Saturday, February 7, 2026
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माँ बगलामुखी चालीसा – Baglamukhi Chalisa PDF 2026

By Dr. Hemlata | Reviewed by Vedic Scholar | Last Updated: January 2026 - This devotional text has been carefully verified against widely accepted traditional sources to preserve correct wording, pronunciation, and spiritual intent for daily recitation.
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माँ बगलामुखी (Baglamukhi Chalisa Pdf), जिन्हें पिताम्बरा देवी के नाम से भी जाना जाता है, दस महाविद्याओं में से एक हैं। ये देवी अपने भक्तों के शत्रुओं का नाश करने और उन्हें हर संकट से उबारने वाली मानी जाती हैं। माँ बगलामुखी की चालीसा में उनकी महिमा, शक्तियों और लीलाओं का वर्णन किया गया है, जो भक्तों के मन में असीम शक्ति और साहस का संचार करता है।

माँ बगलामुखी की चालीसा का पाठ करने से जीवन में आने वाली सभी विघ्न-बाधाओं का नाश होता है और भक्तों को विजय, सुख-समृद्धि, और शांति की प्राप्ति होती है। आइए, हम सब मिलकर श्रद्धा और भक्ति से माँ बगलामुखी की चालीसा का पाठ करें और उनकी कृपा प्राप्त करें।



  • हिंदी / संस्कृत
  • English

|| बगलामुखी चालीसा ||

॥ दोहा ॥
सिर नवाइ बगलामुखी,
लिखूं चालीसा आज ॥

कृपा करहु मोपर सदा,
पूरन हो मम काज ॥

॥ चौपाई ॥
जय जय जय श्री बगला माता ।
आदिशक्ति सब जग की त्राता ॥

बगला सम तब आनन माता ।
एहि ते भयउ नाम विख्याता ॥

शशि ललाट कुण्डल छवि न्यारी ।
असतुति करहिं देव नर-नारी ॥

पीतवसन तन पर तव राजै ।
हाथहिं मुद्गर गदा विराजै ॥ 4 ॥

तीन नयन गल चम्पक माला ।
अमित तेज प्रकटत है भाला ॥

रत्न-जटित सिंहासन सोहै ।
शोभा निरखि सकल जन मोहै ॥

आसन पीतवर्ण महारानी ।
भक्तन की तुम हो वरदानी ॥

पीताभूषण पीतहिं चन्दन ।
सुर नर नाग करत सब वन्दन ॥ 8 ॥

एहि विधि ध्यान हृदय में राखै ।
वेद पुराण संत अस भाखै ॥

अब पूजा विधि करौं प्रकाशा ।
जाके किये होत दुख-नाशा ॥

प्रथमहिं पीत ध्वजा फहरावै ।
पीतवसन देवी पहिरावै ॥

कुंकुम अक्षत मोदक बेसन ।
अबिर गुलाल सुपारी चन्दन ॥ 12 ॥

माल्य हरिद्रा अरु फल पाना ।
सबहिं चढ़इ धरै उर ध्याना ॥

धूप दीप कर्पूर की बाती ।
प्रेम-सहित तब करै आरती ॥

अस्तुति करै हाथ दोउ जोरे ।
पुरवहु मातु मनोरथ मोरे ॥

मातु भगति तब सब सुख खानी ।
करहुं कृपा मोपर जनजानी ॥ 16 ॥

त्रिविध ताप सब दुख नशावहु ।
तिमिर मिटाकर ज्ञान बढ़ावहु ॥

बार-बार मैं बिनवहुं तोहीं ।
अविरल भगति ज्ञान दो मोहीं ॥

पूजनांत में हवन करावै ।
सा नर मनवांछित फल पावै ॥

सर्षप होम करै जो कोई ।
ताके वश सचराचर होई ॥ 20 ॥

तिल तण्डुल संग क्षीर मिरावै ।
भक्ति प्रेम से हवन करावै ॥

दुख दरिद्र व्यापै नहिं सोई ।
निश्चय सुख-सम्पत्ति सब होई ॥

फूल अशोक हवन जो करई ।
ताके गृह सुख-सम्पत्ति भरई ॥

फल सेमर का होम करीजै ।
निश्चय वाको रिपु सब छीजै ॥ 24 ॥

गुग्गुल घृत होमै जो कोई ।
तेहि के वश में राजा होई ॥

गुग्गुल तिल संग होम करावै ।
ताको सकल बंध कट जावै ॥

बीलाक्षर का पाठ जो करहीं ।
बीज मंत्र तुम्हरो उच्चरहीं ॥

एक मास निशि जो कर जापा ।
तेहि कर मिटत सकल संतापा ॥ 28 ॥

घर की शुद्ध भूमि जहं होई ।
साध्का जाप करै तहं सोई ॥

सेइ इच्छित फल निश्चय पावै ।
यामै नहिं कदु संशय लावै ॥

अथवा तीर नदी के जाई ।
साधक जाप करै मन लाई ॥

दस सहस्र जप करै जो कोई ।
सक काज तेहि कर सिधि होई ॥ 32 ॥

जाप करै जो लक्षहिं बारा ।
ताकर होय सुयशविस्तारा ॥

जो तव नाम जपै मन लाई ।
अल्पकाल महं रिपुहिं नसाई ॥

सप्तरात्रि जो पापहिं नामा ।
वाको पूरन हो सब कामा ॥

नव दिन जाप करे जो कोई ।
व्याधि रहित ताकर तन होई ॥ 36 ॥

ध्यान करै जो बन्ध्या नारी ।
पावै पुत्रादिक फल चारी ॥

प्रातः सायं अरु मध्याना ।
धरे ध्यान होवैकल्याना ॥

कहं लगि महिमा कहौं तिहारी ।
नाम सदा शुभ मंगलकारी ॥

पाठ करै जो नित्या चालीसा ।
तेहि पर कृपा करहिं गौरीशा ॥ 40 ॥

॥ दोहा ॥
सन्तशरण को तनय हूं,
कुलपति मिश्र सुनाम ।
हरिद्वार मण्डल बसूं ,
धाम हरिपुर ग्राम ॥

उन्नीस सौ पिचानबे सन् की,
श्रावण शुक्ला मास ।
चालीसा रचना कियौ,
तव चरणन को दास ॥

|| Baglamukhi Chalisa PDF ||

॥ Doha ॥
Sir naee bagalaamukhee,
Likhoon chaaleesa aaj ॥

Kripa karahu mopar sada,
Poorn ho mam kaaj ॥

॥ Chaupaee ॥
Jay jay jay shree bagala maata ॥
Aadishakti sab jag kee traata ॥

Bagala sam tab saar maata ॥
Ehi te bhayu naam maatra ॥

Shashi lalaat kundal chhavi nyaaree ॥
Asatuti karahin dev nar-naaree ॥

Peetavasan tan par tav raajai ॥
Haathahin mudgar gada viraajai ॥ 4 ॥

Teen nayan gal champak mangal ॥
Amit tej prakatat hai bhala ॥

Ratn-jatit sinhaasan sohai ॥
Shobha nirakhi sakal jan mohaee ॥

Aasan peetavarn mahaaraanee ॥
Bhakton kee tum ho shobhaayamaan ॥

Peetaabhooshan peetahin chandan ॥
Sur nar naag karat sab vandan ॥ 8 ॥

Ehi vidhi dhyaan hrday mein raakhai ॥
Ved puraan sant as bhaakhai ॥

Ab pooja vidhi karaun prakaasha ॥
Jaake keen hot duhkh-naasha ॥

Prathamahin peet dhvaja phaharaavai ॥
Peetavasan devee phiraavai ॥

Kunkum akshat modak baisan ॥
Abeer gulaal supaaree chandan ॥ 12 ॥

Maalya haridra aru phal paana ॥
Sabahin chadhai dharai ur dhyaana ॥

Dhoop deep karpoor kee baatee ॥
Prem-sahit tab karai aaratee ॥

Astuti karai haath dooo jore ॥
Poorvahu maatu manorath more ॥

Maatu bhagati tab sab sukh khaani ॥
Karahun krpa mopar janajaani ॥ 16 ॥

Trividh taap sab duhkh nashaavahu ॥
Timir vaadeekar gyaan pushtavahu ॥

Baar-baar main binavahun toheen ॥
Aviral bhagati gyaan do mohin ॥

Pooja-archana mein ghar karaavai ॥
Sa nar manavaanchhit phal paavai ॥

Sasp hom karai jo koee ॥
Taake vash sacharaachar hoee ॥ 20 ॥

Til tandul sang ksheer miraavai ॥
Bhakti prem se ghar karaavai ॥

Duhkh daridr vyaapai nahin soi ॥
Nishchit sukh-sampatti sab hoee ॥

Phool ashok ghar jo karai ॥
Taake grh sukh-sampatti bhaaree ॥

Phal semar ka ghar karaijai ॥
Nishchay vaako ripu sab chheenai ॥ 24 ॥

Guggul ghrt homaay jo koee ॥
Tehi ke vash mein raaja hoi ॥

Guggul til sang hom karaavai ॥
Taako sakal bandh kat jaavai ॥

Beelaakshar ka paath jo karahen ॥
Beej mantr tummharo uraheen ॥

Ek maas nishi jo kar jaapa ॥
Tehi kar mitat sakal santaapa ॥ 28 ॥

Ghar kee shuddh bhoomi jahaan hoi ॥
Sadaka jap karai tahan soi ॥

Sei ichchhit phal nishchay paavai ॥
Yaamai nahin kadu sanshay laavai ॥

Ya teer nadee ke jay ॥
Saadhak jap karai man laee ॥

Das sahasr jap karai jo koee ॥
Sak kaaj tehi kar siddhi hoee ॥ 32 ॥

Jap karai jo lakshahin baara ॥
Taakar hoy suyashavistaara ॥

Jo tav naam japai man lai ॥
Alpakaal mahan ripuhin nasaee ॥

Saptaraatri jo paapahin naama ॥
Vaako poorn ho sab kaam ॥

Nav din jap kare jo koee ॥
Vyaadhianupayogee taakar tan hoee ॥

Dhyaan karai jo bandhya naaree ॥
Paavai putraadik phal chaari ॥

Praatah saayan aru madhyaana ॥
Dhare dhyaan hovaikalyaana ॥

Kahan laagee mahima kahaun tihaaree ॥
Naam sada shubh mangalakaaree ॥

Paath karai jo nitya chaaleesa ॥
Tehi par krpa karahin gaureesha ॥ 40 ॥

॥ Doha ॥
Santasharan ko tanay hoon,
Pitar mishr sunaam ॥
Haridvaar mandal basoon,
Dhaam haripur graam ॥

Unnees sau pichaanabe san kee,
Shraavan shukl maas ॥
Chaaleesa rachana kiyau,
Tav charanan ko daas ॥


बगलामुखी चालीसा के लाभ

बगलामुखी चालीसा का पाठ देवी बगलामुखी की कृपा प्राप्त करने के लिए किया जाता है। बगलामुखी देवी को हिंदू धर्म में शक्ति और स्थिरता की देवी माना जाता है। उन्हें उनके भक्तों की बुरी शक्तियों, दुश्मनों और नकारात्मक ऊर्जा से रक्षा करने वाली देवी के रूप में पूजते हैं। बगलामुखी चालीसा के नियमित पाठ से अनेक प्रकार के लाभ प्राप्त होते हैं। इस लेख में हम बगलामुखी चालीसा के विभिन्न लाभों पर विस्तृत चर्चा करेंगे।

1. शत्रुओं से सुरक्षा

बगलामुखी चालीसा का मुख्य लाभ यह है कि यह शत्रुओं से सुरक्षा प्रदान करता है। जो व्यक्ति नियमित रूप से बगलामुखी चालीसा का पाठ करता है, उसके शत्रु पराजित होते हैं और उसे किसी भी प्रकार की हानि नहीं पहुंचा पाते। यह चालीसा शत्रुओं की बुरी योजनाओं को विफल कर देती है और व्यक्ति को सुरक्षा प्रदान करती है।

2. मानसिक शांति और स्थिरता

बगलामुखी चालीसा का पाठ करने से मानसिक शांति और स्थिरता प्राप्त होती है। यह व्यक्ति के मन को शांत करता है और उसे संतुलित बनाए रखता है। जब व्यक्ति मानसिक रूप से स्थिर और शांत होता है, तो वह अपने जीवन में अधिक सकारात्मकता और सुख की अनुभूति करता है।

3. नकारात्मक ऊर्जा से मुक्ति

बगलामुखी चालीसा का पाठ नकारात्मक ऊर्जा को दूर करता है। यह व्यक्ति के आसपास की नकारात्मकता को समाप्त करता है और उसे सकारात्मक ऊर्जा से भर देता है। इससे व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक बदलाव आते हैं और वह अधिक ऊर्जा और उत्साह से भर जाता है।

4. कानूनी मामलों में सफलता

जो लोग कानूनी मामलों में फंसे होते हैं, उन्हें बगलामुखी चालीसा का पाठ अवश्य करना चाहिए। यह चालीसा कानूनी मामलों में सफलता दिलाने में सहायक होती है। इससे व्यक्ति को कानूनी विवादों में जीत प्राप्त होती है और वह न्याय प्राप्त करता है।

5. व्यवसाय में सफलता

व्यवसाय में सफलता प्राप्त करने के लिए भी बगलामुखी चालीसा का पाठ लाभकारी होता है। यह व्यवसाय में आने वाली बाधाओं को दूर करता है और व्यक्ति को सफलता की ओर अग्रसर करता है। इससे व्यवसाय में वृद्धि होती है और व्यक्ति को आर्थिक लाभ प्राप्त होता है।

6. आत्मविश्वास में वृद्धि

बगलामुखी चालीसा का पाठ आत्मविश्वास में वृद्धि करता है। यह व्यक्ति के आत्म-संयम को बढ़ाता है और उसे अधिक आत्मविश्वासी बनाता है। जब व्यक्ति आत्मविश्वासी होता है, तो वह अपने जीवन में किसी भी चुनौती का सामना करने के लिए तैयार होता है।

7. स्वास्थ्य लाभ

बगलामुखी चालीसा का पाठ शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को सुधारने में सहायक होता है। इससे व्यक्ति के शरीर और मन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है, जो उसे स्वस्थ बनाए रखता है। यह चालीसा विभिन्न बीमारियों और रोगों से बचाव में भी सहायक होती है।

8. आध्यात्मिक उन्नति

बगलामुखी चालीसा का पाठ व्यक्ति की आध्यात्मिक उन्नति में भी सहायक होता है। यह चालीसा व्यक्ति को आध्यात्मिक मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती है और उसे देवी बगलामुखी की कृपा प्राप्त होती है। इससे व्यक्ति का आध्यात्मिक ज्ञान बढ़ता है और उसे आध्यात्मिक संतुष्टि प्राप्त होती है।

9. पारिवारिक शांति

बगलामुखी चालीसा का पाठ परिवार में शांति और सामंजस्य बनाए रखने में सहायक होता है। यह चालीसा परिवार के सदस्यों के बीच प्रेम और सद्भाव को बढ़ाती है और उन्हें एकजुट बनाए रखती है। इससे परिवार में किसी भी प्रकार के विवाद या कलह नहीं होते हैं और सभी सदस्य सुखी और संतुष्ट रहते हैं।

10. दुर्गुणों से मुक्ति

बगलामुखी चालीसा का पाठ व्यक्ति को उसके दुर्गुणों से मुक्त करता है। यह चालीसा व्यक्ति को उसके बुरे आदतों और नकारात्मक व्यवहार से छुटकारा दिलाती है और उसे सन्मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती है। इससे व्यक्ति का जीवन अधिक सकारात्मक और सुखमय हो जाता है।

11. विपत्तियों से बचाव

बगलामुखी चालीसा का पाठ व्यक्ति को विभिन्न प्रकार की विपत्तियों और आपदाओं से बचाव करता है। यह चालीसा व्यक्ति को संकटों से बचाती है और उसे सुरक्षित बनाए रखती है। इससे व्यक्ति के जीवन में आने वाली विपत्तियों का प्रभाव कम हो जाता है और वह अधिक सुरक्षित महसूस करता है।

12. आर्थिक समृद्धि

बगलामुखी चालीसा का पाठ आर्थिक समृद्धि प्राप्त करने में भी सहायक होता है। यह चालीसा व्यक्ति के जीवन में धन और समृद्धि को आकर्षित करती है और उसे आर्थिक रूप से सशक्त बनाती है। इससे व्यक्ति के आर्थिक स्थिति में सुधार होता है और वह अधिक समृद्ध बनता है।

13. ध्यान और साधना में सहायक

बगलामुखी चालीसा का पाठ ध्यान और साधना में भी सहायक होता है। यह चालीसा व्यक्ति के मन को एकाग्र बनाती है और उसे ध्यान में स्थिरता प्राप्त होती है। इससे व्यक्ति की साधना में उन्नति होती है और वह अधिक गहराई से ध्यान और साधना कर पाता है।

14. आत्म-साक्षात्कार

बगलामुखी चालीसा का पाठ व्यक्ति को आत्म-साक्षात्कार की ओर अग्रसर करता है। यह चालीसा व्यक्ति को उसकी आत्मा के वास्तविक स्वरूप का ज्ञान कराती है और उसे आत्म-ज्ञान की प्राप्ति होती है। इससे व्यक्ति का जीवन अधिक सार्थक और पूर्ण हो जाता है।

15. देवी की कृपा प्राप्ति

सबसे महत्वपूर्ण लाभ यह है कि बगलामुखी चालीसा का पाठ करने से व्यक्ति को देवी बगलामुखी की कृपा प्राप्त होती है। यह चालीसा व्यक्ति को देवी की विशेष कृपा और आशीर्वाद प्रदान करती है, जिससे उसका जीवन सुखमय और सफल बनता है।

बगलामुखी चालीसा का पाठ करने से व्यक्ति को अनेक प्रकार के लाभ प्राप्त होते हैं। यह शत्रुओं से सुरक्षा, मानसिक शांति, नकारात्मक ऊर्जा से मुक्ति, कानूनी मामलों में सफलता, व्यवसाय में वृद्धि, आत्मविश्वास में वृद्धि, स्वास्थ्य लाभ, आध्यात्मिक उन्नति, पारिवारिक शांति, दुर्गुणों से मुक्ति, विपत्तियों से बचाव, आर्थिक समृद्धि, ध्यान और साधना में सहायकता, आत्म-साक्षात्कार और देवी की कृपा प्राप्ति जैसे लाभ प्रदान करता है। इसलिए, हर व्यक्ति को बगलामुखी चालीसा का नियमित पाठ करना चाहिए और देवी बगलामुखी की कृपा प्राप्त करनी चाहिए।

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