Wednesday, January 28, 2026
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सूर्य चालीसा (Surya Chalisa pdf)

By Dr. Hemlata | Reviewed by Vedic Scholar | Last Updated: January 2026 - This devotional text has been carefully verified against widely accepted traditional sources to preserve correct wording, pronunciation, and spiritual intent for daily recitation.
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सूर्य देव की चालीसा (Surya Chalisa) अत्यंत लाभकारी है। इसमें सूर्य देव के बारह नामों का उल्लेख मिलता है। सूर्य देव की पूजा करते समय इन बारह नामों का श्रद्धापूर्वक जप करना चाहिए। ये बारह नाम इस प्रकार हैं: मित्र, मरीचि, भानु, भास्कर, सविता, सूर्य, अर्क, खग, पूषा, रवि आदित्य और हिरण्यगर्भ।

उनके सारथी अरुण जी हैं। सूर्य देव सात घोड़ों के रथ पर सवार होते हैं।

सूर्य देव की आरती और भक्ति से त्वचा रोग ठीक हो जाते हैं। व्यक्ति को सुख, समृद्धि, यश, नाम, लंबी आयु आदि की प्राप्ति होती है। विदेश यात्रा में भी सूर्यदेव सहायता करते हैं।

ॐ सूर्याय नमः।


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  • हिंदी / संस्कृत
  • English

|| सूर्य चालीसा ||

॥चौपाई॥
जय सविता जय जयति दिवाकर,
सहस्त्रांशु सप्ताश्व तिमिरहर॥
भानु पतंग मरीची भास्कर,
सविता हंस सुनूर विभाकर॥ 1॥

विवस्वान आदित्य विकर्तन,
मार्तण्ड हरिरूप विरोचन॥
अम्बरमणि खग रवि कहलाते,
वेद हिरण्यगर्भ कह गाते॥ 2॥

सहस्त्रांशु प्रद्योतन, कहिकहि,
मुनिगन होत प्रसन्न मोदलहि॥
अरुण सदृश सारथी मनोहर,
हांकत हय साता चढ़ि रथ पर॥3॥

मंडल की महिमा अति न्यारी,
तेज रूप केरी बलिहारी॥
उच्चैःश्रवा सदृश हय जोते,
देखि पुरन्दर लज्जित होते॥4

मित्र मरीचि, भानु, अरुण, भास्कर,
सविता सूर्य अर्क खग कलिकर॥
पूषा रवि आदित्य नाम लै,
हिरण्यगर्भाय नमः कहिकै॥5॥

द्वादस नाम प्रेम सों गावैं,
मस्तक बारह बार नवावैं॥
चार पदारथ जन सो पावै,
दुःख दारिद्र अघ पुंज नसावै॥6॥

नमस्कार को चमत्कार यह,
विधि हरिहर को कृपासार यह॥
सेवै भानु तुमहिं मन लाई,
अष्टसिद्धि नवनिधि तेहिं पाई॥7॥

बारह नाम उच्चारन करते,
सहस जनम के पातक टरते॥
उपाख्यान जो करते तवजन,
रिपु सों जमलहते सोतेहि छन॥8॥

धन सुत जुत परिवार बढ़तु है,
प्रबल मोह को फंद कटतु है॥
अर्क शीश को रक्षा करते,
रवि ललाट पर नित्य बिहरते॥9॥

सूर्य नेत्र पर नित्य विराजत,
कर्ण देस पर दिनकर छाजत॥
भानु नासिका वासकरहुनित,
भास्कर करत सदा मुखको हित॥10॥

ओंठ रहैं पर्जन्य हमारे,
रसना बीच तीक्ष्ण बस प्यारे॥
कंठ सुवर्ण रेत की शोभा,
तिग्म तेजसः कांधे लोभा॥11॥

पूषां बाहू मित्र पीठहिं पर,
त्वष्टा वरुण रहत सुउष्णकर॥
युगल हाथ पर रक्षा कारन,
भानुमान उरसर्म सुउदरचन॥12॥

बसत नाभि आदित्य मनोहर,
कटिमंह, रहत मन मुदभर॥
जंघा गोपति सविता बासा,
गुप्त दिवाकर करत हुलासा॥13॥

विवस्वान पद की रखवारी,
बाहर बसते नित तम हारी॥
सहस्त्रांशु सर्वांग सम्हारै,
रक्षा कवच विचित्र विचारे॥14॥

अस जोजन अपने मन माहीं,
भय जगबीच करहुं तेहि नाहीं ॥
दद्रु कुष्ठ तेहिं कबहु न व्यापै,
जोजन याको मन मंह जापै॥15॥
अंधकार जग का जो हरता,
नव प्रकाश से आनन्द भरता॥

ग्रह गन ग्रसि न मिटावत जाही,
कोटि बार मैं प्रनवौं ताही॥
मंद सदृश सुत जग में जाके,
धर्मराज सम अद्भुत बांके॥16॥

धन्य-धन्य तुम दिनमनि देवा,
किया करत सुरमुनि नर सेवा॥
भक्ति भावयुत पूर्ण नियम सों,
दूर हटतसो भवके भ्रम सों॥17॥

परम धन्य सों नर तनधारी,
हैं प्रसन्न जेहि पर तम हारी॥
अरुण माघ महं सूर्य फाल्गुन,
मधु वेदांग नाम रवि उदयन॥18॥

भानु उदय बैसाख गिनावै,
ज्येष्ठ इन्द्र आषाढ़ रवि गावै॥
यम भादों आश्विन हिमरेता,
कातिक होत दिवाकर नेता॥19॥

अगहन भिन्न विष्णु हैं पूसहिं,
पुरुष नाम रविहैं मलमासहिं॥20॥

॥दोहा॥
भानु चालीसा प्रेम युत, गावहिं जे नर नित्य,
सुख सम्पत्ति लहि बिबिध, होंहिं सदा कृतकृत्य॥

|| Surya Chalisa in English ||

॥Chaupaee ॥
Jay shiv jay jayati divaakar,
Sahastraanshu saptashv timirahar ॥
Bhaanu patang mereechee bhaaskar,
Shivaanee hans sunoor vibhaakar ॥ 1 ॥

Vivasvaan aadity vikartan,
Maartand hariroop virochan ॥
Ambaramani khag ravi kahalaate,
Ved hiranyagarbh kahie ॥ 2 ॥

Sahastraanshu pradyotan, kahiki,
Munigan hot aakarshak modalhi ॥
Arun sadrsh saarathee manohar,
Haankat hay saata chadhee rath par ॥3 ॥

Mandal kee mahima ati nyaaree,
Tej roop keree balihaaree ॥
Uchchaihshrava sadrsh hay jote,
Dekhi purandar lajjit hote ॥4 ॥

Mitr mareechi, bhaanu, arun, bhaaskar,
Soory ark khag kalikaar ॥
Poosha ravi aadity naam la,
Hiranyagarbhaay namah kahikai ॥5 ॥

Dvaadash naam prem son gaaven,
Mastak baar baar navae ॥
Chaar padaarath jan so paavai,
Duhkh daaridr agh punj naasaavai ॥6 ॥

Namaskaar ko chamatkaar yah,
Vidhi harihar ko krpaasaar yah ॥
Sevai bhaanu tumahin man laee,
Ashtasiddhi navanidhi tehin paee ॥7 ॥

Baarah naamaakaran karate hain,
Sahas janm ke paatak tarate ॥
Upaakhyaan jo karate hain tavajan,
Ripu son jamalahate sorahi chhan ॥8 ॥

Dhan sut jut parivaar badhata hai,
Prabal moh ko phand kattoo hai ॥
Aark sheeshe ko raksha karana,
Ravi lalaat par nity biharate ॥9 ॥

Soory utsav par nity viraajat,
Karn des par dinakar chhaajat ॥
Bhaanusaansa vakarahunit,
Bhaaskar karat sada mukhako hit ॥10 ॥

Baakee rahan parjanik hamaare,
Rasana beech teekshn bas priye ॥
Kanth suvarn retee kee shobha,
Tigm tejasah kandhe lobha ॥11 ॥

Pooshaan bahu mitr prshnahin par,
Tvashta varun rahat sushankar ॥
Dost ke haath par raksha karan,
Bhaanumaan urasarm suudarchan ॥12 ॥

Basat naabhi aadity manohar,
Katimanh, rahat man mudabhar ॥
Janga gopeepati savita baasa,
Gupt divaakar karat hulasa ॥13 ॥

Visvaasan pad kee rakhavaaree,
Basate nit tam haaree ॥
Sahastraanshu sarvaang samhaarai,
Raksha kavach vichitr vichaare ॥14 ॥

As jojan apane man maaheen,
Bhay jag samudratat karahun tehi naahin ॥
Dadru kushth tehin kahu na vyaapai,
Jojan yaako man manh jaapai ॥15 ॥
Andhakaar jag ka jo harta,
Nav prakaash se aanand bhaarat ॥

Grah gan grasi na laabhavat jaahee,
Koti baar main pranavaun taahi ॥
Mand sadrsh sut jag mein jaake,
Dharmaraaj sam adbhut baanke ॥16 ॥

Dhany-dhany tum dinamani deva,
Karat karat suramuni nar seva ॥
Bhakti bhaavayut poorn niyam son,
Door hattaso bhavake bhram son ॥17 ॥

Param dhany son nar tanadhaaree,
Hain priy jehi par tam haaree ॥
Arun maagh mahan soory phaalgun,
Madhu vedaang naam ravi udayan ॥18 ॥

Bhaanu uday baisaakhee,
Jyeshth indravai aashaadh ravi ga ॥
Yam bhaado aashvin himareta,
Kaatik hot divaakar neta ॥19 ॥

Aghan bhinn vishnu hain pooshahin,
Purush naam ravihain malamaashin ॥20 ॥

॥Doha ॥
Bhaanu chaaleesa prem yut, gaavahin je nar nity,
Sukh upaay lahi bibidh, honahin sada krtakrty ॥


सूर्य चालीसा के लाभ

सूर्य चालीसा एक धार्मिक स्तोत्र है जो भगवान सूर्य देवता की पूजा में पढ़ा जाता है। यह 40 श्लोकों (चालीसा) का संग्रह है, जो सूर्य देव की स्तुति और उनके गुणों का वर्णन करता है। सूर्य चालीसा के लाभ कई प्रकार के होते हैं, जो व्यक्तिगत, मानसिक और आध्यात्मिक स्तर पर प्रकट होते हैं। यहाँ सूर्य चालीसा के लाभों का विस्तार से वर्णन किया गया है:

1. स्वास्थ्य में सुधार

सूर्य चालीसा का नियमित पाठ शारीरिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में सहायक होता है। सूर्य देव को जीवन के स्रोत के रूप में माना जाता है, और उनकी पूजा से शरीर को ऊर्जा और जीवनशक्ति मिलती है। यह विशेष रूप से हड्डियों, त्वचा और आंखों के लिए लाभकारी होता है। नियमित रूप से सूर्य चालीसा का पाठ करने से शरीर की रोग प्रतिकारक क्षमता में वृद्धि होती है और शारीरिक समस्याएं दूर हो सकती हैं।

2. मानसिक शांति और स्थिरता

सूर्य चालीसा का पाठ मानसिक शांति और स्थिरता प्रदान करता है। यह तनाव, चिंता और अवसाद को कम करने में सहायक होता है। सूर्य देवता के प्रति आस्था और श्रद्धा से मन को शांति मिलती है, जिससे मानसिक स्थिति में सुधार होता है। मानसिक स्पष्टता और एकाग्रता में भी वृद्धि होती है।

3. आर्थिक समृद्धि

सूर्य चालीसा का पाठ आर्थिक समृद्धि और समृद्धि की प्राप्ति में सहायक होता है। सूर्य देवता को धन, ऐश्वर्य और समृद्धि का देवता माना जाता है। उनकी पूजा करने से आर्थिक समस्याएं दूर हो सकती हैं और व्यवसाय या नौकरी में उन्नति हो सकती है। यह विशेष रूप से उन लोगों के लिए लाभकारी होता है जो आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं।

4. पारिवारिक सुख और समृद्धि

सूर्य चालीसा का पाठ पारिवारिक सुख और समृद्धि को बढ़ावा देता है। यह परिवार में सामंजस्य और सुख-शांति बनाए रखने में सहायक होता है। सूर्य देवता के आशीर्वाद से परिवार के सभी सदस्य खुशहाल और स्वस्थ रहते हैं। परिवारिक रिश्तों में सुधार होता है और एकता बढ़ती है।

5. उच्च आत्म-संस्कार और आदर्श जीवन

सूर्य चालीसा के नियमित पाठ से व्यक्ति के आत्म-संस्कार में वृद्धि होती है। यह व्यक्ति को आदर्श जीवन जीने के लिए प्रेरित करता है और उसकी नैतिकता और सद्गुणों को प्रोत्साहित करता है। सूर्य देवता के गुणों को अपनाने से व्यक्ति में सच्चाई, ईमानदारी और दया जैसे गुण विकसित होते हैं।

6. शक्ति और आत्म-विश्वास

सूर्य चालीसा का पाठ व्यक्ति को मानसिक और शारीरिक शक्ति प्रदान करता है। यह आत्म-विश्वास को बढ़ाता है और व्यक्ति को चुनौतियों का सामना करने के लिए तैयार करता है। सूर्य देवता के आशीर्वाद से व्यक्ति में साहस और आत्म-विश्वास का संचार होता है, जिससे वह जीवन में सफलता प्राप्त कर सकता है।

7. शिक्षा और ज्ञान में वृद्धि

सूर्य चालीसा के पाठ से शिक्षा और ज्ञान में वृद्धि होती है। सूर्य देवता को ज्ञान और विद्या का स्रोत माना जाता है, और उनकी पूजा से व्यक्ति की बौद्धिक क्षमता में सुधार होता है। यह छात्रों और शिक्षा प्राप्त कर रहे व्यक्तियों के लिए विशेष रूप से लाभकारी होता है, क्योंकि यह उनके अध्ययन और समझ में सुधार करता है।

8. रोगों से मुक्ति

सूर्य चालीसा का नियमित पाठ कुछ विशेष बीमारियों और स्वास्थ्य समस्याओं से मुक्ति दिला सकता है। विशेष रूप से उन लोगों के लिए जो पित्त दोष, मानसिक अशांति या हड्डियों की समस्याओं से ग्रस्त हैं, सूर्य चालीसा का पाठ उपचारात्मक हो सकता है। सूर्य देवता की पूजा से स्वास्थ्य में सुधार होता है और बीमारियों से छुटकारा मिल सकता है।

9. आध्यात्मिक उन्नति

सूर्य चालीसा का पाठ आध्यात्मिक उन्नति में सहायक होता है। यह व्यक्ति को आत्मा की वास्तविकता और ब्रह्मा के साथ एकात्मता का अनुभव कराता है। सूर्य देवता की पूजा से व्यक्ति की आध्यात्मिक यात्रा में प्रगति होती है और उसे आत्मज्ञान की प्राप्ति होती है। यह आध्यात्मिक शांति और मुक्ति की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम होता है।

10. नकारात्मक ऊर्जा से रक्षा

सूर्य चालीसा का पाठ नकारात्मक ऊर्जा से रक्षा करता है। यह वातावरण को सकारात्मक ऊर्जा से भर देता है और व्यक्ति को बुरी नजर और नकारात्मक प्रभावों से बचाता है। सूर्य देवता के आशीर्वाद से नकारात्मक शक्तियाँ दूर होती हैं और व्यक्ति सुरक्षित और संरक्षित रहता है।

11. आध्यात्मिक अवबोधन

सूर्य चालीसा का पाठ व्यक्ति को धर्म और आध्यात्मिकता की ओर अग्रसर करता है। यह व्यक्ति को अपने जीवन के उद्देश्य को समझने और सही मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। सूर्य देवता की पूजा से व्यक्ति अपने जीवन के मार्ग को स्पष्टता से देख सकता है और आध्यात्मिक अवबोधन प्राप्त कर सकता है।

12. सकारात्मक विचार और प्रेरणा

सूर्य चालीसा का पाठ सकारात्मक विचार और प्रेरणा प्रदान करता है। यह व्यक्ति को अपनी समस्याओं और चुनौतियों को सकारात्मक दृष्टिकोण से देखने के लिए प्रेरित करता है। सूर्य देवता के आशीर्वाद से व्यक्ति को आत्ममूल्य और प्रेरणा मिलती है, जिससे वह अपने लक्ष्यों को प्राप्त कर सकता है।

13. संबंधों में सुधार

सूर्य चालीसा का पाठ व्यक्तिगत और पेशेवर संबंधों में सुधार लाने में सहायक होता है। यह संबंधों में सामंजस्य और समझ को बढ़ावा देता है। सूर्य देवता के आशीर्वाद से रिश्तों में मधुरता और सहयोग बढ़ता है, जिससे व्यक्ति के सामाजिक जीवन में सुधार होता है।

14. धर्म और पूजा में सफलता

सूर्य चालीसा का पाठ धार्मिक कृत्यों और पूजा में सफलता की प्राप्ति में सहायक होता है। यह व्यक्ति की धार्मिक भावनाओं को मजबूत करता है और उसकी पूजा की शक्ति को बढ़ाता है। सूर्य देवता की कृपा से पूजा विधियों में सफलता मिलती है और धार्मिक कृत्य संपन्न होते हैं।

15. जीवन में सच्चे उद्देश्य की प्राप्ति

सूर्य चालीसा का पाठ जीवन में सच्चे उद्देश्य की प्राप्ति में सहायक होता है। यह व्यक्ति को अपने जीवन के वास्तविक उद्देश्य को समझने और उसे पूरा करने की दिशा में मार्गदर्शन करता है। सूर्य देवता की पूजा से व्यक्ति को अपने जीवन के लक्ष्यों को प्राप्त करने में सहायता मिलती है।

16. संतुलित और समृद्ध जीवन

सूर्य चालीसा का पाठ संतुलित और समृद्ध जीवन जीने में सहायक होता है। यह व्यक्ति को जीवन में हर क्षेत्र में संतुलन बनाए रखने की प्रेरणा देता है और समृद्धि की ओर अग्रसर करता है। सूर्य देवता की कृपा से व्यक्ति का जीवन सुखमय और समृद्ध होता है।

17. उत्साह और ऊर्जा में वृद्धि

सूर्य चालीसा का पाठ व्यक्ति में उत्साह और ऊर्जा का संचार करता है। यह दिनभर की गतिविधियों के लिए मानसिक और शारीरिक ऊर्जा प्रदान करता है। सूर्य देवता की पूजा से व्यक्ति सक्रिय और ऊर्जावान रहता है, जिससे उसकी उत्पादकता में वृद्धि होती है।

18. आत्मा की शांति

सूर्य चालीसा का पाठ आत्मा की शांति और स्थिरता में सहायक होता है। यह व्यक्ति को अपने भीतर की शांति को अनुभव करने में मदद करता है और उसकी आध्यात्मिक यात्रा को सशक्त बनाता है। सूर्य देवता की पूजा से आत्मा को शांति और संतोष की प्राप्ति होती है।

19. दुखों से मुक्ति

सूर्य चालीसा का नियमित पाठ जीवन में आने वाली समस्याओं और दुखों से मुक्ति प्रदान करता है। सूर्य देवता की कृपा से व्यक्ति के जीवन से दुख और कष्ट दूर होते हैं और सुख-शांति का अनुभव होता है।

20. सकारात्मक प्रभाव का संचार

सूर्य चालीसा का पाठ सकारात्मक प्रभाव का संचार करता है। यह व्यक्ति की सोच और कार्यशैली को सकारात्मक बनाता है और उसकी जीवनशक्ति को प्रबल करता है। सूर्य देवता की पूजा से व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

सूर्य चालीसा के इन लाभों का अनुभव करने के लिए, इसे नियमित रूप से और पूरी श्रद्धा के साथ पाठ करना महत्वपूर्ण है। इससे न केवल व्यक्तिगत जीवन में सुधार होता है, बल्कि आत्मा और जीवन के गहरे अर्थों को समझने में भी सहायता मिलती है।

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