Wednesday, January 28, 2026
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बृहस्पति देव चालीसा – Brihaspati Chalisa PDF 2025

By Dr. Hemlata | Reviewed by Vedic Scholar | Last Updated: January 2026 - This devotional text has been carefully verified against widely accepted traditional sources to preserve correct wording, pronunciation, and spiritual intent for daily recitation.
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बृहस्पति देव चालीसा (Brihaspati Chalisa PDF) बृहस्पति देव, जिन्हें गुरु भी कहा जाता है, हिंदू धर्म में नवग्रहों में से एक माने जाते हैं। वे विद्या, ज्ञान और धर्म के अधिष्ठाता देवता हैं। बृहस्पति देव का संबंध बृहस्पति ग्रह से है, जिसे ज्योतिष शास्त्र में गुरु ग्रह के नाम से जाना जाता है। यह ग्रह व्यक्ति के जीवन में शिक्षा, धन, संतान, और शुभ फल देने वाला माना जाता है। बृहस्पति देव की पूजा से व्यक्ति को ज्ञान, संतान, और वैवाहिक सुख की प्राप्ति होती है, साथ ही यह धन-धान्य में भी वृद्धि करते हैं। ब्रह्मा चालीसा

बृहस्पति देव की पूजा विशेष रूप से गुरुवार के दिन की जाती है, जिसे बृहस्पतिवार या गुरुवार भी कहा जाता है। इस दिन व्रत रखने और बृहस्पति देव की आराधना करने से भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। बृहस्पति देव के भक्त अपने जीवन में आने वाली सभी समस्याओं का समाधान और शुभफल प्राप्त करने के लिए उनकी चालीसा का पाठ करते हैं।

‘बृहस्पति देव चालीसा’ एक शक्तिशाली और प्रभावशाली स्तुति है, जिसमें 40 छंद होते हैं। प्रत्येक छंद में बृहस्पति देव के गुणों और उनकी महिमा का वर्णन किया गया है। इस चालीसा का पाठ करने से व्यक्ति के जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का वास होता है। बृहस्पति देव चालीसा का नियमित पाठ करने से ज्ञान की वृद्धि होती है और संतान सुख की प्राप्ति होती है। साथ ही, जो व्यक्ति अपने जीवन में आर्थिक तंगी, वैवाहिक समस्या, या अन्य किसी भी प्रकार की कठिनाई का सामना कर रहा हो, उसे बृहस्पति देव की चालीसा का पाठ अवश्य करना चाहिए। इससे उनके जीवन में सकारात्मक बदलाव आते हैं।

बृहस्पति देव चालीसा का पाठ करने से गुरु ग्रह की शांति होती है। यह चालीसा गुरु ग्रह के अशुभ प्रभाव को दूर करने में सहायक मानी जाती है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, जब किसी व्यक्ति की कुंडली में गुरु ग्रह कमजोर हो, तो उसके जीवन में कई प्रकार की समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं, जैसे कि शिक्षा में बाधा, आर्थिक तंगी, संतान सुख में कमी, आदि। ऐसे में बृहस्पति देव की चालीसा का पाठ अत्यंत लाभकारी होता है।

इस चालीसा का पाठ किसी भी समय किया जा सकता है, लेकिन विशेष रूप से गुरुवार के दिन इसका पाठ करना अधिक फलदायी माना गया है। भक्तगण इसे प्रातःकाल या संध्या समय बृहस्पति देव की प्रतिमा या चित्र के सामने बैठकर पढ़ सकते हैं। इस दौरान पीले वस्त्र धारण करने और पीले फूलों का उपयोग करने से विशेष लाभ प्राप्त होता है।

बृहस्पति देव चालीसा का PDF प्रारूप आजकल इंटरनेट पर आसानी से उपलब्ध है। इसे डाउनलोड कर के, भक्तगण अपने घर में कभी भी इसका पाठ कर सकते हैं। यह चालीसा PDF प्रारूप में मिलने के कारण इसे अपने मोबाइल या कंप्यूटर पर सेव करना और पाठ करना बहुत ही सरल हो गया है। PDF प्रारूप में चालीसा पढ़ने का एक और लाभ यह है कि इसे आसानी से शेयर भी किया जा सकता है, जिससे अन्य भक्त भी इसका लाभ उठा सकते हैं।



  • हिंदी / संस्कृत
  • English

|| बृहस्पति देव चालीसा ||

दोहा

प्रन्वाऊ प्रथम गुरु चरण, बुद्धि ज्ञान गुन खान ।
श्री गणेश शारद सहित, बसों ह्रदय में आन ॥

अज्ञानी मति मंद मैं, हैं गुरुस्वामी सुजान ।
दोषों से मैं भरा हुआ हूँ तुम हो कृपा निधान ॥

चौपाई

जय नारायण जय निखिलेशवर ।
विश्व प्रसिद्ध अखिल तंत्रेश्वर ॥

यंत्र-मंत्र विज्ञानं के ज्ञाता ।
भारत भू के प्रेम प्रेनता ॥

जब जब हुई धरम की हानि ।
सिद्धाश्रम ने पठए ज्ञानी ॥

सच्चिदानंद गुरु के प्यारे ।
सिद्धाश्रम से आप पधारे ॥

उच्चकोटि के ऋषि-मुनि स्वेच्छा ।
ओय करन धरम की रक्षा ॥

अबकी बार आपकी बारी ।
त्राहि त्राहि है धरा पुकारी ॥

मरुन्धर प्रान्त खरंटिया ग्रामा ।
मुल्तानचंद पिता कर नामा ॥

शेषशायी सपने में आये ।
माता को दर्शन दिखलाये ॥

रुपादेवि मातु अति धार्मिक ।
जनम भयो शुभ इक्कीस तारीख ॥

जन्म दिवस तिथि शुभ साधक की ।
पूजा करते आराधक की ॥

जन्म वृतन्त सुनाये नवीना ।
मंत्र नारायण नाम करि दीना ॥

नाम नारायण भव भय हारी ।
सिद्ध योगी मानव तन धारी ॥

ऋषिवर ब्रह्म तत्व से ऊर्जित ।
आत्म स्वरुप गुरु गोरवान्वित ॥

एक बार संग सखा भवन में ।
करि स्नान लगे चिन्तन में ॥

चिन्तन करत समाधि लागी ।
सुध-बुध हीन भये अनुरागी ॥

पूर्ण करि संसार की रीती ।
शंकर जैसे बने गृहस्थी ॥

अदभुत संगम प्रभु माया का ।
अवलोकन है विधि छाया का ॥

युग-युग से भव बंधन रीती ।
जंहा नारायण वाही भगवती ॥

सांसारिक मन हुए अति ग्लानी ।
तब हिमगिरी गमन की ठानी ॥

अठारह वर्ष हिमालय घूमे ।
सर्व सिद्धिया गुरु पग चूमें ॥

त्याग अटल सिद्धाश्रम आसन ।
करम भूमि आये नारायण ॥

धरा गगन ब्रह्मण में गूंजी ।
जय गुरुदेव साधना पूंजी ॥

सर्व धर्महित शिविर पुरोधा ।
कर्मक्षेत्र के अतुलित योधा ॥

ह्रदय विशाल शास्त्र भण्डारा ।
भारत का भौतिक उजियारा ॥

एक सौ छप्पन ग्रन्थ रचयिता ।
सीधी साधक विश्व विजेता ॥

प्रिय लेखक प्रिय गूढ़ प्रवक्ता ।
भुत-भविष्य के आप विधाता ॥

आयुर्वेद ज्योतिष के सागर ।
षोडश कला युक्त परमेश्वर ॥

रतन पारखी विघन हरंता ।
सन्यासी अनन्यतम संता ॥

अदभुत चमत्कार दिखलाया ।
पारद का शिवलिंग बनाया ॥

वेद पुराण शास्त्र सब गाते ।
पारेश्वर दुर्लभ कहलाते ॥

पूजा कर नित ध्यान लगावे ।
वो नर सिद्धाश्रम में जावे ॥

चारो वेद कंठ में धारे ।
पूजनीय जन-जन के प्यारे ॥

चिन्तन करत मंत्र जब गायें ।
विश्वामित्र वशिष्ठ बुलायें ॥

मंत्र नमो नारायण सांचा ।
ध्यानत भागत भुत-पिशाचा ॥

प्रातः कल करहि निखिलायन ।
मन प्रसन्न नित तेजस्वी तन ॥

निर्मल मन से जो भी ध्यावे ।
रिद्धि सिद्धि सुख-सम्पति पावे ॥

पथ करही नित जो चालीसा ।
शांति प्रदान करहि योगिसा ॥

अष्टोत्तर शत पाठ करत जो ।
सर्व सिद्धिया पावत जन सो ॥

श्री गुरु चरण की धारा ।
सिद्धाश्रम साधक परिवारा ॥

जय-जय-जय आनंद के स्वामी ।
बारम्बार नमामी नमामी ॥

|| Brihaspati Chalisa PDF ||

।। Doha ।।

Pranvaoo pratham guru charan ।
Buddhi gyan gun khan ।।
Shri ganesh sharad sahit ।
Bason hraday mein an ।।

Agyani mati mand main ।
Hain gurusvami sujan ।।
Doshon se main bhara hua hoon ।
Tum ho kripa nidhan ।।

।। Chaupai ।।

Jay narayan jay nikhileshvar ।
Vishv prasiddh akhil tantreshvar ।।

Yantra mantra vigyanan ke gyata ।
Bharat bhoo ke prem prenata ।।

Jab jab hui dharam ki hani ।
Siddhashram ne pathe gyani ।।

Sachchidanand guru ke pyare ।
Siddhashram se ap padhare ।।

Uchchakoti ke rshi muni svechchha ।
Oy karan dharam ki raksha ।।

Abaki bar apaki bari ।
Trahi trahi hai dhara pukari ।।

Marundhar prant kharantiya grama ।
Multanachand pita kar nama ।।

Sheshashayi sapane mein aye ।
Mata ko darshan dikhalaye ।।

Rupadevi matu ati dharmik ।
Janam bhayo shubh ikkis tarikh ।।

Janm divas tithi shubh sadhak ki ।
Pooja karate aradhak ki ।।

Janm vrtant sunaye navina ।
Mantr narayan nam kari dina ।।

Nam narayan bhav bhay hari ।
Siddh yogi manav tan dhari ।।

Shivar brahm tatv se urjit ।
Atm svarup guru goravanvit ।।

Ek bar sang sakha bhavan mein ।
Kari snan lage chintan mein ।।

Chintan karat samadhi lagi ।
Sudh budh hin bhaye anuragi ।।

Poorn kari sansar ki riti ।
Shankar jaise bane grhasthi ।।

Adabhut sangam prabhu maya ka ।
Avalokan hai vidhi chhaya ka ।।

Yug yug se bhav bandhan riti ।
Janha narayan vahi bhagavati ।।

Sansarik man hue ati glani ।
Tab himagiri gaman ki thani ।।

Atharah varsh himalay ghoome ।
Sarv siddhiya guru pag choomen ।।

Tyag atal siddhashram asan ।
Karam bhoomi aye narayan ।।

Dhara gagan brahman mein goonji ।
Jay gurudev sadhana poonji ।।

Sarv dharmahit shivir purodha ।
Karmakshetr ke atulit yodha ।।

Hraday vishal shastr bhandara ।
Bharat ka bhautik ujiyara ।।

Ek sau chhappan granth rachayita ।
Sidhi sadhak vishv vijeta ।।

Priy lekhak priy goodh pravakta ।
Bhut bhavishy ke ap vidhata ।।

Ayurved jyotish ke sagar ।
Shodash kala yukt parameshvar ।।

Ratan parakhi vighan haranta ।
Sanyasi ananyatam santa ।।

Adabhut chamatkar dikhalaya ।
Parad ka shivaling banaya ।।

Ved puran shastr sab gate ।
Pareshvar durlabh kahalate ।।

Pooja kar nit dhyan lagave ।
Vo nar siddhashram mein jave ।।

Charo ved kanth mein dhare ।
Poojaniy jan jan ke pyare ।।

Chintan karat mantr jab gayen ।
Vishvamitr vashishth bulayen ।।

Mantra namo narayan sancha ।
Dhyanat bhagat bhut pishacha ।।

Pratah kal karahi nikhilayan ।
Man prasann nit tejasvi tan ।।

Nirmal man se jo bhi dhyave ।
Riddhi siddhi sukh sampati pave ।।

Path karahi nit jo chalisa
Shanti pradan karahi yogisa ।।

Ashtottar shat path karat jo ।
Sarv siddhiya pavat jan so ।।

Shri guru charan ki dhara ।
Siddhashram sadhak parivara ।।

Jay jay jay anand ke swami ।
Barambar namami namami ।।

Ithi shri brihaspati dev chalisa sampoorn |



श्री बृहस्पति चालीसा के लाभ

हिंदू धर्म में बृहस्पति देव को नवग्रहों में से एक महत्वपूर्ण ग्रह माना गया है। उन्हें ज्ञान, बुद्धि, शिक्षा और धर्म के अधिष्ठाता देवता के रूप में पूजा जाता है। बृहस्पति देव की कृपा से व्यक्ति को जीवन में ज्ञान, संतान, धन, वैवाहिक सुख, और समृद्धि प्राप्त होती है। बृहस्पति ग्रह का संबंध बृहस्पति देव से है और ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, बृहस्पति ग्रह का व्यक्ति के जीवन में गहरा प्रभाव पड़ता है। श्री बृहस्पति चालीसा एक पवित्र स्तुति है, जिसमें बृहस्पति देव के गुणों, महिमा और कृपा का वर्णन किया गया है। इस चालीसा के पाठ से व्यक्ति को अनगिनत लाभ प्राप्त होते हैं, जो उसके जीवन को सुखमय और समृद्ध बनाते हैं।

बृहस्पति देव की कृपा प्राप्ति

श्री बृहस्पति चालीसा का नियमित पाठ करने से बृहस्पति देव की कृपा प्राप्त होती है। यह चालीसा बृहस्पति देव के गुणों और उनकी महिमा का वर्णन करती है, जिससे देवता प्रसन्न होते हैं और भक्तों पर अपनी कृपा बरसाते हैं। उनकी कृपा से व्यक्ति को जीवन में शिक्षा, धन, संतान सुख, और वैवाहिक जीवन में शांति और समृद्धि प्राप्त होती है। बृहस्पति देव की कृपा से व्यक्ति के जीवन में आने वाली सभी बाधाएं दूर हो जाती हैं और उसका जीवन सुखदायक बनता है।

गुरु ग्रह के अशुभ प्रभावों से मुक्ति

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, बृहस्पति ग्रह को गुरु ग्रह कहा जाता है और यह व्यक्ति के जीवन में शिक्षा, धन, धर्म, और संतान सुख को प्रभावित करता है। यदि किसी व्यक्ति की कुंडली में गुरु ग्रह कमजोर या अशुभ स्थिति में हो, तो उसे जीवन में कई प्रकार की समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है, जैसे शिक्षा में बाधा, आर्थिक तंगी, संतान सुख में कमी, वैवाहिक जीवन में तनाव, आदि। ऐसे में श्री बृहस्पति चालीसा का पाठ करना अत्यंत लाभकारी होता है। इस चालीसा का पाठ करने से गुरु ग्रह के अशुभ प्रभाव दूर होते हैं और व्यक्ति को जीवन में सफलता प्राप्त होती है।

शिक्षा और ज्ञान की प्राप्ति

बृहस्पति देव को शिक्षा और ज्ञान का देवता माना जाता है। जो व्यक्ति शिक्षा में प्रगति करना चाहता है, उसे नियमित रूप से श्री बृहस्पति चालीसा का पाठ करना चाहिए। इस चालीसा के पाठ से बुद्धि का विकास होता है और व्यक्ति को शिक्षा के क्षेत्र में उन्नति प्राप्त होती है। विद्यार्थियों के लिए यह चालीसा अत्यंत लाभकारी होती है, क्योंकि इससे उनकी अध्ययन में एकाग्रता बढ़ती है और उन्हें परीक्षा में अच्छे परिणाम प्राप्त होते हैं। इसके अलावा, जो लोग किसी विशेष विद्या या कौशल में निपुणता प्राप्त करना चाहते हैं, उनके लिए भी यह चालीसा अत्यंत लाभकारी होती है।

वैवाहिक जीवन में शांति और समृद्धि

श्री बृहस्पति चालीसा का पाठ करने से वैवाहिक जीवन में शांति और समृद्धि प्राप्त होती है। बृहस्पति देव को विवाह और संतान सुख का अधिष्ठाता देवता माना जाता है। यदि किसी दंपत्ति के जीवन में वैवाहिक समस्याएं हैं, तो उन्हें नियमित रूप से इस चालीसा का पाठ करना चाहिए। इससे उनके वैवाहिक जीवन में शांति और समृद्धि का वास होगा और उनके बीच आपसी प्रेम और समझ बढ़ेगी। इसके साथ ही, जो दंपत्ति संतान प्राप्ति की इच्छा रखते हैं, उनके लिए भी यह चालीसा अत्यंत लाभकारी होती है।

आर्थिक तंगी से मुक्ति

श्री बृहस्पति चालीसा का पाठ करने से आर्थिक तंगी से मुक्ति मिलती है। बृहस्पति देव को धन और समृद्धि का देवता माना जाता है। यदि किसी व्यक्ति के जीवन में आर्थिक संकट चल रहा हो, तो उसे इस चालीसा का नियमित पाठ करना चाहिए। इससे उसके जीवन में धन-धान्य की प्राप्ति होगी और उसकी आर्थिक स्थिति में सुधार होगा। इसके अलावा, यदि किसी व्यक्ति को व्यापार या नौकरी में कठिनाई का सामना करना पड़ रहा हो, तो भी इस चालीसा का पाठ करने से उसे सफलता प्राप्त होती है।

मानसिक शांति और आध्यात्मिक उन्नति

श्री बृहस्पति चालीसा का पाठ करने से मानसिक शांति और आध्यात्मिक उन्नति प्राप्त होती है। इस चालीसा के माध्यम से व्यक्ति बृहस्पति देव के साथ अपने संबंध को मजबूत कर सकता है और अपनी आत्मा को शुद्ध कर सकता है। नियमित रूप से इस चालीसा का पाठ करने से मन की अशांति और तनाव दूर होते हैं और व्यक्ति को आंतरिक शांति का अनुभव होता है। इसके साथ ही, यह चालीसा व्यक्ति को आध्यात्मिक मार्ग पर अग्रसर करती है और उसे आत्मज्ञान प्राप्त करने में सहायता करती है।

समाज में सम्मान और प्रतिष्ठा की प्राप्ति

श्री बृहस्पति चालीसा का पाठ करने से व्यक्ति को समाज में सम्मान और प्रतिष्ठा प्राप्त होती है। बृहस्पति देव को धर्म और ज्ञान का अधिष्ठाता माना जाता है, और उनकी कृपा से व्यक्ति का समाज में मान-सम्मान बढ़ता है। जो व्यक्ति इस चालीसा का नियमित पाठ करता है, उसे समाज में उच्च स्थान प्राप्त होता है और लोग उसकी प्रशंसा करते हैं। इसके साथ ही, बृहस्पति देव की कृपा से व्यक्ति के कार्यों में सफलता मिलती है और वह समाज में अपनी पहचान बना सकता है।

संतान सुख की प्राप्ति

श्री बृहस्पति चालीसा का पाठ करने से संतान सुख की प्राप्ति होती है। बृहस्पति देव को संतान प्राप्ति का देवता माना जाता है, और उनकी कृपा से संतानहीन दंपत्ति को संतान सुख की प्राप्ति होती है। जो लोग संतान प्राप्ति की इच्छा रखते हैं, उन्हें इस चालीसा का नियमित रूप से पाठ करना चाहिए। इसके साथ ही, जो लोग अपने बच्चों के भविष्य की चिंता कर रहे हैं, उनके लिए भी यह चालीसा अत्यंत लाभकारी होती है। बृहस्पति देव की कृपा से उनके बच्चों का भविष्य उज्ज्वल होता है और वे जीवन में सफल होते हैं।

स्वास्थ्य में सुधार

श्री बृहस्पति चालीसा का पाठ करने से व्यक्ति के स्वास्थ्य में सुधार होता है। बृहस्पति देव को स्वास्थ्य और दीर्घायु का देवता माना जाता है। जो व्यक्ति किसी गंभीर बीमारी या स्वास्थ्य समस्या से पीड़ित हो, उसे इस चालीसा का पाठ अवश्य करना चाहिए। इस चालीसा के प्रभाव से रोगों का नाश होता है और व्यक्ति को स्वस्थ जीवन प्राप्त होता है। इसके साथ ही, बृहस्पति देव की कृपा से व्यक्ति की आयु में वृद्धि होती है और वह लंबा और स्वस्थ जीवन जी सकता है।

कर्म और धर्म के प्रति जागरूकता

श्री बृहस्पति चालीसा का पाठ करने से व्यक्ति के जीवन में कर्म और धर्म के प्रति जागरूकता बढ़ती है। बृहस्पति देव को धर्म और न्याय का देवता माना जाता है, और उनकी कृपा से व्यक्ति के जीवन में सत्य, न्याय और धर्म की स्थापना होती है। जो व्यक्ति इस चालीसा का नियमित पाठ करता है, वह अपने कर्मों के प्रति सजग रहता है और धर्म के मार्ग पर चलता है। इसके साथ ही, बृहस्पति देव की कृपा से व्यक्ति को अपने जीवन के उद्देश्यों का बोध होता है और वह अपने जीवन में धर्म और न्याय का पालन करता है।

रिश्तों में मधुरता

श्री बृहस्पति चालीसा का पाठ करने से व्यक्ति के रिश्तों में मधुरता आती है। बृहस्पति देव को स्नेह और प्रेम का प्रतीक माना जाता है। उनकी कृपा से व्यक्ति के परिवार और समाज में प्रेम और आपसी समझ बढ़ती है। यदि किसी के जीवन में पारिवारिक या सामाजिक संबंधों में दरार आ गई हो, तो उसे इस चालीसा का नियमित रूप से पाठ करना चाहिए। इससे उसके रिश्तों में फिर से मिठास आ जाएगी और परिवार में शांति और सौहार्द्र का माहौल बनेगा। इसके साथ ही, बृहस्पति देव की कृपा से व्यक्ति के मित्र और संबंधी उसके प्रति स्नेह और प्रेम का भाव रखते हैं।

जीवन में संतुलन और स्थिरता

श्री बृहस्पति चालीसा का पाठ करने से व्यक्ति के जीवन में संतुलन और स्थिरता आती है। बृहस्पति देव को संतुलन और स्थिरता का प्रतीक माना जाता है, और उनकी कृपा से व्यक्ति के जीवन में संतुलन की स्थिति बनती है। जो व्यक्ति इस चालीसा का नियमित रूप से पाठ करता है, वह अपने जीवन में शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक संतुलन प्राप्त करता है। इसके साथ ही, बृहस्पति देव की कृपा से उसके जीवन में स्थिरता आती है और वह अपने जीवन के लक्ष्यों को प्राप्त करने में सफल होता है।

कर्मफल में सुधार

श्री बृहस्पति चालीसा का पाठ करने से व्यक्ति के कर्मफल में सुधार होता है। बृहस्पति देव को कर्म और फल का अधिष्ठाता माना जाता है, और उनकी कृपा से व्यक्ति के बुरे कर्मों का नाश होता है और उसे अच्छे कर्मों का फल प्राप्त होता है। जो व्यक्ति इस चालीसा का नियमित पाठ करता है, उसके जीवन में उसके पिछले कर्मों का सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। इसके साथ ही, बृहस्पति देव की कृपा से व्यक्ति के भविष्य के कर्म भी सुधार होते हैं, जिससे उसे जीवन में सुख और समृद्धि प्राप्त होती है।

संकल्प और धैर्य की प्राप्ति

श्री बृहस्पति चालीसा का पाठ करने से व्यक्ति के संकल्प और धैर्य में वृद्धि होती है। बृहस्पति देव को संकल्प और धैर्य का प्रतीक माना जाता है, और उनकी कृपा से व्यक्ति को अपने संकल्पों को पूरा करने की शक्ति मिलती है। जो व्यक्ति इस चालीसा का नियमित पाठ करता है, उसके जीवन में धैर्य और संकल्प की भावना जागृत होती है, जिससे वह अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने में सफल होता है। इसके साथ ही, बृहस्पति देव की कृपा से व्यक्ति को विपरीत परिस्थितियों में भी धैर्य बनाए रखने की शक्ति मिलती है, जिससे वह जीवन की कठिनाइयों का सामना कर सकता है।

परोपकार की भावना का विकास

श्री बृहस्पति चालीसा का पाठ करने से व्यक्ति के जीवन में परोपकार की भावना का विकास होता है। बृहस्पति देव को परोपकार और सेवा का प्रतीक माना जाता है, और उनकी कृपा से व्यक्ति के मन में दूसरों की सहायता करने की भावना जागृत होती है। जो व्यक्ति इस चालीसा का नियमित पाठ करता है, वह दूसरों की भलाई के लिए कार्य करता है और समाज में परोपकार के कार्यों में संलग्न रहता है। इसके साथ ही, बृहस्पति देव की कृपा से उसे समाज में सम्मान और प्रतिष्ठा प्राप्त होती है, जिससे वह अपने जीवन में सफल और सुखी होता है।


बृहस्पति को खुश करने के लिए क्या उपाय करें?

बृहस्पति को खुश करने के लिए गुरुवार का व्रत रखें और पीले वस्त्र धारण करें। पीले भोजन का सेवन करें और केले के पेड़ की पूजा करें। बृहस्पति देव के मंत्र का जाप करें और जरूरतमंदों को दान दें। पीली वस्तुएं, जैसे हल्दी, चने की दाल, और पीले फूलों का दान करना भी बृहस्पति देव को प्रसन्न करने का एक अच्छा उपाय है।

कमजोर बृहस्पति के लक्षण क्या हैं?

कमजोर बृहस्पति के लक्षणों में शिक्षा में बाधा, संतान सुख में कमी, आर्थिक तंगी, विवाह में देरी, और सामाजिक प्रतिष्ठा में कमी शामिल हैं। व्यक्ति के जीवन में नैतिकता और धर्म के प्रति रुचि कम हो जाती है। कमजोर बृहस्पति के कारण व्यक्ति को त्वचा, लीवर, और हड्डियों से संबंधित समस्याएं भी हो सकती हैं।

गुरु बृहस्पति का मंत्र क्या है?

गुरु बृहस्पति का प्रमुख मंत्र है:
“ॐ बृं बृहस्पतये नमः।”
इस मंत्र का प्रतिदिन 108 बार जाप करने से बृहस्पति देव की कृपा प्राप्त होती है और व्यक्ति के जीवन में शिक्षा, ज्ञान, और समृद्धि का वास होता है।

बृहस्पति ग्रह को खुश करने के लिए क्या करना चाहिए?

बृहस्पति ग्रह को खुश करने के लिए पीले रंग की वस्त्र धारण करें और पीले रंग के भोजन का सेवन करें। गुरुवार के दिन व्रत रखें और बृहस्पति देव की पूजा करें। जरूरतमंदों को पीली वस्तुएं, जैसे चने की दाल, हल्दी, और पीले कपड़े दान करें। गुरु मंत्र का जाप और श्री बृहस्पति चालीसा का पाठ करें।

बृहस्पति को शांत कैसे करें?

बृहस्पति को शांत करने के लिए गुरुवार के दिन बृहस्पति देव की पूजा करें और उन्हें पीले फूल अर्पित करें। गुरु मंत्र का जाप करें और श्री बृहस्पति चालीसा का पाठ करें। पुखराज (पीला पुखराज) रत्न धारण करना भी बृहस्पति को शांत करने में सहायक होता है। इसके अलावा, गुरुवार के दिन पीले भोजन का सेवन और पीली वस्तुओं का दान भी बृहस्पति को शांत करने में सहायक होता है।

बृहस्पति की शक्ति कैसे बढ़ाएं?

बृहस्पति की शक्ति बढ़ाने के लिए पुखराज रत्न धारण करें और नियमित रूप से गुरु मंत्र का जाप करें। गुरुवार के दिन व्रत रखें और बृहस्पति देव की पूजा करें। श्री बृहस्पति चालीसा का पाठ भी बृहस्पति की शक्ति बढ़ाने में सहायक होता है। साथ ही, धार्मिक और नैतिक कार्यों में संलग्न रहें और गुरुजन और बड़े बुजुर्गों का सम्मान करें।

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