Wednesday, January 28, 2026
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श्री चिंतपूर्णी देवी की आरती (Mata Shri Chintpurni Devi AARTI)

श्री चिंतपूर्णी देवी की आरती (Mata Shri Chintpurni Devi Aarti) एक महत्वपूर्ण धार्मिक और आध्यात्मिक क्रिया है, जो भारतीय संस्कृति और परंपरा का अभिन्न हिस्सा है। यह आरती देवी चिंतपूर्णी की विशेष पूजा का एक हिस्सा होती है, जिसमें भक्त अपने मन, शरीर और आत्मा को पूरी तरह समर्पित कर देते हैं। चिंतपूर्णी देवी, जिन्हें संकट निवारिणी और मनोकामना पूर्ति देवी के रूप में पूजा जाता है, के प्रति भक्ति और श्रद्धा प्रकट करने के लिए यह आरती गाई जाती है।

आरती का यह महत्त्वपूर्ण आयोजन विशेष रूप से उन भक्तों के लिए है जो जीवन की कठिनाइयों और चुनौतियों से उबरने के लिए देवी की कृपा प्राप्त करना चाहते हैं। इसे श्रद्धा, भक्ति और समर्पण के साथ गाया जाता है, जिससे न केवल आध्यात्मिक लाभ प्राप्त होता है, बल्कि जीवन के विभिन्न पहलुओं में सकारात्मक बदलाव भी आते हैं।

इस लेख में, हम श्री चिंतपूर्णी देवी की आरती के लाभों को विस्तार से समझेंगे और जानेंगे कि यह धार्मिक क्रिया किस प्रकार भक्तों के जीवन को प्रभावित करती है और उन्हें आध्यात्मिक और भौतिक सुख की प्राप्ति में कैसे सहायक होती है।


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  • हिंदी / संस्कृत
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|| श्री चिंतपूर्णी देवी की आरती ||

चिंतपूर्णी चिंता दूर करनी,
जग को तारो भोली माँ
जन को तारो भोली माँ,
काली दा पुत्र पवन दा घोड़ा ॥
॥ भोली माँ ॥

सिन्हा पर भाई असवार,
भोली माँ,  चिंतपूर्णी चिंता दूर ॥
॥ भोली माँ ॥

एक हाथ खड़ग दूजे में खांडा,
तीजे त्रिशूल सम्भालो ॥
॥ भोली माँ ॥

चौथे हाथ चक्कर गदा,
पाँचवे-छठे मुण्ड़ो की माला ॥
॥ भोली माँ ॥

सातवे से रुण्ड मुण्ड बिदारे,
आठवे से असुर संहारो ॥
॥ भोली माँ ॥

चम्पे का बाग़ लगा अति सुन्दर,
बैठी दीवान लगाये ॥
॥ भोली माँ ॥

हरी ब्रम्हा तेरे भवन विराजे,
लाल चंदोया बैठी तान ॥
॥ भोली माँ ॥

औखी घाटी विकटा पैंडा,
तले बहे दरिया ॥
॥ भोली माँ ॥

सुमन चरण ध्यानु जस गावे,
भक्तां दी पज निभाओ ॥
॥ भोली माँ ॥

 चिंतपूर्णी चिंता दूर करनी,
जग को तारो भोली माँ

|| Mata Shri Chintpurni Devi Aarti ||

Chintapurni chinta door karani,
Jag ko taaro bholi maa.
Jan ko taaro bholi maa,
Kali da putra Pavan da ghoda.
Bholi maa.

Sinha par bhai aswaar,
Bholi maa, chintapurni chinta door.
Bholi maa.

Ek haath khadag dooje mein khaanda,
Teesje trishool sambhaalo.
Bholi maa.

Chauthe haath chakkar gada,
Paanche-chhathe mundon ki maala.
Bholi maa.

Saathve se rund mund bidaare,
Aathve se asur sanhaaro.
Bholi maa.

Champe ka baagh laga ati sundar,
Baithi diwaan lagaaye.
Bholi maa.

Hari Brahma tere bhavan viraaje,
Laal chandoya baithi taan.
Bholi maa.

Aukhi ghaati vikata pinda,
Tale bahe dariya.
Bholi maa.

Suman charan dhyaanu jas gaave,
Bhaktaan di paj nibhaao.
Bholi maa.

Chintapurni chinta door karani,
Jag ko taaro bholi maa.


श्री चिंतपूर्णी देवी की आरती के लाभ

श्री चिंतपूर्णी देवी की आरती, एक विशेष धार्मिक क्रिया है जो देवी चिंतपूर्णी की पूजा में अर्पित की जाती है। इस आरती को विशेष महत्व दिया जाता है और इसे श्रद्धा के साथ गाया जाता है। यह आरती न केवल आध्यात्मिक लाभ देती है, बल्कि मानसिक, शारीरिक और सामाजिक लाभ भी प्रदान करती है। आइए जानते हैं श्री चिंतपूर्णी देवी की आरती के प्रमुख लाभ क्या हैं:

आध्यात्मिक शांति: आरती गाने से व्यक्ति को एक आंतरिक शांति और संतोष का अनुभव होता है। देवी चिंतपूर्णी की आरती में भगवान के भव्य गुणों का वर्णन किया जाता है, जिससे व्यक्ति की मानसिक स्थिति में स्थिरता आती है और उसे आध्यात्मिक शांति मिलती है।

भक्तिपूर्वक ध्यान केंद्रित करना: आरती के समय व्यक्ति पूरी तरह से भगवान के ध्यान में लीन होता है। यह ध्यान केंद्रित करने की प्रक्रिया भक्त के मन को एकाग्र बनाती है और उसकी आध्यात्मिक ऊर्जा को संचित करती है।

मनोबल में वृद्धि: आरती गाने से व्यक्ति का मनोबल ऊंचा होता है। धार्मिक भक्ति और आरती के माध्यम से व्यक्तियों में आत्म-संयम और आत्म-विश्वास बढ़ता है, जो जीवन की चुनौतियों का सामना करने में सहायक होता है।

नकारात्मक ऊर्जा से मुक्ति: जब कोई भक्त पूरे मनोयोग से आरती करता है, तो वह अपने आसपास की नकारात्मक ऊर्जा को दूर करने में सक्षम होता है। देवी चिंतपूर्णी की कृपा से वातावरण सकारात्मक और शुभ बनता है, जो जीवन में सुख-समृद्धि लाने में मदद करता है।

आत्मिक स्वास्थ्य में सुधार: नियमित रूप से आरती गाने से मानसिक स्वास्थ्य में सुधार होता है। यह मानसिक तनाव को कम करती है और व्यक्ति को खुशहाल बनाती है। मानसिक शांति और संतुलन बनाए रखने में यह आरती महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

सामाजिक संबंधों में सुधार: आरती के समय परिवार और समाज के लोग एक साथ होते हैं। यह एकता और सामंजस्य को बढ़ावा देती है, जिससे पारिवारिक और सामाजिक संबंध मजबूत होते हैं। सामूहिक पूजा और आरती से रिश्तों में प्रेम और सहयोग बढ़ता है।

संकटों से राहत: देवी चिंतपूर्णी की आरती के माध्यम से व्यक्ति अपने जीवन की समस्याओं और संकटों से मुक्ति पा सकता है। आरती के दौरान की गई प्रार्थना और भक्ति से देवी की कृपा प्राप्त होती है, जो जीवन में सुख-शांति और समृद्धि लाने में सहायक होती है।

आध्यात्मिक ज्ञान का संवर्धन: आरती में भगवान की महिमा का वर्णन होता है, जो भक्तों को आध्यात्मिक ज्ञान और समझ प्रदान करता है। यह ज्ञान व्यक्ति को जीवन के गहरे अर्थ को समझने में मदद करता है और उसकी आत्मिक यात्रा को सशक्त बनाता है।

भक्ति और श्रद्धा का सृजन: नियमित रूप से आरती करने से भक्त की भक्ति और श्रद्धा में वृद्धि होती है। यह श्रद्धा व्यक्ति को धार्मिक और आध्यात्मिक मार्ग पर आगे बढ़ने की प्रेरणा देती है और उसे उच्चतर उद्देश्य की ओर मार्गदर्शित करती है।

समर्पण की भावना: आरती के दौरान व्यक्त किया गया समर्पण और श्रद्धा भक्त को भगवान के प्रति पूरी तरह समर्पित करने की प्रेरणा देती है। यह समर्पण जीवन में अनुशासन और सही दिशा को अपनाने में मदद करता है।

सकारात्मक सोच का विकास: आरती में भगवान की स्तुति करने से व्यक्ति की सोच में सकारात्मकता आती है। यह सकारात्मक सोच जीवन में खुशियों और सफलताओं की प्राप्ति में सहायक होती है और नकारात्मक विचारों को दूर करती है।

आध्यात्मिक यात्रा में सहायक: श्री चिंतपूर्णी देवी की आरती व्यक्ति की आध्यात्मिक यात्रा को सहज और सुगम बनाती है। यह आरती भक्त को ध्यान, साधना और आत्मा की खोज की दिशा में प्रोत्साहित करती है।

धार्मिक ऊर्जा का संचार: आरती के दौरान उत्पन्न होने वाली धार्मिक ऊर्जा व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक प्रभाव डालती है। यह ऊर्जा आत्मा को बल प्रदान करती है और जीवन में उन्नति के द्वार खोलती है।

सुख-समृद्धि की प्राप्ति: देवी चिंतपूर्णी की आरती करने से जीवन में सुख, समृद्धि और खुशहाली आती है। यह आरती जीवन में सौभाग्य और सफलता को आकर्षित करती है, जिससे व्यक्ति का जीवन खुशहाल और सम्पन्न होता है।

आध्यात्मिक मार्गदर्शन: आरती के माध्यम से भक्त को आध्यात्मिक मार्गदर्शन प्राप्त होता है। यह मार्गदर्शन जीवन की चुनौतियों को समझने और उन्हें दूर करने में सहायक होता है।

सकारात्मक परिवर्तन: आरती गाने से व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन होते हैं। यह परिवर्तन व्यक्ति को बेहतर इंसान बनने की प्रेरणा देता है और जीवन की समस्याओं का समाधान करता है।

स्वास्थ्य लाभ: नियमित आरती के माध्यम से मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य में सुधार होता है। यह आरती तनाव और चिंता को कम करती है, जिससे व्यक्ति की सेहत बेहतर रहती है।

धार्मिक परंपरा का पालन: आरती करने से धार्मिक परंपराओं और संस्कारों का पालन होता है। यह धार्मिक अनुशासन और जीवन के नैतिक मूल्यों को बनाए रखने में सहायक होती है।

आध्यात्मिक ऊर्जा का संवर्धन: आरती के समय उत्पन्न होने वाली आध्यात्मिक ऊर्जा भक्त के जीवन में शांति और सुख का संचार करती है। यह ऊर्जा आत्मा को प्रबुद्ध और जागरूक बनाती है।

धार्मिक सौहार्द: आरती करने से धार्मिक सौहार्द और आपसी समझ बढ़ती है। यह धार्मिक एकता को बढ़ावा देती है और समाज में शांति और सामंजस्य बनाए रखती है।

    श्री चिंतपूर्णी देवी की आरती केवल एक धार्मिक क्रिया नहीं है, बल्कि यह एक महत्वपूर्ण आध्यात्मिक अनुभव भी है। इसके माध्यम से व्यक्ति न केवल आध्यात्मिक लाभ प्राप्त करता है, बल्कि जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में सुधार भी देखता है। यह आरती जीवन को सकारात्मक दिशा देने वाली है और एक समृद्ध, सुखमय और शांतिपूर्ण जीवन की दिशा में मार्गदर्शन करती है।

    श्री चित्रगुप्त स्तुति – Shri Chitragupt Stuti – Jai Chitragupt Yamesh Tav 2024-25

    श्री चित्रगुप्त स्तुति (Shri Chitragupt Stuti), जिसे “जय चित्रगुप्त यमेश तव” के नाम से भी जाना जाता है, हिंदू धर्म में एक महत्वपूर्ण धार्मिक स्तुति है। भगवान चित्रगुप्त को यमराज के प्रमुख सहयोगी और कर्मों का लेखा-जोखा रखने वाले देवता के रूप में पूजा जाता है। इस स्तुति का विशेष महत्व है क्योंकि यह भगवान चित्रगुप्त की आराधना, उनकी कृपा प्राप्त करने, और जीवन में अनेक लाभ प्राप्त करने के लिए की जाती है।

    भगवान चित्रगुप्त को धर्म और न्याय का प्रतीक माना जाता है। वे सभी कर्मों का रिकॉर्ड रखते हैं और न्याय की व्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उनके प्रति भक्ति और श्रद्धा व्यक्त करने के लिए यह स्तुति की जाती है, जिससे जीवन में शांति, समृद्धि, और सफलता की प्राप्ति होती है। श्री चित्रगुप्त की पूजा के माध्यम से व्यक्ति पापों से मुक्ति पा सकता है, जीवन की दिशा को सुधार सकता है, और अपनी आध्यात्मिक उन्नति के मार्ग पर अग्रसर हो सकता है।

    यह स्तुति विशेष रूप से उन लोगों के लिए लाभकारी है जो धार्मिक अनुष्ठानों, आध्यात्मिक अभ्यासों और जीवन की कठिनाइयों से पार पाने के लिए प्रयासरत हैं। इसके माध्यम से व्यक्ति को मानसिक शांति, पारिवारिक सुख, और सामाजिक सम्मान प्राप्त करने के साथ-साथ आत्मिक उन्नति भी होती है। श्री चित्रगुप्त स्तुति का नियमित अभ्यास जीवन को सकारात्मक दिशा देने में सहायक होता है और व्यक्ति को ईश्वर की कृपा प्राप्त करने में मदद करता है।



    • हिंदी / संस्कृत
    • English

    || श्री चित्रगुप्त स्तुति ||

    जय चित्रगुप्त यमेश तव,
    शरणागतम् शरणागतम् ।
    जय पूज्यपद पद्मेश तव,
    शरणागतम् शरणागतम् ॥

    जय देव देव दयानिधे,
    जय दीनबन्धु कृपानिधे ।
    कर्मेश जय धर्मेश तव,
    शरणागतम् शरणागतम् ॥

    जय चित्र अवतारी प्रभो,
    जय लेखनीधारी विभो ।
    जय श्यामतम, चित्रेश तव,
    शरणागतम् शरणागतम् ॥

    पुर्वज व भगवत अंश जय,
    कास्यथ कुल, अवतंश जय ।
    जय शक्ति, बुद्धि विशेष तव,
    शरणागतम् शरणागतम् ॥

    जय विज्ञ क्षत्रिय धर्म के,
    ज्ञाता शुभाशुभ कर्म के ।
    जय शांति न्यायाधीश तव,
    शरणागतम् शरणागतम् ॥

    जय दीन अनुरागी हरी,
    चाहें दया दृष्टि तेरी ।
    कीजै कृपा करूणेश तव,
    शरणागतम् शरणागतम् ॥

    तब नाथ नाम प्रताप से,
    छुट जायें भव, त्रयताप से ।
    हो दूर सर्व कलेश तव,
    शरणागतम् शरणागतम् ॥

    जय चित्रगुप्त यमेश तव,
    शरणागतम् शरणागतम् ।
    जय पूज्य पद पद्येश तव,
    शरणागतम् शरणागतम् ॥

    || Shri Chitragupt Stuti ||

    Jay Chitragupta Yamesh Tava,
    Sharanagatam Sharanagatam.
    Jay Pujyapad Padyesh Tava,
    Sharanagatam Sharanagatam.

    Jay Dev Deva Dayanidhe,
    Jay Dinabandhu Kripānidhe.
    Karmesh Jay Dharmesh Tava,
    Sharanagatam Sharanagatam.

    Jay Chitra Avatāri Prabho,
    Jay Lekhanidhāri Vibho.
    Jay Shyamatam, Chitresh Tava,
    Sharanagatam Sharanagatam.

    Purvaja Va Bhagavat Amsh Jay,
    Kāsyatha Kul, Avatamsh Jay.
    Jay Shakti, Buddhi Vishesh Tava,
    Sharanagatam Sharanagatam.

    Jay Vijn Kshatriya Dharm Ke,
    Jnāta Shubhāshubha Karma Ke.
    Jay Shānti, Nyāyādhīsh Tava,
    Sharanagatam Sharanagatam.

    Jay Din Anurāgi Hari,
    Chāhen Dayā Drishti Teri.
    Kijai Krupā Karunēsh Tava,
    Sharanagatam Sharanagatam.

    Tab Nath Naam Pratap Se,
    Chhut Jayen Bhav, Trayatāp Se.
    Ho Door Sarva Kalesh Tava,
    Sharanagatam Sharanagatam.

    Jay Chitragupta Yamesh Tava,
    Sharanagatam Sharanagatam.
    Jay Pujya Pad Padyesh Tava,
    Sharanagatam Sharanagatam.


    श्री चित्रगुप्त स्तुति के लाभ

    श्री चित्रगुप्त स्तुति, जिसे “जय चित्रगुप्त यमेश तव” के नाम से भी जाना जाता है, एक प्राचीन और महत्वपूर्ण धार्मिक स्तुति है जो भगवान चित्रगुप्त की पूजा और आराधना के लिए की जाती है। भगवान चित्रगुप्त हिंदू धर्म में यमराज के प्रमुख सहायकों में से एक माने जाते हैं। उनकी पूजा और स्तुति करने से जीवन में कई लाभ होते हैं। इस लेख में हम विस्तार से समझेंगे कि श्री चित्रगुप्त स्तुति के लाभ क्या हैं।

    आध्यात्मिक शांति और समृद्धि:

    श्री चित्रगुप्त की स्तुति करने से मन को अत्यधिक शांति और समृद्धि मिलती है। भगवान चित्रगुप्त को न्याय, धर्म और सच्चाई का प्रतीक माना जाता है। उनकी पूजा करने से व्यक्ति के मन में स्थिरता और शांति का अनुभव होता है, जो जीवन की व्यस्तताओं और चुनौतियों का सामना करने में सहायक होती है।

    पापों से मुक्ति:

    श्री चित्रगुप्त का नाम लेकर उनकी स्तुति करने से पापों की मुक्ति होती है। मान्यता है कि चित्रगुप्त भगवान हमारे सभी कर्मों को रिकॉर्ड करते हैं। उनकी स्तुति से यह संभावना बढ़ जाती है कि पापों का प्रभाव कम हो जाए और व्यक्ति को आत्मिक शांति मिले।

    जीवन में सफलता और समृद्धि:

    श्री चित्रगुप्त की पूजा करने से व्यक्ति के जीवन में सफलता और समृद्धि की प्राप्ति होती है। भगवान चित्रगुप्त को जीवन के कर्मों का लेखा-जोखा रखने वाला माना जाता है। उनकी स्तुति करने से व्यक्ति के कर्म सही दिशा में होते हैं और जीवन में सफलता की संभावना बढ़ जाती है।

    स्वास्थ्य और सुरक्षा:

    श्री चित्रगुप्त की पूजा करने से व्यक्ति को स्वास्थ्य और सुरक्षा की प्राप्ति होती है। माना जाता है कि चित्रगुप्त भगवान समस्त जीवन की सुरक्षा और संरक्षा का ध्यान रखते हैं। उनकी पूजा करने से व्यक्ति को शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य में सुधार होता है और सुरक्षा का आभास होता है।

    परिवारिक सुख और शांति:

    श्री चित्रगुप्त की स्तुति करने से परिवारिक जीवन में सुख और शांति बनी रहती है। परिवारिक समस्याओं और झगड़ों के समाधान के लिए चित्रगुप्त की पूजा की जाती है। यह पूजा परिवारिक संबंधों को मजबूत बनाने और पारिवारिक सुख में वृद्धि करने में सहायक होती है।

    दोष निवारण:

    श्री चित्रगुप्त की स्तुति करने से विभिन्न प्रकार के दोषों का निवारण होता है। चाहे वह व्यक्तिगत दोष हों या पारिवारिक या सामाजिक दोष, भगवान चित्रगुप्त की आराधना से इन दोषों से मुक्ति मिलती है। यह स्तुति जीवन की कठिनाइयों को दूर करने में मदद करती है।

    मानसिक संतुलन:

    श्री चित्रगुप्त की पूजा करने से मानसिक संतुलन बना रहता है। व्यक्ति को तनाव, चिंता और अवसाद से छुटकारा मिलता है। भगवान चित्रगुप्त की स्तुति से मानसिक स्थिति स्थिर और शांत रहती है, जिससे जीवन में सुख और संतोष की भावना बनी रहती है।

    समर्पण और भक्ति का अनुभव:

    श्री चित्रगुप्त की स्तुति करने से समर्पण और भक्ति का अनुभव होता है। इस स्तुति के माध्यम से व्यक्ति भगवान चित्रगुप्त के प्रति अपनी भक्ति और प्रेम को प्रकट करता है। यह भक्ति व्यक्ति को आत्मा की गहराइयों में जाकर ईश्वर के साथ एक संबंध स्थापित करने में मदद करती है।

    कर्मों का संतुलन:

    श्री चित्रगुप्त की पूजा करने से व्यक्ति के कर्मों का संतुलन बना रहता है। चित्रगुप्त भगवान कर्मों का लेखा-जोखा रखते हैं, और उनकी स्तुति करने से व्यक्ति के कर्म सही दिशा में होते हैं। इससे जीवन में कर्मफल के अच्छे परिणाम प्राप्त होते हैं।

    जीवन की दिशा सुधार:

    श्री चित्रगुप्त की स्तुति करने से जीवन की दिशा सुधारने में मदद मिलती है। जब व्यक्ति अपनी जीवन की दिशा को सही करने के प्रयास करता है, तो भगवान चित्रगुप्त की आराधना से सही मार्गदर्शन प्राप्त होता है। यह पूजा जीवन को एक नई दिशा और उद्देश्य प्रदान करती है।

    आत्मिक उन्नति:

    श्री चित्रगुप्त की स्तुति से आत्मिक उन्नति होती है। व्यक्ति अपने आध्यात्मिक पथ पर अग्रसर होता है और आत्मज्ञान की प्राप्ति होती है। इस पूजा से व्यक्ति को आत्मा की वास्तविकता और उसकी उन्नति के मार्गदर्शन की प्राप्ति होती है।

    सामाजिक सम्मान:

    श्री चित्रगुप्त की पूजा और स्तुति करने से सामाजिक सम्मान बढ़ता है। समाज में व्यक्ति की छवि सकारात्मक बनती है और उसे सम्मान मिलता है। यह पूजा सामाजिक संबंधों को सुधारने और मान-सम्मान प्राप्त करने में सहायक होती है।

    धन-वैभव में वृद्धि:

    श्री चित्रगुप्त की स्तुति करने से धन-वैभव में वृद्धि होती है। भगवान चित्रगुप्त की आराधना करने से आर्थिक स्थिति में सुधार आता है और धन के मार्ग खोलते हैं। यह पूजा आर्थिक समृद्धि और वैभव की प्राप्ति में मदद करती है।

    मानसिक स्फूर्ति और ऊर्जा:

    श्री चित्रगुप्त की स्तुति करने से मानसिक स्फूर्ति और ऊर्जा में वृद्धि होती है। व्यक्ति को नई ऊर्जा और प्रेरणा मिलती है, जो उसे जीवन के उद्देश्यों को प्राप्त करने में मदद करती है। यह पूजा मानसिक ऊर्जा को बढ़ाती है और कार्यक्षमता में सुधार करती है।

    जीवन की कठिनाइयों का सामना:

    श्री चित्रगुप्त की पूजा से जीवन की कठिनाइयों का सामना करना आसान हो जाता है। भगवान चित्रगुप्त की आराधना से व्यक्ति को शक्ति और साहस मिलता है, जिससे वह जीवन की समस्याओं और चुनौतियों का सामना कर सकता है। यह पूजा संकटों और समस्याओं के समाधान में सहायक होती है।

    श्री चित्रगुप्त स्तुति एक महत्वपूर्ण और प्रभावशाली पूजा है जो विभिन्न प्रकार के लाभ प्रदान करती है। आध्यात्मिक शांति, पापों से मुक्ति, सफलता, स्वास्थ्य, पारिवारिक सुख, मानसिक संतुलन, और आत्मिक उन्नति इसके प्रमुख लाभ हैं। यह स्तुति व्यक्ति के जीवन को सुखमय और समृद्ध बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। इसलिए, श्री चित्रगुप्त की पूजा और स्तुति को नियमित रूप से करना चाहिए ताकि इन लाभों का अनुभव किया जा सके और जीवन में सच्ची शांति और समृद्धि प्राप्त की जा सके।


    चित्रगुप्त भगवान का मंत्र क्या है?

    चित्रगुप्त भगवान के प्रमुख मंत्रों में से एक है:
    “ऊँ श्री चित्रगुप्ताय नमः”
    इस मंत्र का जाप भगवान चित्रगुप्त की पूजा और ध्यान के लिए किया जाता है। यह मंत्र समर्पण और भक्ति का प्रतीक है, और इसके जाप से जीवन में समृद्धि और सफलता प्राप्त करने में सहायता मिलती है।

    चित्रगुप्त पूजा कैसे करें?

    चित्रगुप्त पूजा करने के लिए निम्नलिखित विधि अपनाई जा सकती है:
    स्थान: पूजा के लिए स्वच्छ और शांत स्थान का चयन करें।
    सामग्री: दीपक, फूल, धूप, नैवेद्य (भोग), और चित्रगुप्त की प्रतिमा या चित्र।
    पूजा विधि:स्नान और शुद्धता: सबसे पहले, स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र पहनें।
    स्थापना: चित्रगुप्त की प्रतिमा या चित्र को पूजा स्थल पर स्थापित करें।
    धूप-दीप: दीपक जलाएं और धूप अर्पित करें।
    मंत्र जाप: “ॐ चित्रगुप्ताय नमः” मंत्र का जाप करें।
    नैवेद्य: भगवान को भोग अर्पित करें।
    आरती: आरती करें और भगवान की आराधना करें।
    प्रार्थना: अपनी मनोकामनाएं प्रकट करें और आशीर्वाद प्राप्त करें।

    चित्रगुप्त भगवान का कार्य क्या है?

    चित्रगुप्त भगवान को कर्मों का लेखा-जोखा रखने वाला देवता माना जाता है। वे व्यक्ति के सभी अच्छे और बुरे कर्मों का हिसाब रखते हैं और जीवन के कर्मों की समीक्षा करके न्याय करते हैं। उनके कार्यों में कर्मों की रिकॉर्डिंग और स्वर्ग एवं नरक में आत्मा की यात्रा का निर्धारण शामिल है।

    चित्रगुप्त की पूजा करने के लाभ क्या हैं?

    चित्रगुप्त की पूजा करने से निम्नलिखित लाभ प्राप्त हो सकते हैं:
    कर्मों का लेखा-जोखा: अपने कर्मों की समीक्षा और दोषों से मुक्ति।
    सफलता और समृद्धि: जीवन में सफलता और समृद्धि प्राप्त करने के अवसर।
    आध्यात्मिक उन्नति: आध्यात्मिक उन्नति और आत्मा की शांति।
    सकारात्मक ऊर्जा: घर और परिवार में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह।
    सुरक्षा और सुरक्षा: ईश्वर की कृपा से हर तरह की सुरक्षा और सुरक्षित जीवन।

    हिंदू धर्म में सबसे शक्तिशाली मंत्र कौन सा है?

    हिंदू धर्म में कई शक्तिशाली मंत्र हैं, लेकिन “ॐ नमः शिवाय” मंत्र को विशेष रूप से शक्तिशाली माना जाता है। यह मंत्र भगवान शिव की आराधना के लिए प्रयोग किया जाता है और इसे जीवन के विभिन्न संकटों से उबारने के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। इसके अतिरिक्त, “ॐ गण गणपतये नमः” भी एक शक्तिशाली मंत्र है जो विघ्नहर्ता गणेश की पूजा के लिए प्रसिद्ध है।

    शिव आरती – ॐ जय गंगाधर (Shiv Aarti – Om Jai Gangadhar Jai Har)

    शिव आरती (Shiv Aarti) – ओम जय गंगाधर जय हर भगवान शिव को समर्पित एक भक्ति भजन है, जो हिंदू धर्म के प्रमुख देवताओं में से एक हैं। यह आरती पूजा और स्तुति का एक रूप है, जिसे अक्सर भक्त अपनी श्रद्धा व्यक्त करने और भगवान शिव से आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए गाते या पढ़ते हैं। यह भजन शिव के विभिन्न गुणों और बुराई के नाश करने वाले और हिंदू त्रिमूर्ति (त्रिमूर्ति) के भीतर परिवर्तनकर्ता के रूप में उनकी भूमिका का महिमामंडन करता है, जिसमें ब्रह्मा निर्माता और विष्णु संरक्षक भी शामिल हैं।

    “ओम जय गंगाधर जय हर” शीर्षक शिव के विशेषण “गंगाधर” को दर्शाता है, जिसका अर्थ है “गंगा नदी का वाहक”, जो उनकी जटाओं पर शक्तिशाली नदी को धारण करने और उसे नियंत्रित करने में उनकी भूमिका को दर्शाता है। “जय हर” शिव की जीत और प्रशंसा का उद्घोष है। आरती पारंपरिक रूप से दीप, धूप और कभी-कभी संगीत वाद्ययंत्रों के साथ की जाती है, जिससे एक शांत और आध्यात्मिक वातावरण बनता है।

    भक्तों का मानना ​​है कि शिव आरती का पाठ करने या सुनने से शांति, समृद्धि और दैवीय सुरक्षा मिलती है। यह शिव मंदिरों में और महाशिवरात्रि जैसे त्यौहारों के दौरान एक आम प्रथा है, जो शिव और पार्वती के दिव्य विवाह का जश्न मनाती है। आरती कई शिव भक्तों के लिए दैनिक अनुष्ठानों का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जो भगवान की सर्वव्यापकता और दयालु प्रकृति की याद दिलाती है।


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    Om Jai Gangadhar Jai Har PDF


    • हिंदी / संस्कृत
    • English

    || शिव आरती – ॐ जय गंगाधर ||

    ॐ जय गंगाधर जय हर,
    जय गिरिजाधीशा ।
    त्वं मां पालय नित्यं,
    कृपया जगदीशा ॥
    ॐ हर हर हर महादेव ॥

    कैलासे गिरिशिखरे,
    कल्पद्रुमविपिने ।
    गुंजति मधुकरपुंजे,
    कुंजवने गहने ॥
    ॐ हर हर हर महादेव ॥

    कोकिलकूजित खेलत,
    हंसावन ललिता ।
    रचयति कलाकलापं,
    नृत्यति मुदसहिता ॥
    ॐ हर हर हर महादेव ॥

    तस्मिंल्ललितसुदेशे,
    शाला मणिरचिता ।
    तन्मध्ये हरनिकटे,
    गौरी मुदसहिता ॥

    क्रीडा रचयति,
    भूषारंचित निजमीशम् ‌।
    इंद्रादिक सुर सेवत,
    नामयते शीशम्‌ ॥
    ॐ हर हर हर महादेव ॥

    बिबुधबधू बहु नृत्यत,
    हृदये मुदसहिता ।
    किन्नर गायन कुरुते,
    सप्त स्वर सहिता ॥

    धिनकत थै थै धिनकत,
    मृदंग वादयते ।
    क्वण क्वण ललिता वेणुं,
    मधुरं नाटयते ॥
    ॐ हर हर हर महादेव ॥

    रुण रुण चरणे रचयति,
    नूपुरमुज्ज्वलिता ।
    चक्रावर्ते भ्रमयति,
    कुरुते तां धिक तां ॥
    ॐ हर हर हर महादेव ॥

    तां तां लुप चुप,
    तां तां डमरू वादयते।
    अंगुष्ठांगुलिनादं,
    लासकतां कुरुते ॥
    ॐ हर हर हर महादेव ॥

    कपूर्रद्युतिगौरं,
    पञ्चाननसहितम् ।
    त्रिनयनशशिधरमौलिं,
    विषधरकण्ठयुतम्‌ ॥
    ॐ हर हर हर महादेव ॥

    सुन्दरजटायकलापं,
    पावकयुतभालम् ‌।
    डमरुत्रिशूलपिनाकं,
    करधृतनृकपालम्‌ ॥
    ॐ हर हर हर महादेव ॥

    मुण्डै रचयति माला,
    पन्नगमुपवीतम् ‌।
    वामविभागे गिरिजा,
    रूपं अतिललितम्‌ ॥
    ॐ हर हर हर महादेव ॥

    सुन्दरसकलशरीरे,
    कृतभस्माभरणम्‌।
    इति वृषभध्वजरूपं,
    तापत्रयहरणं ॥
    ॐ हर हर हर महादेव ॥

    शंखनिनादं कृत्वा,
    झल्लरि नादयते ।
    नीराजयते ब्रह्मा,
    वेदऋचां पठते ॥
    ॐ हर हर हर महादेव ॥

    अतिमृदुचरणसरोजं,
    हृत्कमले धृत्वा ।
    अवलोकयति महेशं,
    ईशं अभिनत्वा ॥
    ॐ हर हर हर महादेव ॥

    ध्यानं आरति समये,
    हृदये अति कृत्वा ।
    रामस्त्रिजटानाथं,
    ईशं अभिनत्वा ॥
    ॐ हर हर हर महादेव ॥

    संगतिमेवं प्रतिदिन,
    पठनं यः कुरुते ।
    शिवसायुज्यं गच्छति,
    भक्त्या यः श्रृणुते ॥
    ॐ हर हर हर महादेव ॥

    || Shiv Aarti – Om Jai Gangadhar Jai Har ||

    Om Jay Gangadhar Jay Har,
    Jay Girijadhisha.
    Tvam Maam Paalay Nityam,
    Kripaya Jagadisha.
    Om Har Har Har Mahadev.

    Kailase Girishikhare,
    Kalpadrumavipine.
    Gunjati Madhukarapunje,
    Kunjavane Gahane.
    Om Har Har Har Mahadev.

    Kokilakoojit Khelata,
    Hansavana Lalita.
    Rachayati Kalakalapam,
    Nrityati Mudasahita.
    Om Har Har Har Mahadev.

    Tasmimlalitasudeshe,
    Shala Manirachita.
    Tanmadhye Haranikate,
    Gauri Mudasahita.

    Kreeda Rachayati,
    Bhusharanchita Nijamisham.
    Indradika Sura Sevata,
    Namayate Shisham.
    Om Har Har Har Mahadev.

    Bibudhabadhu Bahu Nrityata,
    Hridaye Mudasahita.
    Kinnara Gayana Kurute,
    Sapta Swara Sahita.

    Dhinakat Thai Thai Dhinakat,
    Mridanga Vadayate.
    Kwan Kwan Lalita Venu,
    Madhuram Natayate.
    Om Har Har Har Mahadev.

    Runa runa charane rachayati,
    Nupuramujjvalita.
    Chakravarte bhramayati,
    Kurute taam dhika taam.
    Om Har Har Har Mahadev.

    Taam taam lup chup,
    Taam taam damaru vadayate.
    Angushthaangulinaadam,
    Laasakataam kurute.
    Om Har Har Har Mahadev.

    Kapooradyutigauram,
    Panchaananasahitam.
    Trinayana shashidharamaulim,
    Vishadhara kanthayutam.
    Om Har Har Har Mahadev.

    Sundarajatayakalapam,
    Pavakayutabhalam.
    Damarutrishulapinakam,
    Karadhritanrikapalam.
    Om Har Har Har Mahadev.

    Mundai rachayati maala,
    Pannagamupaveetam.
    Vaamavibhaage Girija,
    Roopam atilalitam.
    Om Har Har Har Mahadev.

    Sundarasakalashareere,
    Kritabhasmaabharanam.
    Iti Vrishabhadhvajarupam,
    Tapatrayaharanam.
    Om Har Har Har Mahadev.

    Shankhaninadam kritva,
    Jhallari nadayate.
    Neerajayate Brahma,
    Vedaricham pathate.
    Om Har Har Har Mahadev.

    Atimruducharansarojam,
    Hritkamale dhritva.
    Avalokayati Mahesham,
    Eesham abhinatva.
    Om Har Har Har Mahadev.

    Dhyanaam aarati samaye,
    Hridaye ati kritva.
    Ramastrijatanatham,
    Eesham abhinatva.
    Om Har Har Har Mahadev.

    Sangatimevam pratidina,
    Pathanam yah kurute.
    Shivasayujyam gachchhati,
    Bhaktya yah shrinute.
    Om Har Har Har Mahadev.


    शिव आरती – ॐ जय गंगाधर के लाभ

    शिव आरती – ॐ जय गंगाधर (Shiv Aarti – Om Jai Gangadhar Jai Har)” एक महत्वपूर्ण हिंदू पूजा और भक्ति गीत है जो भगवान शिव को समर्पित है। यह आरती विशेष रूप से उन भक्तों के लिए महत्वपूर्ण है जो भगवान शिव के प्रति अपनी भक्ति और श्रद्धा व्यक्त करना चाहते हैं। इस लेख में हम “शिव आरती – ॐ जय गंगाधर” के लाभों की विस्तार से चर्चा करेंगे।

    शिव आरती का महत्व

    शिव आरती का अर्थ है भगवान शिव की पूजा और उनकी महिमा का गान। यह आरती विशेष रूप से भगवान शिव के गंगाधर स्वरूप की प्रशंसा करती है, जो गंगा नदी को अपने सिर पर धारण करते हैं। इस आरती का पाठ करने से व्यक्ति को मानसिक और आध्यात्मिक शांति प्राप्त होती है और उसकी भक्ति में वृद्धि होती है।

    शिव आरती के लाभ

    आध्यात्मिक उन्नति: शिव आरती का नियमित पाठ करने से व्यक्ति की आध्यात्मिक उन्नति होती है। भगवान शिव को साक्षात ब्रह्मा, विष्णु और महेश के रूप में पूजा जाता है। उनकी आरती में शामिल होने से व्यक्ति का आत्मिक विकास होता है और वे आत्मा के वास्तविक स्वरूप को समझने लगते हैं।

    मनोबल में वृद्धि: भगवान शिव को शक्तियों और संजीवनी शक्ति का दाता माना जाता है। उनकी आरती के माध्यम से व्यक्ति को मानसिक और आत्मिक शक्ति प्राप्त होती है, जिससे उनका मनोबल बढ़ता है और जीवन की चुनौतियों का सामना करने की ताकत मिलती है।

    आर्थिक समृद्धि: भगवान शिव की पूजा और आरती करने से व्यक्ति के आर्थिक स्थिति में सुधार होता है। भगवान शिव के आशीर्वाद से व्यक्ति की आर्थिक परेशानियाँ दूर होती हैं और उसे समृद्धि की प्राप्ति होती है।

    स्वास्थ्य और सवस्थता: शिव आरती के पाठ से व्यक्ति के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य में सुधार होता है। भगवान शिव को औषधियों और चिकित्सा के देवता के रूप में पूजा जाता है। उनकी आरती से स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं में राहत मिलती है और व्यक्ति स्वस्थ रहता है।

    सामाजिक सम्मान: भगवान शिव की आरती में भाग लेने से व्यक्ति को समाज में सम्मान मिलता है। यह भक्ति और निष्ठा का प्रतीक होती है, जिससे व्यक्ति को समाज में उच्च स्थान प्राप्त होता है और लोग उसे आदर की दृष्टि से देखते हैं।

    परिवारिक शांति: शिव आरती के माध्यम से परिवार में शांति और सामंजस्य बनाए रखा जा सकता है। यह आरती परिवार के सभी सदस्यों के बीच प्रेम और समझ बढ़ाती है, जिससे परिवारिक विवाद कम होते हैं और एक सुखी जीवन जीने में मदद मिलती है।

    पापों से मुक्ति: भगवान शिव की आरती से व्यक्ति के पाप और गलतियाँ समाप्त हो जाती हैं। शिव को पापों का नाशक माना जाता है और उनकी आरती के माध्यम से व्यक्ति अपने पापों से मुक्ति प्राप्त कर सकता है।

    अध्यात्मिक दृष्टिकोण में सुधार: शिव आरती के पाठ से व्यक्ति का अध्यात्मिक दृष्टिकोण में सुधार होता है। वे जीवन की भौतिकता से परे जाकर आध्यात्मिकता की ओर अग्रसर होते हैं, जिससे वे सच्चे ज्ञान की ओर बढ़ते हैं और आत्मा की असली पहचान को समझते हैं।

    भक्तों के लिए मानसिक शांति: भगवान शिव की आरती सुनने या पढ़ने से भक्तों को मानसिक शांति और संतुलन प्राप्त होता है। यह आरती उनके मन को शांति और सुख प्रदान करती है, जिससे वे मानसिक तनाव और चिंता से मुक्त रहते हैं।

    सकारात्मक ऊर्जा का संचार: शिव आरती का पाठ करने से वातावरण में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। यह ऊर्जा व्यक्ति को सकारात्मक सोच और शक्तियों से भर देती है, जिससे उनकी जीवनशैली में सुधार होता है।

    भक्ति की गहराई: शिव आरती से भक्ति की गहराई बढ़ती है। यह आरती व्यक्ति को भगवान शिव के प्रति अपनी भक्ति को और अधिक सशक्त बनाने में मदद करती है, जिससे उनकी भक्ति में वृद्धि होती है और वे भगवान शिव के अधिक करीब महसूस करते हैं।

    धार्मिक कर्तव्यों की पूर्ति: शिव आरती करने से व्यक्ति अपने धार्मिक कर्तव्यों को पूरा करता है। यह एक महत्वपूर्ण धार्मिक अनुष्ठान है जो भक्त को भगवान शिव के प्रति अपनी श्रद्धा और भक्ति व्यक्त करने का अवसर प्रदान करता है।

    सच्चे प्रेम का अनुभव: भगवान शिव की आरती के माध्यम से व्यक्ति को सच्चे प्रेम का अनुभव होता है। यह आरती भगवान शिव के अनंत प्रेम और करुणा की प्रतीक है, जिससे व्यक्ति को प्रेम की वास्तविकता का एहसास होता है।

    स्मरण और ध्यान की आदत: शिव आरती के नियमित पाठ से व्यक्ति की स्मरण और ध्यान की आदत विकसित होती है। यह उनकी ध्यान क्षमता को बढ़ाता है और उन्हें ध्यान केंद्रित करने में मदद करता है, जिससे वे अपनी धार्मिक और आध्यात्मिक प्रगति में सफल होते हैं।

    स्वयं की पहचान: शिव आरती के माध्यम से व्यक्ति को अपनी आत्मा की सही पहचान होती है। भगवान शिव की आरती पढ़ने से व्यक्ति अपने असली स्वरूप को पहचानने में सक्षम होता है और जीवन के उद्देश्य को समझने में मदद मिलती है।

    सद्गुणों का विकास: भगवान शिव की आरती से व्यक्ति के अंदर सद्गुणों का विकास होता है। यह व्यक्ति को विनम्रता, सहनशीलता, और अहिंसा की शिक्षा देती है, जिससे वे एक अच्छे और आदर्श मानव बनते हैं।

    भविष्य के लिए आशीर्वाद: शिव आरती के माध्यम से व्यक्ति को भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त होता है, जो उनके भविष्य को उज्ज्वल और समृद्ध बनाता है। यह आशीर्वाद व्यक्ति को जीवन के विभिन्न पहलुओं में सफलता और खुशहाली प्रदान करता है।

    मन की शांति: शिव आरती का नियमित पाठ करने से मन की शांति प्राप्त होती है। यह आरती मानसिक शांति और स्थिरता प्रदान करती है, जिससे व्यक्ति का जीवन संतुलित और सुखद होता है।

    धार्मिक संस्कारों की संरक्षण: शिव आरती के माध्यम से धार्मिक संस्कारों की संरक्षण होती है। यह पूजा और आरती की परंपरा को जीवित रखती है और आने वाली पीढ़ियों को धार्मिक संस्कारों का महत्व सिखाती है।

    भक्ति का अनंत अनुभव: शिव आरती के माध्यम से व्यक्ति को भक्ति का अनंत अनुभव प्राप्त होता है। यह अनुभव उन्हें भगवान शिव के प्रति अपनी भक्ति को और अधिक गहराई से समझने में मदद करता है और उनकी आध्यात्मिक यात्रा को पूर्ण करता है।

      “शिव आरती – ॐ जय गंगाधर” का नियमित पाठ और सुनना एक दिव्य अनुभव है जो व्यक्ति को मानसिक, शारीरिक, और आध्यात्मिक लाभ प्रदान करता है। यह आरती भगवान शिव के प्रति भक्तों की भक्ति को प्रगाढ़ करती है और जीवन के विभिन्न पहलुओं में सुधार लाती है। इस आरती के माध्यम से भक्तों को सुख, शांति, और समृद्धि की प्राप्ति होती है, और वे भगवान शिव की अनंत कृपा और आशीर्वाद का लाभ उठाते हैं।

      दारिद्र्य दहन शिव स्तोत्रम् – Daridraya Dahana Shiv Stotram 2025

      दारिद्रय दहन शिव स्तोत्र (Daridraya Dahana Shiv Stotram) भगवान शिव को समर्पित एक शक्तिशाली भजन है, जिन्हें हिंदू पौराणिक कथाओं में विध्वंसक और परिवर्तनकर्ता के रूप में जाना जाता है। ऋषि वशिष्ठ द्वारा रचित, इस स्तोत्र को गरीबी को दूर करने और भक्तों को समृद्धि प्रदान करने की क्षमता के लिए सम्मानित किया जाता है जो इसे भक्ति के साथ पढ़ते हैं। स्तोत्र की शुरुआत भगवान शिव के आह्वान से होती है, जो सभी रूपों में गरीबी (दरिद्र) को जलाने में सक्षम हैं।

      यह भगवान शिव के दिव्य गुणों का गुणगान करता है, उन्हें ब्रह्मांडीय नर्तक (नटराज), अर्धचंद्र (चंद्रशेखर) से सुशोभित और पवित्र शहर काशी (वाराणसी) में रहने वाले के रूप में वर्णित करता है। दारिद्रय दहन शिव स्तोत्र का प्रत्येक श्लोक भगवान शिव की सर्वशक्तिमानता और परोपकार की प्रशंसा करता है, उनसे सभी प्रकार की गरीबी को मिटाने और अपने भक्तों को प्रचुरता और समृद्धि प्रदान करने की प्रार्थना करता है। स्तोत्रम की लयबद्ध और मधुर रचना न केवल भक्ति की भावना को जागृत करती है, बल्कि भगवान शिव की कठिनाइयों को दूर करने और आशीर्वाद प्रदान करने की क्षमता में विश्वास भी जगाती है।

      दारिद्रय दहन शिव स्तोत्रम के पाठ और चिंतन के माध्यम से, भक्त वित्तीय कठिनाइयों को दूर करने, भौतिक और आध्यात्मिक समृद्धि प्राप्त करने और आंतरिक शांति और पूर्णता का अनुभव करने के लिए भगवान शिव की कृपा चाहते हैं।

      दारिद्रय दहन शिव स्तोत्रम के गहन छंदों की खोज में हमारे साथ जुड़ें, क्योंकि हम भगवान शिव के शुभ आशीर्वाद का आह्वान करते हैं, जो सर्वोच्च देवता हैं जो अपनी दिव्य कृपा से समृद्धि प्रदान करते हैं और गरीबी को दूर करते हैं।


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      || दारिद्र्य दहन शिव स्तोत्रम् ||

      विश्वेश्वराय नरकार्णव तारणाय
      कर्णामृताय शशिशेखर धारणाय ।
      कर्पूरकांति धवलाय जटाधराय
      दारिद्र्यदुःख दहनाय नमश्शिवाय ॥ 1 ॥

      गौरीप्रियाय रजनीश कलाधराय
      कालांतकाय भुजगाधिप कंकणाय ।
      गंगाधराय गजराज विमर्धनाय
      दारिद्र्यदुःख दहनाय नमश्शिवाय ॥ 2 ॥

      भक्तप्रियाय भवरोग भयापहाय
      उग्राय दुःख भवसागर तारणाय ।
      ज्योतिर्मयाय गुणनाम सुनृत्यकाय
      दारिद्र्यदुःख दहनाय नमश्शिवाय ॥ 3 ॥

      चर्मांबराय शवभस्म विलेपनाय
      फालेक्षणाय मणिकुंडल मंडिताय ।
      मंजीरपादयुगलाय जटाधराय
      दारिद्र्यदुःख दहनाय नमश्शिवाय ॥ 4 ॥

      पंचाननाय फणिराज विभूषणाय
      हेमांकुशाय भुवनत्रय मंडिताय
      आनंद भूमि वरदाय तमोपयाय ।
      दारिद्र्यदुःख दहनाय नमश्शिवाय ॥ 5 ॥

      भानुप्रियाय भवसागर तारणाय
      कालांतकाय कमलासन पूजिताय ।
      नेत्रत्रयाय शुभलक्षण लक्षिताय
      दारिद्र्यदुःख दहनाय नमश्शिवाय ॥ 6 ॥

      रामप्रियाय रघुनाथ वरप्रदाय
      नागप्रियाय नरकार्णव तारणाय ।
      पुण्याय पुण्यभरिताय सुरार्चिताय
      दारिद्र्यदुःख दहनाय नमश्शिवाय ॥ 7 ॥

      मुक्तेश्वराय फलदाय गणेश्वराय
      गीताप्रियाय वृषभेश्वर वाहनाय ।
      मातंगचर्म वसनाय महेश्वराय
      दारिद्र्यदुःख दहनाय नमश्शिवाय ॥ 8 ॥

      वसिष्ठेन कृतं स्तोत्रं सर्वरोग निवारणम् ।
      सर्वसंपत्करं शीघ्रं पुत्रपौत्रादि वर्धनम् ।
      त्रिसंध्यं यः पठेन्नित्यं स हि स्वर्ग मवाप्नुयात् ॥ 9 ॥

      ॥ इति श्री वसिष्ठ विरचितं दारिद्र्यदहन शिवस्तोत्रं संपूर्णम् ॥

      || DARIDRYA DAHANA SHIVA STOTRAM ||

      viśvēśvarāya narakārṇava tāraṇāya
      karṇāmṛtāya śaśiśēkhara dhāraṇāya ।
      karpūrakānti dhavaḻāya jaṭādharāya
      dāridryaduḥkha dahanāya namaśśivāya ॥ 1 ॥

      gaurīpriyāya rajanīśa kaḻādharāya
      kālāntakāya bhujagādhipa kaṅkaṇāya ।
      gaṅgādharāya gajarāja vimardhanāya
      dāridryaduḥkha dahanāya namaśśivāya ॥ 2 ॥

      bhaktapriyāya bhavarōga bhayāpahāya
      ugrāya duḥkha bhavasāgara tāraṇāya ।
      jyōtirmayāya guṇanāma sunṛtyakāya
      dāridryaduḥkha dahanāya namaśśivāya ॥ 3 ॥

      charmāmbarāya śavabhasma vilēpanāya
      phālēkṣaṇāya maṇikuṇḍala maṇḍitāya ।
      mañjīrapādayugaḻāya jaṭādharāya
      dāridryaduḥkha dahanāya namaśśivāya ॥ 4 ॥

      pañchānanāya phaṇirāja vibhūṣaṇāya
      hēmāṅkuśāya bhuvanatraya maṇḍitāya
      ānanda bhūmi varadāya tamōpayāya ।
      dāridryaduḥkha dahanāya namaśśivāya ॥ 5 ॥

      bhānupriyāya bhavasāgara tāraṇāya
      kālāntakāya kamalāsana pūjitāya ।
      nētratrayāya śubhalakṣaṇa lakṣitāya
      dāridryaduḥkha dahanāya namaśśivāya ॥ 6 ॥

      rāmapriyāya raghunātha varapradāya
      nāgapriyāya narakārṇava tāraṇāya ।
      puṇyāya puṇyabharitāya surārchitāya
      dāridryaduḥkha dahanāya namaśśivāya ॥ 7 ॥

      muktēśvarāya phaladāya gaṇēśvarāya
      gītāpriyāya vṛṣabhēśvara vāhanāya ।
      mātaṅgacharma vasanāya mahēśvarāya
      dāridryaduḥkha dahanāya namaśśivāya ॥ 8 ॥

      vasiṣṭhēna kṛtaṃ stōtraṃ sarvarōga nivāraṇam ।
      sarvasampatkaraṃ śīghraṃ putrapautrādi vardhanam ।
      trisandhyaṃ yaḥ paṭhēnnityaṃ sa hi svarga mavāpnuyāt ॥ 9 ॥

      ॥ iti śrī vasiṣṭha virachitaṃ dāridryadahana śivastōtraṃ sampūrṇam ॥


      दारिद्र्य दहन शिव स्तोत्रम् के लाभ

      दारिद्र्य दहन शिव स्तोत्रम् एक महत्वपूर्ण शिव स्तोत्र है जो विशेष रूप से आर्थिक तंगी और दरिद्रता को दूर करने के लिए पाठ किया जाता है। यह स्तोत्र भगवान शिव के प्रति भक्ति और समर्पण को व्यक्त करने के साथ-साथ व्यक्ति की दरिद्रता और आर्थिक समस्याओं को समाप्त करने का एक प्रभावी साधन है। इस स्तोत्र का पाठ न केवल आर्थिक स्थिति को सुधारता है बल्कि मानसिक शांति और आत्म-संवेदनशीलता को भी बढ़ाता है। आइए विस्तार से जानते हैं इस स्तोत्र के लाभ और इसके पाठ की महत्वता के बारे में।

      आर्थिक समस्याओं का समाधान

      दारिद्र्य दहन शिव स्तोत्रम् का मुख्य लाभ यह है कि यह आर्थिक समस्याओं और दरिद्रता को दूर करने में सहायक होता है। जब कोई व्यक्ति आर्थिक तंगी से गुजरता है, तो यह स्तोत्र उसकी आर्थिक स्थिति को सुधारने में मदद करता है। इसे नियमित रूप से पढ़ने से भगवान शिव की कृपा प्राप्त होती है, जो आर्थिक समृद्धि और वित्तीय सुरक्षा को बढ़ावा देती है।

      संतुलित और सकारात्मक मानसिकता

      ध्यान और स्तोत्र के नियमित पाठ से व्यक्ति की मानसिक स्थिति संतुलित रहती है। दारिद्र्य दहन शिव स्तोत्रम् का पाठ करने से मन में सकारात्मकता और आत्म-विश्वास का विकास होता है। इससे व्यक्ति की मानसिक स्थिरता बढ़ती है और वह आर्थिक समस्याओं के बावजूद शांत और स्थिर रहता है।

      धन-सम्पत्ति में वृद्धि

      इस स्तोत्र के पाठ से व्यक्ति के जीवन में धन और सम्पत्ति की वृद्धि होती है। यह विशेष रूप से उन लोगों के लिए उपयोगी है जिनकी आर्थिक स्थिति कमजोर है और जो धन के अभाव का सामना कर रहे हैं। भगवान शिव की कृपा प्राप्त करने से धन के प्रवाह में सुधार होता है और वित्तीय स्थिरता प्राप्त होती है।

      बुरी परिस्थितियों से मुक्ति

      दारिद्र्य दहन शिव स्तोत्रम् का पाठ बुरी परिस्थितियों और संकटों से मुक्ति दिलाने में सहायक होता है। यह स्तोत्र विशेष रूप से उन लोगों के लिए प्रभावी है जो जीवन की कठिन परिस्थितियों का सामना कर रहे हैं। भगवान शिव की पूजा और स्तोत्र के पाठ से सभी प्रकार की समस्याओं और बाधाओं को पार करने में मदद मिलती है।

      आध्यात्मिक उन्नति

      इस स्तोत्र के पाठ से आध्यात्मिक उन्नति भी होती है। दारिद्र्य दहन शिव स्तोत्रम् भगवान शिव के प्रति गहरी भक्ति और समर्पण को व्यक्त करता है, जिससे व्यक्ति की आत्मा को शांति और संतोष मिलता है। यह स्तोत्र व्यक्ति को आध्यात्मिक मार्ग पर चलने और आत्मिक जागरूकता प्राप्त करने में मदद करता है।

      व्यापार और पेशेवर सफलता

      व्यापारियों और पेशेवर लोगों के लिए दारिद्र्य दहन शिव स्तोत्रम् एक महत्वपूर्ण उपाय हो सकता है। यह स्तोत्र व्यापारिक और पेशेवर क्षेत्र में सफलता प्राप्त करने के लिए सहायक होता है। नियमित पाठ से व्यापार में उन्नति, नए अवसरों की प्राप्ति और पेशेवर क्षेत्र में सफलता की संभावना बढ़ती है।

      शांति और समृद्धि

      भगवान शिव की पूजा और स्तोत्र का पाठ व्यक्ति के जीवन में शांति और समृद्धि लाता है। यह स्तोत्र विशेष रूप से उन लोगों के लिए है जो जीवन में शांति और सुख की तलाश में हैं। इससे परिवार में सामंजस्य और सुख-शांति बनी रहती है, जिससे जीवन में समृद्धि और खुशी का अनुभव होता है।

      आध्यात्मिक और मानसिक शक्ति

      दारिद्र्य दहन शिव स्तोत्रम् का नियमित पाठ व्यक्ति की आध्यात्मिक और मानसिक शक्ति को बढ़ाता है। भगवान शिव की भक्ति और समर्पण से व्यक्ति की मानसिक स्थिति मजबूत होती है और वह जीवन की कठिनाइयों का सामना करने के लिए मानसिक रूप से तैयार रहता है।

      स्वास्थ्य लाभ

      स्वास्थ्य के दृष्टिकोण से भी दारिद्र्य दहन शिव स्तोत्रम् का पाठ लाभकारी हो सकता है। इससे मानसिक तनाव कम होता है, जो स्वास्थ्य पर सकारात्मक प्रभाव डालता है। जब मानसिक स्थिति स्थिर और शांत रहती है, तो यह शारीरिक स्वास्थ्य को भी अच्छा बनाता है।

      संकटमोचन

      यह स्तोत्र संकट और परेशानियों से उबरने के लिए भी प्रभावी है। जीवन में आने वाली विभिन्न समस्याओं और कठिनाइयों को दूर करने के लिए दारिद्र्य दहन शिव स्तोत्रम् का पाठ किया जाता है। यह व्यक्ति को कठिन समय में समर्थन और शक्ति प्रदान करता है।

      भक्तिपूर्वक पूजा

      दारिद्र्य दहन शिव स्तोत्रम् का पाठ भक्तिपूर्वक और श्रद्धा के साथ करने से व्यक्ति की भक्ति और समर्पण की भावना बढ़ती है। भगवान शिव के प्रति गहरी श्रद्धा और भक्ति से जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आते हैं और व्यक्ति का जीवन आध्यात्मिक दृष्टिकोण से भी समृद्ध होता है।

      सहजता और सुख

      इस स्तोत्र के नियमित पाठ से जीवन में सहजता और सुख का अनुभव होता है। व्यक्ति अपने जीवन के सभी पहलुओं में अधिक संतुलित और खुशहाल महसूस करता है। यह स्तोत्र जीवन की जटिलताओं को सरल बनाता है और खुशी और संतोष प्रदान करता है।

      दारिद्र्य दहन शिव स्तोत्रम् का पाठ व्यक्ति के जीवन में आर्थिक, मानसिक, और आध्यात्मिक लाभ लाने में सहायक होता है। यह स्तोत्र दरिद्रता और आर्थिक समस्याओं को समाप्त करने के साथ-साथ मानसिक शांति, आध्यात्मिक उन्नति और जीवन की विभिन्न समस्याओं से मुक्ति प्रदान करता है। इसके नियमित पाठ से व्यक्ति का जीवन खुशहाल और समृद्ध बनता है। भगवान शिव की कृपा और भक्ति से व्यक्ति का जीवन सहज और संतुलित होता है, जिससे जीवन में सुख और समृद्धि का अनुभव होता है।

      श्री गणेश चालीसा – Ganesh Chalisa PDF 2024-25

      गणेश चालीसा (Ganesh Chalisa Pdf), हिन्दू धर्म में अत्यंत महत्वपूर्ण और पवित्र धार्मिक ग्रंथ है, जो भगवान गणेश की आराधना के लिए विशेष रूप से लिखा गया है। गणेश जी, जिन्हें विघ्नहर्ता और बुद्धि, समृद्धि और सौभाग्य के देवता के रूप में पूजा जाता है, उनके गुण और महिमा को दर्शाने के लिए यह चालीसा तैयार की गई है।

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      गणेश चालीसा, चौबीस पंक्तियों में भगवान गणेश की पूजा, उनकी शक्ति और उनके आशीर्वाद की महिमा का वर्णन करती है। इस ग्रंथ में गणेश जी की विशेषताओं, उनकी पूजा के महत्व, और भक्तों को उनसे मिलने वाले लाभों का विस्तृत वर्णन किया गया है। यह चालीसा भक्तों को मानसिक शांति, विघ्नों से मुक्ति, और जीवन की कठिनाइयों से उबरने में मदद करती है।

      गणेश चालीसा का पाठ भक्तों के लिए एक शक्तिशाली साधना का माध्यम है, जो न केवल आध्यात्मिक उन्नति को बढ़ावा देती है, बल्कि जीवन के हर पहलू में सुख, समृद्धि और सफलता भी प्रदान करती है। इसे दैनिक या विशेष अवसरों पर पढ़ने से गणेश जी की कृपा और आशीर्वाद प्राप्त होता है, जो जीवन में हर बाधा और कठिनाई को दूर करता है।

      इस प्रकार, गणेश चालीसा एक साधना और पूजा का महत्वपूर्ण हिस्सा है, जो भक्तों को मानसिक और आध्यात्मिक शांति, समृद्धि, और खुशहाली प्राप्त करने में सहायता करती है।


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      • English

      || गणेश चालीसा ||

      Ganesh Chalisa PDF in Hindi

      ॥ दोहा ॥
      जय गणपति सदगुण सदन,
      कविवर बदन कृपाल ।
      विघ्न हरण मंगल करण,
      जय जय गिरिजालाल ॥

      ॥ चौपाई ॥
      जय जय जय गणपति गणराजू ।
      मंगल भरण करण शुभः काजू ॥

      जै गजबदन सदन सुखदाता ।
      विश्व विनायका बुद्धि विधाता ॥

      वक्र तुण्ड शुची शुण्ड सुहावना ।
      तिलक त्रिपुण्ड भाल मन भावन ॥

      राजत मणि मुक्तन उर माला ।
      स्वर्ण मुकुट शिर नयन विशाला ॥

      पुस्तक पाणि कुठार त्रिशूलं ।
      मोदक भोग सुगन्धित फूलं ॥

      सुन्दर पीताम्बर तन साजित ।
      चरण पादुका मुनि मन राजित ॥

      धनि शिव सुवन षडानन भ्राता ।
      गौरी लालन विश्व-विख्याता ॥

      ऋद्धि-सिद्धि तव चंवर सुधारे ।
      मुषक वाहन सोहत द्वारे ॥

      कहौ जन्म शुभ कथा तुम्हारी ।
      अति शुची पावन मंगलकारी ॥

      एक समय गिरिराज कुमारी ।
      पुत्र हेतु तप कीन्हा भारी ॥ 10 ॥

      भयो यज्ञ जब पूर्ण अनूपा ।
      तब पहुंच्यो तुम धरी द्विज रूपा ॥

      अतिथि जानी के गौरी सुखारी ।
      बहुविधि सेवा करी तुम्हारी ॥

      अति प्रसन्न हवै तुम वर दीन्हा ।
      मातु पुत्र हित जो तप कीन्हा ॥

      मिलहि पुत्र तुहि, बुद्धि विशाला ।
      बिना गर्भ धारण यहि काला ॥

      गणनायक गुण ज्ञान निधाना ।
      पूजित प्रथम रूप भगवाना ॥

      अस कही अन्तर्धान रूप हवै ।
      पालना पर बालक स्वरूप हवै ॥

      बनि शिशु रुदन जबहिं तुम ठाना ।
      लखि मुख सुख नहिं गौरी समाना ॥

      सकल मगन, सुखमंगल गावहिं ।
      नाभ ते सुरन, सुमन वर्षावहिं ॥

      शम्भु, उमा, बहुदान लुटावहिं ।
      सुर मुनिजन, सुत देखन आवहिं ॥

      लखि अति आनन्द मंगल साजा ।
      देखन भी आये शनि राजा ॥ 20 ॥

      निज अवगुण गुनि शनि मन माहीं ।
      बालक, देखन चाहत नाहीं ॥

      गिरिजा कछु मन भेद बढायो ।
      उत्सव मोर, न शनि तुही भायो ॥

      कहत लगे शनि, मन सकुचाई ।
      का करिहौ, शिशु मोहि दिखाई ॥

      नहिं विश्वास, उमा उर भयऊ ।
      शनि सों बालक देखन कहयऊ ॥

      पदतहिं शनि दृग कोण प्रकाशा ।
      बालक सिर उड़ि गयो अकाशा ॥

      गिरिजा गिरी विकल हवै धरणी ।
      सो दुःख दशा गयो नहीं वरणी ॥

      हाहाकार मच्यौ कैलाशा ।
      शनि कीन्हों लखि सुत को नाशा ॥

      तुरत गरुड़ चढ़ि विष्णु सिधायो ।
      काटी चक्र सो गज सिर लाये ॥

      बालक के धड़ ऊपर धारयो ।
      प्राण मन्त्र पढ़ि शंकर डारयो ॥

      नाम गणेश शम्भु तब कीन्हे ।
      प्रथम पूज्य बुद्धि निधि, वर दीन्हे ॥ 30 ॥

      बुद्धि परीक्षा जब शिव कीन्हा ।
      पृथ्वी कर प्रदक्षिणा लीन्हा ॥

      चले षडानन, भरमि भुलाई ।
      रचे बैठ तुम बुद्धि उपाई ॥

      चरण मातु-पितु के धर लीन्हें ।
      तिनके सात प्रदक्षिण कीन्हें ॥

      धनि गणेश कही शिव हिये हरषे ।
      नभ ते सुरन सुमन बहु बरसे ॥

      तुम्हरी महिमा बुद्धि बड़ाई ।
      शेष सहसमुख सके न गाई ॥

      मैं मतिहीन मलीन दुखारी ।
      करहूं कौन विधि विनय तुम्हारी ॥

      भजत रामसुन्दर प्रभुदासा ।
      जग प्रयाग, ककरा, दुर्वासा ॥

      अब प्रभु दया दीना पर कीजै ।
      अपनी शक्ति भक्ति कुछ दीजै ॥ 38 ॥

      ॥ दोहा ॥
      श्री गणेश यह चालीसा,
      पाठ करै कर ध्यान ।
      नित नव मंगल गृह बसै,
      लहे जगत सन्मान ॥

      सम्बन्ध अपने सहस्त्र दश,
      ऋषि पंचमी दिनेश ।
      पूरण चालीसा भयो,
      मंगल मूर्ती गणेश ॥

      || Ganesh Chalisa PDF ||

      Ganesh Chalisa PDF in English

      ॥ Doha ॥
      Jay ganapati sadagun svaamee,
      Kavivar aasheervaad ॥
      Vighn haran mangal karana,
      Jay jay girijaalaal ॥

      ॥ Chaupaee ॥
      jay jay jay ganapati ganaraajoo ॥
      mangal arpan karan shubhah kaajoo ॥

      jay gajabadan sadan sukhadaata ॥
      vishv vinaayaka buddhi vidhaata ॥

      svar tund shuchi shund suhaavana ॥
      tilak tripund bhaal man bhaavan ॥

      raajat mani muktan ur mangal ॥
      svarnamukut shree nayan vishaala ॥

      pustak paanee kuthaar trishoolan ॥
      modak bhog sugandhit phoolan ॥

      sundar peetaambar tan saajit ॥
      charan paaduka muni man raajit ॥

      dhani shiv suvan shadaanan bhraata ॥
      gauree laalan vishvavikhyaata ॥

      rddhi-siddhi tav chanvar sudhaare ॥
      mushaak vaahan sohat dvaare ॥

      kahau janm shubh katha vivaah ॥
      ati shuchi pavan mangalakaaree ॥

      ek samay giriraaj kumaaree ॥
      putr vikaas tap keenha bhaaree ॥ 10 ॥

      bhayo yagy jab poorn anupama ॥
      tab pahunchyo tum dhari dvij roopa ॥

      mehamaan jaanee ke gauree sukhaaree ॥
      bahuvidhi seva kari vivaah ॥

      ati prasannachitt tum var deenha ॥
      maatu putr hit jo tap keenha ॥

      milahi putr tuhi, buddhi vishaala ॥
      bina garbh dhaaran yah kaala ॥

      gananaayak gun gyaan nidhaana ॥
      poojit pratham roop bhagavaana ॥

      as kahi antardhaan roop havai ॥
      paalana par aayurvigyaan sandarbh haavai ॥

      banee instityoot rudan jabahin tum thaana ॥
      lakhi mukh sukh nahin gauree samaana ॥

      sakal magan, sukhamangal gaavahin ॥
      nabh te suran, suman varshavaahahin ॥

      shambhu uma bahudaan lutaavahin ॥
      sur munijan, sut dekhan avahin ॥

      lakhee ati aanand mangal saaja ॥
      dekhiye bhee aaye shani raaja ॥ 20 ॥

      nij avagun gunee shani man maaheen ॥
      baalak, dekhan chaahat nahin ॥

      girija kachhu man bhed bhayayo ॥
      utsav mor, na shani tuhee bhayo ॥

      kahat lage shani, man sukhaee ॥
      ka karihau, shishu mohi prakat ॥

      nahin vishvaas, uma ur bhayau ॥
      shani son baalak dekhan kahayau ॥

      padatahin shani dig kon prakaasha ॥
      baalak sir udi gayo aakaasha ॥

      girija giree vikal havai dharanee ॥
      so duhkh dasha gayo nahin varanee ॥

      haahaakaar machayau kailaas ॥
      shani keenhon lakkhee sut ko naasha ॥

      turat garud chadhaee vishnu siddhayo ॥
      kati chakr so gaj sir laaye ॥

      bachche ke dhad oopar dharayo ॥
      praan mantr vidya shankar darayo ॥

      naam ganesh shambhu tab keenhe ॥
      pratham poojy buddhi nidhi, var deenhe ॥ 30 ॥

      buddhi pareekshan jab shiv keenha ॥
      prthvee kar pradakshina leenha ॥

      chale shadaanan, bharami bhayaee ॥
      rache baithe tum buddhi upaee ॥

      charan maatu-pitu ke dhar leenhen ॥
      tinake saat pradakshin kinhen ॥

      dhani ganesh kahi shiv haye harshe ॥
      nabh te suran suman bahu barase ॥

      tumhaaree mahima buddhi badaee ॥
      shesh sahasamukh sake na gaee ॥

      main matiheen maleen dukhaaree ॥
      karahoon kaun vidhi vinee vivaah ॥

      bhajat raamasundar prabhudaasa ॥
      jag prayaag, kaakara, durvaasa ॥

      ab prabhu daya deena par keejai ॥
      apanee shakti bhakti kuchh deejai ॥ 38 ॥

      ॥ Doha ॥
      shree ganesh yah chaaleesa,
      paath karai kar dhyaan ॥
      nit nav mangal grh basai,
      lahe jagat sanmaan ॥

      sambandhit apane sahastr dash,
      rshi panchamee din ॥
      poorn chaaleesa bhayo,
      mangal moorti ganesh ॥



      shri ganesh chalisa pdf


      गणेश चालीसा के लाभ

      गणेश चालीसा, श्री गणेश जी की आराधना के लिए एक महत्वपूर्ण धार्मिक ग्रंथ है, जो चालीस श्लोकों में उनकी महिमा, गुण, और उपासना का वर्णन करता है। यह धार्मिक काव्य विशेष रूप से भारत के हिन्दू समाज में अत्यधिक सम्मानित है। गणेश चालीसा का पाठ करने के कई लाभ बताए जाते हैं, जो कि व्यक्ति के जीवन को सुखमय और समृद्ध बना सकते हैं।

      1. मानसिक शांति और तनाव में कमी

      गणेश चालीसा का नियमित पाठ मानसिक शांति और तनाव में कमी लाने में सहायक होता है। गणेश जी को विघ्नहर्ता और शांतिदायक माना जाता है। चालीसा का पाठ करते समय मन की एकाग्रता बढ़ती है, जिससे मानसिक तनाव कम होता है और व्यक्ति को मानसिक शांति प्राप्त होती है।

      2. विघ्नों और समस्याओं का समाधान

      गणेश जी को विघ्नहर्ता माना जाता है। गणेश चालीसा का नियमित पाठ करने से जीवन में आने वाली बाधाओं और समस्याओं का समाधान होता है। गणेश जी की उपासना से जीवन के हर क्षेत्र में सफलता प्राप्त करने के मार्ग प्रशस्त होते हैं, चाहे वह शिक्षा, व्यवसाय, या व्यक्तिगत जीवन हो।

      3. शिक्षा और बुद्धि में वृद्धि

      गणेश चालीसा का पाठ करने से बुद्धि, ज्ञान, और समझदारी में वृद्धि होती है। गणेश जी को बुद्धि और ज्ञान का देवता माना जाता है। विशेष रूप से छात्रों और शिक्षार्थियों के लिए गणेश चालीसा का पाठ फायदेमंद हो सकता है, क्योंकि यह उनकी मानसिक क्षमता को बढ़ाता है और पढ़ाई में मन लगाता है।

      4. स्वास्थ्य में सुधार

      गणेश चालीसा का नियमित पाठ और गणेश जी की आराधना से स्वास्थ्य में भी सुधार देखा जा सकता है। मानसिक शांति और तनाव में कमी होने के कारण शारीरिक स्वास्थ्य पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। इसके अतिरिक्त, गणेश जी की पूजा से रोगों और बीमारियों से बचाव में भी सहायता मिलती है।

      5. आर्थिक समृद्धि और लाभ

      गणेश जी को समृद्धि और धन के देवता भी माना जाता है। गणेश चालीसा का पाठ आर्थिक समृद्धि में वृद्धि कर सकता है। यह व्यक्ति को धन और संसाधनों के प्रबंधन में सहायता प्रदान करता है और आर्थिक समस्याओं को दूर करने में मदद करता है।

      6. वैवाहिक और पारिवारिक सुख

      गणेश चालीसा का पाठ पारिवारिक सुख और वैवाहिक जीवन में भी सुधार ला सकता है। यह परिवार में सुख-शांति और प्रेम बनाए रखने में सहायक होता है। गणेश जी की आराधना से वैवाहिक समस्याओं का समाधान होता है और परिवार में समझदारी और सामंजस्य बढ़ता है।

      7. सामाजिक और पेशेवर सफलता

      गणेश चालीसा का पाठ सामाजिक और पेशेवर जीवन में भी सफलता दिलाने में सहायक होता है। यह व्यक्ति को समाज में मान-सम्मान दिलाने और पेशेवर क्षेत्र में उन्नति करने में मदद करता है। गणेश जी की आराधना से कार्यक्षेत्र में सफलता प्राप्त करने के रास्ते खुलते हैं।

      8. जीवन की दिशा और उद्देश्य

      गणेश चालीसा का पाठ जीवन में दिशा और उद्देश्य प्राप्त करने में भी सहायक होता है। यह व्यक्ति को अपनी प्राथमिकताओं को समझने और अपने जीवन के लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए प्रेरित करता है। गणेश जी की उपासना से जीवन के उद्देश्यों को प्राप्त करने की दिशा स्पष्ट होती है।

      9. आत्म-विश्वास में वृद्धि

      गणेश चालीसा का नियमित पाठ आत्म-विश्वास को बढ़ाने में मदद करता है। गणेश जी की उपासना से व्यक्ति के अंदर एक सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है, जो आत्म-विश्वास को बढ़ाता है और जीवन में चुनौतियों का सामना करने की क्षमता को मजबूत करता है।

      10. मनोबल और दृढ़ता

      गणेश चालीसा का पाठ व्यक्ति के मनोबल और दृढ़ता को बढ़ाता है। गणेश जी की उपासना से व्यक्ति में साहस और हिम्मत आती है, जिससे वह जीवन की कठिन परिस्थितियों का सामना बेहतर तरीके से कर सकता है। यह मनोबल को मजबूत बनाता है और समस्याओं को धैर्यपूर्वक सुलझाने की क्षमता प्रदान करता है।

      11. आत्म-संयम और अनुशासन

      गणेश चालीसा का नियमित पाठ आत्म-संयम और अनुशासन को भी बढ़ावा देता है। गणेश जी की उपासना से व्यक्ति में आत्म-नियंत्रण और अनुशासन की भावना उत्पन्न होती है, जो जीवन को व्यवस्थित और प्रबंधित करने में मदद करती है।

      12. अनिष्ट और नकारात्मक ऊर्जा से रक्षा

      गणेश चालीसा का पाठ व्यक्ति को अनिष्ट और नकारात्मक ऊर्जा से बचाने में सहायक होता है। गणेश जी की पूजा से बुरी शक्तियों और नकारात्मक प्रभावों से सुरक्षा प्राप्त होती है, जिससे व्यक्ति की ऊर्जा सकारात्मक रहती है और जीवन में अशांति का प्रभाव कम होता है।

      13. संतान सुख और संतान की सुख-समृद्धि

      गणेश चालीसा का पाठ संतान सुख और संतान की सुख-समृद्धि में भी सहायक होता है। गणेश जी को संतान सुख और संतान की सुरक्षा का देवता माना जाता है। गणेश चालीसा के पाठ से संतान की शिक्षा, स्वास्थ्य और सफलता में सुधार होता है और परिवार में खुशी बनी रहती है।

      14. धार्मिक और आध्यात्मिक उन्नति

      गणेश चालीसा का पाठ धार्मिक और आध्यात्मिक उन्नति के लिए भी महत्वपूर्ण है। यह व्यक्ति को धार्मिक मान्यताओं और आध्यात्मिक ज्ञान के प्रति जागरूक करता है। गणेश जी की उपासना से व्यक्ति की धार्मिकता और आध्यात्मिकता में वृद्धि होती है और वह ईश्वर के करीब पहुंचता है।

      15. सुख-समृद्धि और सुखद जीवन

      गणेश चालीसा का नियमित पाठ सुख-समृद्धि और सुखद जीवन के लिए भी महत्वपूर्ण है। यह व्यक्ति को जीवन में खुशहाली और समृद्धि प्राप्त करने में मदद करता है और जीवन की हर स्थिति में संतोष और खुशी बनाए रखने की प्रेरणा देता है।

      16. जीवन में सकारात्मकता

      गणेश चालीसा का पाठ जीवन में सकारात्मकता को बढ़ावा देता है। गणेश जी की उपासना से व्यक्ति की सोच सकारात्मक होती है और वह जीवन की कठिनाइयों को सकारात्मक दृष्टिकोण से देखने लगता है। यह मानसिक स्थिति जीवन की चुनौतियों का सामना करने में मदद करती है।

      17. ध्यान और साधना में सहायता

      गणेश चालीसा का नियमित पाठ ध्यान और साधना में भी सहायक होता है। गणेश जी की उपासना से ध्यान लगाने की क्षमता में वृद्धि होती है और साधना के दौरान एकाग्रता बनी रहती है। यह ध्यान की गहराई को बढ़ाता है और आध्यात्मिक अनुभव को सशक्त करता है।

      18. शुभकामनाओं और आशीर्वाद का प्राप्ति

      गणेश चालीसा का पाठ शुभकामनाओं और आशीर्वाद की प्राप्ति में भी सहायक होता है। गणेश जी की उपासना से व्यक्ति को ईश्वर से आशीर्वाद प्राप्त होता है, जो जीवन के हर क्षेत्र में सफलता और समृद्धि को सुनिश्चित करता है।

      19. भौतिक और आध्यात्मिक संतुलन

      गणेश चालीसा का पाठ भौतिक और आध्यात्मिक संतुलन बनाए रखने में भी सहायक होता है। यह व्यक्ति को जीवन के भौतिक और आध्यात्मिक पहलुओं को संतुलित तरीके से जीने की प्रेरणा देता है, जिससे जीवन में एकरूपता और सामंजस्य बनता है।

      20. जीवन की कठिनाइयों से उबरना

      गणेश चालीसा का पाठ जीवन की कठिनाइयों से उबरने में भी सहायक होता है। गणेश जी की उपासना से व्यक्ति को कठिन परिस्थितियों से बाहर निकलने की शक्ति और क्षमता प्राप्त होती है, और जीवन की समस्याओं का समाधान अधिक आसान होता है।

      21. शांति और आंतरिक सुकून

      गणेश चालीसा का नियमित पाठ आंतरिक शांति और सुकून प्रदान करता है। यह व्यक्ति के अंदर गहरी मानसिक शांति का अनुभव कराता है और जीवन के हर पहलू में संतुलन बनाए रखने में मदद करता है।

      22. साधना और पूजा की नियमितता

      गणेश चालीसा का पाठ पूजा और साधना की नियमितता को बनाए रखने में भी सहायक होता है। यह व्यक्ति को धार्मिक अनुशासन में बनाए रखता है और नियमित पूजा और साधना के अभ्यास को प्रोत्साहित करता है।

      गणेश चालीसा का पाठ न केवल धार्मिक और आध्यात्मिक लाभ प्रदान करता है, बल्कि यह जीवन के विभिन्न पहलुओं में सकारात्मक परिवर्तन लाने में भी सहायक होता है। इसके नियमित पाठ से मानसिक शांति, विघ्नों का नाश, बुद्धि में वृद्धि, स्वास्थ्य में सुधार, और आर्थिक समृद्धि जैसी अनेक लाभ प्राप्त होते हैं। गणेश जी की उपासना से व्यक्ति को जीवन की हर स्थिति में खुशी, सफलता, और संतोष प्राप्त होता है।

      Ganesh-Chalisa-PDF-Benefits

      गणेश चालीसा किसने लिखा था?

      गणेश चालीसा के रचयिता राम सुन्दर प्रभु दास हैं, जिनका उल्लेख भजन में किया गया है, लेकिन आमतौर पर यह माना जाता है कि 16वीं शताब्दी में रहने वाले सुप्रसिद्ध कवि और संत तुलसीदास ने भी इसे लिखा था। तुलसीदास जी ने अपने भजनों और स्तुतियों के माध्यम से हिंदू धर्म में महत्वपूर्ण योगदान दिया है और गणेश चालीसा भी उनके द्वारा रचित प्रमुख स्तुतियों में से एक मानी जाती है।

      गणेश चालीसा का इतिहास क्या है?

      गणेश चालीसा का इतिहास बहुत पुराना है और यह हिंदू धर्म की समृद्ध धार्मिक परंपराओं में गहराई से जुड़ा हुआ है। इसके रचयिता के रूप में राम सुन्दर प्रभु दास का नाम आता है, लेकिन कई विद्वानों का मानना है कि यह महान संत तुलसीदास द्वारा भी रचित हो सकता है। तुलसीदास ने अपनी रचनाओं में भगवान गणेश की स्तुति की है, जिससे यह मान्यता भी स्थापित होती है।

      गणेश चालीसा का पाठ करने के नियम क्या हैं?

      गणेश चालीसा का पाठ करते समय कुछ नियमों का पालन करना चाहिए:
      शुद्धता का ध्यान रखें।
      शांत और एकाग्र मन से पाठ करें।
      नियमित रूप से पाठ करने की आदत डालें।
      पाठ करते समय भगवान गणेश की प्रतिमा या चित्र के सामने बैठें।

      गणेश जी का असली नाम क्या है?

      गणेश जी का असली नाम “गणपति” है। उन्हें विभिन्न नामों से जाना जाता है, जैसे विनायक, लंबोदर, एकदंत, वक्रतुंड आदि। उनका प्रत्येक नाम उनके किसी विशेष गुण या विशेषता को दर्शाता है।

      गणेश जी का शक्तिशाली मंत्र क्या है?

      गणेश जी का सबसे शक्तिशाली मंत्र “ॐ गं गणपतये नमः” है। यह मंत्र भगवान गणेश की कृपा प्राप्त करने के लिए सबसे अधिक प्रभावी माना जाता है। इस मंत्र का नियमित जप करने से सभी बाधाएं दूर होती हैं और सफलता प्राप्त होती है।

      गणेश चालीसा: हर बुधवार को करें गणेश चालीसा का पाठ, हर इच्छा पूरी करेंगे गणपति

      गणेश चालीसा का महत्व: गणेश चालीसा भगवान गणेश की स्तुति में लिखा गया एक महत्वपूर्ण भजन है। इसमें 40 श्लोक होते हैं, जो भगवान गणेश के गुणों और उनके दिव्य कार्यों का वर्णन करते हैं। गणेश चालीसा का नियमित पाठ करने से सभी बाधाएं दूर होती हैं और सफलता प्राप्त होती है।

      हर बुधवार को गणेश चालीसा का पाठ: गणेश जी को बुधवार का दिन विशेष रूप से प्रिय है। इसलिए हर बुधवार को गणेश चालीसा का पाठ करना अत्यंत शुभ और फलदायी माना जाता है। यह माना जाता है कि बुधवार को गणेश चालीसा का पाठ करने से भगवान गणेश सभी इच्छाओं को पूरा करते हैं और जीवन में सुख-समृद्धि लाते हैं।

      गणेश चालीसा का पाठ कैसे करें:

      तैयारी:
      प्रातः स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
      पूजा स्थल को साफ कर भगवान गणेश की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें।
      दीपक जलाएं और धूपबत्ती (अगरबत्ती) अर्पित करें।

      सामग्री:
      ताजे फूल, विशेषकर लाल और पीले रंग के फूल अर्पित करें।
      फल, मिठाई (जैसे मोदक), और जल भगवान गणेश को अर्पित करें।
      यदि संभव हो तो माला (prayer beads) का उपयोग करें।

      मंत्र उच्चारण:
      आराम से बैठकर आँखें बंद करें।
      ॐ गं गणपतये नमः” मंत्र का 108 बार जाप करें।

      सूर्य चालीसा (Surya Chalisa pdf)

      सूर्य देव की चालीसा (Surya Chalisa) अत्यंत लाभकारी है। इसमें सूर्य देव के बारह नामों का उल्लेख मिलता है। सूर्य देव की पूजा करते समय इन बारह नामों का श्रद्धापूर्वक जप करना चाहिए। ये बारह नाम इस प्रकार हैं: मित्र, मरीचि, भानु, भास्कर, सविता, सूर्य, अर्क, खग, पूषा, रवि आदित्य और हिरण्यगर्भ।

      उनके सारथी अरुण जी हैं। सूर्य देव सात घोड़ों के रथ पर सवार होते हैं।

      सूर्य देव की आरती और भक्ति से त्वचा रोग ठीक हो जाते हैं। व्यक्ति को सुख, समृद्धि, यश, नाम, लंबी आयु आदि की प्राप्ति होती है। विदेश यात्रा में भी सूर्यदेव सहायता करते हैं।

      ॐ सूर्याय नमः।


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      || सूर्य चालीसा ||

      ॥चौपाई॥
      जय सविता जय जयति दिवाकर,
      सहस्त्रांशु सप्ताश्व तिमिरहर॥
      भानु पतंग मरीची भास्कर,
      सविता हंस सुनूर विभाकर॥ 1॥

      विवस्वान आदित्य विकर्तन,
      मार्तण्ड हरिरूप विरोचन॥
      अम्बरमणि खग रवि कहलाते,
      वेद हिरण्यगर्भ कह गाते॥ 2॥

      सहस्त्रांशु प्रद्योतन, कहिकहि,
      मुनिगन होत प्रसन्न मोदलहि॥
      अरुण सदृश सारथी मनोहर,
      हांकत हय साता चढ़ि रथ पर॥3॥

      मंडल की महिमा अति न्यारी,
      तेज रूप केरी बलिहारी॥
      उच्चैःश्रवा सदृश हय जोते,
      देखि पुरन्दर लज्जित होते॥4

      मित्र मरीचि, भानु, अरुण, भास्कर,
      सविता सूर्य अर्क खग कलिकर॥
      पूषा रवि आदित्य नाम लै,
      हिरण्यगर्भाय नमः कहिकै॥5॥

      द्वादस नाम प्रेम सों गावैं,
      मस्तक बारह बार नवावैं॥
      चार पदारथ जन सो पावै,
      दुःख दारिद्र अघ पुंज नसावै॥6॥

      नमस्कार को चमत्कार यह,
      विधि हरिहर को कृपासार यह॥
      सेवै भानु तुमहिं मन लाई,
      अष्टसिद्धि नवनिधि तेहिं पाई॥7॥

      बारह नाम उच्चारन करते,
      सहस जनम के पातक टरते॥
      उपाख्यान जो करते तवजन,
      रिपु सों जमलहते सोतेहि छन॥8॥

      धन सुत जुत परिवार बढ़तु है,
      प्रबल मोह को फंद कटतु है॥
      अर्क शीश को रक्षा करते,
      रवि ललाट पर नित्य बिहरते॥9॥

      सूर्य नेत्र पर नित्य विराजत,
      कर्ण देस पर दिनकर छाजत॥
      भानु नासिका वासकरहुनित,
      भास्कर करत सदा मुखको हित॥10॥

      ओंठ रहैं पर्जन्य हमारे,
      रसना बीच तीक्ष्ण बस प्यारे॥
      कंठ सुवर्ण रेत की शोभा,
      तिग्म तेजसः कांधे लोभा॥11॥

      पूषां बाहू मित्र पीठहिं पर,
      त्वष्टा वरुण रहत सुउष्णकर॥
      युगल हाथ पर रक्षा कारन,
      भानुमान उरसर्म सुउदरचन॥12॥

      बसत नाभि आदित्य मनोहर,
      कटिमंह, रहत मन मुदभर॥
      जंघा गोपति सविता बासा,
      गुप्त दिवाकर करत हुलासा॥13॥

      विवस्वान पद की रखवारी,
      बाहर बसते नित तम हारी॥
      सहस्त्रांशु सर्वांग सम्हारै,
      रक्षा कवच विचित्र विचारे॥14॥

      अस जोजन अपने मन माहीं,
      भय जगबीच करहुं तेहि नाहीं ॥
      दद्रु कुष्ठ तेहिं कबहु न व्यापै,
      जोजन याको मन मंह जापै॥15॥
      अंधकार जग का जो हरता,
      नव प्रकाश से आनन्द भरता॥

      ग्रह गन ग्रसि न मिटावत जाही,
      कोटि बार मैं प्रनवौं ताही॥
      मंद सदृश सुत जग में जाके,
      धर्मराज सम अद्भुत बांके॥16॥

      धन्य-धन्य तुम दिनमनि देवा,
      किया करत सुरमुनि नर सेवा॥
      भक्ति भावयुत पूर्ण नियम सों,
      दूर हटतसो भवके भ्रम सों॥17॥

      परम धन्य सों नर तनधारी,
      हैं प्रसन्न जेहि पर तम हारी॥
      अरुण माघ महं सूर्य फाल्गुन,
      मधु वेदांग नाम रवि उदयन॥18॥

      भानु उदय बैसाख गिनावै,
      ज्येष्ठ इन्द्र आषाढ़ रवि गावै॥
      यम भादों आश्विन हिमरेता,
      कातिक होत दिवाकर नेता॥19॥

      अगहन भिन्न विष्णु हैं पूसहिं,
      पुरुष नाम रविहैं मलमासहिं॥20॥

      ॥दोहा॥
      भानु चालीसा प्रेम युत, गावहिं जे नर नित्य,
      सुख सम्पत्ति लहि बिबिध, होंहिं सदा कृतकृत्य॥

      || Surya Chalisa in English ||

      ॥Chaupaee ॥
      Jay shiv jay jayati divaakar,
      Sahastraanshu saptashv timirahar ॥
      Bhaanu patang mereechee bhaaskar,
      Shivaanee hans sunoor vibhaakar ॥ 1 ॥

      Vivasvaan aadity vikartan,
      Maartand hariroop virochan ॥
      Ambaramani khag ravi kahalaate,
      Ved hiranyagarbh kahie ॥ 2 ॥

      Sahastraanshu pradyotan, kahiki,
      Munigan hot aakarshak modalhi ॥
      Arun sadrsh saarathee manohar,
      Haankat hay saata chadhee rath par ॥3 ॥

      Mandal kee mahima ati nyaaree,
      Tej roop keree balihaaree ॥
      Uchchaihshrava sadrsh hay jote,
      Dekhi purandar lajjit hote ॥4 ॥

      Mitr mareechi, bhaanu, arun, bhaaskar,
      Soory ark khag kalikaar ॥
      Poosha ravi aadity naam la,
      Hiranyagarbhaay namah kahikai ॥5 ॥

      Dvaadash naam prem son gaaven,
      Mastak baar baar navae ॥
      Chaar padaarath jan so paavai,
      Duhkh daaridr agh punj naasaavai ॥6 ॥

      Namaskaar ko chamatkaar yah,
      Vidhi harihar ko krpaasaar yah ॥
      Sevai bhaanu tumahin man laee,
      Ashtasiddhi navanidhi tehin paee ॥7 ॥

      Baarah naamaakaran karate hain,
      Sahas janm ke paatak tarate ॥
      Upaakhyaan jo karate hain tavajan,
      Ripu son jamalahate sorahi chhan ॥8 ॥

      Dhan sut jut parivaar badhata hai,
      Prabal moh ko phand kattoo hai ॥
      Aark sheeshe ko raksha karana,
      Ravi lalaat par nity biharate ॥9 ॥

      Soory utsav par nity viraajat,
      Karn des par dinakar chhaajat ॥
      Bhaanusaansa vakarahunit,
      Bhaaskar karat sada mukhako hit ॥10 ॥

      Baakee rahan parjanik hamaare,
      Rasana beech teekshn bas priye ॥
      Kanth suvarn retee kee shobha,
      Tigm tejasah kandhe lobha ॥11 ॥

      Pooshaan bahu mitr prshnahin par,
      Tvashta varun rahat sushankar ॥
      Dost ke haath par raksha karan,
      Bhaanumaan urasarm suudarchan ॥12 ॥

      Basat naabhi aadity manohar,
      Katimanh, rahat man mudabhar ॥
      Janga gopeepati savita baasa,
      Gupt divaakar karat hulasa ॥13 ॥

      Visvaasan pad kee rakhavaaree,
      Basate nit tam haaree ॥
      Sahastraanshu sarvaang samhaarai,
      Raksha kavach vichitr vichaare ॥14 ॥

      As jojan apane man maaheen,
      Bhay jag samudratat karahun tehi naahin ॥
      Dadru kushth tehin kahu na vyaapai,
      Jojan yaako man manh jaapai ॥15 ॥
      Andhakaar jag ka jo harta,
      Nav prakaash se aanand bhaarat ॥

      Grah gan grasi na laabhavat jaahee,
      Koti baar main pranavaun taahi ॥
      Mand sadrsh sut jag mein jaake,
      Dharmaraaj sam adbhut baanke ॥16 ॥

      Dhany-dhany tum dinamani deva,
      Karat karat suramuni nar seva ॥
      Bhakti bhaavayut poorn niyam son,
      Door hattaso bhavake bhram son ॥17 ॥

      Param dhany son nar tanadhaaree,
      Hain priy jehi par tam haaree ॥
      Arun maagh mahan soory phaalgun,
      Madhu vedaang naam ravi udayan ॥18 ॥

      Bhaanu uday baisaakhee,
      Jyeshth indravai aashaadh ravi ga ॥
      Yam bhaado aashvin himareta,
      Kaatik hot divaakar neta ॥19 ॥

      Aghan bhinn vishnu hain pooshahin,
      Purush naam ravihain malamaashin ॥20 ॥

      ॥Doha ॥
      Bhaanu chaaleesa prem yut, gaavahin je nar nity,
      Sukh upaay lahi bibidh, honahin sada krtakrty ॥


      सूर्य चालीसा के लाभ

      सूर्य चालीसा एक धार्मिक स्तोत्र है जो भगवान सूर्य देवता की पूजा में पढ़ा जाता है। यह 40 श्लोकों (चालीसा) का संग्रह है, जो सूर्य देव की स्तुति और उनके गुणों का वर्णन करता है। सूर्य चालीसा के लाभ कई प्रकार के होते हैं, जो व्यक्तिगत, मानसिक और आध्यात्मिक स्तर पर प्रकट होते हैं। यहाँ सूर्य चालीसा के लाभों का विस्तार से वर्णन किया गया है:

      1. स्वास्थ्य में सुधार

      सूर्य चालीसा का नियमित पाठ शारीरिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में सहायक होता है। सूर्य देव को जीवन के स्रोत के रूप में माना जाता है, और उनकी पूजा से शरीर को ऊर्जा और जीवनशक्ति मिलती है। यह विशेष रूप से हड्डियों, त्वचा और आंखों के लिए लाभकारी होता है। नियमित रूप से सूर्य चालीसा का पाठ करने से शरीर की रोग प्रतिकारक क्षमता में वृद्धि होती है और शारीरिक समस्याएं दूर हो सकती हैं।

      2. मानसिक शांति और स्थिरता

      सूर्य चालीसा का पाठ मानसिक शांति और स्थिरता प्रदान करता है। यह तनाव, चिंता और अवसाद को कम करने में सहायक होता है। सूर्य देवता के प्रति आस्था और श्रद्धा से मन को शांति मिलती है, जिससे मानसिक स्थिति में सुधार होता है। मानसिक स्पष्टता और एकाग्रता में भी वृद्धि होती है।

      3. आर्थिक समृद्धि

      सूर्य चालीसा का पाठ आर्थिक समृद्धि और समृद्धि की प्राप्ति में सहायक होता है। सूर्य देवता को धन, ऐश्वर्य और समृद्धि का देवता माना जाता है। उनकी पूजा करने से आर्थिक समस्याएं दूर हो सकती हैं और व्यवसाय या नौकरी में उन्नति हो सकती है। यह विशेष रूप से उन लोगों के लिए लाभकारी होता है जो आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं।

      4. पारिवारिक सुख और समृद्धि

      सूर्य चालीसा का पाठ पारिवारिक सुख और समृद्धि को बढ़ावा देता है। यह परिवार में सामंजस्य और सुख-शांति बनाए रखने में सहायक होता है। सूर्य देवता के आशीर्वाद से परिवार के सभी सदस्य खुशहाल और स्वस्थ रहते हैं। परिवारिक रिश्तों में सुधार होता है और एकता बढ़ती है।

      5. उच्च आत्म-संस्कार और आदर्श जीवन

      सूर्य चालीसा के नियमित पाठ से व्यक्ति के आत्म-संस्कार में वृद्धि होती है। यह व्यक्ति को आदर्श जीवन जीने के लिए प्रेरित करता है और उसकी नैतिकता और सद्गुणों को प्रोत्साहित करता है। सूर्य देवता के गुणों को अपनाने से व्यक्ति में सच्चाई, ईमानदारी और दया जैसे गुण विकसित होते हैं।

      6. शक्ति और आत्म-विश्वास

      सूर्य चालीसा का पाठ व्यक्ति को मानसिक और शारीरिक शक्ति प्रदान करता है। यह आत्म-विश्वास को बढ़ाता है और व्यक्ति को चुनौतियों का सामना करने के लिए तैयार करता है। सूर्य देवता के आशीर्वाद से व्यक्ति में साहस और आत्म-विश्वास का संचार होता है, जिससे वह जीवन में सफलता प्राप्त कर सकता है।

      7. शिक्षा और ज्ञान में वृद्धि

      सूर्य चालीसा के पाठ से शिक्षा और ज्ञान में वृद्धि होती है। सूर्य देवता को ज्ञान और विद्या का स्रोत माना जाता है, और उनकी पूजा से व्यक्ति की बौद्धिक क्षमता में सुधार होता है। यह छात्रों और शिक्षा प्राप्त कर रहे व्यक्तियों के लिए विशेष रूप से लाभकारी होता है, क्योंकि यह उनके अध्ययन और समझ में सुधार करता है।

      8. रोगों से मुक्ति

      सूर्य चालीसा का नियमित पाठ कुछ विशेष बीमारियों और स्वास्थ्य समस्याओं से मुक्ति दिला सकता है। विशेष रूप से उन लोगों के लिए जो पित्त दोष, मानसिक अशांति या हड्डियों की समस्याओं से ग्रस्त हैं, सूर्य चालीसा का पाठ उपचारात्मक हो सकता है। सूर्य देवता की पूजा से स्वास्थ्य में सुधार होता है और बीमारियों से छुटकारा मिल सकता है।

      9. आध्यात्मिक उन्नति

      सूर्य चालीसा का पाठ आध्यात्मिक उन्नति में सहायक होता है। यह व्यक्ति को आत्मा की वास्तविकता और ब्रह्मा के साथ एकात्मता का अनुभव कराता है। सूर्य देवता की पूजा से व्यक्ति की आध्यात्मिक यात्रा में प्रगति होती है और उसे आत्मज्ञान की प्राप्ति होती है। यह आध्यात्मिक शांति और मुक्ति की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम होता है।

      10. नकारात्मक ऊर्जा से रक्षा

      सूर्य चालीसा का पाठ नकारात्मक ऊर्जा से रक्षा करता है। यह वातावरण को सकारात्मक ऊर्जा से भर देता है और व्यक्ति को बुरी नजर और नकारात्मक प्रभावों से बचाता है। सूर्य देवता के आशीर्वाद से नकारात्मक शक्तियाँ दूर होती हैं और व्यक्ति सुरक्षित और संरक्षित रहता है।

      11. आध्यात्मिक अवबोधन

      सूर्य चालीसा का पाठ व्यक्ति को धर्म और आध्यात्मिकता की ओर अग्रसर करता है। यह व्यक्ति को अपने जीवन के उद्देश्य को समझने और सही मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। सूर्य देवता की पूजा से व्यक्ति अपने जीवन के मार्ग को स्पष्टता से देख सकता है और आध्यात्मिक अवबोधन प्राप्त कर सकता है।

      12. सकारात्मक विचार और प्रेरणा

      सूर्य चालीसा का पाठ सकारात्मक विचार और प्रेरणा प्रदान करता है। यह व्यक्ति को अपनी समस्याओं और चुनौतियों को सकारात्मक दृष्टिकोण से देखने के लिए प्रेरित करता है। सूर्य देवता के आशीर्वाद से व्यक्ति को आत्ममूल्य और प्रेरणा मिलती है, जिससे वह अपने लक्ष्यों को प्राप्त कर सकता है।

      13. संबंधों में सुधार

      सूर्य चालीसा का पाठ व्यक्तिगत और पेशेवर संबंधों में सुधार लाने में सहायक होता है। यह संबंधों में सामंजस्य और समझ को बढ़ावा देता है। सूर्य देवता के आशीर्वाद से रिश्तों में मधुरता और सहयोग बढ़ता है, जिससे व्यक्ति के सामाजिक जीवन में सुधार होता है।

      14. धर्म और पूजा में सफलता

      सूर्य चालीसा का पाठ धार्मिक कृत्यों और पूजा में सफलता की प्राप्ति में सहायक होता है। यह व्यक्ति की धार्मिक भावनाओं को मजबूत करता है और उसकी पूजा की शक्ति को बढ़ाता है। सूर्य देवता की कृपा से पूजा विधियों में सफलता मिलती है और धार्मिक कृत्य संपन्न होते हैं।

      15. जीवन में सच्चे उद्देश्य की प्राप्ति

      सूर्य चालीसा का पाठ जीवन में सच्चे उद्देश्य की प्राप्ति में सहायक होता है। यह व्यक्ति को अपने जीवन के वास्तविक उद्देश्य को समझने और उसे पूरा करने की दिशा में मार्गदर्शन करता है। सूर्य देवता की पूजा से व्यक्ति को अपने जीवन के लक्ष्यों को प्राप्त करने में सहायता मिलती है।

      16. संतुलित और समृद्ध जीवन

      सूर्य चालीसा का पाठ संतुलित और समृद्ध जीवन जीने में सहायक होता है। यह व्यक्ति को जीवन में हर क्षेत्र में संतुलन बनाए रखने की प्रेरणा देता है और समृद्धि की ओर अग्रसर करता है। सूर्य देवता की कृपा से व्यक्ति का जीवन सुखमय और समृद्ध होता है।

      17. उत्साह और ऊर्जा में वृद्धि

      सूर्य चालीसा का पाठ व्यक्ति में उत्साह और ऊर्जा का संचार करता है। यह दिनभर की गतिविधियों के लिए मानसिक और शारीरिक ऊर्जा प्रदान करता है। सूर्य देवता की पूजा से व्यक्ति सक्रिय और ऊर्जावान रहता है, जिससे उसकी उत्पादकता में वृद्धि होती है।

      18. आत्मा की शांति

      सूर्य चालीसा का पाठ आत्मा की शांति और स्थिरता में सहायक होता है। यह व्यक्ति को अपने भीतर की शांति को अनुभव करने में मदद करता है और उसकी आध्यात्मिक यात्रा को सशक्त बनाता है। सूर्य देवता की पूजा से आत्मा को शांति और संतोष की प्राप्ति होती है।

      19. दुखों से मुक्ति

      सूर्य चालीसा का नियमित पाठ जीवन में आने वाली समस्याओं और दुखों से मुक्ति प्रदान करता है। सूर्य देवता की कृपा से व्यक्ति के जीवन से दुख और कष्ट दूर होते हैं और सुख-शांति का अनुभव होता है।

      20. सकारात्मक प्रभाव का संचार

      सूर्य चालीसा का पाठ सकारात्मक प्रभाव का संचार करता है। यह व्यक्ति की सोच और कार्यशैली को सकारात्मक बनाता है और उसकी जीवनशक्ति को प्रबल करता है। सूर्य देवता की पूजा से व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

      सूर्य चालीसा के इन लाभों का अनुभव करने के लिए, इसे नियमित रूप से और पूरी श्रद्धा के साथ पाठ करना महत्वपूर्ण है। इससे न केवल व्यक्तिगत जीवन में सुधार होता है, बल्कि आत्मा और जीवन के गहरे अर्थों को समझने में भी सहायता मिलती है।

      कैला देवी चालीसा (Kaila Devi Chalisa PDF)

      कैला देवी चालीसा (Kaila Devi Chalisa pdf) का अपना एक विशिष्ट महत्व है। कैला देवी को शक्ति और करूणा की देवी माना जाता है। उनके भक्त उन्हें माँ के रूप में पूजते हैं और उनकी असीम कृपा और संरक्षण की कामना करते हैं। कैला देवी की चालीसा का पाठ करने से भक्तों को जीवन में शांति, समृद्धि और सुख की प्राप्ति होती है।

      कैला देवी चालीसा में माता की महिमा, उनकी लीलाओं, और भक्तों के प्रति उनकी कृपा का वर्णन किया गया है। इस चालीसा के पाठ से भक्तों को मानसिक शांति, आध्यात्मिक शक्ति और आत्मिक संतोष की प्राप्ति होती है। जो लोग जीवन में कष्टों और समस्याओं से जूझ रहे हैं, उनके लिए कैला देवी की चालीसा का पाठ अत्यंत लाभकारी सिद्ध हो सकता है।

      चालीसा के माध्यम से हम माता कैला देवी की महिमा का गुणगान करते हुए, उनके प्रति अपनी भक्ति और श्रद्धा प्रकट करते हैं। यह चालीसा न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि मानसिक और आत्मिक संतुलन के लिए भी अत्यंत उपयोगी है।

      कैला देवी की आराधना से सभी प्रकार की बाधाएं और कष्ट दूर होते हैं। यह चालीसा भक्तों के जीवन में सुख, शांति, और समृद्धि का संचार करती है। माता कैला देवी के आशीर्वाद से भक्तों को हर प्रकार के संकट से मुक्ति मिलती है और वे अपनी इच्छाओं की पूर्ति करते हैं।

      बोलो: जय माँ कैला देवी!


      • हिंदी / संस्कृत
      • English

      || कैला देवी चालीसा ||

      ॥ दोहा ॥
      जय जय कैला मात हे
      तुम्हे नमाउ माथ ॥
      शरण पडूं में चरण में
      जोडूं दोनों हाथ ॥

      आप जानी जान हो
      मैं माता अंजान ॥
      क्षमा भूल मेरी करो
      करूँ तेरा गुणगान ॥

      ॥ चौपाई ॥
      जय जय जय कैला महारानी ।
      नमो नमो जगदम्ब भवानी ॥

      सब जग की हो भाग्य विधाता ।
      आदि शक्ति तू सबकी माता ॥

      दोनों बहिना सबसे न्यारी ।
      महिमा अपरम्पार तुम्हारी ॥

      शोभा सदन सकल गुणखानी ।
      वैद पुराणन माँही बखानी ॥4॥

      जय हो मात करौली वाली ।
      शत प्रणाम कालीसिल वाली ॥

      ज्वालाजी में ज्योति तुम्हारी ।
      हिंगलाज में तू महतारी ॥

      तू ही नई सैमरी वाली ।
      तू चामुंडा तू कंकाली ॥

      नगर कोट में तू ही विराजे ।
      विंध्यांचल में तू ही राजै ॥8॥

      धौलागढ़ बेलौन तू माता ।
      वैष्णवदेवी जग विख्याता ॥

      नव दुर्गा तू मात भवानी ।
      चामुंडा मंशा कल्याणी ॥

      जय जय सूये चोले वाली ।
      जय काली कलकत्ते वाली ॥

      तू ही लक्ष्मी तू ही ब्रम्हाणी ।
      पार्वती तू ही इन्द्राणी ॥12॥

      सरस्वती तू विद्या दाता ।
      तू ही है संतोषी माता ॥

      अन्नपुर्णा तू जग पालक ।
      मात पिता तू ही हम बालक ॥

      तू राधा तू सावित्री ।
      तारा मतंग्डिंग गायत्री ॥

      तू ही आदि सुंदरी अम्बा ।
      मात चर्चिका हे जगदम्बा ॥16॥

      एक हाथ में खप्पर राजै ।
      दूजे हाथ त्रिशूल विराजै ॥

      कालीसिल पै दानव मारे ।
      राजा नल के कारज सारे ॥

      शुम्भ निशुम्भ नसावनि हारी ।
      महिषासुर को मारनवारी ॥

      रक्तबीज रण बीच पछारो ।
      शंखासुर तैने संहारो ॥20॥

      ऊँचे नीचे पर्वत वारी ।
      करती माता सिंह सवारी ॥

      ध्वजा तेरी ऊपर फहरावे ।
      तीन लोक में यश फैलावे ॥

      अष्ट प्रहर माँ नौबत बाजै ।
      चाँदी के चौतरा विराजै ॥

      लांगुर घटूअन चलै भवन में ।
      मात राज तेरौ त्रिभुवन में ॥24॥

      घनन घनन घन घंटा बाजत ।
      ब्रह्मा विष्णु देव सब ध्यावत ॥

      अगनित दीप जले मंदिर में ।
      ज्योति जले तेरी घर-घर में ॥

      चौसठ जोगिन आंगन नाचत ।
      बामन भैरों अस्तुति गावत ॥

      देव दनुज गन्धर्व व किन्नर ।
      भूत पिशाच नाग नारी नर ॥28॥

      सब मिल माता तोय मनावे ।
      रात दिन तेरे गुण गावे ॥

      जो तेरा बोले जयकारा ।
      होय मात उसका निस्तारा ॥

      मना मनौती आकर घर सै ।
      जात लगा जो तोंकू परसै ॥

      ध्वजा नारियल भेंट चढ़ावे ।
      गुंगर लौंग सो ज्योति जलावै ॥32॥

      हलुआ पूरी भोग लगावै ।
      रोली मेहंदी फूल चढ़ावे ॥

      जो लांगुरिया गोद खिलावै ।
      धन बल विद्या बुद्धि पावै ॥

      जो माँ को जागरण करावै ।
      चाँदी को सिर छत्र धरावै ॥

      जीवन भर सारे सुख पावै ।
      यश गौरव दुनिया में छावै ॥36॥

      जो भभूत मस्तक पै लगावे ।
      भूत-प्रेत न वाय सतावै ॥

      जो कैला चालीसा पढ़ता।
      नित्य नियम से इसे सुमरता ॥

      मन वांछित वह फल को पाता ।
      दुःख दारिद्र नष्ट हो जाता ॥

      गोविन्द शिशु है शरण तुम्हारी ।
      रक्षा कर कैला महतारी ॥40॥

      ॥ दोहा ॥
      संवत तत्व गुण नभ भुज सुन्दर रविवार ।
      पौष सुदी दौज शुभ पूर्ण भयो यह कार ॥
      ॥ इति  कैला देवी चालीसा समाप्त ॥

      || KAILA DEVI CHALISA pdf ||

      ॥ Doha ॥
      jay jay kaila maata he
      hari namau maath ॥
      sharan mein charan mein
      jodoon donon haath ॥

      aap jaaniye
      main maata anjaan ॥
      kshama karen meree karo
      karoon tera gunagaan ॥

      ॥ chaupaee ॥
      jay jay jay kaala mahaaraanee ॥
      namo namo jagadamb bhavaanee ॥

      sab jag kee ho bhaagy vidhaata ॥
      aadi shakti tu maata maata ॥

      donon bahina sabase nyaaree ॥
      mahima aparampaar vivaah ॥

      sobha sakal sakal gunakhaanee ॥
      vaid puraanan manhi bakhaanee ॥4 ॥

      jay ho maata karauleevaalee ॥
      shat poojan kaaleesil vaalee ॥

      bootajee mein jyoti vivaah ॥
      hingalaaj mein too mahataaree ॥

      too hee naee saamaree vaalee ॥
      too chaamunda kankaalee ॥

      nagar kot mein too hee viraaje ॥
      vindhyaachal mein too hee raajai ॥8 ॥

      dhaulaagadh belaun too maata ॥
      vaishnavadevee jag mrgama ॥

      nav durga too maata bhavaanee ॥
      chaamunda kalyaan vidhi ॥

      jay jay suye chhole vaalee ॥
      jay kaalee kalakatte vaalee ॥

      too hee lakshmee too hee bramhaanee ॥
      paarvatee too hee indraanee ॥12 ॥

      sarasvatee tu vidya daata ॥
      too hee hai santoshee maata ॥

      annapoorna too jag paalak ॥
      maata pita hee ham baalak hain ॥

      too raadha too priya ॥
      taara maatangading gaayatree ॥

      too hee aadi sundaree amba ॥
      maata charchika he jagadamba ॥16 ॥

      ek haath mein khappar raajai ॥
      dooje haath trishool viraajai ॥

      kaaleesil pai daanav maare ॥
      raaja nal ke karj saare ॥

      shumbh nishumbh naasaavani haaree ॥
      mahishaasur ko maaravaadee ॥

      raktabeej ran beech paharo ॥
      shankhaasur taine sanhaaro ॥20 ॥

      oonche neeche parvat vaaree ॥
      maata sinh raanee ॥

      dhvaja oopar phaharaave ॥
      teen lok mein yash shobhaayamaan ॥

      asht prahar maan naubat baajai ॥
      chaandee ke chautara viraajai ॥

      langoor ghaatoon chalai bhavan mein ॥
      maata raaj terau tribhuvan mein ॥24 ॥

      ghanan ghanan ghan ghanta bajat ॥
      brahma vishnu dev sab dhyaavat ॥

      agnit deep jale mandir mein ॥
      jyoti jale teree ghar-ghar mein ॥

      chausath jogin bele naachat ॥
      baaman bhairon astuti gaavat ॥

      dev danuj gandharv va kinnar ॥
      bhoot pishaach naag naaree nar ॥28 ॥

      sab mil maata toy manaave ॥
      raat din tera gun gaave ॥

      jo tera bole jayakaara ॥
      hoy maata usaka nistaara ॥

      man manautee gyaan ghar sai ॥
      jaat laga jo tonkoo parasaee ॥

      dhvaja koskonet ankitave ॥
      gungar laung so jyoti jalaavai ॥32 ॥

      halua poorn bhog lagaavai ॥
      rolee laang phool chadhaave ॥

      jo laanguriya god khilaavai ॥
      dhan bal vidya buddhi paavai ॥

      jo maan ko jagaav karaavai ॥
      chaandee ko sir chhatr dharaavai ॥

      jeevan bhar saara sukh paavai ॥
      yash gaurav sansaar mein chhaavai ॥36 ॥

      jo bahut mastak pai lagaave ॥
      bhoot-pret na vai sataavai ॥

      jo kaila chaaleesa restaraan ॥
      nity niyam se ise sumarata ॥

      man puraalekh vah phal ko paata hai ॥
      duhkh daaridr nasht ho jaata hai ॥

      shishu mandir hai govind sharanasthaan ॥
      raksha kar kaila mahataaree ॥40 ॥

      ॥ Doha ॥
      sanvat tatv gun nabh bhuj sundar ravivaar ॥
      paush sudee dauj shubh poorn bhayo yah kaar ॥

      ॥ iti kaila devee chalisa samaapt ॥




      कैला देवी चालीसा के लाभ

      कैला देवी चालीसा (Kaila Devi Chalisa pdf), देवी कैला की आराधना के लिए एक महत्वपूर्ण धार्मिक ग्रंथ है। इसे नियमित रूप से पढ़ने और सुनने से अनेक आध्यात्मिक और भौतिक लाभ होते हैं। यहाँ पर हम इस चालीसा के लाभों पर विस्तार से चर्चा करेंगे।

      1. आध्यात्मिक उन्नति

      कैला देवी चालीसा (Kaila Devi Chalisa pdf) का नियमित पाठ करने से व्यक्ति की आध्यात्मिक उन्नति होती है। देवी कैला की आराधना से भक्त की आत्मा को शांति और संतुलन मिलता है। यह चालीसा भक्त को ईश्वर के प्रति विश्वास और श्रद्धा बढ़ाने में मदद करती है, जिससे उसकी आध्यात्मिक यात्रा सशक्त होती है।

      2. संकट निवारण

      इस चालीसा का पाठ करने से जीवन में आ रहे विभिन्न प्रकार के संकटों से मुक्ति मिल सकती है। देवी कैला के आशीर्वाद से व्यक्ति की समस्याएँ दूर होती हैं और जीवन में सुख-समृद्धि का आगमन होता है। कठिन समय में इस चालीसा का पाठ संकटों को कम करने में सहायक होता है।

      3. स्वास्थ्य लाभ

      कैला देवी चालीसा (Kaila Devi Chalisa pdf) का पाठ मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य के लिए भी लाभकारी होता है। मानसिक शांति और तनाव कम करने में यह चालीसा महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। नियमित पाठ से तनाव और चिंता की समस्याएँ दूर होती हैं, जिससे व्यक्ति के स्वास्थ्य में सुधार होता है।

      4. सुख-समृद्धि का आगमन

      चालीसा का नियमित पाठ करने से घर और परिवार में सुख-समृद्धि का आगमन होता है। देवी कैला की कृपा से आर्थिक समृद्धि में वृद्धि होती है और जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आते हैं। यह चालीसा विशेष रूप से आर्थिक समस्याओं का समाधान करने में मददगार होती है।

      5. नकारात्मक ऊर्जा का नाश

      इस चालीसा का पाठ करने से घर और परिवार में नकारात्मक ऊर्जा का नाश होता है। यह चालीसा घर की शांति और खुशहाली को बनाए रखने में मदद करती है। नकारात्मक ऊर्जा और बुरी आत्माओं से सुरक्षा के लिए यह चालीसा एक शक्तिशाली औजार के रूप में काम करती है।

      6. मनोकामनाएँ पूर्ण होना

      कैला देवी चालीसा (Kaila Devi Chalisa pdf) का पाठ करने से भक्त की मनोकामनाएँ पूरी होती हैं। देवी कैला के आशीर्वाद से इच्छाएँ पूरी होती हैं और जीवन में खुशहाली आती है। यह चालीसा विशेष रूप से उन लोगों के लिए लाभकारी होती है जो अपनी इच्छाओं को पूरा करने के लिए संघर्ष कर रहे होते हैं।

      7. पारिवारिक संबंधों में सुधार

      इस चालीसा का पाठ करने से परिवार के सदस्यों के बीच के संबंध मजबूत होते हैं। देवी कैला की कृपा से पारिवारिक विवाद समाप्त होते हैं और रिश्तों में प्रेम और समझदारी बढ़ती है। यह चालीसा परिवार की एकता और सामंजस्य बनाए रखने में सहायक होती है।

      8. शांति और सुरक्षा

      कैला देवी चालीसा (Kaila Devi Chalisa pdf) का नियमित पाठ व्यक्ति को मानसिक शांति और सुरक्षा प्रदान करता है। यह चालीसा व्यक्ति को जीवन की कठिनाइयों और चुनौतियों का सामना करने में साहस और बल देती है। शांति और सुरक्षा की भावना को बनाए रखने में यह चालीसा महत्वपूर्ण होती है।

      9. आध्यात्मिक ज्ञान की प्राप्ति

      चालीसा का पाठ करने से व्यक्ति को आध्यात्मिक ज्ञान की प्राप्ति होती है। देवी कैला के आशीर्वाद से व्यक्ति को जीवन के गहरे अर्थ और उद्देश्य की समझ मिलती है। यह चालीसा जीवन के आध्यात्मिक पहलुओं को समझने में मदद करती है।

      10. सकारात्मक मानसिकता का विकास

      कैला देवी चालीसा के पाठ से व्यक्ति की मानसिकता में सकारात्मक परिवर्तन आता है। यह चालीसा व्यक्ति को प्रेरित करती है और उसके आत्म-विश्वास को बढ़ाती है। सकारात्मक सोच और मानसिकता के विकास में यह चालीसा सहायक होती है।

      11. कर्मों की शुद्धि

      इस चालीसा का पाठ व्यक्ति के कर्मों को शुद्ध करने में मदद करता है। देवी कैला के आशीर्वाद से व्यक्ति अपने पापों को धो सकता है और अपने कर्मों को सुधार सकता है। यह चालीसा व्यक्ति की आत्मा की शुद्धि के लिए एक महत्वपूर्ण साधन होती है।

      12. भक्ति और समर्पण का विकास

      कैला देवी चालीसा (Kaila Devi Chalisa pdf) का नियमित पाठ भक्त में भक्ति और समर्पण की भावना को जागृत करता है। यह चालीसा भक्त को ईश्वर के प्रति अपनी भक्ति को प्रकट करने का अवसर देती है और उसकी धार्मिक भावना को मजबूत करती है।

      13. आध्यात्मिक शक्ति का संवर्धन

      चालीसा का पाठ करने से व्यक्ति की आध्यात्मिक शक्ति का संवर्धन होता है। देवी कैला के आशीर्वाद से व्यक्ति के अंदर एक नई ऊर्जा और शक्ति का संचार होता है। यह चालीसा व्यक्ति की आध्यात्मिक क्षमताओं को उजागर करने में मदद करती है।

      14. सकारात्मक वातावरण का निर्माण

      कैला देवी चालीसा का पाठ घर और आसपास के वातावरण को सकारात्मक बनाता है। यह चालीसा घर में सुख-शांति और खुशहाली का माहौल बनाती है। सकारात्मक ऊर्जा का संचार करने में यह चालीसा महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

      15. सच्चे सुख की प्राप्ति

      इस चालीसा का पाठ व्यक्ति को सच्चे सुख की प्राप्ति में मदद करता है। देवी कैला की कृपा से व्यक्ति को बाहरी भौतिक सुखों के बजाय सच्चे आंतरिक सुख की प्राप्ति होती है। यह चालीसा जीवन में संतोष और शांति लाने में सहायक होती है।

      कैला देवी चालीसा एक अत्यंत प्रभावशाली और शक्तिशाली धार्मिक ग्रंथ है, जिसका पाठ करने से जीवन में अनेक लाभ प्राप्त होते हैं। यह चालीसा न केवल आध्यात्मिक उन्नति के लिए बल्कि जीवन के विभिन्न पहलुओं में सुधार के लिए भी महत्वपूर्ण होती है। नियमित पाठ और पूजा से व्यक्ति को देवी कैला के आशीर्वाद का प्राप्ति होती है और उसकी जीवन यात्रा को एक नई दिशा मिलती है।

      बगलामुखी चालीसा (Baglamukhi Chalisa PDF)

      माँ बगलामुखी (Baglamukhi Chalisa Pdf), जिन्हें पिताम्बरा देवी के नाम से भी जाना जाता है, दस महाविद्याओं में से एक हैं। ये देवी अपने भक्तों के शत्रुओं का नाश करने और उन्हें हर संकट से उबारने वाली मानी जाती हैं। माँ बगलामुखी की चालीसा में उनकी महिमा, शक्तियों और लीलाओं का वर्णन किया गया है, जो भक्तों के मन में असीम शक्ति और साहस का संचार करता है।

      माँ बगलामुखी की चालीसा का पाठ करने से जीवन में आने वाली सभी विघ्न-बाधाओं का नाश होता है और भक्तों को विजय, सुख-समृद्धि, और शांति की प्राप्ति होती है। आइए, हम सब मिलकर श्रद्धा और भक्ति से माँ बगलामुखी की चालीसा का पाठ करें और उनकी कृपा प्राप्त करें।


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      • English

      || बगलामुखी चालीसा ||

      ॥ दोहा ॥
      सिर नवाइ बगलामुखी,
      लिखूं चालीसा आज ॥

      कृपा करहु मोपर सदा,
      पूरन हो मम काज ॥

      ॥ चौपाई ॥
      जय जय जय श्री बगला माता ।
      आदिशक्ति सब जग की त्राता ॥

      बगला सम तब आनन माता ।
      एहि ते भयउ नाम विख्याता ॥

      शशि ललाट कुण्डल छवि न्यारी ।
      असतुति करहिं देव नर-नारी ॥

      पीतवसन तन पर तव राजै ।
      हाथहिं मुद्गर गदा विराजै ॥ 4 ॥

      तीन नयन गल चम्पक माला ।
      अमित तेज प्रकटत है भाला ॥

      रत्न-जटित सिंहासन सोहै ।
      शोभा निरखि सकल जन मोहै ॥

      आसन पीतवर्ण महारानी ।
      भक्तन की तुम हो वरदानी ॥

      पीताभूषण पीतहिं चन्दन ।
      सुर नर नाग करत सब वन्दन ॥ 8 ॥

      एहि विधि ध्यान हृदय में राखै ।
      वेद पुराण संत अस भाखै ॥

      अब पूजा विधि करौं प्रकाशा ।
      जाके किये होत दुख-नाशा ॥

      प्रथमहिं पीत ध्वजा फहरावै ।
      पीतवसन देवी पहिरावै ॥

      कुंकुम अक्षत मोदक बेसन ।
      अबिर गुलाल सुपारी चन्दन ॥ 12 ॥

      माल्य हरिद्रा अरु फल पाना ।
      सबहिं चढ़इ धरै उर ध्याना ॥

      धूप दीप कर्पूर की बाती ।
      प्रेम-सहित तब करै आरती ॥

      अस्तुति करै हाथ दोउ जोरे ।
      पुरवहु मातु मनोरथ मोरे ॥

      मातु भगति तब सब सुख खानी ।
      करहुं कृपा मोपर जनजानी ॥ 16 ॥

      त्रिविध ताप सब दुख नशावहु ।
      तिमिर मिटाकर ज्ञान बढ़ावहु ॥

      बार-बार मैं बिनवहुं तोहीं ।
      अविरल भगति ज्ञान दो मोहीं ॥

      पूजनांत में हवन करावै ।
      सा नर मनवांछित फल पावै ॥

      सर्षप होम करै जो कोई ।
      ताके वश सचराचर होई ॥ 20 ॥

      तिल तण्डुल संग क्षीर मिरावै ।
      भक्ति प्रेम से हवन करावै ॥

      दुख दरिद्र व्यापै नहिं सोई ।
      निश्चय सुख-सम्पत्ति सब होई ॥

      फूल अशोक हवन जो करई ।
      ताके गृह सुख-सम्पत्ति भरई ॥

      फल सेमर का होम करीजै ।
      निश्चय वाको रिपु सब छीजै ॥ 24 ॥

      गुग्गुल घृत होमै जो कोई ।
      तेहि के वश में राजा होई ॥

      गुग्गुल तिल संग होम करावै ।
      ताको सकल बंध कट जावै ॥

      बीलाक्षर का पाठ जो करहीं ।
      बीज मंत्र तुम्हरो उच्चरहीं ॥

      एक मास निशि जो कर जापा ।
      तेहि कर मिटत सकल संतापा ॥ 28 ॥

      घर की शुद्ध भूमि जहं होई ।
      साध्का जाप करै तहं सोई ॥

      सेइ इच्छित फल निश्चय पावै ।
      यामै नहिं कदु संशय लावै ॥

      अथवा तीर नदी के जाई ।
      साधक जाप करै मन लाई ॥

      दस सहस्र जप करै जो कोई ।
      सक काज तेहि कर सिधि होई ॥ 32 ॥

      जाप करै जो लक्षहिं बारा ।
      ताकर होय सुयशविस्तारा ॥

      जो तव नाम जपै मन लाई ।
      अल्पकाल महं रिपुहिं नसाई ॥

      सप्तरात्रि जो पापहिं नामा ।
      वाको पूरन हो सब कामा ॥

      नव दिन जाप करे जो कोई ।
      व्याधि रहित ताकर तन होई ॥ 36 ॥

      ध्यान करै जो बन्ध्या नारी ।
      पावै पुत्रादिक फल चारी ॥

      प्रातः सायं अरु मध्याना ।
      धरे ध्यान होवैकल्याना ॥

      कहं लगि महिमा कहौं तिहारी ।
      नाम सदा शुभ मंगलकारी ॥

      पाठ करै जो नित्या चालीसा ।
      तेहि पर कृपा करहिं गौरीशा ॥ 40 ॥

      ॥ दोहा ॥
      सन्तशरण को तनय हूं,
      कुलपति मिश्र सुनाम ।
      हरिद्वार मण्डल बसूं ,
      धाम हरिपुर ग्राम ॥

      उन्नीस सौ पिचानबे सन् की,
      श्रावण शुक्ला मास ।
      चालीसा रचना कियौ,
      तव चरणन को दास ॥

      || Baglamukhi Chalisa PDF ||

      ॥ Doha ॥
      Sir naee bagalaamukhee,
      Likhoon chaaleesa aaj ॥

      Kripa karahu mopar sada,
      Poorn ho mam kaaj ॥

      ॥ Chaupaee ॥
      Jay jay jay shree bagala maata ॥
      Aadishakti sab jag kee traata ॥

      Bagala sam tab saar maata ॥
      Ehi te bhayu naam maatra ॥

      Shashi lalaat kundal chhavi nyaaree ॥
      Asatuti karahin dev nar-naaree ॥

      Peetavasan tan par tav raajai ॥
      Haathahin mudgar gada viraajai ॥ 4 ॥

      Teen nayan gal champak mangal ॥
      Amit tej prakatat hai bhala ॥

      Ratn-jatit sinhaasan sohai ॥
      Shobha nirakhi sakal jan mohaee ॥

      Aasan peetavarn mahaaraanee ॥
      Bhakton kee tum ho shobhaayamaan ॥

      Peetaabhooshan peetahin chandan ॥
      Sur nar naag karat sab vandan ॥ 8 ॥

      Ehi vidhi dhyaan hrday mein raakhai ॥
      Ved puraan sant as bhaakhai ॥

      Ab pooja vidhi karaun prakaasha ॥
      Jaake keen hot duhkh-naasha ॥

      Prathamahin peet dhvaja phaharaavai ॥
      Peetavasan devee phiraavai ॥

      Kunkum akshat modak baisan ॥
      Abeer gulaal supaaree chandan ॥ 12 ॥

      Maalya haridra aru phal paana ॥
      Sabahin chadhai dharai ur dhyaana ॥

      Dhoop deep karpoor kee baatee ॥
      Prem-sahit tab karai aaratee ॥

      Astuti karai haath dooo jore ॥
      Poorvahu maatu manorath more ॥

      Maatu bhagati tab sab sukh khaani ॥
      Karahun krpa mopar janajaani ॥ 16 ॥

      Trividh taap sab duhkh nashaavahu ॥
      Timir vaadeekar gyaan pushtavahu ॥

      Baar-baar main binavahun toheen ॥
      Aviral bhagati gyaan do mohin ॥

      Pooja-archana mein ghar karaavai ॥
      Sa nar manavaanchhit phal paavai ॥

      Sasp hom karai jo koee ॥
      Taake vash sacharaachar hoee ॥ 20 ॥

      Til tandul sang ksheer miraavai ॥
      Bhakti prem se ghar karaavai ॥

      Duhkh daridr vyaapai nahin soi ॥
      Nishchit sukh-sampatti sab hoee ॥

      Phool ashok ghar jo karai ॥
      Taake grh sukh-sampatti bhaaree ॥

      Phal semar ka ghar karaijai ॥
      Nishchay vaako ripu sab chheenai ॥ 24 ॥

      Guggul ghrt homaay jo koee ॥
      Tehi ke vash mein raaja hoi ॥

      Guggul til sang hom karaavai ॥
      Taako sakal bandh kat jaavai ॥

      Beelaakshar ka paath jo karahen ॥
      Beej mantr tummharo uraheen ॥

      Ek maas nishi jo kar jaapa ॥
      Tehi kar mitat sakal santaapa ॥ 28 ॥

      Ghar kee shuddh bhoomi jahaan hoi ॥
      Sadaka jap karai tahan soi ॥

      Sei ichchhit phal nishchay paavai ॥
      Yaamai nahin kadu sanshay laavai ॥

      Ya teer nadee ke jay ॥
      Saadhak jap karai man laee ॥

      Das sahasr jap karai jo koee ॥
      Sak kaaj tehi kar siddhi hoee ॥ 32 ॥

      Jap karai jo lakshahin baara ॥
      Taakar hoy suyashavistaara ॥

      Jo tav naam japai man lai ॥
      Alpakaal mahan ripuhin nasaee ॥

      Saptaraatri jo paapahin naama ॥
      Vaako poorn ho sab kaam ॥

      Nav din jap kare jo koee ॥
      Vyaadhianupayogee taakar tan hoee ॥

      Dhyaan karai jo bandhya naaree ॥
      Paavai putraadik phal chaari ॥

      Praatah saayan aru madhyaana ॥
      Dhare dhyaan hovaikalyaana ॥

      Kahan laagee mahima kahaun tihaaree ॥
      Naam sada shubh mangalakaaree ॥

      Paath karai jo nitya chaaleesa ॥
      Tehi par krpa karahin gaureesha ॥ 40 ॥

      ॥ Doha ॥
      Santasharan ko tanay hoon,
      Pitar mishr sunaam ॥
      Haridvaar mandal basoon,
      Dhaam haripur graam ॥

      Unnees sau pichaanabe san kee,
      Shraavan shukl maas ॥
      Chaaleesa rachana kiyau,
      Tav charanan ko daas ॥


      बगलामुखी चालीसा के लाभ

      बगलामुखी चालीसा का पाठ देवी बगलामुखी की कृपा प्राप्त करने के लिए किया जाता है। बगलामुखी देवी को हिंदू धर्म में शक्ति और स्थिरता की देवी माना जाता है। उन्हें उनके भक्तों की बुरी शक्तियों, दुश्मनों और नकारात्मक ऊर्जा से रक्षा करने वाली देवी के रूप में पूजते हैं। बगलामुखी चालीसा के नियमित पाठ से अनेक प्रकार के लाभ प्राप्त होते हैं। इस लेख में हम बगलामुखी चालीसा के विभिन्न लाभों पर विस्तृत चर्चा करेंगे।

      1. शत्रुओं से सुरक्षा

      बगलामुखी चालीसा का मुख्य लाभ यह है कि यह शत्रुओं से सुरक्षा प्रदान करता है। जो व्यक्ति नियमित रूप से बगलामुखी चालीसा का पाठ करता है, उसके शत्रु पराजित होते हैं और उसे किसी भी प्रकार की हानि नहीं पहुंचा पाते। यह चालीसा शत्रुओं की बुरी योजनाओं को विफल कर देती है और व्यक्ति को सुरक्षा प्रदान करती है।

      2. मानसिक शांति और स्थिरता

      बगलामुखी चालीसा का पाठ करने से मानसिक शांति और स्थिरता प्राप्त होती है। यह व्यक्ति के मन को शांत करता है और उसे संतुलित बनाए रखता है। जब व्यक्ति मानसिक रूप से स्थिर और शांत होता है, तो वह अपने जीवन में अधिक सकारात्मकता और सुख की अनुभूति करता है।

      3. नकारात्मक ऊर्जा से मुक्ति

      बगलामुखी चालीसा का पाठ नकारात्मक ऊर्जा को दूर करता है। यह व्यक्ति के आसपास की नकारात्मकता को समाप्त करता है और उसे सकारात्मक ऊर्जा से भर देता है। इससे व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक बदलाव आते हैं और वह अधिक ऊर्जा और उत्साह से भर जाता है।

      4. कानूनी मामलों में सफलता

      जो लोग कानूनी मामलों में फंसे होते हैं, उन्हें बगलामुखी चालीसा का पाठ अवश्य करना चाहिए। यह चालीसा कानूनी मामलों में सफलता दिलाने में सहायक होती है। इससे व्यक्ति को कानूनी विवादों में जीत प्राप्त होती है और वह न्याय प्राप्त करता है।

      5. व्यवसाय में सफलता

      व्यवसाय में सफलता प्राप्त करने के लिए भी बगलामुखी चालीसा का पाठ लाभकारी होता है। यह व्यवसाय में आने वाली बाधाओं को दूर करता है और व्यक्ति को सफलता की ओर अग्रसर करता है। इससे व्यवसाय में वृद्धि होती है और व्यक्ति को आर्थिक लाभ प्राप्त होता है।

      6. आत्मविश्वास में वृद्धि

      बगलामुखी चालीसा का पाठ आत्मविश्वास में वृद्धि करता है। यह व्यक्ति के आत्म-संयम को बढ़ाता है और उसे अधिक आत्मविश्वासी बनाता है। जब व्यक्ति आत्मविश्वासी होता है, तो वह अपने जीवन में किसी भी चुनौती का सामना करने के लिए तैयार होता है।

      7. स्वास्थ्य लाभ

      बगलामुखी चालीसा का पाठ शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को सुधारने में सहायक होता है। इससे व्यक्ति के शरीर और मन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है, जो उसे स्वस्थ बनाए रखता है। यह चालीसा विभिन्न बीमारियों और रोगों से बचाव में भी सहायक होती है।

      8. आध्यात्मिक उन्नति

      बगलामुखी चालीसा का पाठ व्यक्ति की आध्यात्मिक उन्नति में भी सहायक होता है। यह चालीसा व्यक्ति को आध्यात्मिक मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती है और उसे देवी बगलामुखी की कृपा प्राप्त होती है। इससे व्यक्ति का आध्यात्मिक ज्ञान बढ़ता है और उसे आध्यात्मिक संतुष्टि प्राप्त होती है।

      9. पारिवारिक शांति

      बगलामुखी चालीसा का पाठ परिवार में शांति और सामंजस्य बनाए रखने में सहायक होता है। यह चालीसा परिवार के सदस्यों के बीच प्रेम और सद्भाव को बढ़ाती है और उन्हें एकजुट बनाए रखती है। इससे परिवार में किसी भी प्रकार के विवाद या कलह नहीं होते हैं और सभी सदस्य सुखी और संतुष्ट रहते हैं।

      10. दुर्गुणों से मुक्ति

      बगलामुखी चालीसा का पाठ व्यक्ति को उसके दुर्गुणों से मुक्त करता है। यह चालीसा व्यक्ति को उसके बुरे आदतों और नकारात्मक व्यवहार से छुटकारा दिलाती है और उसे सन्मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती है। इससे व्यक्ति का जीवन अधिक सकारात्मक और सुखमय हो जाता है।

      11. विपत्तियों से बचाव

      बगलामुखी चालीसा का पाठ व्यक्ति को विभिन्न प्रकार की विपत्तियों और आपदाओं से बचाव करता है। यह चालीसा व्यक्ति को संकटों से बचाती है और उसे सुरक्षित बनाए रखती है। इससे व्यक्ति के जीवन में आने वाली विपत्तियों का प्रभाव कम हो जाता है और वह अधिक सुरक्षित महसूस करता है।

      12. आर्थिक समृद्धि

      बगलामुखी चालीसा का पाठ आर्थिक समृद्धि प्राप्त करने में भी सहायक होता है। यह चालीसा व्यक्ति के जीवन में धन और समृद्धि को आकर्षित करती है और उसे आर्थिक रूप से सशक्त बनाती है। इससे व्यक्ति के आर्थिक स्थिति में सुधार होता है और वह अधिक समृद्ध बनता है।

      13. ध्यान और साधना में सहायक

      बगलामुखी चालीसा का पाठ ध्यान और साधना में भी सहायक होता है। यह चालीसा व्यक्ति के मन को एकाग्र बनाती है और उसे ध्यान में स्थिरता प्राप्त होती है। इससे व्यक्ति की साधना में उन्नति होती है और वह अधिक गहराई से ध्यान और साधना कर पाता है।

      14. आत्म-साक्षात्कार

      बगलामुखी चालीसा का पाठ व्यक्ति को आत्म-साक्षात्कार की ओर अग्रसर करता है। यह चालीसा व्यक्ति को उसकी आत्मा के वास्तविक स्वरूप का ज्ञान कराती है और उसे आत्म-ज्ञान की प्राप्ति होती है। इससे व्यक्ति का जीवन अधिक सार्थक और पूर्ण हो जाता है।

      15. देवी की कृपा प्राप्ति

      सबसे महत्वपूर्ण लाभ यह है कि बगलामुखी चालीसा का पाठ करने से व्यक्ति को देवी बगलामुखी की कृपा प्राप्त होती है। यह चालीसा व्यक्ति को देवी की विशेष कृपा और आशीर्वाद प्रदान करती है, जिससे उसका जीवन सुखमय और सफल बनता है।

      बगलामुखी चालीसा का पाठ करने से व्यक्ति को अनेक प्रकार के लाभ प्राप्त होते हैं। यह शत्रुओं से सुरक्षा, मानसिक शांति, नकारात्मक ऊर्जा से मुक्ति, कानूनी मामलों में सफलता, व्यवसाय में वृद्धि, आत्मविश्वास में वृद्धि, स्वास्थ्य लाभ, आध्यात्मिक उन्नति, पारिवारिक शांति, दुर्गुणों से मुक्ति, विपत्तियों से बचाव, आर्थिक समृद्धि, ध्यान और साधना में सहायकता, आत्म-साक्षात्कार और देवी की कृपा प्राप्ति जैसे लाभ प्रदान करता है। इसलिए, हर व्यक्ति को बगलामुखी चालीसा का नियमित पाठ करना चाहिए और देवी बगलामुखी की कृपा प्राप्त करनी चाहिए।

      विन्ध्येश्वरी चालीसा (VindhyeshWari Chalisa PDF)

      विन्ध्येश्वरी चालीसा (VindhyeshWari Chalisa Pdf) माँ विन्ध्येश्वरी को समर्पित एक भक्तिपूर्ण स्तोत्र है, जिसे हिंदू धर्म में महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त है। यह चालीसा देवी विन्ध्येश्वरी की महिमा, शक्ति, और उनके अद्वितीय गुणों का वर्णन करती है और भक्तों द्वारा श्रद्धा और भक्ति के साथ गाई जाती है।

      विन्ध्येश्वरी चालीसा की शुरुआत में देवी का ध्यान और स्तुति की जाती है, फिर उनके विभिन्न रूपों और लीलाओं का वर्णन होता है। यह चालीसा न केवल भक्तों को आध्यात्मिक शांति और संतोष प्रदान करती है, बल्कि उन्हें देवी की कृपा और आशीर्वाद प्राप्त करने में भी मदद करती है।

      विन्ध्येश्वरी चालीसा का नियमित पाठ करने से व्यक्ति की सभी प्रकार की समस्याओं का समाधान होता है और उन्हें सुख, शांति, और समृद्धि प्राप्त होती है। इसे भक्तों द्वारा सुबह और शाम दोनों समय गाया जा सकता है, विशेष रूप से नवरात्रि और अन्य विशेष त्योहारों और पूजाओं के अवसर पर।

      इस चालीसा का पाठ करने से माँ विन्ध्येश्वरी की कृपा प्राप्त होती है और भक्तों को जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और आत्मविश्वास मिलता है। भक्तों का विश्वास है कि माँ विन्ध्येश्वरी सभी प्रकार की बाधाओं और कष्टों को दूर करती हैं और अपने भक्तों को हर क्षेत्र में सफलता प्रदान करती हैं।


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      • हिंदी / संस्कृत
      • English

      || विन्ध्येश्वरी चालीसा ||

      ॥ दोहा ॥
      नमो नमो विन्ध्येश्वरी,
      नमो नमो जगदम्ब ।
      सन्तजनों के काज में,
      करती नहीं विलम्ब ॥

      जय जय जय विन्ध्याचल रानी।
      आदिशक्ति जगविदित भवानी ॥

      सिंहवाहिनी जै जगमाता ।
      जै जै जै त्रिभुवन सुखदाता ॥

      कष्ट निवारण जै जगदेवी ।
      जै जै सन्त असुर सुर सेवी ॥

      महिमा अमित अपार तुम्हारी ।
      शेष सहस मुख वर्णत हारी ॥

      दीनन को दु:ख हरत भवानी ।
      नहिं देखो तुम सम कोउ दानी ॥

      सब कर मनसा पुरवत माता ।
      महिमा अमित जगत विख्याता ॥

      जो जन ध्यान तुम्हारो लावै ।
      सो तुरतहि वांछित फल पावै ॥

      तुम्हीं वैष्णवी तुम्हीं रुद्रानी ।
      तुम्हीं शारदा अरु ब्रह्मानी ॥

      रमा राधिका श्यामा काली ।
      तुम्हीं मातु सन्तन प्रतिपाली ॥

      उमा माध्वी चण्डी ज्वाला ।
      वेगि मोहि पर होहु दयाला ॥ 10॥

      तुम्हीं हिंगलाज महारानी ।
      तुम्हीं शीतला अरु विज्ञानी ॥

      दुर्गा दुर्ग विनाशिनी माता ।
      तुम्हीं लक्ष्मी जग सुख दाता ॥

      तुम्हीं जाह्नवी अरु रुद्रानी ।
      हे मावती अम्ब निर्वानी ॥

      अष्टभुजी वाराहिनि देवा ।
      करत विष्णु शिव जाकर सेवा ॥

      चौंसट्ठी देवी कल्यानी ।
      गौरि मंगला सब गुनखानी ॥

      पाटन मुम्बादन्त कुमारी ।
      भाद्रिकालि सुनि विनय हमारी ॥

      बज्रधारिणी शोक नाशिनी ।
      आयु रक्षिनी विन्ध्यवासिनी ॥

      जया और विजया वैताली ।
      मातु सुगन्धा अरु विकराली ॥

      नाम अनन्त तुम्हारि भवानी ।
      वरनै किमि मानुष अज्ञानी ॥

      जापर कृपा मातु तब होई ।
      जो वह करै चाहे मन जोई ॥ 20॥

      कृपा करहु मोपर महारानी ।
      सिद्ध करहु अम्बे मम बानी ॥

      जो नर धरै मातु कर ध्याना ।
      ताकर सदा होय कल्याना ॥

      विपति ताहि सपनेहु नाहिं आवै ।
      जो देवीकर जाप करावै ॥

      जो नर कहँ ऋण होय अपारा ।
      सो नर पाठ करै शत बारा ॥

      निश्चय ऋण मोचन होई जाई ।
      जो नर पाठ करै चित लाई ॥

      अस्तुति जो नर पढ़े पढ़अवे ।
      या जग में सो बहु सुख पावे ॥

      जाको व्याधि सतावे भाई ।
      जाप करत सब दूर पराई ॥

      जो नर अति बन्दी महँ होई ।
      बार हजार पाठ करि सोई ॥

      निश्चय बन्दी ते छुट जाई ।
      सत्य वचन मम मानहु भाई ॥

      जापर जो कछु संकट होई ।
      निश्चय देविहिं सुमिरै सोई ॥ 30॥

      जा कहँ पुत्र होय नहिं भाई ।
      सो नर या विधि करे उपाई ॥

      पाँच वर्ष जो पाठ करावै ।
      नौरातन महँ विप्र जिमावै ॥

      निश्चय होहिं प्रसन्न भवानी ।
      पुत्र देहिं ता कहँ गुणखानी ॥

      ध्वजा नारियल आन चढ़ावै ।
      विधि समेत पूजन करवावै ॥

      नित प्रति पाठ करै मन लाई ।
      प्रेम सहित नहिं आन उपाई ॥

      यह श्री विन्ध्याचल चालीसा ।
      रंक पढ़त होवे अवनीसा ॥

      यह जन अचरज मानहु भाई ।
      कृपा दृश्टि जापर होइ जाई ॥

      जै जै जै जग मातु भवानी ।
      कृपा करहु मोहि निज जन जानी ॥ 40॥

      VindhyeshWari Chalisa PDF (in English)

      ॥ doha ॥
      namo namo vindhyeshvaree,
      namo namo jagadamb ॥
      santaan ke kaaj mein,
      aisa nahin hai vilaap ॥

      jay jay jay vindhyaachal raanee ॥
      aadishakti jagavidit bhavaanee ॥

      sinhavaahinee jay jagamaata ॥
      jay jay jay tribhuvan sukhadaata ॥

      kasht nivaaran jay jagadevee ॥
      jay jay sant asur sur sevee ॥

      mahima apaar amit vivaah ॥
      shesh sahas mukh varn haaree ॥

      deen ko du:kh harat bhavaanee ॥
      nahin dekho tum sam kou daanee ॥

      sab kar manasa poorvavat maata ॥
      mahima amit jagata ॥

      jo jan dhyaan tumhaaro laavai ॥
      so turatahi saty phal paavai ॥

      tumheen vaishnavee tumheen rudraanee ॥
      tumheen shaarada aru brahmaani ॥

      rama raadha shyaama kaalee ॥
      tumheen maatu santan pratipaalee ॥

      uma maadhavee chandee uchhaal ॥
      vegi mohi par hohu dayaala ॥ ॥ ॥

      tumheen hingalaaj mahaaraanee ॥
      tumheen sheetala aru vigyaanee ॥

      durga durg vinaashinee maata ॥
      tumheen lakshmee jag sukh daata ॥

      tumheen pushp aru rudraanee ॥
      he maavatee amb nirvaanee ॥

      ashtabhujee vaaraahini deva ॥
      karat vishnu shiv paryatak seva ॥

      chaunsatthee devee kalyaanee ॥
      gauree mangala sab gunakhaanee ॥

      paatan mumbadant kumaaree ॥
      bhadrikaalee suni vinee hamaaree ॥

      bajradhaarinee shok naashinee ॥
      aayu rakshinee vindhyavaasinee ॥

      jaya aur vijaya vaitaalee ॥
      maatu sugandha aru vikaaraalee ॥

      naam anant tumhaaree bhavaanee ॥
      varnai kimi maanush agyaanee ॥

      jaapar krpa maatu tab hoee ॥
      jo vah karai ichchha man joee ॥20 ॥

      krpa karahu mopar mahaaraanee ॥
      siddh karahu ambe mam baani ॥

      jo nar dharai maatu kar dhyaana ॥
      taakar sada hoy kalyaana ॥

      vipati taahi svapnahu nahin aavai ॥
      jo deveekar jaap karaavai ॥

      jo nar kahan rn hoy apaara ॥
      so nar paath karai shat baara ॥

      nishchit rn mochan hoee jay ॥
      jo nar paath karai chit lai ॥

      astuti jo nar padhave ॥
      ya jag mein so bahu sukh paave ॥

      jaako vyaadhi sataave bhaee ॥
      jap karat sab door paraee ॥

      jo nar ati bandee mahan hoee ॥
      baar hajaar paath kari soee ॥

      nishchit bandee te chhoot jaee ॥
      saty vachan mam manahu bhaee ॥

      jaapar jo kachhu sankat hoee ॥
      nishchay devihin sumirai soi ॥30 ॥

      ja kahoon putr hoy nahin bhaee ॥
      so nar ya vidhi kare upaee ॥

      pancham varsh jo paath karaavai ॥
      nauratan mahan vipr jimaavai ॥

      nishchit hohin nirmaata bhavaanee ॥
      putr dehin ta kahan gunakhaani ॥

      dhvaja koaana chadhaavai ॥
      sammilit vidhi poojan karavaavai ॥

      nit prati paath karai man laee ॥
      prem nahin sahit an upaee ॥

      yah shree vindhyaachal chaaleesa ॥
      rank padhat hove avaneesa ॥

      yah jan acharaj manahu bhaee ॥
      krpa drshti jaapar hoi jay ॥

      jay jay jay jag maatu bhavaanee ॥
      krpa karahu mohi nij jan jaanee ॥40 ॥


      विन्ध्येश्वरी चालीसा के लाभ

      विन्ध्येश्वरी चालीसा का पाठ करने के लाभ अनेक हैं, और इसका आध्यात्मिक महत्त्व बहुत ही व्यापक है। विन्ध्येश्वरी देवी, जिन्हें माँ विन्ध्यवासिनी भी कहा जाता है, हिंदू धर्म में एक महत्वपूर्ण देवी मानी जाती हैं। उनकी आराधना से न केवल मानसिक शांति प्राप्त होती है, बल्कि भौतिक सुख-सुविधाओं और समृद्धि की भी प्राप्ति होती है। यहाँ पर हम विन्ध्येश्वरी चालीसा के विभिन्न लाभों पर विस्तार से चर्चा करेंगे:

      1. मानसिक शांति और आत्मिक शुद्धि

      विन्ध्येश्वरी चालीसा का नियमित पाठ करने से मन को शांति मिलती है। यह चालीसा हमारी आत्मा को शुद्ध करने का काम करती है। इसके माध्यम से व्यक्ति अपने अंदर के नकारात्मक विचारों और भावनाओं को दूर कर सकता है। चालीसा के प्रत्येक श्लोक में माँ विन्ध्येश्वरी की महिमा का वर्णन किया गया है, जो हमारे मन को सुकून और शांति प्रदान करता है।

      2. भय और नकारात्मक शक्तियों से मुक्ति

      विन्ध्येश्वरी चालीसा का पाठ करने से व्यक्ति को भय और नकारात्मक शक्तियों से मुक्ति मिलती है। माँ विन्ध्येश्वरी को शक्ति और सुरक्षा की देवी माना जाता है। उनके चालीसा का नियमित पाठ करने से व्यक्ति के चारों ओर एक सुरक्षा कवच बनता है, जो उसे सभी प्रकार की नकारात्मक शक्तियों से बचाता है।

      3. रोगों से मुक्ति और स्वास्थ्य लाभ

      माँ विन्ध्येश्वरी की कृपा से रोगों से मुक्ति मिलती है। जो व्यक्ति नियमित रूप से विन्ध्येश्वरी चालीसा का पाठ करता है, उसे स्वास्थ्य लाभ प्राप्त होते हैं। इसके अलावा, मानसिक रोगों से ग्रसित व्यक्ति भी इस चालीसा के पाठ से मानसिक रूप से स्वस्थ हो सकता है। चालीसा का हर श्लोक शरीर और मन को ऊर्जा प्रदान करता है।

      4. आर्थिक समृद्धि और सफलताएँ

      विन्ध्येश्वरी चालीसा का पाठ करने से आर्थिक समृद्धि की प्राप्ति होती है। माँ विन्ध्येश्वरी को धन और समृद्धि की देवी माना जाता है। उनके चालीसा का नियमित पाठ करने से व्यक्ति के आर्थिक स्थिति में सुधार आता है और उसे अपने कार्यों में सफलता मिलती है। चाहे वह व्यापार हो या नौकरी, हर क्षेत्र में माँ विन्ध्येश्वरी की कृपा से व्यक्ति को सफलता प्राप्त होती है।

      5. परिवार में सुख-शांति और सौहार्द्र

      विन्ध्येश्वरी चालीसा का पाठ करने से परिवार में सुख-शांति और सौहार्द्र की प्राप्ति होती है। परिवार के सभी सदस्य आपसी प्रेम और समझदारी से रहते हैं। माँ विन्ध्येश्वरी की कृपा से परिवार में आने वाली सभी प्रकार की परेशानियाँ दूर हो जाती हैं और हर प्रकार की खुशियाँ प्राप्त होती हैं।

      6. आध्यात्मिक उन्नति और ईश्वर भक्ति

      विन्ध्येश्वरी चालीसा का पाठ करने से व्यक्ति की आध्यात्मिक उन्नति होती है। इससे व्यक्ति का ईश्वर भक्ति का मार्ग प्रशस्त होता है और उसे आध्यात्मिक ज्ञान की प्राप्ति होती है। यह चालीसा व्यक्ति को ईश्वर की निकटता का अनुभव कराती है और उसे मोक्ष प्राप्ति की दिशा में अग्रसर करती है।

      7. कामनाओं की पूर्ति

      विन्ध्येश्वरी चालीसा का पाठ करने से व्यक्ति की सभी इच्छाएँ और कामनाएँ पूरी होती हैं। माँ विन्ध्येश्वरी की कृपा से व्यक्ति को अपनी मनोवांछित वस्त्र, धन, संतान, और सभी प्रकार की भौतिक सुख-सुविधाओं की प्राप्ति होती है।

      8. मनोकामनाओं की सिद्धि

      माँ विन्ध्येश्वरी की आराधना से सभी प्रकार की मनोकामनाएँ सिद्ध होती हैं। यदि किसी की कोई विशेष इच्छा या कामना हो, तो विन्ध्येश्वरी चालीसा का नियमित पाठ करने से वह अवश्य ही पूरी होती है।

      9. विद्या और बुद्धि की प्राप्ति

      विन्ध्येश्वरी चालीसा का पाठ करने से व्यक्ति को विद्या और बुद्धि की प्राप्ति होती है। माँ विन्ध्येश्वरी की कृपा से विद्यार्थी अपने अध्ययन में उन्नति करते हैं और उन्हें परीक्षा में सफलता प्राप्त होती है।

      10. कठिन परिस्थितियों में सहायता

      विन्ध्येश्वरी चालीसा का पाठ करने से व्यक्ति को कठिन परिस्थितियों में सहायता मिलती है। चाहे वह जीवन की किसी भी समस्या का सामना कर रहा हो, माँ विन्ध्येश्वरी की कृपा से वह हर समस्या का समाधान पा सकता है।

      विन्ध्येश्वरी चालीसा का नियमित पाठ करने से व्यक्ति को मानसिक शांति, भौतिक सुख-सुविधाएँ, स्वास्थ्य लाभ, आर्थिक समृद्धि, और आध्यात्मिक उन्नति की प्राप्ति होती है। माँ विन्ध्येश्वरी की आराधना से सभी प्रकार की नकारात्मक शक्तियों और भय से मुक्ति मिलती है, और व्यक्ति की सभी इच्छाएँ और कामनाएँ पूरी होती हैं। विन्ध्येश्वरी चालीसा का पाठ करने से जीवन में सुख, शांति, और समृद्धि का आगमन होता है।

      श्री राणी सती दादी चालीसा – Shri Rani Sati Dadi Ji Chalisa PDF 2024-25

      श्री राणी सती दादी चालीसा (Shri Rani Sati Dadi Ji Chalisa Pdf) भक्तों के बीच बहुत ही प्रसिद्ध और पूजनीय है। यह चालीसा उन भक्तों के लिए एक विशेष पाठ है जो राणी सती दादी को अपने आराध्य के रूप में मानते हैं। राणी सती दादी, जिनका असली नाम नारायणी देवी था, एक वीरांगना महिला थीं जिन्होंने अपने पति की मृत्यु के बाद सती हो गईं। उनके इस अद्वितीय त्याग और समर्पण ने उन्हें दैवीय रूप में प्रतिष्ठित कर दिया और उन्हें ‘राणी सती’ के नाम से जाना जाने लगा।

      चालीसा का पाठ भक्तों को दादी के जीवन और उनके महान कार्यों का स्मरण कराता है। यह 40 छंदों (चालीस छंद) का एक संग्रह होता है, जिसमें दादी की महिमा, उनकी वीरता, और उनके आशीर्वाद की महत्ता का वर्णन किया गया है। चालीसा का पाठ न केवल भक्तों की आस्था को मजबूत करता है बल्कि उन्हें मनोबल और साहस भी प्रदान करता है।

      राणी सती दादी चालीसा का नियमित पाठ करने से भक्तों को मानसिक शांति और आध्यात्मिक ऊर्जा प्राप्त होती है। यह चालीसा विशेष अवसरों, त्योहारों और नियमित पूजा के दौरान गायी जाती है और इसे सुनने या पढ़ने से भक्तों के जीवन में सकारात्मकता और सुख-शांति का संचार होता है।



      • हिंदी / संस्कृत
      • English

      || श्री राणी सती दादी चालीसा ||

      ॥ चौपाई ॥
      नमो नमो श्री सती भवानी।
      जग विख्यात सभी मन मानी ॥

      नमो नमो संकट कू हरनी।
      मनवांछित पूरण सब करनी ॥

      नमो नमो जय जय जगदंबा।
      भक्तन काज न होय विलंबा ॥

      नमो नमो जय जय जगतारिणी।
      सेवक जन के काज सुधारिणी ॥4

      दिव्य रूप सिर चूनर सोहे ।
      जगमगात कुन्डल मन मोहे ॥

      मांग सिंदूर सुकाजर टीकी ।
      गजमुक्ता नथ सुंदर नीकी ॥

      गल वैजंती माल विराजे ।
      सोलहूं साज बदन पे साजे ॥

      धन्य भाग गुरसामलजी को ।
      महम डोकवा जन्म सती को ॥8

      तनधनदास पति वर पाये ।
      आनंद मंगल होत सवाये ॥

      जालीराम पुत्र वधु होके ।
      वंश पवित्र किया कुल दोके ॥

      पति देव रण मॉय जुझारे ।
      सति रूप हो शत्रु संहारे ॥

      पति संग ले सद् गती पाई ।
      सुर मन हर्ष सुमन बरसाई ॥12

      धन्य भाग उस राणा जी को ।
      सुफल हुवा कर दरस सती का ॥

      विक्रम तेरह सौ बावन कूं ।
      मंगसिर बदी नौमी मंगल कूं ॥

      नगर झून्झूनू प्रगटी माता ।
      जग विख्यात सुमंगल दाता ॥

      दूर देश के यात्री आवै ।
      धुप दिप नैवैध्य चढावे ॥16

      उछाङ उछाङते है आनंद से ।
      पूजा तन मन धन श्रीफल से ॥

      जात जङूला रात जगावे ।
      बांसल गोत्री सभी मनावे ॥

      पूजन पाठ पठन द्विज करते ।
      वेद ध्वनि मुख से उच्चरते ॥

      नाना भाँति भाँति पकवाना ।
      विप्र जनो को न्यूत जिमाना ॥20

      श्रद्धा भक्ति सहित हरसाते ।
      सेवक मनवांछित फल पाते ॥

      जय जय कार करे नर नारी ।
      श्री राणी सतीजी की बलिहारी ॥

      द्वार कोट नित नौबत बाजे ।
      होत सिंगार साज अति साजे ॥

      रत्न सिंघासन झलके नीको ।
      पलपल छिनछिन ध्यान सती को ॥24

      भाद्र कृष्ण मावस दिन लीला ।
      भरता मेला रंग रंगीला ॥

      भक्त सूजन की सकल भीङ है ।
      दरशन के हित नही छीङ है ॥

      अटल भुवन मे ज्योति तिहारी ।
      तेज पूंज जग मग उजियारी ॥

      आदि शक्ति मे मिली ज्योति है ।
      देश देश मे भवन भौति है ॥28

      नाना विधी से पूजा करते ।
      निश दिन ध्यान तिहारो धरते ॥

      कष्ट निवारिणी दुख: नासिनी ।
      करूणामयी झुन्झुनू वासिनी ॥

      प्रथम सती नारायणी नामा ।
      द्वादश और हुई इस धामा ॥

      तिहूं लोक मे कीरति छाई ।
      राणी सतीजी की फिरी दुहाई ॥32

      सुबह शाम आरती उतारे ।
      नौबत घंटा ध्वनि टंकारे ॥

      राग छत्तीसों बाजा बाजे ।
      तेरहु मंड सुन्दर अति साजे ॥

      त्राहि त्राहि मै शरण आपकी ।
      पुरी मन की आस दास की ॥

      मुझको एक भरोसो तेरो ।
      आन सुधारो मैया कारज मेरो ॥36

      पूजा जप तप नेम न जानू ।
      निर्मल महिमा नित्य बखानू ॥

      भक्तन की आपत्ति हर लिनी ।
      पुत्र पौत्र सम्पत्ति वर दीनी ॥ 40

      पढे चालीसा जो शतबारा ।
      होय सिद्ध मन माहि विचारा ॥

      टिबरिया ली शरण तिहारी।
      क्षमा करो सब चूक हमारी ॥

      ॥ दोहा ॥
      दुख आपद विपदा हरण,
      जन जीवन आधार ।
      बिगङी बात सुधारियो,
      सब अपराध बिसार ॥


      ॥ मात श्री राणी सतीजी की जय ॥

      Shri Rani Sati Dadi Ji Chalisa pdf

      ॥ Chaupai ॥
      namo namo shree satee bhavaanee ॥
      jag varjasvat man man man ॥

      namo namo sankat koo haranee ॥
      manavaanchhit puraan sab karana ॥

      namo namo jay jay jagadamba ॥
      bhaktan kaaj na hoy ​​dera ॥

      namo namo jay jay jagataarinee ॥
      sevak jan ke kaaj sudhaarinee ॥4 ॥

      divy roop sir chunar sohe ॥
      jagamagagat kundal man mohe ॥

      maang sindoor sukaajar tikee ॥
      gajamukta naath sundar neekee ॥

      gal vaijanti maal viraaje ॥
      seloon saaj badan pe saaje ॥

      dhany bhaag gurasaamalajee ko ॥
      maham dokava janm satee ko ॥8 ॥

      tanadhanadaas pati var pae ॥
      aanand mangal hot svaaye ॥

      fekaraam putr vadhu hoke ॥
      vansh pavitr kul doke ॥

      pati dev raan may jujhaare ॥
      sati roop ho shatru sanhaare ॥

      pati sang le sad gati paee ॥
      sur man harsh suman barajai ॥12 ॥

      dhanyavaad us raana jee ko ॥
      suphal huva kar daras satee ka ॥

      vikramaadity sau baavan koon ॥
      mangasir badee naumee mangal koon ॥

      nagar jhoonjhunoo pragati maata ॥
      jag vyutpatti mangal sumangal daata ॥

      door desh ke yaatree aavai ॥
      dhoop deep naivaidhy chadhaave ॥16 ॥

      uchhaan uchhaate hai aanand se ॥
      pooja tan man dhan shreephal se ॥

      jaat jyoola raat jaagave ॥
      baansal gotree sarv manaave ॥

      poojan paath paath dvij karen ॥
      ved dhvani mukh se uchchaarate ॥

      naana bhaanti bhaanti chaahata ॥
      vipr jano ko nit jimaana ॥20 ॥

      shraddhaabhaktisahit harasate ॥
      sevak manavaanchhit phal shoe ॥

      jay jay kaar kare nar naaree ॥
      shree raanee sateejee kee balihaaree ॥

      dvaar kot nit naubat baaje ॥
      hot singaar saaj ati saaje ॥

      ratn sinhaasan jhalake neeko ॥
      palapal chhinachin dhyaan sati ko ॥24 ॥

      bhadr krshn maavas din leela ॥
      bhaarat mela rang rangeela ॥

      bhakt soojan kee sakal bhee hai ॥
      darshan ke hit nahin chheen ॥

      atal bhuvan me jyoti tihaaree ॥
      tej poonj jag mag ujiyaaree ॥

      aadi shakti mein milee jyoti hai ॥
      desh desh mein bhavan bahut hai ॥28 ॥

      naana vidhi se pooja karen ॥
      nish din dhyaan tihaaro dharate ॥

      kasht nivaarinee duhkhah naasini ॥
      karunaamayee jhunjhunoo vaasinee ॥

      pratham sati naaraayanee naama ॥
      dvaadash aur huee is dhaama ॥

      tihoon lok me keerti chhai ॥
      raanee sateejee kee phiree duhaee ॥32 ॥

      praatah saayan aaratee nikaalen ॥
      naubat goonj dhvanit taanakaare ॥

      raag chhatteeson baaja baaje ॥
      traalu mand sundar ati saaje ॥

      traahi traahi mai sharan aapakee ॥
      puree man kee aas daas kee ॥

      mujhe ek bharosa tero ॥
      an sudhaaro maiya karaj mero ॥36 ॥

      pooja jap tap nem na jaanoo ॥
      nirmal mahima nity bakhaanau ॥

      bhakton kee kunjee har lain ॥
      putr pautr evestament var deenee ॥40 ॥

      padhen chaaleesa jo shatabaara ॥
      hoy siddh man maahi vichaara ॥

      tibariya lee sharan tihaaree ॥
      kshama karo sab galat hamaaree ॥

      ॥ Doha ॥
      duhkh aapad vipada haran,
      jan jeevan aadhaar ॥
      badee baat sudhaariyo,
      sab aparaadh bisaar ॥

      ॥ mata shree raanee sateejee kee jay ॥


      श्री राणी सती दादी चालीसा के लाभ

      श्री राणी सती दादी चालीसा का पाठ करने से कई लाभ होते हैं। इस चालीसा का पाठ भक्तों के लिए मानसिक, आध्यात्मिक और सामाजिक स्तर पर कई लाभकारी होता है। यहां श्री राणी सती दादी चालीसा के पाठ के कुछ प्रमुख लाभों का वर्णन किया गया है:

      1. आध्यात्मिक शांति और मानसिक स्थिरता

      श्री राणी सती दादी चालीसा का नियमित पाठ करने से मन को शांति मिलती है और मानसिक स्थिरता प्राप्त होती है। यह चालीसा पाठ व्यक्ति को ध्यान केंद्रित करने और उसकी आंतरिक शांति को बढ़ाने में मदद करता है।

      2. सकारात्मक ऊर्जा और आत्मविश्वास

      चालीसा का पाठ करने से व्यक्ति में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। यह आत्मविश्वास को बढ़ाता है और व्यक्ति को आत्म-निर्भर बनाता है। इसके माध्यम से नकारात्मक विचारों का नाश होता है और सकारात्मकता का विकास होता है।

      3. पारिवारिक समृद्धि और सुख-शांति

      श्री राणी सती दादी चालीसा का पाठ करने से परिवार में समृद्धि और सुख-शांति बनी रहती है। यह पारिवारिक सदस्यों के बीच प्रेम और सद्भावना को बढ़ावा देता है। इसके नियमित पाठ से पारिवारिक जीवन में खुशहाली आती है।

      4. संकटों और कठिनाइयों से मुक्ति

      श्री राणी सती दादी चालीसा का पाठ करने से व्यक्ति को जीवन के संकटों और कठिनाइयों से मुक्ति मिलती है। यह चालीसा व्यक्ति को हर प्रकार की विपत्तियों से बचाती है और उसे समस्याओं का सामना करने की शक्ति प्रदान करती है।

      5. स्वास्थ लाभ

      चालीसा का पाठ करने से मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य में सुधार होता है। इसका नियमित पाठ करने से तनाव और चिंता कम होती है, जिससे व्यक्ति का स्वास्थ्य अच्छा रहता है।

      6. भक्तिभाव और आस्था में वृद्धि

      श्री राणी सती दादी चालीसा का पाठ करने से व्यक्ति का भक्तिभाव और आस्था बढ़ती है। यह चालीसा व्यक्ति को दादी जी के प्रति श्रद्धा और समर्पण में वृद्धि करती है, जिससे उसकी भक्ति प्रगाढ़ होती है।

      7. आध्यात्मिक जागृति

      चालीसा का पाठ व्यक्ति की आध्यात्मिक जागृति में सहायक होता है। यह व्यक्ति को उसकी आंतरिक शक्तियों का अनुभव कराता है और उसे आत्म-साक्षात्कार की दिशा में प्रेरित करता है।

      8. कष्टों से मुक्ति और संकटमोचन

      श्री राणी सती दादी चालीसा का पाठ करने से व्यक्ति को उसके जीवन के कष्टों से मुक्ति मिलती है। यह चालीसा संकटमोचन के रूप में कार्य करती है और व्यक्ति को हर प्रकार की विपत्तियों से बचाती है।

      9. विद्या और बुद्धि का विकास

      चालीसा का पाठ करने से व्यक्ति की विद्या और बुद्धि का विकास होता है। यह व्यक्ति को उसकी शिक्षा और ज्ञान में वृद्धि करने में सहायक होता है।

      10. आत्म-संतुष्टि और आनंद

      श्री राणी सती दादी चालीसा का पाठ करने से व्यक्ति को आत्म-संतुष्टि और आनंद की प्राप्ति होती है। यह चालीसा व्यक्ति को उसके जीवन में सच्चे आनंद का अनुभव कराती है।

      11. धार्मिक कर्तव्यों का पालन

      चालीसा का पाठ करने से व्यक्ति अपने धार्मिक कर्तव्यों का पालन करता है। यह व्यक्ति को धर्म के प्रति जागरूक बनाता है और उसे धार्मिक मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित करता है।

      12. आध्यात्मिक मार्गदर्शन

      श्री राणी सती दादी चालीसा का पाठ व्यक्ति को आध्यात्मिक मार्गदर्शन प्रदान करता है। यह व्यक्ति को उसकी आत्मा के प्रति जागरूक बनाता है और उसे जीवन के सच्चे मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है।

      13. आत्म-साक्षात्कार और मोक्ष

      चालीसा का पाठ व्यक्ति को आत्म-साक्षात्कार की दिशा में प्रेरित करता है और उसे मोक्ष प्राप्ति की दिशा में अग्रसर करता है। यह व्यक्ति को उसकी आत्मा की सच्चाई का अनुभव कराता है और उसे जीवन के अंतिम लक्ष्य की प्राप्ति के लिए प्रेरित करता है।

      14. धन-धान्य और समृद्धि

      श्री राणी सती दादी चालीसा का पाठ करने से व्यक्ति को धन-धान्य और समृद्धि की प्राप्ति होती है। यह व्यक्ति को आर्थिक समृद्धि और संपन्नता प्रदान करती है।

      15. सामाजिक प्रतिष्ठा और मान-सम्मान

      चालीसा का पाठ करने से व्यक्ति को समाज में प्रतिष्ठा और मान-सम्मान प्राप्त होता है। यह व्यक्ति को समाज में एक सम्मानित स्थान दिलाती है और उसे सामाजिक प्रतिष्ठा प्रदान करती है।

      16. रिश्तों में मधुरता

      श्री राणी सती दादी चालीसा का पाठ करने से रिश्तों में मधुरता आती है। यह चालीसा व्यक्ति को उसके रिश्तों को मजबूती प्रदान करती है और रिश्तों में प्रेम और सामंजस्य को बढ़ावा देती है।

      17. कष्टों से रक्षा और सुरक्षा

      चालीसा का पाठ करने से व्यक्ति को कष्टों से रक्षा मिलती है। यह व्यक्ति को हर प्रकार की विपत्तियों और संकटों से बचाती है और उसे सुरक्षा प्रदान करती है।

      18. आत्मा की शुद्धता और पवित्रता

      श्री राणी सती दादी चालीसा का पाठ करने से व्यक्ति की आत्मा शुद्ध और पवित्र होती है। यह व्यक्ति को उसके पापों से मुक्ति दिलाती है और उसकी आत्मा को शुद्ध करती है।

      19. जीवन में सच्चाई और ईमानदारी

      चालीसा का पाठ करने से व्यक्ति के जीवन में सच्चाई और ईमानदारी का विकास होता है। यह व्यक्ति को सच्चाई के मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित करती है और उसे ईमानदारी से जीवन जीने की दिशा में मार्गदर्शन प्रदान करती है।

      20. परमात्मा के प्रति समर्पण

      श्री राणी सती दादी चालीसा का पाठ करने से व्यक्ति का परमात्मा के प्रति समर्पण बढ़ता है। यह व्यक्ति को उसके इष्ट देवता के प्रति समर्पित बनाती है और उसे परमात्मा की कृपा प्राप्त करने के लिए प्रेरित करती है।

      21. सकारात्मक सोच का विकास

      चालीसा का पाठ करने से व्यक्ति की सोच में सकारात्मकता का विकास होता है। यह व्यक्ति को नकारात्मक विचारों से मुक्त करती है और उसे सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाने की दिशा में प्रेरित करती है।

      22. जीवन में धैर्य और सहनशीलता

      श्री राणी सती दादी चालीसा का पाठ करने से व्यक्ति के जीवन में धैर्य और सहनशीलता का विकास होता है। यह व्यक्ति को हर प्रकार की परिस्थितियों का सामना करने की शक्ति प्रदान करती है और उसे धैर्यपूर्वक जीवन जीने की प्रेरणा देती है।

      23. आत्मबल और आत्मविश्वास

      चालीसा का पाठ करने से व्यक्ति का आत्मबल और आत्मविश्वास बढ़ता है। यह व्यक्ति को उसकी क्षमताओं पर विश्वास दिलाती है और उसे आत्म-निर्भर बनने की दिशा में प्रेरित करती है।

      24. धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान

      श्री राणी सती दादी चालीसा का पाठ करने से व्यक्ति की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान मजबूत होती है। यह व्यक्ति को उसके धार्मिक और सांस्कृतिक मूल्यों से जोड़ती है और उसे अपनी पहचान की दिशा में जागरूक करती है।

      25. दैवीय कृपा और आशीर्वाद

      चालीसा का पाठ करने से व्यक्ति को दैवीय कृपा और आशीर्वाद प्राप्त होता है। यह व्यक्ति को उसके जीवन में दैवीय शक्तियों की कृपा का अनुभव कराती है और उसे आशीर्वाद प्रदान करती है।

      26. जीवन में संतोष और सुख

      श्री राणी सती दादी चालीसा का पाठ करने से व्यक्ति को जीवन में संतोष और सुख की प्राप्ति होती है। यह व्यक्ति को उसकी सभी इच्छाओं और अपेक्षाओं से मुक्त करती है और उसे सच्चे सुख का अनुभव कराती है।

      27. आत्म-संयम और अनुशासन

      चालीसा का पाठ करने से व्यक्ति में आत्म-संयम और अनुशासन का विकास होता है। यह व्यक्ति को उसके जीवन में अनुशासनप्रिय बनाती है और उसे आत्म-संयम के महत्व को समझने की दिशा में प्रेरित करती है।

      28. सामाजिक सेवा और परोपकार

      श्री राणी सती दादी चालीसा का पाठ करने से व्यक्ति में सामाजिक सेवा और परोपकार की भावना विकसित होती है। यह व्यक्ति को समाज की सेवा करने के लिए प्रेरित करती है और उसे परोपकार के मार्ग पर चलने की दिशा में मार्गदर्शन प्रदान करती है।

      29. धार्मिक साधना और ध्यान

      चालीसा का पाठ करने से व्यक्ति में धार्मिक साधना और ध्यान का विकास होता है। यह व्यक्ति को उसकी आत्मा की शुद्धि के लिए प्रेरित करती है और उसे धार्मिक साधना के मार्ग पर चलने की दिशा में मार्गदर्शन प्रदान करती है।

      30. जीवन में सफलता और समृद्धि

      श्री राणी सती दादी चालीसा का पाठ करने से व्यक्ति को जीवन में सफलता और समृद्धि प्राप्त होती है। यह व्यक्ति को उसकी सभी आकांक्षाओं और उद्देश्यों में सफल होने की दिशा में प्रेरित करती है और उसे समृद्ध