Wednesday, January 28, 2026
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श्री गणेश आरती | Ganesh ji ki aarti PDF 2025

गणेश आरती (Ganesh ji ki aarti) आमतौर पर हर सुबह विभिन्न कार्यों और अनुष्ठानों के दौरान की जाती है। हर धार्मिक समारोह में, पहली पूजा हमेशा भगवान गणेश को समर्पित होती है। यह परंपरा उनके पिता भगवान शिव द्वारा उन्हें दिए गए आशीर्वाद से उपजी है। माता पार्वती और शिव के प्रिय पुत्र गणेश अविश्वसनीय रूप से दयालु और बुद्धिमान हैं। वे अपने भक्तों के जीवन से बाधाओं को दूर करते हैं और उन्हें धन और समृद्धि प्रदान करते हैं।

उनके एक दांत की कहानी भी बेहद शुभ है। जब ऋषि व्यास ने महाभारत लिखने में उनकी मदद मांगी, तो भगवान गणेश ने तुरंत सहमति दे दी। भगवान कृष्ण की दिव्य लीला के महत्व और मानवता के कल्याण के लिए, गणेश ने इसका महत्व समझा। जैसा कि व्यास ने बताया, गणेश ने लिखा, और महाभारत 100,000 श्लोकों में फैल गई। लिखने की गति के कारण उनकी कलम बार-बार टूट जाती थी, जिससे बाधाएँ आती थीं। लेखन में और देरी को रोकने के लिए, भगवान गणेश ने अपना दांत तोड़ दिया और इसे कलम के रूप में इस्तेमाल किया। इस प्रकार, उन्होंने महान महाकाव्य की रचना की।

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गणनायकाय गणदेवताय | Ganesh Aarti pdf | Vaishno Devi Chalisa Pdf | हनुमान चालीसा हिंदी में pdf


इस गणेश चतुर्थी भगवान श्री गणेश का स्वागत करे मंगलमय गणेश आरतिओ के साथ।
Shri Ganesh ji ki Aarti in Hindi, lyrics available for download in PDF, image format.

  • हिंदी / संस्कृत
  • English

|| श्री गणेश आरती हिंदी ||

जय गणेश जय गणेश,
जय गणेश देवा ।
माता जा की पार्वती,
पिता महादेवा ॥

एक दंत दयावंत,
चार भुजा धारी ।
माथे सिंदूर सोहे,
मूसे की सवारी ॥

जय गणेश जय गणेश,
जय गणेश देवा ।
माता जाकी पार्वती,
पिता महादेवा ॥

पान चढ़े फल चढ़े,
और चढ़े मेवा ।
लड्डुअन का भोग लगे,
संत करें सेवा ॥

जय गणेश जय गणेश,
जय गणेश देवा ।
माता जाकी पार्वती,
पिता महादेवा ॥

अंधन को आंख देत,
कोढ़िन को काया ।
बांझन को पुत्र देत,
निर्धन को माया ॥

जय गणेश जय गणेश,
जय गणेश देवा ।
माता जाकी पार्वती,
पिता महादेवा ॥

‘सूर’ श्याम शरण आए,
सफल कीजे सेवा ।
माता जाकी पार्वती,
पिता महादेवा ॥

जय गणेश जय गणेश,
जय गणेश देवा ।
माता जाकी पार्वती,
पिता महादेवा ॥

दीनन की लाज रखो,
शंभु सुतकारी ।
कामना को पूर्ण करो,
जाऊं बलिहारी ॥

जय गणेश जय गणेश,
जय गणेश देवा ।
माता जाकी पार्वती,
पिता महादेवा ॥

|| Shri Ganesh Ji Ki Aarti Lyrics ||

Jay Ganesh Jay Ganesh,
Jay Ganesh Deva॥
Mata Ja ki Parvati,
Pita Mahadeva॥

Ek Dant Dayavant,
Char Bhuj Dhari॥
Mathe Sindur Sohe,
Muse Ki Sawari॥

Jay Ganesh Jay Ganesh,
Jay Ganesh Deva॥
Mata Jaki Parvati,
Pita Mahadeva॥

Paan Chadhe Phal Chadhe,
Aur Chadhe Mewa॥
Ladduan Ka Bhog Lage,
Sant Karen Seva॥

Jay Ganesh Jay Ganesh,
Jay Ganesh Deva॥
Mata Jaki Parvati,
Pita Mahadeva॥

Andhan Ko Aankh Det,
Kodhin Ko Kaya॥
Baanjhan Ko Putra Det,
Nirdhan Ko Maya॥

Jay Ganesh Jay Ganesh,
Jay Ganesh Deva॥
Mata Jaki Parvati,
Pita Mahadeva॥

‘Sur’ Shyam Sharan Aaye,
Safal Kije Seva॥
Mata Jaki Parvati,
Pita Mahadeva॥

Jay Ganesh Jay Ganesh,
Jay Ganesh Deva॥
Mata Jaki Parvati,
Pita Mahadeva॥

Dinan Ki Laaj Rakho,
Shambhu Sutkari॥
Kamna Ko Poorn Karo,
Jaaun Balihaari॥

Jay Ganesh Jay Ganesh,
Jay Ganesh Deva॥
Mata Jaki Parvati,
Pita Mahadeva॥




श्री गणेश आरती के लाभ

श्री गणेश आरती हिंदू धर्म में गणेश जी की पूजा का महत्वपूर्ण हिस्सा है। गणेश जी, जिन्हें विघ्नहर्ता भी कहा जाता है, सभी सुख और समृद्धि के प्रतीक हैं। उनकी पूजा और आरती के कई लाभ होते हैं जो शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक रूप से हमें लाभ पहुँचाते हैं। यहाँ श्री गणेश आरती के लाभों को विस्तार से समझाया गया है।

आध्यात्मिक लाभ

शांति और मानसिक संतुलन
श्री गणेश आरती का नियमित पाठ करने से मानसिक शांति और संतुलन प्राप्त होता है। गणेश जी की आरती का उच्चारण करते समय ध्यान केंद्रित होता है, जो तनाव और चिंता को कम करने में सहायक होता है। इससे आत्म-संयम और ध्यान की क्षमता में वृद्धि होती है।

आध्यात्मिक उन्नति
श्री गणेश आरती से आत्मिक उन्नति होती है। यह आरती हमें सही मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती है और जीवन के आध्यात्मिक पहलुओं को समझने में मदद करती है। गणेश जी की आरती से हम अपने आध्यात्मिक लक्ष्य की ओर बढ़ सकते हैं।

शारीरिक लाभ

स्वास्थ्य में सुधार
श्री गणेश आरती का नियमित पाठ करने से मानसिक तनाव कम होता है, जो शारीरिक स्वास्थ्य को भी प्रभावित करता है। तनावमुक्त जीवन शारीरिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाता है और बीमारियों से बचाता है।

ऊर्जा में वृद्धि
आरती के समय की गई भक्ति और मंत्रों का उच्चारण शरीर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है। यह ऊर्जा हमें दिनभर सक्रिय और ऊर्जावान बनाए रखती है।

सामाजिक लाभ

संबंधों में सुधार
श्री गणेश आरती का सामूहिक पाठ परिवार और समाज में समर्पण और एकता की भावना को बढ़ावा देता है। इससे परिवारिक और सामाजिक संबंध मजबूत होते हैं और आपसी समझ बढ़ती है।

सकारात्मक वातावरण
श्री गणेश आरती के दौरान उत्पन्न होने वाली सकारात्मक ऊर्जा से घर और समाज का वातावरण सुखद और सकारात्मक होता है। यह सकारात्मकता आपके आस-पास के लोगों को भी प्रभावित करती है और सामाजिक सहयोग बढ़ाती है।

धार्मिक लाभ

विघ्नों का नाश
गणेश जी को विघ्नहर्ता माना जाता है। गणेश आरती के माध्यम से हम अपने जीवन से विघ्न और बाधाओं को दूर करने का प्रयास करते हैं। यह पूजा हमें जीवन के कठिन दौर से उबरने की शक्ति प्रदान करती है।

पुण्य की प्राप्ति
श्री गणेश आरती से धार्मिक पुण्य की प्राप्ति होती है। यह आरती हमें धार्मिक कर्मों और कृत्यों को सही तरीके से निभाने की प्रेरणा देती है, जो जीवन में सफलता और समृद्धि का मार्ग प्रशस्त करता है।

आर्थिक लाभ

समृद्धि की प्राप्ति
श्री गणेश जी की आरती से धन और समृद्धि की प्राप्ति की दिशा में मदद मिलती है। गणेश जी को धन के देवता के रूप में पूजा जाता है, और उनकी आरती से आर्थिक स्थिरता और वृद्धि की संभावना बढ़ती है।

व्यापार में सफलता
व्यापारिक दृष्टिकोण से भी गणेश आरती लाभकारी होती है। व्यापारिक विघ्न और बाधाओं को दूर करने के लिए गणेश जी की आरती का पाठ किया जाता है, जिससे व्यापार में सफलता और प्रगति मिलती है।

मनोरंजन और सकारात्मकता

आत्म-प्रेरणा
आरती के दौरान गणेश जी की स्तुति और भक्ति हमें आत्म-प्रेरणा प्रदान करती है। यह प्रेरणा हमें जीवन में कठिनाइयों का सामना करने की शक्ति देती है और हमें सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाने के लिए प्रेरित करती है।

धार्मिक अनुष्ठान की खुशी
श्री गणेश आरती का आयोजन परिवार और मित्रों के साथ मिलकर करने से आनंद और खुशी का अनुभव होता है। यह धार्मिक अनुष्ठान हमें सामूहिक खुशी और सुख की अनुभूति कराता है।

शिक्षा और ज्ञान

ज्ञान की प्राप्ति
गणेश जी को बुद्धि, ज्ञान और शिक्षा का देवता माना जाता है। गणेश आरती का नियमित पाठ करने से शिक्षा और ज्ञान में वृद्धि होती है और बुद्धि की तीव्रता बढ़ती है।

सफलता की प्राप्ति
श्री गणेश जी की आरती से परीक्षा और अन्य महत्वपूर्ण कार्यों में सफलता की संभावना बढ़ती है। गणेश जी की कृपा से कठिन कार्य भी आसान हो जाते हैं और सफलता की राह खुलती है।

श्री गणेश आरती का लाभ न केवल आध्यात्मिक और धार्मिक स्तर पर होता है, बल्कि यह शारीरिक, मानसिक और सामाजिक जीवन में भी सकारात्मक प्रभाव डालती है। गणेश जी की आरती से प्राप्त होने वाले लाभों को समझकर और अपनाकर हम एक सुखी, समृद्ध और संतुलित जीवन जी सकते हैं। गणेश जी की आरती हमारे जीवन को हर पहलू से संपूर्ण बनाती है और हमें सही मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती है।


माता वैष्णो देवी चालीसा | Mata Vaishno Devi Chalisa PDF 2025

माता वैष्णो देवी (Mata Vaishno Devi Chalisa Pdf), जो त्रिकूट पर्वत पर स्थित पवित्र गुफा में निवास करती हैं, भारतीय धार्मिक परंपरा में अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान रखती हैं। वे शक्ति की त्रिदेवियों (सरस्वती, लक्ष्मी, और पार्वती) की एक रूपमूर्ति हैं और उनके भक्तों के लिए अनगिनत आशीर्वाद और कृपा का स्रोत हैं। माता वैष्णो देवी की पूजा और आराधना से भक्तों के जीवन में सुख, शांति और समृद्धि आती है। उनकी आराधना करने वाले भक्तों को उनके चरणों में भक्ति और सच्चे श्रद्धा के साथ समर्पण करने की प्रेरणा मिलती है। श्री लक्ष्मी चालीसा पढ़ें!

माता वैष्णो देवी चालीसा एक महत्वपूर्ण भक्ति ग्रंथ है, जिसे विशेष रूप से माता वैष्णो देवी के प्रति भक्ति और श्रद्धा प्रकट करने के लिए लिखा गया है। यह चालीसा माता की महिमा, उनके भक्तों पर की गई कृपा और उनके अद्भुत गुणों का वर्णन करती है।

माता वैष्णो देवी चालीसा का पाठ विशेष रूप से उन भक्तों द्वारा किया जाता है जो माँ के आशीर्वाद की प्राप्ति के लिए आस्था और श्रद्धा से भरे हुए हैं। इसे नियमित रूप से पढ़ने से भक्तों को मानसिक शांति, सुख-समृद्धि और उनके जीवन में आने वाली बाधाओं को पार करने में मदद मिलती है। यह चालीसा न केवल भक्ति का एक महत्वपूर्ण माध्यम है बल्कि माँ वैष्णो देवी के प्रति समर्पण और प्रेम को भी व्यक्त करती है।


  • हिन्दी
  • English

|| माता वैष्णो देवी चालीसा ||

।। दोहा ।।

गरुड़ वाहिनी वैष्णवी
त्रिकुटा पर्वत धाम
काली, लक्ष्मी, सरस्वती,
शक्ति तुम्हें प्रणाम।

।। चौपाई ।।

नमो: नमो: वैष्णो वरदानी,
कलि काल मे शुभ कल्याणी।

मणि पर्वत पर ज्योति तुम्हारी,
पिंडी रूप में हो अवतारी॥

देवी देवता अंश दियो है,
रत्नाकर घर जन्म लियो है।

करी तपस्या राम को पाऊं,
त्रेता की शक्ति कहलाऊं॥

कहा राम मणि पर्वत जाओ,
कलियुग की देवी कहलाओ।

विष्णु रूप से कल्कि बनकर,
लूंगा शक्ति रूप बदलकर॥

तब तक त्रिकुटा घाटी जाओ,
गुफा अंधेरी जाकर पाओ।

काली-लक्ष्मी-सरस्वती मां,
करेंगी पोषण पार्वती मां॥

ब्रह्मा, विष्णु, शंकर द्वारे,
हनुमत, भैरों प्रहरी प्यारे।

रिद्धि, सिद्धि चंवर डुलावें,
कलियुग-वासी पूजत आवें॥

पान सुपारी ध्वजा नारीयल,
चरणामृत चरणों का निर्मल।

दिया फलित वर मॉ मुस्काई,
करन तपस्या पर्वत आई॥

कलि कालकी भड़की ज्वाला,
इक दिन अपना रूप निकाला।

कन्या बन नगरोटा आई,
योगी भैरों दिया दिखाई॥

रूप देख सुंदर ललचाया,
पीछे-पीछे भागा आया।

कन्याओं के साथ मिली मॉ,
कौल-कंदौली तभी चली मॉ॥

देवा माई दर्शन दीना,
पवन रूप हो गई प्रवीणा।

नवरात्रों में लीला रचाई,
भक्त श्रीधर के घर आई॥

योगिन को भण्डारा दीनी,
सबने रूचिकर भोजन कीना।

मांस, मदिरा भैरों मांगी,
रूप पवन कर इच्छा त्यागी॥

बाण मारकर गंगा निकली,
पर्वत भागी हो मतवाली।

चरण रखे आ एक शीला जब,
चरण-पादुका नाम पड़ा तब॥

पीछे भैरों था बलकारी,
चोटी गुफा में जाय पधारी।

नौ मह तक किया निवासा,
चली फोड़कर किया प्रकाशा॥

आद्या शक्ति-ब्रह्म कुमारी,
कहलाई माँ आद कुंवारी।

गुफा द्वार पहुँची मुस्काई,
लांगुर वीर ने आज्ञा पाई॥

भागा-भागा भैंरो आया,
रक्षा हित निज शस्त्र चलाया।

पड़ा शीश जा पर्वत ऊपर,
किया क्षमा जा दिया उसे वर॥

अपने संग में पुजवाऊंगी,
भैंरो घाटी बनवाऊंगी।

पहले मेरा दर्शन होगा,
पीछे तेरा सुमिरन होगा॥

बैठ गई मां पिंडी होकर,
चरणों में बहता जल झर झर।

चौंसठ योगिनी-भैंरो बर्वत,
सप्तऋषि आ करते सुमरन॥

घंटा ध्वनि पर्वत पर बाजे,
गुफा निराली सुंदर लागे।

भक्त श्रीधर पूजन कीन,
भक्ति सेवा का वर लीन॥

सेवक ध्यानूं तुमको ध्याना,
ध्वजा व चोला आन चढ़ाया।

सिंह सदा दर पहरा देता,
पंजा शेर का दु:ख हर लेता॥

जम्बू द्वीप महाराज मनाया,
सर सोने का छत्र चढ़ाया ।

हीरे की मूरत संग प्यारी,
जगे अखण्ड इक जोत तुम्हारी॥

आश्विन चैत्र नवरात्रे आऊं,
पिण्डी रानी दर्शन पाऊं।

सेवक’ कमल’ शरण तिहारी,
हरो वैष्णो विपत हमारी॥

।। दोहा ।।

कलियुग में महिमा तेरी,
है मां अपरंपार
धर्म की हानि हो रही,
प्रगट हो अवतार

|| Maa Vaishno Devi Chalisa PDF ||

॥ Doha ॥

Garuda Vahini Vaishnavi,
Trikuta Parvata Dhama।
Kali, Lakshmi, Sarasvati,
Shakti Tumhen Pranama॥

॥ Chaupai ॥

Namo Namo Vaishno Varadani।
Kali Kala Me Shubha Kalyani॥

Mani Parvata Para Jyoti Tumhari।
Pindi Rupa Mein Ho Avatari॥

Devi Devata Ansha Diyo Hai।
Ratnakara Ghara Janama Liyo Hai॥

Kari Tapasya Rama Ko Paun।
Treta Ki Shakti Kahalaun॥

Kaha Rama Mani Parvata Jao।
Kaliyuga Ki Devi Kahalao॥

Vishnu Rupa Se Kalki Banakara।
Lunga Shakti Rupa Badalakara॥

Taba Taka Trikuta Ghati Jao।
Gupha Andheri Jakar Pao॥

Kali-Lakshmi-Sarasvati Maa।
Karengi Shoshana-Parvati Maa॥

Brahma, Vishnu, Shankara Dware।
Hanumata Bhairon Prahari Pyare॥

Riddhi, Siddhi Chanvara Dulaven।
Kaliyuga-Vasi Pujana Aven॥

Pana Supari Dhvaja Nariyala।
Charanamrita Charanon Ka Nirmala॥

Diya Phalita Vara Maa Muskayi।
Karana Tapasya Parvata Ayi॥

Kali Kalaki Bhadaki Jvala।
Ik Dina Apana Rupa Nikala॥

Kanya Bana Nagarota Ayi।
Yogi Bhairon Diya Dikhai॥

Rupa Dekha Sundara Lalachaya।
Pichhe-pichhe Bhaga Aya॥

Kanyaon Ke Satha Mili Maa।
Kaula-kandauli Tabhi Chali Maa॥

Deva Mayi Darshana Dina।
Pavana Rupa Ho Gayi Pravina॥

Navaratron Mein Lila Rachai।
Bhakata Shridhara Ke Ghara Ayi॥

Yogina Ko Bhandara Dina।
Sabane Ruchikara Bhojana Kina॥

Mansa, Madira Bhairon Mangi।
Rupa Pavana Kara Ichchha Tyagi॥

Bana Marakara Ganga Nikali।
Parvata Bhagi Ho Matavali॥

Charana Rakhe Aa Eka Shila Jaba।
Charana-paduka Nama Pada Taba॥

Pichhe Bhairon Tha Balakari।
Choti Gupha Mein Jay Padhari॥

Nau Maha Taka Kiya Nivasa।
Chali Phodakara Kiya Prakasha॥

Adya Shakti-Brahma Kumari।
Kahalai Maa Ada Kunvari॥

Gupha Dwara Pahunchi Muskai।
Langura Vira Ne Agya Pai॥

Bhaga-Bhaga Bhairon Aya।
Raksha Hita Nija Shastra Chalaya॥

Pada Shisha Ja Parvata Upara।
Kiya Kshama Ja Diya Use Vara॥

Apane Sanga Mein Pujavaungi।
Bhairon Ghati Banavaungi॥

Pahale Mera Darshana Hoga।
Pichhe Tera Sumarana Hoga॥

Baitha Gayi Maa Pindi Hokara।
Charanon Mein Bahata Jala Jhara-Jhara॥

Chaunsatha Yogini-Bhairon Barvana।
Saptrishi Aa Karate Sumarana॥

Ghanta Dhvani Parvata Para Baje।
Gupha Nirali Sundara Lage॥

Bhakata Shridhara Pujan Kina।
Bhakti Seva Ka Vara Lina॥

Sevaka Dhyanun Tumako Dhyaya।
Dhvaja Va Chola Ana Chadhaya॥

Simha Sada Dara Pahara Deta।
Panja Shera Ka Dukha Hara Leta॥

Jambu Dvipa Maharaja Manaya।
Sara Sone Ka Chhatra Chadhaya॥

Hire Ki Murata Sanga Pyari।
Jage Akhanda Ika Jota Tumhari॥

Ashwina Chaitra Navarate Aun।
Pindi Rani Darshana Paun॥

Sevaka ‘Sharma’ Sharana Tihari।
Haro Vaishno Vipata Hamari॥

Ashwina Chaitra Navarate Aun।
Pindi Rani Darshana Paun॥

Sevaka ‘Sharma’ Sharana Tihari।
Haro Vaishno Vipata Hamari॥

॥ Doha ॥

Kaliyuga Mein Mahima Teri,
Hai Maa Aparampara।
Dharma Ki Hani Ho Rahi,
Pragata Ho Avatara॥



Maa Vaishno Devi Chalisa - Shree Vaishno Devi Chalisa- Mata Vaishno Devi Chalisa


श्री वैष्णो देवी चालीसा के लाभ

माता वैष्णो देवी चालीसा का पाठ भक्तों के लिए अनेक लाभकारी होता है। यह धार्मिक ग्रंथ माता वैष्णो देवी की महिमा और उनकी शक्तियों का वर्णन करता है। चालीसा का नियमित पाठ करने से भक्तों को मानसिक शांति, आशीर्वाद और सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त होती है। नीचे कुछ प्रमुख लाभों का विवरण दिया गया है:

मानसिक शांति और तनाव से मुक्ति

माता वैष्णो देवी चालीसा का पाठ करने से मन में शांति और स्थिरता आती है। यह पाठ भक्तों को तनाव और चिंता से मुक्त करता है और मानसिक शांति प्रदान करता है। चालीसा का नियमित पाठ मन को सकारात्मकता से भर देता है।

मनोकामना पूर्ति

माता वैष्णो देवी चालीसा का पाठ भक्तों की मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए बहुत प्रभावी माना जाता है। माता वैष्णो देवी को समर्पित यह चालीसा भक्तों की इच्छाओं को पूरा करने में सहायक होती है। श्रद्धा और भक्ति के साथ चालीसा का पाठ करने से माता की कृपा अवश्य प्राप्त होती है।

स्वास्थ्य लाभ

माता वैष्णो देवी चालीसा का नियमित पाठ करने से स्वास्थ्य संबंधित समस्याओं में राहत मिलती है। यह पाठ शरीर को ऊर्जा और शक्ति प्रदान करता है। नियमित रूप से चालीसा का पाठ करने से बीमारियों से मुक्ति मिलती है और शारीरिक स्वास्थ्य में सुधार होता है।

बाधाओं से मुक्ति

माता वैष्णो देवी चालीसा का पाठ करने से जीवन की विभिन्न बाधाओं और कठिनाइयों से मुक्ति मिलती है। यह पाठ जीवन में आने वाली समस्याओं को दूर करने में सहायक होता है और भक्तों को सही मार्ग दिखाता है।

आध्यात्मिक उन्नति

माता वैष्णो देवी चालीसा का पाठ करने से आध्यात्मिक उन्नति होती है। यह पाठ भक्तों को आध्यात्मिक मार्ग पर अग्रसर करता है और उन्हें माता वैष्णो देवी की कृपा का अनुभव कराता है। चालीसा का पाठ आत्मा को शुद्ध और निर्मल बनाता है।

परिवार में सुख-शांति

माता वैष्णो देवी चालीसा का पाठ परिवार में सुख-शांति और समृद्धि लाता है। यह पाठ परिवार के सदस्यों के बीच प्रेम और सद्भावना को बढ़ाता है। नियमित रूप से चालीसा का पाठ करने से परिवार में सौहार्द और सहयोग की भावना बनी रहती है।

धन और समृद्धि

माता वैष्णो देवी चालीसा का पाठ करने से धन और समृद्धि की प्राप्ति होती है। यह पाठ आर्थिक समस्याओं को दूर करने में सहायक होता है और घर में संपन्नता और खुशहाली लाता है।

नकारात्मक ऊर्जा से बचाव

माता वैष्णो देवी चालीसा का पाठ करने से नकारात्मक ऊर्जा और बुरी शक्तियों से बचाव होता है। यह पाठ भक्तों को बुरी नजर और अशुभ प्रभावों से सुरक्षित रखता है और सकारात्मक ऊर्जा से भर देता है।

माता वैष्णो देवी चालीसा का पाठ भक्तों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाता है और उन्हें माता की कृपा और आशीर्वाद प्राप्त होता है। यह पाठ भक्तों के जीवन में सुख, शांति, और समृद्धि लाने में सहायक होता है।

वैष्णो माता का मंत्र कौन सा है?

वैष्णो माता के कई मंत्र हैं, जिनमें से एक प्रमुख मंत्र है:

1. ॐ ऐं ह्रीं क्लीं वज्र वैरोचनीये हुँ हुँ फट स्वाहा।

2. ॐ श्री वैष्णवी नमः।

इसके अलावा, भक्त “जय माता दी” का भी नियमित उच्चारण करते हैं, जो माता की कृपा प्राप्त करने के लिए अत्यंत प्रभावी माना जाता है।

क्या कटरा से वैष्णो देवी तक रोपवे है?

हाँ, कटरा से वैष्णो देवी तक की यात्रा को सरल और आरामदायक बनाने के लिए एक रोपवे सुविधा उपलब्ध है। यह रोपवे अर्धकुवारी से भैरव घाटी तक जाता है और यात्रियों को कठिन चढ़ाई से बचाता है। यह सुविधा विशेष रूप से वृद्ध और बीमार भक्तों के लिए बहुत सहायक होती है।

वैष्णो देवी का असली नाम क्या है?

वैष्णो देवी का असली नाम त्रिकुटा है। उन्हें त्रिकुटा पर्वत पर तपस्या करने के कारण यह नाम प्राप्त हुआ। इसके अलावा, उन्हें माता रानी, वैष्णवी, और शेरावाली के नाम से भी जाना जाता है।

मां वैष्णो देवी का प्रमुख भोग

मां वैष्णो देवी को विभिन्न प्रकार के भोग अर्पित किए जाते हैं, जो श्रद्धालु अपनी भक्ति और श्रद्धा के साथ प्रस्तुत करते हैं। इन भोगों में से कुछ प्रमुख हैं:

1. सूजी का हलवा
सूजी का हलवा मां वैष्णो देवी का सबसे प्रमुख भोग माना जाता है। इसे शुद्ध घी, चीनी, और सूजी से बनाया जाता है और प्रसाद के रूप में मां को अर्पित किया जाता है।

2. पंजरी
पंजरी एक विशेष प्रकार का प्रसाद है जो धनिया पाउडर, गुड़, और सूखे मेवों से तैयार किया जाता है। इसे नवरात्रों के दौरान विशेष रूप से मां वैष्णो देवी को अर्पित किया जाता है।

3. खीर
खीर, जो कि चावल, दूध, और चीनी से बनाई जाती है, भी मां वैष्णो देवी को अर्पित की जाती है। इसे पवित्र और शुद्ध माना जाता है और भक्त इसे बड़े प्रेम और श्रद्धा के साथ अर्पित करते हैं।

4. फलों का भोग
मां वैष्णो देवी को ताजे फलों का भोग भी अर्पित किया जाता है। इसमें मुख्य रूप से सेब, केले, अंगूर, और संतरे शामिल होते हैं।

5. मिठाइयाँ
मां वैष्णो देवी को विभिन्न प्रकार की मिठाइयाँ जैसे लड्डू, बर्फी, और पंजीरी भी भोग के रूप में अर्पित की जाती हैं। ये मिठाइयाँ मंदिर के पुजारियों द्वारा तैयार की जाती हैं और भक्तों को प्रसाद के रूप में वितरित की जाती हैं।

6. सूखे मेवे
सूखे मेवों का भोग भी मां वैष्णो देवी को अर्पित किया जाता है। इसमें काजू, बादाम, अखरोट, और किशमिश शामिल होते हैं। यह भोग विशेष रूप से नवरात्रों और अन्य महत्वपूर्ण अवसरों पर अर्पित किया जाता है।

7. नारियल
नारियल मां वैष्णो देवी का एक और महत्वपूर्ण भोग है। इसे शुभ और पवित्र माना जाता है और पूजा के दौरान मां को अर्पित किया जाता है।
मां वैष्णो देवी के भोग अर्पित करने की प्रक्रिया भक्तों के लिए एक महत्वपूर्ण धार्मिक अनुष्ठान है, जो उनकी भक्ति और श्रद्धा को प्रकट करता है। मां वैष्णो देवी के आशीर्वाद से भक्तों का जीवन सुख, शांति, और समृद्धि से भर जाता है। जय माता दी!

मां वैष्णो देवी की यात्रा अधूरी कब मानी जाती है?

मां वैष्णो देवी की यात्रा भक्तों के लिए एक महत्वपूर्ण और पवित्र यात्रा मानी जाती है। इस यात्रा का एक विशेष धार्मिक महत्व है और इसे पूरी श्रद्धा और विश्वास के साथ पूरा किया जाता है। लेकिन कुछ विशेष परिस्थितियाँ और नियम हैं जिनके कारण यात्रा अधूरी मानी जाती है:

1. भैरव बाबा के दर्शन न करना
मां वैष्णो देवी की यात्रा को पूर्ण करने के लिए भैरव बाबा के दर्शन अनिवार्य माने जाते हैं। मान्यता है कि भैरव बाबा की पूजा और दर्शन के बिना मां वैष्णो देवी की यात्रा अधूरी रहती है। भैरव घाटी में स्थित भैरव बाबा का मंदिर यात्रा का अंतिम पड़ाव होता है।

2. पूर्ण अर्चना न करना
यात्रा के दौरान पूर्ण अर्चना और पूजा न करना भी यात्रा को अधूरा बना सकता है। भक्तों को माता की गुफा में जाकर विधिपूर्वक पूजा-अर्चना करनी चाहिए और मां की कृपा प्राप्त करनी चाहिए।

3. धार्मिक अनुष्ठान न करना
मां वैष्णो देवी की यात्रा के दौरान कुछ महत्वपूर्ण धार्मिक अनुष्ठान किए जाते हैं, जैसे कि हवन, भजन-कीर्तन, और अन्य पूजा विधियाँ। इन अनुष्ठानों को पूरा न करने पर भी यात्रा अधूरी मानी जाती है।

4. मनोकामना अर्पण न करना
यात्रा के दौरान भक्त अपनी मनोकामनाओं को मां के चरणों में अर्पित करते हैं। अगर भक्त अपनी मनोकामनाओं को मां के समक्ष प्रस्तुत नहीं करते, तो यात्रा अधूरी मानी जाती है।

5. आध्यात्मिक अनुभव न होना
मां वैष्णो देवी की यात्रा का एक प्रमुख उद्देश्य आध्यात्मिक अनुभव प्राप्त करना होता है। यदि भक्त को यात्रा के दौरान आध्यात्मिक शांति और संतुष्टि का अनुभव नहीं होता, तो यात्रा अधूरी मानी जाती है।

6. भक्ति और श्रद्धा का अभाव
यात्रा को पूर्ण करने के लिए भक्तों के मन में भक्ति और श्रद्धा का होना अत्यंत आवश्यक है। अगर यात्रा के दौरान भक्त के मन में श्रद्धा और विश्वास का अभाव होता है, तो यात्रा अधूरी मानी जाती है।

इस प्रकार, मां वैष्णो देवी की यात्रा को पूर्णता के साथ करने के लिए इन सभी महत्वपूर्ण बिंदुओं का ध्यान रखना आवश्यक है। जय माता दी!

मैं वैष्णो देवी से कैसे संपर्क कर सकता हूं?

श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड

संपर्क करें कॉल सेंटर से संपर्क करने के लिए कृपया 18001807212, 01991-234804, व्हाट्सएप 9906019494 पर डायल करें

ऑनलाइन सेवाओं के संबंध में पूछताछ के लिए कृपया 01991-232887,
ईमेल: online@maavaishnodevi.org पर संपर्क करें।

वैष्णो देवी किसका अवतार है?

वैष्णो देवी को देवी महालक्ष्मी का अवतार माना जाता है। वे त्रिकुटा पर्वत पर स्थित हैं और उनकी आराधना करने से भक्तों को धन, सुख और समृद्धि की प्राप्ति होती है।

वैष्णो देवी के पिता कौन है?

वैष्णो देवी के पिता रत्नाकर सागर थे, जो एक धर्मपरायण और धर्मनिष्ठ व्यक्ति थे। वे देवी के जन्म की कथा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

वैष्णो माता का कौन सा दिन होता है?

वैष्णो माता का विशेष दिन नवरात्रि के समय मनाया जाता है। नवरात्रि के दौरान विशेष पूजा, अर्चना और जागरण होते हैं। हालाँकि, वैष्णो देवी की यात्रा और पूजा किसी भी दिन की जा सकती है।

श्री शीतलनाथ जी चालीसा – Bhagwan Shri Sheetalnath Ji Chalisa PDF 2025

श्री शीतलनाथ जी चालीसा (Bhagwan Shri Sheetalnath Ji Chalisa Pdf) के पाठ से भक्तों को अनेक लाभ प्राप्त होते हैं। इस चालीसा का नियमित जप करने से शारीरिक और मानसिक रोगों का उपचार होता है और उन्हें स्वस्थ रहने में सहायता मिलती है। भगवान शीतलनाथ जी की कृपा से जीवन में सुख, शांति, और समृद्धि की प्राप्ति होती है।

इस चालीसा के माध्यम से भक्त अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए ईश्वर की आराधना करते हैं और उनसे आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। यह चालीसा भक्ति और श्रद्धा के साथ पढ़ी जाती है, जो जीवन को सकारात्मक और उत्तम दिशा में ले जाती है।

श्री नारायण कवच | वीर हनुमाना अति बलवाना भजन लिरिक्स | Shri Sai Chalisa Lyrics PDF | Hanuman Chalisa MP3 Download



  • हिंदी / संस्कृत
  • English

|| श्री शीतलनाथ जी चालीसा ||

शीतल हैं शीतल वचन, चन्दन से अधिकाय।
कल्प वृक्ष सम प्रभु चरण, हैं सबको सुखकाय॥

जय श्री शीतलनाथ गुणाकर, महिमा मंडित करुणासागर।
भाद्दिलपुर के दृढरथ राय, भूप प्रजावत्सल कहलाये॥

रमणी रत्न सुनन्दा रानी, गर्भ आये श्री जिनवर ज्ञानी।
द्वादशी माघ बदी को जन्मे, हर्ष लहर उठी त्रिभुवन में॥

उत्सव करते देव अनेक, मेरु पर करते अभिषेक।
नाम दिया शिशु जिन को शीतल, भीष्म ज्वाल अध् होती शीतल॥

एक लक्ष पुर्वायु प्रभु की, नब्बे धनुष अवगाहना वपु की।
वर्ण स्वर्ण सम उज्जवलपीत, दया धर्मं था उनका मीत॥

निरासक्त थे विषय भोगो में, रत रहते थे आत्म योग में।
एक दिन गए भ्रमण को वन में, करे प्रकृति दर्शन उपवन में॥

लगे ओसकण मोती जैसे, लुप्त हुए सब सूर्योदय से।
देख ह्रदय में हुआ वैराग्य, आत्म राग में छोड़ा राग॥

तप करने का निश्चय करते, ब्रह्मर्षि अनुमोदन करते।
विराजे शुक्र प्रभा शिविका में, गए सहेतुक वन में जिनवर॥

संध्या समय ली दीक्षा अश्रुण, चार ज्ञान धारी हुए तत्क्षण।
दो दिन का व्रत करके इष्ट, प्रथामाहार हुआ नगर अरिष्ट॥

दिया आहार पुनर्वसु नृप ने, पंचाश्चार्य किये देवों ने।
किया तीन वर्ष तप घोर, शीतलता फैली चहु और॥

कृष्ण चतुर्दशी पौषविख्यता, केवलज्ञानी हुए जगात्ग्यता।
रचना हुई तब समोशरण की, दिव्यदेशना खिरी प्रभु की॥

आतम हित का मार्ग बताया, शंकित चित्त समाधान कराया।
तीन प्रकार आत्मा जानो, बहिरातम अन्तरातम मानो॥

निश्चय करके निज आतम का, चिंतन कर लो परमातम का।
मोह महामद से मोहित जो, परमातम को नहीं माने वो॥

वे ही भव भव में भटकाते, वे ही बहिरातम कहलाते।
पर पदार्थ से ममता तज के, परमातम में श्रद्धा कर के॥

जो नित आतम ध्यान लगाते, वे अंतर आतम कहलाते।
गुण अनंत के धारी हे जो, कर्मो के परिहारी है जो॥

लोक शिखर के वासी है वे, परमातम अविनाशी है वे।
जिनवाणी पर श्रद्धा धर के, पार उतारते भविजन भव से॥

श्री जिन के इक्यासी गणधर, एक लक्ष थे पूज्य मुनिवर।
अंत समय में गए सम्म्मेदाचल, योग धार कर हो गए निश्चल॥

अश्विन शुक्ल अष्टमी आई, मुक्तिमहल पहुचे जिनराई।
लक्षण प्रभु का कल्पवृक्ष था, त्याग सकल सुख वरा मोक्ष था॥

शीतल चरण शरण में आओ, कूट विद्युतवर शीश झुकाओ।
शीतल जिन शीतल करें, सबके भव आतप।
अरुणा के मन में बसे, हरे सकल संताप॥

|| Shri Sheetalnaath Ji Chalisa PDF ||

Sheetal hain sheetal vachan, chandan se adhik.
Kalp vrksh sam prabhu charan, hain sarvopari sukhakaay.

Jay shree sheetalanaath gunaakar, mahima mandit karunaasaagar.
Bhaddeelapur ke drathaarth raay, bhoop prajaavatsal kahalaaye.

Ramanee ratn sunanda raanee, ​​garbh aaye shree jinavar gyaanee.
Dvaadashee maagh badee ko madhyam, harsh lahar uthee tribhuvan mein.

Utsav dev anek, meru karo abhishek.
Naam diya gaya shishu grh jin ko sheetal, bheeshm jvaal aadi sheetalata.

Ek laksh poorvau prabhu kee, nabbe dhanurdhar avagaahana vapu kee.
Varn svarn samaanandapeet, daya dharman tha unaka mit.

Niraasakt the vishay bhogo mein, rat rahate the aatm yog mein.
Ek din gaee yaatra van mein, kare prakrti darshan upavan mein.

Os laakekan motee jaise, lupt hue sab sooryoday se.
Dekhiye hrday mein hua vairaagy, aatm raag mein nikala raag.

Tap karane ka nishchay karo, brahmarshi manzoor karo.
Viraaje shukr prabha shivika mein, gae sahetuk van mein jinavar.

Sandhya samay lee deeksha ashrun, chaar gyaan dhaaree hue tatkshan.
Do din ka vrat karake ist, poorvamaahaar hua nagar arisht.

Diya aahaar punarvasu nrp ne, panchaachaary kise devon ne.
Teen saal ka ghor taap, sheetalata banda chahu aur.

Krshn chaturdashee paushavikhyaata, kevalagyaanee jagatgyata.
Rachana huee tab samosharan kee, divyadeshana khiree prabhu kee.

Aatam hit ka maarg bataaya, shankit chitt solyooshan.
Teen prakaar aatma jaano, bahiraatma antaraatam mano.

Nishchay karake nij aatma ka, dhyaan kar lo paramaatma ka.
Moh mahamad se mohit jo, paramaatma ko nahin maane vo.

Ve hi bhav bhav mein bhatakate, ve hi bhav bhav mein bhatakate.
Par padaarth se mitrata taj ke, paramaatma mein shraddha kar ke.

Jo nit aatm dhyaan kaalaantar, ve antar aatma kahalaate.
Gun anant ke dhaaree he jo, karmo ke dhaaree he jo.

Lok shikhar ke vaasee hain ve, paramaatma agyaanee hain ve.
Jinavaanee par shraddha dhar ke, paar uttergate bhaavan bhav se.

Shree jin ke ikyaasee ganadhar, ek laakh the poojy munivar.
Ant samay mein gae sammedaachal, yog dhaar kar ho gae nishchal.

Aashvin shukl ashtamee aaee, muktimahal pahunche jinaraee.
Lakshan prabhu ka kalpavrksh tha, tyaag sakal sukh var moksh tha.

Sheetal charan sharan mein aao, vidyut shaktivardhak sheesha dekho.
Sheetal jin sheetal karen, saamaany bhav atap.
Aruna ke man mein base, hare sakal santaap.


श्री शीतलनाथ जी चालीसा के लाभ

आध्यात्मिक लाभ:

आध्यात्मिक उन्नति: श्री शीतलनाथ जी चालीसा का पाठ करने से व्यक्ति की आध्यात्मिक उन्नति होती है। यह चालीसा व्यक्ति को ध्यान और साधना की ओर प्रेरित करती है।

आत्मिक शांति: इसके नियमित पाठ से मन को शांति और संतुलन प्राप्त होता है, जिससे आत्मा को शुद्धि मिलती है।

भगवान के प्रति भक्ति: श्री शीतलनाथ जी चालीसा भगवान के प्रति भक्ति और विश्वास को बढ़ाता है, जिससे भक्त को दिव्य अनुग्रह प्राप्त होता है।

मानसिक लाभ:

मानसिक शांति: इस चालीसा का पाठ मानसिक तनाव और चिंता को कम करने में सहायक होता है। यह मन को शांति और संतुलन प्रदान करता है।

सकारात्मकता: नियमित पाठ से नकारात्मक विचारों का नाश होता है और सकारात्मकता का विकास होता है।

ध्यान केंद्रित करना: श्री शीतलनाथ जी चालीसा का पाठ करने से ध्यान केंद्रित करने की क्षमता बढ़ती है, जिससे व्यक्ति अपने कार्यों में सफल होता है।

शारीरिक लाभ:

स्वास्थ्य में सुधार: नियमित रूप से चालीसा का पाठ करने से शारीरिक स्वास्थ्य में सुधार होता है। यह शरीर में ऊर्जा का संचार करता है और रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है।

तनाव मुक्ति: इसके पाठ से व्यक्ति तनावमुक्त रहता है, जिससे शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य में सुधार होता है।

सामाजिक लाभ:

सामाजिक समरसता: इस चालीसा का पाठ व्यक्ति को समाज में सौहार्द और समरसता बनाए रखने में सहायता करता है। यह व्यक्ति को दूसरों के प्रति सहानुभूति और करुणा विकसित करने में मदद करता है।

सदाचार: श्री शीतलनाथ जी चालीसा का पाठ करने से व्यक्ति में सदाचार और नैतिक मूल्यों का विकास होता है।

पारिवारिक लाभ:

पारिवारिक सुख-शांति: इस चालीसा का पाठ परिवार में सुख-शांति और समृद्धि लाने में सहायक होता है। यह परिवार के सभी सदस्यों को एकजुट रखता है।

संस्कार और मूल्य: चालीसा का पाठ बच्चों में संस्कार और नैतिक मूल्यों का विकास करता है, जिससे उनका व्यक्तित्व और चरित्र निर्माण होता है।

आर्थिक लाभ:

धन और समृद्धि: श्री शीतलनाथ जी चालीसा का पाठ आर्थिक समस्याओं का समाधान करता है और व्यक्ति को धन और समृद्धि प्रदान करता है।

व्यवसाय में सफलता: व्यवसाय में सफलता प्राप्त करने के लिए इस चालीसा का पाठ विशेष रूप से लाभकारी होता है।

आध्यात्मिक अनुभूति:

दिव्य अनुभूति: इस चालीसा का पाठ करते हुए व्यक्ति को दिव्य अनुभूति होती है और भगवान की कृपा प्राप्त होती है।

मुक्ति की ओर अग्रसर: श्री शीतलनाथ जी चालीसा का नियमित पाठ व्यक्ति को मोक्ष की ओर अग्रसर करता है।

अन्य लाभ:

कर्मों का शोधन: चालीसा का पाठ पापों का नाश करता है और अच्छे कर्मों की ओर प्रेरित करता है।

सभी इच्छाओं की पूर्ति: इस चालीसा का पाठ करने से व्यक्ति की सभी इच्छाओं की पूर्ति होती है और उसे संतोष प्राप्त होता है।

संकटों का निवारण: इसके पाठ से जीवन के सभी संकटों का निवारण होता है और व्यक्ति को सफलता प्राप्त होती है।

आध्यात्मिक ज्ञान:

ज्ञान की प्राप्ति: श्री शीतलनाथ जी चालीसा का पाठ व्यक्ति को आध्यात्मिक ज्ञान और बुद्धि प्रदान करता है।

जीवन का उद्देश्य: इस चालीसा का पाठ व्यक्ति को जीवन का उद्देश्य समझने में सहायता करता है और उसे सही मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित करता है।

श्री शीतलनाथ जी चालीसा का नियमित पाठ व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है। यह चालीसा मानसिक, शारीरिक, आध्यात्मिक और सामाजिक हर दृष्टिकोण से लाभकारी है। इसके माध्यम से व्यक्ति अपने जीवन को सुखमय और सफल बना सकता है।

Lingashtakam – लिङ्गाष्टकम् | Sanskrit Lingashtakam Lyrics 2025

The Lingashtakam stands as a deeply cherished devotional hymn within the Hindu tradition, specifically dedicated to Lord Shiva. This stotram, whose name translates to “the eight verses on the Lingam,” serves a purpose far greater than simple praise. It acts as a spiritual guide, using vivid poetry to direct the devotee’s mind from a physical symbol toward an infinite cosmic principle. The hymn’s power lies in its ability to bridge the gap between the tangible and the intangible, making the formless divine accessible to the human heart.

At the core of this composition is the worship of the Shiva Lingam. To the uninitiated, this may appear as a simple iconic representation. However, within the philosophy it signifies, the Lingam is understood as a sacred mark or symbol of the unmanifest supreme reality. It represents the formless absolute, the source of all creation, preservation, and dissolution. The Lingashtakam does not merely describe a stone or an object; it uses that form as a focal point to contemplate attributes that are beyond physicality, such as eternal bliss, boundless light, and ultimate purity.

The value of regularly reciting these eight verses is a central theme in the text itself. Devotees believe that chanting the Lingashtakam with sincere devotion purifies the heart and mind, washing away past sins and negative karma. It is said to bring inner peace, spiritual prosperity, and a gradual awakening of higher consciousness. The hymn is particularly associated with Mondays and the holy month of Shravan, periods dedicated to Lord Shiva, where its recitation is thought to be especially potent for receiving divine grace and blessings.

Ultimately, the Lingashtakam is more than a prayer; it is a tool for contemplation. Each stanza lovingly describes the Lingam’s splendor, comparing it to the most radiant jewels and precious metals, only to assert its superiority over all material wealth. This process slowly elevates the worshipper’s understanding from the physical to the metaphysical. By meditating on the words and their deeper meaning, the devotee is guided on a journey from acknowledging a form to ultimately realizing the formless, all-pervading essence of Shiva that resides within and beyond all creation. श्री नारायण कवच | वीर हनुमाना अति बलवाना भजन लिरिक्स | Shri Sai Chalisa Lyrics PDF | Hanuman Chalisa MP3 Download

ब्रह्ममुरारि सुरार्चित लिङ्गं
निर्मलभासित शोभित लिङ्गम् ।
जन्मज दुःख विनाशक लिङ्गं
तत्-प्रणमामि सदाशिव लिङ्गम् ॥ 1 ॥

brahmamurāri surārcita liṅgaṃ
nirmalabhāsita śobhita liṅgam .
janmaja duḥkha vināśaka liṅgaṃ
tat-praṇamāmi sadāśiva liṅgam .. 1

I bow before that Lingam, which is the eternal Shiva,
Which is worshipped by Brahma, Vishnu and other Devas,
Which is pure and resplendent,
And which destroys sorrows of birth.

देवमुनि प्रवरार्चित लिङ्गं
कामदहन करुणाकर लिङ्गम् ।
रावण दर्प विनाशन लिङ्गं
तत्-प्रणमामि सदाशिव लिङ्गम् ॥ 2 ॥

devamuni pravarārcita liṅgaṃ
kāmadahana karuṇākara liṅgam .
rāvaṇa darpa vināśana liṅgaṃ
tat-praṇamāmi sadāśiva liṅgam .. 2

I bow before that Lingam, which is the eternal Shiva,
Which is worshipped by great sages and devas,
Which destroyed the god of love,
Which showers mercy,
And which destroyed the pride of Ravana.

सर्व सुगन्ध सुलेपित लिङ्गं
बुद्धि विवर्धन कारण लिङ्गम् ।
सिद्ध सुरासुर वन्दित लिङ्गं
तत्-प्रणमामि सदाशिव लिङ्गम् ॥ 3 ॥

sarva sugandha sulepita liṅgaṃ
buddhi vivardhana kāraṇa liṅgam .
siddha surāsura vandita liṅgaṃ
tat-praṇamāmi sadāśiva liṅgam .. 3

I bow before that Lingam, which is the eternal Shiva,
Which is anointed by perfumes,
Which leads to growth of wisdom,
And which is worshipped by sages, devas and asuras.

कनक महामणि भूषित लिङ्गं
फणिपति वेष्टित शोभित लिङ्गम् ।
दक्ष सुयज्ञ निनाशन लिङ्गं
तत्-प्रणमामि सदाशिव लिङ्गम् ॥ 4 ॥

kanaka mahāmaṇi bhūṣita liṅgaṃ
phaṇipati veṣṭita śobhita liṅgam .
dakṣa suyajña nināśana liṅgaṃ
tat-praṇamāmi sadāśiva liṅgam .. 4

I bow before that Lingam, which is the eternal Shiva,
Which is ornamented by gold and great jewels,
Which shines with the snake being with it,
And which destroyed the Yagna of Daksha.

कुङ्कुम चन्दन लेपित लिङ्गं
पङ्कज हार सुशोभित लिङ्गम् ।
सञ्चित पाप विनाशन लिङ्गं
तत्-प्रणमामि सदाशिव लिङ्गम् ॥ 5 ॥

kuṅkuma candana lepita liṅgaṃ
paṅkaja hāra suśobhita liṅgam .
sañcita pāpa vināśana liṅgaṃ
tat-praṇamāmi sadāśiva liṅgam .. 5

I bow before that Lingam, which is the eternal Shiva,
Which is adorned by sandal paste and saffron,
Which wears the garland of lotus flowers,
And which can destroy accumulated sins.

देवगणार्चित सेवित लिङ्गं
भावै-र्भक्तिभिरेव च लिङ्गम् ।
दिनकर कोटि प्रभाकर लिङ्गं
तत्-प्रणमामि सदाशिव लिङ्गम् ॥ 6 ॥

devagaṇārcita sevita liṅgaṃ
bhāvai-rbhaktibhireva ca liṅgam .
dinakara koṭi prabhākara liṅgaṃ
tat-praṇamāmi sadāśiva liṅgam .. 6

I bow before that Lingam, which is the eternal Shiva,
Which is served by gods and other beings,
Which is the doorway for devotion and good thought,
And which shines like billions of Suns.

अष्टदलोपरिवेष्टित लिङ्गं
सर्वसमुद्भव कारण लिङ्गम् ।
अष्टदरिद्र विनाशन लिङ्गं
तत्-प्रणमामि सदाशिव लिङ्गम् ॥ 7 ॥

aṣṭadalopariveṣṭita liṅgaṃ
sarvasamudbhava kāraṇa liṅgam .
aṣṭadaridra vināśana liṅgaṃ
tat-praṇamāmi sadāśiva liṅgam .. 7

I bow before that Lingam, which is the eternal Shiva,
Which is surrounded by eight petals,
Which is the prime reason of all riches,
And which destroys eight types of poverty.

सुरगुरु सुरवर पूजित लिङ्गं
सुरवन पुष्प सदार्चित लिङ्गम् ।
परात्परं परमात्मक लिङ्गं
तत्-प्रणमामि सदाशिव लिङ्गम् ॥ 8 ॥

suraguru suravara pūjita liṅgaṃ
suravana puṣpa sadārcita liṅgam
parātparaṃ paramātmaka liṅgaṃ
tat-praṇamāmi sadāśiva liṅgam .. 8

I bow before that Lingam, which is the eternal Shiva,
Which is worshipped by the teacher of gods,
Which is worshipped by the best of gods,
Which is always worshipped by the flowers,
From the garden of Gods,
Which is the eternal abode,
And which is the ultimate truth.

लिङ्गाष्टकमिदं पुण्यं यः पठेश्शिव सन्निधौ ।
शिवलोकमवाप्नोति शिवेन सह मोदते ॥ 9 ॥

liṅgāṣṭakamidaṃ puṇyaṃ yaḥ paṭheśśiva sannidhau .
śivalokamavāpnoti śivena saha modate .. 9

Any one who chants the holy octet of the Lingam,
In the holy presence of Lord Shiva,
Would in the end reach the world of Shiva,
And keep him company.

॥ ॐ तत् सत् ॥


Why do millions of people chant this hymn every day, especially on Mondays and during the month of Shravan? The believed benefits are both tangible and spiritual:

  1. Purification of the Mind: The rhythmic Sanskrit verses have a calming effect, quieting mental chatter and reducing anxiety.
  2. Absolution of Negative Karma: It is widely believed that sincere recitation helps dissolve the effects of past mistakes, clearing a path for a more positive life.
  3. Fulfillment of Desires: Devotees chant it for divine blessings to overcome obstacles and achieve righteous goals in life.
  4. A Path to Liberation (Moksha): Ultimately, the hymn is a tool for spiritual evolution, gradually detaching the seeker from the material world and guiding them toward self-realization.

How to Incorporate the Lingashtakam Into Your Practice

You don’t need an elaborate setup to benefit from this powerful prayer.

  • Find a Quiet Time: Mornings or evenings are ideal.
  • Listen and Learn: Start by finding a peaceful rendition on YouTube. Listen to the melody and pronunciation.
  • Chant With Understanding: As you learn, try to understand the meaning of each verse. This makes the practice infinitely more powerful.
  • Be Consistent: Even chanting one verse a day with full focus and devotion is more valuable than a rushed recitation of the entire hymn.

FAQs –

Lingashtakam Lyrics

The term Lingashtakam lyrics typically refers to the original Sanskrit verses of the hymn. These eight stanzas are composed in a specific poetic meter and are known for their rhythmic and devotional quality. People often search for the lyrics to aid in memorization, correct pronunciation, or to follow along during prayers. The lyrics are widely available on religious websites, blogs, and video descriptions, providing the text in various Indian scripts and transliterations for a global audience.

Lingashtakam PDF

A search for a Lingashtakam PDF is usually made by individuals seeking a downloadable, portable, and often printable version of the hymn. These PDFs are valuable because they can be saved on devices for offline use, making them convenient for daily practice or travel. They frequently include the Sanskrit text, a transliteration for those unfamiliar with the script, a word-by-word meaning, and sometimes a full English translation and commentary for deeper study.

Lingashtakam Telugu

For Telugu-speaking devotees, finding the Lingashtakam in Telugu is essential for accessible and meaningful recitation. This search yields the hymn’s verses written in the Telugu script, allowing readers to chant using their native language’s characters. Many resources also provide a Telugu translation of the Sanskrit verses, which helps devotees fully understand the philosophical meaning and devotional sentiments expressed in each stanza, thereby enhancing their spiritual experience.

Lingashtakam PDF in Sanskrit

A Lingashtakam PDF in Sanskrit is specifically sought by purists, scholars, or those who wish to practice the hymn in its most authentic written form. This PDF contains the original verses in the Devanagari script, preserving the traditional integrity of the text. It is a preferred resource for those who can read Sanskrit and want a digital copy that is free from translation or transliteration, often used for academic purposes or by temples for printing prayer leaflets.

Lingashtakam Lyrics in Hindi

Searching for Lingashtakam lyrics in Hindi provides the text in two primary formats. The first is the original Sanskrit verses written in the Devanagari (Hindi) script, which is how the hymn is commonly published in North India. The second, and often more popular, is a Hindi translation of the meaning of the stanzas. This allows Hindi-speaking devotees who may not understand Sanskrit to comprehend the profound philosophy and praises within the hymn, deepening their connection to the prayer.

लिङ्गाष्टकं स्तोत्रम् in Hindi

This search query, written in Hindi, is used by native Hindi speakers looking for the Lingashtakam stotram. The results typically include the full eight verses presented in the Devanagari script. The purpose is to find a resource that requires no knowledge of English, offering the text, and often a detailed Hindi explanation or commentary (vyakhya), on websites and blogs tailored specifically for a Hindi-speaking audience seeking religious content in their mother tongue.

Lingashtakam Lyrics in English

Lingashtakam lyrics in English is a highly common search, especially for devotees and spiritual seekers outside of India or those unfamiliar with Indian scripts. The results provide two key things: a transliteration (writing the Sanskrit words using English letters) to aid in pronunciation, and a full English translation that conveys the meaning of each verse. This dual format is crucial for non-native speakers to both chant the hymn correctly and understand its deep spiritual significance.

What is Lingashtakam?

The Lingashtakam is a revered eight-verse hymn from the Hindu tradition dedicated to worshipping the Lingam, the sacred symbol of Lord Shiva. The name itself breaks down into ‘Lingam’, representing the formless divine reality, and ‘Ashtakam’, meaning a composition of eight stanzas. It is far more than a simple prayer; it is a profound philosophical text that uses the physical form of the Lingam as a focal point to meditate on Shiva’s infinite, formless nature. The hymn is celebrated for its devotional depth and is widely chanted for spiritual purification, seeking blessings, and attaining liberation.

Who wrote Lingashtakam?

The Lingashtakam is traditionally attributed to the 8th-century philosopher and saint, Adi Shankaracharya. He is renowned for consolidating the doctrine of Advaita Vedanta (non-dualism) and revitalizing Hinduism through his extensive commentaries and devotional compositions. While definitive historical proof is challenging to establish, the hymn’s deep philosophical alignment with Advaita Vedanta—emphasizing the worship of the formless absolute through a form—strongly supports its connection to his lineage of thought. His authorship is widely accepted within the tradition.

What is the meaning of Lingashtakam?

The overall meaning of the Lingashtakam is the glorification of the Shiva Lingam as the ultimate, formless source of the universe. It describes the Lingam as more radiant than any jewel, the destroyer of all sins, and the bestower of both worldly prosperity and ultimate liberation (moksha). Each verse elaborates on its divine qualities, asserting that it is the embodiment of supreme bliss and compassion. The core meaning transcends physical description, guiding the devotee to see the Lingam not as an object, but as a symbol of the infinite cosmic power from which all creation emerges and into which it dissolves.

What is Lingashtakam Stotram?

The term Lingashtakam Stotram specifically highlights the hymn’s identity as a stotram, which is a Sanskrit word for a hymn of praise. Referring to it as a stotram emphasizes its liturgical and devotional function within Hindu practice. It is a rhythmic, melodic composition designed for recitation, often during Shiva puja (worship), on Mondays, or during the holy month of Shravan. As a stotram, its purpose is to focus the mind, express devotion, and invoke the divine presence and blessings of Lord Shiva through the power of sacred sound and vibration.

What is the meaning in English of the Lingashtakam?

The meaning of the Lingashtakam in English conveys the profound philosophical ideas expressed in each Sanskrit verse. A proper English translation provides more than a literal word-for-word conversion; it offers an explanation of the core sentiments. It describes the Lingam as the source of infinite joy, the destroyer of the fear of death and cycle of rebirth, and an entity worshipped by gods like Brahma and Vishnu. The translated meaning emphasizes that true worship is performed with devotion, faith, and simple offerings, and it reveals the hymn’s ultimate purpose: to lead the seeker from the recognition of a form to the realization of the formless absolute.

नैनो में नींद भर आई – Naino Mein Neend Bhar Aayi

नैनो में नींद भर आई (Naino Mein Neend Bhar Aayi), भजन एक ऐसा मधुर गीत है, जो हमारे भीतर की शांति और आत्मिक संतोष को जागृत करता है। यह भजन हमें हमारे ईश्वर के साथ गहरा संबंध बनाने में सहायता करता है और हमें उनकी उपस्थिति का अहसास दिलाता है। भजन की मधुर धुन और गहन शब्द हमें भगवान के दिव्य प्रेम और आशीर्वाद का अनुभव कराते हैं। श्री नारायण कवच | वीर हनुमाना अति बलवाना भजन लिरिक्स | Shri Sai Chalisa Lyrics PDF | Hanuman Chalisa MP3 Download

  • हिंदी लिरिक्स
  • English Lyrics

|| नैनो में नींद भर आई ||

नैनो में नींद भर आई बिहारी जी के,
अखियो में नींद भर आई बिहारी जी के…

कौन बिहारी जी को दूध पियावे,
कौन खिलावे मलाई,
बिहारी जी के..
नैनो में नींद भर आई…

मैया यशोदा दूध पियावे,
बाबा खिलावे मलाई,
बिहारी जी के..
नैनो में नींद भर आई…

कौन बिहारी जू की सेज बिछावे,
कौन करे गुण गयी,
बिहारी जी के..
नैनो में नींद भर आई…

ललिता विशाखा सेज बिछावे,
भक्त करे गुण गयी,
बिहारी जी के..

नैनो में नींद भर आई बिहारी जू के,
अखियो में नींद भर आई बिहारी जू के ||

|| Naino Mein Neend Bhar Aayi ||

Naino Mein Neend Bhar Aai Bihari Ju Ke,
Naino Mein Neend Bhar Aai Raman Bihari Ju Ke
Naino Mein Neend Bhar Aai Bihari Ju Ke,
Naino Mein Neend Bhar Aai Raman Bihari Ju Ke

Kaun Bihari Ju Ko Doodh Pivave,
Kaun Khilave Malai Bihari Ju Ko,
Naino Mein Neend Bhar Aai

Maiya Yashoda Doodh Pivave,
Baaba Khilaave Malai Bihari Ju Ko,
Naino Mein Neend Bhar Aai

Kaun Bihari Ju Kee Sej Bichhaave,
Kaun Kare Gun Gayee Bihari Ju Ke,
Naino Mein Neend Bhar Aai

Lalita Vishaakha Sej Bichhaave,
Bhakti Kare Gun Gayee Bihari Ju Ke,
Naino Mein Neend Bhar Aai


Naino Mein Neend Bhar Aayi

“नैनों में नींद भर आई” भजन एक ऐसा मधुर गीत है, जो हमारे भीतर की शांति और आत्मिक संतोष को जागृत करता है। यह भजन हमें हमारे ईश्वर के साथ गहरा संबंध बनाने में सहायता करता है और हमें उनकी उपस्थिति का अहसास दिलाता है। भजन की मधुर धुन और गहन शब्द हमें भगवान के दिव्य प्रेम और आशीर्वाद का अनुभव कराते हैं।

भजन के माध्यम से हम अपनी आत्मा को शुद्ध और शांति की ओर ले जाते हैं। “नैनों में नींद भर आई” का मुख्य संदेश है कि जब हम भगवान के ध्यान में मग्न होते हैं, तो हमारी आत्मा को एक अनोखी शांति मिलती है। यह भजन हमें हमारे जीवन की तमाम चिंताओं से मुक्त कर देता है और हमें एक नई ऊर्जा और सकारात्मकता से भर देता है।

इस भजन में भगवान के प्रति भक्ति और समर्पण की भावना प्रकट होती है। नैनों में नींद भर आने का मतलब है कि जब हम भगवान के चरणों में होते हैं, तो हमारी सारी थकान और चिंता दूर हो जाती है, और हमारी आत्मा एक गहरी शांति और संतोष का अनुभव करती है। यह भजन हमें यह सिखाता है कि हमारे जीवन की सभी समस्याओं का समाधान भगवान की शरण में ही है।

भजन के माध्यम से हम भगवान के प्रति अपनी आस्था और विश्वास को प्रकट करते हैं। “नैनों में नींद भर आई” भजन में न केवल हमारी भक्ति का प्रतिफल मिलता है, बल्कि यह हमें हमारी आत्मा की गहराइयों तक पहुंचने में भी मदद करता है। यह भजन हमें आत्मिक रूप से सशक्त बनाता है और हमें हमारे ईश्वर के प्रति अधिक समर्पित होने की प्रेरणा देता है।

भजन के माध्यम से भगवान के साथ हमारा संबंध और मजबूत होता है। जब हम इस भजन को गाते हैं या सुनते हैं, तो हमारे भीतर एक गहरी शांति और संतोष का भाव उत्पन्न होता है। यह भजन हमें हमारे जीवन की तमाम उलझनों और परेशानियों से मुक्त कर देता है और हमें भगवान की शरण में शांति का अनुभव कराता है।

“नैनों में नींद भर आई” भजन का गहन अर्थ है कि जब हम भगवान की शरण में होते हैं, तो हमारी आत्मा को एक अनोखी शांति और संतोष का अनुभव होता है। यह भजन हमें हमारे ईश्वर के प्रति हमारी आस्था और विश्वास को और मजबूत करता है और हमें उनके दिव्य प्रेम और आशीर्वाद का अनुभव कराता है।

इस भजन का प्रत्येक शब्द और धुन हमें भगवान के प्रति हमारी भक्ति और समर्पण की भावना को और गहरा करता है। “नैनों में नींद भर आई” भजन के माध्यम से हम अपने भीतर की शांति और संतोष को जागृत कर सकते हैं और हमारे जीवन को एक नई दिशा और ऊर्जा से भर सकते हैं।

इस भजन के माध्यम से हमें यह सिखाया जाता है कि भगवान की शरण में ही हमारी सभी समस्याओं का समाधान है और उनकी कृपा से ही हम अपने जीवन को सशक्त और सकारात्मक बना सकते हैं। “नैनों में नींद भर आई” भजन हमें यह संदेश देता है कि जब हम भगवान के चरणों में होते हैं, तो हमारी आत्मा को एक अनोखी शांति और संतोष का अनुभव होता है और हमें उनकी उपस्थिति का अहसास होता है।

नैनो में नींद भर आई के लाभ

“नैनों में नींद भर आई” भजन के लाभ और महत्व को समझने के लिए हमें इस भजन के गहरे अर्थ और इसके आत्मिक, मानसिक और शारीरिक लाभों पर विस्तृत रूप से विचार करना होगा। यह भजन न केवल धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह हमारे जीवन की विभिन्न पहलुओं पर भी सकारात्मक प्रभाव डालता है। आइए, इस भजन के लाभों को विस्तृत रूप में समझते हैं।

आध्यात्मिक लाभ

ईश्वर के साथ गहरा संबंध

भजन गाने या सुनने से व्यक्ति का ईश्वर के साथ संबंध मजबूत होता है। “नैनों में नींद भर आई” भजन के माध्यम से हम भगवान के प्रति अपनी भक्ति और समर्पण को प्रकट करते हैं, जिससे हमारा आत्मा ईश्वर की उपस्थिति का अनुभव करती है और हमें एक गहरी शांति का अनुभव होता है।

आत्मा की शुद्धि

इस भजन के माध्यम से हमारी आत्मा शुद्ध होती है। जब हम भजन गाते हैं या सुनते हैं, तो हमारी आत्मा को एक अनोखी शांति और संतोष का अनुभव होता है, जो हमें आध्यात्मिक उन्नति की ओर ले जाता है।

आंतरिक शांति

“नैनों में नींद भर आई” भजन के माध्यम से हमें आंतरिक शांति मिलती है। यह भजन हमें हमारे जीवन की तमाम चिंताओं और उलझनों से मुक्त कर देता है और हमें आत्मिक शांति का अनुभव कराता है।

मानसिक लाभ

तनाव और चिंता का निवारण

भजन गाने या सुनने से हमारे मानसिक तनाव और चिंता में कमी आती है। “नैनों में नींद भर आई” भजन की मधुर धुन और गहन शब्द हमें मानसिक रूप से शांत और संतुलित करते हैं।

सकारात्मकता का विकास

इस भजन के माध्यम से हमें सकारात्मक ऊर्जा मिलती है। यह भजन हमें हमारे जीवन में सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाने की प्रेरणा देता है और हमें हमारे लक्ष्यों की ओर बढ़ने के लिए उत्साहित करता है।

एकाग्रता और ध्यान

भजन गाने से हमारी एकाग्रता और ध्यान में सुधार होता है। “नैनों में नींद भर आई” भजन गाने से हमारी मानसिक क्षमता बढ़ती है और हमें अपने कार्यों में अधिक ध्यान केंद्रित करने में मदद मिलती है।

शारीरिक लाभ

शारीरिक शांति और आराम

भजन गाने या सुनने से हमारे शरीर को शांति और आराम मिलता है। “नैनों में नींद भर आई” भजन की धुन और शब्द हमारे शरीर को आराम प्रदान करते हैं और हमारी थकान को दूर करते हैं।

श्वास-प्रणाली में सुधार

भजन गाने से हमारी श्वास-प्रणाली में सुधार होता है। “नैनों में नींद भर आई” भजन के नियमित गायन से हमारी श्वास लेने की क्षमता बढ़ती है और हमें श्वास संबंधित समस्याओं से राहत मिलती है।

शारीरिक स्वास्थ्य में सुधार

भजन गाने से हमारा शारीरिक स्वास्थ्य भी सुधारता है। यह भजन हमारे शरीर में रक्त संचार को बेहतर बनाता है और हमें स्वस्थ और ऊर्जावान बनाए रखता है।

सामाजिक लाभ

समाज में समरसता

“नैनों में नींद भर आई” भजन गाने से समाज में समरसता और एकता का भाव उत्पन्न होता है। यह भजन हमें सामाजिक बंधनों को मजबूत करने में मदद करता है और हमें एक दूसरे के प्रति सहानुभूति और प्रेम की भावना विकसित करने में सहायता करता है।

सामूहिक भजन

सामूहिक रूप से भजन गाने से सामूहिकता की भावना बढ़ती है। “नैनों में नींद भर आई” भजन के सामूहिक गायन से हम एक दूसरे के साथ जुड़ते हैं और हमारे बीच भाईचारे का भाव उत्पन्न होता है।

सांस्कृतिक संरक्षण

भजन गाने से हमारी सांस्कृतिक धरोहर का संरक्षण होता है। “नैनों में नींद भर आई” जैसे भजन हमारी सांस्कृतिक पहचान का हिस्सा हैं और हमें हमारी संस्कृति और परंपराओं से जोड़ते हैं।

आध्यात्मिक अभ्यास में सहायक

ध्यान और साधना में सहायता

भजन गाने से ध्यान और साधना में मदद मिलती है। “नैनों में नींद भर आई” भजन के माध्यम से हम ध्यान की गहराइयों तक पहुंच सकते हैं और आत्मिक उन्नति प्राप्त कर सकते हैं।

आध्यात्मिक ऊर्जा की वृद्धि

भजन गाने से हमारी आध्यात्मिक ऊर्जा में वृद्धि होती है। “नैनों में नींद भर आई” भजन के माध्यम से हमें आध्यात्मिक शक्ति मिलती है और हम हमारे जीवन के सभी पहलुओं में सकारात्मक बदलाव महसूस करते हैं।

ईश्वर की कृपा

भजन गाने से हमें ईश्वर की कृपा प्राप्त होती है। “नैनों में नींद भर आई” भजन के माध्यम से हम भगवान के प्रति अपनी भक्ति और समर्पण को प्रकट करते हैं और उनकी कृपा का अनुभव करते हैं।

मानसिक स्वास्थ के लिए सहायक

मानसिक संतुलन

भजन गाने से हमारा मानसिक संतुलन बना रहता है। “नैनों में नींद भर आई” भजन के माध्यम से हम मानसिक रूप से संतुलित और शांत रहते हैं, जो हमारे मानसिक स्वास्थ्य के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।

ध्यान और मानसिक शांति

भजन गाने से हमें ध्यान और मानसिक शांति मिलती है। “नैनों में नींद भर आई” भजन के माध्यम से हम मानसिक रूप से शांति और संतोष का अनुभव करते हैं, जो हमारे मानसिक स्वास्थ्य के लिए लाभकारी है।

सकारात्मक मानसिकता

भजन गाने से हमारी मानसिकता सकारात्मक रहती है। “नैनों में नींद भर आई” भजन के माध्यम से हम हमारे जीवन में सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाने की प्रेरणा प्राप्त करते हैं और हमें मानसिक रूप से मजबूत बनाते हैं।

“नैनों में नींद भर आई” भजन न केवल आध्यात्मिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह हमारे मानसिक, शारीरिक और सामाजिक स्वास्थ्य के लिए भी अत्यंत लाभकारी है। यह भजन हमें ईश्वर के साथ गहरा संबंध बनाने में मदद करता है, हमारी आत्मा को शुद्ध करता है, और हमें आंतरिक शांति और संतोष का अनुभव कराता है। भजन के माध्यम से हम तनाव और चिंता से मुक्त हो सकते हैं, सकारात्मकता और ध्यान की ओर अग्रसर हो सकते हैं, और हमारे शारीरिक स्वास्थ्य को बेहतर बना सकते हैं।

इस भजन के माध्यम से हम समाज में समरसता और सांस्कृतिक संरक्षण को बढ़ावा दे सकते हैं और हमारे जीवन को एक नई दिशा और ऊर्जा से भर सकते हैं। “नैनों में नींद भर आई” भजन का गायन हमारे जीवन के हर पहलू को सकारात्मक और संतुलित बनाता है, जिससे हम एक स्वस्थ, खुशहाल और समृद्ध जीवन जी सकते हैं।


“नैनो में नींद भर आई” भजन क्या है?

“नैनो में नींद भर आई” एक भजन है जो आध्यात्मिक और धार्मिक भावनाओं को व्यक्त करता है। यह भजन विशेष रूप से भक्ति और पूजा के अवसरों पर गाया जाता है और इसमें आत्मिक शांति और भगवान की भक्ति का अनुभव किया जाता है।

इस भजन के बोल क्या हैं?

“नैनो में नींद भर आई” भजन के बोल भगवान की भक्ति और उनके दिव्य रूप की महिमा का वर्णन करते हैं। इस भजन के बोल सुनने या पढ़ने के लिए आप धार्मिक संगीत वेबसाइट्स या भजन के वीडियो प्लेटफार्म्स पर जाकर देख सकते हैं।

इस भजन को कौन गाता है?

“नैनो में नींद भर आई” भजन को विभिन्न भजन गायक गाते हैं। विशेष गायक की जानकारी भजन के वीडियो विवरण में या धार्मिक संगीत एल्बम में मिल सकती है।

“नैनो में नींद भर आई” भजन का वीडियो कहाँ देख सकते हैं?

इस भजन का वीडियो आप प्रमुख वीडियो स्ट्रीमिंग प्लेटफार्म जैसे यूट्यूब पर देख सकते हैं। इसके अलावा, धार्मिक संगीत के एप्स और वेबसाइट्स पर भी इसे उपलब्ध हो सकता है।

इस भजन का उद्देश्य क्या है?

“नैनो में नींद भर आई” भजन का उद्देश्य भक्ति, समर्पण और आध्यात्मिक शांति को बढ़ावा देना है। यह भजन भक्तों को भगवान के प्रति अपनी श्रद्धा और प्रेम व्यक्त करने का एक माध्यम है।

इस भजन को गाने का सही समय क्या है?

“नैनो में नींद भर आई” भजन को आमतौर पर पूजा, भजन संध्या, या धार्मिक कार्यक्रमों के दौरान गाया जाता है। इसे सुबह या शाम के समय गाया जा सकता है जब भक्त शांति और ध्यान में होते हैं।

क्या इस भजन के कोई विशेष सांगीतिक या लिरिकल विशेषताएँ हैं?

हाँ, “नैनो में नींद भर आई” भजन की सांगीतिक विशेषताएँ इसकी मधुर धुन और भावुक लिरिक्स हैं जो भक्तों को एक आध्यात्मिक अनुभव प्रदान करती हैं। इसकी धुन और स्वर भक्तों के मन को शांति और समर्पण का अहसास कराते हैं।

क्या इस भजन का कोई लिखित रूप उपलब्ध है?

हाँ, “नैनो में नींद भर आई” भजन का लिखित रूप विभिन्न धार्मिक पुस्तकों, भजन संग्रहों, और वेबसाइट्स पर उपलब्ध हो सकता है। आप इसे भक्ति साहित्य या धार्मिक वेबसाइट्स पर प्राप्त कर सकते हैं।

गणनायकाय गणदेवताय गणाध्यक्षाय धीमहि (Gananaykay Gandevatay Ganadhyakshay Dheemahi)

गणनायकाय गणदेवताय गणाध्यक्षाय धीमहि (Gananaykay Gandevatay Ganadhyakshay Dheemahi) एक प्रसिद्ध मंत्र है जो भगवान गणेश की स्तुति में गाया जाता है। भगवान गणेश को हिन्दू धर्म में विघ्नहर्ता और मंगलमूर्ति के रूप में पूजनीय माना जाता है। वे बुद्धि, समृद्धि और सौभाग्य के देवता हैं और हर शुभ कार्य के प्रारंभ में उनकी आराधना की जाती है।
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  • गणनायकाय: जो गणों के नायक हैं।
  • गणदेवताय: जो गणों के देवता हैं।
  • गणाध्यक्षाय: जो गणों के अध्यक्ष हैं।
  • धीमहि: हम उनका ध्यान करते हैं।

भगवान गणेश का स्वरूप और उनका महत्व: भगवान गणेश की पूजा हर शुभ कार्य से पहले की जाती है क्योंकि वे विघ्नहर्ता हैं, अर्थात वे सभी बाधाओं को दूर करने वाले हैं। उनके चार हाथ होते हैं, जिनमें एक हाथ में पाश, दूसरे में अंकुश, तीसरे में मोदक और चौथे हाथ में आशीर्वाद मुद्रा होती है। उनका मुख हाथी का होता है और उनकी सवारी मूषक (चूहा) होती है।

गणेश चतुर्थी और अन्य त्यौहार: गणेश चतुर्थी भगवान गणेश का प्रमुख त्यौहार है, जो भारत के विभिन्न भागों में बड़े धूमधाम से मनाया जाता है। इस अवसर पर गणेश प्रतिमाओं की स्थापना की जाती है और दस दिनों तक विभिन्न धार्मिक अनुष्ठान और पूजा-अर्चना की जाती है। इस त्यौहार के दौरान भक्त गणेश जी के इस मंत्र का जप करते हैं और उनसे बुद्धि, समृद्धि और सफलता की कामना करते हैं।

सांस्कृतिक और धार्मिक महत्व: भगवान गणेश का मंत्र “गणनायकाय गणदेवताय गणाध्यक्षाय धीमहि” न केवल धार्मिक बल्कि सांस्कृतिक महत्व भी रखता है। यह मंत्र हमारी आस्था और भक्ति का प्रतीक है और इसे गाने से मन को शांति और सकारात्मक ऊर्जा मिलती है। यह मंत्र विशेषकर बच्चों को पढ़ाई में सफलता और बड़े लोगों को जीवन की कठिनाइयों से पार पाने में मदद करता है।

समाज में भगवान गणेश की प्रतिष्ठा: भगवान गणेश को हर व्यक्ति की दिनचर्या में महत्व दिया जाता है। उनकी मूर्तियाँ और चित्र लगभग हर घर और कार्यालय में पाए जाते हैं। वे न केवल धार्मिक बल्कि सांस्कृतिक और सामाजिक जीवन में भी गहरे से जुड़े हुए हैं। उनका यह मंत्र भक्तों को एकता और समृद्धि का संदेश देता है और जीवन में सकारात्मकता का संचार करता है।

इस प्रकार, “गणनायकाय गणदेवताय गणाध्यक्षाय धीमहि” मंत्र भगवान गणेश की स्तुति और आशीर्वाद प्राप्ति का एक महत्वपूर्ण माध्यम है। इसके माध्यम से भक्त भगवान गणेश की कृपा प्राप्त करते हैं और जीवन में सफलता और समृद्धि का अनुभव करते हैं।



  • हिंदी / संस्कृत
  • English

|| गणनायकाय गणदेवताय गणाध्यक्षाय धीमहि ||

गणनायकाय गणदेवताय गणाध्यक्षाय धीमहि ।
गुणशरीराय गुणमण्डिताय गुणेशानाय धीमहि ।
गुणातीताय गुणाधीशाय गुणप्रविष्टाय धीमहि ।
एकदंताय वक्रतुण्डाय गौरीतनयाय धीमहि ।
गजेशानाय भालचन्द्राय श्रीगणेशाय धीमहि ॥

गानचतुराय गानप्राणाय गानान्तरात्मने,
गानोत्सुकाय गानमत्ताय गानोत्सुकमनसे ।
गुरुपूजिताय गुरुदेवताय गुरुकुलस्थायिने,
गुरुविक्रमाय गुह्यप्रवराय गुरवे गुणगुरवे ।
गुरुदैत्यगलच्छेत्रे गुरुधर्मसदाराध्याय,
गुरुपुत्रपरित्रात्रे गुरुपाखण्डखण्डकाय ।


गीतसाराय गीततत्त्वाय गीतगोत्राय धीमहि,
गूढगुल्फाय गन्धमत्ताय गोजयप्रदाय धीमहि ।
गुणातीताय गुणाधीशाय गुणप्रविष्टाय धीमहि,
एकदंताय वक्रतुण्डाय गौरीतनयाय धीमहि ।
गजेशानाय भालचन्द्राय श्रीगणेशाय धीमहि ॥

ग्रन्थगीताय ग्रन्थगेयाय ग्रन्थान्तरात्मने,
गीतलीनाय गीताश्रयाय गीतवाद्यपटवे ।
गेयचरिताय गायकवराय गन्धर्वप्रियकृते,
गायकाधीनविग्रहाय गङ्गाजलप्रणयवते ।
गौरीस्तनन्धयाय गौरीहृदयनन्दनाय,
गौरभानुसुताय गौरीगणेश्वराय ।

गौरीप्रणयाय गौरीप्रवणाय गौरभावाय धीमहि,
गोसहस्राय गोवर्धनाय गोपगोपाय धीमहि ।
गुणातीताय गुणाधीशाय गुणप्रविष्टाय धीमहि,
एकदंताय वक्रतुण्डाय गौरीतनयाय धीमहि ।
गजेशानाय भालचन्द्राय श्रीगणेशाय धीमहि ॥

Gananaykay Gandevatay Ganadhyakshay Dheemahi

Gananaayakaay ganeshadevataay ganaadhyakshaay dheemahi॥
Gunashareeraay gunamanditaay guneshaanaay dheemahi॥
Gunateetaay gunaadhishaay gunapravishtaay dheemahi॥
Ekadantaay vajatundaay gaureetanyaay dheemahi॥
Gajeshanaay bhaalachandraay shreeganeshaay dheemahi॥

Ganachaturaay ganapraanaay gaanaantaraatmane,
Ganotsukaay gaanamattay ganotsukamanase॥
Gurupoojitaay gurudevataay gurukulasthaayine,
Guruvikramaay guhyapravaraay gurave gunagurave॥
Gurudaityagalachchhetre gurudharmasadaaraadhyaay,
Guruputraparitraatre gurupaakhandakhandakaay॥

Geetasaaraay geetatattvay geetagotraay dheemahi,
Gungulphaay gandhamaataay gojayapradaay dheemahi॥
Gunateetaay gunaadhishaay gunapravishtaay dheemahi॥
Ekadantaay vajatundaay gaureetanyaay dheemahi॥
Gajeshanaay bhaalachandraay shreeganeshaay dheemahi॥

Granthageetaay granthageyaay granthaantaraatmane,
Geetaleenaay geetaashrayaay geetavaadyapatave॥
Gaayacharitaay gaayakavaraay gandharvapriyakrte,
Gaayak adhinavigrahaay gangaajalapranayavate॥
Gaureestanandhaay gaureehrdayannandanaay,
Gauravabhaanasutaay gaureeganeshvaraay॥

Gaureepranyaay gaureepravaanaay gaurabhaavaay dheemahi,
Gosahasraay govardhanaay popagopaay dheemahi॥
Gunateetaay gunaadhishaay gunapravishtaay dheemahi॥
Ekadantaay vajatundaay gaureetanyaay dheemahi॥
Gajeshanaay bhaalachandraay shreeganeshaay dheemahi॥

Gananaykay Gandevatay Ganadhyakshay Dheemahi in English
Gananaykay Gandevatay Ganadhyakshay Dheemahi


गणनायकाय गणदेवताय गणाध्यक्षाय धीमहि के लाभ

गणनायकाय गणदेवताय गणाध्यक्षाय धीमहि मंत्र का जाप करने से अनेक लाभ प्राप्त होते हैं। यह मंत्र भगवान गणेश की स्तुति में गाया जाता है, जो विघ्नहर्ता और बुद्धि, समृद्धि, तथा सफलता के देवता हैं। इस मंत्र के नियमित जाप से भक्तों को कई आध्यात्मिक और भौतिक लाभ प्राप्त होते हैं। यहाँ कुछ प्रमुख लाभों का विवरण दिया जा रहा है:

मानसिक शांति और स्थिरता:

मंत्र का नियमित जाप करने से मन को शांति और स्थिरता मिलती है। यह तनाव और चिंता को दूर करने में सहायक होता है। मानसिक शांति के कारण व्यक्ति बेहतर निर्णय ले सकता है और जीवन की समस्याओं का सामना धैर्यपूर्वक कर सकता है।

बुद्धि और ज्ञान की प्राप्ति:

भगवान गणेश को बुद्धि और ज्ञान का प्रतीक माना जाता है। इस मंत्र का जाप करने से बुद्धि तीव्र होती है और स्मरण शक्ति में वृद्धि होती है। छात्र और विद्या-अध्ययन में लगे लोग इस मंत्र का जाप करके अपनी पढ़ाई में सफलता प्राप्त कर सकते हैं।

विघ्नों का नाश:

भगवान गणेश को विघ्नहर्ता कहा जाता है, अर्थात वे सभी बाधाओं को दूर करने वाले हैं। इस मंत्र का जाप करने से जीवन में आने वाले विघ्न और बाधाएँ दूर होती हैं और कार्य में सफलता प्राप्त होती है। विशेषकर नए कार्यों की शुरुआत में इस मंत्र का जाप अत्यंत शुभ माना जाता है।

समृद्धि और सुख-सम्पन्नता:

भगवान गणेश को समृद्धि और सुख-सम्पन्नता के देवता माना जाता है। इस मंत्र का नियमित जाप करने से घर में सुख-शांति और समृद्धि का वास होता है। आर्थिक स्थिति में सुधार होता है और जीवन में खुशहाली आती है।

सकारात्मक ऊर्जा और आत्मविश्वास:

मंत्र का जाप करने से सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और आत्मविश्वास में वृद्धि होती है। यह मंत्र व्यक्ति को आत्म-संयम और आत्म-विश्वास प्रदान करता है, जिससे वह जीवन के कठिन समय में भी दृढ़ बना रहता है।

आध्यात्मिक विकास:

भगवान गणेश का यह मंत्र व्यक्ति के आध्यात्मिक विकास में सहायक होता है। यह मंत्र साधक को ध्यान और साधना में गहराई प्रदान करता है और उसे आत्मज्ञान की ओर अग्रसर करता है।

परिवार और समाज में एकता:

इस मंत्र का जाप करने से परिवार और समाज में एकता और सौहार्द की भावना का विकास होता है। भगवान गणेश की कृपा से परिवार में प्रेम और सहयोग का वातावरण बनता है और सभी सदस्य मिलजुल कर रहते हैं।

रोगों से मुक्ति:

भगवान गणेश का यह मंत्र शारीरिक और मानसिक रोगों से मुक्ति दिलाने में भी सहायक होता है। इसके नियमित जाप से स्वास्थ्य में सुधार होता है और व्यक्ति ऊर्जा से भरा रहता है।

शुभता और मंगलकारी प्रभाव:

गणेश जी का यह मंत्र व्यक्ति के जीवन में शुभता और मंगलकारी प्रभाव लाता है। यह मंत्र हर कार्य में सफलता और शुभ फल की प्राप्ति कराता है।

ध्यान और मेडिटेशन में सहायता:

इस मंत्र का उच्चारण ध्यान और मेडिटेशन के समय करने से मन को एकाग्रता प्राप्त होती है और साधक गहरी ध्यान अवस्था में पहुँच सकता है।

इन सभी लाभों को प्राप्त करने के लिए “गणनायकाय गणदेवताय गणाध्यक्षाय धीमहि” मंत्र का नियमित जाप अत्यंत फलदायी होता है। यह मंत्र जीवन में सुख, शांति, समृद्धि और सफलता का मार्ग प्रशस्त करता है।

“गणनायकाय गणदेवताय गणाध्यक्षाय धीमहि” क्या है?

“गणनायकाय गणदेवताय गणाध्यक्षाय धीमहि” एक महत्वपूर्ण मंत्र है जो गणेश जी की पूजा और आराधना में उपयोग किया जाता है। यह मंत्र गणेश जी को गणनायक, गणदेवता, और गणाध्यक्ष के रूप में पूजा करता है और उनकी कृपा प्राप्त करने के लिए बोला जाता है।

“गणनायकाय गणदेवताय गणाध्यक्षाय धीमहि” का क्या अर्थ है?

इस मंत्र का अर्थ है:

गणनायकाय: गणों का प्रमुख, गणों का नायक।
गणदेवताय: गणेश जी, जो गणों के देवता हैं।
गणाध्यक्षाय: गणों के अध्यक्ष, गणों के संरक्षक।
धीमहि: हम ध्यान करते हैं।

इस प्रकार, मंत्र का मतलब है कि हम गणेश जी, जो गणों के नायक और देवता हैं, के प्रति श्रद्धा और ध्यान करते हैं।

इस मंत्र का जाप कब और कैसे किया जाता है?

इस मंत्र का जाप गणेश चतुर्थी, गणेश उत्सव, या अन्य विशेष धार्मिक अवसरों पर किया जाता है। इसका जाप नियमित रूप से सुबह या शाम के समय किया जा सकता है। जाप के दौरान, एकाग्रता और श्रद्धा के साथ इस मंत्र को बोलना चाहिए।

इस मंत्र का उपयोग क्यों किया जाता है?

इस मंत्र का उपयोग गणेश जी की पूजा और आराधना के दौरान किया जाता है। इसे बोलने से भक्त गणेश जी की कृपा प्राप्त करते हैं, जो विघ्नहर्ता (विघ्नों को हटाने वाले) हैं। यह मंत्र समर्पण और श्रद्धा का प्रतीक है और गणेश जी की शक्ति और आशीर्वाद को आकर्षित करता है।

इस मंत्र से क्या लाभ होता है?

इस मंत्र के जाप से निम्नलिखित लाभ हो सकते हैं:

विघ्नों से मुक्ति: गणेश जी की कृपा प्राप्त होती है, जिससे जीवन में आने वाली बाधाएँ और विघ्न दूर होते हैं।

सफलता: यह मंत्र सफलता, समृद्धि और उन्नति में सहायता कर सकता है।

ध्यान और शांति: मंत्र का जाप मानसिक शांति और ध्यान में सुधार करता है।

क्या इस मंत्र का कोई विशेष पूजा विधि है?

हां, इस मंत्र के जाप के दौरान विशेष पूजा विधि अपनाई जा सकती है:

स्वच्छता: पूजा स्थल और पूजा करने वाले व्यक्ति को स्वच्छ और पवित्र रखना चाहिए।

मंत्र जाप: मंत्र को नियमित रूप से जाप करें, 108 बार, विशेष रूप से गणेश चतुर्थी जैसे पर्वों पर।

अर्चना: गणेश जी की मूर्ति या चित्र के सामने बैठकर इस मंत्र का जाप करें और उन्हें फूल, फल, और दीपक अर्पित करें।

इस मंत्र की उपासना से कौन-कौन सी समस्याएँ दूर हो सकती हैं?

इस मंत्र की उपासना से निम्नलिखित समस्याएँ दूर हो सकती हैं:

जीवन की बाधाएँ और विघ्न: गणेश जी की पूजा से जीवन में आने वाली बाधाएँ और विघ्न दूर हो सकते हैं।

सामान्य समस्याएँ: व्यक्तिगत, पारिवारिक, या व्यवसायिक समस्याओं में सुधार हो सकता है।

धार्मिक उन्नति: यह मंत्र भक्ति और धार्मिक उन्नति में भी मदद कर सकता है।

संतान गोपाल स्तोत्रम् – Shri Santan Gopal Stotra 2025

संतान गोपाल स्तोत्र (Santan Gopal Stotra) उन विवाहित जोड़ों के लिए बहुत प्रसिद्ध है जिनके अच्छे बच्चे हैं। इसकी प्रत्येक पंक्ति में भगवान श्री कृष्ण से पुत्र प्राप्ति हेतु ऐसी प्रार्थना की गई है। यशोदा और देवकी के यशस्वी पुत्र श्री कृष्ण के महान गुणों का वर्णन बहुत ही सुंदर छंदों में किया गया है। पिता, माता, पितरों आदि का स्मरण करना। भगवान से पुत्र की मांग करते हुए प्रार्थना की गई है।

इस स्तोत्र का पाठ करने से न केवल संतान सुख की प्राप्ति होती है बल्कि वैवाहिक जीवन में प्रेम और सहयोग भी बढ़ता है। इसे नियमित रूप से श्रद्धापूर्वक पढ़ने से परिवार में सकारात्मक ऊर्जा आती है और सदस्यों के बीच रिश्ते मजबूत होते हैं। स्तोत्र भगवान कृष्ण के प्रति भक्ति और समर्पण की भावना को व्यक्त करता है, जो दम्पति को अपने जीवन में कठिनाइयों का सामना करने के लिए प्रेरित करता है।

संतान गोपाल स्तोत्र केवल एक स्तोत्र नहीं बल्कि एक दिव्य मार्गदर्शक है, जो बच्चों की खुशहाली और परिवार के सौहार्द के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।

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संतान गोपाल स्तोत्र in Hindi PDF

संतान गोपाल स्तोत्रम्

श्रीशं कमलपत्राक्षं देवकीनन्दनं हरिम् ।
सुतसम्प्राप्तये कृष्णं नमामि मधुसूदनम् ॥1॥

नमाम्यहं वासुदेवं सुतसम्प्राप्तये हरिम् ।
यशोदांकगतं बालं गोपालं नन्दनन्दनम् ॥2॥

अस्माकं पुत्रलाभाय गोविन्दं मुनिवन्दितम् ।
नमाम्यहं वासुदेवं देवकीनन्दनं सदा ॥3॥

गोपालं डिम्भकं वन्दे कमलापतिमच्युतम् ।
पुत्रसम्प्राप्तये कृष्णं नमामि यदुपुंगवम् ॥4॥

पुत्रकामेष्टिफलदं कंजाक्षं कमलापतिम् ।
देवकीनन्दनं वन्दे सुतसम्प्राप्तये मम ॥5॥

पद्मापते पद्मनेत्र पद्मनाभ जनार्दन ।
देहि में तनयं श्रीश वासुदेव जगत्पते ॥6॥

यशोदांकगतं बालं गोविन्दं मुनिवन्दितम् ।
अस्माकं पुत्रलाभाय नमामि श्रीशमच्युतम् ॥7॥

श्रीपते देवदेवेश दीनार्तिहरणाच्युत ।
गोविन्द मे सुतं देहि नमामि त्वां जनार्दन ॥8॥

भक्तकामद गोविन्द भक्तं रक्ष शुभप्रद ।
देहि मे तनयं कृष्ण रुक्मिणीवल्लभ प्रभो ॥9॥

रुक्मिणीनाथ सर्वेश देहि मे तनयं सदा ।
भक्तमन्दार पद्माक्ष त्वामहं शरणं गत: ॥10॥

देवकीसुत गोविन्द वासुदेव जगत्पते ।
देहि मे तनयं कृष्ण त्वामहं शरणं गत: ॥11॥

वासुदेव जगद्वन्द्य श्रीपते पुरुषोत्तम ।
देहि मे तनयं कृष्ण त्वामहं शरणं गत: ॥12॥

कंजाक्ष कमलानाथ परकारुरुणिकोत्तम ।
देहि मे तनयं कृष्ण त्वामहं शरणं गत: ॥13॥

लक्ष्मीपते पद्मनाभ मुकुन्द मुनिवन्दित ।
देहि मे तनयं कृष्ण त्वामहं शरणं गत: ॥14॥

कार्यकारणरूपाय वासुदेवाय ते सदा ।
नमामि पुत्रलाभार्थं सुखदाय बुधाय ते ॥15॥

राजीवनेत्र श्रीराम रावणारे हरे कवे ।
तुभ्यं नमामि देवेश तनयं देहि मे हरे ॥16॥

अस्माकं पुत्रलाभाय भजामि त्वां जगत्पते ।
देहि मे तनयं कृष्ण वासुदेव रमापते ॥17॥

श्रीमानिनीमानचोर गोपीवस्त्रापहारक ।
देहि मे तनयं कृष्ण वासुदेव जगत्पते ॥18॥

अस्माकं पुत्रसम्प्राप्तिं कुरुष्व यदुनन्दन ।
रमापते वासुदेव मुकुन्द मुनिवन्दित ॥19॥

वासुदेव सुतं देहि तनयं देहि माधव ।
पुत्रं मे देहि श्रीकृष्ण वत्सं देहि महाप्रभो ॥20॥

डिम्भकं देहि श्रीकृष्ण आत्मजं देहि राघव ।
भक्तमन्दार मे देहि तनयं नन्दनन्दन ॥21॥

नन्दनं देहि मे कृष्ण वासुदेव जगत्पते ।
कमलानाथ गोविन्द मुकुन्द मुनिवन्दित ॥22॥

अन्यथा शरणं नास्ति त्वमेव शरणं मम ।
सुतं देहि श्रियं देहि श्रियं पुत्रं प्रदेहि मे ॥23॥

यशोदास्तन्यपानज्ञं पिबन्तं यदुनन्दनम् ।
वन्देsहं पुत्रलाभार्थं कपिलाक्षं हरिं सदा ॥24॥

नन्दनन्दन देवेश नन्दनं देहि मे प्रभो ।
रमापते वासुदेव श्रियं पुत्रं जगत्पते ॥25॥

पुत्रं श्रियं श्रियं पुत्रं पुत्रं मे देहि माधव ।
अस्माकं दीनवाक्यस्य अवधारय श्रीपते ॥26॥

गोपालडिम्भ गोविन्द वासुदेव रमापते ।
अस्माकं डिम्भकं देहि श्रियं देहि जगत्पते ॥27॥

मद्वांछितफलं देहि देवकीनन्दनाच्युत ।
मम पुत्रार्थितं धन्यं कुरुष्व यदुनन्दन ॥28॥

याचेsहं त्वां श्रियं पुत्रं देहि मे पुत्रसम्पदम् ।
भक्तचिन्तामणे राम कल्पवृक्ष महाप्रभो ॥29॥

आत्मजं नन्दनं पुत्रं कुमारं डिम्भकं सुतम् ।
अर्भकं तनयं देहि सदा मे रघुनन्दन ॥30॥

वन्दे सन्तानगोपालं माधवं भक्तकामदम् ।
अस्माकं पुत्रसम्प्राप्त्यै सदा गोविन्दच्युतम् ॥31॥

ऊँकारयुक्तं गोपालं श्रीयुक्तं यदुनन्दनम् ।
कलींयुक्तं देवकीपुत्रं नमामि यदुनायकम् ॥32॥

वासुदेव मुकुन्देश गोविन्द माधवाच्युत ।
देहि मे तनयं कृष्ण रमानाथ महाप्रभो ॥33॥

राजीवनेत्र गोविन्द कपिलाक्ष हरे प्रभो ।
समस्तकाम्यवरद देहि मे तनयं सदा ॥34॥

अब्जपद्मनिभं पद्मवृन्दरूप जगत्पते ।
देहि मे वरसत्पुत्रं रमानायक माधव ॥35॥

नन्दपाल धरापाल गोविन्द यदुनन्दन ।
देहि मे तनयं कृष्ण रुक्मिणीवल्लभ प्रभो ॥36॥

दासमन्दार गोविन्द मुकुन्द माधवाच्युत ।
गोपाल पुण्डरीकाक्ष देहि मे तनयं श्रियम् ॥37॥

यदुनायक पद्मेश नन्दगोपवधूसुत ।
देहि मे तनयं कृष्ण श्रीधर प्राणनायक ॥38॥

अस्माकं वांछितं देहि देहि पुत्रं रमापते ।
भगवन् कृष्ण सर्वेश वासुदेव जगत्पते ॥39॥

रमाहृदयसम्भार सत्यभामामन:प्रिय ।
देहि मे तनयं कृष्ण रुक्मिणीवल्लभ प्रभो ॥40॥

चन्द्रसूर्याक्ष गोविन्द पुण्डरीकाक्ष माधव ।
अस्माकं भाग्यसत्पुत्रं देहि देव जगत्पते ॥41॥

कारुण्यरूप पद्माक्ष पद्मनाभसमर्चित ।
देहि मे तनयं कृष्ण देवकीनन्दनन्दन ॥42॥

देवकीसुत श्रीनाथ वासुदेव जगत्पते ।
समस्तकामफलद देहि मे तनयं सदा ॥43॥

भक्तमन्दार गम्भीर शंकराच्युत माधव ।
देहि मे तनयं गोपबालवत्सल श्रीपते ॥44॥

श्रीपते वासुदेवेश देवकीप्रियनन्दन ।
भक्तमन्दार मे देहि तनयं जगतां प्रभो ॥45॥

जगन्नाथ रमानाथ भूमिनाथ दयानिधे ।
वासुदेवेश सर्वेश देहि मे तनयं प्रभो ॥46॥

श्रीनाथ कमलपत्राक्ष वासुदेव जगत्पते ।
देहि मे तनयं कृष्ण त्वामहं शरणं गत: ॥47॥

दासमन्दार गोविन्द भक्तचिन्तामणे प्रभो ।
देहि मे तनयं कृष्ण त्वामहं शरणं गत: ॥48॥

गोविन्द पुण्डरीकाक्ष रमानाथ महाप्रभो ।
देहि मे तनयं कृष्ण त्वामहं शरणं गत: ॥49॥

श्रीनाथ कमलपत्राक्ष गोविन्द मधुसूदन ।
मत्पुत्रफलसिद्धयर्थं भजामि त्वां जनार्दन ॥50॥

स्तन्यं पिबन्तं जननीमुखाम्बुजं
विलोक्य मन्दस्मितमुज्ज्वलांगम् ।
स्पृशन्तमन्यस्तनमंगुलीभि-
र्वन्दे यशोदांकगतं मुकुन्दम् ॥51॥

याचेsहं पुत्रसन्तानं भवन्तं पद्मलोचन ।
देहि मे तनयं कृष्ण त्वामहं शरणं गत: ॥52॥

अस्माकं पुत्रसम्पत्तेश्चिन्तयामि जगत्पते ।
शीघ्रं मे देहि दातव्यं भवता मुनिवन्दित ॥53॥

वासुदेव जगन्नाथ श्रीपते पुरुषोत्तम ।
कुरु मां पुत्रदत्तं च कृष्ण देवेन्द्रपूजित ॥54॥

कुरु मां पुत्रदत्तं च यशोदाप्रियनन्दन ।
मह्यं च पुत्रसंतानं दातव्यं भवता हरे ॥55॥

वासुदेव जगन्नाथ गोविन्द देवकीसुत ।
देहि मे तनयं राम कौसल्याप्रियनन्दन ॥56॥

पद्मपत्राक्ष गोविन्द विष्णो वामन माधव ।
देहि मे तनयं सीताप्राणनायक राघव ॥57॥

कंजाक्ष कृष्ण देवेन्द्रमण्डित मुनिवन्दित ।
लक्ष्मणाग्रज श्रीराम देहि मे तनयं सदा ॥58॥

देहि मे तनयं राम दशरथप्रियनन्दन ।
सीतानायक कंजाक्ष मुचुकुन्दवरप्रद ॥59॥

विभीषणस्य या लंका प्रदत्ता भवता पुरा ।
अस्माकं तत्प्रकारेण तनयं देहि माधव ॥60॥

भवदीयपदाम्भोजे चिन्तयामि निरन्तरम् ।
देहि मे तनयं सीताप्राणवल्लभ राघव ॥61॥

राम मत्काम्यवरद पुत्रोत्पत्तिफलप्रद ।
देहि मे तनयं श्रीश कमलासनवन्दित ॥62॥

राम राघव सीतेश लक्ष्मणानुज देहि मे ।
भाग्यवत्पुत्रसंतानं दशरथात्मज श्रीपते ॥63॥

देवकीगर्भसंजात यशोदाप्रियनन्दन ।
देहि मे तनयं राम कृष्ण गोपाल माधव ॥64॥

कृष्ण माधव गोविन्द वामनाच्युत शंकर ।
देहि मे तनयं श्रीश गोपबालकनायक ॥65॥

गोपबालमहाधन्य गोविन्दाच्युत माधव ।
देहि मे तनयं कृष्ण वासुदेव जगत्पते ॥66॥

दिशतु दिशतु पुत्रं देवकीनन्दनोsयं
दिशतु दिशतु शीघ्रं भाग्यवत्पुत्रलाभम् ।
दिशति दिशतु श्रीशो राघवो रामचन्द्रो
दिशतु दिशतु पुत्रं वंशविस्तारहेतो: ॥67॥

दीयतां वासुदेवेन तनयो मत्प्रिय: सुत: ।
कुमारो नन्दन: सीतानायकेन सदा मम ॥68॥

राम राघव गोविन्द देवकीसुत माधव ।
देहि मे तनयं श्रीश गोपबालकनायक ॥69॥

वंशविस्तारकं पुत्रं देहि मे मधुसूदन ।
सुतं देहि सुतं देहि त्वामहं शरणं गत: ॥70॥

ममाभीष्टसुतं देहि कंसारे माधवाच्युत ।
सुतं देहि सुतं देहि त्वामहं शरणं गत: ॥71॥

चन्द्रार्ककल्पपर्यन्तं तनयं देहि माधव ।
सुतं देहि सुतं देहि त्वामहं शरणं गत: ॥72॥

विद्यावन्तं बुद्धिमन्तं श्रीमन्तं तनयं सदा ।
देहि मे तनयं कृष्ण देवकीनन्दन प्रभो ॥73॥

नमामि त्वां पद्मनेत्र सुतलाभाय कामदम् ।
मुकुन्दं पुण्डरीकाक्षं गोविन्दं मधुसूदनम् ॥74॥

भगवन कृष्ण गोविन्द सर्वकामफलप्रद ।
देहि मे तनयं स्वामिंस्त्वामहं शरणं गत: ॥75॥

स्वामिंस्त्वं भगवन् राम कृष्ण माधव कामद ।
देहि मे तनयं नित्यं त्वामहं शरणं गत: ॥76॥

तनयं देहि गोविन्द कंजाक्ष कमलापते ।
सुतं देहि सुतं देहि त्वामहं शरणं गत: ॥77॥

पद्मापते पद्मनेत्र प्रद्युम्नजनक प्रभो ।
सुतं देहि सुतं देहि त्वामहं शरणं गत: ॥78॥

शंखचक्रगदाखड्गशांर्गपाणे रमापते ।
देहि मे तनयं कृष्ण त्वामहं शरणं गत: ॥79॥

नारायण रमानाथ राजीवपत्रलोचन ।
सुतं मे देहि देवेश पद्मपद्मानुवन्दित ॥80॥

राम राघव गोविन्द देवकीवरनन्दन ।
रुक्मिणीनाथ सर्वेश नारदादिसुरार्चित ॥81॥

देवकीसुत गोविन्द वासुदेव जगत्पते ।
देहि मे तनयं श्रीश गोपबालकनायक ॥82॥

मुनिवन्दित गोविन्द रुक्मिणीवल्लभ प्रभो ।
देहि मे तनयं कृष्ण त्वामहं शरणं गत: ॥83॥

गोपिकार्जितपंकेजमरन्दासक्तमानस ।
देहि मे तनयं कृष्ण त्वामहं शरणं गत: ॥84॥

रमाहृदयपंकेजलोल माधव कामद ।
ममाभीष्टसुतं देहि त्वामहं शरणं गत: ॥85॥

वासुदेव रमानाथ दासानां मंगलप्रद ।
देहि मे तनयं कृष्ण त्वामहं शरणं गत: ॥86॥

कल्याणप्रद गोविन्द मुरारे मुनिवन्दित ।
देहि मे तनयं कृष्ण त्वामहं शरणं गत: ॥87॥

पुत्रप्रद मुकुन्देश रुक्मिणीवल्लभ प्रभो ।
देहि मे तनयं कृष्ण त्वामहं शरणं गत: ॥88॥

पुण्डरीकाक्ष गोविन्द वासुदेव जगत्पते ।
देहि मे तनयं कृष्ण त्वामहं शरणं गत: ॥89॥

दयानिधे वासुदेव मुकुन्द मुनिवन्दित ।
देहि मे तनयं कृष्ण त्वामहं शरणं गत: ॥90॥

पुत्रसम्पत्प्रदातारं गोविन्दं देवपूजितम् ।
वन्दामहे सदा कृष्णं पुत्रलाभप्रदायिनम् ॥91॥

कारुण्यनिधये गोपीवल्लभाय मुरारये ।
नमस्ते पुत्रलाभार्थं देहि मे तनयं विभो ॥92॥

नमस्तस्मै रमेशाय रुक्मिणीवल्लभाय ते ।
देहि मे तनयं श्रीश गोपबालकनायक ॥93॥

नमस्ते वासुदेवाय नित्यश्रीकामुकाय च ।
पुत्रदाय च सर्पेन्द्रशायिने रंगशायिने ॥94॥

रंगशायिन् रमानाथ मंगलप्रद माधव ।
देहि मे तनयं श्रीश गोपबालकनायक ॥95॥

दासस्य मे सुतं देहि दीनमन्दार राघव ।
सुतं देहि सुतं देहि पुत्रं देहि रमापते ॥96॥

यशोदातनयाभीष्टपुत्रदानरत: सदा ।
देहि मे तनयं कृष्ण त्वामहं शरणं गत: ॥97॥

मदिष्टदेव गोविन्द वासुदेव जनार्दन ।
देहि मे तनयं कृष्ण त्वामहं शरणं गत: ॥98॥

नीतिमान् धनवान् पुत्रो विद्यावांश्च प्रजायते ।
भगवंस्त्वत्कृपायाश्च वासुदेवेन्द्रपूजित ॥99॥

य: पठेत् पुत्रशतकं सोsपि सत्पुत्रवान् भवेत् ।
श्रीवासुदेवकथितं स्तोत्ररत्नं सुखाय च ॥100॥

जपकाले पठेन्नित्यं पुत्रलाभं धनं श्रियम् ।
ऎश्वर्यं राजसम्मानं सद्यो याति न संशय: ॥101॥
॥ इति सन्तानगोपालस्तोत्रं सम्पूर्णम् ॥

यह संतान गोपाल स्तोत्र संतान और पुत्र प्राप्ति के लिए प्रसिद्ध है


Santan Gopal Stotra in Hindi PDF

Santan Gopal Stotra

Shreeshan Kamalapatraakshan Devakeenandanan Harim॥
Sutasampraaptaye Krshnan Namaami Madhusoodanam ॥1॥

Namaamyahan Vaasudevan Sutasampraaptaye Harim॥
Yashodaankagatan Baalan Gopaalan Nandanandanam ॥2॥

Asmaakan Putralaabhaay Govindan Munivanditam॥
Namaamyahan Vaasudevan Devakeenandanan Sada ॥3॥

Gopaalan Dimbakan Vande Kamalaapatimachyutam॥
Putrasampraaptaye Krshnan Namaami Yadupungavam ॥4॥

Putrakaameshtiphaladan Kanjaakshan Kamalaapatim॥
Devakeenandanan Vande Sutasampraaptaye Mam ॥5॥

Padmaapate Padmanetr Padmanaabh Janaardan॥
Dehi Mein Tanyan Shreesh Vaasudev Jagatpate ॥6॥

Yashodaankagatan Baalan Govindan Munivanditam॥
Asmaakan Putralaabhaay Namaami Shreeshamaachyutam ॥7॥

Shreepate Devadevesh Deenartiharanachyut॥
Govind Me Sutan Dehi Namaami Tvan Janaardan ॥8॥

Bhaktakaamad Govind Bhaktan Raksh Shubhaprad॥
Dehi Me Tanayan Krshn Rukmineevallabh Prabho ॥9॥

Rukmineenaath Sarvesh Dehi Me Tanyan Sada॥
Bhaktamandar Padmaaksh Tvaamahan Sharanan Gat: ॥10॥

Devakeesut Govind Vaasudev Jagatpate॥
Dehi Me Tanyan Krshn Tvaamahan Sharanan Gat: ॥11॥

Vaasudev Jagadvandy Shreepate Purooshottam॥
Dehi Me Tanyan Krshn Tvaamahan Sharanan Gat: ॥12॥

Kanjaaksh Kamalaanaath Parakaarunikottam॥
Dehi Me Tanayan Krshn Tvaamahan Sharanan Gat: ॥13॥

Lakshmeepate Padmanaabh Mukund Munivandit॥
Dehi Me Tanyan Krshn Tvaamahan Sharanan Gat: ॥14॥

Kaaryakaranaroopaay Vaasudevaay Te Sada॥
Namaami Putralaabhaarthan Sukhadaay Budhaay Te ॥15॥

Raajeevanetr Shreeraam Raavanaare Hare Keve॥
Tubhyan Namaami Devesh Tanayan Dehi Me Hare ॥16॥

Asmaakan Putralaabhaay Bhajaami Tvaan Jagatpate॥
Dehi Me Tanayan Krshn Vaasudev Raamapate ॥17॥

Shreemaanineemaanachor Gopeevastropahaarak॥
Dehi Me Tanayan Krshn Vaasudev Jagatpate ॥18॥

Asmaakan Putrasampraaptin Kurushav Yadunnandan॥
Raamapate Vaasudev Mukund Munivandit ॥19॥

Vaasudev Sutan Dehi Tanayan Dehi Maadhav॥
Putran Me Dehi Shreekrshn Vatsan Dehi Mahaaprabho ॥20॥

Dimbakan Dehi Shreekrshn Aatmajan Dehi Raaghav॥
Bhaktamandar Me Dehi Tanyan Nandanandan ॥21॥

Nandanan Dehi Me Krshn Vaasudev Jagatpate॥
Kamalaanaath Govind Mukund Munivandit॥22॥

Anyatha Sharanan Naasti Tvamev Sharanan Mam॥
Sutan Dehi Shriyan Dehi Shriyan Putran Pradehi Me॥23॥

Yashodaastanyapagyan Pibantan Yadunnandanam॥
Vandeshaan Putralaabhaarthan Kapilaakshan Harin Sada ॥24॥

Nandanandan Devesh Nandanan Dehi Me Prabho॥
Raamapate Vaasudev Shreeyan Putran Jagatpate ॥25॥

Putran Shriyan Shriyan Putran Putran Me Dehi Maadhav॥
Asmaakan Deenavakyaasy Avadharaay Shreepate ॥26॥

Gopaaladimb Govind Vaasudev Raamapate॥
Asmaakan Dimbakan Dehi Shriyan Dehi Jagatpate ॥27॥

Madvaanchhitaphalan Dehi Devakeenandanaachyut॥
Mam Putraarthitan Dhanyan Kurushav Yadunnandan ॥28॥

Yacheshaan Tvaan Shriyan Putran Dehi Me Putrasampadaam॥
Bhaktachintaamane Raam Kalpavrksh Mahaaprabho ॥29॥

Aatmajan Nandanan Putran Kumaaran Dimbakan Sutam॥
Arbhakan Tanayan Dehi Sada Me Raghunandan ॥30॥

Vande Santaanagopaalan Maadhavan Bhaktakaamadam॥
Asmaakan Putrasampraaptyai Sada Govindachyutam ॥31॥

Oonkaarayuktan Gopaalan Shreeyuktan Yadunnandanam॥
Kleenyuktan Devakeeputran Namaami Yadunaayakam ॥32॥

Vaasudev Mukundesh Govind Maadhavaachyut॥
Dehi Me Tanyan Krshn Raamanaath Mahaaprabho ॥33॥

Raajeevanetr Govind Kapilaaksh Hare Prabho॥
Samagrakaamyavarad Dehi Me Tanyan Sada ॥34॥

Abjapadmanibhan Padmavrndaroop Jagatpate॥
Dehi Me Varasatputran Raamanaayak Maadhav ॥35॥

Nandapaal Dharapaal Govind Yadunnandan॥
Dehi Me Tanayan Krshn Rukmineevallabh Prabho ॥36॥

Dashamandar Govind Mukund Maadhavaachyut॥
Gopaal Pundareekaaksh Dehi Me Tanayan Shriyamam ॥37॥

Yadunaayak Padmesh Nandagopavadhoosut॥
Dehi Me Tanyan Krshn Shreedhar Praananaayak ॥38॥

Asmaakan Sooryan Dehi Dehi Putran Raamapate॥
Bhagavaan Krshn Sarvesh Vaasudev Jagatpate ॥39॥

Raamahrdayasambhaar Satyabhaamaaman:Priy॥
Dehi Me Tanyan Krshn Rukmineevallabh Prabho ॥40॥

Chandrasooryaaksh Govind Pundareekaaksh Maadhav॥
Asmaakan Bhaagyasatputran Dehi Dev Jagatpate ॥41॥

Karunyaroop Padmaaksh Padmanaabhasamarchit॥
Dehi Me Tanyan Krshn Devakeenandanandan ॥42॥

Devakeesut Shreenaath Vaasudev Jagatpate॥
Samagrakaamaphalad Dehi Me Tanyan Sada ॥43॥

Bhaktamandaar Utsuk Shankarachyut Maadhav॥
Dehi Me Tanyan Gopaalavatsal Shreepate ॥44॥

Shreepate Vaasudevesh Devakeepriyandan॥
Bhaktamandar Me Dehi Tanyan Jagataan Prabho ॥45॥

Raamanaath Jagannaathanaath Bhoominaath Dayaanidhe॥
Vaasudevesh Sarvesh Dehi Me Tanyan Prabho ॥46॥

Shreenaath Kamalapatraaksh Vaasudev Jagatpate॥
Dehi Me Tanayan Krshn Tvaamahan Sharanan Gat: ॥47॥

Dashamandar Govind Bhaktachintaamaane Prabho॥
Dehi Me Tanyan Krshn Tvaamahan Sharanan Gat: ॥48॥

Govind Pundareekaaksh Raamanaath Mahaaprabho॥
Dehi Me Tanayan Krshn Tvaamahan Sharanan Gat: ॥49॥

Shreenaath Kamalapatraaksh Govind Madhusoodan॥
Matputraphalasiddhayarthan Bhajaami Tvaan Janaardan ॥50॥

Saattyan Pibantan Jannimukhaambujan
Viloky Mandasmitamujvalaangam॥
Sprshaantamanyastanamanguleebhi-
Ravande Yashodaankagatan Mukundam ॥51॥

Yacheshaan Putrasantaanan Bhavantan Padmalochan॥
Dehi Me Tanayan Krshn Tvaamahan Sharanan Gat: ॥52॥

Asmaakan Putrasampatteshchintayaami Jagatpate॥
Sheeghran Me Dehi Daatavyan Bhavata Munivandit ॥53॥

Vaasudev Jagannaath Shreepate Purooshottam॥
Kuru Maan Putradattan Ch Krshn Devendrapoojit ॥54॥

Kuru Maan Putradattan Ch Yashodaapriyannandan॥
Mahyan Ch Putrasantaanaan Daatavyan Bhavata Hare ॥55॥

Vaasudev Jagannaath Govind Devakeesut॥
Dehi Me Tanyan Raam Kaushalyaapriyannandan ॥56॥

Padmapatraaksh Govind Vishnu Vaaman Maadhav॥
Dehi Me Tanyan Seetaapraananaayak Raaghav ॥57॥

Kanjaaksh Krshn Devendramandit Munivandit॥
Lakshmanaagraj Shreeraam Dehi Me Tanyan Sada ॥58॥

Dehi Me Tanyan Raam Janmotsavapriyandan॥
Seetaanaayak Kanjaaksh Muchukundavaraprad ॥59॥

Vibheeshanasy Ya Lanka Pradatta Bhavata Pura॥
Asmaakan Tatprakaaren Tanayan Dehi Maadhav ॥60॥

Bhavadyapadaamabhoje Chintayaami Saambarmam॥
Dehi Me Tanayan Seetaapraanavallabh Raaghav ॥61॥

Raam Matkamyavarad Putrotpattiphalaprad॥
Dehi Me Tanayan Shreesh Kamalaasanavandit ॥62॥

Raam Raaghav Seetesh Lakshmanaanuj Dehi Me॥
Bhaagyavatputrasantaanan Dasharathaatmaj Shreepate ॥63॥

Devakeegarbhasangat Yashodaapriyandan॥
Dehi Me Tanyan Raam Krshn Gopaal Maadhav॥64॥

Krshn Maadhav Govind Vaamanaachyut Shankar॥
Dehi Me Tanayan Shreesh Gopaalabaalakanaayak ॥65॥

Gopabaalamahaadhan Govindyaachyut Maadhav॥
Dehi Me Tanyan Krshn Vaasudev Jagatpate ॥66॥

Dishtu Dishtu Putran Devakeenandanosyaam
Dishtu Dishtu Sheeghran Bhaagyavatputralaabham॥
Dishtati Dishtu Shreesho Raaghavo Raamachandro
Dishtu Dishtu Putran Vanshavistaraheto: ॥67॥

Deeyataan Vaasudeven Tanayo Matapriyah Sutah॥
Kumaaro Nandan: Seetaanaayaken Sada Mam ॥68॥

Raam Raaghav Govind Devakeesut Maadhav॥
Dehi Me Tanayan Shreesh Gopaalabaalakanaayak ॥69॥

Vanshavistarakan Putran Dehi Me Madhusoodan॥
Sutan Dehi Sutan Dehi Tvaamahan Sharanan Gat: ॥70॥

Mamaabhishtasutan Dehi Kansaare Maadhavaachyut॥
Sutan Dehi Sutan Dehi Tvaamahan Sharanan Gat: ॥71॥

Chandraarkakalpaparantyan Tanayan Dehi Maadhav॥
Sutan Dehi Sutan Dehi Tvaamahan Sharanan Gat: ॥72॥

Vidyaavantan Buddhimantan Shreemantan Tanayan Sada॥
Dehi Me Tanayan Krshn Devakeenandan Prabho ॥73॥

Namaami Tvaan Padmanetr Sutalaabhaay Kaamadam॥
Mukundan Pundareekaakshan Govindan Madhusoodanam ॥74॥

Bhagavaan Krshn Govind Sarvakaamaphalaprad॥
Dehi Me Tanayan Svaameenstvamahan Sharanan Gat: ॥75॥

Svaameentvan Bhagavaan Raam Krshn Maadhav Kaamad॥
Dehi Me Tanyan Nityan Tvaamahan Sharanan Gat: ॥76॥

Tanayan Dehi Govind Kanjaaksh Kamalaapate॥
Sutan Dehi Sutan Dehi Tvaamahan Sharanan Gat: ॥77॥

Padmaapate Padmanetr Pradyumnajanak Prabho॥
Sutan Dehi Sutan Dehi Tvaamahan Sharanan Gat: ॥78॥

Shankhachakragadakhadgashaangarapaane Ramaapate॥
Dehi Me Tanayan Krshn Tvaamahan Sharanan Gat: ॥79॥

Naaraayanaraamanaath Raajeevapatraalochan॥
Sutan Me Dehi Devesh Padmapadmanuvandit ॥80॥

Raam Raaghav Govind Devakeevaranandan॥
Rukmineenaath Sarvesh Naaradaadisuraarchit ॥81॥

Devakeesut Govind Vaasudev Jagatpate॥
Dehi Me Tanyan Shreesh Gopaalabaalakanaayak ॥82॥

Munivandit Govind Rukmineevallabh Prabho॥
Dehi Me Tanayan Krshn Tvaamahan Sharanan Gat: ॥83॥

Gopeekaarjitapankejamarandaasaktamaanas॥
Dehi Me Tanyan Krshn Tvaamahan Sharanan Gat: ॥84॥

Raamahrdayapankejalol Maadhav Kaamad॥
Mamabheeshtasutan Dehi Tvaamahan Sharanan Gat: ॥85॥

Vaasudev Raamanaath Daasaanaan Mangalaprad॥
Dehi Me Tanyan Krshn Tvaamahan Sharanan Gat: ॥86॥

Kalyaanaprad Govind Muraare Munivandit॥
Dehi Me Tanayan Krshn Tvaamahan Sharanan Gat: ॥87॥

Putraprad Mukundesh Rukmineevallabh Prabho॥
Dehi Me Tanayan Krshn Tvaamahan Sharanan Gat: ॥88॥

Pundareekaaksh Govind Vaasudev Jagatpate॥
Dehi Me Tanayan Krshn Tvaamahan Sharanan Gat: ॥89॥

Dayaanidhe Vaasudev Mukund Munivandit॥
Dehi Me Tanayan Krshn Tvaamahan Sharanan Gat: ॥90॥

Putrasampatpradaataaran Govindan Devapoojitam॥
Vandamahe Sada Krshnan Putralaabhapradaayinam ॥91॥

Karunyanidhaye Gopeevallabhaay Muraare॥
Namaste Putralaabhaarthan Dehi Me Tanyan Vibho ॥92॥

Namastasmai Raamaay Rukmineevallabhaay Te॥॥
Dehi Me Tanyan Shreesh Gopaalabaalakanaayak ॥93॥

Namaste Vaasudevaay Nityashreekaamukaay Ch॥
Putradaay Ch Sarpendrashaayine Rangashaayine ॥94॥

Rangashaayin Raamanaath Mangalaprad Maadhav॥
Dehi Me Tanyan Shreesh Gopaalabaalakanaayak ॥95॥

Daasasy Me Sutan Dehi Deenamandar Raaghav॥
Sutan Dehi Sutan Dehi Putran Dehi Raamapate ॥96॥

Yashodaatanayaabhishtaputradaanarat: Sada॥
Dehi Me Tanayan Krshn Tvaamahan Sharanan Gat: ॥97॥

Madadev Govind Vaasudev Janaardan॥
Dehi Me Tanayan Krshn Tvaamahan Sharanan Gat: ॥98॥

Neetimaanan Dhanvaan Putro Vidyaavaanshch Prajaayate॥
Bhagavanstatvatkrpaayaashch Vaasudevendrapoojit ॥99॥

Ya: Pathet Putrashatakan Sospi Satputravaan Bhavet॥
Shreevaasudevakathitan Stotraratnan Sukhaay Ch ॥100॥

Japakaale Patthennityan Putralaabhan Dhanan Shriyam॥
Aishvaryan Raajasammaanan Sadayo Yaati Na Sanshayah ॥101॥
॥ Iti Santaanagopaalastotran Sampoornam ॥

Sant Gopaal Stotram | Putrapraapti Mantra

संतान गोपाल स्तोत्र in Hindi PDF

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संतान गोपाल स्तोत्र के पाठ के कई आध्यात्मिक और पारिवारिक लाभ माने जाते हैं, विशेष रूप से उन दंपत्तियों के लिए जो संतान प्राप्ति की इच्छा रखते हैं। यहां संतान गोपाल स्तोत्र के प्रमुख फायदे दिए गए हैं:

संतान प्राप्ति में सहायता:

संतान गोपाल स्तोत्र का नियमित पाठ निसंतान दंपत्तियों के लिए संतान प्राप्ति के मार्ग को प्रशस्त करता है। इस स्तोत्र में भगवान श्रीकृष्ण के बाल रूप से प्रार्थना की जाती है, जिससे दंपतियों को योग्य और उत्तम संतान का आशीर्वाद प्राप्त होता है।

संतान की दीर्घायु और स्वास्थ्य:

यह स्तोत्र संतान के अच्छे स्वास्थ्य, दीर्घायु, और सुखमय जीवन के लिए अत्यंत लाभकारी माना जाता है। इसका पाठ संतान के शारीरिक और मानसिक विकास में सहायक होता है।

परिवार में सुख-शांति और समृद्धि:

संतान गोपाल स्तोत्र का पाठ करने से परिवार में शांति, सामंजस्य, और समृद्धि का वातावरण बनता है। यह परिवार के सदस्यों के बीच आपसी प्रेम और सहयोग को भी बढ़ाता है।

नकारात्मक शक्तियों से रक्षा:

इस स्तोत्र का नियमित पाठ परिवार और संतान को नकारात्मक ऊर्जा और बुरी शक्तियों से बचाने में सहायक माना जाता है। भगवान श्रीकृष्ण की कृपा से जीवन में आने वाली बाधाओं और समस्याओं से छुटकारा मिलता है।

धार्मिक और मानसिक शांति:

संतान गोपाल स्तोत्र के पाठ से मानसिक शांति और स्थिरता प्राप्त होती है। यह दंपतियों को धैर्य, विश्वास, और भक्ति के साथ जीवन में आने वाली कठिनाइयों का सामना करने की शक्ति प्रदान करता है।

ईश्वर के प्रति भक्ति और श्रद्धा में वृद्धि:

इस स्तोत्र का पाठ व्यक्ति की भगवान श्रीकृष्ण के प्रति भक्ति और समर्पण को और गहरा बनाता है। भगवान के बाल रूप गोपाल की महिमा का स्मरण करते हुए, व्यक्ति में ईश्वर के प्रति अटूट आस्था और श्रद्धा उत्पन्न होती है।

संतान के उज्ज्वल भविष्य की कामना:

संतान गोपाल स्तोत्र का पाठ संतान के उज्ज्वल भविष्य, बुद्धिमानी और चारित्रिक विकास के लिए भी अत्यंत फलदायी माना जाता है। यह स्तोत्र संतान को सफल, सच्चरित्र और धर्मपरायण बनने की प्रेरणा देता है।

सपनों को साकार करने में सहायक:

यह माना जाता है कि इस स्तोत्र का पाठ संतान प्राप्ति की इच्छाओं को पूरा करने में सहायक होता है। स्तोत्र के प्रभाव से संतान सुख से जुड़े सपनों की पूर्ति होती है।

जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार:

संतान गोपाल स्तोत्र का पाठ करने से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। यह दंपतियों को आत्मविश्वास और सकारात्मक दृष्टिकोण के साथ जीवन की चुनौतियों का सामना करने में सक्षम बनाता है।

ईश्वरीय कृपा प्राप्ति:

भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीला का स्मरण करते हुए इस स्तोत्र के पाठ से भक्तों को उनकी कृपा प्राप्त होती है। भगवान की कृपा से जीवन के सभी क्षेत्रों में सफलता और संतुष्टि मिलती है।

संतान गोपाल स्तोत्र का पाठ न केवल संतान प्राप्ति के लिए किया जाता है, बल्कि यह संतान के सुख, स्वास्थ्य और उज्ज्वल भविष्य की कामना के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसके नियमित पाठ से जीवन में ईश्वरीय कृपा और सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त होती है, जो दांपत्य जीवन को सुखी और समृद्ध बनाती है।

संतान गोपाल स्तोत्रम् भगवान श्रीकृष्ण के बाल रूप गोपाल को समर्पित एक महत्वपूर्ण और लोकप्रिय स्तोत्र है। यह स्तोत्र विशेष रूप से उन दंपत्तियों द्वारा पढ़ा जाता है, जो संतान सुख की प्राप्ति की कामना करते हैं। हिंदू धर्म में यह विश्वास किया जाता है कि नियमित रूप से श्रद्धा और भक्ति के साथ इस स्तोत्र का पाठ करने से भगवान कृष्ण की कृपा से योग्य और उत्तम संतान की प्राप्ति होती है।

संतान गोपाल स्तोत्रम् का महत्त्व

  1. संतान प्राप्ति का आशीर्वाद: यह स्तोत्र उन दंपत्तियों के लिए अत्यंत फलदायी माना गया है जो संतान प्राप्ति में कठिनाई का सामना कर रहे हैं। यह विशेष रूप से निसंतान दंपत्तियों के लिए अत्यधिक पूजनीय है।
  2. संतान की भलाई और समृद्धि: संतान गोपाल स्तोत्रम् का पाठ न केवल संतान की प्राप्ति के लिए किया जाता है, बल्कि यह स्तोत्र संतान के स्वास्थ्य, दीर्घायु, बुद्धिमत्ता और समृद्धि के लिए भी अत्यधिक महत्वपूर्ण माना गया है।
  3. आध्यात्मिक शांति और सुख: इस स्तोत्र का नियमित पाठ दंपत्तियों के बीच प्रेम और आपसी सहयोग को बढ़ाता है। इससे दांपत्य जीवन में खुशहाली और शांति का संचार होता है।
  4. पुत्र रत्न की कामना: स्तोत्र की प्रत्येक पंक्ति भगवान श्रीकृष्ण से पुत्र प्राप्ति का निवेदन करती है। इसमें श्रीकृष्ण के बाल रूप की महिमा का वर्णन करते हुए यशोदा और देवकी के पुत्र होने के कारण उनकी कृपा की प्रार्थना की जाती है।

स्त्रोत में वर्णित प्रमुख तत्व

  • भगवान गोपाल की महिमा: इसमें भगवान श्रीकृष्ण के बाल रूप गोपाल की स्तुति की जाती है, जो अपने भक्तों को प्रेम, शांति और संतान सुख प्रदान करते हैं।
  • माता यशोदा और देवकी के प्रति श्रद्धा: श्रीकृष्ण की महिमा का वर्णन करते हुए स्तोत्र में माता यशोदा और माता देवकी के यशस्वी पुत्र होने का विशेष उल्लेख किया गया है।
  • पुत्र प्राप्ति की कामना: भगवान कृष्ण से पुत्र रत्न के आशीर्वाद की प्रार्थना की गई है।

स्तोत्र का पाठ कैसे किया जाता है

  • नियमितता: इस स्तोत्र का पाठ अत्यंत श्रद्धा और नियम के साथ करना चाहिए। रोज सुबह स्नान आदि से शुद्ध होकर भगवान श्रीकृष्ण की मूर्ति या चित्र के समक्ष बैठकर इस स्तोत्र का पाठ करना अत्यंत शुभ माना जाता है।
  • व्रत का पालन: कुछ लोग इस स्तोत्र के साथ-साथ संतान प्राप्ति के लिए विशेष व्रत का भी पालन करते हैं। इसमें सोमवार या गुरुवार के दिन उपवास रखकर इस स्तोत्र का पाठ किया जाता है।
  • श्रद्धा और विश्वास: यह माना जाता है कि जिस व्यक्ति ने पूरी श्रद्धा और विश्वास के साथ संतान गोपाल स्तोत्रम् का पाठ किया, उसे अवश्य ही भगवान श्रीकृष्ण की कृपा से योग्य संतान प्राप्त होती है।

स्तोत्र का पाठ करने से लाभ

  1. संतान प्राप्ति में आने वाली बाधाओं का निवारण: निसंतान दंपत्तियों को संतान प्राप्ति में आ रही सभी बाधाओं का समाधान मिलता है।
  2. संतान का स्वास्थ्य और दीर्घायु: यह स्तोत्र संतान के उत्तम स्वास्थ्य और लंबी आयु के लिए भी लाभकारी है।
  3. धार्मिक और मानसिक शांति: यह स्तोत्र केवल संतान सुख के लिए ही नहीं, बल्कि परिवार में शांति, समृद्धि और सौहार्द्र बनाए रखने के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है।

स्तोत्र का मूल उद्देश्य

संतान गोपाल स्तोत्रम् का मुख्य उद्देश्य भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीला और उनके वात्सल्य रूप को याद करके उनसे संतान प्राप्ति की प्रार्थना करना है। इस स्तोत्र के माध्यम से व्यक्ति अपने जीवन में भगवान की कृपा से पुत्र रत्न की प्राप्ति और संतान की रक्षा की कामना करता है।

संतान गोपाल स्तोत्रम् धार्मिक और आध्यात्मिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण स्तोत्र है। इसका पाठ दंपत्तियों के जीवन में संतान सुख की प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त करता है और परिवार में प्रेम और समृद्धि को बनाए रखता है। भगवान श्रीकृष्ण की महिमा का गुणगान करते हुए यह स्तोत्र भक्तों को उनकी कृपा पाने का माध्यम बनता है।


संतान गोपाल स्तोत्र कब पढ़ना चाहिए?

संतान गोपाल स्तोत्र का पाठ सुबह स्नान आदि से शुद्ध होकर भगवान श्रीकृष्ण या गोपाल की मूर्ति या चित्र के सामने करना चाहिए। इसे नियमित रूप से पाठ करना अत्यधिक शुभ माना जाता है। किसी विशेष संकल्प या व्रत के दौरान, इसे सोमवार या गुरुवार के दिन विशेष रूप से पढ़ा जाता है, क्योंकि ये दिन भगवान विष्णु और उनके अवतारों के लिए समर्पित होते हैं।

संतान गोपाल सहस्त्रनाम पाठ कब करना चाहिए?

संतान गोपाल सहस्त्रनाम पाठ का समय विशेष अवसरों पर या किसी शुभ दिन निर्धारित किया जा सकता है, जैसे पूर्णिमा, एकादशी, गुरुवार, या जन्माष्टमी। इसे पुत्र प्राप्ति की कामना या संतान की सुरक्षा और स्वास्थ्य के लिए किया जाता है। इसे किसी योग्य पंडित द्वारा संकल्प के साथ शुरू करना भी उत्तम माना जाता है। इसे विशेष व्रत के साथ भी किया जा सकता है।

पुत्र प्राप्ति का मंत्र कौन सा है?

पुत्र प्राप्ति के लिए कई मंत्र उपयोग किए जाते हैं, लेकिन संतान गोपाल मंत्र सबसे प्रमुख है। यह मंत्र भगवान श्रीकृष्ण के बाल रूप गोपाल को समर्पित है। एक प्रसिद्ध मंत्र है:
“ॐ श्रीमं वल्लभाय वासुदेवाय पुत्रलाभं देहि देहि स्वाहा।
इस मंत्र का नियमित जप करने से पुत्र प्राप्ति की संभावना मानी जाती है। इसे श्रद्धा और विश्वास के साथ जपना चाहिए।

संतान गोपाल मंत्र जप संख्या कितनी है?

संतान गोपाल मंत्र की जप संख्या भक्त की श्रद्धा और संकल्प पर निर्भर करती है। हालांकि, आमतौर पर इस मंत्र का जप 108 बार प्रतिदिन करने का सुझाव दिया जाता है। कुछ विशेष अवसरों पर, या संतान प्राप्ति के लिए विशेष पूजा के दौरान, मंत्र का जप 11 माला (एक माला में 108 बार) या अधिक किया जा सकता है।

संतान गोपाल स्तोत्र कब करना चाहिए?

संतान गोपाल स्तोत्र का पाठ विशेष रूप से उन दंपत्तियों के लिए फायदेमंद माना जाता है जो संतान प्राप्ति की इच्छा रखते हैं या फिर संतान से जुड़ी किसी समस्या का समाधान चाहते हैं। इस स्तोत्र का पाठ सुबह के समय ब्रह्म मुहूर्त (सूर्योदय से पहले) या शाम के समय संध्या काल में करना अत्यंत शुभ माना जाता है। मान्यता है कि इन समयों में देवी-देवताओं की कृपा सबसे अधिक प्राप्त होती है। इसके अलावा, शुक्रवार का दिन भगवान कृष्ण की विशेष कृपा प्राप्त करने के लिए उत्तम माना जाता है, क्योंकि वे श्रीकृष्ण के रूप में बाल गोपाल के अवतार हैं। यदि कोई व्यक्ति नियमित रूप से इस स्तोत्र का पाठ करना चाहता है, तो वह इसे प्रतिदिन एक निश्चित समय पर कर सकता है। विशेषकर, पूर्णिमा, एकादशी या जन्माष्टमी जैसे शुभ दिनों में इस स्तोत्र का पाठ करने से अधिक लाभ मिलता है।

गोपाल संतान स्तोत्र का पाठ कैसे करें?

गोपाल संतान स्तोत्र का पाठ करने से पहले स्नान आदि से शुद्ध होकर स्वच्छ वस्त्र धारण करना चाहिए। फिर एक शांत और पवित्र स्थान पर आसन बिछाकर भगवान कृष्ण की मूर्ति या चित्र स्थापित करें। पाठ शुरू करने से पहले दीपक जलाकर और धूप-दीप से भगवान की पूजा करें। इसके बाद संकल्प लें कि आप संतान प्राप्ति या किसी अन्य मनोकामना की पूर्ति के लिए यह स्तोत्र पढ़ रहे हैं। स्तोत्र का पाठ करते समय मन को एकाग्र रखें और हर श्लोक को श्रद्धापूर्वक बोलें। पाठ पूरा होने के बाद भगवान कृष्ण से प्रार्थना करें कि वे आपकी मनोकामना पूरी करें। अंत में आरती करके प्रसाद वितरित करें। यदि संभव हो तो इस स्तोत्र का पाठ 21 दिनों तक लगातार करें, क्योंकि ऐसा माना जाता है कि नियमित पाठ से भगवान कृष्ण की कृपा शीघ्र प्राप्त होती है।

संतान प्राप्ति के लिए कौन सा स्तोत्र है?

संतान प्राप्ति के लिए विभिन्न स्तोत्र और मंत्र प्रचलित हैं, लेकिन संतान गोपाल स्तोत्र को सबसे प्रभावी माना जाता है। यह स्तोत्र भगवान कृष्ण को समर्पित है, जो बाल गोपाल के रूप में बच्चों के रक्षक और पालनहार माने जाते हैं। इसके अलावा, संतान गोपाल मंत्र (“ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं ग्लौं देवकीसुत गोविंद वासुदेव जगत्पते देहि मे तनयं कृष्ण त्वामहं शरणं गतः”) का जाप भी संतान प्राप्ति में सहायक माना जाता है। कुछ लोग महामृत्युंजय मंत्र या सुंदरकांड का पाठ भी करते हैं, क्योंकि इन्हें समस्त मनोकामनाओं की पूर्ति का साधन माना जाता है। लेकिन संतान गोपाल स्तोत्र का विशेष महत्व है, क्योंकि इसमें भगवान कृष्ण की बाल लीला का वर्णन होता है, जो संतान की कामना करने वाले युगलों के लिए विशेष फलदायी माना जाता है।

संतान गोपाल स्तोत्र के क्या फायदे हैं?

संतान गोपाल स्तोत्र का पाठ करने से अनेक लाभ प्राप्त होते हैं। सबसे पहले, यह संतान प्राप्ति में सहायक होता है और जिन दंपत्तियों को संतान नहीं हो रही है, उन्हें इस स्तोत्र के नियमित पाठ से लाभ मिलता है। दूसरा, यह स्तोत्र संतान की रक्षा करता है और उनके स्वास्थ्य व दीर्घायु के लिए शुभ माना जाता है। यदि किसी की संतान बीमार है या उसे कोई संकट है, तो इस स्तोत्र के पाठ से भगवान कृष्ण की कृपा से उसकी रक्षा होती है। तीसरा, यह स्तोत्र मन की शांति प्रदान करता है और घर में सुख-समृद्धि लाता है। कई लोग इसे पारिवारिक सुख और एकता के लिए भी पढ़ते हैं। इसके अलावा, यह स्तोत्र भक्ति भावना को बढ़ाता है और भगवान कृष्ण की कृपा प्राप्त करने का एक सरल उपाय है। इस प्रकार, संतान गोपाल स्तोत्र न केवल संतान से जुड़ी समस्याओं का समाधान करता है, बल्कि जीवन में आध्यात्मिक शांति और आनंद भी प्रदान करता है।

Santan Gopal Chalisa pdf – अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रश्न 1: Santan Gopal Chalisa pdf क्या है?
उत्तर: Santan gopal chalisa pdf एक धार्मिक स्तुति का डिजिटल रूप है जिसमें भगवान श्रीकृष्ण के संतान प्राप्ति स्वरूप ‘संतान गोपाल’ के गुणों का वर्णन किया गया है।

प्रश्न 2: Santan Gopal Chalisa pdf कहाँ से डाउनलोड कर सकते हैं?
उत्तर: आप santan gopal chalisa pdf कई धार्मिक वेबसाइटों, ब्लॉग्स या पीडीएफ साझा करने वाले पोर्टल्स से डाउनलोड कर सकते हैं। ध्यान दें कि केवल विश्वसनीय स्रोतों से ही डाउनलोड करें।

प्रश्न 3: Santan Gopal Chalisa का पाठ क्यों किया जाता है?
उत्तर: संतान सुख की प्राप्ति, गर्भधारण में सहायता और संतान की सुरक्षा हेतु इस चालीसा का पाठ विशेष रूप से लाभकारी माना जाता है।

प्रश्न 4: Santan Gopal Chalisa pdf किस भाषा में उपलब्ध है?
उत्तर: यह मुख्यतः हिंदी में उपलब्ध है, परंतु chalisa-pdf.com पर अंग्रेजी और संस्कृत अनुवाद भी मिल सकते हैं।

प्रश्न 5: क्या Santan Gopal Chalisa pdf मोबाइल में पढ़ सकते हैं?
उत्तर: हाँ, आप इसे किसी भी स्मार्टफोन में PDF रीडर के माध्यम से आसानी से पढ़ सकते हैं।

Santan Gopal Stotra pdf – अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रश्न 1: Santan Gopal Stotra pdf क्या होता है?
उत्तर: यह एक धार्मिक स्तोत्र है जो भगवान श्रीकृष्ण के संतान गोपाल रूप की स्तुति करता है। इसका PDF स्वरूप मोबाइल या कंप्यूटर में पढ़ने के लिए उपयुक्त होता है।

प्रश्न 2: Santan Gopal Stotra pdf किस प्रकार लाभकारी है?
उत्तर: इस स्तोत्र के नियमित पाठ से नि:संतान दंपत्तियों को संतान सुख की प्राप्ति होती है तथा गर्भवती महिलाओं को संतान की रक्षा हेतु आशीर्वाद मिलता है।

प्रश्न 3: Santan Gopal Stotra pdf कहां मिल सकता है?
उत्तर: chalisa-pdf.com पर यह स्तोत्र आसानी से उपलब्ध है।

प्रश्न 4: Santan Gopal Stotra pdf कितने श्लोकों का होता है?
उत्तर: इसमें लगभग 12 से 15 श्लोक होते हैं, जो भगवान संतान गोपाल की महिमा का वर्णन करते हैं।

प्रश्न 5: क्या Santan Gopal Stotra pdf का प्रिंट निकाल सकते हैं?
उत्तर: हाँ, आप इसे डाउनलोड कर प्रिंटर से प्रिंट निकालकर पूजा स्थल पर भी रख सकते हैं।

Santan Gopal Mantra in Hindi pdf – अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रश्न 1: Santan Gopal Stotra in Hindi pdf क्या है?
उत्तर: Santan Gopal Stotra in Hindi pdf एक भक्ति स्तोत्र का हिंदी संस्करण है, जिसे पीडीएफ फॉर्मेट में पढ़ा जा सकता है। इसमें भगवान श्रीकृष्ण के संतान गोपाल स्वरूप की स्तुति की गई है।

प्रश्न 2: Santan Gopal Stotra in Hindi pdf किसे पढ़ना चाहिए?
उत्तर: इसे वे लोग पढ़ सकते हैं जो संतान प्राप्ति की इच्छा रखते हैं, गर्भवती महिलाएं, या संतान की सुरक्षा हेतु प्रार्थना करना चाहते हैं।

प्रश्न 3: क्या Santan Gopal Stotra in Hindi pdf निशुल्क उपलब्ध है?
उत्तर: हाँ, यह स्तोत्र पीडीएफ फॉर्मेट में chalisa-pdf.com वेबसाइट पर मुफ्त में उपलब्ध है।

प्रश्न 4: क्या Santan Gopal Stotra in Hindi pdf रोज पढ़ा जा सकता है?
उत्तर: हाँ, इसका रोज पाठ करना अत्यंत लाभकारी होता है। विशेष रूप से बुधवार और गुरुवार को इसका महत्व अधिक है।

प्रश्न 5: Santan Gopal Stotra in Hindi pdf को कहां सुरक्षित रखें?
उत्तर: आप इसे मोबाइल, टैबलेट या कंप्यूटर में सेव करके ऑफलाइन भी पढ़ सकते हैं और चाहें तो प्रिंट लेकर पूजा स्थान पर रख सकते हैं।

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Ganesh Chaturthi 2025: Dates, Significance, Puja Guide & Essential Devotional Resources

Welcome the Remover of Obstacles: A Complete Guide to Ganesh Chaturthi 2025

The air is filled with the rhythmic beat of the dhol, the sweet fragrance of modaks, and the resonant chants of “Ganpati Bappa Morya!” – this can only mean one thing: the beloved festival of Ganesh Chaturthi is approaching. A time of immense joy, devotion, and community, this festival marks the birth of Lord Ganesha, the elephant-headed God of wisdom, prosperity, and new beginnings. Hanuman Chalisa MP3 Download

At Chalisa-PDF.com, we believe that true celebration is a blend of heartfelt rituals and deep spiritual connection. This comprehensive guide for Ganesh Chaturthi 2025 will not only provide you with the crucial dates and puja timings but will also equip you with the devotional tools—like the powerful Ganesh Chalisa—to make your worship truly profound.

Ganesh Chaturthi 2025 Date and Muhurat

Ganesh Chaturthi 2025 will be celebrated on Wednesday, August 27, during the Shukla Paksha Chaturthi of the Bhadrapada month, as per the Hindu lunar calendar. The festival typically spans 10 to 11 days, concluding with the grand Ganesh Visarjan on Saturday, September 6.

When is Ganesh Chaturthi in 2025

  • Chaturthi Tithi Begins – August 26, 2025, 1:54 PM
  • Chaturthi Tithi Ends – August 27, 2025, 3:44 PM
  • Madhyahna Ganesha Puja Muhurat – August 27, 2025, from 11:12 AM to 01:44 PM
  • Ganesh Visarjan (Anant Chaturdashi) – Saturday, September 6, 2025

The most auspicious time to perform the Ganesha Sthapana (idol installation) is during the Madhyahna period, as it is believed that Lord Ganesha was born during this time of the day.

It is advised to avoid performing the puja during the Rahu Kalam and Vishaghat periods for maximum benefit. For a more detailed breakdown of the puja timings, you can refer to this extensive guide on NDTV.

The Profound Significance of Ganesh Chaturthi

Ganesh Chaturthi is more than just a festival; it’s a cultural phenomenon and a spiritual reset button. We worship Lord Ganesha first in any venture because he is the Vighnaharta (the remover of obstacles). By inviting his idol into our homes, we are symbolically inviting clarity, intellect, and good fortune to reside with us.

The 10-day festival represents the cycle of creation and dissolution. The installation of the idol signifies birth and creation, the daily prayers and aartis nurture the divine energy, and the visarjan (immersion) is a powerful reminder of the impermanence of life, teaching us to let go of our attachments.

Rituals and Celebrations: How to Welcome Bappa Home

  1. Sthapana (Installation): Cleanse the puja area and install the idol on a raised platform. Perform the Pran Pratishtha ritual to invoke life into the idol using Vedic mantras.
  2. Shodashopachara Puja: Worship the deity with 16 offerings which include invitation, offering a seat, water for washing feet, arghya, achaman, bath, clothes, sacred thread, sandalwood, flowers, incense, lamp, food, betel leaves, circumambulation, and finally, farewell.
  3. Offerings (Naivedyam): Lord Ganesha loves modaks (sweet dumplings), but you can also offer ladoos, sugarcane, durva grass (21 blades), and red hibiscus flowers.
  4. Aarti and Prayers: Sing the Ganesh Aarti with your family. This is a moment of collective joy and devotion.

Deepen Your Devotion with the Ganesh Chalisa

While performing the external rituals is important, connecting with the divine through prayer and recitation is what truly enriches the soul. The Ganesh Chalisa is a magnificent 40-verse hymn that praises the virtues, glory, and benevolence of Lord Ganesha.

Reciting the Chalisa with sincerity:

  • Helps calm the mind and focus your intentions.
  • Invokes Ganesha’s blessings to remove hurdles from your path.
  • Enhances wisdom and success in your endeavors.
  • Creates a powerful, positive vibration in your home.

We have made this powerful tool easily accessible for you. To enhance your Ganesh Chaturthi 2025 celebrations, we invite you to download a beautifully formatted, print-ready PDF of the Ganesh Chalisa absolutely free.



Keep it on your phone for daily recitation or print it out for the entire family to sing along during the puja.

Eco-Friendly Celebrations: A Note for 2025

As devotees, it is our duty to protect the environment that Lord Ganesha presides over. This year, consider:

  • Using a permanent idol made of clay, metal, or stone that you can use every year.
  • If you opt for immersion, choose a small clay idol and immerse it in a water tank at home or a designated artificial tank.
  • Avoid plastic decorations and opt for flowers, cloth, and natural elements.

Ganpati Bappa Morya!

Ganesh Chaturthi 2025 is a beautiful opportunity to reset, rejoice, and seek divine guidance. By understanding the significance, following the rituals, and immersing ourselves in devotional prayers like the Ganesh Chalisa Pdf, we can ensure that the blessings of the beloved Vighnaharta fill our lives with happiness and prosperity.

From all of us at Chalisa-PDF.com, we wish you and your family a very blessed and joyful Ganesh Chaturthi 2025!

May your journey be obstacle-free. Ganpati Bappa Morya!


Is Ganesh Chaturthi a public holiday?

es, Ganesh Chaturthi is a public holiday in the states of Maharashtra, Goa, Karnataka, and Telangana, and in many other regions across India with significant Hindu populations. On this day, government offices, banks, and many private businesses remain closed to allow people to celebrate the festival with their families. In other parts of India and the world, it is widely observed by the Hindu community, though it may not be an official public holiday everywhere.

How do you wish for Ganesh Chaturthi 2025?

You can wish your friends, family, and loved ones a happy Ganesh Chaturthi with warm, heartfelt messages. Here are a few ways to wish them:

Traditional Greetings:
“Ganpati Bappa Morya! Mangal Murti Morya!”
“Wishing you and your family a blessed Ganesh Chaturthi. May Lord Ganesha remove all obstacles from your life and shower you with wisdom and prosperity.”

Simple & Sweet Wishes:
“Happy Ganesh Chaturthi 2025! May the divine blessings of Lord Ganesha bring joy and success to your home.”
“On this auspicious occasion, may you be blessed with happiness and good fortune. Happy Ganesh Chaturthi!”

For Social Media/Text:
You can share these wishes along with an image of Lord Ganesha or a link to the Ganesh Chalisa PDF from Chalisa-PDF.com as a thoughtful devotional gift.

What is the time of Sakat Chauth Chandra Darshan in 2025?

Sakat Chauth (also known as Til Chauth or Ganesha Chauth) is a different festival primarily observed in North India for the well-being of sons. It usually falls in January/February. The Chandra Darshan (moon sighting) timings for it in 2025 are not yet available and will be calculated closer to the date.

Shri Hanuman Bajrang Baan Lyrics – बजरंग बाण PDF 2025

बजरंग बाण (Bajrang Baan Lyrics), हनुमान जी का एक अत्यंत शक्तिशाली और प्रभावशाली मंत्र है, जो संकटों से मुक्ति पाने और जीवन में शांति और समृद्धि लाने के लिए अत्यधिक प्रसिद्ध है। यह मंत्र उन भक्तों के लिए विशेष महत्व रखता है जो हनुमान जी की कृपा प्राप्त करना चाहते हैं। हनुमान जी, जिन्हें संकट मोचन के नाम से भी जाना जाता है, वे उन भक्तों की सभी समस्याओं को दूर करते हैं जो सच्चे दिल से उनकी आराधना करते हैं। बजरंग बाण का पाठ करने से व्यक्ति को मानसिक शांति, साहस, और आत्मविश्वास की प्राप्ति होती है, जिससे वे अपने जीवन के हर संकट का सामना करने में सक्षम हो पाते हैं। विनय चालीसा बाबा नीम करौली | संतान गोपाल स्तोत्रम् | Hanuman Chalisa Mp3 | Sai Chalisa Lyrics PDF

बजरंग बाण का विशेष महत्व उन समयों में होता है जब व्यक्ति किसी कठिन परिस्थिति से गुजर रहा होता है। यह कहा जाता है कि जब भी कोई भक्त संकट में होता है, और उसे कोई उपाय नहीं सूझता, तो बजरंग बाण का पाठ उसके लिए संकटमोचक का काम करता है। इस मंत्र के माध्यम से हनुमान जी की महिमा का गुणगान किया जाता है और उनसे कृपा प्राप्त करने की प्रार्थना की जाती है। आप हमारी वेबसाइट में हनुमान चालीसा | श्री राम रक्षा स्तोत्रम् और हनुमान अमृतवाणी भी पढ़ सकते हैं।


  • हिन्दी
  • English

|| बजरंग बाण लिखित में ||

|| दोहा ||

निश्चय प्रेम प्रतीति ते, बिनय करैं सनमान।
तेहि के कारज सकल शुभ, सिद्ध करैं हनुमान॥

|| चौपाई ||

जय हनुमंत संत हितकारी।
सुन लीजै प्रभु अरज हमारी॥

जन के काज बिलंब न कीजै।
आतुर दौरि महा सुख दीजै॥

जैसे कूदि सिंधु महिपारा।
सुरसा बदन पैठि बिस्तारा॥

आगे जाय लंकिनी रोका।
मारेहु लात गई सुरलोका॥

जाय बिभीषन को सुख दीन्हा।
सीता निरखि परमपद लीन्हा॥

बाग उजारि सिंधु महँ बोरा।
अति आतुर जमकातर तोरा॥

अक्षय कुमार मारि संहारा।
लूम लपेटि लंक को जारा॥

लाह समान लंक जरि गई।
जय जय धुनि सुरपुर नभ भई॥

अब बिलंब केहि कारन स्वामी।
कृपा करहु उर अंतरयामी॥

जय जय लखन प्रान के दाता।
आतुर ह्वै दुख करहु निपाता॥

जै हनुमान जयति बल-सागर।
सुर-समूह-समरथ भट-नागर॥

ॐ हनु हनु हनु हनुमंत हठीले।
बैरिहि मारु बज्र की कीले॥

ॐ ह्नीं ह्नीं ह्नीं हनुमंत कपीसा।
ॐ हुं हुं हुं हनु अरि उर सीसा॥

जय अंजनि कुमार बलवंता।
शंकरसुवन बीर हनुमंता॥

बदन कराल काल-कुल-घालक।
राम सहाय सदा प्रतिपालक॥

भूत, प्रेत, पिसाच निसाचर।
अगिन बेताल काल मारी मर॥

इन्हें मारु, तोहि सपथ राम की।
राखु नाथ मरजाद नाम की॥

सत्य होहु हरि सपथ पाइ कै।
राम दूत धरु मारु धाइ कै॥

जय जय जय हनुमंत अगाधा।
दुख पावत जन केहि अपराधा॥

पूजा जप तप नेम अचारा।
नहिं जानत कछु दास तुम्हारा॥

बन उपबन मग गिरि गृह माहीं।
तुम्हरे बल हौं डरपत नाहीं॥

जनकसुता हरि दास कहावौ।
ताकी सपथ बिलंब न लावौ॥

जै जै जै धुनि होत अकासा।
सुमिरत होय दुसह दुख नासा॥

चरन पकरि, कर जोरि मनावौं।
यहि औसर अब केहि गोहरावौं॥

उठु, उठु, चलु, तोहि राम दुहाई।
पायँ परौं, कर जोरि मनाई॥

ॐ चं चं चं चं चपल चलंता।
ॐ हनु हनु हनु हनु हनुमंता॥

ॐ हं हं हाँक देत कपि चंचल।
ॐ सं सं सहमि पराने खल-दल॥

अपने जन को तुरत उबारौ।
सुमिरत होय आनंद हमारौ॥

यह बजरंग-बाण जेहि मारै।
ताहि कहौ फिरि कवन उबारै॥

पाठ करै बजरंग-बाण की।
हनुमत रक्षा करै प्रान की॥

यह बजरंग बाण जो जापैं।
तासों भूत-प्रेत सब कापैं॥

धूप देय जो जपै हमेसा।
ताके तन नहिं रहै कलेसा॥

|| दोहा ||

उर प्रतीति दृढ़, सरन ह्वै, पाठ करै धरि ध्यान।
बाधा सब हर, करैं सब काम सफल हनुमान॥

|| Sri Bajrang Baan PDF English ||

॥ Doha ॥
Nishchay prem pratith te,
Binay kare sanman ।
Tehi ke karaj sakal shubh,
Siddha karai Hanuman ॥

॥ Chaupai ॥
Jai Hanumant sant hitkari ।
Suni lijai prabhu araj hamari ॥01॥

Jan ke kaaj vilambha na kijai ।
Aatur dauri maha sukha deejai ॥02॥

Jaise kudi Sindhu wahi para ।
Surasa badh paithi vistara ॥03॥

Aage jayee lankini roka ।
Marehu laat gaee sur loka ॥04॥

Jaay Vibhishan ko sukh deenha ।
Sita nirakhi param padh leenha ॥05॥

Baagh ujaari Sindhu maha bora ।
Ati aatur yum kaatar tora ॥06॥

Akshay kumar maari sanhara ।
Loom lapait Lannk ko jaara ॥07॥

Laah samaan Lannk jaari gayee
Jai jai dhuni sur pur mmhah bhayee ॥08॥

Ab vilaambha kehi kaaran swami ।
Krupa karahu urr antaryaami ॥09॥

Jai jai Lakshman praan ke daataah ।
Aatur hoy dukh harahu nipaata ॥10॥

Jai Giridhar jai jai sukh-sagar ।
Sur samuha samartha bhatnagar ॥11॥

Om Hanu Hanu Hanu Hanu Hanumant Hattile ।
Bairihi maru bajjrah ki kile ॥12॥

Gada bajjrah lai bairihi maaro ।
Maharaj prabhu daas ubaaro ॥13॥

Om-kar huunkar maha-prabhu dhaavo ।
Bajjra gada hanu vilambha na lavo ॥14॥

Om hrim hrim hrim Hanumant Kapeesa ।
Om Huum Huum Huum Hanu ari urr shisha ॥15॥

Satya hou Hari shapath paay-ke ।
Ram-duuth dharu maru dhaay-ke ॥16॥

Jai jai jai Hanumant agaadha ।
Dukkha paavat jan kehi apraadha ॥17॥

Puja jap jap nem achaara ।
Nahin jaanata kacchu daas tumhara ॥18॥

Van upavan, mag giri gruha maahi ।
Tumhare bal hum darpath nahi ॥19॥

Paay paroh kar jori manavoh ।
Yahi avasar abh kehi gohravoo ॥20॥

Jai Anjani Kumar Balvanta ।
Shankar suvan veer Hanumanta ॥21॥

Badan karal kaal kul ghalak ।
Ram sahay sada prati-palak ॥22॥

Bhoot preth pishachya nishachar ।
Agni Betal kaal mari-mar ॥23॥

Innhe maru tohi shapath ram ki ।
Rakhu naath marjaad naam ki ॥24॥

Janaksuta Hari daas kahavoh ।
Taaki shapath vilambha na lavo ॥25॥

Jai Jai Jai dhuni hoath akasha ।
Sumirath hoath dusaha dukha naasha ॥26॥

Charan sharan kar jori manavoh ।
Yahi avasar abh kehi gouravoh ॥27॥

Uthu uthu chalu tohi Ram duhai ।
Paayh parooh kar jori manai ॥28॥

Om cha cha cha cha chapal chalanta ।
Om Hanu Hanu Hanu Hanu Hanumanta ॥29॥

Om han han hank deta kapi chanchal ।
Om san san sahami parane khal dal ॥30॥

Apne jan ko turantah ubharo ।
Sumirat hoy anand hamaro ॥31॥

Yaha Bajrang Baan jehi mareh ।
Tahi kaho phir kaun ubareh ॥32॥

Paath karai Bajrang Baan ki ।
Hanumant raksha karai pran ki ॥33॥

Yaha Bajrang Baan jo jaape ।
Tehi te bhoot preth sabh kaape ॥34॥

Dhup deyah aru jaapai hamesha ।
Taake taanh nahi rahe kalesha ॥35॥

॥ Doha ॥
Prem pratith-he kapi bhajai,
Sada dharai urr dhyaan ॥
Tehi ke karaj sakala shubh,
Siddha karai hanuman ॥



बजरंग बाण एक प्राचीन और शक्तिशाली मंत्र है, जो भगवान हनुमान की आराधना के लिए प्रसिद्ध है। इसका धार्मिक और ऐतिहासिक संदर्भ भारतीय पुरानी ग्रंथों और कथाओं में मिलता है। इस मंत्र की उत्पत्ति और महत्व को समझने के लिए हमें इसकी ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और धार्मिक संदर्भ को जानना होगा।

बजरंग बाण का ऐतिहासिक संदर्भ:

  1. महाभारत और रामायण में उल्लेख: बजरंग बाण का संदर्भ मुख्य रूप से रामायण और अन्य प्राचीन ग्रंथों में मिलता है। हनुमान जी की महिमा और उनके अद्वितीय गुणों का वर्णन इन ग्रंथों में विस्तृत रूप से किया गया है। हालांकि, बजरंग बाण का विशेष रूप से उल्लेख रामायण में नहीं है, लेकिन इसके पाठ और उपयोग की परंपरा का आरंभ यहीं से हुआ माना जाता है।
  2. रामचरितमानस का योगदान: रामचरितमानस, जिसे तुलसीदास द्वारा लिखा गया है, में भी हनुमान जी की भक्ति और उनके मंत्रों का महत्व बताया गया है। बजरंग बाण का पाठ और उसका प्रभाव तुलसीदास की काव्य-रचनाओं में भी उल्लेखित है। इस ग्रंथ ने हनुमान जी की भक्ति को लोकप्रिय बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
  3. भक्ति परंपरा का विकास: बजरंग बाण का प्रयोग भक्ति परंपरा में विशेष रूप से महत्वपूर्ण माना जाता है। विशेष रूप से मध्यकालीन भारत में, जब भक्ति आंदोलन अपने चरम पर था, बजरंग बाण जैसे मंत्रों का व्यापक रूप से प्रचार हुआ। संत कवि और भक्तों ने इस मंत्र का उपयोग हनुमान जी की आराधना और संकटों से मुक्ति के लिए किया।

बजरंग बाण का धार्मिक और संस्कृतिगत महत्व:

संकट मोचन: बजरंग बाण को संकट मोचन मंत्र के रूप में जाना जाता है। यह विश्वास किया जाता है कि इस मंत्र का उच्चारण करने से सभी प्रकार की समस्याओं, बाधाओं, और संकटों से मुक्ति मिलती है। इसे संकट की घड़ी में भगवान हनुमान की कृपा प्राप्त करने के एक प्रभावी साधन के रूप में देखा जाता है।

हनुमान जी की आराधना: बजरंग बाण, हनुमान जी की आराधना का एक अत्यधिक प्रभावशाली मंत्र है। इसे हनुमान जी की शक्ति, साहस, और भक्ति का प्रतीक माना जाता है। यह मंत्र भक्तों को संकटों से मुक्ति, मानसिक शांति, और आध्यात्मिक बल प्रदान करता है।

मंत्र की संरचना: बजरंग बाण का मंत्र विशेष रूप से हनुमान जी की महिमा और उनके अद्वितीय गुणों को व्यक्त करता है। इसमें हनुमान जी की शक्ति, उनके द्वारा किए गए कार्यों, और उनके भक्तों के प्रति कृपा का वर्णन किया गया है। यह मंत्र शारीरिक, मानसिक, और आध्यात्मिक लाभ प्रदान करता है।


बजरंग बाण (Bajrang Baan PDF) एक प्राचीन और शक्तिशाली मंत्र है, जिसे विशेष रूप से भगवान हनुमान की आराधना के लिए पढ़ा जाता है। यह मंत्र भक्तों को संकटों से मुक्ति, मानसिक शांति, और आध्यात्मिक उन्नति प्रदान करता है। बजरंग बाण का महत्व धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टिकोण से अत्यधिक है, और इसके लाभ व्यक्तिगत जीवन में गहरा प्रभाव डालते हैं।

आत्मविश्वास और साहस: बजरंग बाण का जप आत्मविश्वास और साहस को बढ़ाता है। यह व्यक्ति को आत्मबल और मानसिक ताकत प्रदान करता है, जिससे वह जीवन की चुनौतियों और समस्याओं का सामना दृढ़ता से कर सकता है।

मानसिक शांति और स्थिरता: बजरंग बाण का नियमित पाठ मानसिक शांति और स्थिरता प्रदान करता है। इसका जप करने से व्यक्ति का मन शांत होता है और वह तनाव, चिंता, और अवसाद से राहत प्राप्त करता है। हनुमान जी की कृपा से मानसिक स्पष्टता और स्थिरता में वृद्धि होती है, जिससे व्यक्ति अपने जीवन की चुनौतियों का सामना बेहतर ढंग से कर सकता है।

संकटों से मुक्ति: बजरंग बाण का पाठ संकटों और समस्याओं से राहत दिलाता है। चाहे वह आर्थिक संकट हो, स्वास्थ्य समस्याएं हों, या अन्य प्रकार की कठिनाइयां हों, यह मंत्र समाधान प्रदान करता है। इसके नियमित उच्चारण से भक्त को संकटों से मुक्ति मिलती है और उसकी जीवन परिस्थितियाँ सुधरती हैं।

आध्यात्मिक उन्नति: बजरंग बाण का पाठ भक्त की आध्यात्मिक यात्रा को सशक्त बनाता है। यह मंत्र आध्यात्मिक शक्ति, ऊर्जा, और जागरूकता को बढ़ाता है। इसके जप से व्यक्ति की भक्ति और आस्था मजबूत होती है और वह आध्यात्मिक उन्नति की ओर अग्रसर होता है।

शारीरिक ऊर्जा और स्वास्थ्य: बजरंग बाण का जप शारीरिक ऊर्जा और स्वास्थ्य में सुधार करता है। इसके पाठ से शरीर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है, जिससे थकान और कमजोरी दूर होती है। इसके साथ ही, यह मंत्र रोग प्रतिरोधक क्षमता को भी बढ़ाता है और शारीरिक स्वास्थ्य को बनाए रखता है।

सकारात्मक ऊर्जा और सुरक्षा: बजरंग बाण का पाठ एक सकारात्मक ऊर्जा का निर्माण करता है, जो व्यक्ति के चारों ओर एक सुरक्षा घेरा बनाती है। यह नकारात्मक ऊर्जा और बुरी शक्तियों को दूर करता है और भक्त को मानसिक और आध्यात्मिक सुरक्षा प्रदान करता है।


बजरंग बाण और हनुमान जी की भक्ति भारतीय धर्म और संस्कृति में एक महत्वपूर्ण स्थान रखते हैं। बजरंग बाण, हनुमान जी की आराधना का एक शक्तिशाली मंत्र है, जो विशेष रूप से संकटों से मुक्ति, मानसिक शांति और आध्यात्मिक उन्नति के लिए पढ़ा जाता है। हनुमान जी की भक्ति और बजरंग बाण का संयोजन भक्तों को समग्र जीवन में गहरा प्रभाव प्रदान करता है।

हनुमान जी की भक्ति:

हनुमान जी, भारतीय पौराणिक कथाओं के प्रमुख देवताओं में से एक हैं। उन्हें शक्ति, साहस, और भक्ति का प्रतीक माना जाता है। हनुमान जी की भक्ति केवल धार्मिक कृत्य नहीं, बल्कि यह एक जीवन शैली है जो सच्ची श्रद्धा, समर्पण और मानसिक स्थिरता पर आधारित होती है।

भक्ति के प्रमुख लाभ:

  1. आध्यात्मिक उन्नति: हनुमान जी की भक्ति व्यक्ति को आध्यात्मिक उन्नति की ओर ले जाती है। उनकी आराधना से व्यक्ति के आत्मज्ञान में वृद्धि होती है और वह अपने जीवन के उद्देश्य को स्पष्ट रूप से समझता है।
  2. शक्ति और साहस: हनुमान जी की भक्ति व्यक्ति को असाधारण शक्ति और साहस प्रदान करती है। यह भक्ति भक्त को कठिन परिस्थितियों का सामना करने की क्षमता देती है और उसे सच्चे साहस का अनुभव कराती है।
  3. संकटों से मुक्ति: हनुमान जी की भक्ति संकटों और समस्याओं से उबरने का एक साधन है। भक्तों का मानना है कि हनुमान जी की कृपा से सभी प्रकार की बाधाएं दूर हो जाती हैं और जीवन में सुख और समृद्धि आती है।
  4. मन की शांति: हनुमान जी की भक्ति से मन की शांति प्राप्त होती है। यह भक्ति मानसिक तनाव, चिंता, और अवसाद को कम करने में सहायक होती है, जिससे व्यक्ति को मानसिक स्थिरता मिलती है।

बजरंग बाण का महत्व:

बजरंग बाण (Bajrang Baan PDF) हनुमान जी की भक्ति का एक प्रमुख तत्व है। इसे एक प्रभावी मंत्र माना जाता है जो विशेष रूप से संकटमोचक हनुमान जी की महिमा का गुणगान करता है। इस मंत्र का पाठ भक्तों को विभिन्न मानसिक और शारीरिक लाभ प्रदान करता है।

बजरंग बाण के लाभ:

  1. शत्रुओं से रक्षा: बजरंग बाण का पाठ करने से शत्रुओं और बुरी शक्तियों से रक्षा होती है। यह मंत्र एक शक्तिशाली कवच का काम करता है, जो भक्त को नकारात्मक ऊर्जा और बुरी नजरों से बचाता है।
  2. आध्यात्मिक शक्ति: बजरंग बाण का नियमित जप भक्त को आध्यात्मिक शक्ति और ऊर्जा प्रदान करता है। यह मंत्र व्यक्ति की भक्ति और आस्था को मजबूत करता है और उसे आध्यात्मिक रूप से जागरूक बनाता है।
  3. संकटों से मुक्ति: बजरंग बाण का पाठ संकटों और परेशानियों से मुक्ति दिलाने में सहायक होता है। यह मंत्र विशेष रूप से जीवन की कठिनाइयों से उबरने के लिए पढ़ा जाता है, जिससे व्यक्ति को शांति और समाधान मिलता है।
  4. मानसिक स्थिरता: बजरंग बाण के जप से मानसिक स्थिरता प्राप्त होती है। यह मंत्र मानसिक शांति, एकाग्रता, और आत्मबल को बढ़ाता है, जिससे व्यक्ति जीवन की चुनौतियों का सामना बेहतर ढंग से कर सकता है।

भक्ति और मंत्र का संयोजन:

हनुमान जी की भक्ति और बजरंग बाण का पाठ एक अनूठा संयोजन है, जो भक्त के जीवन में गहरा प्रभाव डालता है। जब भक्त हनुमान जी की आराधना के साथ बजरंग बाण का पाठ करता है, तो वह एक शक्तिशाली आध्यात्मिक अनुभव प्राप्त करता है। यह संयोजन न केवल मानसिक और शारीरिक लाभ प्रदान करता है, बल्कि भक्त की आध्यात्मिक यात्रा को भी सशक्त बनाता है।


बजरंग बाण (Bajrang Baan PDF), हनुमान जी की आराधना का एक अत्यंत प्रभावी और शक्तिशाली मंत्र है, जो न केवल धार्मिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है, बल्कि इसके मनोवैज्ञानिक लाभ भी अनगिनत हैं। इस मंत्र का नियमित जप व्यक्ति के मानसिक स्वास्थ्य पर सकारात्मक प्रभाव डालता है, जिससे वह तनाव, चिंता, और अवसाद जैसी समस्याओं से निजात पा सकता है।

मनोवैज्ञानिक लाभ:

भय और असुरक्षा का नाश: बजरंग बाण का पाठ भय और असुरक्षा जैसी भावनाओं को समाप्त करता है। यह मंत्र व्यक्ति को मानसिक रूप से मजबूत बनाता है, जिससे वह भयमुक्त होकर अपने जीवन के लक्ष्यों की ओर बढ़ता है। हनुमान जी की आराधना से व्यक्ति को यह विश्वास मिलता है कि वह किसी भी परिस्थिति में सुरक्षित है और उसे कोई भी शक्ति नुकसान नहीं पहुंचा सकती।

तनाव और चिंता में कमी: बजरंग बाण का पाठ मानसिक शांति प्रदान करता है। इसके जप से मस्तिष्क में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है, जिससे तनाव और चिंता जैसी समस्याओं में कमी आती है। मंत्र के उच्चारण से मस्तिष्क की अल्फा तरंगें सक्रिय होती हैं, जो मानसिक शांति और सुकून प्रदान करती हैं।

आत्मविश्वास और साहस में वृद्धि: बजरंग बाण का नियमित पाठ व्यक्ति के आत्मविश्वास और साहस को बढ़ाता है। हनुमान जी की आराधना से व्यक्ति में आत्मबल का संचार होता है, जिससे वह जीवन की कठिनाइयों और चुनौतियों का सामना करने में सक्षम होता है। यह आत्मविश्वास व्यक्ति को अपने निर्णयों और कार्यों में दृढ़ता से खड़ा रहने में मदद करता है।

एकाग्रता और ध्यान में सुधार: बजरंग बाण का जप मस्तिष्क की एकाग्रता और ध्यान केंद्रित करने की क्षमता को बढ़ाता है। नियमित रूप से इस मंत्र का पाठ करने से मस्तिष्क की तरंगें स्थिर होती हैं, जिससे ध्यान केंद्रित होता है और व्यक्ति की कार्यक्षमता में सुधार होता है। यह छात्रों और कामकाजी व्यक्तियों के लिए विशेष रूप से लाभकारी है, जो अपनी पढ़ाई या कार्यों में बेहतर प्रदर्शन करना चाहते हैं।

सकारात्मकता और मानसिक शांति: बजरंग बाण का पाठ नकारात्मक विचारों और भावनाओं को दूर करता है। यह व्यक्ति के मन को सकारात्मकता से भरता है और उसे मानसिक शांति प्रदान करता है। इससे व्यक्ति के सोचने-समझने की क्षमता में सुधार होता है और वह जीवन की चुनौतियों का सकारात्मक दृष्टिकोण से सामना कर पाता है।

आध्यात्मिक जागरूकता और मानसिक संतुलन: बजरंग बाण का नियमित जप व्यक्ति को आध्यात्मिक रूप से जागरूक करता है और उसे मानसिक संतुलन प्राप्त करने में मदद करता है। हनुमान जी की कृपा से व्यक्ति का आत्म-विश्वास बढ़ता है और वह आत्म-शांति की अनुभूति करता है। यह मानसिक संतुलन व्यक्ति को जीवन में सही निर्णय लेने और तनावपूर्ण परिस्थितियों में स्थिर बने रहने में सहायता करता है।


बजरंग बाण (Bajrang Baan PDF), हनुमान जी की आराधना का एक शक्तिशाली मंत्र है, जिसे संकटों से मुक्ति और अद्भुत लाभ प्राप्त करने के लिए पढ़ा जाता है। इसके साथ जुड़े चमत्कार और अद्वितीय प्रभावों के कारण, यह मंत्र भक्तों के बीच अत्यधिक लोकप्रिय और विश्वसनीय है। बजरंग बाण का पाठ करने से भक्तों को कई प्रकार के चमत्कारिक अनुभव होते हैं, जो उनकी आस्था और विश्वास को और भी अधिक मजबूत बनाते हैं।

चमत्कारी अनुभव:

  1. शत्रुओं पर विजय: बजरंग बाण का नियमित पाठ करने वाले भक्तों का मानना है कि इससे उन्हें अपने शत्रुओं पर विजय प्राप्त होती है। यह मंत्र नकारात्मक शक्तियों और बुरी नजरों को दूर भगाने में अत्यधिक प्रभावी होता है। इसके प्रभाव से शत्रु कमजोर हो जाते हैं और उनकी दुष्ट योजनाएं विफल हो जाती हैं।
  2. अकस्मात संकटों से मुक्ति: जीवन में आने वाले आकस्मिक संकटों से भी बजरंग बाण का पाठ करने से मुक्ति मिलती है। भक्तों का कहना है कि जब वे असाधारण कठिनाइयों या संकटों का सामना करते हैं, तो इस मंत्र का जप करने से उन्हें तुरंत समाधान मिलता है। चाहे वह आर्थिक संकट हो, स्वास्थ्य समस्या, या किसी प्रकार का अन्य संकट, बजरंग बाण का जप हर समस्या का समाधान प्रदान करता है।
  3. भूत-प्रेत और नकारात्मक ऊर्जाओं से रक्षा: बजरंग बाण का पाठ उन लोगों के लिए एक शक्तिशाली कवच का कार्य करता है, जो भूत-प्रेत या नकारात्मक ऊर्जाओं से परेशान होते हैं। इस मंत्र का जप करने से व्यक्ति के आसपास एक सुरक्षा घेरा बन जाता है, जो सभी प्रकार की नकारात्मक शक्तियों को दूर रखता है।
  4. मानसिक शांति और आत्मबल: बजरंग बाण का नियमित पाठ भक्तों को मानसिक शांति और आत्मबल प्रदान करता है। जो लोग मानसिक तनाव, अवसाद या चिंता से जूझ रहे होते हैं, उनके लिए यह मंत्र अत्यधिक लाभकारी साबित होता है। इसके जप से व्यक्ति को आत्मबल मिलता है, जिससे वह जीवन की चुनौतियों का सामना करने में सक्षम हो जाता है।
  5. असाधारण शक्ति और साहस: हनुमान जी की कृपा से बजरंग बाण का पाठ करने वाले भक्तों को असाधारण शक्ति और साहस प्राप्त होता है। यह मंत्र शारीरिक और मानसिक बल को बढ़ाता है, जिससे व्यक्ति हर परिस्थिति में दृढ़ और अडिग बना रहता है।

भक्तों के अनुभव:

कई भक्तों ने अपने जीवन में बजरंग बाण के पाठ से जुड़े चमत्कारिक अनुभव साझा किए हैं। कुछ ने बताया कि इस मंत्र के नियमित जप से उनके जीवन में ऐसी समस्याएं समाप्त हो गईं, जो उन्हें असंभव लग रही थीं। अन्य भक्तों ने कहा कि बजरंग बाण ने उनके जीवन में अप्रत्याशित समृद्धि और खुशियों का आगमन कराया।

चमत्कारों के पीछे की आस्था:

बजरंग बाण (Bajrang Baan PDF) के चमत्कारी प्रभावों का मुख्य कारण भक्तों की अटूट आस्था और विश्वास है। जब व्यक्ति पूरे मन और श्रद्धा के साथ इस मंत्र का पाठ करता है, तो वह हनुमान जी की कृपा को अनुभव करता है। यह आस्था और विश्वास ही है जो इस मंत्र को चमत्कारी बनाता है।


बजरंग बाण (Bajrang Baan PDF), हनुमान जी की आराधना का एक प्रसिद्ध और प्रभावशाली मंत्र है, जिसे संकटों से मुक्ति और मन की शांति प्राप्त करने के लिए किया जाता है। धार्मिक महत्व के अलावा, इस मंत्र का वैज्ञानिक दृष्टिकोण से भी विश्लेषण किया जा सकता है। बजरंग बाण के उच्चारण से उत्पन्न ध्वनि तरंगें और इसके मानसिक व शारीरिक प्रभाव, वैज्ञानिक आधार पर भी समझे जा सकते हैं।

ध्वनि और तरंगें:

बजरंग बाण का पाठ एक विशेष ध्वनि और लय में किया जाता है। जब इस मंत्र का उच्चारण किया जाता है, तो यह ध्वनि तरंगों का निर्माण करता है। ध्वनि तरंगें ऊर्जा के रूप में चारों ओर फैलती हैं और हमारे शरीर और मस्तिष्क पर गहरा प्रभाव डालती हैं। वैज्ञानिक दृष्टिकोण से देखा जाए तो इन ध्वनि तरंगों का कंपन हमारे मस्तिष्क की तरंगों के साथ तालमेल बिठाता है, जिससे मस्तिष्क में संतुलन स्थापित होता है और मानसिक शांति प्राप्त होती है।

ध्वनि चिकित्सा:

ध्वनि चिकित्सा में ध्वनि तरंगों का उपयोग मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य को संतुलित करने के लिए किया जाता है। बजरंग बाण का पाठ भी ध्वनि चिकित्सा का एक रूप माना जा सकता है। इसके नियमित उच्चारण से मस्तिष्क की अल्फा तरंगें सक्रिय होती हैं, जो तनाव को कम करती हैं और मानसिक शांति प्रदान करती हैं।

श्वसन और हृदय गति:

बजरंग बाण का पाठ करने के दौरान व्यक्ति का श्वसन और हृदय गति नियंत्रित होती है। वैज्ञानिक अध्ययन बताते हैं कि जब कोई व्यक्ति मंत्र का उच्चारण करता है, तो उसकी श्वसन प्रक्रिया धीमी और गहरी होती है। इससे हृदय गति भी सामान्य रहती है, जो तनाव और चिंता को कम करने में मदद करती है।

मस्तिष्क पर प्रभाव:

मंत्रों का उच्चारण, विशेष रूप से बजरंग बाण का, मस्तिष्क के लिए अत्यंत लाभकारी होता है। यह मस्तिष्क के उन हिस्सों को सक्रिय करता है जो भावनाओं, ध्यान और स्मृति से जुड़े होते हैं। इसके परिणामस्वरूप, व्यक्ति की मानसिक स्पष्टता और एकाग्रता में सुधार होता है।

ऑक्सीटोसिन और सेरोटोनिन का उत्पादन:

वैज्ञानिक दृष्टिकोण से, बजरंग बाण का पाठ करने से मस्तिष्क में ऑक्सीटोसिन और सेरोटोनिन जैसे हार्मोनों का उत्पादन बढ़ता है। ये हार्मोन खुशी, शांति, और संतुष्टि के भाव पैदा करते हैं, जिससे व्यक्ति को मानसिक शांति और आनंद की अनुभूति होती है।

शारीरिक स्वास्थ्य पर प्रभाव:

बजरंग बाण का उच्चारण शरीर के विभिन्न हिस्सों पर सकारात्मक प्रभाव डालता है। इसका नियमित जप शारीरिक ऊर्जा का संचार करता है और रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है। इसके साथ ही, यह उच्च रक्तचाप, चिंता, और अवसाद जैसी समस्याओं से राहत दिलाने में भी सहायक होता है।

मानसिक स्वास्थ्य और ध्यान:

बजरंग बाण का पाठ करने से ध्यान और मानसिक एकाग्रता में वृद्धि होती है। यह मस्तिष्क की तरंगों को स्थिर करता है, जिससे ध्यान केंद्रित होता है और व्यक्ति की मानसिक स्थिरता बनी रहती है। वैज्ञानिक अध्ययनों के अनुसार, ध्यान और मंत्र जाप करने से मस्तिष्क में न्यूरॉन्स की सक्रियता बढ़ती है, जिससे ध्यान और स्मरण शक्ति में सुधार होता है।


मंत्र, आध्यात्मिक और ध्वनि विज्ञान का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं, जिनका उपयोग प्राचीन काल से ध्यान, पूजा, और आंतरिक शांति प्राप्त करने के लिए किया जाता रहा है। मंत्रों का प्रभाव केवल धार्मिक या आध्यात्मिक दृष्टिकोण तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका वैज्ञानिक और मानसिक स्वास्थ्य पर भी गहरा प्रभाव पड़ता है।

मंत्रों की शक्ति:

मंत्र एक विशेष ध्वनि या शब्द समूह होता है, जिसका उच्चारण एक निश्चित लय और स्वर में किया जाता है। यह ध्वनि तरंगों को उत्पन्न करता है, जो हमारे मस्तिष्क, शरीर और पर्यावरण पर सकारात्मक प्रभाव डालती हैं। मंत्रों का नियमित उच्चारण व्यक्ति के मानसिक, शारीरिक और आध्यात्मिक स्वास्थ्य को संतुलित करता है।

मंत्रों का मानसिक प्रभाव:

  1. तनाव और चिंता का नाश: मंत्रों का नियमित जप मन में शांति और स्थिरता लाता है। यह तनाव और चिंता को दूर करने में मदद करता है और व्यक्ति के मानसिक स्वास्थ्य को सुधारता है।
  2. एकाग्रता में वृद्धि: मंत्रों के उच्चारण से मस्तिष्क में उत्पन्न होने वाली ध्वनि तरंगें ध्यान को बढ़ावा देती हैं। इससे व्यक्ति की एकाग्रता में सुधार होता है और उसकी कार्यक्षमता बढ़ती है।
  3. मानसिक शांति: मंत्रों का नियमित जप व्यक्ति के मन को शांत करता है और उसे आंतरिक शांति प्रदान करता है। यह मानसिक संतुलन बनाए रखने में सहायक होता है।

मंत्रों का शारीरिक प्रभाव:

  1. ऊर्जा का संचार: मंत्रों का उच्चारण शरीर में ऊर्जा का संचार करता है। इससे शारीरिक थकान और कमजोरी दूर होती है, और व्यक्ति में नए स्फूर्ति और जोश का संचार होता है।
  2. स्वास्थ्य में सुधार: मंत्रों की ध्वनि तरंगें शरीर के विभिन्न अंगों और प्रणालियों पर सकारात्मक प्रभाव डालती हैं। यह शारीरिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में सहायक होती हैं और रोगों से लड़ने की क्षमता को बढ़ाती हैं।
  3. रक्तचाप में सुधार: कुछ मंत्रों का उच्चारण नियमित रूप से करने से रक्तचाप को नियंत्रित करने में मदद मिलती है। इससे हृदय संबंधी समस्याओं का खतरा कम होता है।

मंत्रों का आध्यात्मिक प्रभाव:

  1. आध्यात्मिक उन्नति: मंत्रों का उच्चारण व्यक्ति को आध्यात्मिक रूप से मजबूत बनाता है। यह आत्मा के साथ जुड़ाव को बढ़ाता है और व्यक्ति को अपने उच्चतम स्वरूप के प्रति जागरूक करता है।
  2. आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार: मंत्रों के माध्यम से व्यक्ति अपने आंतरिक ऊर्जा केंद्रों (चक्रों) को सक्रिय करता है, जिससे उसकी आध्यात्मिक ऊर्जा में वृद्धि होती है।
  3. भक्ति और आस्था में वृद्धि: मंत्रों का नियमित जप व्यक्ति की भक्ति और आस्था को बढ़ाता है। यह उसे भगवान के करीब ले जाता है और उसकी आराधना को और भी अधिक सार्थक बनाता है।

मंत्रों का पर्यावरण पर प्रभाव:

मंत्रों के उच्चारण से उत्पन्न ध्वनि तरंगें केवल व्यक्ति पर ही नहीं, बल्कि उसके आसपास के वातावरण पर भी सकारात्मक प्रभाव डालती हैं। यह नकारात्मक ऊर्जा को दूर करती हैं और स्थान को शुद्ध और पवित्र बनाती हैं।


ध्वनि चिकित्सा एक प्राचीन विधा है, जिसमें ध्वनि और मंत्रों के माध्यम से शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक स्वास्थ्य को संतुलित किया जाता है। इसी क्रम में बजरंग बाण का पाठ भी ध्वनि चिकित्सा का एक प्रभावी माध्यम माना जाता है। बजरंग बाण का उच्चारण न केवल आध्यात्मिक बल प्रदान करता है, बल्कि यह ध्वनि तरंगों के माध्यम से मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य पर भी सकारात्मक प्रभाव डालता है।

ध्वनि चिकित्सा का सिद्धांत:

ध्वनि चिकित्सा का सिद्धांत यह है कि ध्वनि तरंगें हमारे शरीर और मन के विभिन्न हिस्सों पर असर डालती हैं। ये तरंगें शरीर की कोशिकाओं और मानसिक ऊर्जा के साथ तालमेल बिठाती हैं, जिससे तनाव कम होता है, मन शांत होता है, और शरीर में ऊर्जा का संचार होता है।

बजरंग बाण का प्रभाव:

बजरंग बाण का पाठ जब सही तरीके से किया जाता है, तो इसके उच्चारण से उत्पन्न ध्वनि तरंगें व्यक्ति के मन और शरीर पर गहराई से प्रभाव डालती हैं। हनुमान जी के मंत्रों का उच्चारण एक विशेष प्रकार की ध्वनि तरंगों का निर्माण करता है, जो मानसिक और शारीरिक अवरोधों को दूर करने में सहायक होती हैं।

  1. मानसिक शांति: बजरंग बाण का पाठ मानसिक शांति प्रदान करता है। इसके नियमित उच्चारण से तनाव, चिंता और भय का नाश होता है। यह मंत्र व्यक्ति के मन को एकाग्र करता है और ध्यान केंद्रित करने में मदद करता है।
  2. शारीरिक स्वास्थ्य: ध्वनि तरंगों का सीधा असर हमारे शारीरिक स्वास्थ्य पर भी पड़ता है। बजरंग बाण का उच्चारण शरीर में ऊर्जा का संचार करता है, जिससे शारीरिक थकान और रोगों से लड़ने की क्षमता बढ़ती है।
  3. आध्यात्मिक बल: बजरंग बाण का पाठ आध्यात्मिक उन्नति में भी सहायक होता है। इसके नियमित पाठ से व्यक्ति को आध्यात्मिक बल मिलता है, जिससे वह जीवन की चुनौतियों का सामना कर सकता है और अपने आत्मबल को मजबूत कर सकता है।

बजरंग बाण और ध्वनि चिकित्सा का संयोजन:

जब बजरंग बाण को ध्वनि चिकित्सा के दृष्टिकोण से देखा जाता है, तो यह स्पष्ट होता है कि इसका प्रभाव न केवल आध्यात्मिक होता है, बल्कि मानसिक और शारीरिक स्तर पर भी लाभकारी होता है। इसके नियमित उच्चारण से व्यक्ति के चारों ओर सकारात्मक ऊर्जा का निर्माण होता है, जो नकारात्मक ऊर्जा और बुरी शक्तियों को दूर करता है।

उपयोगिता:

ध्वनि चिकित्सा के रूप में बजरंग बाण का उपयोग करने के लिए इसे नियमित रूप से सुबह या शाम के समय एकाग्रता के साथ पढ़ा जा सकता है। इसे शांत और शुद्ध स्थान पर करने से इसका प्रभाव और भी अधिक होता है। इस मंत्र के प्रभाव से व्यक्ति को न केवल शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य लाभ मिलता है, बल्कि उसे हनुमान जी की कृपा भी प्राप्त होती है।

बजरंग बाण और ध्वनि चिकित्सा का यह संयोजन एक प्रभावी साधन है, जो व्यक्ति के संपूर्ण स्वास्थ्य और कल्याण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।


बजरंग बाण, हनुमान जी की आराधना का एक अत्यंत शक्तिशाली और प्रभावशाली मंत्र है, जिसकी महत्ता सनातन धर्म में अत्यधिक मानी जाती है। यह मंत्र विशेष रूप से उन भक्तों के लिए महत्वपूर्ण है जो कठिनाइयों और संकटों का सामना कर रहे हैं और हनुमान जी की कृपा प्राप्त करना चाहते हैं।

बजरंग बाण का पाठ करने से व्यक्ति को मानसिक शांति, साहस, और आत्मविश्वास प्राप्त होता है, जिससे वह जीवन की चुनौतियों का डटकर सामना कर सकता है। यह मंत्र न केवल भक्तों को शत्रुओं और नकारात्मक ऊर्जाओं से सुरक्षा प्रदान करता है, बल्कि उन्हें शारीरिक और मानसिक बल भी देता है।

इसके अतिरिक्त, बजरंग बाण का पाठ भक्तों के जीवन में सुख, शांति, और समृद्धि लाता है। यह हनुमान जी की महिमा का गुणगान करता है और भक्तों को उनकी कृपा प्राप्त करने में सहायक होता है। इसलिए, बजरंग बाण को संकटों से मुक्ति और हनुमान जी की कृपा प्राप्त करने का अचूक उपाय माना जाता है।


बजरंग बाण (Bajrang Baan PDF) का पाठ हनुमान जी की कृपा प्राप्त करने का एक अत्यंत प्रभावशाली साधन है। इसे करने से जीवन में शांति, समृद्धि, और संकटों से मुक्ति प्राप्त होती है। इस मंत्र का पाठ करने के लिए कुछ विशेष नियम और विधियां हैं, जिनका पालन करने से इसका पूर्ण प्रभाव प्राप्त होता है।

पाठ करने का समय:

बजरंग बाण का पाठ मंगलवार और शनिवार के दिन करना अत्यधिक शुभ माना जाता है, क्योंकि ये दिन हनुमान जी को समर्पित होते हैं। हालांकि, इसे किसी भी दिन किया जा सकता है, लेकिन सुबह का समय सबसे उपयुक्त है। सूर्योदय के समय पाठ करने से वातावरण शुद्ध होता है, जिससे ध्यान और मन की एकाग्रता बनी रहती है।

पाठ की विधि:

  1. स्नान और शुद्धता: पाठ करने से पहले स्नान करके शुद्ध वस्त्र धारण करें। शुद्धता बनाए रखने के लिए पाठ के समय शरीर और मन को शांत और शुद्ध रखें।
  2. स्थान: हनुमान जी के चित्र या प्रतिमा के सामने बैठकर पाठ करें। इसे एक शांत और स्वच्छ स्थान पर किया जाना चाहिए, जहां ध्यान भंग न हो।
  3. दीपक और प्रसाद: हनुमान जी के समक्ष दीपक जलाएं और उनके प्रिय पदार्थ जैसे लाल फूल, सिंदूर, और गुड़ का प्रसाद अर्पित करें।
  4. मंत्र का उच्चारण: बजरंग बाण का पाठ करते समय पूरे मन और श्रद्धा के साथ मंत्र का उच्चारण करें। मंत्र का उच्चारण स्पष्ट और शुद्ध होना चाहिए।
  5. ध्यान: पाठ के दौरान मन को एकाग्र रखें और हनुमान जी का ध्यान करें। अपनी सभी समस्याओं और संकटों से मुक्ति पाने की प्रार्थना करें।
  6. समाप्ति: पाठ समाप्त होने के बाद हनुमान जी की आरती करें और उनके चरणों में अपने कष्टों से मुक्ति के लिए प्रार्थना करें। प्रसाद को सभी के बीच बांटें और इसे स्वयं भी ग्रहण करें।

महत्वपूर्ण बातें:

  • बजरंग बाण का पाठ नियमित रूप से करने से जीवन में शांति और समृद्धि बनी रहती है।
  • इसे करते समय किसी भी प्रकार की चिंता, डर, या नकारात्मकता को मन में स्थान न दें।
  • यदि विशेष परिस्थिति में पाठ किया जा रहा है, तो इसे 11 बार या 21 बार करने से विशेष लाभ प्राप्त होता है।

बजरंग बाण का पाठ एक अद्भुत साधन है, जो हनुमान जी की कृपा से जीवन में आने वाली सभी प्रकार की बाधाओं को दूर करने में सहायक होता है। इसका नियमित और सही विधि से किया गया पाठ न केवल संकटों से मुक्ति दिलाता है, बल्कि व्यक्ति के जीवन में सकारात्मकता, सुख, और समृद्धि लाता है।


1. बजरंग बाण का पाठ कितने बजे करना चाहिए?

बजरंग बाण (Bajrang Baan) का पाठ करने का सबसे शुभ समय सुबह का होता है, विशेष रूप से सूर्योदय के समय। इसे करते समय स्नान करके शुद्ध वस्त्र धारण करना चाहिए। सुबह का समय इसलिए महत्वपूर्ण माना जाता है क्योंकि इस समय वातावरण शुद्ध और शांत होता है, जिससे मन एकाग्र रहता है और हनुमान जी की आराधना में पूर्ण रूप से ध्यान केंद्रित किया जा सकता है। हालांकि, यदि सुबह पाठ करना संभव न हो, तो इसे संध्या के समय भी किया जा सकता है, जब सूर्यास्त के बाद वातावरण में शांति होती है। इस समय भी शुद्धता और ध्यान का विशेष ध्यान रखना चाहिए। महत्वपूर्ण यह है कि बजरंग बाण का पाठ श्रद्धा और विश्वास के साथ किया जाए, चाहे वह किसी भी समय हो। नियमित रूप से इसे करने से हनुमान जी की कृपा प्राप्त होती है और जीवन में शांति और समृद्धि आती है।

2. बजरंग बाण से क्या फायदा होता है?

बजरंग बाण (Bajrang Baan) का पाठ हनुमान जी की कृपा प्राप्त करने का एक शक्तिशाली साधन है, जिससे भक्तों को कई लाभ मिलते हैं। इसका नियमित पाठ व्यक्ति के जीवन में आने वाली समस्याओं और संकटों को दूर करता है। मानसिक शांति, साहस, और आत्मविश्वास में वृद्धि होती है, जिससे व्यक्ति कठिन परिस्थितियों का सामना कर सकता है। बजरंग बाण के पाठ से नकारात्मक ऊर्जा और भय दूर होते हैं, और सकारात्मकता का संचार होता है। हनुमान जी की कृपा से जीवन में सफलता, सुख और समृद्धि प्राप्त होती है। यह मंत्र भक्तों को हर प्रकार की बुरी शक्तियों और दुश्मनों से सुरक्षा प्रदान करता है। बजरंग बाण का पाठ शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को भी बेहतर बनाता है, और भक्तों को आध्यात्मिक बल प्रदान करता है। इसलिए, बजरंग बाण का नियमित पाठ जीवन में शांति और समृद्धि लाने का एक अचूक उपाय है।

3. क्या बजरंग बाण रोज नहीं पढ़ना चाहिए?

बजरंग बाण (Bajrang Baan) का पाठ एक शक्तिशाली मंत्र है, जिसे सावधानीपूर्वक और श्रद्धा के साथ पढ़ना चाहिए। इसे रोज़ पढ़ने में कोई नुकसान नहीं है, लेकिन यह महत्वपूर्ण है कि इसे बिना किसी उद्देश्य के केवल रूटीन के रूप में न पढ़ा जाए। बजरंग बाण का पाठ संकटों से मुक्ति, हनुमान जी की कृपा प्राप्त करने और विशेष परिस्थितियों में किया जाता है। यदि आप इसे नियमित रूप से पढ़ना चाहते हैं, तो इसे हनुमान जी की आराधना के रूप में श्रद्धा और विश्वास के साथ करें। यह सुनिश्चित करें कि आप इसे पढ़ते समय पूरी तरह से एकाग्र और शांत मन से पाठ करें। कुछ लोग मानते हैं कि इसे रोज़ पढ़ने से अनावश्यक समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं, लेकिन यह केवल तभी होता है जब पाठ बिना ध्यान और सम्मान के किया जाए। इसलिए, यदि आप नियमित रूप से बजरंग बाण पढ़ना चाहते हैं, तो इसे सही मानसिकता और उद्देश्य के साथ करें।

4. बजरंग बाण कौन पढ़ सकता है?

बजरंग बाण (Bajrang Baan) एक सार्वभौमिक मंत्र है जिसे कोई भी व्यक्ति पढ़ सकता है, जो हनुमान जी की कृपा और आशीर्वाद प्राप्त करना चाहता है। यह मंत्र विशेष रूप से उन लोगों के लिए अत्यधिक प्रभावशाली है जो अपने जीवन में कठिनाइयों और संकटों का सामना कर रहे हैं। बजरंग बाण का पाठ करने के लिए किसी विशेष योग्यता या साधना की आवश्यकता नहीं होती, केवल श्रद्धा और विश्वास आवश्यक है। इसे युवा, बुजुर्ग, पुरुष, महिला, या किसी भी धार्मिक पृष्ठभूमि का व्यक्ति पढ़ सकता है। हालांकि, इसे पढ़ते समय शुद्धता और मानसिक एकाग्रता का ध्यान रखना आवश्यक है। पाठ करने से पहले स्नान करना, शुद्ध वस्त्र धारण करना, और शांत मन से हनुमान जी की आराधना करना चाहिए। बजरंग बाण का पाठ करने के लिए कोई विशेष नियम नहीं है, केवल सच्ची भक्ति और श्रद्धा से इसका उच्चारण करना चाहिए, जिससे हनुमान जी की कृपा प्राप्त हो सके।

5. क्या औरतें बजरंग बाण पढ़ सकती हैं?

हाँ, औरतें भी बजरंग बाण (Bajrang Baan) का पाठ कर सकती हैं। हनुमान जी की कृपा प्राप्त करने के लिए बजरंग बाण का पाठ करने में किसी भी प्रकार का लिंग भेद नहीं है। हनुमान जी की भक्ति सभी के लिए समान है, चाहे वह पुरुष हो या महिला। बजरंग बाण एक सार्वभौमिक मंत्र है, जो हर व्यक्ति के लिए लाभकारी है। महिलाएं भी हनुमान जी की आराधना के लिए बजरंग बाण का पाठ कर सकती हैं और उनकी कृपा प्राप्त कर सकती हैं। हालांकि, पाठ करते समय शुद्धता, एकाग्रता और श्रद्धा का ध्यान रखना आवश्यक है। महिलाएं विशेष रूप से मंगलवार और शनिवार के दिन बजरंग बाण का पाठ कर सकती हैं, क्योंकि ये दिन हनुमान जी को समर्पित माने जाते हैं। इस मंत्र का प्रभाव सभी के लिए समान होता है, और हनुमान जी की कृपा से जीवन में सुख, शांति और समृद्धि की प्राप्ति होती है।

6. 11 बार बजरंग बाण का पाठ करने से क्या होता है?

11 बार बजरंग बाण का पाठ करने से हनुमान जी की विशेष कृपा प्राप्त होती है। यह माना जाता है कि 11 बार बजरंग बाण का पाठ करने से व्यक्ति के जीवन में आने वाली सभी प्रकार की बाधाओं और संकटों का समाधान होता है। 11 बार इस मंत्र का पाठ करने से नकारात्मक ऊर्जाओं से सुरक्षा मिलती है और व्यक्ति के चारों ओर एक सकारात्मक ऊर्जा का घेरा बन जाता है। हनुमान जी की कृपा से व्यक्ति को मानसिक शांति, साहस और आत्मविश्वास मिलता है, जिससे वह किसी भी कठिन परिस्थिति का सामना कर सकता है। बजरंग बाण के 11 बार पाठ करने से शत्रुओं से भी रक्षा होती है और बुरी शक्तियों का नाश होता है। यह मंत्र भक्तों को शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक बल प्रदान करता है, जिससे उनका जीवन सुख, शांति और समृद्धि से भर जाता है। नियमित रूप से 11 बार बजरंग बाण का पाठ करने से जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आते हैं।


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