Tuesday, February 10, 2026
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भगवद्‍ गीता आरती (Aarti Shri Bhagwat Geeta)

By Dr. Hemlata | Reviewed by Vedic Scholar | Last Updated: January 2026 - This devotional text has been carefully verified against widely accepted traditional sources to preserve correct wording, pronunciation, and spiritual intent for daily recitation.
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भगवद्‍ गीता आरती (Aarti Shri Bhagwat Geeta) का एक प्रसिद्ध आरती है जिसमें इस महाकाव्य के महत्वपूर्ण सन्देशों को समर्पित किया गया है। यह आरती भगवद्‍ गीता के अनमोल ज्ञान, धार्मिक तत्त्व और मानवता के मूल्यों को स्तुति और प्रशंसा का अद्वितीय रूप मानी जाती है। आप हमारी वेबसाइट में दुर्गा आरतीदुर्गा चालीसादुर्गा अमृतवाणी और दुर्गा मंत्र भी पढ़ सकते हैं।

इसमें भगवद्‍ गीता के प्रत्येक अध्याय की महत्वपूर्ण बातें और उसके उच्च महिमा को बयान किया गया है, जिससे पाठकों को आध्यात्मिक उद्दीपना और भगवद्‍ गीता के आदर्शों की वास्तविकता समझने में मदद मिलती है। यह आरती हिन्दू धर्म के महान ग्रंथ भगवद्‍ गीता के माध्यम से मानवता के लिए प्रेरणा स्थापित करती है, उसके मार्गदर्शन में आध्यात्मिक समृद्धि और शांति की प्राप्ति के लिए प्रार्थना करती है।



  • हिंदी / संस्कृत
  • English

|| भगवद्‍ गीता आरती ||

जय भगवद् गीते,
जय भगवद् गीते ।
हरि-हिय-कमल-विहारिणि,
सुन्दर सुपुनीते ॥

कर्म-सुमर्म-प्रकाशिनि,
कामासक्तिहरा ।
तत्त्वज्ञान-विकाशिनि,
विद्या ब्रह्म परा ॥
जय भगवद् गीते…॥

निश्चल-भक्ति-विधायिनि,
निर्मल मलहारी ।
शरण-सहस्य-प्रदायिनि,
सब विधि सुखकारी ॥
जय भगवद् गीते…॥

राग-द्वेष-विदारिणि,
कारिणि मोद सदा ।
भव-भय-हारिणि,
तारिणि परमानन्दप्रदा ॥
जय भगवद् गीते…॥

आसुर-भाव-विनाशिनि,
नाशिनि तम रजनी ।
दैवी सद् गुणदायिनि,
हरि-रसिका सजनी ॥
जय भगवद् गीते…॥

समता, त्याग सिखावनि,
हरि-मुख की बानी ।
सकल शास्त्र की स्वामिनी,
श्रुतियों की रानी ॥
जय भगवद् गीते…॥

दया-सुधा बरसावनि,
मातु! कृपा कीजै ।
हरिपद-प्रेम दान कर,
अपनो कर लीजै ॥
जय भगवद् गीते…॥

जय भगवद् गीते,
जय भगवद् गीते ।
हरि-हिय-कमल-विहारिणि,
सुन्दर सुपुनीते ॥

|| Aarti Shri Bhagwat Geeta ||

Jay Bhagavad Geete,
Jay Bhagavad Geete.
Hari-hiya-kamal-viharini,
Sundar supunite.

Karma-sumarma-prakashini,
Kama-asaktihara.
Tattvajnana-vikashini,
Vidya Brahma para.
Jay Bhagavad Geete…

Nischala-bhakti-vidhayini,
Nirmala malahari.
Sharana-sahasya-pradayini,
Sab vidhi sukhakari.
Jay Bhagavad Geete…

Raga-dvesha-vidarini,
Karini moda sada.
Bhava-bhaya-harini,
Taarini paramanandaprada.
Jay Bhagavad Geete…

Aasura-bhava-vinashini,
Nashini tam rajani.
Daivi sad gunadayini,
Hari-rasika sajani.
Jay Bhagavad Geete…

Samata, tyag sikhavani,
Hari-mukh ki bani.
Sakal shastra ki swamini,
Shrutiyo ki rani.
Jay Bhagavad Geete…

Daya-sudha barsavani,
Matu! Krupa kijiye.
Haripada-prema dan kar,
Apano kar lijiye.
Jay Bhagavad Geete…

Jay Bhagavad Geete,
Jay Bhagavad Geete.
Hari-hiya-kamal-viharini,
Sundar supunite.


भगवद्‍ गीता आरती के लाभ

भगवद्‍ गीता, जिसे भारतीय संस्कृति और दर्शन के सबसे महत्वपूर्ण ग्रंथों में से एक माना जाता है, का पाठ और आरती एक गहन आध्यात्मिक अनुभव प्रदान करता है। इस लेख में, हम विस्तार से समझेंगे कि भगवद्‍ गीता आरती के क्या-क्या लाभ हो सकते हैं और यह हमारे जीवन को कैसे प्रभावित कर सकती है।

आध्यात्मिक उन्नति

भगवद्‍ गीता आरती का नियमित पाठ और संगीतिक वातावरण आध्यात्मिक उन्नति में सहायक होता है। भगवद्‍ गीता में भगवान श्रीकृष्ण ने जीवन के कई महत्वपूर्ण पहलुओं पर प्रकाश डाला है। आरती के दौरान गीता के श्लोकों का पाठ करने से, व्यक्ति भगवान के दिव्य ज्ञान को समझने और आत्मसात करने में सक्षम होता है। यह ध्यान और साधना के माध्यम से आत्मा की शुद्धि और उच्च आध्यात्मिक स्थिति प्राप्त करने में मदद करता है।

मानसिक शांति और स्थिरता

आरती के समय गीता के श्लोकों का समर्पण मानसिक शांति और स्थिरता प्रदान करता है। यह एक प्रकार की ध्यान की प्रक्रिया होती है, जो मन को स्थिर करने और मानसिक तनाव को कम करने में सहायक होती है। जब व्यक्ति गीता की शिक्षाओं का अनुसरण करता है, तो वह जीवन की चुनौतियों और परेशानियों को शांतिपूर्वक और समझदारी से निपट सकता है।

जीवन के उद्देश्य की समझ

भगवद्‍ गीता जीवन के उद्देश्य और जीवन की वास्तविकता को समझाने में सहायक होती है। आरती के समय गीता के श्लोकों का सुनना और उन्हें मनन करना, व्यक्ति को अपने जीवन के वास्तविक उद्देश्य की पहचान करने में मदद करता है। यह व्यक्ति को समझाता है कि सच्चा सुख और शांति केवल भौतिक वस्तुओं या परिस्थितियों पर निर्भर नहीं होती, बल्कि आंतरिक शांति और आत्मज्ञान पर आधारित होती है।

धार्मिक और सांस्कृतिक संबंध

भगवद्‍ गीता आरती न केवल आध्यात्मिक लाभ देती है, बल्कि यह धार्मिक और सांस्कृतिक संबंधों को भी मजबूत करती है। जब परिवार या समुदाय एक साथ गीता की आरती करते हैं, तो यह एकता और सामंजस्य का संदेश फैलाता है। यह धार्मिक परंपराओं को बनाए रखने और सांस्कृतिक धरोहर को संजोने में सहायक होता है।

सकारात्मक ऊर्जा का संचार

आरती के समय गीता की उपासना से सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। गीता के श्लोकों के उच्चारण से वातावरण में सकारात्मकता का प्रवाह होता है, जो व्यक्ति के मन और आत्मा को शुद्ध करता है। यह सकारात्मक ऊर्जा जीवन में प्रगति और समृद्धि की ओर ले जाती है।

स्वास्थ्य लाभ

गौर करें कि आरती के समय मन की शांति और ध्यान की प्रक्रिया से मानसिक स्वास्थ्य लाभ होता है। मानसिक शांति का सीधा संबंध शारीरिक स्वास्थ्य से होता है। जब व्यक्ति मानसिक रूप से स्वस्थ होता है, तो इसका सकारात्मक प्रभाव शारीरिक स्वास्थ्य पर भी पड़ता है। गीता की आरती के नियमित पाठ से व्यक्ति अधिक स्वस्थ और उर्जावान महसूस कर सकता है।

आत्म-संयम और अनुशासन

भगवद्‍ गीता आरती के नियमित पाठ से आत्म-संयम और अनुशासन की भावना विकसित होती है। नियमित रूप से आरती करने से व्यक्ति अपनी दिनचर्या में अनुशासन बनाए रखता है, जिससे उसकी जीवनशैली में संतुलन और संगति बनी रहती है। यह अनुशासन जीवन के अन्य क्षेत्रों में भी सकारात्मक प्रभाव डालता है।

कर्मयोग और स्वधर्म की समझ

भगवद्‍ गीता कर्मयोग और स्वधर्म की महत्वपूर्ण शिक्षाएं देती है। आरती के दौरान गीता के श्लोकों का पाठ करने से व्यक्ति को अपने कर्मों और कर्तव्यों को समझने में मदद मिलती है। यह व्यक्ति को अपने स्वधर्म के पालन और निष्काम कर्म करने के महत्व को समझाता है, जिससे जीवन में एक नई दिशा और उद्देश्य मिलता है।

नैतिक और आध्यात्मिक सुधार

गीता की आरती से नैतिक और आध्यात्मिक सुधार होता है। गीता में भगवान श्रीकृष्ण ने धर्म, सत्य और नैतिकता के महत्व पर प्रकाश डाला है। आरती के समय इन शिक्षाओं का पालन करने से व्यक्ति में नैतिक मूल्यों का विकास होता है और वह एक सच्चे और ईमानदार जीवन की ओर अग्रसर होता है।

दुखों और समस्याओं से मुक्ति

भगवद्‍ गीता की शिक्षाएं और आरती व्यक्ति को दुखों और समस्याओं का सामना करने की शक्ति देती हैं। गीता के श्लोक जीवन के संघर्षों और समस्याओं को समझने और उनसे पार पाने की विधियाँ प्रदान करते हैं। जब व्यक्ति इन शिक्षाओं का पालन करता है, तो वह अपने जीवन के दुखों और समस्याओं से मुक्त हो सकता है।

भगवद्‍ गीता आरती के लाभ अत्यधिक व्यापक और गहन हैं। यह न केवल आध्यात्मिक उन्नति और मानसिक शांति प्रदान करती है, बल्कि धार्मिक, सांस्कृतिक, और नैतिक लाभ भी देती है। गीता की शिक्षाएं जीवन के हर क्षेत्र में सकारात्मक बदलाव लाने की क्षमता रखती हैं, और इसके नियमित अभ्यास से व्यक्ति का जीवन अधिक समृद्ध और पूर्ण बन सकता है। भगवद्‍ गीता आरती एक दिव्य अनुभव है जो जीवन को एक नई दिशा और उद्देश्य प्रदान करती है।


गीता का कौन सा अध्याय रोज पढ़ना चाहिए?

आप रोजाना भगवत गीता का अध्याय 12 (भक्ति योग) या अध्याय 2 (सांख्य योग) पढ़ सकते हैं। अध्याय 12 भक्ति और समर्पण की महत्ता पर केंद्रित है, जबकि अध्याय 2 जीवन के तत्वज्ञान और कर्तव्य की शिक्षा देता है।

गीता का शक्तिशाली मंत्र क्या है?

भगवत गीता में कई शक्तिशाली मंत्र हैं, लेकिन अध्याय 9 का श्लोक 22 “अनन्याश्चिन्तयन्तो मां…” और अध्याय 18 का श्लोक 66 “सर्वधर्मान्परित्यज्य…” विशेष रूप से शक्तिशाली माने जाते हैं।

गीता का पहला शब्द क्या है?

भगवत गीता का पहला शब्द “धृतराष्ट्र” है, जो पहले श्लोक के प्रारंभ में आता है: “धृतराष्ट्र उवाच…”

भगवत गीता कब पढ़ना चाहिए?

भगवत गीता का पाठ किसी भी समय किया जा सकता है। परन्तु, ब्रह्म मुहूर्त (सुबह 4-6 बजे) का समय विशेष रूप से उपयुक्त माना जाता है क्योंकि उस समय मन शांत और एकाग्र होता है।

क्या हम बिस्तर पर गीता पढ़ सकते हैं?

हाँ, आप बिस्तर पर भी भगवत गीता का पाठ कर सकते हैं। महत्वपूर्ण यह है कि आप इसे मन और आत्मा की शुद्धि के उद्देश्य से पढ़ें, चाहे वह किसी भी स्थान पर हो।

असली गीता कौन सी है?

भगवत गीता का मूल पाठ संस्कृत में है। कई विद्वानों द्वारा इसका अनुवाद और व्याख्या की गई है, लेकिन असली गीता वह है जो संस्कृत में श्रीमद्भगवद्गीता के नाम से जानी जाती है।

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Hemlata – Experienced Hindu Devotee and Devotional Text Expert
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