Wednesday, January 28, 2026
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Shree Yantra – श्री यंत्र: धन, समृद्धि और शांति का प्रतीक 2024-25

By Dr. Hemlata | Reviewed by Vedic Scholar | Last Updated: January 2026 - This devotional text has been carefully verified against widely accepted traditional sources to preserve correct wording, pronunciation, and spiritual intent for daily recitation.
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श्री यंत्र (Shree Yantra) एक प्राचीन और दिव्य ज्यामितीय संरचना है, जिसे देवी लक्ष्मी का प्रतीक माना जाता है। इसे “यंत्रराज” यानी यंत्रों का राजा भी कहा जाता है। श्री यंत्र का उद्भव वेदों और उपनिषदों में मिलता है, और इसे सृष्टि की उत्पत्ति, स्थिरता और विनाश का प्रतीक माना जाता है। श्री यंत्र में नौ त्रिकोण होते हैं, जिनमें चार ऊपर की ओर और पाँच नीचे की ओर होते हैं। इन त्रिकोणों की संरचना से एक सितारे के आकार का यंत्र बनता है, जो देवी लक्ष्मी की शक्ति का प्रतीक है। श्री यंत्र को धन, समृद्धि, सुख और शांति की देवी लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए पूजा जाता है।

श्री यंत्र का उपयोग ध्यान, तांत्रिक साधना, वास्तु शास्त्र, और विभिन्न पूजा विधियों में किया जाता है। इसकी विशेष संरचना मानव जीवन में सकारात्मक ऊर्जा को आकर्षित करती है और सभी प्रकार की नकारात्मकता को दूर करती है। इसे घर या कार्यस्थल पर स्थापित करने से जीवन में धन, समृद्धि और शांति आती है। यह यंत्र न केवल भौतिक समृद्धि के लिए, बल्कि आध्यात्मिक उन्नति के लिए भी महत्वपूर्ण माना जाता है।

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श्री यंत्र के कई लाभ होते हैं जो इसे एक महत्वपूर्ण धार्मिक और आध्यात्मिक उपकरण बनाते हैं। इसकी स्थापना और पूजा करने से निम्नलिखित लाभ प्राप्त होते हैं:

  • धन और समृद्धि: श्री यंत्र को देवी लक्ष्मी का रूप माना जाता है, जो धन और समृद्धि की देवी हैं। इस यंत्र की स्थापना से घर में धन की वृद्धि होती है और आर्थिक स्थिति में सुधार आता है।
  • नकारात्मकता से मुक्ति: श्री यंत्र का नियमित पूजन करने से नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह होता है। यह घर में शांति और सुख का वातावरण बनाता है।
  • स्वास्थ्य में सुधार: श्री यंत्र के प्रभाव से मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य में सुधार होता है। यह तनाव, चिंता और मानसिक अस्थिरता को कम करता है।
  • आध्यात्मिक उन्नति: श्री यंत्र का ध्यान और पूजन करने से साधक की आध्यात्मिक उन्नति होती है। यह ध्यान में एकाग्रता और मानसिक शांति प्रदान करता है।
  • वास्तु दोष निवारण: श्री यंत्र वास्तु दोषों को दूर करने में मदद करता है। इसे घर में सही स्थान पर स्थापित करने से वास्तु दोषों का निवारण होता है और घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

श्री यंत्र की पूजा के दौरान एक विशेष मंत्र का उच्चारण किया जाता है, जो इसकी ऊर्जा को सक्रिय करता है। इस मंत्र का सही उच्चारण करने से मनोकामनाएँ पूरी होती हैं और देवी लक्ष्मी की कृपा प्राप्त होती है। श्री यंत्र के मंत्र को सिद्ध करने के लिए निम्नलिखित मंत्र का उच्चारण किया जाता है:

ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद श्रीं ह्रीं श्रीं ॐ महालक्ष्म्यै नमः।

इस मंत्र का नियमित जाप करने से धन और समृद्धि की प्राप्ति होती है और जीवन में सुख-शांति बनी रहती है। इस मंत्र को सुबह या शाम के समय, शुद्ध मन से उच्चारण करना चाहिए।

घर में श्री यंत्र स्थापित करने के लिए यह ध्यान देना आवश्यक है कि कौन सा श्री यंत्र आपके घर के लिए उपयुक्त होगा। विभिन्न प्रकार के श्री यंत्र होते हैं, लेकिन निम्नलिखित यंत्र घर में स्थापना के लिए सबसे उत्तम माने जाते हैं:

  • स्फटिक श्री यंत्र: स्फटिक (क्रिस्टल) से बना श्री यंत्र सबसे प्रभावी और शक्तिशाली माना जाता है। यह नकारात्मक ऊर्जा को दूर करता है और घर में शांति और समृद्धि लाता है। स्फटिक की शुद्ध और दिव्य ऊर्जा घर में सकारात्मकता को बढ़ाती है।
  • तांबे का श्री यंत्र: तांबे से बना श्री यंत्र भी काफी प्रभावी होता है। इसे घर या कार्यस्थल में स्थापित करने से आर्थिक स्थिति में सुधार आता है और समृद्धि की प्राप्ति होती है।
  • चांदी का श्री यंत्र: चांदी से बना श्री यंत्र स्थायी समृद्धि और सुख-शांति के लिए उत्तम माना जाता है। यह आर्थिक समृद्धि के साथ-साथ मानसिक शांति भी प्रदान करता है।

श्री यंत्र की छवि देखने पर यह एक जटिल और सुंदर ज्यामितीय संरचना के रूप में दिखाई देता है। इसमें नौ त्रिकोण होते हैं, जो एक साथ मिलकर एक केंद्रीय बिंदु (बिंदु) बनाते हैं। इस बिंदु को “बिन्दु” कहा जाता है, जो सृष्टि का प्रतीक है। त्रिकोणों का यह समूह देवी लक्ष्मी की शक्तियों और उनके आशीर्वादों का प्रतीक है। इसके चारों ओर एक वृताकार रेखा होती है, जिसे “भूपुर” कहा जाता है, जो भौतिक और आध्यात्मिक शक्ति का प्रतीक है। श्री यंत्र की छवि को ध्यान करते समय ध्यान केंद्रित करने के लिए उपयोग किया जाता है, और इसे घर में रखने से सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह होता है।


1. कौन सा श्री यंत्र रखना चाहिए?

श्री यंत्र को रखने से पहले यह जानना आवश्यक है कि आपके लिए कौन सा श्री यंत्र उपयुक्त होगा। घर में सकारात्मक ऊर्जा और समृद्धि बढ़ाने के लिए स्फटिक (क्रिस्टल) से बना श्री यंत्र सबसे उत्तम माना जाता है। स्फटिक की शुद्ध और शक्तिशाली ऊर्जा नकारात्मकता को दूर करती है और घर में शांति, सुख और समृद्धि का संचार करती है। इसके अलावा, तांबे या चांदी का श्री यंत्र भी अच्छे परिणाम दे सकता है। तांबे से बना यंत्र आर्थिक स्थिति में सुधार और समृद्धि प्रदान करता है, जबकि चांदी का यंत्र स्थायी शांति और सुख का प्रतीक है।

यदि आप श्री यंत्र को कार्यस्थल पर रखना चाहते हैं, तो स्फटिक या तांबे का श्री यंत्र सबसे बेहतर विकल्प हो सकता है। यह ध्यान देना आवश्यक है कि जिस यंत्र को आप घर या कार्यस्थल पर रख रहे हैं, वह शुद्ध और दोषमुक्त हो। इसके अलावा, यंत्र को नियमित रूप से पूजा और मंत्र जाप से सक्रिय रखना भी आवश्यक होता है ताकि इसकी ऊर्जा बनी रहे और आपको इसका पूर्ण लाभ मिले।

2. श्री यंत्र कितने प्रकार के होते हैं?

श्री यंत्र मुख्य रूप से तीन प्रकार के होते हैं, जो सामग्री और ऊर्जा के आधार पर अलग-अलग प्रभाव डालते हैं।

स्फटिक श्री यंत्र: यह क्रिस्टल से बना होता है और सबसे शुद्ध और शक्तिशाली माना जाता है। यह नकारात्मक ऊर्जा को दूर करता है और घर में सकारात्मकता लाता है। स्फटिक श्री यंत्र मानसिक शांति और ध्यान केंद्रित करने में मदद करता है।
तांबे का श्री यंत्र: तांबे से बने श्री यंत्र को आर्थिक उन्नति के लिए बहुत प्रभावी माना जाता है। इसे घर या कार्यस्थल पर स्थापित करने से समृद्धि, सफलता और शांति आती है।
चांदी का श्री यंत्र: चांदी से बना श्री यंत्र स्थायी समृद्धि और शांति के लिए जाना जाता है।

इसका उपयोग घर में दीर्घकालिक शांति और सुख की प्राप्ति के लिए किया जाता है।
इनके अलावा, श्री यंत्र विभिन्न आकार और धातुओं में भी उपलब्ध होते हैं, जैसे सोना, पीतल आदि। कौन सा यंत्र आपके लिए उचित है, यह आपकी आवश्यकताओं और व्यक्तिगत ऊर्जा के अनुसार निर्धारित किया जा सकता है।

3. श्री यंत्र कब खरीदना चाहिए?

श्री यंत्र खरीदने के लिए विशेष दिनों को शुभ माना जाता है। यह यंत्र देवी लक्ष्मी और धन, समृद्धि की प्रतीक है, इसलिए इसे विशेष पर्वों और तिथियों पर खरीदना ज्यादा लाभकारी माना जाता है। सबसे अच्छा समय है दीपावली, अक्षय तृतीया, धनतेरस, और नवरात्रि। इन दिनों में देवी लक्ष्मी की पूजा विशेष रूप से की जाती है और श्री यंत्र खरीदना विशेष लाभकारी माना जाता है।

इसके अलावा, किसी भी शुक्ल पक्ष की पंचमी, अष्टमी, या पूर्णिमा के दिन श्री यंत्र खरीदना शुभ होता है। इन दिनों में खरीदने से यंत्र की ऊर्जा और प्रभाव बढ़ जाता है।

खरीदने के समय ध्यान रखें कि श्री यंत्र शुद्ध धातु या स्फटिक से बना हो। यदि आप श्री यंत्र को ऑनलाइन या किसी दुकान से खरीद रहे हैं, तो सुनिश्चित करें कि वह त्रुटिहीन और सटीक हो। यंत्र को खरीदने के बाद तुरंत उसकी पूजा करके उसे सक्रिय करना चाहिए। यह सुनिश्चित करता है कि यंत्र आपके घर में सकारात्मक ऊर्जा लाने में सक्षम हो।

4. श्री यंत्र का ध्यान कैसे करें?

श्री यंत्र का ध्यान करने से मानसिक शांति और आध्यात्मिक उन्नति प्राप्त होती है। इसके लिए सबसे पहले एक शांत और स्वच्छ स्थान चुनें। ध्यान करने से पहले शरीर और मन को शुद्ध करने के लिए स्नान कर लें। यंत्र को किसी साफ कपड़े या चौकी पर रखें, ताकि आप आसानी से इसे देख सकें।

ध्यान के लिए सबसे पहले श्री यंत्र पर ध्यान केंद्रित करें। श्री यंत्र की ज्यामितीय संरचना को ध्यान से देखें और उसकी हर रेखा और बिंदु पर ध्यान केंद्रित करें। यह ध्यान केंद्रित करने की क्षमता को बढ़ाता है। इसके बाद, आप श्री यंत्र के मंत्र का जाप कर सकते हैं, जैसे:

ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद श्रीं ह्रीं श्रीं ॐ महालक्ष्म्यै नमः।

इस मंत्र का उच्चारण करते हुए श्री यंत्र के बिंदु (बिन्दु) पर ध्यान केंद्रित करें। मन को शांत और स्थिर रखें, और श्री यंत्र की ऊर्जा को अनुभव करें। ध्यान के समय नकारात्मक विचारों को दूर रखें और अपने मन में सकारात्मक विचारों को स्थान दें। नियमित रूप से श्री यंत्र का ध्यान करने से मानसिक शांति, ध्यान की एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त होती है।

5. घर के मंदिर में कौन सा यंत्र रखना चाहिए?

घर के मंदिर में श्री यंत्र रखना अत्यंत शुभ और लाभकारी माना जाता है। मंदिर में रखने के लिए स्फटिक श्री यंत्र सबसे उत्तम विकल्प है, क्योंकि यह शुद्धता और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक है। इसके अलावा, आप तांबे या चांदी से बने श्री यंत्र को भी मंदिर में स्थापित कर सकते हैं, जो घर में शांति और समृद्धि का संचार करता है।

मंदिर में श्री यंत्र को स्थापित करते समय ध्यान रखें कि यह सही दिशा में रखा हो। इसे पूजा स्थल के उत्तर-पूर्वी कोने में रखना शुभ होता है।

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Hemlata – Experienced Hindu Devotee and Devotional Text Expert
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