Wednesday, January 28, 2026
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ॐ जय धर्म धुरन्धर (Dharmraj Ki Aarti – Om Jai Dharm Dhurandar Lyrics)

By Dr. Hemlata | Reviewed by Vedic Scholar | Last Updated: January 2026 - This devotional text has been carefully verified against widely accepted traditional sources to preserve correct wording, pronunciation, and spiritual intent for daily recitation.
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धर्मराज की आरती (Om Jai Dharm Dhurandar) को हिंदू धर्म में बहुत महत्व दिया जाता है। यह आरती धर्मराज की स्तुति और उपासना के लिए गाई जाती है। धर्मराज को न्याय के देवता के रूप में पूजा जाता है, जो न्यायप्रियता और सत्य के प्रतीक माने जाते हैं। उनकी आरती के माध्यम से भक्तगण उनकी कृपा और आशीर्वाद प्राप्त करने की कामना करते हैं।


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Om Jai Dharm Dhurandar Lyrics PDF


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|| धर्मराज आरती – ॐ जय धर्म धुरन्धर ||

ॐ जय जय धर्म धुरन्धर,
जय लोकत्राता ।
धर्मराज प्रभु तुम ही,
हो हरिहर धाता ॥

जय देव दण्ड पाणिधर यम तुम,
पापी जन कारण ।
सुकृति हेतु हो पर तुम,
वैतरणी ताराण ॥2॥

न्याय विभाग अध्यक्ष हो,
नीयत स्वामी ।
पाप पुण्य के ज्ञाता,
तुम अन्तर्यामी ॥3॥

दिव्य दृष्टि से सबके,
पाप पुण्य लखते ।
चित्रगुप्त द्वारा तुम,
लेखा सब रखते ॥4॥

छात्र पात्र वस्त्रान्न क्षिति,
शय्याबानी ।
तब कृपया, पाते हैं,
सम्पत्ति मनमानी ॥5॥

द्विज, कन्या, तुलसी,
का करवाते परिणय ।
वंशवृद्धि तुम उनकी,
करते नि:संशय ॥6॥

दानोद्यापन-याजन,
तुष्ट दयासिन्धु ।
मृत्यु अनन्तर तुम ही,
हो केवल बन्धु ॥7॥

धर्मराज प्रभु,
अब तुम दया ह्रदय धारो ।
जगत सिन्धु से स्वामिन,
सेवक को तारो ॥8॥

धर्मराज जी की आरती,
जो कोई नर गावे ।
धरणी पर सुख पाके,
मनवांछित फल पावे ॥9॥

|| Dharmraj Ki Aarti ||

Om, jay jay dharma dhurandhar,
Jay lokatraata.
Dharmaraj prabhu tum hi,
Ho harihar dhaata.

Jay dev dand paanidhar yam tum,
Paapi jan kaaran.
Sukriti hetu ho par tum,
Vaitarani taaran.

Nyay vibhaag adhyaksh ho,
Niyat swami.
Paap punya ke gyaata,
Tum antaryaami.

Divy drishti se sabke,
Paap punya lakhte.
Chitragupt dwara tum,
Lekha sab rakhte.

Chhatra patra vastraann kshiti,
Shayyabani.
Tab kripaya, paate hain,
Sampatti manmaani.

Dwij, kanya, tulsi,
Ka karvaate parinay.
Vanshvriddhi tum unki,
Karte nishchay.

Daanodyapan-yajan,
Tusht dayasindhu.
Mrityu anantar tum hi,
Ho keval bandhu.

Dharmaraj prabhu,
Ab tum daya hriday dhaaro.
Jagat sindhu se swaamin,
Sevak ko taaro.

Dharmaraj ji ki aarti,
Jo koi nar gaave.
Dharani par sukh paake,
Manvaanchhit phal paave.


धर्मराज आरती– ॐ जय धर्म धुरन्धर के लाभ

धर्मराज की आरती का हिन्दू धर्म में विशेष महत्व है। आरती गाने के कई आध्यात्मिक, मानसिक और सामाजिक लाभ होते हैं।

आध्यात्मिक लाभ

आध्यात्मिक उन्नति: धर्मराज की आरती गाने से व्यक्ति की आध्यात्मिक उन्नति होती है। यह आरती हमें भगवान के न्याय और धर्म की महिमा का स्मरण कराती है, जिससे हमारी आत्मा को शांति और संतोष मिलता है।

सत्य और धर्म का पालन: आरती गाने से सत्य और धर्म का पालन करने की प्रेरणा मिलती है। धर्मराज न्याय के देवता हैं, इसलिए उनकी आरती गाकर हम सत्य और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रतिज्ञा करते हैं।

पुण्य की प्राप्ति: धार्मिक गतिविधियों में भाग लेने से पुण्य की प्राप्ति होती है। धर्मराज की आरती गाने से भी व्यक्ति को पुण्य मिलता है, जो जीवन के हर क्षेत्र में सकारात्मक परिणाम लाता है।

भक्तिमार्ग में प्रगति: आरती गाने से भक्तिमार्ग में प्रगति होती है। यह आरती हमें धर्मराज के प्रति श्रद्धा और भक्ति को बढ़ाने में सहायक होती है।

मानसिक लाभ

मानसिक शांति: धर्मराज की आरती गाने से मानसिक शांति मिलती है। जब हम इस आरती को पूरी श्रद्धा के साथ गाते हैं, तो हमारे मन में शांति और स्थिरता का अनुभव होता है।

तनाव में कमी: आरती गाने से मानसिक तनाव कम होता है। धार्मिक संगीत और भजन सुनने से मानसिक शांति मिलती है, जो तनाव को दूर करने में सहायक होता है।

ध्यान और ध्यान केंद्रित करने की क्षमता: आरती गाने से ध्यान केंद्रित करने की क्षमता में सुधार होता है। यह आरती हमें ध्यान और एकाग्रता बढ़ाने में मदद करती है, जिससे हमारे दैनिक जीवन के कार्यों में भी सुधार होता है।

आत्मविश्व Ias में वृद्धि: आरती गाने से आत्मविश्वास में वृद्धि होती है। यह आरती हमें धर्म और न्याय के मार्ग पर चलने का साहस देती है, जिससे हमारे आत्मविश्वास में वृद्धि होती है।

सामाजिक लाभ

समाज में समरसता: धर्मराज की आरती गाने से समाज में समरसता और एकता का अनुभव होता है। धार्मिक गतिविधियों में भाग लेने से समाज के सभी वर्गों के लोग एक साथ आते हैं, जिससे सामाजिक समरसता बढ़ती है।

सामाजिक सेवा का प्रोत्साहन: धर्मराज की आरती गाने से सामाजिक सेवा का प्रोत्साहन मिलता है। धर्मराज न्याय के देवता हैं, इसलिए उनकी आरती गाकर हम समाज में न्याय और सेवा का महत्व समझते हैं।

पारिवारिक एकता: आरती गाने से पारिवारिक एकता बढ़ती है। जब परिवार के सभी सदस्य एक साथ आरती गाते हैं, तो उनमें प्रेम और स्नेह बढ़ता है, जिससे पारिवारिक संबंध मजबूत होते हैं।

सांस्कृतिक धरोहर का संरक्षण: धर्मराज की आरती गाने से हमारी सांस्कृतिक धरोहर का संरक्षण होता है। यह आरती हमारी परंपराओं और धार्मिक मान्यताओं को सहेजने में सहायक होती है।

अन्य लाभ

आनंद और उल्लास: आरती गाने से आनंद और उल्लास का अनुभव होता है। धार्मिक संगीत और भजन सुनने से हमारे मन में प्रसन्नता का संचार होता है।

स्वास्थ्य लाभ: आरती गाने से शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य में सुधार होता है। धार्मिक गतिविधियों में भाग लेने से मानसिक शांति मिलती है, जो हमारे शारीरिक स्वास्थ्य पर भी सकारात्मक प्रभाव डालती है।

आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार: आरती गाने से आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार होता है। यह आरती हमें आध्यात्मिक रूप से सशक्त बनाती है, जिससे हमारे जीवन में सकारात्मक बदलाव आते हैं।

सकारात्मक विचारधारा: आरती गाने से सकारात्मक विचारधारा का विकास होता है। यह आरती हमें जीवन के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाने में मदद करती है, जिससे हम हर परिस्थिति में सकारात्मक रह सकते हैं।

धर्मराज की आरती गाने के ये विभिन्न लाभ हमारे जीवन को हर दृष्टिकोण से समृद्ध बनाते हैं। यह न केवल हमारी आध्यात्मिक उन्नति में सहायक होती है, बल्कि मानसिक और सामाजिक जीवन में भी सकारात्मक बदलाव लाती है। इसलिए, हमें धर्मराज की आरती को अपने दैनिक जीवन का हिस्सा बनाना चाहिए।

धर्मराज जी कौन हैं?

धर्मराज जी हिंदू धर्म में युधिष्ठिर, महाभारत के प्रमुख पात्र और पांडवों के सबसे बड़े भाई के रूप में जाने जाते हैं। उन्हें धर्मराज, युधिष्ठिर, और सत्यवादी धर्मराज के नाम से भी जाना जाता है। वे धर्म और न्याय के प्रतीक हैं और उनके जीवन का आदर्श सच्चाई और धार्मिकता पर आधारित था।

धर्मराज जी की आरती क्या है?

धर्मराज जी की आरती एक विशेष पूजा विधि है जिसमें उनकी महिमा, उनके धर्म और उनकी पवित्रता की स्तुति की जाती है। “ॐ जय धर्म धुरंधर” इस आरती का प्रमुख मंत्र है, जिसे भक्ति भाव से गाया जाता है। यह आरती धर्मराज जी की पूजा और सम्मान के लिए की जाती है और इसमें उनके गुणों की सराहना की जाती है।

धर्मराज जी की आरती “ॐ जय धर्म धुरंधर” के मुख्य मंत्र का अर्थ क्या है?

“ॐ जय धर्म धुरंधर” का अर्थ है: “हे धर्म के महान धारणकर्ता, आपको विजय प्राप्त हो!” इसमें ‘धर्म धुरंधर’ का तात्पर्य धर्म के संरक्षक और पालनकर्ता से है। यह मंत्र धर्मराज जी की महानता और उनकी धर्म की रक्षा करने की शक्ति को मान्यता देता है।

धर्मराज जी की आरती कैसे की जाती है?

धर्मराज जी की आरती करने के लिए, भक्त एक पवित्र स्थान पर प्रार्थना करते हैं और आरती के दौरान दीपक या अगरबत्ती जलाते हैं। आरती के समय, विशेष मंत्रों का उच्चारण करते हुए, धर्मराज जी की स्तुति की जाती है। यह आरती पूजा की एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया है जिसमें भक्ति, श्रद्धा और सम्मान प्रकट किया जाता है।

धर्मराज जी की आरती के क्या लाभ होते हैं?

धर्मराज जी की आरती करने से व्यक्ति को धर्म, सत्य और न्याय के मार्ग पर चलने की प्रेरणा मिलती है। इसके अतिरिक्त, यह आरती करने से मन की शांति, मानसिक स्थिरता और नैतिक शक्ति प्राप्त होती है। धर्मराज जी की आरती से भक्त को उनकी दया, कृपा और संरक्षण प्राप्त होने की भी मान्यता है।

धर्मराज जी की आरती का विशेष समय क्या होता है?

धर्मराज जी की आरती आमतौर पर सुबह और शाम के समय की जाती है, जब भक्त पूजा के लिए समय निकालते हैं। खासकर महाभारत के पर्व और विशेष धार्मिक अवसरों पर भी यह आरती अधिक महत्वपूर्ण मानी जाती है।

धर्मराज जी की आरती को कौन गा सकता है?

धर्मराज जी की आरती को कोई भी भक्त गा सकता है, चाहे वह साधारण व्यक्ति हो या पूजा करने वाला पुजारी। महत्वपूर्ण यह है कि आरती भक्ति और श्रद्धा से गाई जाए, जिससे धर्मराज जी की कृपा प्राप्त हो सके।

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