai Chit Maata ॥

Raakhu Laaj Jananee Ab Meree ॥
Vin Karaun Bahu Teree ॥

Main Anaath Tera Avalamba ॥
Krpa Karau Jay Jay Jagabaanba ॥

Madhukaitabh Jo Ati Balavaana ॥
Bahupatnee Vishnu Se Thaana ॥16 ॥

Samar Hajaar Paanch Mein Ghora ॥
Phir Bhee Mukh Hamaara Nahin Mora ॥

Maatu Sahaayata Keenh Tehi Kaala ॥
Buddhi Vipareet Bhee Khalahala ॥

Tehi Te Mrtyu Bhee Khal Keree ॥
Poorvahu Maatu Manorath Meree ॥

Chaand Mund Jo The ॥
Kshan Mahu Sanhaare Un Maata ॥20 ॥

Rakt Beej Se Samarath Paapee ॥
Suramuni Haday Dhara Sab Kaanpi ॥

Kateoo Sir Jimee Kadalee Khamba ॥
Baarabaar Bin Vaun Jagabaaba ॥

Jagaprasiddh Jo Shumbhanishumbha ॥
Kshan Mein Bache Taahi Too Amba ॥

Bhaaratamaatu Buddhi Phireu Jay ॥
Raamachandr Banavaas Karai ॥24 ॥

Ehividhi Raavan Vadh Too Keenha ॥
Sur Naragunee Bosik Sukh Deenha ॥

Ko Samarath Tav Yash Gun Gaana ॥
Nigam Anaadi Anant Bakhaana ॥

Vishnu Rudr Jas Kahin Maaree ॥
Proto Ho Tum Rakshaakaaree ॥

Rakt Dantika Aur Shataakshee ॥
Naam Apaar Hai Daanav Bhakshee ॥28 ॥

Durgam Kaaj Dhara Par Keenha ॥
Durga Naam Sakal Jag Leenha ॥

Durg Aadi Haranee Too Maata ॥
Krpa Karahu Jab Jab Sukhadaata ॥

Nrp Kopit Ko Maaran Kan ॥
Kaanan Mein Avelebal Mrg Naahe ॥

Saagar Madhy Pot Ke Bhaanje ॥
Ati Toofaan Nahin Kou Sange ॥32 ॥

Bhoot Pret Baadha Ya Duhkh Mein ॥
Ho Daridr Ya Sankat Mein ॥

Naam Jape Mangal Sab Hoee ॥
Sanshay Karai Isamen Na Koee ॥

Putrahin Jo Aatur Bhaee ॥
Sabai Chandee Poojane Ehi Bhaee ॥

Karai Paath Nit Yah Chalisa ॥
Hoy Putr Sundar Gun Eesha ॥36 ॥

Dhoopaadik Naivedy Chadavai ॥
Sankat Anivaary Ho Jaavai ॥

Bhakti Maatu Kee Karan Sada ॥
Nikat Na Aavai Taahi Kalesha ॥

Bandee Paath Karen Sat Baara ॥
Bandee Paash Door Ho Saara ॥

Raamasaagar Raavee Hai Bhavaanee ॥
Keejai Krpa Daas Nij Jaanee ॥40 ॥

॥Doha ॥
Maatu Soory Kaanti Tav,
Andhakaar Mam Roop ॥
Dooban Se Raksha Karahu,
Parun Na Main Bhav Koop ॥

Balabuddhi Vidya Dehu Mohi,
Sunahu Sarasvatee Maatu ॥
Raam Saagar Adham Ko,
Sharan Tu Hi Dedaatu ॥



सरस्वती ज्ञान, संगीत, कला, बुद्धि और शिक्षा की हिंदू देवी हैं। वह सरस्वती, लक्ष्मी और पार्वती की त्रिमूर्ति का हिस्सा हैं। यह त्रिमूर्ति क्रमशः ब्रह्मा, विष्णु और महेश को ब्रह्मांड की सृष्टि, पालन और संहार (पुनर्जीवन) में सहायता करती है। देवी भागवत के अनुसार, देवी सरस्वती भगवान ब्रह्मा की पत्नी हैं। उनका निवास ब्रह्मपुर में है, जो भगवान ब्रह्मा का निवास स्थान है। भगवान ब्रह्मा, जो सृष्टि के रचयिता हैं, ने देवी सरस्वती की भी रचना की थी। इसलिए उन्हें भगवान ब्रह्मा की पुत्री भी कहा जाता है। देवी सरस्वती को देवी सावित्री और देवी गायत्री के नाम से भी जाना जाता है।

देवी सरस्वती को सफेद वस्त्र धारण किए हुए, एक कमल पर या हंस पर विराजमान दिखाया जाता है, जो उनकी शुद्धता और ज्ञान का प्रतीक है। उनके चार हाथ होते हैं, जिनमें वीणा, पुस्तक, माला और एक हाथ वरदान मुद्रा में होता है। वीणा संगीत और कला का प्रतीक है, जबकि पुस्तक ज्ञान और शिक्षा का। माला आध्यात्मिकता और ध्यान का प्रतीक है, और वरदान मुद्रा उनके भक्तों को ज्ञान प्रदान करने की उनकी कृपा को दर्शाती है।

वसंत पंचमी, जिसे सरस्वती पूजा के रूप में भी जाना जाता है, देवी सरस्वती को समर्पित त्योहार है। इस दिन छात्र, कलाकार और संगीत प्रेमी विशेष पूजा करते हैं ताकि वे देवी की कृपा से ज्ञान और कौशल प्राप्त कर सकें। देवी सरस्वती की पूजा विशेष रूप से शिक्षा के क्षेत्र में की जाती है, क्योंकि वह विद्या और बुद्धि की देवी मानी जाती हैं।


भगवती सरस्वती का जन्म भगवान ब्रह्मा के मुख से हुआ था। इसलिए वह वाणी की देवी बनीं, जिसमें संगीत और ज्ञान भी शामिल है। ऐसा माना जाता है कि भगवान ब्रह्मा देवी सरस्वती की सुंदरता से इतने प्रभावित हुए कि उन्होंने उनसे विवाह करने की इच्छा व्यक्त की, और कई धार्मिक ग्रंथों में देवी सरस्वती को भगवान ब्रह्मा की पत्नी के रूप में वर्णित किया गया है।

भगवान ब्रह्मा, जो देवी सरस्वती के पति हैं, को “वागीश” के नाम से भी जाना जाता है, जिसका अर्थ है “वाणी और ध्वनि के स्वामी”। चूंकि देवी सरस्वती ज्ञान और वाणी की देवी मानी जाती हैं, इसलिए भगवान ब्रह्मा का यह नाम उनके साथ के प्रतीक के रूप में महत्वपूर्ण है।

देवी सरस्वती के परिवार का धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टिकोण से विशेष महत्व है। देवी सरस्वती और भगवान ब्रह्मा का संबंध न केवल सृजन और ज्ञान का प्रतीक है, बल्कि उनके द्वारा प्रदत्त वाणी और संगीत ब्रह्मांड में सामंजस्य और सृजनात्मक ऊर्जा के प्रवाह को दर्शाते हैं। देवी सरस्वती के उपासक उनकी कृपा से वाणी, संगीत और विद्या में प्रवीणता प्राप्त करने की प्रार्थना करते हैं। उनके परिवार को इस प्रकार एक आदर्श और संतुलन का प्रतीक माना जाता है, जहाँ सृजन और ज्ञान साथ-साथ चलते हैं।


देवी सरस्वती को एक सुंदर महिला के रूप में चित्रित किया जाता है, जो शुद्ध सफेद वस्त्र धारण किए हुए होती हैं और उनका चेहरा शांत और सौम्य होता है। अधिकांश चित्रों में उन्हें खिले हुए सफेद कमल पर बैठकर वीणा बजाते हुए दिखाया गया है। उनके साथ अक्सर एक हंस और एक मोर भी चित्रित होते हैं, और कुछ चित्रों में उन्हें हंस पर सवार होते हुए भी दिखाया गया है।

देवी सरस्वती के चार हाथ होते हैं। उनके दो हाथों में माला और पुस्तक होती है, जो क्रमशः ध्यान और ज्ञान का प्रतीक हैं, जबकि शेष दो हाथों से वह वीणा बजाती हैं, जो संगीत और कला का प्रतीक है। उनकी वीणा से निकली ध्वनि संसार में संगीत, लय और सौंदर्य का संचार करती है।

सफेद रंग, कमल, हंस और मोर सभी देवी सरस्वती के प्रतीक हैं, जो शुद्धता, विवेक और ज्ञान को दर्शाते हैं। हंस को विवेक और ज्ञान का प्रतीक माना जाता है, क्योंकि यह दूध और पानी को अलग करने की क्षमता रखता है। इसी तरह, मोर सौंदर्य, प्रेम और काव्यात्मकता का प्रतीक है, जो कला के प्रति समर्पण को दर्शाता है। सफेद कमल पर बैठी देवी सरस्वती इस बात की प्रतीक हैं कि सत्य और ज्ञान, संसार के सभी प्रकार के अशुद्धियों से परे होते हैं।

देवी सरस्वती की प्रतिमा और प्रतीकात्मकता उनके ज्ञान, कला, संगीत और शुद्धता के प्रति गहरे संबंध को दर्शाते हैं। उनकी पूजा विद्या, संगीत और कला के साधकों द्वारा की जाती है, ताकि वे जीवन के हर क्षेत्र में उनकी कृपा और आशीर्वाद प्राप्त कर सकें।


या कुन्देन्दुतुषारहारधवला या शुभ्रवस्त्रावृता
या वीणावरदण्डमण्डितकरा या श्वेतपद्मासना।
या ब्रह्माच्युत शंकरप्रभृतिभिर्देवैः सदा वन्दिता
सा मां पातु सरस्वती भगवती निःशेषजाड्यापहा॥१॥

शुक्लां ब्रह्मविचार सार परमामाद्यां जगद्व्यापिनीं
वीणा-पुस्तक-धारिणीमभयदां जाड्यान्धकारापहाम्।
हस्ते स्फटिकमालिकां विदधतीं पद्मासने संस्थिताम्
वन्दे तां परमेश्वरीं भगवतीं बुद्धिप्रदां शारदाम्॥२॥


श्री सरस्वती चालीसा PDF

माँ सरस्वती को विद्या, ज्ञान, संगीत और कला की देवी माना जाता है। हिंदू धर्म में विश्वास है कि जब किसी व्यक्ति की वाणी में मधुरता, स्पष्टता और ज्ञान का संचार होता है, तो उसे माँ सरस्वती की कृपा प्राप्त होती है। यह सवाल कि माँ सरस्वती जुबान पर कब आती हैं, आध्यात्मिक दृष्टिकोण से गहरे अर्थ रखता है।

विद्या और ज्ञान के प्रति समर्पण:

माँ सरस्वती का वास उस व्यक्ति की जुबान पर होता है, जो विद्या और ज्ञान के प्रति समर्पित होता है। जब हम सच्ची लगन और श्रद्धा के साथ शिक्षा, ज्ञान, और नई चीज़ों को सीखने की दिशा में आगे बढ़ते हैं, तो माँ सरस्वती की कृपा हम पर होती है। इसके फलस्वरूप व्यक्ति की वाणी में प्रभाव और स्पष्टता आती है, जिससे वह दूसरों को प्रेरित कर सकता है।

सत्य बोलने का अभ्यास:

माँ सरस्वती सत्य और सदाचार की देवी मानी जाती हैं। जब हम सदा सत्य बोलने का अभ्यास करते हैं और अपनी वाणी का उपयोग किसी को आहत करने के बजाय दूसरों की भलाई के लिए करते हैं, तो माँ सरस्वती हमारी जुबान पर आती हैं। वाणी में मधुरता और संतुलन सत्य बोलने से आती है, जिससे व्यक्ति का सामाजिक और व्यक्तिगत जीवन सफल होता है।

आध्यात्मिक साधना और ध्यान:

माँ सरस्वती की कृपा प्राप्त करने के लिए नियमित ध्यान, साधना, और माँ सरस्वती की आराधना करना आवश्यक है। जब हम नियमित रूप से सरस्वती वंदना, सरस्वती चालीसा, या सरस्वती मंत्रों का जाप करते हैं, तो देवी हमारे मन और वाणी को शुद्ध करती हैं। इससे व्यक्ति की सोचने-समझने की शक्ति बढ़ती है, और उसकी वाणी में तेज और गहराई आ जाती है।

मन की शुद्धता:

माँ सरस्वती केवल उन्हीं पर कृपा करती हैं जिनके मन और हृदय शुद्ध होते हैं। जब हम अपने मन से ईर्ष्या, द्वेष, और नकारात्मक भावनाओं को दूर करते हैं और सकारात्मक सोच विकसित करते हैं, तब माँ सरस्वती हमारी जुबान पर आती हैं। शुद्ध मन से की गई प्रार्थना और ध्यान माँ सरस्वती को शीघ्र प्रसन्न करता है और उनकी कृपा से व्यक्ति की वाणी में दिव्यता का संचार होता है।

कला और संगीत में साधना:

माँ सरस्वती संगीत और कला की देवी भी हैं। संगीत, कविता, लेखन, या किसी भी कला रूप में संलग्न व्यक्ति जब पूरी निष्ठा और साधना के साथ अपनी कला में समर्पित होता है, तो माँ सरस्वती उसकी जुबान पर आती हैं। कला के क्षेत्र में सिद्धि प्राप्त करने के लिए देवी की कृपा अत्यंत महत्वपूर्ण है।

अंततः, माँ सरस्वती तब जुबान पर आती हैं जब व्यक्ति सच्चे दिल से ज्ञान की खोज करता है, सत्य का पालन करता है, और अपनी वाणी और कर्मों को दूसरों की भलाई के लिए समर्पित करता है। जब हमारी वाणी से केवल प्रेम, ज्ञान, और सकारात्मकता का संचार होता है, तब माँ सरस्वती की कृपा प्राप्त होती है।


Saraswati Chalisa Lyrics in Hindi Image


सरस्वती चालीसा के लाभ

सरस्वती चालीसा एक महत्वपूर्ण हिन्दू स्तोत्र है, जो देवी सरस्वती को समर्पित है। देवी सरस्वती ज्ञान, कला, संगीत और शिक्षा की देवी मानी जाती हैं। यह चालीसा 40 श्लोकों (चालीसा) के रूप में होती है और इसे पढ़ने या सुनने से कई लाभ होते हैं। यहाँ पर इसके लाभों को विस्तार से समझाया गया है:

ज्ञान और बुद्धि में वृद्धि

सरस्वती चालीसा का नियमित पाठ करने से व्यक्ति की ज्ञान और बुद्धि में वृद्धि होती है। देवी सरस्वती को ज्ञान की देवी माना जाता है, इसलिए इस चालीसा के पाठ से ज्ञान के प्रति जागरूकता बढ़ती है और बुद्धिमत्ता में सुधार होता है। यह विशेष रूप से विद्यार्थियों और उन लोगों के लिए लाभकारी है, जो शिक्षा और अध्ययन में सुधार चाहते हैं।

शिक्षा में सफलता

चालीसा का पाठ छात्रों और शिक्षार्थियों को शिक्षा में सफलता प्राप्त करने में मदद करता है। देवी सरस्वती की कृपा से कठिन विषयों को समझने और याद करने में आसानी होती है, और परीक्षा में अच्छे अंक प्राप्त करने की संभावना बढ़ जाती है।

सृजनात्मकता में सुधार

सरस्वती देवी कला, संगीत, और साहित्य की देवी हैं। इसलिए, इस के पाठ से व्यक्ति की सृजनात्मकता में सुधार होता है। कला, संगीत, लेखन, और अन्य सृजनात्मक क्षेत्रों में उन्नति के लिए यह एक शक्तिशाली साधन है।

भय और चिंताओं से मुक्ति

सरस्वती चालीसा का पाठ मानसिक शांति और स्थिरता प्रदान करता है। यह भय, चिंताओं और तनाव को कम करने में मदद करता है। जब व्यक्ति देवी सरस्वती की उपासना करता है, तो उसकी आंतरिक शक्ति और आत्मविश्वास में वृद्धि होती है, जिससे जीवन की समस्याओं का सामना करना आसान हो जाता है।

आध्यात्मिक विकास

सरस्वती चालीसा का नियमित पाठ आध्यात्मिक विकास को प्रोत्साहित करता है। यह व्यक्ति को आत्मज्ञान प्राप्त करने और मानसिक शांति पाने में मदद करता है। आध्यात्मिक अभ्यास से व्यक्ति का जीवन अधिक संतुलित और पूर्ण बनता है।

सकारात्मक ऊर्जा का संचार

चालीसा का पाठ सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है। देवी सरस्वती की उपासना से घर और परिवेश में सकारात्मक वाइब्स उत्पन्न होती हैं, जो मानसिक और भावनात्मक रूप से व्यक्ति को सशक्त बनाती हैं। इससे नकारात्मकता कम होती है और जीवन में सकारात्मकता बढ़ती है।

भौतिक और मानसिक कठिनाइयों में सुधार

सरस्वती चालीसा का पाठ मानसिक और भौतिक कठिनाइयों को दूर करने में मदद करता है। यह विभिन्न बाधाओं और समस्याओं का समाधान प्रदान करता है और जीवन की समस्याओं को पार करने के लिए सहायता करता है।

आय और धन की प्राप्ति

इस चालीसा का नियमित पाठ करने से धन और समृद्धि में वृद्धि हो सकती है। देवी सरस्वती की कृपा से व्यापार और आर्थिक गतिविधियों में सफलता प्राप्त होती है और धन संबंधी समस्याओं का समाधान होता है।

स्वास्थ्य में सुधार

सरस्वती चालीसा का पाठ स्वास्थ्य में सुधार लाने में भी सहायक हो सकता है। मानसिक शांति और तनाव में कमी के कारण शारीरिक स्वास्थ्य पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ता है।

कर्मों का प्रभाव

सरस्वती चालीसा का पाठ व्यक्ति के कर्मों को शुद्ध करने में मदद करता है। यह व्यक्ति को अच्छे कर्म करने के लिए प्रेरित करता है और बुरे कर्मों से बचने की प्रेरणा देता है। इससे जीवन में नैतिक और आध्यात्मिक विकास होता है।

संबंधों में सुधार

इस चालीसा के पाठ से परिवार और मित्रों के साथ संबंधों में सुधार होता है। देवी सरस्वती की कृपा से पारिवारिक जीवन में सुख और शांति बनी रहती है, और रिश्तों में सामंजस्य और समझ बढ़ती है।

आत्मसंतोष और खुशी

सरस्वती चालीसा Pdf का पाठ आत्मसंतोष और खुशी में वृद्धि करता है। यह व्यक्ति को मानसिक शांति और स्थिरता प्रदान करता है, जिससे जीवन में संतोष और खुशी बनी रहती है।

कठिनाइयों से पार पाने की शक्ति

चालीसा का पाठ कठिनाइयों और चुनौतियों से पार पाने की शक्ति प्रदान करता है। देवी सरस्वती की कृपा से व्यक्ति में संघर्ष की क्षमता और आत्मविश्वास बढ़ता है, जो जीवन की कठिन परिस्थितियों का सामना करने में सहायक होता है।

भक्ति और श्रद्धा में वृद्धि

सरस्वती चालीसा Pdf का नियमित पाठ व्यक्ति के भक्ति और श्रद्धा में वृद्धि करता है। देवी सरस्वती के प्रति समर्पण और भक्ति का भाव व्यक्ति के जीवन को सकारात्मक दिशा में ले जाता है।

सकारात्मक मानसिक दृष्टिकोण

इस चालीसा का पाठ व्यक्ति की मानसिक दृष्टिकोण को सकारात्मक बनाता है। इससे आत्मविश्वास और आशा की भावना बढ़ती है, जो जीवन में सकारात्मक परिणाम प्राप्त करने में सहायक होती है।

स्वाध्याय और आत्मविकास

सरस्वती चालीसा का पाठ स्वाध्याय और आत्मविकास में मदद करता है। यह व्यक्ति को अपने भीतर छिपी हुई शक्तियों और क्षमताओं को पहचानने और उन्हें विकसित करने में सहायता करता है।

पारिवारिक सुख और समृद्धि

चालीसा का पाठ परिवार की सुख-समृद्धि और सामंजस्य को बढ़ावा देता है। देवी सरस्वती की कृपा से परिवार में सुख-शांति बनी रहती है और आपसी संबंध मजबूत होते हैं।

सकारात्मक प्रभाव का प्रसार

सरस्वती चालीसा का पाठ समाज और समुदाय में सकारात्मक प्रभाव का प्रसार करता है। यह व्यक्ति को सामाजिक जिम्मेदारियों का पालन करने और समाज के उत्थान में योगदान देने के लिए प्रेरित करता है।

सच्चे मार्ग पर चलने की प्रेरणा

इस चालीसा का पाठ व्यक्ति को सच्चे मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। देवी सरस्वती की उपासना से व्यक्ति अपने जीवन के उद्देश्य को पहचानता है और सही दिशा में कदम बढ़ाता है।

संतुलित जीवन की प्राप्ति

सरस्वती चालीसा का नियमित पाठ संतुलित और खुशहाल जीवन की प्राप्ति में सहायक होता है। यह जीवन के विभिन्न पहलुओं को सामंजस्यपूर्ण रूप से प्रबंधित करने में मदद करता है।

इस प्रकार, सरस्वती चालीसा का पाठ विभिन्न रूपों में लाभकारी होता है और व्यक्ति के जीवन को सकारात्मक दिशा में ले जाता है। यह केवल आध्यात्मिक लाभ ही नहीं बल्कि मानसिक, शारीरिक, और भौतिक लाभ भी प्रदान करता है। इसके नियमित पाठ से जीवन में शांति, समृद्धि, और सुख की प्राप्ति होती है।


सरस्वती देवी की चालीसा कब पढ़ना है?

सरस्वती चालीसा को विशेष रूप से वसंत पंचमी, गुरुवार या किसी भी शुभ दिन पढ़ा जा सकता है। इसके अलावा, विद्यार्थियों के लिए यह चालीसा परीक्षा के समय, पढ़ाई की शुरुआत से पहले, या जब भी वे विद्या की प्राप्ति के लिए ध्यान केंद्रित करना चाहते हैं, तब पढ़ना लाभकारी होता है।

सरस्वती मंत्र का जाप कब करना चाहिए?

सरस्वती मंत्र का जाप सूर्योदय के समय या पढ़ाई की शुरुआत से पहले करना बहुत ही शुभ माना जाता है। इसके अलावा, जब भी मानसिक शांति या विद्या की प्राप्ति की आवश्यकता हो, तब सरस्वती मंत्र का जाप किया जा सकता है।

पढ़ने से पहले कौन सा सरस्वती मंत्र बोलना चाहिए?

पढ़ने से पहले “ॐ ऐं सरस्वत्यै नमः” मंत्र का जाप करना चाहिए। इस मंत्र के उच्चारण से बुद्धि तीव्र होती है और विद्या की प्राप्ति में सहायक होती है।

सरस्वती 108 नामों से क्या लाभ है?

सरस्वती देवी के 108 नामों का जाप करने से बुद्धि, ज्ञान और विवेक की वृद्धि होती है। यह जाप मानसिक शांति, ध्यान और एकाग्रता को बढ़ाता है, और विद्यार्थियों को विद्या के मार्ग में सफलता प्राप्त करने में मदद करता है।

विद्या प्राप्ति के लिए कौन सा मंत्र?

विद्या प्राप्ति के लिए “ॐ ऐं ह्रीं क्लीं वाग्देव्यै सरस्वत्यै नमः” मंत्र का जाप करना बहुत ही प्रभावशाली माना जाता है। यह मंत्र विद्यार्थियों को एकाग्रता, स्मरण शक्ति और विद्या में उन्नति प्राप्त करने में सहायता करता है।


श्री राम अमृतवाणी (Shri Ram Amritwani PDF 2024-25)

श्री राम अमृतवाणी (Shri Ram Amritwani PDF), एक ऐसा दिव्य ग्रंथ है जो श्री राम के भक्तों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण और प्रेरणादायक है। इस ग्रंथ में भगवान श्री राम की उपासना की विधि, उनके गुण, उनके जीवन की कथाएँ, और उनके प्रति भक्तों की भक्ति का सटीक और संपूर्ण वर्णन किया गया है। यह ग्रंथ विशेष रूप से उन लोगों के लिए है जो भगवान श्री राम के प्रति श्रद्धा और भक्ति रखते हैं और जो उनके जीवन और शिक्षाओं से मार्गदर्शन प्राप्त करना चाहते हैं। आप हमारी वेबसाइट में दुर्गा आरती और दुर्गा अमृतवाणी भी पढ़ सकते हैं।

श्री राम अमृतवाणी का महत्व

श्री राम अमृतवाणी का महत्व केवल धार्मिक दृष्टिकोण से ही नहीं, बल्कि सामाजिक और व्यक्तिगत जीवन के दृष्टिकोण से भी अत्यधिक है। यह ग्रंथ हमें जीवन के विभिन्न पहलुओं को समझने और उनके अनुसार जीवन जीने की प्रेरणा देता है। इसमें श्री राम के जीवन के आदर्श और नैतिक मूल्यों को स्पष्ट रूप से प्रस्तुत किया गया है, जो हर व्यक्ति को अपने जीवन में अपनाने योग्य हैं।

ग्रंथ की रचना और संरचना

श्री राम अमृतवाणी की रचना संत कवि ने की है, जिन्होंने श्री राम के चरित्र और उनके उपदेशों को अपने शब्दों में संजोया है। यह ग्रंथ हिंदी में लिखा गया है और इसकी भाषा सरल एवं प्रवाहमयी है, जिससे इसे पढ़ना और समझना आसान हो जाता है। इसमें भगवान श्री राम की महिमा, उनके कर्म, उनके प्रेम, और उनके भक्तों के प्रति उनके अनंत प्रेम को स्पष्ट रूप से दर्शाया गया है।

ग्रंथ की संरचना मुख्यतः भजन, स्तुति, और उपदेशों के संग्रह पर आधारित है। प्रत्येक अध्याय या कविता में श्री राम के विभिन्न गुणों और उनके जीवन की घटनाओं का वर्णन किया गया है। यह ग्रंथ हमें न केवल भक्ति की ओर प्रेरित करता है, बल्कि जीवन की सच्चाईयों और चुनौतियों का सामना करने की शक्ति भी प्रदान करता है।

भक्ति और आदर्श

श्री राम अमृतवाणी भक्ति और आदर्श के महत्वपूर्ण तत्वों को उजागर करता है। इसमें भगवान श्री राम की भक्ति के विभिन्न पहलुओं को समझाया गया है और यह दर्शाया गया है कि किस प्रकार भगवान की उपासना करने से जीवन में सुख और शांति प्राप्त की जा सकती है। इसके अतिरिक्त, यह ग्रंथ हमें जीवन के नैतिक मूल्यों और आदर्शों को अपनाने की प्रेरणा देता है। श्री राम के जीवन की घटनाएँ हमें सिखाती हैं कि सही मार्ग पर चलना और सच्चे उद्देश्य के प्रति समर्पित रहना कितना महत्वपूर्ण है।

सामाजिक और व्यक्तिगत प्रभाव

श्री राम अमृतवाणी का व्यक्तिगत और सामाजिक जीवन पर भी गहरा प्रभाव पड़ता है। यह ग्रंथ उन लोगों के लिए मार्गदर्शन प्रदान करता है जो जीवन की कठिनाइयों का सामना कर रहे हैं और जिनकी आस्था और विश्वास को ठेस पहुँची है। भगवान श्री राम के जीवन की कथाएँ और उनकी उपदेशों से हमें यह समझने में मदद मिलती है कि हर परिस्थिति में सकारात्मक दृष्टिकोण और धैर्य बनाए रखना आवश्यक है।

सामाजिक दृष्टिकोण से भी, श्री राम अमृतवाणी का महत्व अतुलनीय है। यह ग्रंथ लोगों को एकता, भाईचारे, और प्रेम के महत्व को समझाता है। श्री राम की उपासना और उनके आदर्शों को अपनाने से समाज में सौहार्द और शांति का माहौल स्थापित किया जा सकता है।

अध्यात्मिक दृष्टिकोण

अध्यात्मिक दृष्टिकोण से, श्री राम अमृतवाणी एक महत्वपूर्ण ग्रंथ है जो भक्तों को आत्मा की सच्चाई और भगवान की दिव्यता के प्रति जागरूक करता है। इसमें दी गई शिक्षाएँ और उपदेश आत्मिक विकास की दिशा में मार्गदर्शन करते हैं। यह ग्रंथ ध्यान और साधना के माध्यम से आत्मा की शुद्धि और परमात्मा के मिलन की ओर ले जाने का प्रयास करता है।



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|| श्री राम अमृतवाणी PDF ||


रामामृत पद पावन वाणी,
राम नाम धुन सुधा सामानी,
पावन पाथ राम गन ग्राम,
राम राम जप राम ही राम

परम सत्य परम विज्ञान,
ज्योति स्वरूप राम भगवान,
परमानंद, सर्वशक्तिमान,
राम परम है राम महान

अमृतवाणी नाम उच्चाहरान,
राम राम सुख सिद्धिकारण,
अमृतवानी अमृत श्री नाम,
राम राम मुद मंगल धाम

अमृतरूप राम-गुण गान,
अमृत-कथन राम व्याख्यान,
अमृत-वचन राम की चर्चा,
सुधा सम गीत राम की अर्चा

अमृत मनन राम का जाप,
राम राम प्रभु राम अलाप,
अमृत चिंतन राम का ध्यान,
राम शब्द में सूचि समाधन

अमृत रसना वही कहवा,
राम-राम, जहां नाम सुहावे,
अमृत कर्म नाम कमानी,
राम-राम परम सुखदायी

अमृत राम-नाम जो ही ध्यावे,
अमृत पद सो ही जन पावे,
राम-नाम अमृत-रास सार,
देता परम आनन्द अपार

राम-राम जप हे माणा,
अमृत वाणी मान,
राम-नाम मे राम को,
सदा विराजित जान

राम-नाम मद-मंगलकारी,
विध्ण हरे सब पातक हारी,
राम नाम शुभ-शकुण महान,
स्वस्ती शांति शिवकर कल्याण

राम-राम श्री राम-विचार,
मानी उत्तम मंगलाचार,
राम-राम मन मुख से गाना,
मानो मधुर मनोरथ पाना

राम-नाम जो जन मन लावे,
उसमे शुभ सभी बस जावे,
जहां हो राम-नाम धुन-नाद,
भागे वहा से विषम विषाद

राम-नाम मन-तप्त बुझावे,
सुधा रस सीच शांति ले आवे,
राम-राम जपिये कर भाव,
सुविधा सुविध बने बनाव

राम-नाम सिमरो सदा,
अतिशय मंगल मूल,
विषम विकट संकट हरन,
कारक सब अनुकूल

जपना राम-राम है सुकृत,
राम-नाम है नाशक दुष्कृत,
सिमरे राम-राम ही जो जन,
उसका हो शुचित्र तन-मन

जिसमे राम-नाम शुभ जागे,
उस के पाप-ताप सब भागे,
मन से राम-नाम जो उच्चारे,
उस के भागे भ्रम भय सारे

जिस मन बस जाए राम सुनाम,
होवे वह जन पूर्णकाम,
चित में राम-राम जो सिमरे,
निश्चय भव सागर से तारे

राम-सिमरन होव साहै,
राम-सिमरन है सुखदायी,
राम सिमरन सब से ऊंचा,
राम शक्ति सुख ज्ञान समूचा

राम-राम हे सिमर मन,
राम-राम श्री राम,
राम-राम श्री राम-भज,
राम-राम हरि-नाम

मात पिता बांधव सूत दारा,
धन जन साजन सखा प्यारा,
अंत काल दे सके ना सहारा,
राम-नाम तेरा तारण हारा

सिमरन राम-नाम है संगी,
सखा स्नेही सुहिर्द शुभ अंगी,
यूग-यूग का है राम सहेला,
राम-भगत नहीं रहे अकेला

निर्जन वन विपद हो घोर,
निबर्ध निशा तम सब ओर,
जोत जब राम नाम की जागे,
संकट सर्व सहज से भागे

बाधा बड़ी विषम जब आवे,
वैर विरोध विघ्न बढ़ जावे,
राम नाम जपिये सुख दाता,
सच्चा साथी जो हितकर त्राता

मन जब धैर्य को नहीं पावे,
कुचिन्ता चित्त को चूर बनावे
राम नाम जपे चिंता चूरक,
चिंतामणि चित्त चिंतन पूरक

शोक सागर हो उमड़ा आता,
अति दुःख में मन घबराता,
भजिये राम-राम बहु बार,
जन का करता बेड़ा पार

करधी घरद्धि कठिनतर काल,
कष्ट कठोर हो क्लेश कराल,
राम-राम जपिये प्रतिपाल,
सुख दाता प्रभु दीनदयाल

घटना घोर घटे जिस बेर,
दुर्जन दुखरदे लेवेँ घेर,
जपिये राम-नाम बिन देर,
रखिये राम-राम शुभ टेर

राम-नाम हो सदा सहायक,
राम-नाम सर्व सुखदायक,
राम-राम प्रभु राम की टेक,
शरण शान्ति आश्रय है एक

पूँजी राम-नाम की पाइये,
पाथेय साथ नाम ले जाइये,
नाशे जन्म मरण का खटका,
रहे राम भक्त नहीं अटका

राम-राम श्री राम है,
तीन लोक का नाथ,
परम-पुरुष पावन प्रभु,
सदा का संगी साथ

यज्ञ तप ध्यान योग ही त्याग,
वन कुटी वास अति वैराग,
राम-नाम बिना नीरस फोक,
राम-राम जप तरिये लोक

राम-जाप सब संयम साधन,
राम-जाप है कर्म आराधन,
राम-जाप है परम-अभ्यास,
सिम्रो राम-नाम सुख-रास

राम-जाप कही ऊंची करनी,
बाधा विघ्न बहु दुःख हरनी,
राम-राम महा-मंत्र जपना,
है सुव्रत नेम तप तपना

राम-जाप है सरल समाधि,
हरे सब आधी व्याधि उपाधि,
रिद्धि-सिद्धि और नव-निधान,
डाटा राम है सब सुख-खान

राम-राम चिन्तन सुविचार,
राम-राम जप निश्चय धार,
राम-राम श्री राम-ध्याना,
है परम-पद अमृत पाना

राम-राम श्री राम हरी,
सहज पराम है योग,
राम-राम श्री राम जप,
देता अमृत-भोग

नाम चिंतामणि रत्न अमोल,
राम-नाम महिमा अनमोल,
अतुल प्रभाव अति-प्रताप,
राम-नाम कहा तारक जाप

बीज अक्षर महा-शक्ति-कोष,
राम-राम जप शुभ-संतोष,
राम-राम श्री राम-राम मंत्र,
तंत्र बीज परात्पर यन्त्र

बीजाक्षर पद पद्मा प्रकाशे,
राम-राम जप दोष विनाशे,
कुण्डलिनी बोधे, सुष्मना खोले,
राम मंत्र अमृत रस घोले

उपजे नाद सहज बहु-भांत,
अजपा जाप भीतर हो शांत,
राम-राम पद शक्ति जगावे,
राम-राम धुन जभी रमावे

राम-नाम जब जगे अभंग,
चेतन-भाव जगे सुख संग,
ग्रंथि अविद्या टूटे भारी,
राम-लीला की खिले फुलवारी

पतित-पावन परम-पाठ,
राम-राम जप योग,
सफल सिद्धि कर साधना,
राम-नाम अनुराग

तीन लोक का समझीये सार,
राम-नाम सब ही सुखकार,
राम-नाम की बहुत बरदाई,
वेद पुराण मुनि जन गाई

यति सती साधू संत सयाने,
राम नाम निष्-दिन बखाने,
तापस योगी सिद्ध ऋषिवर,
जाप्ते राम-नाम सब सुखकर

भावना भक्ति भरे भजनीक,
भजते राम-नाम रमणीक,
भजते भक्त भाव-भरपूर,
भ्रम-भय भेद-भाव से दूर

पूर्ण पंडित पुरुष-प्रधान,
पावन-परम पाठ ही मान,
करते राम-राम जप-ध्यान,
सुनते राम अनहद तान

इस में सुरति सुर रमाते,
राम राम स्वर साध समाते,
देव देवीगन दैव विधाता,
राम-राम भजते गनत्राता

राम राम सुगुणी जन गाते,
स्वर-संगीत से राम रिझाते,
कीर्तन-कथा करते विद्वान्,
सार सरस संग साधनवान

मोहक मंत्र अति मधुर,
राम-राम जप ध्यान,
होता तीनो लोक में,
राम-नाम गन-गान

मिथ्या मन-कल्पित मत-जाल,
मिथ्या है मोह-कुमद-बैताल,
मिथ्या मन-मुखिआ मनोराज,
सच्चा है राम-राम जप काज

मिथ्या है वाद-विवाद विरोध,
मिथ्या है वैर निंदा हाथ क्रोध
मिथ्या द्रोह दुर्गुण दुःख कहाँ,
राम-नाम जप सत्य निधान

सत्य-मूलक है रचना साड़ी,
सर्व-सत्य प्रभु-राम पसारि,
बीज से तरु मक्करधी से तार,
हुआ त्यों राम से जग विस्तार

विश्व-वृक्ष का राम है मूल,
उस को तू प्राणी कभी न भूल,
सां-साँस से सीमार सुजान,
राम-राम प्रभु-राम महान

लाया उत्पत्ति पालना-रूप,
शक्ति-चेतना आनंद-स्वरुप,
आदि अन्त और मध्य है राम,
अशरण-शरण है राम-विश्राम

राम-राम जप भाव से,
मेरे अपने आप,
परम-पुरुष पालक-प्रभु,
हर्ता पाप त्रिताप

राम-नाम बिना वृथा विहार,
धन-धान्य सुख-भोग पसार,
वृथा है सब सम्पद सम्मान,
होव तँ यथा रहित प्रान

नाम बिना सब नीरस स्वाद,
ज्योँ हो स्वर बिना राग विषाद,
नाम बिना नहीं साजे सिंगार,
राम-नाम है सब रस सार

जगत का जीवन जानो राम,
जग की ज्योति जाज्वल्यमान,
राम-नाम बिना मोहिनी-माया,
जीवन-हीं यथा तन-छाया

सूना समझीये सब संसार,
जहां नहीं राम-नाम संचार,
सूना जानिये ज्ञान-विवेक,
जिस में राम-नाम नहीं एक

सूने ग्रन्थ पंथ मत पोथे,
बने जो राम-नाम बिन थोथी,
राम-नाम बिन वाद-विचार,
भारी भ्रम का करे प्रचार

राम-नाम दीपक बिना,
जान-मन में अंधेर,
रहे इस से हे मम-मन,
नाम सुमाला फेर

राम-राम भज कर श्री राम,
करिये नित्य ही उत्तम काम,
जितने कर्त्तव्य कर्म कलाप,
करिये राम-राम कर जाप

करिये गमनागम के काल,
राम-जाप जो कर्ता निहाल,
सोते जागते सब दिन याम,
जपिये राम-राम अभिराम

जाप्ते राम-नाम महा माला,
लगता नरक-द्वार पै टाला,
जाप्ते राम-राम जप पाठ,
जलते कर्म बंध यथा काठ

तान जब राम-नाम की तूती,
भांडा-भरा अभाग्य भया फूटे,
मनका है राम-नाम का ऐसा,
चिंता-मणि पारस-मणि जैसा

राम-नाम सुधा-रस सागर,
राम-नाम ज्ञान गुण-अगर,
राम-नाम श्री राम-महाराज,
भाव-सिंधु में है अतुल-जहाज

राम-नाम सब तीर्थ-स्थान,
राम-राम जप परम-स्नान,
धो कर पाप-ताप सब धुल,
कर दे भया-भ्रम को उन्मूल

राम जाप रवि-तेज सामान
महा-मोह-ताम हरे अज्ञान,
राम जाप दे आनंद महान,
मिले उसे जिसे दे भगवान्

राम-नाम को सिमरिये,
राम-राम एक तार,
परम-पाठ पावन-परम,
पतित अधम दे तार

माँगूँ मैं राम-कृपा दिन रात,
राम-कृपा हरे सब उत्पात,
राम-कृपा लेवे अंट सँभाल,
राम-प्रभु है जन प्रतिपाल

राम-कृपा है उच्तर-योग,
राम-कृपा है शुभ संयोग,
राम-कृपा सब साधन-मर्म,
राम-कृपा संयम सत्य धर्म

राम-नाम को मन में बसाना,
सुपथ राम-कृपा का है पाना,
मन में राम-धुन जब फिर,
राम-कृपा तब ही अवतार

रहूँ मैं नाम में हो कर लीं,
जैसे जल में हो मीन अड़ीं,
राम-कृपा भरपूर मैं पाऊँ,
परम प्रभु को भीतर लाऊँ

भक्ति-भाव से भक्त सुजान,
भजते राम-कृपा का निधान,
राम-कृपा उस जान में आवे,
जिस में आप ही राम बसावे

कृपा प्रसाद है राम की देनी,
काल-व्याल जंजाल हर लेनी,
कृपा-प्रसाद सुधा-सुख-स्वाद,
राम-नाम दे रहित विवाद

प्रभु-पसाद शिव-शान्ति-दाता,
ब्रह्म-धाम में आप पहुँचाता,
प्रभु-प्रसाद पावे वह प्राणी,
राम-राम जापे अमृत-वाणी

औषध राम-नाम की खाईये,
मृत्यु जन्म के रोग मिटाइये,
राम-नाम अमृत रस-पान,
देता अमल अचल निर्वाण

राम-राम धुन गूँज से,
भाव-भया जाते भाग,
राम-नाम धुन ध्यान से,
सब शुभ जाते जाग

माँगूँ मैं राम-नाम महादान,
करता निर्धन का कल्याण,
देव-द्वार पर जनम का भूखा,
भक्ति प्रेम अनुराग से रूखा

पर हूँ तेरा-यह लिए टेर,
चरण पारधे की राखियो मेर,
अपना आप विरद-विचार,
दीजिये भगवन! नाम प्यार

राम-नाम ने वे भी तारे,
जो थे अधर्मी-अधम हत्यारे,
कपटी-कुटिल-कुकर्मी अनेक,
तर गए राम-नाम ले एक

तर गए धृति-धारणा हीं,
धर्म-कर्म में जन अति दीन,
राम-राम श्री राम-जप जाप,
हुए अतुल-विमल-अपाप

राम-नाम मन मुख में बोले,
राम-नाम भीतर पट खोले,
राम-नाम से कमल-विकास,
होवें सब साधन सुख-रास

राम-नाम घट भीतर बसे,
सांस-साँस नस-नस से रसे,
सपने में भी न बिसरे नाम,
राम-राम श्री राम-राम-राम

राम-नाम के मेल से,
साध जाते सब-काम,
देव-देव देवी यादा,
दान महा-सुख-धाम

अहो मैं राम-नाम धन पाया,
कान में राम-नाम जब आया,
मुख से राम-नाम जब गाया,
मन से राम-नाम जब ध्याया

पा कर राम-नाम धन-राशि,
घोर-अविद्या विपद विनाशी,
बर्धा जब राम प्रेम का पूर,
संकट-संशय हो गए दूर

राम-नाम जो जापे एक बेर,
उस के भीतर कोष-कुबेर,
दीं-दुखिया-दरिद्र-कंगाल,
राम-राम जप होव निहाल

हृदय राम-नाम से भरिये,
संचय राम-नाम दान करिए,
घाट में नाम मूर्ती धरिये,
पूजा अंतर्मुख हो करिये

आँखें मूँद के सुनिये सितार,
राम-राम सुमधुर झनकार,
उस में मन का मेल मिलाओ,
राम-राम सुर में ही समाओ

जपूँ मैं राम-राम प्रभु राम,
ध्याऊँ मैं राम-राम हरे राम,
सिमरूँ मैं राम-राम प्रभु राम,
गाऊं मैं राम-राम श्री राम

अमृतवाणी का नित्य गाना,
राम-राम मन बीच रमाणा,
देता संकट-विपद निवार,
करता शुभ श्री मंगलाचार

राम-नाम जप पाठ से,
हो अमृत संचार,
राम-धाम में प्रीति हो,
सुगुण-गैन का विस्तार

तारक मंत्र राम है,
जिस का सुफल अपार,
इस मंत्र के जाप से,
निश्चय बने निस्तार

बोलो राम, बोलो राम,
बोलो राम राम राम

श्री राम आरती (Shri Ram Aarti) | राम चालीसा (Ram Chalisa PDF)

|| Shri Ram Amritwani PDF ||


Ramamrit pad pawan wani,
Raam naam dhun sudha saamaanee,
Pawan paath raam gan graam,
Raam raam jap raam hee raam

Param saty param vigyaan,
Jyoti svaroop raam bhagavaan,
Paramaanand, sarvashaktimaan,
Raam param hai raam mahaan

Amritwani naam uchchaaharaan,
Raam raam sukh siddhikaaran,
Amritwani amrt shree naam,
Raam raam mud mangal dhaam

Amrtaroop raam-gun gaan,
Amrt-kathan raam vyaakhyaan,
Amrt-vachan raam kee charcha,
Sudha sam geet raam kee archa

Amrt manan raam ka jaap,
Raam raam prabhu raam alaap,
Amrt chintan raam ka dhyaan,
Raam shabd mein soochi samaadhan

Amrt rasana vahee kahava,
Raam-raam, jahaan naam suhaave,
Amrt karm naam kamaanee,
Raam-raam param sukhadaayee

Amrt raam-naam jo hee dhyaave,
Amrt pad so hee jan paave,
Raam-naam amrt-raas saar,
Deta param aanand apaar

Raam-raam jap he maana,
Amrt wani maan,
Raam-naam me raam ko,
Sada viraajit jaan

Raam-naam mad-mangalakaaree,
Vidhn hare sab paatak haaree,
Raam naam shubh-shakun mahaan,
Svastee shaanti shivakar kalyaan

Raam-raam shree raam-vichaar,
Maanee uttam mangalaachaar,
Raam-raam man mukh se gaana,
Maano madhur manorath paana 0

Raam-naam jo jan man laave,
Usame shubh sabhee bas jaave,
Jahaan ho raam-naam dhun-naad,
Bhaage vaha se visham vishaad

Raam-naam man-tapt bujhaave,
Sudha ras seech shaanti le aave,
Raam-raam japiye kar bhaav,
Suvidha suvidh bane banaav

Raam-naam simaro sada,
Atishay mangal mool,
Visham vikat sankat haran,
Kaarak sab anukool

Japana raam-raam hai sukrt,
Raam-naam hai naashak dushkrt,
Simare raam-raam hee jo jan,
Usaka ho shuchitr tan-man

Jisame raam-naam shubh jaage,
Us ke paap-taap sab bhaage,
Man se raam-naam jo uchchaare,
Us ke bhaage bhram bhay saare

Jis man bas jae raam sunaam,
Hove vah jan poornakaam,
Chit mein raam-raam jo simare,
Nishchay bhav saagar se taare

Raam-simaran hov saahai,
Raam-simaran hai sukhadaayee,
Raam simaran sab se ooncha,
Raam shakti sukh gyaan samoocha

Raam-raam he simar man,
Raam-raam shree raam,
Raam-raam shree raam-bhaj,
Raam-raam hari-naam

Maat pita baandhav soot daara,
Dhan jan saajan sakha pyaara,
Ant kaal de sake na sahaara,
Raam-naam tera taaran haara

Simaran raam-naam hai sangee,
Sakha snehee suhird shubh angee,
Yoog-yoog ka hai raam sahela,
Raam-bhagat nahin rahe akela

Nirjan van vipad ho ghor,
Nibardh nisha tam sab or,
Jot jab raam naam kee jaage,
Sankat sarv sahaj se bhaage

Baadha badee visham jab aave,
Vair virodh vighn badh jaave,
Raam naam japiye sukh daata,
Sachcha saathee jo hitakar traata

Man jab dhairy ko nahin paave,
Kuchinta chitt ko choor banaave
Raam naam jape chinta choorak,
Chintaamani chitt chintan poorak

Shok saagar ho umada aata,
Ati duhkh mein man ghabaraata,
Bhajiye raam-raam bahu baar,
Jan ka karata beda paar

Karadhee gharaddhi kathinatar kaal,
Kasht kathor ho klesh karaal,
Raam-raam japiye pratipaal,
Sukh daata prabhu deenadayaal

Ghatana ghor ghate jis ber,
Durjan dukharade leven gher,
Japiye raam-naam bin der,
Rakhiye raam-raam shubh ter

Raam-naam ho sada sahaayak,
Raam-naam sarv sukhadaayak,
Raam-raam prabhu raam kee tek,
Sharan shaanti aashray hai ek

Poonjee raam-naam kee paiye,
Paathey saath naam le jaiye,
Naashe janm maran ka khataka,
Rahe raam bhakt nahin ataka

Raam-raam shree raam hai,
Teen lok ka naath,
Param-purush pawan prabhu,
Sada ka sangee saath

Yagy tap dhyaan yog hee tyaag,
Van kutee vaas ati vairaag,
Raam-naam bina neeras phok,
Raam-raam jap tariye lok 0

Raam-jaap sab sanyam saadhan,
Raam-jaap hai karm aaraadhan,
Raam-jaap hai param-abhyaas,
Simro raam-naam sukh-raas

Raam-jaap kahee oonchee karanee,
Baadha vighn bahu duhkh haranee,
Raam-raam maha-mantr japana,
Hai suvrat nem tap tapana

Raam-jaap hai saral samaadhi,
Hare sab aadhee vyaadhi upaadhi,
Riddhi-siddhi aur nav-nidhaan,
Daata raam hai sab sukh-khaan

Raam-raam chintan suvichaar,
Raam-raam jap nishchay dhaar,
Raam-raam shree raam-dhyaana,
Hai param-pad amrt paana

Raam-raam shree raam haree,
Sahaj paraam hai yog,
Raam-raam shree raam jap,
Deta amrt-bhog

Naam chintaamani ratn amol,
Raam-naam mahima anamol,
Atul prabhaav ati-prataap,
Naam-naam kaha taarak jaap

Beej akshar maha-shakti-kosh,
Raam-raam jap shubh-santosh,
Raam-raam shree raam-raam mantr,
Tantr beej paraatpar yantr

Beejaakshar pad padma prakaashe,
Raam-raam jap dosh vinaashe,
Kundalinee bodhe, sushmana khole,
Raam mantr amrt ras ghole

Upaje naad sahaj bahu-bhaant,
Ajapa jaap bheetar ho shaant,
Raam-raam pad shakti jagaave,
Raam-raam dhun jabhee ramaave

Raam-naam jab jage abhang,
Chetan-bhaav jage sukh sang,
Granthi avidya toote bhaaree,
Raam-leela kee khile phulavaaree 0

Patit-pawan param-paath,
Raam-raam jap yog,
Saphal siddhi kar saadhana,
Raam-naam anuraag

Teen lok ka samajheeye saar,
Raam-naam sab hee sukhakaar,
Raam-naam kee bahut baradaee,
Ved puraan muni jan gaee

Yati satee saadhoo sant sayaane,
Raam naam nish-din bakhaane,
Taapas yogee siddh rshivar,
Jaapte raam-naam sab sukhakar

Bhaavana bhakti bhare bhajaneek,
Bhajate raam-naam ramaneek,
Bhajate bhakt bhaav-bharapoor,
Bhram-bhay bhed-bhaav se door

Poorn pandit purush-pradhaan,
Pawan-param paath hee maan,
Karate raam-raam jap-dhyaan,
Sunate raam anahad taan

Is mein surati sur ramaate,
Raam raam svar saadh samaate,
Dev deveegan daiv vidhaata,
Raam-raam bhajate ganatraata

Raam raam sugunee jan gaate,
Svar-sangeet se raam rijhaate,
Keertan-katha karate vidvaan,
Saar saras sang saadhanavaan

Mohak mantr ati madhur,
Raam-raam jap dhyaan,
Hota teeno lok mein,
Raam-naam gan-gaan

Mithya man-kalpit mat-jaal,
Mithya hai moh-kumad-baitaal,
Mithya man-mukhia manoraaj,
Sachcha hai raam-raam jap kaaj

Mithya hai vaad-vivaad virodh,
Mithya hai vair ninda haath krodh
Mithya droh durgun duhkh kahaan,
Raam-naam jap saty nidhaan 0

Saty-moolak hai rachana sari,
Sarv-saty prabhu-raam pasaari,
Beej se taru makkaradhee se taar,
Hua tyon raam se jag vistaar

Vishv-vrksh ka raam hai mool,
Us ko too praanee kabhee na bhool,
Saan-saans se seemaar sujaan,
Raam-raam prabhu-raam mahaan

Laaya utpatti paalana-roop,
Shakti-chetana aanand-svarup,
Aadi ant aur madhy hai raam,
Asharan-sharan hai raam-vishraam

Raam-raam jap bhaav se,
Mere apane aap,
Param-purush paalak-prabhu,
Harta paap tritaap

Raam-naam bina vrtha vihaar,
Dhan-dhaany sukh-bhog pasaar,
Vrtha hai sab sampad sammaan,
Hov tan yatha rahit praan

Naam bina sab neeras svaad,
Jyon ho svar bina raag vishaad,
Naam bina nahin saaje singaar,
Raam-naam hai sab ras saar

Jagat ka jeevan jaano raam,
Jag kee jyoti jaajvalyamaan,
Raam-naam bina mohinee-maaya,
Jeevan-heen yatha tan-chhaaya

Soona samajheeye sab sansaar,
Jahaan nahin raam-naam sanchaar,
Soona jaaniye gyaan-vivek,
Jis mein raam-naam nahin ek

Soone granth panth mat pothe,
Bane jo raam-naam bin thothee,
Raam-naam bin vaad-vichaar,
Bhaaree bhram ka kare prachaar

Raam-naam deepak bina,
Jaan-man mein andher,
Rahe is se he mam-man,
Naam sumaala pher 0

Raam-raam bhaj kar shree raam,
Kariye nity hee uttam kaam,
Jitane karttavy karm kalaap,
Kariye raam-raam kar jaap

Kariye gamanaagam ke kaal,
Raam-jaap jo karta nihaal,
Sote jaagate sab din yaam,
Japiye raam-raam abhiraam

Jaapte raam-naam maha maala,
Lagata narak-dvaar pai taala,
Jaapte raam-raam jap paath,
Jalate karm bandh yatha kaath

Taan jab raam-naam kee tootee,
Bhaanda-bhara abhaagy bhaya phoote,
Manaka hai raam-naam ka aisa,
Chinta-mani paaras-mani jaisa

Raam-naam sudha-ras saagar,
Raam-naam gyaan gun-agar,
Raam-naam shree raam-mahaaraaj,
Bhaav-sindhu mein hai atul-jahaaj

Raam-naam sab teerth-sthaan,
Raam-raam jap param-snaan,
Dho kar paap-taap sab dhul,
Kar de bhaya-bhram ko unmool

Raam jaap ravi-tej saamaan
Maha-moh-taam hare agyaan,
Raam jaap de aanand mahaan,
Mile use jise de bhagavaan

Raam-naam ko simariye,
Raam-raam ek taar,
Param-paath pawan-param,
Patit adham de taar

Maangoon main raam-krpa din raat,
Raam-krpa hare sab utpaat,
Raam-krpa leve ant sanbhaal,
Raam-prabhu hai jan pratipaal

Raam-krpa hai uchtar-yog,
Raam-krpa hai shubh sanyog,
Raam-krpa sab saadhan-marm,
Raam-krpa sanyam saty dharm 0

Raam-naam ko man mein basaana,
Supath raam-krpa ka hai paana,
Mann mein raam-dhun jab phir,
Raam-krpa tab hee avataar

Rahoon main naam mein ho kar leen,
Jaise jal mein ho meen adeen,
Raam-krpa bharapoor main paoon,
Param prabhu ko bheetar laoon

Bhakti-bhaav se bhakt sujaan,
Bhajate raam-krpa ka nidhaan,
Raam-krpa us jaan mein aave,
Jis mein aap hee raam basaave

Kripa prasaad hai raam kee denee,
Kaal-vyaal janjaal har lenee,
Kripa-prasaad sudha-sukh-svaad,
Raam-naam de rahit vivaad

Prabhu-pasaad shiv-shaanti-daata,
Brahm-dhaam mein aap pahunchaata,
Prabhu-prasaad paave vah praanee,
Raam-raam jaape amrt-wani

Aushadh raam-naam kee khaeeye,
Mrtyu janm ke rog mitaiye,
Raam-naam amrt ras-paan,
Deta amal achal nirvaan

Raam-raam dhun goonj se,
Bhaav-bhaya jaate bhaag,
Raam-naam dhun dhyaan se,
Sab shubh jaate jaag

Maangoon main raam-naam mahaadaan,
Karata nirdhan ka kalyaan,
Dev-dvaar par janam ka bhookha,
Bhakti prem anuraag se rookha

Par hoon tera-yah lie ter,
Charan paaradhe kee raakhiyo mer,
Apna aap virad-vichaar,
Deejiye bhagavan! naam pyaar

Raam-naam ne ve bhee taare,
Jo the adharmee-adham hatyaare,
Kapatee-kutil-kukarmee anek,
Tar gae raam-naam le ek

Tar gae dhrti-dhaarana heen,
Dharm-karm mein jan ati deen,
Raam-raam shree raam-jap jaap,
Hue atul-vimal-apaap

Raam-naam man mukh mein bole,
Raam-naam bheetar pat khole,
Raam-naam se kamal-vikaas,
Hoven sab saadhan sukh-raas

Raam-naam ghat bheetar base,
Saans-saans nas-nas se rase,
Sapne mein bhee na bisare naam,
Raam-raam shree raam-raam-raam

Raam-naam ke mel se,
Saadh jaate sab-kaam,
Dev-dev devee yaada,
Daan maha-sukh-dhaam

Aho main raam-naam dhan paaya,
Kaan mein raam-naam jab aaya,
Mukh se raam-naam jab gaaya,
Mann se raam-naam jab dhyaaya

Pa kar raam-naam dhan-raashi,
Ghor-avidya vipad vinaashee,
Bardha jab raam prem ka poor,
Sankat-sanshay ho gae door

Raam-naam jo jaape ek ber,
Us ke bheetar kosh-kuber,
Deen-dukhiya-daridr-kangaal,
Raam-raam jap hov nihaal

Hriday raam-naam se bhariye,
Sanchay raam-naam daan karie,
Ghaat mein naam moortee dhariye,
Pooja antarmukh ho kariye

Aankhen moond ke suniye sitaar,
Raam-raam sumadhur jhanakaar,
Us mein man ka mel milao,
Raam-raam sur mein hee samao

Japoon main raam-raam prabhu raam,
Dhyaoon main raam-raam hare raam,
Simaroon main raam-raam prabhu raam,
Gaon main raam-raam shree raam

Amritwani ka nity gaana,
Raam-raam man beech ramaana,
Deta sankat-vipad nivaar,
Karata shubh shree mangalaachaar

Raam-naam jap paath se,
Ho amrt sanchaar,
Raam-dhaam mein preeti ho,
Sugun-gain ka vistaar

Taarak mantr raam hai,
Jis ka suphal apaar,
Is mantr ke jaap se,
Nishchay bane nistaar

Bolo raam, bolo raam,
Bolo raam raam raam


श्री राम अमृतवाणी क्या है?

श्री राम अमृतवाणी एक धार्मिक ग्रंथ है जिसमें भगवान श्री राम के जीवन, उनके गुण, उनकी भक्ति की विधि, और उनके उपदेशों का वर्णन किया गया है। यह ग्रंथ भक्तों को श्री राम की उपासना और उनके आदर्शों को अपनाने की प्रेरणा देता है।

श्री राम अमृतवाणी की रचना किसने की है?

श्री राम अमृतवाणी की रचना संत कवि ने की है जिन्होंने भगवान श्री राम के जीवन और उनकी भक्ति के विभिन्न पहलुओं को इस ग्रंथ में संजोया है।

इस ग्रंथ को पढ़ने से क्या लाभ होता है?

इस ग्रंथ को पढ़ने से भक्तों को भगवान श्री राम की भक्ति और उनके जीवन के आदर्शों को समझने का अवसर मिलता है। यह ग्रंथ जीवन के नैतिक मूल्यों को अपनाने और आत्मिक शांति प्राप्त करने में मदद करता है।

श्री राम अमृतवाणी का भाषा क्या है?

श्री राम अमृतवाणी हिंदी में लिखा गया है। इसकी भाषा सरल और प्रवाहमयी है जिससे इसे पढ़ना और समझना आसान हो जाता है।

क्या श्री राम अमृतवाणी में केवल भक्ति के ही उपदेश हैं?

नहीं, श्री राम अमृतवाणी में भक्ति के साथ-साथ भगवान श्री राम के जीवन की घटनाएँ, उनके गुण, और जीवन के नैतिक मूल्यों पर भी प्रकाश डाला गया है।

क्या यह ग्रंथ केवल धार्मिक उद्देश्यों के लिए है?

हालांकि यह ग्रंथ धार्मिक उद्देश्यों के लिए लिखा गया है, लेकिन इसके उपदेश और शिक्षाएँ व्यक्तिगत और सामाजिक जीवन में भी लागू होती हैं। यह जीवन की कठिनाइयों का सामना करने और सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाने में मदद करता है।

क्या श्री राम अमृतवाणी को नियमित रूप से पढ़ना चाहिए?

हाँ, श्री राम अमृतवाणी को नियमित रूप से पढ़ने से भक्तों को भगवान श्री राम की उपासना में निरंतरता और समर्पण मिलता है। इसके नियमित अध्ययन से आत्मिक शांति और भक्ति की भावना में वृद्धि होती है।

क्या इस ग्रंथ की कोई विशेष विधि है पढ़ने की?

इस ग्रंथ को पढ़ते समय ध्यान और श्रद्धा का होना आवश्यक है। इसके पाठ को अपने मन में स्थिरता और एकाग्रता के साथ पढ़ना चाहिए, ताकि भगवान श्री राम के उपदेशों को सही ढंग से समझा जा सके।

क्या श्री राम अमृतवाणी का कोई विशेष संस्करण उपलब्ध है?

श्री राम अमृतवाणी के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हो सकते हैं, जो विभिन्न संपादकों द्वारा प्रकाशित किए गए हैं। आपको अपने नजदीकी धार्मिक पुस्तकालय या ऑनलाइन प्लेटफ़ॉर्म पर इसे खोजने की सलाह दी जाती है।

क्या श्री राम अमृतवाणी को बच्चों और नवयुवकों के लिए भी पढ़ना उपयुक्त है?

हाँ, श्री राम अमृतवाणी की सरल भाषा और प्रेरणादायक उपदेश बच्चों और नवयुवकों के लिए भी उपयुक्त हैं। यह ग्रंथ उन्हें नैतिकता, भक्ति, और जीवन के आदर्शों को समझने में मदद कर सकता है।

Mera Aapki Kripa Se Bhajan Lyrics PDF 2024-25

||मेरा आपकी कृपा से सब काम हो रहा है भजन लिरिक्स ||

मेरा आपकी कृपा से सब काम हो रहा है (Mera Aapki Kripa Se) एक अत्यंत लोकप्रिय भजन है जो भक्तों द्वारा भगवान के प्रति आस्था और समर्पण को प्रकट करने के लिए गाया जाता है। इस भजन में भक्त भगवान की कृपा का गुणगान करता है और यह स्वीकार करता है कि उसके जीवन में जो भी हो रहा है, वह सब ईश्वर की कृपा और आशीर्वाद से ही संभव हो रहा है। यह भजन भक्तों के दिल में ईश्वर के प्रति अटूट विश्वास और प्रेम का प्रतीक है, और इसे सुनने और गाने से मन को शांति और भक्ति की भावना प्राप्त होती है। श्री कृष्णाष्टकम् और श्री कृष्ण चालीसा भी पढ़ सकते हो

यहाँ से आप: कोई जाये जो वृन्दावन | रिद्धि सिद्धि के दाता सुनो गणपतिमुझे अपने ही रंग में रंगले मेरे यार सांवरेसजा दो घर को गुलशन सानैनो में नींद भर आई भजन भी देख सकते हैं


  • हिंदी
  • English

मेरा आपकी कृपा से सब काम हो रहा है भजन लिरिक्स

मेरा आपकी कृपा से सब काम हो रहा है।
करते हो तुम कन्हिया मेरा नाम हो रहा है॥

पतवार के बिना ही मेरी नाव चल रही है।
हैरान है ज़माना मंजिल भी मिल रही है।
करता नहीं मैं कुछ भी, सब काम हो रहा है॥
मेरा आपकी कृपा से सब काम हो रहा है।

तुम साथ हो जो मेरे, किस चीज की कमी है।
किसी और चीज की अब दरकार ही नहीं है।
तेरे साथ से गुलाम अब गुलफाम हो रहा है॥
मेरा आपकी कृपा से सब काम हो रहा है।

मैं तो नहीं हूँ काबिल, तेरा पार कैसे पाऊं।
टूटी हुयी वाणी से गुणगान कैसे गाऊं।
तेरी प्रेरणा से ही सब यह कमाल हो रहा हैं॥
मेरा आपकी कृपा से सब काम हो रहा है।

मेरा आपकी कृपा से सब काम हो रहा है।
करते हो तुम कन्हिया मेरा नाम हो रहा है॥

Mera Aapki Kripa Se Sab Kaam Ho Raha Hai Lyrics

Mera Aapki Kripa Se Sab Kaam Ho Rha Hai
Karte Ho Tum Kanhaiya, Mera Naam Ho Rha Hai
Mera Aapki Kripa Se Sab Kaam Ho Rha Hai

Patwar Ke Bina Hi, Meri Naav Chal Rhi Hai
Hairan Hai Jamana Manjil Bhi Mil Rhi Hai
Karta Nahi Mai Kuchh Bhi Sab Kaam Ho Rha Hai
Mera Aapki Kripa Se Sab Kaam Ho Rha Hai

Tum Saath Ho Jo Mere Kis Cheez Ki Kami Hai
Kisi Aur Cheez Ki Ab Darkar Bhi Nahi Hai
Tere Naam Se Gulam Ab Gulfam Ho Rha Hai
Mera Aapki Kripa Se Sab Kaam Ho Rha Hai

Main To Nahi Hu Kabil, Tera Paar Kaise Paau
Tuti Hui Vaani Se, Gungan Kaise Gaau
Teri Prerna Se Hi Sab, Ye Kamal Ho Rha Hai
Mera Aapki Kripa Se Sab Kaam Ho Rha Hai

Mera Aapki Kripa Se Sab Kaam Ho Rha Hai
Karte Ho Tum Kanhaiya, Mera Naam Ho Rha Hai



भजन का महत्व और लोकप्रियता

भजन भारतीय संस्कृति में आध्यात्मिक और धार्मिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण स्थान रखता है। यह भगवान की स्तुति और भक्त के समर्पण को सरल और भावपूर्ण तरीके से व्यक्त करता है। विशेष रूप से मेरा आपकी कृपा से भजन ने भक्तों के बीच अपार लोकप्रियता हासिल की है। यह भजन मंदिरों, घरों, और धार्मिक आयोजनों में प्रमुख रूप से गाया जाता है। इसकी सरल भाषा और भावनात्मक अपील ने इसे हर आयु वर्ग के लोगों के बीच पसंदीदा बना दिया है।

भजन न केवल आस्था को गहरा करता है, बल्कि मानसिक शांति और आत्मिक संतुलन को भी बढ़ावा देता है। यह भक्तों को भगवान के करीब लाने और उनके साथ एक आध्यात्मिक संबंध स्थापित करने में मदद करता है, जिससे भजन सुनने और गाने की परंपरा पीढ़ी दर पीढ़ी चलती आ रही है।

“मेरा आपकी कृपा से” भजन की विशेषता

मेरा आपकी कृपा से भजन की विशेषता उसकी सरलता और गहराई में निहित है। इसमें भगवान की कृपा को जीवन के हर कार्य और अनुभव का आधार माना गया है। इस भजन के बोल सहज और सीधे हैं, जो ईश्वर के प्रति भक्त की आस्था और कृतज्ञता को स्पष्ट रूप से दर्शाते हैं। भजन यह संदेश देता है कि ईश्वर की कृपा से ही जीवन की चुनौतियों को पार किया जा सकता है और मन की शांति प्राप्त की जा सकती है।

इस भजन की एक और विशेषता यह है कि इसे गाना और याद रखना बेहद आसान है, जिससे यह सभी भक्तों के बीच एक आम भजन बन गया है। इसकी मधुर धुन और गहरे अर्थ इसे और भी प्रभावशाली बनाते हैं।

भक्ति संगीत में इस भजन की भूमिका

भक्ति संगीत में मेरा आपकी कृपा से भजन की एक प्रमुख भूमिका है। यह भजन भक्तों के दिलों में भगवान के प्रति समर्पण और आस्था को गहराई से उत्पन्न करता है। भक्ति संगीत का मुख्य उद्देश्य भगवान की स्तुति और ध्यान को प्रोत्साहित करना है, और यह भजन उसी उद्देश्य को सरल और सजीव तरीके से पूरा करता है। इसके माध्यम से भक्त अपनी दैनिक चुनौतियों और संघर्षों से छुटकारा पाने के लिए भगवान की कृपा का आह्वान करते हैं।

इस भजन के बोल और धुन भक्तों को एक आंतरिक शांति और संतोष का अनुभव कराते हैं, जो भक्ति संगीत का एक महत्वपूर्ण पहलू है। यह न केवल आध्यात्मिक उन्नति के लिए प्रेरणा देता है, बल्कि भगवान के साथ एक व्यक्तिगत संबंध भी स्थापित करता है।

भगवान की कृपा और भक्त के जीवन में उसका प्रभाव

भजन मेरा आपकी कृपा से भगवान की कृपा के महत्व को केंद्र में रखता है। भजन के अनुसार, भक्त के जीवन में सभी सकारात्मक घटनाओं और सफलताओं के पीछे भगवान की कृपा का हाथ होता है। जब एक भक्त अपने जीवन में कठिनाइयों का सामना करता है, तो वह भगवान की कृपा पर भरोसा करता है और यही उसे शक्ति और धैर्य प्रदान करती है। इस भजन के माध्यम से भक्त यह स्वीकार करता है कि भगवान की कृपा के बिना जीवन का कोई भी कार्य सफल नहीं हो सकता।

यह भक्त के जीवन में भगवान की महत्ता को दर्शाता है और उसे इस बात का एहसास कराता है कि उसकी सारी खुशियां, समृद्धि और शांति भगवान की कृपा से ही संभव हैं।

समर्पण और आस्था का संदेश

मेरा आपकी कृपा से भजन में समर्पण और आस्था का एक गहरा संदेश निहित है। भजन के माध्यम से भक्त यह स्वीकार करता है कि उसकी सारी सफलताएं और उपलब्धियां भगवान की कृपा का परिणाम हैं, और इसके बिना उसका जीवन अधूरा है। इस भजन का मुख्य उद्देश्य भक्त के दिल में भगवान के प्रति समर्पण की भावना को जागृत करना है। इसमें यह बताया गया है कि भगवान के प्रति अटूट आस्था और समर्पण ही भक्त को मानसिक शांति और आध्यात्मिक उन्नति की ओर ले जाता है।

भजन की पंक्तियां भक्त को यह समझने में मदद करती हैं कि जब वह पूरी तरह से भगवान के प्रति समर्पित होता है, तभी वह जीवन की कठिनाइयों को पार कर सकता है।

भजन में व्यक्त की गई आत्मिक भावना

भजन मेरा आपकी कृपा से में गहरी आत्मिक भावना व्यक्त की गई है, जो भक्त और भगवान के बीच एक अटूट संबंध को दर्शाती है। इसके शब्द भक्त की विनम्रता और भगवान की महानता को उजागर करते हैं। भजन में निहित भावनाएं भगवान के प्रति भक्त के असीम प्रेम और भक्ति को व्यक्त करती हैं, जिसमें वह यह मानता है कि भगवान की कृपा से ही उसके जीवन में सब कुछ हो रहा है।

यह भजन न केवल भक्त की आत्मा को भगवान की ओर आकर्षित करता है, बल्कि उसे आत्मिक शांति और संतोष का अनुभव भी कराता है। आत्मिक भावना से भरा यह भजन सुनने और गाने पर एक गहरा आध्यात्मिक प्रभाव डालता है।

भक्तों पर इसका मानसिक और भावनात्मक प्रभाव

मेरा आपकी कृपा से भजन भक्तों के मानसिक और भावनात्मक संतुलन पर सकारात्मक प्रभाव डालता है। इस भजन के नियमित गायन से मानसिक तनाव कम होता है और भावनात्मक शांति प्राप्त होती है। भजन के बोल और धुन दोनों ही दिल को सुकून देते हैं और मन को भगवान की कृपा पर केंद्रित करते हैं। जब भक्त इसे गाते या सुनते हैं, तो वे अपने अंदर एक सकारात्मक ऊर्जा का अनुभव करते हैं, जो उनके मानसिक स्वास्थ्य के लिए लाभकारी होती है।

यह भजन भक्तों को अपने जीवन की कठिनाइयों और चुनौतियों से उबरने के लिए आंतरिक शक्ति प्रदान करता है, जिससे वे भावनात्मक रूप से मजबूत बनते हैं।

आध्यात्मिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा का अनुभव

इस भजन के माध्यम से भक्त आध्यात्मिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा का अनुभव करते हैं। मेरा आपकी कृपा से की पंक्तियां भगवान की कृपा का आह्वान करती हैं, जो मन और आत्मा को शांति प्रदान करती है। भजन गाने से भक्त का मन शांत होता है और उसमें एक नई ऊर्जा का संचार होता है। इसके शब्द और धुन एक पवित्र वातावरण बनाते हैं, जिसमें भक्त भगवान के प्रति अपनी आस्था और समर्पण को और भी गहराई से महसूस करता है।

भजन के गायन से भक्त को आंतरिक संतोष और शांति मिलती है, जिससे उसके जीवन में सकारात्मक बदलाव आते हैं और वह अधिक आत्मविश्वासी और प्रसन्न महसूस करता है।

Hanuman Chalisa Telugu PDF 2025

Explore the profound verses of the Hanuman Chalisa with our downloadable Chalisa PDF. The Hanuman Chalisa Telugu pdf, composed by Goswami Tulsidas, is a devotional hymn dedicated to Lord Hanuman.

It comprises 40 verses praising Hanuman’s strength, courage, and devotion to Lord Rama. Available in Telugu script, our PDF allows you to delve into the sacred text, seeking blessings and spiritual upliftment.

Download now to deepen your connection with this timeless prayer and experience the divine presence of Hanumanji.


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|| Hanuman Chalisa PDF Telugu ||

శ్రీగురు చరణ సరోజ రజ,
నిజ మన ముకురు సుధారి।
బరనౌ రఘువర విమల యశ,
జో దాయక ఫల చారి॥ 1 ॥

బుద్ధిహీన్ తను జానికై,
సుమిరౌ పవన కుమార।
బల బుద్ధి విద్యా దేహు మోహీ,
హరహు కలేశ వికార్॥ 2 ॥

శ్రీహనుమాన్ చలీసా:

జయ హనుమాన్ జ్ఞాన గుణ సాగర్।
జయ కపీశ తిహు లోక ఉజాగర్॥ 1 ॥

రామ దూత అతులిత బల ధామా।
అంజని పుత్ర పవనసుత నామా॥ 2 ॥

మహావీర విక్రమ బజరంగీ।
కుమతి నివార సుమతి కే సంగీ॥ 3 ॥

కంచన వరణ విరాజ సువేషా।
కానన కుందల కుంచిత కేశా॥ 4 ॥

హాథ వజ్ర ఔ ధ్వజా విరాజే।
కాంధే మూజ జనే ఉసాజే॥ 5 ॥

శంకర సువన కేశరీ నందన్।
తేజ ప్రతాప మహా జగ వందన్॥ 6 ॥

విద్యావాన్ గుణీ అతి చాతుర।
రామ కాజ కరిబే కో ఆతుర॥ 7 ॥

ప్రభు చరిత్ర సునిబే కో రసియా।
రామ లఖన సీతా మన బసియా॥ 8 ॥

సూక్ష్మ రూప ధరి సియహి దిఖావా।
వికట రూప ధరి లంక జలావా॥ 9 ॥

భీమ రూప ధరి అసుర సంహారే।
రామచంద్ర కే కాజ సవారే॥ 10 ॥

లాయ సంజీవన లఖన జియాయే।
శ్రీరఘువీర హరషి ఉర లాయే॥ 11 ॥

రఘుపతి కీహీ బహుట బడాయీ।
తుమ మమ ప్రియ భరతహి సమ భాయీ॥ 12 ॥

సహస్ర బదన తుమ్హరో యశ గావై।
అస కహి శ్రీపతి కంఠ లగావై॥ 13 ॥

సనకాదిక బ్రహ్మాది మునీశా।
నారద శారద సహిత అహీశా॥ 14 ॥

యమ కుబేర దిగపాల జహాంఠే।
కవి కోవిద కహి సకే కహాంఠే॥ 15 ॥

తుమ ఉపకార సుగ్రీవహి కీహా।
రామ మిలాయ రాజపద దీహా॥ 16 ॥

తుమ్హరో మంత్ర విభీషణ మానా।
లంకేశ్వర భయే సబ జగ జానా॥ 17 ॥

యుగ సహస్ర యోజన పర భానూ।
లీల్యో తాహి మధుర ఫల జానూ॥ 18 ॥

ప్రభు ముద్రికా మేలీ ముఖ మాహీ।
జలధి లాఙ্ঘి గయే అచరజ నాహీ॥ 19 ॥

దుర్గమ కాజ జగత కే జేతే।
సుగమ అనుగ్రహ తుమ్హరే తేతే॥ 20 ॥

రాం దువారే తుమ రక్షక కాహూ।
కోహి దరాత్ న కలే సబ కాహూ॥ 21 ॥

ఆపన తేజ్ సమ్హారో ఆపై।
తీంహో లోక హాంకే తే కాంపై॥ 22 ॥

భూత పిశాచ నికట నహిం ఆవై।
మహావీర్ జబ నామ్ సునావై॥ 23 ॥

నాసే రోగ హరే సబ పీరా।
జపత నిరంతర హనుమత వీరా॥ 24 ॥

సంకట తే హనుమాన్ చిన్నావై।
మన క్రమ వచన్ ధ్యాన్ జో లావై॥ 25 ॥

సబ పర రామ తపస్వీ రాజా।
తిన కే కాజ సకల తుమ సాజా॥ 26 ॥

ఔర మనోరథ్ జో కోయీ లావై।
సోయి అమిత జీవన్ ఫల పావై॥ 27 ॥

చారో యుగ ప్రతాప తుమారా।
హై ప్రసిద్ధ జగత్ ఉజియారా॥ 28 ॥

సాధు సంత కే తుమ రక్షకవారే।
అసుర నికందన రామ దులారే॥ 29 ॥

అష్ట సిధి నవ నిధి కే దాతా।
అస వర దీన్ జానకీ మాతా॥ 30 ॥

రామ రసాయన తుమ్హరే పాసా।
సదా రహో రఘుపతి కే దాసా॥ 31 ॥

తుమ్హరే భజన్ రామ కో పావై।
జన్మ జన్మ కే దుఖ బిసరావై॥ 32 ॥

అంతకాల రఘుపతి పుర జాయీ।
జహాంజన్మ హరి భక్త కహాయీ॥ 33 ॥

ఔర్ దేవతా చిత్త న ధరయీ।
హనుమత్ సేై సర్వ సుఖ కరయీ॥ 34 ॥

సంకట్ కటై మిటై సబ పీరా।
జో సుమిరై హనుమత్ బలవీరా॥ 35 ॥

జయ జయ జయ హనుమాన్ గోసాయి।
కృపా కరహు గురుదేవ కీ నాయీ॥ 36 ॥

జో శత బార్ పాఠ కర కోయీ।
ఛూటహి బంది మహా సుఖ హోయీ॥ 37 ॥

జో యహ పఢే హనుమాన్ చలీసా।
హోయ సిద్ధి సాఖీ గౌరీశా॥ 38 ॥

తులసీదాస సదా హరి చెరా।
కీజై నాథ హృదయ మహ డేరా॥ 39 ॥

పవనతనయ సంకట్ హరణ,
మంగళ మూర్తి రూప।
రామ లఖన సీతా సహిత,
హృదయ బసహు సుర భూప॥


Hanuman Chalisa Telugu in PDF

|| 21 Hanuman Chalisa Benefits in Telugu ||

హనుమాన్ చాలీసా ప్రయోజనాలు

హనుమాన్ చాలీసా అనేది భక్తి, శక్తి, మరియు ఆత్మరక్షణకు సంబంధించిన అనేక ప్రయోజనాలను అందించే ఒక పవిత్ర కవితా పుస్తకం. ఇది 40 శ్లోకాలను కలిగి ఉంటుంది, మరియు హనుమాన్‌ను ప్రార్థించే మరియు నమ్మే భక్తులకు అనేక రకాల ఉపశమనం మరియు ఆత్మీయ ప్రయోజనాలను అందిస్తుంది.

1. పరిరక్షణ మరియు సుభిక్షం

హనుమాన్ చాలీసా నిత్యం చదవడం వలన వ్యక్తి యొక్క జీవితం పరిరక్షణ పొందుతుంది. ఇది ప్రత్యేకంగా శత్రువుల నుండి రక్షణ, నైతిక మరియు ఆధ్యాత్మిక బలాన్ని అందిస్తుంది. హనుమాన్ దేవుడు తన భక్తులను సదా రక్షిస్తాడు, తద్వారా వ్యక్తి అందించే శక్తి మరియు సుభిక్షం అందిస్తుంది.

2. ఆధ్యాత్మిక శాంతి

ఈ శ్లోకాలను పఠించడం ద్వారా భక్తులు ఆధ్యాత్మిక శాంతిని పొందుతారు. హనుమాన్ దేవుని ప్రార్థన శాంతి మరియు శ్రద్ధను తీసుకురావడంలో సహాయపడుతుంది, ఇది వ్యక్తికి లోతైన ఆనందం మరియు మానసిక ప్రశాంతతను అందిస్తుంది.

3. ఆరోగ్య ప్రయోజనాలు

హనుమాన్ చాలీసా పఠనం ద్వారా ఆరోగ్య సంబంధిత సమస్యలు తగ్గుతాయి అని నమ్ముతారు. హనుమాన్ దేవుడి ఆశీర్వాదం వల్ల ఆరోగ్య సమస్యలు పోవడం, శక్తి పెరగడం మరియు శరీర శ్రేయస్సు రాగలిగే అవకాశం ఉంటుంది.

4. ఆర్థిక సమస్యల పరిష్కారం

ఆర్థిక సమస్యలను ఎదుర్కొంటున్న వ్యక్తులు హనుమాన్ చాలీసా పఠించడం ద్వారా ఆర్థిక వృద్ధి మరియు సుఖశాంతిని పొందగలరు. ఇది ధన సంబంధిత సమస్యలను నివారించడానికి మరియు ఆర్థిక స్థితిని మెరుగుపరచడానికి సహాయపడుతుంది.

5. బాధ్యత మరియు సుసాధన

హనుమాన్ చాలీసా యధార్థంగా చదవడం వల్ల వ్యక్తి యొక్క బాధ్యతలను నిర్వహించడంలో సుసాధన సాధ్యం అవుతుంది. ఇది వ్యక్తికి ధైర్యం, పట్టుదల, మరియు మార్గదర్శనం అందిస్తుంది, తద్వారా అతను తన లక్ష్యాలను సులభంగా చేరుకోగలుగుతాడు.

6. శక్తి మరియు ధైర్యం

హనుమాన్ దేవుడు శక్తి మరియు ధైర్యం యొక్క ప్రతిరూపం. హనుమాన్ చాలీసా పఠనం ద్వారా, భక్తులు తమలో శక్తి మరియు ధైర్యాన్ని పెంపొందించగలుగుతారు, మరియు సవాళ్లను అధిగమించడానికి ఉత్సాహాన్ని పొందుతారు.

7. బాధల నుంచి విమోచనం

వ్యక్తి భౌతిక లేదా మానసిక బాధలు అనుభవిస్తున్నప్పుడు, హనుమాన్ చాలీసా పఠించడం వలన ఆ బాధలు తగ్గవచ్చు. హనుమాన్ దేవుడు భక్తులను తమ సుఖాంతం కోసం రక్షిస్తాడు మరియు కష్టాలను తగ్గించడానికి సహాయపడతాడు.

8. మానసిక శక్తి పెరుగుదల

హనుమాన్ చాలీసా చదవడం ద్వారా, మానసిక శక్తి పెరుగుతుంది. భక్తులు స్థిరమైన మానసిక ధైర్యాన్ని పొందుతారు, తద్వారా వారు ఒత్తిడి మరియు ఆందోళనలను అధిగమించగలుగుతారు.

9. అనుగ్రహం మరియు భక్తి

ఈ శ్లోకాలను పఠించడం వలన హనుమాన్ దేవుని అనుగ్రహం పొందవచ్చు. భక్తి గుణాలు, నైతిక విలువలు మరియు ధర్మాన్ని ప్రేరేపించడానికి ఇది సహాయపడుతుంది.

10. పరిమితుల శాతన

హనుమాన్ చాలీసా పఠనం ద్వారా, భక్తులు తమ పరిమితులను అధిగమించగలుగుతారు. ఇది లక్ష్యాలను సాధించడానికి మార్గదర్శనాన్ని అందించి, వ్యక్తిగత సవాళ్లను ఎదుర్కోవడంలో సహాయపడుతుంది.

11. వివాహం మరియు కుటుంబ హర్షం

హనుమాన్ చాలీసా పఠించడం, వివాహం లేదా కుటుంబ సంబంధిత సమస్యలపై అనుకూల ప్రభావం చూపుతుంది. ఇది కుటుంబ హర్షం, శాంతి మరియు సంకర్షణలను పరిష్కరించడానికి సహాయపడుతుంది.

12. తీర్పులు మరియు విజయాలు

నిర్ణయాలు తీసుకోవడంలో, ప్రాజెక్టులు మరియు పరీక్షలలో విజయం సాధించడానికి హనుమాన్ చాలీసా పఠనం సహాయపడుతుంది. ఇది విజయం కోసం శక్తిని, ధైర్యాన్ని, మరియు మానసిక స్పష్టతను అందిస్తుంది.

13. ఆధ్యాత్మిక పురోగతి

ఈ శ్లోకాలను నిత్యం పఠించడం ద్వారా ఆధ్యాత్మిక పురోగతి సాధించవచ్చు. భక్తులు సంతులితమైన జీవితం, సాధన, మరియు ఆధ్యాత్మిక మెరుగుదల పొందవచ్చు.

14. స్పృహ మరియు విజ్ఞానం

హనుమాన్ చాలీసా అనేది ఒక విశేషమైన పఠనం, ఇది వ్యక్తికి స్పృహ మరియు విజ్ఞానం అందిస్తుంది. ఇది భక్తిని, జ్ఞానం మరియు ప్రకృతి యొక్క స్ఫూర్తిని పెంపొందిస్తుంది.

15. సాహసికత మరియు నిరంతర శ్రమ

ఈ శ్లోకాలను పఠించడం ద్వారా, వ్యక్తి సాహసికతను పెంపొందించుకోవచ్చు. ఇది ధైర్యం, ప్రగతిశీలత మరియు నిరంతర శ్రమతో కూడిన జీవితాన్ని ప్రేరేపిస్తుంది.

16. మానసిక శాంతి మరియు సానుభూతి

హనుమాన్ చాలీసా చదవడం వలన మానసిక శాంతి మరియు సానుభూతిని పొందవచ్చు. ఇది శ్రద్ధ మరియు దయతో కూడిన జీవితం జీవించడంలో సహాయపడుతుంది.

17. సుఖకరమైన జీవితం

హనుమాన్ చాలీసా పఠనంతో సుఖకరమైన జీవితం సాధించవచ్చు. ఇది ఆనందం, సంతోషం, మరియు శాంతిని పెంచడం ద్వారా జీవితాన్ని సాఫీగా మార్చుతుంది.

18. విద్యా మరియు ఆర్థిక విజయం

ఈ శ్లోకాలను పఠించడం ద్వారా విద్యా మరియు ఆర్థిక విజయం సాధించవచ్చు. ఇది జ్ఞానం, నేర్పు మరియు ఆర్థిక స్థితిని మెరుగుపరచడంలో సహాయపడుతుంది.

19. అతిధి మరియు పర్యాటక శాంతి

హనుమాన్ చాలీసా పఠనం వల్ల, భక్తులు అనుకూలమైన పర్యటన మరియు అతిథి సంబంధిత సమస్యలను పరిష్కరించగలుగుతారు. ఇది సుభిక్షం మరియు శాంతిని అందిస్తుంది.

20. సంసార సంబంధిత సవాళ్ల పరిష్కారం

వివాహం, కుటుంబ సమస్యలు, మరియు ఇతర సంసార సంబంధిత సవాళ్లను ఎదుర్కొనేందుకు హనుమాన్ చాలీసా ఒక శక్తివంతమైన సాధనం అవుతుంది. ఇది సంబంధాలను మెరుగుపరచడానికి మరియు సంతోషంగా మారడానికి సహాయపడుతుంది.

21. పరమాత్మా ప్రసాదం

హనుమాన్ చాలీసా పఠనంతో, వ్యక్తి పరమాత్మా యొక్క ప్రసాదాన్ని పొందవచ్చు. ఇది దేవుని ఆశీర్వాదం మరియు అతని రక్షణను అందిస్తుంది.

హనుమాన్ చాలీసా అనేది భక్తి, శాంతి, మరియు రక్షణ కోసం ప్రాముఖ్యత కలిగిన ఒక పుస్తకం. దీనిని నిత్యం పఠించడం ద్వారా, భక్తులు అనేక రకాల ఆధ్యాత్మిక, శారీరక, మరియు మానసిక ప్రయోజనాలను పొందవచ్చు.

॥ श्री हनुमान चालीसा ॥

॥ दोहा॥

श्रीगुरु चरन सरोज रज
निज मनु मुकुरु सुधारि ।
बरनउँ रघुबर बिमल जसु
जो दायकु फल चारि ॥

बुद्धिहीन तनु जानिके
सुमिरौं पवन-कुमार ।
बल बुधि बिद्या देहु मोहिं
हरहु कलेस बिकार ॥

॥ चौपाई ॥
जय हनुमान ज्ञान गुन सागर ।
जय कपीस तिहुँ लोक उजागर ॥

राम दूत अतुलित बल धामा ।
अंजनि पुत्र पवनसुत नामा ॥

महाबीर बिक्रम बजरंगी ।
कुमति निवार सुमति के संगी ॥

कंचन बरन बिराज सुबेसा ।
कानन कुण्डल कुँचित केसा ॥४॥

हाथ बज्र औ ध्वजा बिराजै ।
काँधे मूँज जनेउ साजै ॥

शंकर सुवन केसरीनन्दन।
तेज प्रताप महा जग वन्दन॥

बिद्यावान गुनी अति चातुर ।
राम काज करिबे को आतुर ॥

प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया ।
राम लखन सीता मन बसिया ॥८॥

सूक्ष्म रूप धरि सियहिं दिखावा ।
बिकट रूप धरि लंक जरावा ॥

भीम रूप धरि असुर सँहारे ।
रामचन्द्र के काज सँवारे ॥

लाय सजीवन लखन जियाए ।
श्री रघुबीर हरषि उर लाये ॥

रघुपति कीन्ही बहुत बड़ाई ।
तुम मम प्रिय भरतहि सम भाई ॥१२॥

सहस बदन तुम्हरो जस गावैं ।
अस कहि श्रीपति कण्ठ लगावैं ॥

सनकादिक ब्रह्मादि मुनीसा ।
नारद सारद सहित अहीसा ॥

जम कुबेर दिगपाल जहाँ ते ।
कबि कोबिद कहि सके कहाँ ते ॥

तुम उपकार सुग्रीवहिं कीह्ना ।
राम मिलाय राज पद दीह्ना ॥१६॥

तुम्हरो मंत्र बिभीषण माना ।
लंकेश्वर भए सब जग जाना ॥

जुग सहस्त्र जोजन पर भानु ।
लील्यो ताहि मधुर फल जानू ॥

प्रभु मुद्रिका मेलि मुख माहीं ।
जलधि लाँघि गये अचरज नाहीं ॥

दुर्गम काज जगत के जेते ।
सुगम अनुग्रह तुम्हरे तेते ॥२०॥

राम दुआरे तुम रखवारे ।
होत न आज्ञा बिनु पैसारे ॥

सब सुख लहै तुम्हारी सरना ।
तुम रक्षक काहू को डरना ॥

आपन तेज सम्हारो आपै ।
तीनों लोक हाँक तै काँपै ॥

भूत पिशाच निकट नहिं आवै ।
महावीर जब नाम सुनावै ॥२४॥

नासै रोग हरै सब पीरा ।
जपत निरंतर हनुमत बीरा ॥

संकट तै हनुमान छुडावै ।
मन क्रम बचन ध्यान जो लावै ॥

सब पर राम तपस्वी राजा ।
तिनके काज सकल तुम साजा ॥

और मनोरथ जो कोई लावै ।
सोई अमित जीवन फल पावै ॥२८॥

चारों जुग परताप तुम्हारा ।
है परसिद्ध जगत उजियारा ॥

साधु सन्त के तुम रखवारे ।
असुर निकंदन राम दुलारे ॥

अष्ट सिद्धि नौ निधि के दाता ।
अस बर दीन जानकी माता ॥

राम रसायन तुम्हरे पासा ।
सदा रहो रघुपति के दासा ॥३२॥

तुम्हरे भजन राम को पावै ।
जनम जनम के दुख बिसरावै ॥

अंतकाल रघुवरपुर जाई ।
जहाँ जन्म हरिभक्त कहाई ॥

और देवता चित्त ना धरई ।
हनुमत सेइ सर्ब सुख करई ॥

संकट कटै मिटै सब पीरा ।
जो सुमिरै हनुमत बलबीरा ॥३६॥

जै जै जै हनुमान गोसाईं ।
कृपा करहु गुरुदेव की नाईं ॥

जो सत बार पाठ कर कोई ।
छूटहि बंदि महा सुख होई ॥

जो यह पढ़ै  हनुमान चालीसा ।
होय सिद्धि साखी गौरीसा ॥

तुलसीदास सदा हरि चेरा ।
कीजै नाथ हृदय मह डेरा ॥४०॥

॥ दोहा ॥
पवन तनय संकट हरन,
मंगल मूरति रूप ।
राम लखन सीता सहित,
हृदय बसहु सुर भूप ॥


छम छम नाचे देखो वीर हनुमाना – Cham Cham Nache Dekho Veer Hanumana Lyrics PDF 2024-25

छम छम नाचे देखो वीर हनुमाना भजन लिरिक्स

छम छम नाचे देखो वीर हनुमाना (Cham Cham Nache Dekho Veer Hanumana) एक लोकप्रिय भक्ति गीत है जो भगवान हनुमान की अद्वितीय शक्ति, वीरता और भक्ति को समर्पित है। इस गीत में हनुमान जी के अदम्य साहस और नृत्य करते हुए उनकी महानता का वर्णन किया गया है, जिससे उनकी भक्ति और पराक्रम का प्रतीक मिलता है। भक्तों के बीच यह गीत विशेष रूप से उनकी ऊर्जा और उत्साह को जगाने का काम करता है, क्योंकि इसमें हनुमान जी के शक्ति और भक्ति के साथ नृत्य करते हुए रूप की कल्पना की गई है।

हनुमान जी को हिंदू धर्म में एक महान योद्धा, संकटमोचक और भगवान राम के प्रति अटूट भक्ति के लिए जाना जाता है। छम छम नाचे देखो वीर हनुमाना गीत में उनकी इस भक्ति को नृत्य रूप में दर्शाया गया है, जो भक्तों के दिलों में उत्साह और शक्ति भरता है। यह गीत विशेष रूप से हनुमान जयंती और मंगलवार के दिनों में भजन संध्याओं और कीर्तन में गाया जाता है, जहां इसे सुनकर भक्तों में नई ऊर्जा का संचार होता है।

सरल और मधुर धुन के साथ यह भजन हर आयु वर्ग के भक्तों के बीच बेहद प्रिय है, जो हनुमान जी की भक्ति और शक्ति का अनुभव करना चाहते हैं। यहाँ से आप रिद्धि सिद्धि के दाता सुनो गणपति | मुझे अपने ही रंग में रंगले मेरे यार सांवरे | सजा दो घर को गुलशन सा | नैनो में नींद भर आई भजन भी देख सकते हैं


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  • English

|| छम छम नाचे देखो वीर हनुमाना ||


छम छम नाचे देखो वीर हनुमाना
छम छम नाचे देखो वीर हनुमाना
कहते लोग इसे राम का दिवाना
छम छम नाचे देखो वीर हनुमाना

पाँव में घूंघरु बांध के नाचे
राम जी का नाम इसे प्यारा लागे
राम ने भी देखो इसे खुब पहचाना
॥ छम छम नाचे देखो वीर हनुमाना…॥

जहाँ जहाँ कीर्तन होता श्रीराम का
लगता हैं पहरा वहाँ वीर हनुमान का
राम के चरण में हैं इनका ठिकाना
॥ छम छम नाचे देखो वीर हनुमाना…॥

नाच नाच देखो श्रीराम को रिझाये
बनवारी देखो नाचता ही जाये
भक्तों में भक्त बडा दुनियाँ ने माना
॥ छम छम नाचे देखो वीर हनुमाना…॥

छम छम नाचे देखो वीर हनुमाना
कहते लोग इसे राम का दिवाना
छम छम नाचे देखो वीर हनुमाना

|| Cham Cham Nache Veer Hanumana ||

Cham Cham Nache Dekho Veer Hanumana
Cham Cham Nache Dekho Veer Hanumana
Kahate Log Ise Ram Ka Deewana
Cham Cham Nache Dekho Veer Hanumana

Paon Mein Ghungroo Baandh Ke Nache
Ram Ji Ka Naam Ise Pyara Lage
Ram Ne Bhi Dekho Ise Khub Pahachana
Cham Cham Nache Dekho Veer Hanumana…

Jahan Jahan Keertan Hota Shriram Ka
Lagta Hain Pahara Wahan Veer Hanuman Ka
Ram Ke Charan Mein Hain Inka Thikana
Cham Cham Nache Dekho Veer Hanumana…

Nach Nach Dekho Shriram Ko Rijhaye
Banvari Dekho Nachta Hi Jaye
Bhakton Mein Bhakt Bada Duniyan Ne Mana
Cham Cham Nache Dekho Veer Hanumana…

Cham Cham Nache Dekho Veer Hanumana
Kahate Log Ise Ram Ka Deewana
Cham Cham Nache Dekho Veer Hanumana



भजन भगवान हनुमान की वीरता, ऊर्जा और भक्ति का गुणगान करता है:

“छम छम नाचे देखो वीर हनुमना” भजन में भगवान हनुमान की वीरता, असीम ऊर्जा और उनके समर्पण की प्रशंसा की जाती है। हनुमान जी को भगवान राम के प्रति उनकी निस्वार्थ भक्ति के लिए जाना जाता है, और इस भजन के माध्यम से उनकी अद्वितीय शक्ति और साहस का गुणगान होता है। उनके भीतर अपार शारीरिक और मानसिक ऊर्जा है, जो उन्होंने भगवान राम की सेवा और धर्म की रक्षा में लगाई।

हनुमान जी की भक्ति में ऐसी अद्वितीय शक्ति और प्रेरणा छिपी है कि भक्तों को भी उनके समान निडरता और उत्साह से जीवन की चुनौतियों का सामना करने की प्रेरणा मिलती है। यह भजन, विशेष रूप से उनकी वीरता और भक्ति को प्रकट करता है, और भक्तों को सिखाता है कि सच्चे समर्पण के साथ किसी भी कार्य को सफलतापूर्वक पूरा किया जा सकता है।

“छम छम नाचे” शब्दों से यह स्पष्ट होता है कि यह भजन हनुमान जी की उल्लास भरी, नृत्य करते हुए छवि को दर्शाता है:

भजन का मुखड़ा “छम छम नाचे” भगवान हनुमान की उत्साही और उल्लासपूर्ण छवि को दर्शाता है। इस भजन के माध्यम से, हनुमान जी की नृत्य करते हुए चित्रण किया गया है, जिसमें उनकी अदम्य ऊर्जा और उत्साह झलकता है। नृत्य में उनका आनंद, उनकी अभिव्यक्ति और उनके भीतर की ताकत का प्रतीक है। “छम छम” का अर्थ उनके नृत्य की ताल और गति से है, जो उनके जीवन की सक्रियता और निरंतरता को दर्शाता है।

यह प्रतीकात्मक रूप से यह भी बताता है कि हनुमान जी न केवल शक्तिशाली हैं, बल्कि उनकी ऊर्जा हर दिशा में बहती रहती है, जो उन्हें हर परिस्थिति का सामना करने में सक्षम बनाती है। भक्त जब इस भजन का उच्चारण करते हैं, तो वे हनुमान जी की इस ऊर्जा और उत्साह से प्रेरणा लेकर अपनी भक्ति को और मजबूत करते हैं।

हनुमान जी की ताकत और शक्ति का वर्णन:

भजन में हनुमान जी की ताकत और शक्ति का वर्णन विशेष रूप से किया जाता है। हनुमान जी को अद्वितीय शारीरिक शक्ति के लिए जाना जाता है। उन्होंने कई बार असंभव कार्यों को पूरा किया, जैसे कि राम-रावण युद्ध में संजीवनी बूटी लाकर लक्ष्मण को जीवनदान देना। उनके पराक्रम और शक्ति के अनगिनत उदाहरण रामायण और अन्य पुराणों में मिलते हैं। हनुमान जी की शक्ति केवल शारीरिक नहीं, बल्कि मानसिक और आध्यात्मिक भी है।

उन्होंने भगवान राम के प्रति अपनी भक्ति में अपने सारे सामर्थ्य और ताकत का उपयोग किया। उनका साहस और शक्ति भक्तों को प्रेरित करता है कि अगर व्यक्ति में आस्था और समर्पण हो, तो किसी भी मुश्किल को पार किया जा सकता है। इस भजन के माध्यम से, हनुमान जी की असाधारण शक्ति और उनके पराक्रम का गुणगान किया जाता है।

उनके अद्भुत कारनामों, जैसे संजीवनी लाने और राक्षसों का नाश करने की गाथा:

हनुमान जी के कई अद्भुत कारनामे उनकी अद्वितीय शक्ति और भक्ति के प्रतीक हैं। “छम छम नाचे” भजन में उनके प्रमुख कार्यों का भी वर्णन है, जैसे लंका दहन, राक्षसों का संहार, और संजीवनी बूटी लाना। जब लक्ष्मण मूर्छित हुए थे, तब हनुमान जी ने संजीवनी बूटी लाकर उन्हें जीवनदान दिया था। इसी प्रकार, उन्होंने लंका का दहन करके रावण के अहंकार को तोड़ा और भगवान राम की विजय का मार्ग प्रशस्त किया।

उनके इन अद्भुत कार्यों का उद्देश्य सिर्फ उनके शारीरिक पराक्रम को नहीं दिखाता, बल्कि यह भी बताता है कि जब व्यक्ति सही दिशा और धर्म के मार्ग पर होता है, तो कोई भी कार्य असंभव नहीं होता। हनुमान जी के ये कारनामे भक्तों को प्रेरणा देते हैं कि हर परिस्थिति में धैर्य, साहस और भगवान के प्रति विश्वास रखना चाहिए।

भक्तों के प्रति उनकी करुणा और समर्पण को उजागर किया गया है:

हनुमान जी की महानता सिर्फ उनकी ताकत में नहीं, बल्कि उनके करुणा और भक्तों के प्रति समर्पण में भी छिपी है। इस भजन में उनकी करुणा को विशेष रूप से उजागर किया गया है। हनुमान जी अपने भक्तों की कठिनाइयों को दूर करने के लिए सदैव तत्पर रहते हैं। उनका समर्पण केवल भगवान राम के प्रति ही नहीं, बल्कि सभी भक्तों के प्रति है। वे अपनी कृपा और आशीर्वाद से अपने भक्तों के दुखों को हरते हैं और उनकी रक्षा करते हैं।

उनकी करुणा और समर्पण हर भक्त को यह विश्वास दिलाता है कि यदि हनुमान जी की शरण में सच्चे दिल से जाया जाए, तो हर समस्या का समाधान संभव है। यह भजन भक्तों को हनुमान जी की इस करुणामयी छवि से जोड़ता है और उन्हें ईश्वर के प्रति अपने समर्पण को और दृढ़ करने की प्रेरणा देता है।

यह भजन हनुमान जी की महिमा का गायन करते हुए भक्तों को उनकी भक्ति में लीन कर देता है:

“छम छम नाचे” भजन में भगवान हनुमान की महिमा का गायन होता है, जो भक्तों को उनकी भक्ति में पूरी तरह से लीन कर देता है। भजन की लय और शब्दों के माध्यम से भक्त हनुमान जी की उपस्थिति का अनुभव करते हैं। उनके गुणों, शक्तियों और कारनामों का वर्णन करते हुए यह भजन भक्तों के दिल में भक्ति की भावना को जागृत करता है।

जब भक्त इस भजन का गान करते हैं, तो वे भगवान हनुमान के साहस और उनके प्रति अपनी श्रद्धा का अनुभव करते हैं। यह भजन हनुमान जी की असीम महिमा का स्मरण कराता है और भक्तों को उनके आशीर्वाद की प्राप्ति के लिए प्रोत्साहित करता है।

“छम छम नाच” प्रतीकात्मक रूप से उनकी उत्साही और वीरता पूर्ण गतिविधियों को दर्शाता है:

“छम छम नाच” शब्द केवल हनुमान जी के नृत्य का वर्णन नहीं करता, बल्कि यह उनकी उत्साही और वीरता से भरी गतिविधियों का प्रतीक भी है। हनुमान जी के नृत्य को एक सांकेतिक रूप में लिया जा सकता है, जो उनकी निरंतर गतिविधियों, साहस, और धर्म की रक्षा के लिए किए गए अद्वितीय प्रयासों को दर्शाता है।

हनुमान जी हर कार्य को ऊर्जा और उत्साह के साथ करते हैं, चाहे वह युद्ध में राक्षसों का संहार हो या भक्तों की समस्याओं का समाधान। उनके नृत्य का यह रूप उनके जीवन की गति और उनके भीतर की अनंत ऊर्जा का संकेत है, जो कभी थमती नहीं। यह भजन हनुमान जी के इसी अटूट और अदम्य साहस को दर्शाता है, जिसे हर भक्त अपने जीवन में अपनाना चाहता है।

भजन यह सिखाता है कि भगवान हनुमान के प्रति भक्ति और विश्वास रखने से सभी बाधाओं को पार किया जा सकता है:

“छम छम नाचे देखो वीर हनुमना” भजन का एक प्रमुख संदेश यह है कि भगवान हनुमान के प्रति सच्ची भक्ति और विश्वास रखने से जीवन की हर कठिनाई को पार किया जा सकता है। हनुमान जी ने अपने जीवन में अनेक कठिन परिस्थितियों का सामना किया और अपने बल, बुद्धि, और भक्ति के माध्यम से हर समस्या का समाधान निकाला।

उनके जीवन से यह सिखने को मिलता है कि जब व्यक्ति ईश्वर के प्रति अटूट आस्था और समर्पण रखता है, तो वह किसी भी बाधा को पार कर सकता है। भक्तों के लिए यह भजन एक प्रेरणा स्रोत है कि जब हनुमान जी की शरण में जाया जाता है, तो उनकी कृपा से जीवन की हर चुनौती आसान हो जाती है।

उनके गुणों और साहस को अपनाने से व्यक्ति जीवन में निडर और सफल हो सकता है:

हनुमान जी के गुण और साहस केवल भक्ति और पूजा के लिए नहीं हैं, बल्कि उन्हें अपनाने से व्यक्ति अपने जीवन में भी सफलता और निडरता पा सकता है। उनका जीवन यह सिखाता है कि समर्पण, साहस, और कर्मशीलता के साथ कोई भी लक्ष्य प्राप्त किया जा सकता है।

उनकी तरह हर काम में धैर्य, समर्पण और सच्चाई से आगे बढ़ने पर जीवन की कठिनाइयाँ समाप्त हो जाती हैं। हनुमान जी के साहस को अपनाने से व्यक्ति अपने भीतर निडरता और आत्मविश्वास का विकास कर सकता है, जो उसे जीवन की हर चुनौती का सामना करने के लिए तैयार करता है।


हनुमान जी कितने पावरफुल हैं?

हनुमान जी अनंत शक्तियों के स्वामी माने जाते हैं। उनके पास अद्वितीय बल, बुद्धि, और भक्ति की शक्ति है। उन्होंने अपने बल से पर्वतों को उठाया, समुद्र को पार किया और राक्षसों का संहार किया। उनकी शक्ति इतनी अधिक है कि वे देवताओं और असुरों को भी परास्त कर सकते हैं।

हनुमान जी से ज्यादा शक्तिशाली कौन है?

हनुमान जी भगवान शिव के अवतार माने जाते हैं और उनकी शक्ति बहुत ही अनोखी है। हालांकि, शक्ति के मामले में हनुमान जी को श्रीराम का सबसे बड़ा भक्त माना जाता है और वे स्वयं राम की सेवा में समर्पित हैं। श्रीराम, जो स्वयं भगवान विष्णु के अवतार हैं, को सर्वशक्तिमान माना जाता है।

हनुमान की शक्ति क्या है?

हनुमान जी की शक्तियों में अपार बल, बुद्धि, अजेयता, आकार बदलने की क्षमता, और उनकी उड़ान की शक्ति प्रमुख हैं। वे किसी भी रूप में परिवर्तित हो सकते हैं और अनंत दूरी तय कर सकते हैं। उनकी भक्ति और सेवा की शक्ति भी उनकी महानता का हिस्सा है।

हनुमान सर्वश्रेष्ठ क्यों है?

हनुमान जी को सर्वश्रेष्ठ इसलिए माना जाता है क्योंकि उन्होंने भगवान राम और उनके आदर्शों की सेवा में अपना जीवन समर्पित कर दिया। उनके समर्पण, भक्ति, शक्ति, और बुद्धि ने उन्हें रामायण के सबसे प्रमुख पात्रों में से एक बना दिया। उनकी निःस्वार्थ भक्ति और असीम शक्ति उन्हें विशेष बनाती हैं।

हनुमान जी का पावरफुल मंत्र कौन सा है?

हनुमान जी के कई मंत्र अत्यंत शक्तिशाली माने जाते हैं, लेकिन सबसे प्रभावी मंत्र “हनुमान मंत्र” है:
“ॐ हनुमते नमः”
यह मंत्र सभी बाधाओं को दूर करता है और साहस व शक्ति प्रदान करता है।

हनुमान की 8 शक्तियां कौन सी हैं?

हनुमान जी को ‘अष्ट सिद्धियों’ का वरदान प्राप्त है, जिनमें शामिल हैं:

अणिमा – सूक्ष्म रूप धारण करने की शक्ति।
महिमा – विशाल रूप धारण करने की शक्ति।
गरिमा – भारी वजन उठाने की क्षमता।
लघिमा – शरीर को हल्का करने की शक्ति।
प्राप्ति – कहीं भी पहुंचने की शक्ति।
प्राकाम्य – इच्छाओं को पूर्ण करने की क्षमता।
ईशित्व – किसी भी चीज पर शासन करने की शक्ति।
वशित्व – दूसरों को अपने वश में करने की शक्ति।

ये शक्तियां हनुमान जी को अजेय और अद्वितीय बनाती हैं।

वीर हनुमाना अति बलवाना भजन लिरिक्स – Veer Hanumana Ati Balwana Lyrics PDF 2024-25

वीर हनुमाना अति बलवाना (Veer Hanumana Ati Balwana) भजन भगवान हनुमान की अद्वितीय शक्ति, वीरता और भक्ति का गुणगान करता है। हनुमान जी को हिंदू धर्म में एक अत्यंत महत्वपूर्ण देवता माना जाता है, जिन्हें भगवान राम का अनन्य भक्त और उनके कार्यों का अभिन्न सहयोगी माना जाता है। यह भजन भक्तों के दिलों में हनुमान जी के प्रति गहरी श्रद्धा और भक्ति को जगाने का माध्यम है। हनुमान जी की शक्ति, साहस और उनके असीम बल के कारण ही वे हर कठिनाई का सामना कर सकते हैं, और यही संदेश इस भजन में निहित है।

इस भजन के माध्यम से, भक्तों को यह समझने को मिलता है कि जब वे हनुमान जी की शरण में जाते हैं, तो किसी भी प्रकार की बाधा और समस्या को पार कर सकते हैं। भजन की लय और बोल उनकी महिमा का वर्णन करते हैं, जिससे भक्तों में ऊर्जा और उत्साह का संचार होता है। “वीर हनुमाना अति बलवाना” भजन न केवल हनुमान जी की वीरता को उजागर करता है, बल्कि भक्तों को भी प्रेरित करता है कि वे अपने जीवन में हनुमान जी के गुणों को अपनाएं—साहस, समर्पण, और भक्ति। इस प्रकार, यह भजन हर भक्त के लिए एक अनमोल उपहार है, जो उन्हें हनुमान जी की कृपा और आशीर्वाद की ओर ले जाता है।

यहाँ से आप रिद्धि सिद्धि के दाता सुनो गणपति | मुझे अपने ही रंग में रंगले मेरे यार सांवरे | सजा दो घर को गुलशन सा | नैनो में नींद भर आई | छम छम नाचे देखो वीर हनुमाना | मेरा आपकी कृपा से सब काम हो रहा है | कालो की काल महाकाली भवानी भजन भी देख सकते हैं


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|| Veer Hanumana Lyrics Hindi ||

वीर हनुमाना अति बलवाना,
राम नाम रसियो रे,
प्रभु मन बसियो रे ।
वीर हनुमाना अति बलवाना,
राम नाम रसियो रे,
प्रभु मन बसियो रे ।

जो कोई आवे, अरज लगावे,
सबकी सुनियो रे,
प्रभु मन बसियो रे ।
जो कोई आवे, अरज लगावे,
सबकी सुनियो रे,
प्रभु मन बसियो रे ।

वीर हनुमाना अति बलवाना,
राम नाम रसियो रे,
प्रभु मन बसियो रे ।
वीर हनुमाना अति बलवाना,
राम नाम रसियो रे,
प्रभु मन बसियो रे ।

बजरंग बाला फेरू थारी माला,
संकट हरियो रे,
प्रभु मन बसियो रे ।
बजरंग बाला फेरू थारी माला,
संकट हरियो रे,
प्रभु मन बसियो रे ।

वीर हनुमाना अति बलवाना,
राम नाम रसियो रे,
प्रभु मन बसियो रे ।
वीर हनुमाना अति बलवाना,
राम नाम रसियो रे,
प्रभु मन बसियो रे ।

ना कोई संगी, हाथ की तंगी,
जल्दी हरियो रे,
प्रभु मन बसियो रे ।
ना कोई सांगी, हांत की तंगी,
जल्दी हरियो रे,
प्रभु मन बसियो रे ।

वीर हनुमाना अति बलवाना,
राम नाम रसियो रे,
प्रभु मन बसियो रे ।
वीर हनुमाना अति बलवाना,
राम नाम रसियो रे,
प्रभु मन बसियो रे ।

अर्जी हमारी, मर्ज़ी तुम्हारी,
कृपा करियो रे,
प्रभु मन बसियो रे ।
अर्जी हमारी, मर्ज़ी तुम्हारी,
कृपा करियो रे,
प्रभु मन बसियो रे ।

वीर हनुमाना अति बलवाना,
राम नाम रसियो रे,
प्रभु मन बसियो रे ।
वीर हनुमाना अति बलवाना,
राम नाम रसियो रे,
प्रभु मन बसियो रे ।

रामजी का प्यारा, सिया का दुलारा,
संकट हरियो रे,
प्रभु मन बसियो रे ।
रामजी का प्यारा, सिया का दुलारा,
संकट हरियो रे,
प्रभु मन बसियो रे ।

वीर हनुमाना अति बलवाना,
राम नाम रसियो रे,
प्रभु मन बसियो रे ।
वीर हनुमाना अति बलवाना,
राम नाम रसियो रे,
प्रभु मन बसियो रे ।

|| Veer Hanumana Lyrics English ||

Veer Hanumana Ati Balwana,
Ram Naam Rasiyo Re,
Prabhu Man Basiyo Re ।
Veer Hanumana Ati Balwana,
Ram Naam Rasiyo Re,
Prabhu Man Basiyo Re ।

Jo Koi Aave, Araj Lagave,
Sabaki Suniyo Re,
Prabhu Man Basiyo Re ।
Jo Koi Aave, Araj Lagave,
Sabaki Suniyo Re,
Prabhu Man Basiyo Re ।
॥ Veer Hanumana Ati Balwana …॥

Bajarang Bala Pheru Thari Mala,
Sankat Hariyo Re,
Prabhu Man Basiyo Re ।
Bajarang Bala Pheru Thari Mala,
Sankat Hariyo Re,
Prabhu Man Basiyo Re ।
॥ Veer Hanumana Ati Balwana …॥

Na Koi Sangi, Hath Ki Tangi,
Jaldi Hariyo Re,
Prabhu Man Basiyo Re ।
Na Koi Sangi, Hant Ki Tangi,
Jaldi Hariyo Re,
Prabhu Man Basiyo Re ।
॥ Veer Hanumana Ati Balwana …॥

Arji Hamari, Marzi Tumhari,
Krpa Kariyo Re,
Prabhu Man Basiyo Re ।
Arji Hamari, Marzi Tumhari,
Krpa Kariyo Re,
Prabhu Man Basiyo Re ।
॥ Veer Hanumana Ati Balwana …॥

Ramji Ka Pyara, Siya Ka Dulara,
Sankat Hariyo Re,
Prabhu Man Basiyo Re ।
Ramji Ka Pyara, Siya Ka Dulara,
Sankat Hariyo Re,
Prabhu Man Basiyo Re ।
॥ Veer Hanumana Ati Balwana …॥

Veer Hanumana Ati Balwana,
Ram Naam Rasiyo Re,
Prabhu Man Basiyo Re ।
Veer Hanumana Ati Balwana,
Ram Naam Rasiyo Re,
Prabhu Man Basiyo Re ।



भगवान हनुमान की महिमा का संक्षिप्त परिचय:

भगवान हनुमान, जिन्हें रामभक्त और महाबीर के नाम से भी जाना जाता है, हिंदू धर्म में अत्यंत महत्वपूर्ण और पूजनीय देवता हैं। उन्हें शक्ति, साहस, और निस्वार्थ भक्ति का प्रतीक माना जाता है। रामायण में हनुमान जी की भूमिका अविस्मरणीय है; वे भगवान राम के अनन्य भक्त हैं और उनके मिशन में प्रमुख सहयोगी। हनुमान जी के चरित्र में अद्भुत बल और करुणा का मेल है, जो उन्हें भक्तों के दिलों में एक विशेष स्थान दिलाता है।

उनके प्रति श्रद्धा केवल एक धार्मिक आस्था नहीं, बल्कि आत्मविश्वास और साहस की प्रेरणा भी है। हनुमान जी का हर कार्य निस्वार्थ है, और उनके द्वारा किए गए अद्वितीय कार्यों ने उन्हें अमर बना दिया है। उनकी महिमा का गुणगान आज भी भक्तों के भजनों और मंत्रों में किया जाता है, जिससे भक्तों में आस्था और उत्साह का संचार होता है।

भजन के महत्व और उद्देश्य का वर्णन:

वीर हनुमाना अति बलवाना भजन का उद्देश्य भगवान हनुमान की महिमा का गुणगान करना और भक्तों में उनकी शक्ति और साहस को जागृत करना है। इस भजन के माध्यम से, भक्त अपनी कठिनाइयों को दूर करने के लिए हनुमान जी की कृपा का आह्वान करते हैं। भजन का महत्व इस तथ्य में निहित है कि यह भक्तों को एकजुट करता है, उन्हें एक सामूहिक श्रद्धा की भावना में बांधता है। भजन का गान एक आध्यात्मिक अनुभव प्रदान करता है, जो भक्तों को हनुमान जी की उपस्थिति का अहसास कराता है।

इस प्रकार, यह भजन न केवल भक्ति का एक साधन है, बल्कि यह हनुमान जी की प्रेरणा का स्रोत भी है, जो भक्तों को हर कठिनाई का सामना करने के लिए प्रोत्साहित करता है। भजन के माध्यम से, भक्तों को यह सिखाया जाता है कि अगर वे अपने हृदय में हनुमान जी की भक्ति रखते हैं, तो जीवन की हर समस्या हल हो सकती है।

हनुमान जी के अद्वितीय बल और साहस का गुणगान:

इस भजन में हनुमान जी की अद्वितीय बल और साहस का विशेष रूप से वर्णन किया गया है। हनुमान जी को उन शक्तियों के लिए जाना जाता है, जिनका कोई अंत नहीं है। वे न केवल शारीरिक रूप से शक्तिशाली हैं, बल्कि मानसिक और आध्यात्मिक शक्ति में भी उनका कोई मुकाबला नहीं। भजन के बोल उन्हें एक वीर योद्धा के रूप में प्रस्तुत करते हैं, जो हमेशा अपने भक्तों के साथ रहते हैं।

उनकी वीरता का उल्लेख करते हुए, भजन में यह संदेश दिया जाता है कि साहस और निस्वार्थता के साथ कोई भी बाधा पार की जा सकती है। हनुमान जी के बलिदान और संघर्षों का ये गुणगान भक्तों को प्रेरित करता है कि वे भी कठिनाइयों का सामना करने के लिए हिम्मत न हारें। भजन में उनकी शक्ति की महत्ता को बताते हुए, यह दर्शाया जाता है कि जब भक्त हनुमान जी की शरण में जाते हैं, तो उनके अद्वितीय बल का सहारा उन्हें हर परिस्थिति से बाहर निकाल सकता है।

उनके शक्तिशाली रूप और क्षमता का वर्णन:

भजन में हनुमान जी के शक्तिशाली रूप और उनकी अद्वितीय क्षमताओं का वर्णन किया गया है। उन्हें एक महाबीर, जो भव्य शरीर और अद्भुत शक्तियों से संपन्न हैं, के रूप में प्रस्तुत किया जाता है। उनकी उपस्थिति में अपार शक्ति और आत्मविश्वास का प्रतीक है। हनुमान जी की छवि में उनके मुँह में राम का नाम है, जो उन्हें शक्ति और ऊर्जा प्रदान करता है। इस भजन में उनके शक्तिशाली रूप के साथ-साथ उनकी उड़ने की क्षमता, विशाल रूप, और अनंत बल का भी उल्लेख होता है।

उनका शरीर चतुर्मुखी है, जो उन्हें हर दिशा में सहायता करने में सक्षम बनाता है। यह दर्शाता है कि हनुमान जी न केवल शारीरिक रूप से बल्कि आध्यात्मिक रूप से भी अपने भक्तों की रक्षा करने के लिए हमेशा तत्पर रहते हैं। इस प्रकार, भजन हनुमान जी की ताकत और क्षमताओं को भक्तों के समक्ष प्रस्तुत करके उन्हें प्रेरित करता है कि वे अपने भीतर भी इसी प्रकार की शक्ति विकसित करें।

भक्तों की श्रद्धा और हनुमान जी के प्रति विश्वास का महत्व:

भजन में भक्तों की श्रद्धा और भगवान हनुमान के प्रति विश्वास की महत्ता को उजागर किया गया है। जब भक्त हनुमान जी पर भरोसा करते हैं, तो उन्हें कठिनाइयों का सामना करने के लिए शक्ति और साहस मिलता है। भजन के शब्द भक्तों को याद दिलाते हैं कि हनुमान जी हमेशा उनकी रक्षा करने के लिए तत्पर हैं। उनकी आस्था में ही शक्ति है, जो उन्हें आत्मविश्वास और सुरक्षा का अनुभव कराती है। श्रद्धा केवल एक धार्मिक भावना नहीं है, बल्कि यह एक मानसिक स्थिति है, जो व्यक्ति को कठिनाई में मजबूत बनाती है।

जब भक्त पूरी श्रद्धा से हनुमान जी का नाम लेते हैं, तो वे अपनी समस्याओं का समाधान पाते हैं। इस भजन के माध्यम से, यह संदेश दिया जाता है कि श्रद्धा और विश्वास के साथ हनुमान जी की शरण में जाना चाहिए, क्योंकि यही उनके जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने का मार्ग है। भक्तों की भक्ति और विश्वास हनुमान जी की कृपा का आधार बनता है, जो उन्हें हर चुनौती का सामना करने की क्षमता प्रदान करता है।

भजन में भक्ति की भावना और उसकी शक्ति का विवरण:

वीर हनुमाना अति बलवाना भजन में भक्ति की भावना को गहराई से महसूस किया जा सकता है। भक्ति एक ऐसी शक्ति है जो व्यक्ति को आत्मिक और मानसिक शांति प्रदान करती है। इस भजन में हनुमान जी के प्रति निस्वार्थ भक्ति का वर्णन किया गया है, जो भक्तों को उनके गुणों की ओर आकर्षित करता है। भक्ति का अर्थ केवल पूजा करना नहीं, बल्कि हनुमान जी के साथ एक गहरा संबंध बनाना है। जब भक्त इस भजन का गान करते हैं, तो वे हनुमान जी के प्रति अपनी आस्था और प्यार व्यक्त करते हैं।

भक्ति की इस भावना में एक अद्वितीय ऊर्जा होती है, जो भक्तों को प्रेरित करती है। भजन सुनते या गाते समय, भक्तों का मन प्रसन्न होता है और उनके भीतर आत्मविश्वास का संचार होता है। यह भक्ति की शक्ति ही है, जो भक्तों को कठिनाइयों का सामना करने की ताकत देती है और उन्हें हनुमान जी की कृपा का अनुभव कराती है। इस प्रकार, भजन भक्ति को एक गहन अनुभव में बदल देता है, जिससे भक्तों की आत्मा को सुकून मिलता है।

उनके प्रमुख कार्यों का उल्लेख, जैसे संजीवनी लाने और रावण के नाश का वर्णन:

इस भजन में हनुमान जी के प्रमुख कार्यों का विस्तार से वर्णन किया गया है, जो उनकी शक्ति और भक्ति को दर्शाते हैं। संजीवनी बूटी लाने की कथा विशेष रूप से उल्लेखनीय है, जिसमें हनुमान जी ने लक्ष्मण को जीवनदान देने के लिए हिमालय से अद्भुत औषधि लाने का साहस किया। यह घटना न केवल उनकी शक्ति का प्रतीक है, बल्कि उनके निस्वार्थ प्रेम और भक्ति का भी उदाहरण प्रस्तुत करती है।

इसी प्रकार, रावण का नाश करना भी उनके अद्वितीय पराक्रम का प्रमाण है, जहाँ उन्होंने अपने साहस और बुद्धि से धर्म की रक्षा की। भजन में इन कार्यों का उल्लेख करके यह दिखाया गया है कि जब भक्त सच्चे दिल से हनुमान जी का स्मरण करते हैं, तो वे भी अपने जीवन में ऐसी प्रेरणाएँ प्राप्त कर सकते हैं। इन घटनाओं के माध्यम से, भक्तों को यह सिखाया जाता है कि साहस, समर्पण और भक्ति के साथ कोई भी कार्य संभव है, और वे अपने जीवन में भी ऐसे कार्य कर सकते हैं।

भजन में उनके कार्यों के माध्यम से दी गई शिक्षाएँ:

वीर हनुमाना अति बलवाना भजन में हनुमान जी के कार्यों के माध्यम से कई महत्वपूर्ण शिक्षाएँ दी गई हैं। ये शिक्षाएँ न केवल धार्मिक बल्कि जीवन के विभिन्न पहलुओं को छूने वाली हैं। जैसे, हनुमान जी का संजीवनी लाना यह सिखाता है कि जब हम सच्चे दिल से किसी के लिए प्रयास करते हैं, तो असंभव कार्य भी संभव हो जाते हैं। रावण के खिलाफ उनकी लड़ाई यह दिखाती है कि बुराई का सामना करने के लिए साहस और धैर्य की आवश्यकता होती है।

भजन में इस बात पर जोर दिया गया है कि जब हम हनुमान जी की तरह निस्वार्थता और सेवा का भाव रखते हैं, तो हम अपने जीवन में सकारात्मक बदलाव ला सकते हैं। इन शिक्षाओं के माध्यम से, भक्तों को प्रेरणा मिलती है कि वे अपने भीतर हनुमान जी के गुणों को अपनाएं, जैसे साहस, समर्पण और भक्ति, जिससे वे जीवन की हर चुनौती का सामना कर सकें। इस प्रकार, भजन हनुमान जी के कार्यों को आदर्श मानते हुए उन्हें अनुकरणीय मानता है।

भजन से मिलने वाली प्रेरणा और उत्साह का वर्णन:

इस भजन से भक्तों को एक अद्वितीय प्रेरणा और उत्साह प्राप्त होता है। वीर हनुमाना अति बलवाना का गान करते समय भक्तों के मन में हनुमान जी की अद्भुत शक्ति और साहस का एहसास होता है। भजन की धुन और बोल, दोनों मिलकर भक्तों में एक सकारात्मक ऊर्जा का संचार करते हैं। जब भक्त इस भजन को गाते हैं, तो वे अपने भीतर हनुमान जी की भक्ति की भावना को जगाते हैं, जो उन्हें कठिनाइयों का सामना करने के लिए प्रोत्साहित करती है।

यह प्रेरणा भक्तों को यह विश्वास दिलाती है कि जब वे हनुमान जी की शरण में होते हैं, तो कोई भी कठिनाई उन्हें रोक नहीं सकती। भजन का गान एक सामूहिक उत्साह उत्पन्न करता है, जिससे भक्त एक-दूसरे के साथ मिलकर हनुमान जी की महिमा का गुणगान करते हैं। इस प्रकार, यह भजन न केवल व्यक्तिगत रूप से, बल्कि सामूहिक रूप से भी भक्तों में सकारात्मकता और ऊर्जा का संचार करता है।

जीवन में हनुमान जी के गुणों को अपनाने का संदेश:

वीर हनुमाना अति बलवाना भजन जीवन में हनुमान जी के गुणों को अपनाने का एक सशक्त संदेश देता है। भजन के माध्यम से यह बताया जाता है कि हनुमान जी की निस्वार्थता, साहस, और भक्ति को अपने जीवन में उतारना कितना महत्वपूर्ण है। हनुमान जी का चरित्र हमें सिखाता है कि हमें अपनी कठिनाइयों का सामना करने के लिए हमेशा निडर रहना चाहिए। जब हम हनुमान जी की तरह अपने कार्यों में समर्पित और निस्वार्थ होते हैं, तो हम जीवन में असाधारण परिणाम प्राप्त कर सकते हैं।

यह भजन भक्तों को यह प्रेरणा देता है कि वे हनुमान जी की भक्ति को अपने जीवन में शामिल करें, जिससे वे भी उनके गुणों का अनुसरण कर सकें। इस प्रकार, यह भजन जीवन के संघर्षों में प्रेरणा देने के साथ-साथ व्यक्तित्व विकास का मार्ग भी प्रशस्त करता है।

भजन की संगीत शैली और लय का महत्व:

वीर हनुमाना अति बलवाना भजन की संगीत शैली और लय का विशेष महत्व है। भजन की धुन भक्तों को उत्साहित करने और उनकी भक्ति को जागृत करने में सहायक होती है। इसका ताल, लय और रिदम ऐसा होता है कि भक्त सहजता से इसे गा सकें और एक सामूहिक भावना का अनुभव कर सकें। भजन की संगीत शैली में पारंपरिक और भक्तिभाव की झलक होती है, जो इसे और भी आकर्षक बनाती है।

भजन का संगीत भक्तों को न केवल आनंदित करता है, बल्कि उन्हें मानसिक शांति और आत्मिक ऊर्जा भी प्रदान करता है। यह लय और संगीत का संयोजन भक्तों को एक सकारात्मक माहौल में ले जाता है, जहाँ वे हनुमान जी की महिमा का ध्यान करते हैं। इस प्रकार, भजन की संगीत शैली न केवल भक्ति को प्रगाढ़ करती है, बल्कि एक सामाजिक बंधन और सामूहिक शक्ति का अनुभव भी कराती है।

भजन के गान का प्रभाव और उसकी ऊर्जा:

वीर हनुमाना अति बलवाना भजन का गान एक विशेष प्रभाव पैदा करता है। जब भक्त इस भजन को गाते हैं, तो उनकी आत्मा में एक नई ऊर्जा का संचार होता है। भजन के बोल और संगीत की लय उन्हें हनुमान जी के प्रति अपनी भक्ति और आस्था को प्रकट करने का अवसर देती है। भजन का सामूहिक गान भक्तों के बीच एकता की भावना को जागृत करता है, जिससे वे सभी मिलकर एक सकारात्मक वातावरण का निर्माण करते हैं।

इसके प्रभाव से भक्त अपने भीतर आत्मविश्वास और साहस का अनुभव करते हैं। भजन के गान के दौरान उत्पन्न ऊर्जा उन्हें जीवन की चुनौतियों का सामना करने के लिए प्रेरित करती है। इस प्रकार, भजन का गान केवल एक धार्मिक क्रिया नहीं, बल्कि एक आध्यात्मिक अनुभव है, जो भक्तों के मन और आत्मा को जागरूक करता है। यह ऊर्जा उन्हें आगे बढ़ने और जीवन की कठिनाइयों को पार करने की प्रेरणा देती है।

108 Names of Hanumanji – हनुमानजी के 108 नाम: लेकिन जानिए 11 खास नामों का रहस्य

Names of Hanumanji – हनुमानजी के कई नाम है और हर नाम के पीछे कुछ ना कुछ रहस्य है। हनुमानजी के लगभग 108 नाम बताए जाते हैं। वैसे प्रमुख रूप से हनुमानजी के 12 नाम बताए जाते हैं। बलशालियों में सर्वश्रेष्ठ है हनुमानजी। कलिकाल में उन्हीं की भक्ति से भक्त का उद्धार होता है। जो जपे हनुमानजी का नाम संकट कटे मिटे सब पीड़ा और पूर्ण हो उसके सारे काम। तो आओ जानते हैं कि हनुमानजी के नामों का रहस्य। 

Chalisa PDF पर पढ़े: संकट मोचन हनुमान अष्टक | हनुमान चालीसा | श्री हनुमान अमृतवाणी | सुंदरकांड पाठ | बजरंग बाण | हनुमान चालीसा पढ़ने के 21 चमत्कारिक फायदे | Hanuman Chalisa MP3 Download

Know the Secret of 11 Special Names of Hanumanji

  1. मारुति : हनुमानजी का बचपना का यही नाम है। यह उनका असली नाम भी माना जाता है।
  2. अंजनी पुत्र : हनुमान की माता का नाम अंजना था। इसीलिए उन्हें अंजनी पुत्र या आंजनेय भी कहा जाता है।
  3. केसरीनंदन : हनुमानजी के पिता का नाम केसरी था इसीलिए उन्हें केसरीनंदन भी कहा जाता है।
  4. हनुमान : जब बालपन में मारुति ने सूर्य को अपने मुंह में भर लिया था तो इंद्र ने क्रोधित होकर बाल हनुमान पर अपने वज्र से वार किया। वह वज्र जाकर मारुति की हनु यानी कि ठोड़ी पर लगा। इससे उनकी ठोड़ी टूट गई इसीलिए उन्हें हनुमान कहा जाने लगा।
  5. पवन पुत्र : उन्हें वायु देवता का पुत्र भी माना जाता है, इसीलिए इनका नाम पवन पुत्र हुआ। उस काल में वायु को मारुत भी कहा जाता था। मारुत अर्थात वायु, इसलिए उन्हें मारुति नंदन भी कहा जाता है। वैसे उनमें पवन के वेग के समान उड़ने की शक्ति होने के कारण भी यह नाम दिया गया।
  6. शंकरसुवन : हनुमाजी को शंकर सुवन अर्थात उनका पुत्र भी माना जाता है क्योंकि वे रुद्रावतार थे।
  7. बजरंगबली : वज्र को धारण करने वाले और वज्र के समान कठोर अर्थात बलवान शरीर होने के कारण उन्हें वज्रांगबली कहा जाने लगा। अर्थात वज्र के समान अंग वाले बलशाली। लेकिन यह शब्द ब्रज और अवधि के संपर्क में आकर बजरंगबली हो गया। बोलचाल की भाषा में बना बजरंगबली भी सुंदर शब्द है।
  8. कपिश्रेष्ठ : हनुमानजी का जन्म कपि नामक वानर जाति में हुआ था। रामायणादि ग्रंथों में हनुमानजी और उनके सजातीय बांधव सुग्रीव अंगदादि के नाम के साथ ‘वानर, कपि, शाखामृग, प्लवंगम’ आदि विशेषण प्रयुक्त किए गए। उनकी पुच्छ, लांगूल, बाल्धी और लाम से लंकादहन इसका प्रमाण है कि वे वानर थे। रामायण में वाल्मीकिजी ने जहां उन्हें विशिष्ट पंडित, राजनीति में धुरंधर और वीर-शिरोमणि प्रकट किया है, वहीं उनको लोमश ओर पुच्छधारी भी शतश: प्रमाणों में व्यक्त किया है। अत: सिद्ध होता है कि वे जाति से वानर थे।
  9. वानर यूथपति : हनुमानजी को वानर यूथपति भी कहा जाता था। वानर सेना में हर झूंड का एक सेनापति होता था जिसे यूथपति कहा जाता था। अंगद, दधिमुख, मैन्द- द्विविद, नल, नील और केसरी आदि कई यूथपति थे। 
  10. रामदूत : प्रभु श्रीराम का हर काम करने वाले दूत।
  11. पंचमुखी हनुमान : पातल लोक में अहिरावण का वध करने जब वे गए तो वहां पांच दीपक उन्हें पांच जगह पर पांच दिशाओं में मिले जिसे अहिरावण ने मां भवानी के लिए जलाए थे। इन पांचों दीपक को एक साथ बुझाने पर अहिरावन का वध हो जाएगा इसी कारण हनुमान जी ने पंचमुखी रूप धरा। उत्तर दिशा में वराह मुख, दक्षिण दिशा में नरसिंह मुख, पश्चिम में गरुड़ मुख, आकाश की तरफ हयग्रीव मुख एवं पूर्व दिशा में हनुमान मुख।  इस रूप को धरकर उन्होंने वे पांचों दीप बुझाए तथा अहिरावण का वध कर राम,लक्ष्मण को उस से मुक्त किया। मरियल नामक दानव को मारने के लिए भी यह रूप धरा था।

|| दोहा ||

उर प्रतीति दृढ़, सरन ह्वै, पाठ करै धरि ध्यान।
बाधा सब हर, करैं सब काम सफल हनुमान॥ 

|| स्तुति || 

हनुमान अंजनी सूत् र्वायु पुत्रो महाबलः।
रामेष्टः फाल्गुनसखा पिङ्गाक्षोऽमित विक्रमः॥

उदधिक्रमणश्चैव सीता शोकविनाशनः।
लक्ष्मणप्राणदाता च दशग्रीवस्य दर्पहा॥

एवं द्वादश नामानि कपीन्द्रस्य महात्मनः।
सायंकाले प्रबोधे च यात्राकाले च यः पठेत्॥

तस्य सर्वभयं नास्ति रणे च विजयी भवेत्।


यहां पढ़ें हनुमानजी के 12 चमत्कारिक नाम

  1. हनुमान हैं (टूटी हनु).
  2. अंजनी सूत, (माता अंजनी के पुत्र).
  3. वायुपुत्र, (पवनदेव के पुत्र).
  4. महाबल, (एक हाथ से पहाड़ उठाने और एक छलांग में समुद्र पार करने वाले महाबली).
  5. रामेष्ट (राम जी के प्रिय).
  6. फाल्गुनसख (अर्जुन के मित्र).
  7. पिंगाक्ष (भूरे नेत्र वाले).
  8. अमितविक्रम, ( वीरता की साक्षात मूर्ति) 
  9. उदधिक्रमण (समुद्र को लांघने वाले).
  10. सीताशोकविनाशन (सीताजी के शोक को नाश करने वाले).
  11. लक्ष्मणप्राणदाता (लक्ष्मण को संजीवनी बूटी द्वारा जीवित करने वाले).
  12. दशग्रीवदर्पहा (रावण के घमंड को चूर करने वाले).

हनुमान जी के 108 नाम

  1. भीमसेन सहायकृते – भीमसेन के सहायक (भीम के मित्र)
  2. कपीश्वराय – वानरों के राजा
  3. महाकायाय – विशाल शरीर वाले
  4. कपिसेनानायक – वानर सेना के नेता
  5. कुमार ब्रह्मचारिणे – कुंवारे और ब्रह्मचर्य पालन करने वाले
  6. महाबलपराक्रमी – महान बल और वीरता वाले
  7. रामदूताय – राम के दूत
  8. वानराय – वानरों में श्रेष्ठ
  9. केसरी सुताय – केसरी के पुत्र
  10. शोक निवारणाय – दुःख दूर करने वाले
  11. अंजनागर्भसंभूताय – अंजना के गर्भ से उत्पन्न
  12. विभीषणप्रियाय – विभीषण को प्रिय
  13. वज्रकायाय – वज्र के समान शरीर वाले
  14. रामभक्ताय – भगवान राम के भक्त
  15. लंकापुरीविदाहक – लंका को जलाने वाले
  16. सुग्रीव सचिवाय – सुग्रीव के मंत्री
  17. पिंगलाक्षाय – पीली आंखों वाले
  18. हरिमर्कटमर्कटाय – हरि के प्रिय मर्कट (बंदर)
  19. रामकथालोलाय – राम कथा में मस्त रहने वाले
  20. सीतान्वेणकर्त्ता – सीता की खोज करने वाले
  21. वज्रनखाय – वज्र के समान नख वाले
  22. रुद्रवीर्य – रुद्र के वीर्य से उत्पन्न
  23. वायुपुत्र – वायु देव के पुत्र
  24. रामभक्त – राम के सच्चे भक्त
  25. वानरेश्वर – वानरों के भगवान
  26. ब्रह्मचारी – ब्रह्मचर्य का पालन करने वाले
  27. आंजनेय – अंजना का पुत्र
  28. महावीर – महान वीर
  29. हनुमत – हनुमान नाम वाले
  30. मारुतात्मज – वायु देवता के पुत्र
  31. तत्वज्ञानप्रदाता – तत्व ज्ञान देने वाले
  32. सीता मुद्राप्रदाता – सीता की अंगूठी देने वाले
  33. अशोकवह्रिकक्षेत्रे – अशोकवाटिका में कर्तव्य निर्वाह करने वाले
  34. सर्वमायाविभंजन – सभी माया को दूर करने वाले
  35. सर्वबन्धविमोत्र – सभी बंधनों से मुक्त करने वाले
  36. रक्षाविध्वंसकारी – राक्षसों का विनाश करने वाले
  37. परविद्यापरिहारी – शत्रु की विद्या नष्ट करने वाले
  38. परमशौर्यविनाशय – शत्रुओं के महान शौर्य को नष्ट करने वाले
  39. परमंत्र निराकर्त्रे – शत्रु मंत्रों का नाश करने वाले
  40. परयंत्र प्रभेदकाय – शत्रु यंत्रों को नष्ट करने वाले
  41. सर्वग्रह निवासिने – ग्रहों का निवास करने वाले
  42. सर्वदु:खहराय – सभी दुःखों को दूर करने वाले
  43. सर्वलोकचारिणे – सभी लोकों में विचरण करने वाले
  44. मनोजवय – मन की गति से भी तेज
  45. पारिजातमूलस्थाय – पारिजात वृक्ष के नीचे वास करने वाले
  46. सर्वमूत्ररूपवते – समस्त स्वरूप धारण करने वाले
  47. सर्वतंत्ररूपिणे – समस्त तंत्रों के ज्ञाता
  48. सर्वयंत्रात्मकाय – समस्त यंत्रों के स्वामी
  49. सर्वरोगहराय – सभी रोगों का नाश करने वाले
  50. प्रभवे – प्रभु के रूप में
  51. सर्वविद्यासम्पत – सभी विद्या के स्वामी
  52. भविष्य चतुरानन – भविष्य को जानने वाले
  53. रत्नकुण्डल पाहक – रत्न के कुंडल धारण करने वाले
  54. चंचलद्वाल – चंचल पूंछ वाले
  55. गंधर्वविद्यात्त्वज्ञ – गंधर्व विद्या के ज्ञाता
  56. कारागृहविमोक्त्री – कारागृह से मुक्त करने वाले
  57. सर्वबंधमोचकाय – सभी बंधनों से मुक्त करने वाले
  58. सागरोत्तारकाय – समुद्र को पार करने वाले
  59. प्रज्ञाय – बुद्धिमान
  60. प्रतापवते – प्रतापी
  61. बालार्कसदृशनाय – बाल सूर्य के समान तेजस्वी
  62. दशग्रीवकुलान्तक – रावण के कुल का अंत करने वाले
  63. लक्ष्मण प्राणदाता – लक्ष्मण को जीवनदान देने वाले
  64. महाद्युतये – महान तेज वाले
  65. चिरंजीवने – अमर रहने वाले
  66. दैत्यविघातक – दैत्यों का नाश करने वाले
  67. अक्षहन्त्रे – अक्षय कुमार का वध करने वाले
  68. कालनाभाय – काल के अभ्यंतर रहने वाले
  69. कांचनाभाय – स्वर्णमयी देह वाले
  70. पंचवक्त्राय – पांच मुख वाले
  71. महातपसी – महान तपस्वी
  72. लंकिनीभंजन – लंकिनी को हराने वाले
  73. श्रीमते – ऐश्वर्यवान
  74. सिंहिकाप्राणहर्ता – सिंहिका का वध करने वाले
  75. लोकपूज्याय – समस्त लोकों में पूजनीय
  76. धीराय – धीर और साहसी
  77. शूराय – शूरवीर
  78. दैत्यकुलान्तक – दैत्य कुल का अंत करने वाले
  79. सुरारर्चित – देवताओं द्वारा पूजित
  80. महातेजस – महान तेजस्वी
  81. रामचूड़ामणिप्रदाय – राम को सीता की चूड़ामणि देने वाले
  82. कामरूपिणे – इच्छानुसार रूप धारण करने वाले
  83. मैनाकपूजिताय – मैनाक पर्वत द्वारा पूजित
  84. मार्तण्डमण्डलाय – सूर्य मंडल में विचरण करने वाले
  85. विनितेन्द्रिय – इंद्रियों को वश में करने वाले
  86. रामसुग्रीव सन्धात्रे – राम और सुग्रीव का मिलन कराने वाले
  87. महारावण मर्दनाय – रावण का वध करने वाले
  88. स्फटिकाभाय – स्फटिक के समान शुद्ध
  89. वागधीक्षाय – वाणी के ज्ञाता
  90. नवव्याकृतपंडित – व्याकरण के महान पंडित
  91. चतुर्बाहवे – चार भुजाओं वाले
  92. दीनबन्धवे – दीनों के बंधु
  93. महात्मने – महान आत्मा वाले
  94. भक्तवत्सलाय – भक्तों पर स्नेह करने वाले
  95. अपराजित – कभी पराजित न होने वाले
  96. शुचये – पवित्र
  97. वाग्मिने – वाणी के धनी
  98. दृढ़व्रताय – दृढ़ निश्चयी
  99. कालनेमि प्रमथनाय – कालनेमि का वध करने वाले
  100. दान्ताय – संयमी
  101. शान्ताय – शांत स्वभाव वाले
  102. प्रसनात्मने – प्रसन्नचित्त वाले
  103. शतकण्ठमदापहते – रावण के अभिमान को नष्ट करने वाले
  104. योगिने – योगी
  105. अनघ – दोषरहित
  106. अकाय – शरीर से परे
  107. तत्त्वगम्य – तत्व का ज्ञान कराने वाले
  108. लंकारि – लंका पर विजय प्राप्त करने वाले

हनुमान जी की जन्म कथा: एक दिव्य और प्रेरणादायक कथा

हनुमान जी का जन्म एक अद्भुत और दिव्य कथा से जुड़ा है, जो हिंदू धर्म में विशेष महत्व रखता है। उनकी उत्पत्ति त्रेता युग में हुई, और वे शक्ति, भक्ति, और बुद्धि के प्रतीक माने जाते हैं। हनुमान जी का जन्म भगवान शिव के अवतार के रूप में हुआ था। यह कथा इस प्रकार है:

अंजना और केसरी की कथा

हनुमान जी की माता अंजना एक अप्सरा थीं, जिनका नाम पूर्व जन्म में “पुंजिकस्थला” था। उन्होंने किसी ऋषि का अपमान किया था, जिसके कारण उन्हें शाप मिला कि वे पृथ्वी पर वानरी बनेंगी। इस शाप से मुक्ति पाने के लिए अंजना ने कठोर तपस्या की। उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें वरदान दिया कि उनका पुत्र शिव का अंश होगा, जो महान बलशाली और गुणवान होगा।

अंजना का विवाह केसरी से हुआ, जो वानरों के राजा थे और अपने साहस और वीरता के लिए प्रसिद्ध थे। दोनों ने संतान की प्राप्ति के लिए गहन तपस्या की। केसरी ने भी भगवान शिव की आराधना की और शिव जी ने उनके पुत्र रूप में जन्म लेने का आशीर्वाद दिया।

वायु देव का आशीर्वाद

जब अंजना ने तपस्या की, उसी समय भगवान विष्णु ने राम अवतार लेने का निर्णय किया। शिव जी ने अपने अंश को पृथ्वी पर भेजने का निश्चय किया। एक अन्य कथा के अनुसार, राजा दशरथ ने संतान प्राप्ति के लिए यज्ञ किया और यज्ञ का प्रसाद उनकी तीन रानियों को दिया गया। उस समय वायु देव (हवा के देवता) ने एक हिस्से को अंजना के पास पहुँचा दिया, जिससे भगवान शिव का अंश अंजना के गर्भ में प्रविष्ट हुआ।

इस प्रकार, वायु देव ने अंजना की सहायता की और उनके गर्भ से हनुमान जी का जन्म हुआ। इस कारण हनुमान जी को “पवनपुत्र” भी कहा जाता है।

हनुमान जी का जन्म

हनुमान जी का जन्म मंगलवार के दिन हुआ, जो चैत्र मास की पूर्णिमा को माना जाता है। उनका जन्म स्थान सुमेरु पर्वत पर स्थित था। जन्म के समय हनुमान जी का स्वरूप अद्भुत और तेजस्वी था। उनके शरीर पर बालों की सुनहरी आभा थी, उनकी आँखें पिंगल (हल्की पीली) थीं, और उनका शरीर अत्यधिक बलशाली था। उन्होंने जन्म लेते ही अपनी शक्ति का प्रदर्शन किया।

सूर्य को निगलने की घटना

हनुमान जी बाल्यकाल से ही अत्यधिक बलशाली और चंचल थे। एक दिन जब वे छोटे थे, उन्होंने उगते सूर्य को एक लाल फल समझकर उसे खाने के लिए छलांग लगाई। वे इतनी तेज गति से उड़ने लगे कि सूर्य तक पहुँच गए और उसे निगलने का प्रयास किया। इस घटना से सृष्टि में अंधकार छा गया और सभी देवता परेशान हो गए। तब इंद्र ने अपने वज्र से हनुमान जी पर प्रहार किया, जिससे वे मूर्छित हो गए और उनकी ठोड़ी (हनु) टूट गई। इसी कारण उनका नाम “हनुमान” पड़ा।

वायु देव अपने पुत्र को इस प्रकार घायल देख अत्यंत क्रोधित हो गए और उन्होंने वायु का प्रवाह बंद कर दिया, जिससे समस्त जीव संकट में पड़ गए। तब सभी देवताओं ने मिलकर वायु देव को शांत किया और हनुमान जी को अनेक वरदान दिए। ब्रह्मा जी ने उन्हें अमरत्व का वरदान दिया, विष्णु जी ने अपार बल और बुद्धि दी, और इंद्र ने उन्हें वज्र से भी कठोर शरीर का आशीर्वाद दिया।

हनुमानजी के गुण

हनुमान जी अपने बाल्यकाल से ही अद्वितीय शक्ति, बुद्धि और भक्ति के धनी थे। वे भगवान राम के परम भक्त बने और उनके जीवन का उद्देश्य राम सेवा और धर्म की स्थापना में योगदान देना था। उनकी निस्वार्थ भक्ति और सेवाभाव ने उन्हें हिंदू धर्म में एक आदर्श चरित्र बना दिया।

इस प्रकार, हनुमानजी का जन्म एक दिव्य घटना थी, जो भगवान शिव, वायु देव और अंजना की तपस्या और आशीर्वाद से संभव हुआ। वे आज भी लाखों भक्तों के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं और भगवान राम के प्रति उनकी भक्ति अद्वितीय मानी जाती है।

Saraswati Ji Ki Aarti – सरस्वती मां की आरती, ॐ जय सरस्वती माता 2024-25

सरस्वती मां की आरती (Saraswati Ji Ki Aarti) ज्ञान, संगीत, कला, बुद्धि और शिक्षा की हिंदू देवी सरस्वती को छात्रों, विद्वानों और कलाकारों द्वारा पूजा जाता है। उन्हें पवित्रता और बुद्धि का अवतार माना जाता है, जो अपने भक्तों को ज्ञान की ओर ले जाती हैं। सरस्वती आरती उनकी स्तुति में गाया जाने वाला एक भक्ति भजन है, विशेष रूप से वसंत पंचमी जैसे त्योहारों के दौरान, जो ज्ञान और रचनात्मकता के लिए प्रार्थना का प्रतीक है।

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माँ सरस्वती जी – आरती

जय सरस्वती माता,
मैया जय सरस्वती माता ।
सदगुण वैभव शालिनी,
त्रिभुवन विख्याता ॥
जय जय सरस्वती माता…॥

चन्द्रवदनि पद्मासिनि,
द्युति मंगलकारी ।
सोहे शुभ हंस सवारी,
अतुल तेजधारी ॥
जय जय सरस्वती माता…॥

बाएं कर में वीणा,
दाएं कर माला ।
शीश मुकुट मणि सोहे,
गल मोतियन माला ॥
जय जय सरस्वती माता…॥

देवी शरण जो आए,
उनका उद्धार किया ।
पैठी मंथरा दासी,
रावण संहार किया ॥
जय जय सरस्वती माता…॥

विद्या ज्ञान प्रदायिनि,
ज्ञान प्रकाश भरो ।
मोह अज्ञान और तिमिर का,
जग से नाश करो ॥
जय जय सरस्वती माता…॥

धूप दीप फल मेवा,
माँ स्वीकार करो ।
ज्ञानचक्षु दे माता,
जग निस्तार करो ॥
॥ जय सरस्वती माता…॥

माँ सरस्वती की आरती,
जो कोई जन गावे ।
हितकारी सुखकारी,
ज्ञान भक्ति पावे ॥
जय जय सरस्वती माता…॥

जय सरस्वती माता,
जय जय सरस्वती माता ।
सदगुण वैभव शालिनी,
त्रिभुवन विख्याता ॥

Saraswati Mata Ji Ki Aarti

Jay Saraswati Mata,
Maiya Jay Saraswati Mata।
Sadgun Vaibhav Shalini,
Tribhuvan Vikhyata॥
॥ Jay Saraswati Mata…॥

Chandravadani Padmasini,
Dyuti Mangalkari।
Sohe Shubh Hans Sawari,
Atul Tejdhari॥
॥ Jay Saraswati Mata…॥

Bayen Kar Mein Veena,
Dayen Kar Mala।
Sheesh Mukut Mani Sohe,
Gal Motiyan Mala॥
॥ Jay Saraswati Mata…॥

Devi Sharan Jo Aaye,
Unaka Uddhar Kiya।
Paithi Manthara Dasi,
Ravan Sanhar Kiya॥
॥ Jay Saraswati Mata…॥

Vidya Gyan Pradayini,
Gyan Prakash Bharo।
Moh Agyan Aur Timir Ka,
Jag Se Naash Karo॥
॥ Jay Saraswati Mata…॥

Dhoop Deep Phal Meva,
Maa Svikar Karo।
Gyanchakshu De Mata,
Jag Nistar Karo॥
॥ Jay Saraswati Mata…॥

Maa Saraswati Ki Arati,
Jo Koi Jan Gave।
Hitakari Sukhakari,
Gyan Bhakti Pave॥
॥ Jay Saraswati Mata…॥

Jay Saraswati Mata,
Maiya Jay Saraswati Mata।
Sadgun Vaibhav Shalini,
Tribhuvan Vikhyata॥





सरस्वती जी की आरती के लाभ:

विद्या और बुद्धि की प्राप्ति: देवी सरस्वती की नियमित आरती करने से विद्या, बुद्धि और विद्या की प्राप्ति होती है। यह छात्रों के लिए विशेष रूप से फायदेमंद है क्योंकि देवी सरस्वती को ज्ञान और बुद्धि की देवी माना जाता है।

वाणी में सुधार: देवी सरस्वती की आरती करने से वाणी में मधुरता और स्पष्टता आती है। जो लोग अपने सार्वजनिक भाषण, लेखन या किसी भी बोलने के कौशल में सुधार करना चाहते हैं, उन्हें देवी सरस्वती की पूजा से लाभ हो सकता है।

संगीत और कला में प्रवीणता: सरस्वती जी को संगीत और कला की देवी माना जाता है। आरती करने से संगीत, नृत्य, चित्रकला, लेखन आदि कलाओं में दक्षता प्राप्त होती है। कलाकारों के लिए मां सरस्वती की पूजा अत्यंत फलदायी होती है।

मानसिक शांति: सरस्वती जी की आरती से मानसिक शांति मिलती है। इसे नियमित रूप से पढ़ने से मानसिक तनाव कम होता है और एकाग्रता बढ़ती है, जिससे आपको पढ़ाई और काम करने में मदद मिलती है।

आध्यात्मिक विकास: देवी सरस्वती की आरती करने से व्यक्ति का आध्यात्मिक विकास होता है। यह व्यक्ति को आध्यात्मिक शांति और ज्ञान के मार्ग पर ले जाता है, जिससे उसका जीवन सुखी और समृद्ध होता है।

बाधाओं का नाश: देवी सरस्वती की आरती से जीवन में आने वाली बाधाएं दूर हो जाती हैं। यह नकारात्मक शक्तियों और अज्ञानता को दूर करता है और व्यक्ति को सफलता और समृद्धि की ओर ले जाता है।

सरस्वती जी की आरती का महत्व:

भारतीय संस्कृति और धार्मिक परंपराओं में सरस्वती जी की आरती का विशेष महत्व है। मां सरस्वती को ज्ञान, विद्या, संगीत और कला की देवी माना जाता है और भक्त उनकी आरती के माध्यम से उन्हें प्रसन्न करने की कोशिश करते हैं। आरती के दौरान भक्त सकारात्मक ऊर्जा और आध्यात्मिक शक्ति लाने वाली मां सरस्वती की महिमा गाते हैं।

आरती के दौरान, भक्त देवी सरस्वती की स्तुति करते हैं और उनसे ज्ञान और बुद्धि के लिए प्रार्थना करते हैं। यह आरती छात्रों, संगीतकारों, कलाकारों और लेखकों के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि माँ सरस्वती उनकी वाणी, स्मृति और रचनात्मकता में सुधार करती हैं।

मां सरस्वती की आरती शांति और एकाग्रता प्रदान करती है, जिससे व्यक्ति को अपने जीवन में सही दिशा और मार्गदर्शन मिलता है। यह आरती विशेष रूप से वसंत पंचमी के दिन की जाती है, जो सरस्वती पूजा को समर्पित है। इस दिन मां सरस्वती की पूजा करने से व्यक्ति जीवन में सफलता, ज्ञान और समृद्धि प्राप्त कर सकता है।


1. माता सरस्वती की प्रार्थना कैसे करें?

माता सरस्वती की प्रार्थना में सबसे पहले स्वच्छता का ध्यान रखना चाहिए। एक स्वच्छ स्थान पर पूर्व दिशा की ओर मुख करके बैठें। सफेद वस्त्र पहनकर, सफेद पुष्प और सफेद चंदन माता को अर्पित करें। सरस्वती वंदना, जैसे “या कुन्देन्दु तुषार हार धवला“, का उच्चारण करें। इसके बाद, “ॐ ऐं सरस्वत्यै नमः” मंत्र का जाप 108 बार करें। जाप के दौरान एकाग्रचित्त रहें और मन को शुद्ध रखें। माता सरस्वती को प्रसन्न करने के लिए श्रद्धा और विश्वास अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। अंत में, अपने हाथ जोड़कर उनसे विद्या, बुद्धि और कला का आशीर्वाद मांगे। यह प्रार्थना विशेष रूप से सुबह ब्रह्म मुहूर्त में करनी चाहिए। यदि हो सके तो दीपक जलाकर धूप और अगरबत्ती से वातावरण को शुद्ध करें।

2. मां सरस्वती हमारी जुबान पर कब बैठती है?

मां सरस्वती को वाणी, विद्या और बुद्धि की देवी माना जाता है। जब हम पूर्ण श्रद्धा और समर्पण के साथ उनकी आराधना करते हैं, तो मां सरस्वती हमारी जुबान पर विराजमान होती हैं। खासकर विद्यारंभ, परीक्षा, वाणी से जुड़े कार्य, संगीत और कला में उनकी विशेष कृपा होती है। जब हम सच्चे मन से उनकी स्तुति और प्रार्थना करते हैं, तब वह हमें वाणी की स्पष्टता और ज्ञान की गहराई प्रदान करती हैं। वसंत पंचमी के दिन मां सरस्वती की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। इस दिन विद्यारंभ संस्कार भी किया जाता है, जो बच्चों के लिए विशेष रूप से लाभकारी होता है। सरस्वती मंत्रों का जाप और उनकी आराधना करने से जुबान पर मां सरस्वती का स्थायी वास हो सकता है, जिससे व्यक्ति में वाक्पटुता, ज्ञान और तर्कशक्ति का विकास होता है।

3. सरस्वती जी के पति का नाम क्या है?

धार्मिक मान्यताओं और पुराणों के अनुसार, माता सरस्वती ब्रह्मा जी की पत्नी मानी जाती हैं। हालांकि, कुछ पौराणिक कथाओं में सरस्वती को स्वतंत्र देवी के रूप में वर्णित किया गया है, जो ज्ञान और वाणी की शक्ति का प्रतीक हैं। सरस्वती और ब्रह्मा का संबंध सृजन और ज्ञान के रूप में देखा जाता है। ब्रह्मा जी ने इस संसार का निर्माण किया और सरस्वती ने उसे ज्ञान और संगीत की शक्ति प्रदान की। कुछ मान्यताओं में यह भी कहा गया है कि सरस्वती जी अपने आप में पूर्ण हैं और उन्हें किसी पुरुष शक्ति की आवश्यकता नहीं है। उनके स्वरूप को स्वतंत्र और स्वायत्त माना गया है। इसलिए, यह प्रश्न धार्मिक विश्वास और परंपराओं पर निर्भर करता है कि आप किस कथा को अधिक मान्यता देते हैं।

4. सरस्वती माता की आराधना कैसे करें?

सरस्वती माता की आराधना में सच्चे मन से श्रद्धा और भक्ति का होना आवश्यक है। सबसे पहले, एक स्वच्छ स्थान पर सफेद वस्त्र पहनकर बैठें। सरस्वती माता की मूर्ति या चित्र के सामने दीपक जलाएं। उन्हें सफेद पुष्प, धूप और अगरबत्ती अर्पित करें। “ॐ ऐं सरस्वत्यै नमः” मंत्र का जाप करें और सरस्वती वंदना का पाठ करें। सरस्वती माता को सफेद मिठाई और जल अर्पित करें। प्रार्थना के अंत में, उनसे ज्ञान, बुद्धि और वाणी की शुद्धता का आशीर्वाद मांगे। यह पूजा विशेष रूप से विद्यारंभ, परीक्षा, या किसी महत्वपूर्ण कार्य के पहले की जाती है। वसंत पंचमी का दिन माता सरस्वती की पूजा के लिए विशेष माना जाता है।

5. सरस्वती आवाहन क्या है?

सरस्वती आवाहन का अर्थ है माता सरस्वती को विधिपूर्वक बुलाना और उनसे ज्ञान, बुद्धि और वाणी का आशीर्वाद प्राप्त करना। यह एक विशेष पूजा विधि है, जो वाणी और विद्या की देवी को आमंत्रित करने के लिए की जाती है। सरस्वती आवाहन के लिए मंत्रों का जाप किया जाता है और विशेष रूप से सफेद पुष्प, चंदन और धूप अर्पित किए जाते हैं। आवाहन का मुख्य उद्देश्य यह होता है कि माता सरस्वती साधक की जुबान, मन और बुद्धि पर अपना वास करें, ताकि वह सत्य, ज्ञान और कला के मार्ग पर अग्रसर हो सके। इसे विद्यारंभ, परीक्षा, या संगीत और कला से जुड़े किसी भी कार्य के पहले किया जाता है।

6. सरस्वती की स्तुति कैसे करें?

सरस्वती की स्तुति का मतलब है माता सरस्वती की महिमा का गान करना। स्तुति के लिए सुबह का समय उत्तम माना जाता है। सबसे पहले, स्वच्छ स्थान पर बैठकर सरस्वती माता का ध्यान करें। “या कुन्देन्दु तुषार हार धवला” और “ॐ ऐं सरस्वत्यै नमः” जैसे मंत्रों का जाप करें। सरस्वती वंदना का पाठ करें, जिसमें उनकी बुद्धि, ज्ञान और वाणी की शक्तियों की महिमा की जाती है। अगर हो सके तो सरस्वती चालीसा या सरस्वती अष्टक का पाठ करें।