Friday, February 6, 2026
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श्री सीता आरती – Sita Mata Aarti: Shri Janak Dulari Ki 2026

By Dr. Hemlata | Reviewed by Vedic Scholar | Last Updated: January 2026 - This devotional text has been carefully verified against widely accepted traditional sources to preserve correct wording, pronunciation, and spiritual intent for daily recitation.
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श्री सीता आरती (Sita Mata Aarti: Shri Janak Dulari Ki) एक दिव्य और पवित्र स्तुति है जो माँ सीता के प्रति हमारी श्रद्धा और भक्ति को प्रकट करती है। यह आरती श्री राम की पत्नी और महाराज जनक की पुत्री, सीता माता को समर्पित है। सीता माता भारतीय संस्कृति और धार्मिक परंपराओं में महत्वपूर्ण स्थान रखती हैं और उनकी आराधना से भक्तों को शांति और सुख की प्राप्ति होती है। इस आरती को गाकर हम माँ सीता की महिमा और उनकी अद्भुत गुणों का गुणगान करते हैं।

श्री सीता आरती का गायन विशेषकर नवरात्रि, रामनवमी, और अन्य धार्मिक पर्वों पर किया जाता है। इसे सुनने और गाने से न केवल आध्यात्मिक लाभ होता है, बल्कि मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा का संचार भी होता है। आइए, हम सब मिलकर इस पवित्र आरती का गायन करें और माता सीता की कृपा और आशीर्वाद प्राप्त करें। आप हमारी वेबसाइट में हनुमान चालीसा और हनुमान अमृतवाणी भी पढ़ सकते हैं।

श्री सीता आरती का महत्व:

आध्यात्मिक शुद्धि: श्री सीता आरती का गायन मन और आत्मा को शुद्ध करता है।
भक्ति और समर्पण: इस आरती के माध्यम से हम माँ सीता के प्रति अपनी भक्ति और समर्पण प्रकट करते हैं।
सकारात्मक ऊर्जा: आरती का नियमित पाठ हमारे जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और शांति लाता है।
सांस्कृतिक धरोहर: यह आरती भारतीय धार्मिक और सांस्कृतिक धरोहर का एक अभिन्न हिस्सा है।

श्री सीता आरती के माध्यम से हम माँ सीता के प्रति अपनी श्रद्धा को प्रकट कर सकते हैं और उनके आशीर्वाद से अपने जीवन को सुखमय बना सकते हैं।



  • हिंदी / संस्कृत
  • English

|| श्री सीता आरती ||

आरती श्री जनक दुलारी की ।
सीता जी रघुवर प्यारी की ॥

जगत जननी जग की विस्तारिणी,
नित्य सत्य साकेत विहारिणी,
परम दयामयी दिनोधारिणी,
सीता मैया भक्तन हितकारी की ॥

आरती श्री जनक दुलारी की ।
सीता जी रघुवर प्यारी की ॥

सती श्रोमणि पति हित कारिणी,
पति सेवा वित्त वन वन चारिणी,
पति हित पति वियोग स्वीकारिणी,
त्याग धर्म मूर्ति धरी की ॥

आरती श्री जनक दुलारी की ।
सीता जी रघुवर प्यारी की ॥

विमल कीर्ति सब लोकन छाई,
नाम लेत पवन मति आई,
सुमीरात काटत कष्ट दुख दाई,
शरणागत जन भय हरी की ॥

आरती श्री जनक दुलारी की ।
सीता जी रघुवर प्यारी की ॥

|| Sita Mata Aarti: Shri Janak Dulari Ki ||

Aarti Shri Janak Dulari Ki.
Sita Ji Raghuvr Pyari Ki.

Jagat Janani Jag Ki Vistharini,
Nitya Satya Saaket Vihaarini,
Param Dayaamayi Dinodhaarinini,
Sita Maiya Bhaktaan Hitakaari Ki.

Aarti Shri Janak Dulari Ki.
Sita Ji Raghuvr Pyari Ki.

Sati Shromani Pati Hit Kaarini,
Pati Seva Vitt Van Van Chaarini,
Pati Hit Pati Viyog Sweekaarini,
Tyaag Dharm Moorti Dhari Ki.

Aarti Shri Janak Dulari Ki.
Sita Ji Raghuvr Pyari Ki.

Vimal Kirti Sab Lokan Chhaai,
Naam Let Pavan Mati Aayi,
Sumirat Kaatat Kasht Dukh Daai,
Sharnaagat Jan Bhay Hari Ki.

Aarti Shri Janak Dulari Ki.
Sita Ji Raghuvr Pyari Ki.


श्री सीता आरती के लाभ

श्री सीता आरती (Sita Mata Aarti: Shri Janak Dulari Ki) की महत्ता और लाभ अत्यंत व्यापक हैं। यह आरती, जो माता सीता को समर्पित है, एक विशेष प्रकार की पूजा है जो उनके भक्तों के जीवन में आध्यात्मिक और भौतिक लाभ प्रदान करती है। इस लेख में, हम श्री सीता आरती के लाभों को विस्तार से समझेंगे।

श्री सीता आरती की महत्ता

श्री सीता आरती का महत्व हिंदू धर्म में बहुत विशेष है, खासकर उन भक्तों के लिए जो माता सीता की आराधना करते हैं। माता सीता को शक्ति, समर्पण, और आदर्श नारीत्व की प्रतीक माना जाता है। उनके प्रति भक्ति और आरती का नियमित पाठ हमें जीवन में अच्छाई, सुख-शांति, और सही मार्ग पर चलने की प्रेरणा प्रदान करता है।

श्री सीता आरती के लाभ

आध्यात्मिक उन्नति: श्री सीता आरती का नियमित पाठ और सुनना भक्तों की आध्यात्मिक उन्नति के लिए अत्यंत लाभकारी है। इस आरती के माध्यम से हम माता सीता की दिव्य ऊर्जा से जुड़ते हैं, जो हमें आत्मा की गहराइयों में पहुंचने की प्रेरणा देती है। इससे मानसिक शांति और आत्म-संयम की प्राप्ति होती है।

धार्मिक समर्पण: माता सीता का जीवन समर्पण, सत्यनिष्ठा और पवित्रता का आदर्श उदाहरण है। इस आरती का पाठ करने से भक्त उनके गुणों को अपनाने की प्रेरणा प्राप्त करते हैं, जिससे उनके जीवन में धर्म और नैतिकता की भावना प्रबल होती है।

संकटों से मुक्ति: माता सीता को संकट और कठिनाइयों का सामना करने वाली देवी माना जाता है। उनकी आरती का पाठ भक्तों को संकट और परेशानियों से मुक्ति दिलाने में मदद करता है। यह विशेष रूप से उन लोगों के लिए लाभकारी है जो जीवन की कठिनाइयों और चुनौतियों का सामना कर रहे हैं।

शांति और संतुलन: इस आरती के माध्यम से, भक्त अपने जीवन में मानसिक और भावनात्मक शांति प्राप्त कर सकते हैं। इसका पाठ करने से मन की अशांति दूर होती है और जीवन में संतुलन स्थापित होता है।

परिवार की खुशहाली: माता सीता का आदर्श पारिवारिक जीवन और उनके प्रति भक्ति परिवार में खुशहाली और एकता लाने में सहायक होती है। नियमित रूप से इस आरती का पाठ करने से परिवार के सदस्यों के बीच प्रेम और समर्पण बढ़ता है, जिससे परिवार में सुख-शांति बनी रहती है।

सच्चे प्रेम की अनुभूति: माता सीता और भगवान राम का प्रेम सच्चे और निस्वार्थ प्रेम का आदर्श उदाहरण है। इस आरती के माध्यम से भक्त उस सच्चे प्रेम की अनुभूति कर सकते हैं, जो जीवन को एक नई दिशा और अर्थ प्रदान करता है

सकारात्मक ऊर्जा का संचार: श्री सीता आरती का पाठ सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है। यह वातावरण को शुद्ध करता है और घर में एक सकारात्मक वाइब्स को बनाता है। इसके साथ ही, यह नकारात्मक विचारों और शक्तियों को भी दूर करता है।

स्वास्थ्य लाभ: धार्मिक अनुष्ठान और आरती के दौरान ध्यान और मनन से शारीरिक स्वास्थ्य में सुधार हो सकता है। आरती के समय ध्यान और मंत्रोच्चारण से मानसिक तनाव कम होता है, जिससे शरीर और मन दोनों स्वस्थ रहते हैं।

धार्मिक और सामाजिक प्रतिष्ठा: श्री सीता आरती का नियमित पाठ व्यक्ति को धार्मिक और सामाजिक दृष्टिकोण से सम्मानित बनाता है। यह समाज में एक अच्छे और धार्मिक व्यक्ति के रूप में पहचान दिलाने में मदद करता है।

आर्थिक समृद्धि: माता सीता की आरती का पाठ करने से आर्थिक समस्याओं का समाधान हो सकता है। यह विश्वास है कि माता की कृपा से आर्थिक समृद्धि और समृद्धि के दरवाजे खुलते हैं।

श्री सीता आरती के पाठ का तरीका

श्री सीता आरती का पाठ करते समय कुछ विशेष बातों का ध्यान रखना चाहिए:

स्वच्छता और पवित्रता: आरती के दौरान स्वच्छता और पवित्रता का ध्यान रखना अत्यंत महत्वपूर्ण है। भक्तों को अपने शरीर और मन को पवित्र रखना चाहिए और आरती के समय साफ कपड़े पहनने चाहिए।

मन से एकाग्रता: आरती का पाठ करते समय मन को पूरी तरह से एकाग्रित करना चाहिए। ध्यान और भक्ति के साथ इस आरती का पाठ करना चाहिए ताकि माता सीता की कृपा प्राप्त हो सके।

मंत्रों का सही उच्चारण: आरती के मंत्रों का सही उच्चारण करना चाहिए। इससे आरती की शक्ति और प्रभाव बढ़ता है।

ध्यान और समर्पण: आरती के दौरान माता सीता के चरणों में ध्यान केंद्रित करें और पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ आरती करें।

श्री सीता आरती का महत्व और लाभ अत्यंत व्यापक हैं। यह आरती भक्तों के जीवन में आध्यात्मिक, मानसिक, और भौतिक सभी दृष्टिकोण से लाभकारी साबित होती है। इसके नियमित पाठ से हम न केवल माता सीता की कृपा प्राप्त कर सकते हैं, बल्कि अपने जीवन में शांति, समृद्धि, और सुख-शांति का अनुभव भी कर सकते हैं। अतः, श्री सीता आरती का पाठ अपने जीवन में नियमित रूप से करना चाहिए और इसके लाभों का अनुभव करना चाहिए।


सीता जी का असली नाम क्या है?

सीता जी का असली नाम जानकी था। वे मिथिला के राजा जनक की पुत्री थीं, इसलिए उन्हें जानकी भी कहा जाता है।

राम जी ने सीता का त्याग क्यों किया?

राम जी ने सीता का त्याग लोकमत और मर्यादा का पालन करने के लिए किया था। जब प्रजा में सीता माता के चरित्र पर सवाल उठने लगे, तो राम जी ने राज्य की मर्यादा के लिए उनका त्याग किया।

सीता माता कौन सी पूजा करते थे?

सीता माता भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करती थीं। उन्होंने अपने विवाह से पहले भी भगवान शिव की आराधना की थी।

देवी सीता किसका अवतार है?

देवी सीता को माता लक्ष्मी का अवतार माना जाता है। वे भगवान विष्णु के अवतार श्रीराम की पत्नी थीं।

सीता कौन सी जाति की थी?

सीता जी किसी जाति विशेष से नहीं जुड़ी थीं, वे राजा जनक की पुत्री थीं और उन्हें स्वयंवर के माध्यम से राजा दशरथ के पुत्र राम ने वरण किया था।

माता सीता ने कौन सा पाप किया था?

माता सीता ने कोई पाप नहीं किया था। उन्हें निर्दोष होने के बावजूद समाज की कठोरता का सामना करना पड़ा। उनका त्याग और शील सदैव आदर्श रूप में देखा जाता है।

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Hemlata – Experienced Hindu Devotee and Devotional Text Expert
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