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आरती: श्री महावीर भगवान | जय सन्मति देवा (Shri Mahaveer Bhagwan Aarti: Jai Sanmati Deva)

Written by Dr. Hemlata, Editorially reviewed by the Chalisa-PDF.com editorial team Last reviewed: August 22, 2026
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आरती: श्री महावीर भगवान | जय सन्मति देवा (Shri Mahaveer Bhagwan Aarti) हमारे भारतीय संस्कृति में धर्म, अध्यात्म और आराधना का महत्वपूर्ण स्थान है। इन्हीं धार्मिक गतिविधियों में आरती का एक विशेष महत्व होता है। आरती के माध्यम से भक्त भगवान के प्रति अपनी श्रद्धा और भक्ति प्रकट करते हैं। इसी संदर्भ में, जैन धर्म के अनुयायियों के लिए भगवान महावीर की आरती विशेष महत्व रखती है।

श्री महावीर भगवान, जैन धर्म के चौबीसवें तीर्थंकर, ने अपने जीवन में अनेकों तप और साधना करके मोक्ष की प्राप्ति की थी। उनके उपदेश और जीवनशैली आज भी लाखों लोगों को सत्य, अहिंसा, और संयम का मार्ग दिखाते हैं। भगवान महावीर का जीवन संपूर्ण मानवता के लिए एक प्रेरणा स्रोत है। उनकी शिक्षाएं हमें अहिंसा, सत्य, अस्तेय, ब्रह्मचर्य, और अपरिग्रह जैसे महान सिद्धांतों की ओर प्रेरित करती हैं।

भगवान महावीर की आरती, जिसे “जय सन्मति देवा” के नाम से जाना जाता है, उनके प्रति भक्तों की अपार श्रद्धा और भक्ति का प्रतीक है। इस आरती के माध्यम से हम भगवान महावीर के प्रति अपनी भक्ति को प्रकट करते हैं और उनसे जीवन में सन्मति की प्राप्ति की प्रार्थना करते हैं।

आरती का प्रारंभ भगवान महावीर की महिमा और उनके दिव्य गुणों का वर्णन करने से होता है। इसमें उनके महान तप, साधना और मोक्ष की प्राप्ति का गुणगान किया जाता है। आरती के शब्दों में उनके प्रति भक्तों की आस्था और श्रद्धा का भाव स्पष्ट रूप से प्रकट होता है।

“जय सन्मति देवा” आरती का गायन हमें आध्यात्मिक शांति और सुकून प्रदान करता है। इसके माध्यम से हम भगवान महावीर के आदर्शों को अपने जीवन में अपनाने का संकल्प लेते हैं। यह आरती न केवल एक धार्मिक क्रिया है, बल्कि यह आत्मिक उन्नति का एक माध्यम भी है।

भगवान महावीर की आरती के माध्यम से हम अपने जीवन में सन्मति, शांति, और अहिंसा का मार्ग अपना सकते हैं। यह आरती हमें यह संदेश देती है कि हम अपने जीवन में सत्य और अहिंसा के सिद्धांतों को अपनाकर एक श्रेष्ठ मानव बन सकते हैं।

इस आरती के माध्यम से हम भगवान महावीर से प्रार्थना करते हैं कि वे हमें सन्मति प्रदान करें, जिससे हम अपने जीवन में सही मार्ग का अनुसरण कर सकें। आरती के शब्दों में छिपी हुई भक्ति और श्रद्धा की भावना हमारे मन को पवित्र और शुद्ध बनाती है।

भगवान महावीर की आरती “जय सन्मति देवा” हमारे जीवन में एक नई ऊर्जा और प्रेरणा का संचार करती है। यह हमें यह सिखाती है कि भगवान महावीर के उपदेशों और शिक्षाओं का पालन करके हम अपने जीवन को सच्चे अर्थों में सफल बना सकते हैं।

इस आरती के माध्यम से हम भगवान महावीर के प्रति अपनी श्रद्धा और भक्ति को प्रकट करते हैं और उनसे सन्मति की प्राप्ति की प्रार्थना करते हैं। जय सन्मति देवा!



  • हिंदी / संस्कृत
  • English

|| श्री महावीर भगवान आरती ||

जय सन्मति देवा,
प्रभु जय सन्मति देवा।
वर्द्धमान महावीर वीर अति,
जय संकट छेवा ॥
॥ऊँ जय सन्मति देवा…॥

सिद्धार्थ नृप नन्द दुलारे,
त्रिशला के जाये ।
कुण्डलपुर अवतार लिया,
प्रभु सुर नर हर्षाये ॥
॥ऊँ जय सन्मति देवा…॥

देव इन्द्र जन्माभिषेक कर,
उर प्रमोद भरिया ।
रुप आपका लख नहिं पाये,
सहस आंख धरिया ॥
॥ऊँ जय सन्मति देवा…॥

जल में भिन्न कमल ज्यों रहिये,
घर में बाल यती ।
राजपाट ऐश्वर्य छोड़ सब,
ममता मोह हती ॥
॥ऊँ जय सन्मति देवा…॥

बारह वर्ष छद्मावस्था में,
आतम ध्यान किया।
घाति-कर्म चूर-चूर,
प्रभु केवल ज्ञान लिया ॥
॥ऊँ जय सन्मति देवा…॥

पावापुर के बीच सरोवर,
आकर योग कसे ।
हने अघातिया कर्म शत्रु सब,
शिवपुर जाय बसे ॥
॥ऊँ जय सन्मति देवा…॥

भूमंडल के चांदनपुर में,
मंदिर मध्य लसे ।
शान्त जिनेश्वर मूर्ति आपकी,
दर्शन पाप नसे ॥
॥ऊँ जय सन्मति देवा…॥

करुणासागर करुणा कीजे,
आकर शरण गही।
दीन दयाला जगप्रतिपाला,
आनन्द भरण तु ही ॥
॥ऊँ जय सन्मति देवा…॥

जय सन्मति देवा,
प्रभु जय सन्मति देवा।
वर्द्धमान महावीर वीर अति,
जय संकट छेवा ॥

जय सन्मति देवा,
प्रभु जय सन्मति देवा।
वर्द्धमान महावीर वीर अति,
जय संकट छेवा ॥

|| Shri Mahaveer Bhagwan Aarti ||

Jai ho jai jai hai sanmati deva,
Prabhu jai sanmati deva।
Varddhamān mahāvīr vīr ati,
Jai sankat chheva॥
॥Om jai sanmati deva…॥

Siddhārth nṛip nandan dulāre,
Triśhalā ke jāye।
Kuṇḍalapur avatār liyā,
Prabhu sur nar harshāye॥
॥Om jai sanmati deva…॥

Dev indra janmābhiṣek kar,
Ur pramod bhariyā।
Rūp āpakā lakh nahīṁ pāye,
Sahas ānkh dhariyā॥
॥Om jai sanmati deva…॥

Jal mein bhinn kamal jyoṁ rahiye,
Ghar mein bāl yatī।
Rājapāṭ aiśvarya chhod sab,
Mamatā moh hatī॥
॥Om jai sanmati deva…॥

Bārah varṣ chhdmāvasthā mein,
Ātam dhyān kiyā।
Ghāti-karm chūr-chūr,
Prabhu keval jñān liyā॥
॥Om jai sanmati deva…॥

Pāvāpur ke bīch sarovar,
Ākar yog kase।
Hane aghātiyā karm śatru sab,
Shivpur jāye base॥
॥Om jai sanmati deva…॥

Bhūmandal ke chāndanapur mein,
Mandir madhya lase।
Shānt jinēśvar mūrti āpakī,
Darśan pāp nase॥
॥Om jai sanmati deva…॥

Karunāsāgar karuṇā kīje,
Ākar śaraṇ gahe।
Dīn dayālā jagpratipālā,
Ānand bharaṇ tu hī॥
॥Om jai sanmati deva…॥

Jai sanmati deva,
Prabhu jai sanmati deva।
Varddhamān mahāvīr vīr ati,
Jai sankat chheva॥

Jai sanmati deva,
Prabhu jai sanmati deva।
Varddhamān mahāvīr vīr ati,
Jai sankat chheva॥


श्री महावीर भगवान की आरती के लाभ

श्री महावीर भगवान की आरती “जय सन्मति देवा” जैन धर्म के अनुयायियों के लिए अत्यधिक महत्वपूर्ण है। इस आरती के माध्यम से भक्त भगवान महावीर के प्रति अपनी भक्ति और श्रद्धा प्रकट करते हैं। आरती के कई आध्यात्मिक, मानसिक, और सामाजिक लाभ हैं। इस लेख में हम 2100 शब्दों में श्री महावीर भगवान की आरती “जय सन्मति देवा” के विभिन्न लाभों पर विस्तार से चर्चा करेंगे।

आध्यात्मिक लाभ:

आध्यात्मिक शांति और संतुलन: श्री महावीर भगवान की आरती का नियमित अभ्यास करने से भक्तों को आध्यात्मिक शांति और संतुलन प्राप्त होता है। जब हम भगवान महावीर की आरती गाते हैं, तो हमारे मन में एक अद्वितीय शांति का अनुभव होता है। यह शांति हमारे दैनिक जीवन की चिंताओं और तनावों को दूर करती है।

आध्यात्मिक जागृति: श्री महावीर भगवान की आरती के माध्यम से हमारे अंदर आध्यात्मिक जागृति उत्पन्न होती है। भगवान महावीर के प्रति श्रद्धा और भक्ति का भाव हमारे अंदर सच्चाई, अहिंसा, और प्रेम के गुणों को बढ़ावा देता है। इससे हमारा आध्यात्मिक विकास होता है और हम जीवन में उच्चतर लक्ष्यों की प्राप्ति की दिशा में अग्रसर होते हैं।

आध्यात्मिक मार्गदर्शन: श्री महावीर भगवान की आरती के माध्यम से हमें उनके उपदेशों और शिक्षाओं का स्मरण होता है। यह हमें सही और गलत के बीच अंतर करने में मदद करता है और हमें सन्मार्ग की ओर प्रेरित करता है। आरती के शब्द हमें धर्म और सत्य के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देते हैं।

मानसिक लाभ:

तनाव और चिंता में कमी: श्री महावीर भगवान की आरती का नियमित अभ्यास मानसिक तनाव और चिंता को कम करने में सहायक होता है। जब हम आरती गाते हैं, तो हमारा ध्यान भगवान महावीर पर केंद्रित होता है, जिससे हमारे मन में शांति और सुकून का अनुभव होता है। यह ध्यान केंद्रित करने की शक्ति को बढ़ाता है और मानसिक शांति को बढ़ावा देता है।

मानसिक स्थिरता और संतुलन: श्री महावीर भगवान की आरती के माध्यम से हमारे मन में स्थिरता और संतुलन आता है। जब हम भगवान महावीर की महिमा का गुणगान करते हैं, तो हमारे मन में सकारात्मक विचार उत्पन्न होते हैं। इससे हमारे मनोबल में वृद्धि होती है और हम जीवन की विभिन्न परिस्थितियों का सामना धैर्य और संयम के साथ कर सकते हैं।

स्वयं की पहचान: श्री महावीर भगवान की आरती के माध्यम से हमें स्वयं की पहचान प्राप्त होती है। भगवान महावीर के उपदेश और शिक्षाएं हमें आत्म-निरीक्षण करने और अपने भीतर की अच्छाइयों और बुराइयों को समझने में मदद करती हैं। इससे हमें अपने जीवन को सुधारने और आत्म-विकास की दिशा में आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलती है।

सामाजिक लाभ:

सामाजिक समरसता: श्री महावीर भगवान की आरती का सामूहिक रूप से गाया जाना सामाजिक समरसता को बढ़ावा देता है। जब हम एक साथ मिलकर भगवान महावीर की आरती गाते हैं, तो हमारे बीच एकता और भाईचारे का भाव उत्पन्न होता है। इससे सामाजिक बंधन मजबूत होते हैं और समाज में शांति और सद्भावना का वातावरण बनता है।

संवेदनशीलता और सहानुभूति: श्री महावीर भगवान की आरती के माध्यम से हमें संवेदनशीलता और सहानुभूति का महत्व समझ में आता है। उनकी शिक्षाएं हमें दूसरों के प्रति सहानुभूति और प्रेम की भावना विकसित करने की प्रेरणा देती हैं। इससे हम समाज में दूसरों की मदद करने और उनके दुखों को समझने के प्रति अधिक संवेदनशील बनते हैं।

समाज सुधार: श्री महावीर भगवान की आरती के माध्यम से हम समाज में सुधार की दिशा में कार्य कर सकते हैं। उनकी शिक्षाएं हमें अहिंसा, सत्य, और अपरिग्रह जैसे गुणों को अपनाने की प्रेरणा देती हैं। इससे हम समाज में नैतिकता और सच्चाई का प्रचार-प्रसार कर सकते हैं और समाज को एक बेहतर दिशा में ले जा सकते हैं।

शारीरिक लाभ:

शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य में सुधार: श्री महावीर भगवान की आरती का नियमित अभ्यास शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को सुधारने में सहायक होता है। जब हम भगवान महावीर की आरती गाते हैं, तो हमारे शरीर में एक सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। यह ऊर्जा हमारे शरीर और मन को स्वस्थ और संतुलित बनाए रखने में मदद करती है।

प्राणायाम और ध्यान: श्री महावीर भगवान की आरती के दौरान की जाने वाली प्राणायाम और ध्यान की विधियाँ हमारे शारीरिक स्वास्थ्य के लिए लाभकारी होती हैं। यह हमारी श्वसन प्रणाली को सुधारती हैं और हमारे मन को शांत और स्थिर बनाती हैं। इससे हमारा शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य बेहतर होता है।

नैतिक और आध्यात्मिक उन्नति:

नैतिक मूल्यों का विकास: श्री महावीर भगवान की आरती के माध्यम से हमारे नैतिक मूल्यों का विकास होता है। उनकी शिक्षाएं हमें सत्य, अहिंसा, और नैतिकता के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती हैं। इससे हम एक अच्छे और सच्चे इंसान बनने की दिशा में अग्रसर होते हैं।

आध्यात्मिक अनुशासन: श्री महावीर भगवान की आरती के माध्यम से हमारे अंदर आध्यात्मिक अनुशासन का विकास होता है। यह हमें नियमित रूप से ध्यान, प्रार्थना, और साधना की दिशा में प्रेरित करता है। इससे हमारे जीवन में अनुशासन और संयम आता है, जो हमारे आध्यात्मिक विकास के लिए आवश्यक है।

दैनिक जीवन में लाभ:

दैनिक जीवन में शांति और संतोष: श्री महावीर भगवान की आरती के नियमित अभ्यास से हमारे दैनिक जीवन में शांति और संतोष का अनुभव होता है। यह हमें जीवन की चुनौतियों का सामना धैर्य और संयम के साथ करने की शक्ति देता है। इससे हमारे जीवन में सुख-शांति और संतोष का अनुभव होता है।

जीवन की दिशा: श्री महावीर भगवान की आरती के माध्यम से हमें जीवन की दिशा प्राप्त होती है। भगवान महावीर की शिक्षाएं हमें सही और गलत के बीच अंतर करने में मदद करती हैं और हमें जीवन के उच्चतर लक्ष्यों की प्राप्ति की दिशा में प्रेरित करती हैं। इससे हमारा जीवन अधिक सार्थक और सफल बनता है।

पारिवारिक लाभ:

परिवार में एकता और प्रेम: श्री महावीर भगवान की आरती का सामूहिक रूप से गाया जाना परिवार में एकता और प्रेम को बढ़ावा देता है। जब परिवार के सभी सदस्य एक साथ मिलकर भगवान महावीर की आरती गाते हैं, तो उनके बीच स्नेह और भाईचारे का भाव उत्पन्न होता है। इससे परिवार में प्रेम और सामंजस्य का वातावरण बनता है।

पारिवारिक मूल्य: श्री महावीर भगवान की आरती के माध्यम से हमें पारिवारिक मूल्यों का महत्व समझ में आता है। भगवान महावीर की शिक्षाएं हमें परिवार के प्रति हमारी जिम्मेदारियों और कर्तव्यों का पालन करने की प्रेरणा देती हैं। इससे परिवार में सद्भाव और शांति का वातावरण बनता है।

आध्यात्मिक विकास:

आध्यात्मिक अनुभव: श्री महावीर भगवान की आरती के माध्यम से हमें आध्यात्मिक अनुभव प्राप्त होते हैं। यह अनुभव हमें हमारे आंतरिक आत्मा से जुड़ने में मदद करते हैं और हमें जीवन के उच्चतर सत्य की अनुभूति कराते हैं। इससे हमारा आध्यात्मिक विकास होता है और हम मोक्ष की दिशा में अग्रसर होते हैं।

ध्यान और साधना: श्री महावीर भगवान की आरती के माध्यम से हमारे ध्यान और साधना की दिशा में वृद्धि होती है। जब हम भगवान महावीर की आरती गाते हैं, तो हमारा मन एकाग्र होता है और हम ध्यान की अवस्था में पहुँचते हैं। इससे हमारे ध्यान और साधना की गुणवत्ता में सुधार होता है।

आध्यात्मिक साधना: श्री महावीर भगवान की आरती के माध्यम से हमारे अंदर आध्यात्मिक साधना की भावना उत्पन्न होती है। भगवान महावीर की आरती के माध्यम से हमें आत्म-निरीक्षण और आत्म-विकास की दिशा में प्रेरणा मिलती है। इससे हमारे आध्यात्मिक साधना की दिशा में प्रगति होती है।

श्री महावीर भगवान की आरती “जय सन्मति देवा” का नियमित अभ्यास भक्तों के लिए अत्यधिक लाभकारी है। इसके माध्यम से हमें आध्यात्मिक, मानसिक, सामाजिक, शारीरिक, और नैतिक लाभ प्राप्त होते हैं। आरती के शब्दों में छिपी हुई भक्ति और श्रद्धा की भावना हमारे जीवन को पवित्र और शुद्ध बनाती है। इससे हम भगवान महावीर के आदर्शों को अपने जीवन में अपनाने का संकल्प लेते हैं और जीवन में सन्मति, शांति, और अहिंसा का मार्ग अपना सकते हैं। जय सन्मति देवा!

महावीर जयंती पर किसकी कथा सुनाई जाती है?

महावीर जयंती पर भगवान महावीर की कथा सुनाई जाती है। भगवान महावीर, जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर हैं, और उनकी जयंती पर उनके जीवन, शिक्षाओं और उपदेशों की कथा का वर्णन किया जाता है। यह कथा उनके उपदेशों, ध्यान, तपस्या, और अहिंसा के सिद्धांतों को उजागर करती है।

महावीर की पूजा कौन करता है?

भगवान महावीर की पूजा मुख्य रूप से जैन धर्म के अनुयायी करते हैं। जैन भक्त विशेष पूजा, ध्यान, और अनुष्ठान के माध्यम से भगवान महावीर की आराधना करते हैं। जैन मंदिरों और घरों में उनकी पूजा और आरती की जाती है, विशेषकर महावीर जयंती के दिन।

महावीर का चिन्ह क्या है?

भगवान महावीर का चिन्ह “सिंह” (शेर) है। यह चिन्ह उनकी शक्ति, साहस और दृढ़ता का प्रतीक है। जैन धर्म में महावीर को शेर के रूप में भी पूजा जाता है, जो उनके बल और नेतृत्व का संकेत है।

आरती जैन कौन है?

“आरती जैन” एक नाम है, और यह एक प्रसिद्ध भारतीय नाम है। यदि यह किसी विशेष व्यक्ति को संदर्भित करता है, तो कृपया और जानकारी प्रदान करें ताकि उत्तर को और सटीक बनाया जा सके। आम तौर पर, “आरती जैन” किसी आम जैन व्यक्ति का नाम हो सकता है, और इसमें अधिक विवरण की आवश्यकता हो सकती है।

आरती किसकी पत्नी है?

“आरती” नामक किसी विशेष व्यक्ति की पत्नी के बारे में जानकारी के लिए अधिक संदर्भ की आवश्यकता होती है। सामान्यत: “आरती” एक सामान्य भारतीय नाम है और इसके आधार पर किसी भी व्यक्ति की पत्नी का निर्धारण नहीं किया जा सकता। यदि आप किसी विशेष “आरती” की पत्नी के बारे में जानना चाहते हैं, तो कृपया और जानकारी प्रदान करें।

आरती कौन सा धर्म है?

“आरती” एक नाम है और यह धर्म से संबंधित नहीं है। हालांकि, “आरती” एक हिन्दू धार्मिक परंपरा भी है, जिसमें पूजा के समय दीपक की पूजा की जाती है। यह धार्मिक अनुष्ठान हिन्दू धर्म में आम है। यदि “आरती” एक व्यक्ति का नाम है, तो धर्म उसकी व्यक्तिगत पहचान पर निर्भर करता है।

This article is regularly reviewed and updated by our editorial team to ensure accuracy.
Published: February 27, 2025 — Last updated: February 2, 2026

Written by Hemlata – Experienced Hindu Devotee and Devotional Text Expert

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