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जय शनि देवा – श्री शनिदेव आरती (Aarti Shri Shani Jai Jai Shani Dev)

By Dr. Hemlata | Reviewed by Vedic Scholar | Last Updated: January 2026 - This devotional text has been carefully verified against widely accepted traditional sources to preserve correct wording, pronunciation, and spiritual intent for daily recitation.
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श्री शनि देव की आरती (jai Jai Shani Dev) एक महत्वपूर्ण धार्मिक परंपरा है जो विशेष रूप से शनिवारी पूजा में की जाती है। शनि देव, जिन्हें सभी ग्रहों में सबसे प्रभावशाली माना जाता है, न्याय और धर्म के प्रतीक हैं। उनका प्रकोप किसी भी व्यक्ति के जीवन में कठिनाइयों और बाधाओं का कारण बन सकता है, लेकिन उनकी पूजा और आरती से उन समस्याओं को दूर किया जा सकता है। आप हमारी वेबसाइट पर शनि चालीसा और हनुमान चालीसा भी पढ़ सकते हैं!

श्री शनि देव को भगवान सूर्य का पुत्र माना जाता है, और उनका स्वरूप काला या नीला होता है। उनके हाथ में एक तलवार और एक काले रंग की छड़ी होती है, जो उनके न्यायप्रिय स्वभाव को दर्शाती है। उनकी पूजा में खासतौर पर तेल, तिल, काले तिल, और काले वस्त्रों का उपयोग किया जाता है, जो उनकी पसंदीदा वस्तुएँ मानी जाती हैं।

आरती के दौरान, भक्त श्री शनि देव के समक्ष दीपक जलाकर उनकी स्तुति करते हैं। यह धार्मिक क्रिया न केवल आध्यात्मिक शांति प्रदान करती है, बल्कि शनिदेव की कृपा भी प्राप्त होती है। भक्त उनके द्वारा दिए गए कष्टों को दूर करने के लिए उनके नाम का उच्चारण करते हैं और उन्हें अपनी समस्याओं के समाधान के लिए प्रार्थना करते हैं।


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|| शनि आरती PDF ||

|| जय शनि देवा – श्री शनिदेव आरती ||

जय शनि देवा, जय शनि देवा,
जय जय जय शनि देवा ।
अखिल सृष्टि में कोटि-कोटि जन,
करें तुम्हारी सेवा ।
जय शनि देवा, जय शनि देवा,
जय जय जय शनि देवा ॥

जा पर कुपित होउ तुम स्वामी,
घोर कष्ट वह पावे ।
धन वैभव और मान-कीर्ति,
सब पलभर में मिट जावे ।
राजा नल को लगी शनि दशा,
राजपाट हर लेवा ।
जय शनि देवा, जय शनि देवा,
जय जय जय शनि देवा ॥

जा पर प्रसन्न होउ तुम स्वामी,
सकल सिद्धि वह पावे ।
तुम्हारी कृपा रहे तो,
उसको जग में कौन सतावे ।
ताँबा, तेल और तिल से जो,
करें भक्तजन सेवा ।
जय शनि देवा, जय शनि देवा,
जय जय जय शनि देवा ॥

हर शनिवार तुम्हारी,
जय-जय कार जगत में होवे ।
कलियुग में शनिदेव महात्तम,
दु:ख दरिद्रता धोवे ।
करू आरती भक्ति भाव से,
भेंट चढ़ाऊं मेवा ।
जय शनि देवा, जय शनि देवा,
जय जय जय शनि देवा ॥

|| Shani Dev Aarti PDF ||

|| Aarti Shri Shani Jai Jai Shani Dev ||

Jay Shani Deva, jay Shani Deva,
Jay jay jay Shani Deva.
Akhil srishti mein koti-koti jan,
Karein tumhari seva.
Jay Shani Deva, jay Shani Deva,
Jay jay jay Shani Deva.

Ja par kupit hou tum swami,
Ghor kasth vah paave.
Dhan vaibhav aur maan-kirti,
Sab palbhar mein mit jaave.
Raja Nal ko lagi Shani dasha,
Rajpat har leva.
Jay Shani Deva, jay Shani Deva,
Jay jay jay Shani Deva.

Ja par prasann hou tum swami,
Sakal siddhi vah paave.
Tumhari kripa rahe to,
Usko jag mein kaun sataave.
Taamba, tel aur til se jo,
Karein bhaktjan seva.
Jay Shani Deva, jay Shani Deva,
Jay jay jay Shani Deva.

Har Shanivaar tumhari,
Jay-jay kaar jagat mein hove.
Kaliyug mein Shanidev mahaatma,
Dukh daridrata dhove.
Karu aarti bhakti bhav se,
Bhent chadaun meva.
Jay Shani Deva, jay Shani Deva,
Jay jay jay Shani Deva.



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शनिदेव की पूजा हिंदू धर्म में विशेष रूप से महत्वपूर्ण मानी जाती है। शनि ग्रह के अधिपति शनिदेव को न्याय का देवता और कर्मों के फलदाता माना जाता है। शनिदेव की कृपा प्राप्त करने के लिए श्रद्धालु विधिपूर्वक उनकी पूजा करते हैं। यहां शनिदेव की पूजा विधि को विस्तार से बताया गया है:

पूजन का दिन और समय

शनिवार का दिन शनिदेव की पूजा के लिए सबसे उत्तम माना जाता है। विशेष रूप से शनि अमावस्या या शनि जयंती के दिन पूजा करना अधिक फलदायी होता है। प्रातः काल या सायंकाल, दोनों समय पूजा कर सकते हैं। लेकिन सूर्यास्त के समय पूजा करना अत्यधिक प्रभावशाली माना गया है।

पूजन सामग्री

  • काले तिल
  • सरसों का तेल
  • लोहे की कोई वस्तु (जैसे काले धागे वाला छल्ला)
  • नीले या काले वस्त्र
  • काले उड़द (उड़द की दाल)
  • दीपक, धूप, अगरबत्ती
  • पुष्प (विशेषकर नीले फूल)
  • प्रसाद (गुड़, काले तिल से बनी मिठाई या लड्डू)

स्नान और शुद्धिकरण

पूजा से पहले स्वयं को शुद्ध करने के लिए स्नान करें और साफ वस्त्र धारण करें। यदि संभव हो तो काले या नीले वस्त्र पहनें, क्योंकि यह शनिदेव से संबंधित रंग माने जाते हैं।

शनिदेव का ध्यान और आसन

शनिदेव की मूर्ति या तस्वीर को पूर्व दिशा की ओर स्थापित करें। इसके बाद पूजा स्थल को स्वच्छ करें और आसन बिछाएं। ध्यान रखें कि शनिदेव की मूर्ति या चित्र काले पत्थर या धातु से बना हो।

मंत्र जप और आराधना

शनिदेव के निम्नलिखित मंत्र का जप पूजा के दौरान किया जा सकता है:

ॐ शं शनैश्चराय नमः।

इसके साथ ही शनिदेव का ध्यान करें और उनके सामने दीपक जलाएं। काले तिल, सरसों का तेल और उड़द का उपयोग करते हुए पूजा सामग्री अर्पित करें।

तेल से अभिषेक

शनिदेव को प्रसन्न करने के लिए सरसों के तेल से अभिषेक करना शुभ माना जाता है। शनिदेव की प्रतिमा पर तेल चढ़ाने से उनके क्रोध का शमन होता है और भक्तों पर उनकी कृपा बनी रहती है।

दान और आचरण

शनिदेव की पूजा के बाद गरीबों और जरुरतमंदों को दान करना बहुत ही शुभ माना जाता है। काले तिल, काले कपड़े, लोहे की वस्तुएं, काले उड़द, और सरसों का तेल दान करने से शनिदेव प्रसन्न होते हैं। इसके अलावा, दिनभर अच्छे कर्म करने, अनुशासित और संयमित जीवन जीने का संकल्प लें।

प्रसाद वितरण

पूजा समाप्त होने के बाद शनिदेव को अर्पित किया गया प्रसाद श्रद्धा से बांटें। इसमें विशेष रूप से गुड़ और काले तिल से बनी मिठाइयां या लड्डू होते हैं। यह प्रसाद घर के सभी सदस्यों में वितरित करें।

शांतिपूर्वक ध्यान और प्रार्थना

पूजा के अंत में शनिदेव से अपने जीवन में शांति, समृद्धि और न्याय की प्रार्थना करें।


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शनिदेव की पूजा के दौरान कुछ विशेष बातों का ध्यान रखना अत्यंत आवश्यक है, जिससे उनकी कृपा प्राप्त की जा सके और किसी प्रकार के दोष या विपरीत प्रभाव से बचा जा सके। यहां कुछ महत्वपूर्ण बातें बताई जा रही हैं, जिनका पालन करना चाहिए:

शनिदेव की सीधी दृष्टि से बचें:

शनिदेव की प्रतिमा या तस्वीर की सीधी दृष्टि में आने से बचना चाहिए। उनकी पूजा करते समय यह ध्यान रखना आवश्यक है कि उनकी आंखों में न देखें, क्योंकि ऐसा माना जाता है कि उनकी सीधी दृष्टि भारी होती है, जो जीवन में विपरीत प्रभाव डाल सकती है। पूजा में ध्यान हमेशा उनके चरणों पर केंद्रित रखें।

शुद्ध आचरण और विचार:

शनिदेव कर्मों के देवता हैं, इसलिए पूजा के दौरान और पूरे दिन अपने आचरण और विचार शुद्ध रखें। बुरी आदतों, झूठ, छल-कपट, क्रोध और अहंकार से दूर रहें। शनिदेव को सत्य, ईमानदारी और निस्वार्थ सेवा प्रिय है, इसलिए इन गुणों का पालन करें।

पीपल वृक्ष की पूजा:

शनिवार को पीपल के वृक्ष की पूजा करना भी अत्यंत शुभ माना जाता है। पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाएं और वृक्ष के चारों ओर सात बार परिक्रमा करें। साथ ही, “ॐ शं शनैश्चराय नमः” मंत्र का जप करते रहें।

सरसों के तेल का दीपक जलाएं:

शनिवार को दिनभर सरसों के तेल का दीपक जलाना शुभ माना जाता है। यह दीपक शनिदेव की प्रतिमा या पीपल के वृक्ष के नीचे जलाया जा सकता है। इससे शनिदेव प्रसन्न होते हैं और जीवन में शांति और समृद्धि प्रदान करते हैं।

आचरण में संयम और धैर्य:

शनिदेव की कृपा पाने के लिए संयमित जीवन जीना और धैर्य बनाए रखना आवश्यक है। शनिदेव व्यक्ति को उसके कर्मों का फल देते हैं, इसलिए बुरे समय में धैर्य रखें और अच्छे कर्म करते रहें। शनिदेव व्यक्ति की परीक्षा लेते हैं, लेकिन उनके धैर्य और संयम को देखकर वे आशीर्वाद भी देते हैं।

नीले और काले रंग के वस्त्र:

शनिवार के दिन विशेष रूप से नीले और काले रंग के वस्त्र पहनना शुभ माना जाता है। शनिदेव को यह रंग प्रिय होते हैं और इससे उनकी पूजा का फल अधिक मिलता है।

मांस-मदिरा से दूर रहें:

शनिदेव की पूजा के दिन मांसाहार और शराब के सेवन से बचना चाहिए। यह शुद्धता और संयम का प्रतीक है। ऐसे दिन आत्मसंयम और आध्यात्मिकता का पालन करना महत्वपूर्ण होता है।

गरीबों की सेवा और दान:

शनिदेव को दान और सेवा का महत्व बहुत प्रिय है। शनिवार को गरीबों को भोजन कराएं और काले तिल, लोहे की वस्तुएं, और काले कपड़े दान करें। इससे शनिदेव का आशीर्वाद प्राप्त होता है और जीवन में कष्ट कम होते हैं।

इन सभी बातों का पालन करने से शनिदेव की कृपा जल्दी प्राप्त होती है और जीवन में शांति, समृद्धि और संतुलन बना रहता है।


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जय शनि देवा – श्री शनिदेव आरती के लाभ

श्री शनि देव की आर्ति एक महत्वपूर्ण धार्मिक अनुष्ठान है, जो भक्तों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने में सहायक होती है। शनि देव को न्याय और धर्म का प्रतीक माना जाता है, और उनकी पूजा का उद्देश्य उनके आशीर्वाद को प्राप्त करना और जीवन में संतुलन बनाए रखना होता है। आर्ति के माध्यम से भक्त अपने जीवन की समस्याओं और कठिनाइयों को दूर करने की आशा करते हैं। श्री शनि देव की आर्ति के अनेक लाभ हैं, जो जीवन को सुखमय और समृद्ध बना सकते हैं।

धार्मिक शांति और मानसिक संतुलन: श्री शनि देव की आर्ति से धार्मिक शांति प्राप्त होती है। जब भक्त ईश्वर की आराधना करते हैं, तो मन की चिंता और तनाव दूर होता है। आर्ति के दौरान किए गए मंत्र जाप और भजन से मानसिक शांति मिलती है, जो जीवन की परेशानियों का सामना करने में मदद करती है। यह मानसिक संतुलन बनाए रखने में सहायक होती है, जिससे जीवन में स्थिरता बनी रहती है।

कष्टों और समस्याओं से मुक्ति: शनि देव को उनके न्यायप्रिय स्वभाव के लिए जाना जाता है। जो लोग शनिदोष या अन्य समस्याओं का सामना कर रहे होते हैं, उनके लिए आर्ति एक प्रभावी उपाय हो सकती है। आर्ति के माध्यम से शनिदेव की कृपा प्राप्त की जाती है, जिससे जीवन की समस्याएँ और कष्टों में कमी आती है। भक्त इस प्रक्रिया से अपने जीवन की कठिनाइयों को कम कर सकते हैं और बेहतर परिस्थितियाँ प्राप्त कर सकते हैं।

धन और समृद्धि में वृद्धि: शनि देव की पूजा विशेष रूप से आर्थिक लाभ और समृद्धि प्राप्त करने के लिए की जाती है। आर्ति से भक्तों को धन और समृद्धि में वृद्धि देखने को मिल सकती है। शनि देव की आराधना से उनकी कृपा प्राप्त होती है, जो आर्थिक समस्याओं को दूर करने और वित्तीय स्थिति को मजबूत बनाने में मदद करती है।

न्याय और सच्चाई की प्राप्ति: श्री शनि देव को न्याय का देवता माना जाता है। आर्ति के माध्यम से भक्त न्याय और सच्चाई की प्राप्ति की प्रार्थना करते हैं। यह आर्ति भक्तों को यह सुनिश्चित करने में मदद करती है कि उनके कर्म और कार्य ईमानदार और सही हों, जिससे जीवन में न्याय और सच्चाई की विजय होती है।

आध्यात्मिक उन्नति: आर्ति के दौरान मंत्र जाप और भजन की प्रक्रिया से भक्तों की आध्यात्मिक उन्नति होती है। यह समय भक्तों को आत्मसाक्षात्कार और आत्मज्ञान प्राप्त करने का अवसर प्रदान करता है। शनि देव की आर्ति में भाग लेने से भक्तों की आध्यात्मिक स्थिति में सुधार होता है और वे अपने जीवन को आध्यात्मिक दृष्टिकोण से देखने में सक्षम होते हैं।

संबंधों में सुधार: शनि देव की आर्ति परिवारिक और व्यक्तिगत संबंधों में भी सुधार ला सकती है। जब भक्त शनि देव की पूजा करते हैं, तो उनके जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह होता है, जो रिश्तों में सामंजस्य और सुधार लाने में सहायक होता है। यह आर्ति परिवार के सदस्य और मित्रों के साथ रिश्तों को मजबूत करती है और सामंजस्यपूर्ण वातावरण प्रदान करती है।

स्वास्थ्य में सुधार: आर्ति और पूजा से मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य में भी सुधार हो सकता है। जब भक्त नियमित रूप से आर्ति करते हैं, तो यह उनके स्वास्थ्य पर सकारात्मक प्रभाव डालती है। तनाव और चिंता कम होती है, जिससे मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य में सुधार होता है। इसके अलावा, शनि देव की कृपा से बीमारियों और स्वास्थ्य समस्याओं में राहत मिल सकती है।

विपत्तियों से सुरक्षा: आर्ति के माध्यम से भक्त अपने जीवन को विपत्तियों और नकारात्मक प्रभावों से सुरक्षित रखने की प्रार्थना करते हैं। शनि देव की पूजा से भक्तों को सुरक्षा और संरक्षण प्राप्त होता है। यह उन्हें जीवन की अप्रत्याशित समस्याओं और विपत्तियों से बचाने में सहायक होती है।

सच्चे मार्ग की प्राप्ति: श्री शनि देव की आर्ति से भक्तों को जीवन के सही मार्ग को पहचानने और अनुसरण करने में मदद मिलती है। आर्ति के दौरान की गई प्रार्थनाएँ और पूजा भक्तों को उनके जीवन के उद्देश्यों और लक्ष्यों को स्पष्ट रूप से समझने में सहायता करती हैं। यह सही दिशा में आगे बढ़ने और अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए प्रेरित करती है।

श्री शनि देव की आर्ति के ये लाभ भक्तों के जीवन को संतुलित, खुशहाल, और समृद्ध बनाने में सहायक होते हैं। आर्ति का नियमित आयोजन और सही तरीके से पूजा करने से भक्तों को शनि देव की कृपा प्राप्त होती है और उनके जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आते हैं।


शनि देव का मूल मंत्र क्या है?

शनि देव का मूल मंत्र है:
“ॐ शं शनैश्चराय नमः”

यह मंत्र शनिदेव की पूजा और आराधना में उपयोग किया जाता है और उनके सकारात्मक प्रभाव को प्राप्त करने के लिए बोला जाता है।

शनिदेव की पूजा करते समय कौन सा मंत्र बोलना चाहिए?

शनिदेव की पूजा करते समय निम्नलिखित मंत्रों का जाप किया जा सकता है:
“ॐ शं शनैश्चराय नमः”
“ॐ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः”

ये मंत्र शनिदेव की कृपा प्राप्त करने और उनके प्रभाव को कम करने के लिए उपयोग किए जाते हैं।

शनि मंत्र कितनी बार पढ़ना है?

शनि मंत्र को नियमित रूप से जाप करना चाहिए। आमतौर पर, इसे 108 बार पढ़ने की सलाह दी जाती है, विशेष रूप से शनि अमावस्या, शनिवार या अन्य महत्वपूर्ण दिनों पर। जाप की संख्या व्यक्तिगत विश्वास और समय की उपलब्धता के अनुसार बढ़ाई जा सकती है।

शनि देव को प्रसन्न कैसे करें?

शनि देव को प्रसन्न करने के लिए निम्नलिखित उपाय किए जा सकते हैं:
नियमित पूजा: शनि देव के मंदिर में जाकर पूजा करें और निम्नलिखित मंत्रों का जाप करें।

दान और पुण्य: शनिवार के दिन गरीबों और जरूरतमंदों को दान दें, विशेष रूप से काले कपड़े, सरसों का तेल, और काले उड़द की दाल।

साधना: शनिदेव की विशेष पूजा और व्रत का पालन करें, जैसे शनिवार का उपवास।

ध्यान और प्रार्थना: शनि मंत्र का नियमित जाप करें और शांति और समर्पण के साथ ध्यान लगाएं।

कौन सा शनि मंत्र शक्तिशाली है?

शनि देव के शक्तिशाली मंत्रों में निम्नलिखित शामिल हैं:
“ॐ शं शनैश्चराय नमः”
“ॐ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः”

इन मंत्रों का जाप करने से शनि देव की कृपा प्राप्त होती है और शनिदोष से मुक्ति मिल सकती है।

शनि देव शक्तिशाली का मंत्र क्या है?

शनि देव के शक्तिशाली मंत्रों में प्रमुख मंत्र है:
“ॐ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः”

यह मंत्र शनिदेव के प्रभाव को कम करने और उनके आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए बहुत प्रभावशाली माना जाता है। इस मंत्र का जाप विशेष रूप से शनिवार को करना लाभकारी होता है।

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Hemlata – Experienced Hindu Devotee and Devotional Text Expert
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