Wednesday, January 28, 2026
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श्री जाहरवीर चालीसा – Shri Jaharveer Chalisa PDF 2024-25

By Dr. Hemlata | Reviewed by Vedic Scholar | Last Updated: January 2026 - This devotional text has been carefully verified against widely accepted traditional sources to preserve correct wording, pronunciation, and spiritual intent for daily recitation.
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श्री जाहरवीर चालीसा (Shri Jaharveer Chalisa PDF) एक अत्यंत लोकप्रिय और श्रद्धेय धार्मिक स्तुति है, जिसे भगवान जाहरवीर जी की महिमा का गान करने के लिए लिखा गया है। जाहरवीर जी, जिन्हें जाहरवीर गोगा जी महाराज या गोगा वीर के नाम से भी जाना जाता है, राजस्थान और हरियाणा के अनेक भागों में व्यापक रूप से पूजे जाते हैं। वे विशेषकर नागवंशी राजपूतों के बीच में पूजनीय माने जाते हैं, लेकिन उनकी भक्ति का प्रसार सभी जातियों और समुदायों में है।

जाहरवीर जी का जीवन और उनके चमत्कारिक कार्य उनकी भक्ति और श्रद्धा का प्रतीक हैं। वे अपने जीवनकाल में अद्वितीय साहस और न्यायप्रियता के लिए जाने जाते थे। उनकी वीरता की कहानियाँ आज भी लोकगीतों और कहानियों के माध्यम से लोगों के बीच जीवंत हैं। गोगा जी महाराज को मुख्य रूप से नाग देवता के रूप में पूजा जाता है, जो कि नागों और अन्य जहरीले जीवों से रक्षा करने वाले माने जाते हैं। इस कारणवश, उनके भक्त उन्हें नागराज के रूप में भी संबोधित करते हैं।

श्री जाहरवीर चालीसा का पाठ करने से भक्तों को जीवन में आने वाली विपत्तियों से मुक्ति मिलती है, और उन्हें आशीर्वाद प्राप्त होता है। यह चालीसा भगवान जाहरवीर जी की स्तुति करते हुए उनके जीवन के विभिन्न पहलुओं का वर्णन करती है, जिसमें उनके वीरता भरे कार्य, दया, करुणा और न्यायप्रियता का उल्लेख है। इस चालीसा के माध्यम से भक्त उनकी कृपा प्राप्त करने के लिए उनसे प्रार्थना करते हैं और जीवन में आने वाली कठिनाइयों का सामना करने के लिए शक्ति प्राप्त करते हैं।

श्री जाहरवीर चालीसा का महत्व सिर्फ धार्मिक दृष्टिकोण से ही नहीं है, बल्कि यह भक्ति और आध्यात्मिकता का भी प्रतीक है। इसका पाठ करने से मानसिक शांति मिलती है और भक्तों को आत्मिक बल मिलता है। यह चालीसा जाहरवीर जी के प्रति गहरी आस्था और प्रेम का परिचायक है। इसे श्रद्धा से पढ़ने वाले भक्तों का विश्वास है कि इससे जीवन के सभी संकट दूर होते हैं और उनके परिवार में सुख-शांति बनी रहती है।

श्री जाहरवीर चालीसा का पाठ विशेष अवसरों पर जैसे पूजा, व्रत, और त्योहारों में किया जाता है। इसे नित्य पाठ करने से व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और उसके समस्त कष्टों का निवारण होता है। आज के समय में, जब जीवन में अनेक प्रकार के तनाव और चुनौतियाँ हैं, इस चालीसा का पाठ व्यक्ति को मानसिक शांति और धैर्य प्रदान करता है।

इसलिए, जो भी भक्त श्री जाहरवीर चालीसा का पाठ सच्चे मन से करता है, उसे निश्चित रूप से जाहरवीर जी की कृपा प्राप्त होती है। इस चालीसा के पाठ से न केवल व्यक्ति की आत्मा को शांति मिलती है, बल्कि उसे भगवान जाहरवीर जी की दिव्य शक्ति का भी अनुभव होता है। यदि आप भी जाहरवीर जी की कृपा प्राप्त करना चाहते हैं और जीवन के समस्त संकटों से मुक्ति पाना चाहते हैं, तो श्री जाहरवीर चालीसा का नियमित पाठ अवश्य करें।



  • हिंदी / संस्कृत
  • English

|| श्री जाहरवीर चालीसा ||

॥ दोहा ॥

सुवन केहरी जेवर, सुत महाबली रनधीर ।
बन्दौं सुत रानी बाछला, विपत निवारण वीर ॥
जय जय जय चौहान, वन्स गूगा वीर अनूप ।
अनंगपाल को जीतकर, आप बने सुर भूप ॥

॥ चौपाई ॥

जय जय जय जाहर रणधीरा । पर दुख भंजन बागड़ वीरा ॥१॥
गुरु गोरख का है वरदानी । जाहरवीर जोधा लासानी ॥२॥
गौरवरण मुख महा विशाला । माथे मुकट घुंघराले बाला ॥३॥
कांधे धनुष गले तुलसी माला । कमर कृपान रक्षा को डाला ॥४॥

जन्में गूगावीर जग जाना । ईसवी सन हजार दरमियाना ॥५॥
बल सागर गुण निधि कुमारा । दुखी जनों का बना सहारा ॥६॥
बागड़ पति बाछला नन्दन । जेवर सुत हरि भक्त निकन्दन ॥७॥
जेवर राव का पुत्र कहाये । माता पिता के नाम बढ़ाये ॥८॥

पूरन हुई कामना सारी । जिसने विनती करी तुम्हारी ॥९॥
सन्त उबारे असुर संहारे । भक्त जनों के काज संवारे ॥१०॥
गूगावीर की अजब कहानी । जिसको ब्याही श्रीयल रानी ॥११॥
बाछल रानी जेवर राना । महादुःखी थे बिन सन्ताना ॥१२॥

भंगिन ने जब बोली मारी । जीवन हो गया उनको भारी ॥१३॥
सूखा बाग पड़ा नौलक्खा । देख-देख जग का मन दुक्खा ॥१४॥
कुछ दिन पीछे साधू आये । चेला चेली संग में लाये ॥१५॥
जेवर राव ने कुआ बनवाया । उद्घाटन जब करना चाहा ॥१६॥

खारी नीर कुए से निकला । राजा रानी का मन पिघला ॥१७॥
रानी तब ज्योतिषी बुलवाया । कौन पाप मैं पुत्र न पाया ॥१८॥
कोई उपाय हमको बतलाओ । उन कहा गोरख गुरु मनाओ ॥१९॥
गुरु गोरख जो खुश हो जाई । सन्तान पाना मुश्किल नाई ॥२०॥

बाछल रानी गोरख गुन गावे । नेम धर्म को न बिसरावे ॥२१॥
करे तपस्या दिन और राती । एक वक्त खाय रूखी चपाती ॥२२॥
कार्तिक माघ में करे स्नाना । व्रत इकादसी नहीं भुलाना ॥२३॥
पूरनमासी व्रत नहीं छोड़े । दान पुण्य से मुख नहीं मोड़े ॥२४॥

चेलों के संग गोरख आये । नौलखे में तम्बू तनवाये ॥२५॥
मीठा नीर कुए का कीना । सूखा बाग हरा कर दीना ॥२६॥
मेवा फल सब साधु खाए । अपने गुरु के गुन को गाये ॥२७॥
औघड़ भिक्षा मांगने आए । बाछल रानी ने दुख सुनाये ॥२८॥

औघड़ जान लियो मन माहीं । तप बल से कुछ मुश्किल नाहीं ॥२९॥
रानी होवे मनसा पूरी । गुरु शरण है बहुत जरूरी ॥३०॥
बारह बरस जपा गुरु नामा । तब गोरख ने मन में जाना ॥३१॥
पुत्र देन की हामी भर ली । पूरनमासी निश्चय कर ली ॥३२॥

काछल कपटिन गजब गुजारा । धोखा गुरु संग किया करारा ॥३३॥
बाछल बनकर पुत्र पाया । बहन का दरद जरा नहीं आया ॥३४॥
औघड़ गुरु को भेद बताया । तब बाछल ने गूगल पाया ॥३५॥
कर परसादी दिया गूगल दाना । अब तुम पुत्र जनो मरदाना ॥३६॥

लीली घोड़ी और पण्डतानी । लूना दासी ने भी जानी ॥३७॥
रानी गूगल बाट के खाई । सब बांझों को मिली दवाई ॥३८॥
नरसिंह पंडित लीला घोड़ा । भज्जु कुतवाल जना रणधीरा ॥३९॥
रूप विकट धर सब ही डरावे । जाहरवीर के मन को भावे ॥४०॥

भादों कृष्ण जब नौमी आई । जेवरराव के बजी बधाई ॥४१॥
विवाह हुआ गूगा भये राना । संगलदीप में बने मेहमाना ॥४२॥
रानी श्रीयल संग परे फेरे । जाहर राज बागड़ का करे ॥४३॥
अरजन सरजन काछल जने । गूगा वीर से रहे वे तने ॥४४॥

दिल्ली गए लड़ने के काजा । अनंग पाल चढ़े महाराजा ॥४५॥
उसने घेरी बागड़ सारी । जाहरवीर न हिम्मत हारी ॥४६॥
अरजन सरजन जान से मारे । अनंगपाल ने शस्त्र डारे ॥४७॥
चरण पकड़कर पिण्ड छुड़ाया । सिंह भवन माड़ी बनवाया ॥४८॥

उसीमें गूगावीर समाये । गोरख टीला धूनी रमाये ॥४९॥
पुण्य वान सेवक वहाँ आये । तन मन धन से सेवा लाए ॥५०॥
मनसा पूरी उनकी होई । गूगावीर को सुमरे जोई ॥५१॥
चालीस दिन पढ़े जाहर चालीसा । सारे कष्ट हरे जगदीसा ॥५२॥
दूध पूत उन्हें दे विधाता । कृपा करे गुरु गोरखनाथ ॥५३॥

॥ इति श्री जाहरवीर चालीसा संपूर्णम् ॥

|| Jaharveer Chalisa PDF ||

॥ Doha ॥
Suvana Kehari Jevar, Suta Mahabali Ranadhira।
Bandau Suta Rani Bachhala, Bipta Nivarana Vira॥

Jai Jai Jai Chauhana, Vansa Guga Vira Anupa।
Anangapala Ko Jitakara, Apa Bane Sura Bhupa॥

॥ Chaupai ॥
Jai Jai Jai Jahara Ranadhira।
Para Dukha Bhanjana Bagada Vira॥
Guru Gorakha Ka Hai Vardani।
Jaharvira Jodha Lasani॥

Gauravarana Mukha Maha Vishala।
Mathe Mukuta Ghunghrale Bala॥
Kandhe Dhanusha Gale Tulasi Mala।
Kamara Kripana Raksha Ko Dala॥

Janmen Gugavira Jaga Jana।
Isvi Sana Hajar Daramiyana॥
Bala Sagara Guna Nidhi Kumara।
Dukhi Jano Ka Bana Sahara॥

Bagada Pati Bachala Nandana।
Jewara Suta Hari Bhakata Nikandana॥
Jevar Rava Ka Putra Kahaye।
Mata Pita Ke Nama Badhaye॥

Purana Hui Kamana Sari।
Jisane Vinati Kari Tumhari॥
Santa Ubare Asura Samhare।
Bhakta Jano Ke Kaja Sanvare॥

Gugavira Ki Ajaba Kahani।
Jisako Byahi Shriyala Rani॥
Bachala Rani Jevara Rana।
Mahadukhi The Bina Santana॥

Bhangina Ne Jaba Boli Mari।
Jivana Ho Gaya Unako Bhari॥
Sukha Baga Pada Naulakha।
Dekha-Dekha Jaga Ka Mana Dukha॥

Kucha Dina Pichhe Sadhu Aye।
Chela Cheli Sanga Me Laye॥
Jevara Rava Ne Kua Banvaya।
Udghatana Java Karana Chaha॥

Khari Nira Kue Se Nikala।
Raja Rani Ka Mana Pighala॥
Rani Taba Jyotishi Bulvaya।
Kauna Papa Me Putra Na Paya॥

Koi Upai Hamako Batalao।
Una Kaha Gorakha Guru Manao॥
Guru Gorakha Jo Khush Ho Jayi।
Santana Pana Mushkil Nayi॥

Bachala Rani Gorakha Guna Gave।
Nema Dharama Ko Na Bisrave॥
Kare Tapsya Dina Aur Rati।
Eka Vakta Khai Rukhi Chapati॥

Kartika Magha Me Kare Snana।
Vrata Ikadasi Nhi Bhulana॥
Puranamasi Vrata Nahi Chhode।
Dana Punya Se Mukha Nahi Mode॥

Chelon Ke Sanga Gorakha Aye।
Naulakhe Mein Tambu Tanvaye॥
Mitha Nira Kue Ka Kina।
Sukha Baga Hara Kara Dina॥

Meva Phala Saba Sadhu Khae।
Apane Guru Ke Guna Ko Gaye॥
Aughada Bhiksha Mange Aye।
Bachala Rani Ne Dukha Sunaye॥

Aughada Jana Liyo Mana Mahi।
Tapa Bala Se Kucha Mushkila Nahi॥
Rani Hove Manasa Puri।
Guru Sharana Hain Bahuta Jaruri॥

Baraha Barasa Japa Guru Nama।
Taba Gorakha Ne Mana Me Jana॥
Putra Dena Ko Hami Bhara Li।
Puranamasi Nischaya Kara Li॥

Kachhala Kapatina Gajaba Gujara।
Dhokha Guru Sanga Kiya Karara॥
Bachhala Banakara Putra Paya।
Bahana Ka Darada Jara Nahi Aya॥

Aughada Guru Ko Bheda Bataya।
Taba Bachhala Ne Gugala Paya॥
Kara Paradasi Diya Gugala Dana।
Aba Tuma Putra Jano Maradana॥

Lili Ghodi Aur Pandatani।
Luna Dasi Ne Bhi Jani॥
Rani Gugala Bata Ke Khayi।
Saba Banjho Ko Mili Dabayi॥

Narasimha Pandita Lila Ghoda।
Bhajju Kutawala Jana Ranadhira॥
Rupa Vikata Dhara Saba Hi Darave।
Jaharvira Ke Mana Ko Bhave॥

Bhado Krishna Jaba Naumi Ayi।
Jevararava Ke Baji Badhayi॥
Vivaha Hua Guga Bhaye Rana।
Sangaldipa Me Bane Mehamana॥

Rani Shriyala Sanga Pare Phere।
Jahara Raja Bagada Ka Kare॥
Arajana Sarajana Kachhala Jane।
Guga Vira Se Rahe Ve Tane॥

Dilli Jaye Ladne Ke Kaja।
Ananga Pala Chadhe Maharaja॥
Usane Gheri Bagada Sari।
Jaharvira Na Himmata Hari॥

Arajana Sarajana Jana Se Mare।
Anangapala Ne Shastra Dare॥
Charana Pakadkara Pinda Chhudaya।
Singha Bhavana Madi Banavaya॥

Usime Gugavira SAmaye।
Gorakha Tila Dhuni Ramaye॥
Punya Vana Sevaka Vahan Aye।
Tana Mana Dhana Se Seva Lae॥

Manasa Puri Unaki Hoyi।
Gugavira Ki Samare Joyi॥
Chalis Din Padhe Jahara Chalisa।
Sare Kasta Hare Jagadisa॥

Dudha Puta Unahe De Vidhata।
Kripa Kare Guru Gorakhanatha॥




श्री जाहरवीर चालीसा के लाभ

श्री जाहरवीर चालीसा, जिसे गोगा जी महाराज की स्तुति में लिखा गया है, भक्ति और श्रद्धा का अद्वितीय स्रोत है। जाहरवीर जी, जिनके बारे में माना जाता है कि वे नाग देवता हैं और जिन्हें भारतीय उपमहाद्वीप के विभिन्न हिस्सों में अत्यधिक सम्मानित किया जाता है, की चालीसा का पाठ भक्तों के लिए अनेक लाभकारी परिणाम लेकर आता है। इस लेख में, हम श्री जाहरवीर चालीसा के विभिन्न लाभों पर विस्तार से चर्चा करेंगे, जो भक्ति, मानसिक शांति, और जीवन की विभिन्न समस्याओं के समाधान से संबंधित हैं।

भक्ति और श्रद्धा का संवर्धन

श्री जाहरवीर चालीसा का नियमित पाठ भक्तों के दिल में भगवान जाहरवीर जी के प्रति गहरी भक्ति और श्रद्धा को जन्म देता है। चालीसा के श्लोकों में जाहरवीर जी की अद्वितीय शक्तियों, उनके चमत्कारिक कार्यों और उनके भक्तों के प्रति करुणा का वर्णन किया गया है। इस पाठ के माध्यम से भक्तों को भगवान की उपस्थिति का एहसास होता है और वे अपने जीवन में अधिक समर्पित और श्रद्धालु बनते हैं।

आध्यात्मिक उत्थान

श्री जाहरवीर चालीसा का पाठ करने से भक्तों को आध्यात्मिक उत्थान की प्राप्ति होती है। यह चालीसा एक शक्तिशाली साधन है जो भक्तों को मानसिक शांति और आत्मिक संतुलन प्रदान करता है। चालीसा के पाठ से व्यक्ति अपने आध्यात्मिक पथ पर स्थिरता प्राप्त करता है और उसकी आत्मा को शांति और सुकून मिलता है। इससे व्यक्ति का आंतरिक विकास होता है और उसे जीवन के महत्वपूर्ण उद्देश्यों का बोध होता है।

विपत्तियों से मुक्ति

जाहरवीर जी को विशेषकर उन व्यक्तियों के रक्षक के रूप में पूजा जाता है जो किसी प्रकार की विपत्ति या संकट का सामना कर रहे होते हैं। श्री जाहरवीर चालीसा का पाठ करने से भक्त अपने जीवन की विभिन्न समस्याओं और संकटों से मुक्ति पा सकते हैं। यह चालीसा उन्हें आत्मिक शक्ति प्रदान करती है जिससे वे किसी भी कठिनाई का सामना कर सकते हैं। चालीसा के मंत्र और श्लोक संकटों के नाशक होते हैं और भक्तों को मानसिक और भावनात्मक समर्थन प्रदान करते हैं।

स्वास्थ्य और समृद्धि में वृद्धि

श्री जाहरवीर चालीसा के नियमित पाठ से स्वास्थ्य और समृद्धि में भी वृद्धि होती है। भगवान जाहरवीर जी की कृपा से भक्तों की शारीरिक और मानसिक स्थिति में सुधार होता है। यह चालीसा शरीर और मन दोनों को स्वस्थ और सशक्त बनाती है। भक्तों की जीवनशैली में सकारात्मक परिवर्तन आते हैं और उन्हें आर्थिक समृद्धि भी प्राप्त होती है। चालीसा की कृपा से जीवन में सुख और समृद्धि का आगमन होता है।

सुरक्षा और शांति

श्री जाहरवीर चालीसा का पाठ भक्तों को सुरक्षा और शांति प्रदान करता है। भगवान जाहरवीर जी को नागराज के रूप में पूजा जाता है, जो कि नागों और जहरीले जीवों से रक्षा करने वाले माने जाते हैं। इस प्रकार, चालीसा का पाठ करने से भक्तों को विभिन्न प्रकार की भयानक स्थितियों और संकटों से सुरक्षा मिलती है। इसके साथ ही, चालीसा की शक्ति से भक्तों के जीवन में शांति और संतुलन बना रहता है।

परिवार में सुख-शांति

श्री जाहरवीर चालीसा का पाठ परिवार के सभी सदस्य को एकजुट और सुखी बनाए रखने में सहायक होता है। परिवार में आपसी समझ, सहयोग और प्रेम की भावना को बढ़ावा देने के लिए चालीसा का पाठ किया जाता है। इससे घर में एक सकारात्मक और शांतिपूर्ण वातावरण बनता है और परिवार के सभी सदस्य मानसिक शांति का अनुभव करते हैं।

नैतिक और मानसिक बल

श्री जाहरवीर चालीसा का नियमित पाठ करने से व्यक्ति को नैतिक और मानसिक बल मिलता है। चालीसा के श्लोकों में भगवान जाहरवीर जी की वीरता और न्यायप्रियता का वर्णन है, जो भक्तों को अपने जीवन में साहस और शक्ति का अनुभव कराता है। यह चालीसा व्यक्ति को कठिन परिस्थितियों में आत्मविश्वास और धैर्य बनाए रखने में मदद करती है।

आध्यात्मिक मार्गदर्शन

श्री जाहरवीर चालीसा का पाठ भक्तों को आध्यात्मिक मार्गदर्शन प्रदान करता है। यह चालीसा भक्तों को जीवन के सही मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती है और उन्हें अपने उद्देश्य की प्राप्ति के लिए मार्गदर्शन करती है। इसके माध्यम से व्यक्ति अपने जीवन के लक्ष्य को समझने और उस पर सही दिशा में कार्य करने के लिए प्रेरित होता है।

सामाजिक और धार्मिक जागरूकता

श्री जाहरवीर चालीसा का पाठ सामाजिक और धार्मिक जागरूकता को भी बढ़ावा देता है। यह चालीसा न केवल व्यक्तिगत भक्ति को प्रोत्साहित करती है, बल्कि सामाजिक एकता और धार्मिक सहिष्णुता को भी बढ़ावा देती है। इसके पाठ से भक्तों में सामाजिक सेवा की भावना जागृत होती है और वे अपने समाज के प्रति अधिक जिम्मेदार और सजग बनते हैं।

आध्यात्मिक शांति का अनुभव

श्री जाहरवीर चालीसा का पाठ करने से भक्तों को आत्मिक शांति का अनुभव होता है। यह चालीसा मन और आत्मा को शांति और संतुलन प्रदान करती है। जब व्यक्ति जीवन की कठिनाइयों और तनावों से परेशान होता है, तब चालीसा का पाठ उसे मानसिक और आत्मिक शांति प्रदान करता है। यह शांति उसकी जीवनशैली को संतुलित करती है और उसे तनावमुक्त बनाती है।

श्री जाहरवीर चालीसा एक अत्यंत शक्तिशाली और प्रभावशाली साधन है जो भक्तों को अनेक लाभ प्रदान करती है। इसकी भक्ति, आध्यात्मिक उत्थान, स्वास्थ्य, समृद्धि, सुरक्षा, शांति, नैतिक बल, आध्यात्मिक मार्गदर्शन, और सामाजिक जागरूकता को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। यह चालीसा जीवन के विभिन्न पहलुओं को संतुलित करने और सुधारने में सहायक है, और भगवान जाहरवीर जी की कृपा से भक्तों के जीवन में सुख-शांति और समृद्धि का आगमन होता है।

इसलिए, यदि आप भी अपने जीवन में सुख-शांति और समृद्धि की प्राप्ति चाहते हैं, तो श्री जाहरवीर चालीसा का नियमित पाठ करें और इसके लाभों का अनुभव करें।


1. जाहरवीर बाबा किसका अवतार है?

जाहरवीर बाबा, जिन्हें गोगा जी या गोगा वीर के नाम से भी जाना जाता है, नागवंशी राजपूतों के लिए एक महत्वपूर्ण धार्मिक और ऐतिहासिक व्यक्तित्व हैं। वे नाग देवता के अवतार के रूप में पूजा जाते हैं और विशेष रूप से नागों और जहरीले जीवों से रक्षा करने के लिए प्रसिद्ध हैं। उनका जीवन और उनकी वीरता की कहानियाँ भारतीय लोककथाओं और धार्मिक ग्रंथों में समाहित हैं।

2. जाहरवीर बाबा का दिन कौन सा होता है?

जाहरवीर बाबा की पूजा मुख्य रूप से हर साल भाद्रपद मास की पूर्णिमा के दिन की जाती है। यह दिन ‘गोगा नवमी’ के रूप में मनाया जाता है। इस दिन विशेष रूप से जाहरवीर बाबा की पूजा, उपवास, और भजन कीर्तन किए जाते हैं, और उनके भक्त अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए विशेष आराधना करते हैं।

3. गोगा जी की पूजा क्यों की जाती है?

गोगा जी की पूजा विशेष रूप से उनकी चमत्कारी शक्तियों और उनके द्वारा नागों और जहरीले जीवों से रक्षा करने की क्षमता के कारण की जाती है। उन्हें ‘जाहरवीर’ भी कहा जाता है, और उनके भक्त उन्हें असामान्य संकटों और खतरनाक स्थितियों से बचाने वाले मानते हैं। गोगा जी की पूजा से भक्तों को सुरक्षा, समृद्धि, और शांति प्राप्त होती है।

4. गोगा जहर पीर की कहानी क्या है?

गोगा जहर पीर की कहानी एक प्रसिद्ध लोककथा है जिसमें गोगा जी ने अपने जीवन में कई अद्भुत चमत्कार किए। कहा जाता है कि एक बार, जब गोगा जी को अपने विरोधियों द्वारा जहरीला विष दिया गया, तो उन्होंने उसे पी लिया और बिना किसी नुकसान के अपने भक्तों को सुरक्षा प्रदान की। इस घटना ने उन्हें ‘जहर पीर’ का उपनाम दिलाया और उनके भक्तों के बीच उनकी दिव्यता और चमत्कारी शक्तियों की पुष्टि की।

5. जाहरवीर का बेटा कौन है?

जाहरवीर बाबा का बेटा गोगा जी महाराज के नाम से भी प्रसिद्ध है। उनके पुत्र की पूजा भी उनकी तरह ही की जाती है और उन्हें भी धार्मिक एवं सांस्कृतिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण माना जाता है। गोगा जी के पुत्र की पूजा विशेष अवसरों और त्योहारों पर की जाती है।

6. जाहरवीर बाबा की मृत्यु कैसे हुई थी?

जाहरवीर बाबा की मृत्यु के बारे में विभिन्न मान्यताएँ हैं। सामान्यतः, मान्यता है कि जाहरवीर बाबा ने एक अद्वितीय और दिव्य समाधि ली थी, जो उनकी शारीरिक मृत्यु के साथ-साथ उनकी आध्यात्मिक उपस्थिति का प्रतीक है। उनके भक्त मानते हैं कि उन्होंने आत्म-समर्पण और सेवा के मार्ग पर चलते हुए इस संसार से विदा ली और अब वे दिव्य रूप में अपने भक्तों की रक्षा और मार्गदर्शन कर रहे हैं।

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