Thursday, February 26, 2026
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श्री राणी सती दादी – Shri Rani Sati Dadi Ji Chalisa PDF 2026

By Dr. Hemlata | Reviewed by Vedic Scholar | Last Updated: January 2026 - This devotional text has been carefully verified against widely accepted traditional sources to preserve correct wording, pronunciation, and spiritual intent for daily recitation.
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श्री राणी सती दादी चालीसा (Shri Rani Sati Dadi Ji Chalisa Pdf) भक्तों के बीच बहुत ही प्रसिद्ध और पूजनीय है। यह चालीसा उन भक्तों के लिए एक विशेष पाठ है जो राणी सती दादी को अपने आराध्य के रूप में मानते हैं। राणी सती दादी, जिनका असली नाम नारायणी देवी था, एक वीरांगना महिला थीं जिन्होंने अपने पति की मृत्यु के बाद सती हो गईं। उनके इस अद्वितीय त्याग और समर्पण ने उन्हें दैवीय रूप में प्रतिष्ठित कर दिया और उन्हें ‘राणी सती’ के नाम से जाना जाने लगा।

चालीसा का पाठ भक्तों को दादी के जीवन और उनके महान कार्यों का स्मरण कराता है। यह 40 छंदों (चालीस छंद) का एक संग्रह होता है, जिसमें दादी की महिमा, उनकी वीरता, और उनके आशीर्वाद की महत्ता का वर्णन किया गया है। चालीसा का पाठ न केवल भक्तों की आस्था को मजबूत करता है बल्कि उन्हें मनोबल और साहस भी प्रदान करता है।

राणी सती दादी चालीसा का नियमित पाठ करने से भक्तों को मानसिक शांति और आध्यात्मिक ऊर्जा प्राप्त होती है। यह चालीसा विशेष अवसरों, त्योहारों और नियमित पूजा के दौरान गायी जाती है और इसे सुनने या पढ़ने से भक्तों के जीवन में सकारात्मकता और सुख-शांति का संचार होता है।

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  • हिंदी / संस्कृत
  • English

|| श्री राणी सती दादी चालीसा ||

॥ चौपाई ॥
नमो नमो श्री सती भवानी।
जग विख्यात सभी मन मानी ॥

नमो नमो संकट कू हरनी।
मनवांछित पूरण सब करनी ॥

नमो नमो जय जय जगदंबा।
भक्तन काज न होय विलंबा ॥

नमो नमो जय जय जगतारिणी।
सेवक जन के काज सुधारिणी ॥4

दिव्य रूप सिर चूनर सोहे ।
जगमगात कुन्डल मन मोहे ॥

मांग सिंदूर सुकाजर टीकी ।
गजमुक्ता नथ सुंदर नीकी ॥

गल वैजंती माल विराजे ।
सोलहूं साज बदन पे साजे ॥

धन्य भाग गुरसामलजी को ।
महम डोकवा जन्म सती को ॥8

तनधनदास पति वर पाये ।
आनंद मंगल होत सवाये ॥

जालीराम पुत्र वधु होके ।
वंश पवित्र किया कुल दोके ॥

पति देव रण मॉय जुझारे ।
सति रूप हो शत्रु संहारे ॥

पति संग ले सद् गती पाई ।
सुर मन हर्ष सुमन बरसाई ॥12

धन्य भाग उस राणा जी को ।
सुफल हुवा कर दरस सती का ॥

विक्रम तेरह सौ बावन कूं ।
मंगसिर बदी नौमी मंगल कूं ॥

नगर झून्झूनू प्रगटी माता ।
जग विख्यात सुमंगल दाता ॥

दूर देश के यात्री आवै ।
धुप दिप नैवैध्य चढावे ॥16

उछाङ उछाङते है आनंद से ।
पूजा तन मन धन श्रीफल से ॥

जात जङूला रात जगावे ।
बांसल गोत्री सभी मनावे ॥

पूजन पाठ पठन द्विज करते ।
वेद ध्वनि मुख से उच्चरते ॥

नाना भाँति भाँति पकवाना ।
विप्र जनो को न्यूत जिमाना ॥20

श्रद्धा भक्ति सहित हरसाते ।
सेवक मनवांछित फल पाते ॥

जय जय कार करे नर नारी ।
श्री राणी सतीजी की बलिहारी ॥

द्वार कोट नित नौबत बाजे ।
होत सिंगार साज अति साजे ॥

रत्न सिंघासन झलके नीको ।
पलपल छिनछिन ध्यान सती को ॥24

भाद्र कृष्ण मावस दिन लीला ।
भरता मेला रंग रंगीला ॥

भक्त सूजन की सकल भीङ है ।
दरशन के हित नही छीङ है ॥

अटल भुवन मे ज्योति तिहारी ।
तेज पूंज जग मग उजियारी ॥

आदि शक्ति मे मिली ज्योति है ।
देश देश मे भवन भौति है ॥28

नाना विधी से पूजा करते ।
निश दिन ध्यान तिहारो धरते ॥

कष्ट निवारिणी दुख: नासिनी ।
करूणामयी झुन्झुनू वासिनी ॥

प्रथम सती नारायणी नामा ।
द्वादश और हुई इस धामा ॥

तिहूं लोक मे कीरति छाई ।
राणी सतीजी की फिरी दुहाई ॥32

सुबह शाम आरती उतारे ।
नौबत घंटा ध्वनि टंकारे ॥

राग छत्तीसों बाजा बाजे ।
तेरहु मंड सुन्दर अति साजे ॥

त्राहि त्राहि मै शरण आपकी ।
पुरी मन की आस दास की ॥

मुझको एक भरोसो तेरो ।
आन सुधारो मैया कारज मेरो ॥36

पूजा जप तप नेम न जानू ।
निर्मल महिमा नित्य बखानू ॥

भक्तन की आपत्ति हर लिनी ।
पुत्र पौत्र सम्पत्ति वर दीनी ॥ 40

पढे चालीसा जो शतबारा ।
होय सिद्ध मन माहि विचारा ॥

टिबरिया ली शरण तिहारी।
क्षमा करो सब चूक हमारी ॥

॥ दोहा ॥
दुख आपद विपदा हरण,
जन जीवन आधार ।
बिगङी बात सुधारियो,
सब अपराध बिसार ॥


॥ मात श्री राणी सतीजी की जय ॥

Shri Rani Sati Dadi Ji Chalisa pdf

॥ Chaupai ॥
namo namo shree satee bhavaanee ॥
jag varjasvat man man man ॥

namo namo sankat koo haranee ॥
manavaanchhit puraan sab karana ॥

namo namo jay jay jagadamba ॥
bhaktan kaaj na hoy ​​dera ॥

namo namo jay jay jagataarinee ॥
sevak jan ke kaaj sudhaarinee ॥4 ॥

divy roop sir chunar sohe ॥
jagamagagat kundal man mohe ॥

maang sindoor sukaajar tikee ॥
gajamukta naath sundar neekee ॥

gal vaijanti maal viraaje ॥
seloon saaj badan pe saaje ॥

dhany bhaag gurasaamalajee ko ॥
maham dokava janm satee ko ॥8 ॥

tanadhanadaas pati var pae ॥
aanand mangal hot svaaye ॥

fekaraam putr vadhu hoke ॥
vansh pavitr kul doke ॥

pati dev raan may jujhaare ॥
sati roop ho shatru sanhaare ॥

pati sang le sad gati paee ॥
sur man harsh suman barajai ॥12 ॥

dhanyavaad us raana jee ko ॥
suphal huva kar daras satee ka ॥

vikramaadity sau baavan koon ॥
mangasir badee naumee mangal koon ॥

nagar jhoonjhunoo pragati maata ॥
jag vyutpatti mangal sumangal daata ॥

door desh ke yaatree aavai ॥
dhoop deep naivaidhy chadhaave ॥16 ॥

uchhaan uchhaate hai aanand se ॥
pooja tan man dhan shreephal se ॥

jaat jyoola raat jaagave ॥
baansal gotree sarv manaave ॥

poojan paath paath dvij karen ॥
ved dhvani mukh se uchchaarate ॥

naana bhaanti bhaanti chaahata ॥
vipr jano ko nit jimaana ॥20 ॥

shraddhaabhaktisahit harasate ॥
sevak manavaanchhit phal shoe ॥

jay jay kaar kare nar naaree ॥
shree raanee sateejee kee balihaaree ॥

dvaar kot nit naubat baaje ॥
hot singaar saaj ati saaje ॥

ratn sinhaasan jhalake neeko ॥
palapal chhinachin dhyaan sati ko ॥24 ॥

bhadr krshn maavas din leela ॥
bhaarat mela rang rangeela ॥

bhakt soojan kee sakal bhee hai ॥
darshan ke hit nahin chheen ॥

atal bhuvan me jyoti tihaaree ॥
tej poonj jag mag ujiyaaree ॥

aadi shakti mein milee jyoti hai ॥
desh desh mein bhavan bahut hai ॥28 ॥

naana vidhi se pooja karen ॥
nish din dhyaan tihaaro dharate ॥

kasht nivaarinee duhkhah naasini ॥
karunaamayee jhunjhunoo vaasinee ॥

pratham sati naaraayanee naama ॥
dvaadash aur huee is dhaama ॥

tihoon lok me keerti chhai ॥
raanee sateejee kee phiree duhaee ॥32 ॥

praatah saayan aaratee nikaalen ॥
naubat goonj dhvanit taanakaare ॥

raag chhatteeson baaja baaje ॥
traalu mand sundar ati saaje ॥

traahi traahi mai sharan aapakee ॥
puree man kee aas daas kee ॥

mujhe ek bharosa tero ॥
an sudhaaro maiya karaj mero ॥36 ॥

pooja jap tap nem na jaanoo ॥
nirmal mahima nity bakhaanau ॥

bhakton kee kunjee har lain ॥
putr pautr evestament var deenee ॥40 ॥

padhen chaaleesa jo shatabaara ॥
hoy siddh man maahi vichaara ॥

tibariya lee sharan tihaaree ॥
kshama karo sab galat hamaaree ॥

॥ Doha ॥
duhkh aapad vipada haran,
jan jeevan aadhaar ॥
badee baat sudhaariyo,
sab aparaadh bisaar ॥

॥ mata shree raanee sateejee kee jay ॥


श्री राणी सती दादी चालीसा के लाभ

श्री राणी सती दादी चालीसा का पाठ करने से कई लाभ होते हैं। इस चालीसा का पाठ भक्तों के लिए मानसिक, आध्यात्मिक और सामाजिक स्तर पर कई लाभकारी होता है। यहां श्री राणी सती दादी चालीसा के पाठ के कुछ प्रमुख लाभों का वर्णन किया गया है:

1. आध्यात्मिक शांति और मानसिक स्थिरता

श्री राणी सती दादी चालीसा का नियमित पाठ करने से मन को शांति मिलती है और मानसिक स्थिरता प्राप्त होती है। यह चालीसा पाठ व्यक्ति को ध्यान केंद्रित करने और उसकी आंतरिक शांति को बढ़ाने में मदद करता है।

2. सकारात्मक ऊर्जा और आत्मविश्वास

चालीसा का पाठ करने से व्यक्ति में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। यह आत्मविश्वास को बढ़ाता है और व्यक्ति को आत्म-निर्भर बनाता है। इसके माध्यम से नकारात्मक विचारों का नाश होता है और सकारात्मकता का विकास होता है।

3. पारिवारिक समृद्धि और सुख-शांति

श्री राणी सती दादी चालीसा का पाठ करने से परिवार में समृद्धि और सुख-शांति बनी रहती है। यह पारिवारिक सदस्यों के बीच प्रेम और सद्भावना को बढ़ावा देता है। इसके नियमित पाठ से पारिवारिक जीवन में खुशहाली आती है।

4. संकटों और कठिनाइयों से मुक्ति

श्री राणी सती दादी चालीसा का पाठ करने से व्यक्ति को जीवन के संकटों और कठिनाइयों से मुक्ति मिलती है। यह चालीसा व्यक्ति को हर प्रकार की विपत्तियों से बचाती है और उसे समस्याओं का सामना करने की शक्ति प्रदान करती है।

5. स्वास्थ लाभ

चालीसा का पाठ करने से मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य में सुधार होता है। इसका नियमित पाठ करने से तनाव और चिंता कम होती है, जिससे व्यक्ति का स्वास्थ्य अच्छा रहता है।

6. भक्तिभाव और आस्था में वृद्धि

श्री राणी सती दादी चालीसा का पाठ करने से व्यक्ति का भक्तिभाव और आस्था बढ़ती है। यह चालीसा व्यक्ति को दादी जी के प्रति श्रद्धा और समर्पण में वृद्धि करती है, जिससे उसकी भक्ति प्रगाढ़ होती है।

7. आध्यात्मिक जागृति

चालीसा का पाठ व्यक्ति की आध्यात्मिक जागृति में सहायक होता है। यह व्यक्ति को उसकी आंतरिक शक्तियों का अनुभव कराता है और उसे आत्म-साक्षात्कार की दिशा में प्रेरित करता है।

8. कष्टों से मुक्ति और संकटमोचन

श्री राणी सती दादी चालीसा का पाठ करने से व्यक्ति को उसके जीवन के कष्टों से मुक्ति मिलती है। यह चालीसा संकटमोचन के रूप में कार्य करती है और व्यक्ति को हर प्रकार की विपत्तियों से बचाती है।

9. विद्या और बुद्धि का विकास

चालीसा का पाठ करने से व्यक्ति की विद्या और बुद्धि का विकास होता है। यह व्यक्ति को उसकी शिक्षा और ज्ञान में वृद्धि करने में सहायक होता है।

10. आत्म-संतुष्टि और आनंद

श्री राणी सती दादी चालीसा का पाठ करने से व्यक्ति को आत्म-संतुष्टि और आनंद की प्राप्ति होती है। यह चालीसा व्यक्ति को उसके जीवन में सच्चे आनंद का अनुभव कराती है।

11. धार्मिक कर्तव्यों का पालन

चालीसा का पाठ करने से व्यक्ति अपने धार्मिक कर्तव्यों का पालन करता है। यह व्यक्ति को धर्म के प्रति जागरूक बनाता है और उसे धार्मिक मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित करता है।

12. आध्यात्मिक मार्गदर्शन

श्री राणी सती दादी चालीसा का पाठ व्यक्ति को आध्यात्मिक मार्गदर्शन प्रदान करता है। यह व्यक्ति को उसकी आत्मा के प्रति जागरूक बनाता है और उसे जीवन के सच्चे मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है।

13. आत्म-साक्षात्कार और मोक्ष

चालीसा का पाठ व्यक्ति को आत्म-साक्षात्कार की दिशा में प्रेरित करता है और उसे मोक्ष प्राप्ति की दिशा में अग्रसर करता है। यह व्यक्ति को उसकी आत्मा की सच्चाई का अनुभव कराता है और उसे जीवन के अंतिम लक्ष्य की प्राप्ति के लिए प्रेरित करता है।

14. धन-धान्य और समृद्धि

श्री राणी सती दादी चालीसा का पाठ करने से व्यक्ति को धन-धान्य और समृद्धि की प्राप्ति होती है। यह व्यक्ति को आर्थिक समृद्धि और संपन्नता प्रदान करती है।

15. सामाजिक प्रतिष्ठा और मान-सम्मान

चालीसा का पाठ करने से व्यक्ति को समाज में प्रतिष्ठा और मान-सम्मान प्राप्त होता है। यह व्यक्ति को समाज में एक सम्मानित स्थान दिलाती है और उसे सामाजिक प्रतिष्ठा प्रदान करती है।

16. रिश्तों में मधुरता

श्री राणी सती दादी चालीसा का पाठ करने से रिश्तों में मधुरता आती है। यह चालीसा व्यक्ति को उसके रिश्तों को मजबूती प्रदान करती है और रिश्तों में प्रेम और सामंजस्य को बढ़ावा देती है।

17. कष्टों से रक्षा और सुरक्षा

चालीसा का पाठ करने से व्यक्ति को कष्टों से रक्षा मिलती है। यह व्यक्ति को हर प्रकार की विपत्तियों और संकटों से बचाती है और उसे सुरक्षा प्रदान करती है।

18. आत्मा की शुद्धता और पवित्रता

श्री राणी सती दादी चालीसा का पाठ करने से व्यक्ति की आत्मा शुद्ध और पवित्र होती है। यह व्यक्ति को उसके पापों से मुक्ति दिलाती है और उसकी आत्मा को शुद्ध करती है।

19. जीवन में सच्चाई और ईमानदारी

चालीसा का पाठ करने से व्यक्ति के जीवन में सच्चाई और ईमानदारी का विकास होता है। यह व्यक्ति को सच्चाई के मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित करती है और उसे ईमानदारी से जीवन जीने की दिशा में मार्गदर्शन प्रदान करती है।

20. परमात्मा के प्रति समर्पण

श्री राणी सती दादी चालीसा का पाठ करने से व्यक्ति का परमात्मा के प्रति समर्पण बढ़ता है। यह व्यक्ति को उसके इष्ट देवता के प्रति समर्पित बनाती है और उसे परमात्मा की कृपा प्राप्त करने के लिए प्रेरित करती है।

21. सकारात्मक सोच का विकास

चालीसा का पाठ करने से व्यक्ति की सोच में सकारात्मकता का विकास होता है। यह व्यक्ति को नकारात्मक विचारों से मुक्त करती है और उसे सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाने की दिशा में प्रेरित करती है।

22. जीवन में धैर्य और सहनशीलता

श्री राणी सती दादी चालीसा का पाठ करने से व्यक्ति के जीवन में धैर्य और सहनशीलता का विकास होता है। यह व्यक्ति को हर प्रकार की परिस्थितियों का सामना करने की शक्ति प्रदान करती है और उसे धैर्यपूर्वक जीवन जीने की प्रेरणा देती है।

23. आत्मबल और आत्मविश्वास

चालीसा का पाठ करने से व्यक्ति का आत्मबल और आत्मविश्वास बढ़ता है। यह व्यक्ति को उसकी क्षमताओं पर विश्वास दिलाती है और उसे आत्म-निर्भर बनने की दिशा में प्रेरित करती है।

24. धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान

श्री राणी सती दादी चालीसा का पाठ करने से व्यक्ति की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान मजबूत होती है। यह व्यक्ति को उसके धार्मिक और सांस्कृतिक मूल्यों से जोड़ती है और उसे अपनी पहचान की दिशा में जागरूक करती है।

25. दैवीय कृपा और आशीर्वाद

चालीसा का पाठ करने से व्यक्ति को दैवीय कृपा और आशीर्वाद प्राप्त होता है। यह व्यक्ति को उसके जीवन में दैवीय शक्तियों की कृपा का अनुभव कराती है और उसे आशीर्वाद प्रदान करती है।

26. जीवन में संतोष और सुख

श्री राणी सती दादी चालीसा का पाठ करने से व्यक्ति को जीवन में संतोष और सुख की प्राप्ति होती है। यह व्यक्ति को उसकी सभी इच्छाओं और अपेक्षाओं से मुक्त करती है और उसे सच्चे सुख का अनुभव कराती है।

27. आत्म-संयम और अनुशासन

चालीसा का पाठ करने से व्यक्ति में आत्म-संयम और अनुशासन का विकास होता है। यह व्यक्ति को उसके जीवन में अनुशासनप्रिय बनाती है और उसे आत्म-संयम के महत्व को समझने की दिशा में प्रेरित करती है।

28. सामाजिक सेवा और परोपकार

श्री राणी सती दादी चालीसा का पाठ करने से व्यक्ति में सामाजिक सेवा और परोपकार की भावना विकसित होती है। यह व्यक्ति को समाज की सेवा करने के लिए प्रेरित करती है और उसे परोपकार के मार्ग पर चलने की दिशा में मार्गदर्शन प्रदान करती है।

29. धार्मिक साधना और ध्यान

चालीसा का पाठ करने से व्यक्ति में धार्मिक साधना और ध्यान का विकास होता है। यह व्यक्ति को उसकी आत्मा की शुद्धि के लिए प्रेरित करती है और उसे धार्मिक साधना के मार्ग पर चलने की दिशा में मार्गदर्शन प्रदान करती है।

30. जीवन में सफलता और समृद्धि

श्री राणी सती दादी चालीसा का पाठ करने से व्यक्ति को जीवन में सफलता और समृद्धि प्राप्त होती है। यह व्यक्ति को उसकी सभी आकांक्षाओं और उद्देश्यों में सफल होने की दिशा में प्रेरित करती है और उसे समृद्ध

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