Wednesday, January 28, 2026
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Aarti Kunj Bihari Ki PDF (आरती कुंज बिहारी की)

By Dr. Hemlata | Reviewed by Vedic Scholar | Last Updated: January 2026 - This devotional text has been carefully verified against widely accepted traditional sources to preserve correct wording, pronunciation, and spiritual intent for daily recitation.
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आरती कुंज बिहारी की (Aarti Kunj Bihari Ki PDF) भगवान श्रीकृष्ण की आरती है, जो उनकी महिमा का गुणगान करती है और भक्तों को उनके अनंत प्रेम और करुणा का अनुभव कराती है। यह आरती विशेष रूप से उनके वृंदावन लीलाओं का स्मरण कराती है, जहाँ भगवान कृष्ण ने अपनी बाल लीलाओं से संसार को मोहित किया था। आप बनवारी तेरी यारी ने दीवाना बना दिया, मुझे अपने ही रंग में रंग ले मेरे यार सवारे लिरिक्स भी पढ़ सकते हैं।

आरती का हर शब्द भगवान श्रीकृष्ण के प्रति अपार भक्ति और श्रद्धा का प्रतीक है। इसमें भगवान कृष्ण के अलग-अलग रूपों का वर्णन किया गया है, जैसे कि उनकी मोहक मुरली, उनकी क्रीड़ाएँ, उनके सखा, और उनके साथ रास रचाने वाली गोपियाँ। इस आरती के द्वारा भक्तजन श्रीकृष्ण के चरणों में अपनी अटूट भक्ति और समर्पण व्यक्त करते हैं।

इस आरती की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसे गाते समय भक्तों का मन स्वतः ही भगवान श्रीकृष्ण की ओर खिंच जाता है। उनके सुंदर रूप, बाललीलाओं और मधुर मुस्कान की छवि मन में उभरने लगती है। “आरती कुंज बिहारी की” गाते समय ऐसा प्रतीत होता है जैसे स्वयं भगवान कृष्ण हमारे सामने खड़े होकर हमारी भक्ति स्वीकार कर रहे हों।

आरती में वृंदावन की पवित्रता और माधुर्य का भी वर्णन किया गया है, जो भगवान कृष्ण का सबसे प्रिय स्थान है। वृंदावन, जहाँ उन्होंने अपने बालपन की लीलाएँ कीं, गोपियों के साथ रास रचाया, और अपने भक्तों को अनंत प्रेम का अनुभव कराया। इस आरती में वृंदावन के कुंजों का उल्लेख किया गया है, जहाँ भगवान कृष्ण ने अपनी रास लीलाओं से संसार को प्रेम और भक्ति का अद्वितीय संदेश दिया।

आरती कुंज बिहारी की” केवल एक साधारण आरती नहीं है, बल्कि यह भगवान कृष्ण के जीवन और लीलाओं का संक्षिप्त सार है। इसमें भगवान कृष्ण की उन सभी लीलाओं का वर्णन किया गया है, जिनसे उनका संपूर्ण जीवन दिव्यता से परिपूर्ण हो गया।

भगवान श्रीकृष्ण का रूप, उनकी वाणी, उनकी लीलाएँ और उनकी मधुर मुरली का स्वर सब कुछ इस आरती के माध्यम से जीवंत हो उठता है। भक्तगण जब इस आरती का गायन करते हैं, तो उनके हृदय में भगवान कृष्ण के प्रति प्रेम और भक्ति की लहरें उमड़ने लगती हैं।

यह आरती भक्तों को भगवान कृष्ण के दिव्य प्रेम और उनकी अपार कृपा का अनुभव कराती है। इसके हर शब्द में श्रीकृष्ण की महिमा का गुणगान है, जो हमें उनके चरणों में शीश झुकाने के लिए प्रेरित करता है। “आरती कुंज बिहारी की” गाते समय भक्तों को ऐसा अनुभव होता है कि वे स्वयं भगवान के सम्मुख खड़े होकर उनकी आरती कर रहे हों।

इस आरती का गायन विशेष रूप से उन भक्तों के लिए अत्यधिक महत्त्वपूर्ण है, जो भगवान श्रीकृष्ण के प्रति अपनी भक्ति और श्रद्धा को प्रकट करना चाहते हैं। इस आरती के माध्यम से भक्तगण भगवान कृष्ण के प्रति अपनी आत्मीयता और उनके प्रति अपने अटूट विश्वास को व्यक्त करते हैं।


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|| आरती कुंज बिहारी की ||

आरती कुंज बिहारी की, श्री गिरधर कृष्ण मुरारी की
आरती कुंज बिहारी की, श्री गिरधर कृष्ण मुरारी की
आरती कुंज बिहारी की, श्री गिरधर कृष्ण मुरारी की
आरती कुंज बिहारी की, श्री गिरधर कृष्ण मुरारी की

गले में बैजंती माला, बजावे मुरली मधुर बाला।
श्रवण में कुंडल झलकला,नंद के आनंद नंदलाला।
गगन सम अंग कांति काली, राधिका चमक रही आली।
लतन में ठाढ़े बनमाली, भ्रमर सी अलक, कस्तूरी तिलक,
चन्द्र सी झलक, ललित छवि श्यामा प्यारी की॥
श्री गिरधर कृष्ण मुरारी की॥

आरती कुंज बिहारी की
श्री गिरधर कृष्ण मुरारी की॥ x2

कनकमय मोर मुकुट बिलसे, देवता दरसन को तरसे।
गगन सो सुमन रासी बरसे, बाजे मुरचंग, मधुर मृदंग,
ग्वालिन संग, वर्तमान रति गोप कुमारी की॥
श्री गिरधर कृष्ण मुरारी की॥

आरती कुंज बिहारी की
श्री गिरधर कृष्ण मुरारी की॥ x2

जहां ते प्रगट भयि गंगा, कलुष कलि हारिणी श्री गंगा।
स्मरण ते होत मोह भंगा, बसि शिव शीश, जटा के बीच,
हरेइ अघ कीच, चरण छवि श्री बनवारि की॥
श्री गिरधर कृष्ण मुरारी की॥

आरती कुंज बिहारी की
श्री गिरधर कृष्ण मुरारी की॥ x2

चमकती उज्जवल तात रेनू, बज रही वृन्दावन बेनु।
चहु दिसि गोपी ग्वाल धेनु हंसत मृदु मंद, चांदनी चंद्रा,
कटत भव फंद, तेर सुन दीन भिखारी की॥
श्री गिरधर कृष्ण मुरारी की॥

आरती कुंज बिहारी की
श्री गिरधर कृष्ण मुरारी की॥ x2

आरती कुंज बिहारी की, श्री गिरधर कृष्ण मुरारी की॥
आरती कुंज बिहारी की, श्री गिरधर कृष्ण मुरारी की॥

आरती कुंज बिहारी की
श्री गिरधर कृष्ण मुरारी की॥ x2

|| Aarti Kunj Bihari Ki ||

Aarti Kunj Bihari Ki, Shri Girdhar Krishna Murari Ki
Aarti Kunj Bihari Ki, Shri Girdhar Krishna Murari Ki
Aarti Kunj Bihari Ki, Shri Girdhar Krishna Murari Ki
Aarti Kunj Bihari Ki, Shri Girdhar Krishna Murari Ki

Gale Mein Baijanti Mala, Bajave Murali Madhur Bala।
Shravan Mein Kundal Jhalakala,Nand Ke Anand Nandlala।
Gagan Sam Ang Kanti Kali, Radhika Chamak Rahi Aali।
Latan Mein Thadhe Banamali, Bhramar Si Alak, Kasturi Tilak,
Chandra Si Jhalak, Lalit Chavi Shyama Pyari Ki॥
Shri Girdhar Krishna Murari Ki॥

Aarti Kunj Bihari Ki
Shri Girdhar Krishna Murari Ki॥ x2

Kanakmay Mor Mukut Bilse, Devata Darsan Ko Tarse।
Gagan So Suman Raasi Barse, Baje Murchang, Madhur Mridang,
Gwaalin Sang, Atual Rati Gop Kumaari Ki॥
Shri Girdhar Krishna Murari Ki॥

Aarti Kunj Bihari Ki
Shri Girdhar Krishna Murari Ki॥ x2

Jahaan Te Pragat Bhayi Ganga, Kalush Kali Haarini Shri Ganga।
Smaran Te Hot Moh Bhanga, Basi Shiv Shish, Jataa Ke Beech,
Harei Agh Keech, Charan Chhavi Shri Banvaari Ki॥
Shri Girdhar Krishna Murari Ki॥

Aarti Kunj Bihari Ki
Shri Girdhar Krishna Murari Ki॥ x2

Chamakati Ujjawal Tat Renu, Baj Rahi Vrindavan Benu।
Chahu Disi Gopi Gwaal Dhenu Hansat Mridu Mand, Chandani Chandra,
Katat Bhav Phand, Ter Sun Deen Bhikhaaree Ki॥
Shri Girdhar Krishna Murari Ki॥

Aarti Kunj Bihari Ki
Shri Girdhar Krishna Murari Ki॥ x2

Aarti Kunj Bihari Ki, Shri Girdhar Krishna Murari Ki॥
Aarti Kunj Bihari Ki, Shri Girdhar Krishna Murari Ki॥

Aarti Kunj Bihari Ki
Shri Girdhar Krishna Murari Ki॥ x2




आरती कुंज बिहारी की एक अत्यंत महत्वपूर्ण और प्रभावशाली भक्ति स्तोत्र है, जो भगवान श्रीकृष्ण की आराधना के लिए गाया जाता है। इस आरती के माध्यम से भगवान श्रीकृष्ण के प्रति भक्ति और श्रद्धा प्रकट की जाती है, और यह न केवल धार्मिक बल्कि आध्यात्मिक और मानसिक लाभ भी प्रदान करती है। इस लेख में हम “आरती कुंज बिहारी की” के विभिन्न लाभों पर विस्तार से चर्चा करेंगे।

भक्ति और श्रद्धा में वृद्धि

आरती कुंज बिहारी की” का नियमित गायन व्यक्ति के भीतर भक्ति और श्रद्धा को बढ़ावा देता है। जब हम इस आरती का गान करते हैं, तो हमारा मन भगवान श्रीकृष्ण के प्रति केंद्रित हो जाता है। इस दौरान हमें उनके दिव्य रूप, लीलाओं और चरित्र का स्मरण होता है, जिससे हमारी भक्ति प्रगाढ़ होती है।

भक्ति और श्रद्धा में वृद्धि का अर्थ है, जीवन में सकारात्मकता का आगमन। जब हम भगवान की आरती गाते हैं, तो हमारा हृदय पवित्र भावनाओं से भर जाता है, जिससे मन को शांति मिलती है और जीवन की चुनौतियों का सामना करने की शक्ति प्राप्त होती है।

मानसिक शांति और स्थिरता

“आरती कुंज बिहारी की” के माध्यम से मानसिक शांति और स्थिरता प्राप्त होती है। इस आरती के गायन से मन को एकाग्रता मिलती है, जो दैनिक जीवन के तनाव और चिंताओं को कम करने में सहायक होती है। भगवान कृष्ण की आराधना करने से मन में शांत और सुखद विचार आते हैं, जिससे मानसिक शांति प्राप्त होती है।

भगवान श्रीकृष्ण के प्रति ध्यान केंद्रित करने से हमारी आत्मा में शांति का अनुभव होता है। यह आरती हमारे मन को स्थिरता प्रदान करती है और हमें जीवन की परेशानियों से मुक्त कर, शांति और संतोष के मार्ग पर ले जाती है।

आध्यात्मिक विकास

आध्यात्मिक विकास का अर्थ है आत्मा का उत्थान और भगवान के प्रति समर्पण की भावना का विकास। “आरती कुंज बिहारी की” का नियमित गायन व्यक्ति के आध्यात्मिक जीवन को समृद्ध करता है। इस आरती के माध्यम से हम भगवान श्रीकृष्ण के साथ एक गहन आत्मीय संबंध स्थापित करते हैं, जो हमें आध्यात्मिकता के मार्ग पर अग्रसर करता है।

आध्यात्मिक विकास के लिए भगवान के प्रति समर्पण और ध्यान आवश्यक है। यह आरती भगवान के प्रति समर्पण की भावना को प्रबल करती है, जिससे हमारा आत्मबल और आत्मविश्वास बढ़ता है। आध्यात्मिकता की वृद्धि हमें जीवन के हर क्षेत्र में संतुलन और स्थिरता प्रदान करती है।

सकारात्मक ऊर्जा का संचार

“आरती कुंज बिहारी की” का गायन सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है। भगवान श्रीकृष्ण की महिमा और उनकी लीलाओं का स्मरण करने से हमारे आसपास की नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और सकारात्मकता का माहौल बनता है। इस आरती के माध्यम से हम अपने घर और जीवन में सुख-शांति और समृद्धि को आमंत्रित कर सकते हैं।

सकारात्मक ऊर्जा का संचार व्यक्ति के मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य के लिए अत्यंत लाभकारी होता है। यह हमें जीवन के कठिन समय में सहारा देती है और हमें आगे बढ़ने की प्रेरणा देती है। सकारात्मक ऊर्जा से भरपूर वातावरण में व्यक्ति को प्रसन्नता, संतोष, और आनंद की अनुभूति होती है।

भावनात्मक संतुलन

भावनात्मक संतुलन का अभाव व्यक्ति को तनाव, चिंता और अन्य मानसिक समस्याओं का शिकार बना सकता है। “आरती कुंज बिहारी की” का नियमित रूप से गान करने से व्यक्ति के भावनात्मक स्वास्थ्य में सुधार होता है। भगवान श्रीकृष्ण के प्रति भक्ति और श्रद्धा व्यक्ति के भीतर संतुलन की भावना को बढ़ावा देती है, जिससे वह अपने भावनाओं को सही तरीके से नियंत्रित कर पाता है।

भावनात्मक संतुलन व्यक्ति को आत्मविश्वास और मानसिक स्थिरता प्रदान करता है। यह आरती हमें भगवान के साथ जुड़ने का अवसर प्रदान करती है, जिससे हमारे भीतर सकारात्मक विचार और भावनाएँ उत्पन्न होती हैं। इस संतुलन से व्यक्ति का मानसिक स्वास्थ्य बेहतर होता है और वह जीवन की चुनौतियों का सामना करने में सक्षम होता है।

धार्मिक और सांस्कृतिक मूल्य

“आरती कुंज बिहारी की” भारतीय संस्कृति और धार्मिकता का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। इस आरती के माध्यम से हम अपने धार्मिक और सांस्कृतिक मूल्यों को बनाए रख सकते हैं। यह आरती हमें हमारे पूर्वजों के द्वारा स्थापित धर्म और संस्कृति की याद दिलाती है और हमें अपनी जड़ों से जुड़े रहने में सहायता करती है।

धार्मिक और सांस्कृतिक मूल्य हमें जीवन में सही मार्ग पर चलने की प्रेरणा देते हैं। यह आरती हमें भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं का स्मरण कराती है, जिससे हम अपने जीवन में धार्मिकता और नैतिकता का पालन कर सकते हैं। यह हमारे जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने में सहायक होती है और हमें समाज में एक अच्छे नागरिक के रूप में स्थापित करती है।

परिवारिक एकता और सद्भावना

“आरती कुंज बिहारी की” का सामूहिक गायन परिवार में एकता और सद्भावना को बढ़ावा देता है। जब पूरा परिवार एक साथ मिलकर भगवान श्रीकृष्ण की आरती करता है, तो उसमें प्रेम, सौहार्द, और समर्पण की भावना उत्पन्न होती है। यह आरती परिवार के सदस्यों के बीच आपसी संबंधों को मजबूत करती है और उन्हें भगवान की कृपा के प्रति कृतज्ञता का अनुभव कराती है।

परिवारिक एकता और सद्भावना का हमारे जीवन में बहुत बड़ा महत्व है। यह आरती हमें एक साथ आने और भगवान के प्रति अपनी श्रद्धा और भक्ति को प्रकट करने का अवसर प्रदान करती है। इससे परिवार के सदस्य एक-दूसरे के प्रति और भी अधिक प्रेम और सम्मान का अनुभव करते हैं, जिससे परिवार का माहौल सुखद और सकारात्मक होता है।

स्वास्थ्य लाभ

धार्मिक गतिविधियाँ और भक्ति का मन और शरीर पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। “आरती कुंज बिहारी की” का नियमित रूप से गान करने से व्यक्ति के मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य में सुधार होता है। इस आरती के माध्यम से व्यक्ति को शारीरिक रूप से स्वस्थ और मानसिक रूप से स्थिर रहने में सहायता मिलती है।

स्वास्थ्य लाभ का एक महत्वपूर्ण पहलू यह है कि इस आरती के गान से व्यक्ति को तनाव और चिंता से मुक्ति मिलती है, जो शरीर के स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होते हैं। इसके अतिरिक्त, भगवान के प्रति भक्ति और श्रद्धा व्यक्ति के जीवन में संतोष और आनंद का संचार करती है, जिससे उसका संपूर्ण स्वास्थ्य बेहतर होता है।

समर्पण और विनम्रता की भावना

“आरती कुंज बिहारी की” का गायन व्यक्ति के भीतर समर्पण और विनम्रता की भावना को बढ़ावा देता है। भगवान श्रीकृष्ण के प्रति समर्पण और विनम्रता व्यक्ति के अहंकार को कम करती है और उसे दूसरों के प्रति दयालु और सहानुभूतिपूर्ण बनाती है। यह आरती हमें यह सिखाती है कि जीवन में विनम्रता और समर्पण का कितना महत्व है।

समर्पण और विनम्रता व्यक्ति के चरित्र को मजबूत करती है और उसे एक अच्छा इंसान बनने में सहायता करती है। यह आरती हमें भगवान के प्रति हमारी जिम्मेदारियों और कर्तव्यों का स्मरण कराती है, जिससे हम जीवन के प्रति एक संतुलित दृष्टिकोण रख पाते हैं।

जीवन में संतोष और आनंद का अनुभव

“आरती कुंज बिहारी की” के माध्यम से व्यक्ति को जीवन में संतोष और आनंद का अनुभव होता है। भगवान श्रीकृष्ण के प्रति भक्ति और श्रद्धा व्यक्ति के मन में संतोष और संतुलन की भावना को जन्म देती है। यह आरती हमें यह सिखाती है कि भगवान के प्रति भक्ति और समर्पण ही सच्चे आनंद का स्रोत है।

संतोष और आनंद का अनुभव जीवन को सरल और खुशहाल बनाता है। यह आरती हमें भगवान की महिमा का गुणगान करने का अवसर प्रदान करती है, जिससे हमारे जीवन में संतोष, शांति, और आनंद का अनुभव होता है। इस आरती के माध्यम से हम जीवन की कठिनाइयों को आसानी से सहन कर पाते हैं और जीवन को एक नई दृष्टि से देखने की शक्ति प्राप्त करते हैं।

कर्म और धर्म का पालन

“आरती कुंज बिहारी की” का नियमित रूप से गान करने से व्यक्ति के भीतर कर्म और धर्म का पालन करने की भावना जागृत होती है। भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं का स्मरण कर हमें यह एहसास होता है कि जीवन में सही कर्म और धर्म का पालन करना कितना महत्वपूर्ण है। यह आरती हमें सही दिशा में चलने और जीवन के सही मार्ग को अपनाने की प्रेरणा देती है।

कर्म और धर्म का पालन व्यक्ति को जीवन में सफलता और संतोष की ओर ले जाता है। इस आरती के माध्यम से हमें यह सीख मिलती है कि भगवान के प्रति समर्पण और सही कर्म ही जीवन का सच्चा उद्देश्य है। यह हमें जीवन में सही निर्णय लेने और कठिनाइयों का सामना करने में सहायक होती है।


FAQs – Aarti Kunj Bihari Ki PDF (आरती कुंज बिहारी की)

1. कृष्ण का पूरा नाम क्या है?

कृष्ण का पूरा नाम “श्रीकृष्ण” है, जो संस्कृत शब्द “कृष्ण” से लिया गया है, जिसका अर्थ होता है ‘काला’ या ‘आकर्षक’। भगवान कृष्ण को “वसुदेव-नंदन” भी कहा जाता है क्योंकि वे वसुदेव और देवकी के पुत्र थे। उनके अनेक नाम हैं, जैसे गोविंद, मुरारी, श्यामसुंदर, माधव आदि।

2. श्री कृष्ण जी कैसे दिखते थे?

श्री कृष्ण जी का वर्णन शास्त्रों में अत्यंत सुंदर, गहरे श्यामल वर्ण और मोहक रूप में किया गया है। उनके गले में वनमाला, सिर पर मोर मुकुट, और हाथ में मुरली होती थी। उनकी आँखें कमल के फूल के समान बड़ी और आकर्षक थीं, और उनका मुस्कान सभी का मन मोह लेती थी। वे अपने भक्तों के लिए सदा आनंद और प्रेम के प्रतीक माने जाते हैं।

3. श्री कृष्ण किसका रूप है?

श्री कृष्ण को भगवान विष्णु का पूर्ण अवतार माना जाता है। वे ब्रह्मा, विष्णु, और महेश के त्रिदेवों में से विष्णु के रूप हैं, जो सृष्टि के पालनकर्ता माने जाते हैं। श्री कृष्ण ने धरती पर अवतरित होकर अधर्म का नाश किया और धर्म की स्थापना की।

4. पूजा कृष्ण क्या है?

“पूजा कृष्ण” एक ऐसी उपासना है जिसमें भगवान श्रीकृष्ण की पूजा की जाती है। इसमें भक्त भगवान कृष्ण की मूर्ति या चित्र के समक्ष उनके प्रिय मंत्रों, आरती और भजनों के माध्यम से उन्हें प्रसन्न करते हैं। पूजा में श्रीकृष्ण की प्रसाद, फूल, दीप, धूप आदि अर्पित किए जाते हैं और उनका ध्यान किया जाता है।

5. राधा कृष्ण के कितने पुत्र थे?

श्री कृष्ण और राधा के कोई पुत्र नहीं थे। राधा और कृष्ण का संबंध आध्यात्मिक प्रेम का प्रतीक माना जाता है। हालांकि, श्री कृष्ण के रुक्मिणी सहित अन्य पत्नियों से कई पुत्र थे, जिनमें प्रमुख रूप से प्रद्युम्न, सांब और अनिरुद्ध शामिल हैं।

6. कृष्ण में 108 क्या है?

“कृष्ण में 108” का संदर्भ भगवान श्रीकृष्ण के 108 नामों या उनके दिव्य लीलाओं और स्वरूपों से हो सकता है। 108 का संख्या हिन्दू धर्म में विशेष रूप से पवित्र मानी जाती है और यह भगवान के विभिन्न रूपों और गुणों का प्रतिनिधित्व करती है। श्री कृष्ण के भक्त अक्सर माला में 108 बार उनके नाम का जाप करते हैं, जिसे “जप माला” कहते हैं।

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Hemlata – Experienced Hindu Devotee and Devotional Text Expert
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