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Hanuman Ji Ki Aarti Pdf | श्री हनुमान जी की आरती | Download Lyrics 2026

Written by Dr. Hemlata, Editorially reviewed by the Chalisa-PDF.com editorial team Last reviewed: August 22, 2026
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हनुमान जी की आरती (Hanuman Ji Ki Aarti) भारतीय धार्मिक परंपरा में अत्यधिक महत्वपूर्ण और पूजनीय मानी जाती है। यह आरती भगवान हनुमान की महिमा और शक्ति का गुणगान करती है, जो भक्तों के कष्टों को दूर करने और उनके जीवन में सुख-शांति प्रदान करने में सहायक माने जाते हैं। हनुमान जी को राम भक्त, अजर-अमर और महाबली के रूप में पूजा जाता है। हनुमान जी की आरती उनके प्रति श्रद्धा और आस्था प्रकट करने का एक साधन है, जो भक्तों को मानसिक और आध्यात्मिक बल प्रदान करती है। यह आरती किसी भी हनुमान मंदिर में नियमित रूप से की जाती है और विशेष रूप से मंगलवार और शनिवार को अधिक महत्व रखती है।

आरती के दौरान भगवान हनुमान की विभिन्न विशेषताओं और उपलब्धियों का वर्णन किया जाता है। इसे गाने से भक्तों को सकारात्मक ऊर्जा और आत्मविश्वास प्राप्त होता है। हनुमान जी को विघ्न-विनाशक और संकटमोचन कहा जाता है, और उनकी आरती करने से जीवन की कठिनाइयों का समाधान पाने की भावना प्रबल होती है। भक्तगण आरती के समय दीपक जलाकर, फूल अर्पित कर, और धूप-दीप से पूजा कर भगवान हनुमान से अपने जीवन में सुख-समृद्धि की कामना करते हैं।

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हनुमान आरती

॥ हनुमान जी महराज की जय ॥

॥ श्री हनुमंत स्तुति ॥
मनोजवं मारुत तुल्यवेगं,
जितेन्द्रियं, बुद्धिमतां वरिष्ठम् ॥
वातात्मजं वानरयुथ मुख्यं,
श्रीरामदुतं शरणम प्रपद्धे ॥

॥ आरती ॥
आरती कीजै हनुमान लला की ।
दुष्ट दलन रघुनाथ कला की ॥

जाके बल से गिरवर काँपे ।
रोग-दोष जाके निकट न झाँके ॥
अंजनि पुत्र महा बलदाई ।
संतन के प्रभु सदा सहाई ॥
आरती कीजै हनुमान लला की ॥

दे वीरा रघुनाथ पठाए ।
लंका जारि सिया सुधि लाये ॥
लंका सो कोट समुद्र सी खाई ।
जात पवनसुत बार न लाई ॥
आरती कीजै हनुमान लला की ॥

लंका जारि असुर संहारे ।
सियाराम जी के काज सँवारे ॥
लक्ष्मण मुर्छित पड़े सकारे ।
लाये संजिवन प्राण उबारे ॥
आरती कीजै हनुमान लला की ॥

पैठि पताल तोरि जमकारे ।
अहिरावण की भुजा उखारे ॥
बाईं भुजा असुर दल मारे ।
दाहिने भुजा संतजन तारे ॥
आरती कीजै हनुमान लला की ॥

सुर-नर-मुनि जन आरती उतरें ।
जय जय जय हनुमान उचारें ॥
कंचन थार कपूर लौ छाई ।
आरती करत अंजना माई ॥
आरती कीजै हनुमान लला की ॥

जो हनुमानजी की आरती गावे ।
बसहिं बैकुंठ परम पद पावे ॥
लंक विध्वंस किये रघुराई ।
तुलसीदास स्वामी कीर्ति गाई ॥

आरती कीजै हनुमान लला की ।
दुष्ट दलन रघुनाथ कला की ॥
॥ इति संपूर्णंम् ॥

|| हनुमान जी की स्तुति ||

प्रनवउँ पवनकुमार खल बन पावक ग्यान घन।
जासु हृदय आगार बसहिं राम सर चाप धर॥

अतुलितबलधामं हेमशैलाभदेहं दनुजवनकृशानुं ज्ञानिनामग्रगण्यम्‌।
सकलगुणनिधानं वानराणामधीशं रघुपतिप्रियभक्तं वातजातं नमामि॥

लाल देह लाली लसे, अरु धरि लाल लंगूर।
वज्र देह दानव दलन, जय जय जय कपि सूर।।

Hanuman Aarti Lyrics

Aarti Kije Hanuman Lala Ki।
Dusht Dalan Ragunath Kala Ki॥
Jake Bal Se Girivar Kaanpe।
Rog Dosh Ja Ke Nikat Na Jhaanke॥

Anjani Putra Maha Baldaaee।
Santan Ke Prabhu Sada Sahai॥
De Beera Raghunath Pathaaye।
Lanka Jaari Siya Sudhi Laaye॥

Lanka So Kot Samundra-Si Khai।
Jaat Pavan Sut Baar Na Lai॥
Lanka Jaari Asur Sanhare।
Siyaramji Ke Kaaj Sanvare॥

Lakshman Moorchhit Pade Sakaare।
Aani Sajeevan Pran Ubaare॥
Paithi Pataal Tori Jam-kaare।
Ahiravan Ke Bhuja Ukhaare॥

Baayen Bhuja Asur Dal Mare।
Daahine Bhuja Santjan Tare॥
Sur Nar Muni Aarti Utare।
Jai Jai Jai Hanuman Uchaare॥

Kanchan Thaar Kapoor Lau Chhaai।
Aarti Karat Anjana Maai॥
Jo Hanumanji Ki Aarti Gaave।
Basi Baikunth Param Pad Pave॥



हनुमान जी की आरती करने के बाद कुछ विशेष क्रियाएँ करने से आपकी भक्ति और भी गहरी हो सकती है। आरती के बाद, आप हनुमान जी के चरणों में प्रणाम करके अपने हृदय में सच्चे श्रद्धा भाव से उनके प्रति कृतज्ञता प्रकट करें। इस समय मन में सभी बुराइयों, नकारात्मकता और चिंता को छोड़कर केवल भक्ति और प्रेम के विचार लाएँ। इससे न केवल आपके मन को शांति मिलेगी, बल्कि आपके आत्मिक विकास में भी सहायता मिलेगी। हनुमान जी को समर्पित भाव से एक प्रणाम करने से उनके प्रति आपकी आस्था और बढ़ेगी।

आरती के बाद, भक्तों को हनुमान चालीसा का पाठ करने की भी सलाह दी जाती है। हनुमान चालीसा, जिसमें भगवान हनुमान के गुणों और शक्तियों का वर्णन है, आपके मन को और भी अधिक स्थिरता और शक्ति प्रदान करेगा। इसे पढ़ने से आपकी आस्था और भक्ति में वृद्धि होती है। हनुमान चालीसा का पाठ करने से मानसिक शांति और ध्यान में एकाग्रता प्राप्त होती है, जो जीवन के कठिन परिस्थितियों में मार्गदर्शन कर सकती है। इस प्रकार, यह आपके जीवन में सकारात्मकता लाने का एक साधन है।

इसके अलावा, आरती के बाद भोग अर्पित करने का भी महत्व है। हनुमान जी को ताजगी से भरा फल, मिठाई, या उनकी पसंदीदा चीजें अर्पित करके, आप उन्हें प्रसन्न कर सकते हैं। यह एक प्रकार की भक्ति का प्रतीक है, जहां आप भगवान को अपने दिल से कुछ अर्पित करते हैं। भक्तों का मानना है कि जब आप हनुमान जी को अर्पित करते हैं, तो वे आपके प्रति अपनी कृपा और आशीर्वाद बढ़ाते हैं। इस तरह, यह क्रिया न केवल भक्ति का अनुभव देती है, बल्कि आपके जीवन में खुशियों का संचार भी करती है।

आरती के बाद एकाग्रता से ध्यान करना भी फायदेमंद होता है। कुछ समय शांत बैठकर, हनुमान जी की छवि का स्मरण करें और उनके प्रति अपने भावों को प्रकट करें। ध्यान के माध्यम से आप अपने अंतर्मन की गहराइयों में जाकर भगवान की उपस्थिति का अनुभव कर सकते हैं। यह क्रिया आपको आंतरिक शांति, संतोष और मानसिक स्थिरता प्रदान करती है। हनुमान जी की आरती और इसके बाद की इन क्रियाओं से आपके जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का संचार होगा।


1. हनुमान जी का असली मंत्र कौन सा है?

हनुमान जी का असली मंत्र “ॐ हं हनुमते नमः” माना जाता है। यह मंत्र अत्यंत प्रभावशाली और शक्तिशाली है, जिसे श्रद्धा और भक्ति से जपने पर भक्त को साहस, आत्मविश्वास और नकारात्मक शक्तियों से रक्षा प्राप्त होती है। यह मंत्र हनुमान जी के नाम का उच्चारण करने का सबसे शुद्ध और सरल तरीका है। “” से पूरे ब्रह्मांड की ऊर्जा को आवाहित किया जाता है, और “हनुमते” का मतलब हनुमान जी से प्रार्थना करना है, जबकि “नमः” का अर्थ है नमन या समर्पण।

इस मंत्र का नियमित रूप से जाप करने से व्यक्ति में बल, बुद्धि, और वीरता का संचार होता है। इसे विशेष रूप से मंगलवार और शनिवार के दिन जपना शुभ माना जाता है। ध्यान रखें कि इस मंत्र का जाप शुद्ध मन और शांत वातावरण में किया जाना चाहिए। इसे 108 बार जपने की परंपरा है, लेकिन अपने समय और श्रद्धा अनुसार भी जाप कर सकते हैं। हनुमान जी की कृपा प्राप्त करने के लिए इस मंत्र का उपयोग ध्यान, पूजा और साधना में किया जा सकता है।

2. हनुमान जी से प्रार्थना कैसे करें?

हनुमान जी से प्रार्थना करने के लिए भक्त को सच्ची श्रद्धा और विश्वास की आवश्यकता होती है। हनुमान जी को बल, बुद्धि, और भक्ति के प्रतीक के रूप में पूजा जाता है, और उन्हें प्रसन्न करने के लिए सबसे महत्वपूर्ण है दिल से प्रार्थना करना। प्रार्थना की शुरुआत हनुमान जी की प्रतिमा या चित्र के सामने दीपक और अगरबत्ती जलाकर की जाती है। इसके बाद “ॐ हं हनुमते नमः” या “श्री हनुमान चालीसा” का पाठ कर सकते हैं।

हनुमान जी से प्रार्थना करते समय मानसिक शांति और एकाग्रता बहुत आवश्यक है। भक्त को अपने मन की सभी नकारात्मकताओं को छोड़कर हनुमान जी के चरणों में समर्पण करना चाहिए। प्रार्थना में अपने दुख, समस्याओं या इच्छाओं का वर्णन कर सकते हैं, लेकिन इसे करते समय अपने मन में विश्वास रखें कि हनुमान जी आपकी प्रार्थना अवश्य सुनेंगे और सहायता करेंगे।

प्रार्थना के बाद हनुमान जी को प्रसाद अर्पित करें, जैसे गुड़, बेसन का लड्डू, या चने का भोग। प्रार्थना को समाप्त करते समय “श्री राम जय राम जय जय राम” का जाप करें और अंत में हाथ जोड़कर हनुमान जी को नमन करें।

3. हनुमान जी की आरती कितनी बार घुमानी चाहिए?

हनुमान जी की आरती करते समय दीपक को 7 बार घुमाने की परंपरा है। यह संख्या धार्मिक मान्यताओं के अनुसार शुभ मानी जाती है और इसे पूर्णता का प्रतीक माना जाता है। आरती को 7 बार घुमाने का मतलब यह है कि भगवान की सातों दिशाओं में ऊर्जा और प्रकाश फैलाने की कामना की जाती है। इसके अलावा, 7 बार आरती घुमाने से भक्त की आत्मा और मन भी शुद्ध होते हैं, और भगवान से उनका संबंध प्रगाढ़ होता है।

आरती करते समय ध्यान रखें कि दीपक को भगवान की प्रतिमा या चित्र के चारों ओर सर्कुलर मोशन में घुमाएं। पहले सिर के पास तीन बार, फिर शरीर के मध्य भाग के पास तीन बार, और अंत में चरणों के पास एक बार घुमाएं। इससे प्रतीकात्मक रूप से भगवान के संपूर्ण स्वरूप को सम्मान दिया जाता है। आरती के समय भजन या स्तुति भी गाई जा सकती है, जिससे वातावरण भक्तिमय हो जाता है। आरती समाप्त होने के बाद, अपने माथे पर दीपक की लौ से कुछ सेकंड के लिए हाथ फेरें, यह भी आशीर्वाद प्राप्त करने का एक तरीका माना जाता है।

4. हनुमान जी का शक्तिशाली मंत्र क्या है?

हनुमान जी का सबसे शक्तिशाली मंत्र “हनुमान बाहुक” और “महावीर मन्त्र” माने जाते हैं। इनमें से एक शक्तिशाली मंत्र “ॐ हं हनुमते रुद्रात्मकाय हुं फट्” है। इस मंत्र का नियमित जाप भक्त को साहस, शक्ति, और मानसिक स्थिरता प्रदान करता है। यह मंत्र न केवल हनुमान जी की कृपा को प्राप्त करने के लिए है, बल्कि यह नकारात्मक शक्तियों और बुराईयों से रक्षा करने में भी सहायक होता है।

इस मंत्र का विशेष प्रभाव तब होता है जब इसे सच्चे मन और श्रद्धा के साथ जपा जाए। यह उन लोगों के लिए अत्यंत लाभकारी है जो जीवन में किसी भय, असुरक्षा, या मानसिक तनाव का सामना कर रहे हैं। इस मंत्र का उच्चारण करते समय भगवान हनुमान जी की भक्ति और वीरता को ध्यान में रखना चाहिए, और हर जप के साथ भगवान के प्रति समर्पण की भावना होनी चाहिए।

ॐ हं हनुमते रुद्रात्मकाय हुं फट्” मंत्र का जाप करने से भक्त को मानसिक और शारीरिक शक्ति मिलती है, और जीवन में किसी भी प्रकार की बाधाओं से निपटने की क्षमता विकसित होती है। इसे नियमित रूप से 108 बार जपना अत्यधिक शुभ माना जाता है।

5. आरती के पहले कौन सा मंत्र बोलना चाहिए?

आरती से पहले हनुमान जी का ध्यान मंत्र “ॐ हनुमते नमः” या “ॐ हं हनुमते रुद्रात्मकाय हुं फट्” बोलना शुभ माना जाता है। इस मंत्र से पूजा की शुरुआत करने से मन शुद्ध होता है और आरती करने का उद्देश्य स्पष्ट हो जाता है। इस मंत्र के माध्यम से भक्त भगवान हनुमान से अपने पूजा स्थल को पवित्र करने और उनकी कृपा प्राप्त करने की प्रार्थना करते हैं।

ध्यान मंत्र के बाद “हनुमान चालीसा” का पाठ भी किया जा सकता है, जो हनुमान जी की शक्तियों और गुणों का वर्णन करता है। यह पाठ भक्त के मन में आत्मविश्वास और हनुमान जी की असीम कृपा की भावना भरता है। इस प्रकार, आरती करने से पहले ध्यान मंत्र और हनुमान चालीसा का पाठ करना एक पूर्ण भक्तिक्रम माने जाते हैं।

ध्यान मंत्र न केवल हनुमान जी को स्मरण करने का तरीका है, बल्कि यह भक्त के मानसिक और आध्यात्मिक संतुलन को बनाए रखने में भी सहायक होता है। ध्यान मंत्र के बाद आरती शुरू की जाती है, जिससे पूजा पूरी तरह से सफल और प्रभावशाली मानी जाती है।

6. आरती के बाद क्या बोलना चाहिए?

आरती के बाद “श्री राम जय राम जय जय राम” का जाप करना शुभ माना जाता है। यह मंत्र भगवान श्री राम और उनके परम भक्त हनुमान जी की महिमा का बखान करता है। आरती के बाद यह मंत्र बोलने से भक्त के मन और वातावरण में शांति और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। हनुमान जी को राम भक्त के रूप में पूजा जाता है, इसलिए राम नाम का उच्चारण उनके प्रति भक्ति का मुख्य हिस्सा है।

इसके अलावा, “पुनः हनुमान वंदना” भी की जा सकती है, जिसमें हनुमान जी की स्तुति और गुणगान किया जाता है। उदाहरण के लिए, “श्री हनुमान चालीसा” का पुनः पाठ करना भी एक आदर्श तरीका है। आरती के बाद भगवान को प्रणाम करना और उनसे आशीर्वाद मांगना भी परंपरा का हिस्सा है।

आरती के बाद ध्यान और प्रार्थना के लिए थोड़ी देर शांत बैठना चाहिए, ताकि भगवान हनुमान जी की कृपा और उनकी उपस्थिति का अनुभव किया जा सके। इस समय अपने कष्टों, इच्छाओं और समर्पण का हनुमान जी के चरणों में अर्पण करें और उनकी कृपा का आशीर्वाद प्राप्त करें।

7. हनुमान जी की पूजा सुबह कितने बजे करनी चाहिए?

हनुमान जी की पूजा का सर्वोत्तम समय ब्रह्ममुहूर्त माना जाता है, जो सुबह 4:00 बजे से 6:00 बजे तक होता है। इस समय को अत्यंत पवित्र और शांत माना जाता है, और इस दौरान की गई पूजा अत्यधिक प्रभावशाली होती है। सुबह के समय वातावरण शुद्ध और शांत रहता है, जिससे भक्त की एकाग्रता बढ़ती है और भगवान हनुमान की कृपा प्राप्त करने में मदद मिलती है।

यदि ब्रह्ममुहूर्त में पूजा करना संभव न हो, तो सूर्योदय के समय, यानी सुबह 6:00 बजे से 8:00 बजे तक भी हनुमान जी की पूजा की जा सकती है। सुबह के समय की गई पूजा भक्त के दिन की शुरुआत को शुभ और सकारात्मक बनाती है। इस समय दीप जलाकर, हनुमान चालीसा का पाठ और मंत्र जप करना अत्यधिक शुभ माना जाता है।

हनुमान जी की पूजा से पहले शुद्ध स्नान कर लेना चाहिए और पूजा स्थल को स्वच्छ रखना चाहिए। हनुमान जी की पूजा के लिए मंगलवार और शनिवार के दिन विशेष माने जाते हैं, लेकिन रोज़ सुबह हनुमान जी का ध्यान करने से भी भक्त को लाभ होता है।

This article is regularly reviewed and updated by our editorial team to ensure accuracy.
Published: February 27, 2025 — Last updated: February 4, 2026

Written by Hemlata – Experienced Hindu Devotee and Devotional Text Expert

Hemlata is a practicing Hindu devotee with over 15 years of experience in daily recitation of Chalisas, Aartis, Mantras, and Stotras. She has studied devotional texts extensively and is committed to preserving authentic versions of traditional hymns. The Text on this page has been carefully verified with commonly accepted temple and devotional editions to ensure accuracy, readability, and adherence to traditional practice.

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