Saturday, February 14, 2026
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ॐ जय जय शनि महाराज: श्री शनिदेव आरती (Shani Aarti: Om Jai Jai Shri Shani Maharaj)

By Dr. Hemlata | Reviewed by Vedic Scholar | Last Updated: January 2026 - This devotional text has been carefully verified against widely accepted traditional sources to preserve correct wording, pronunciation, and spiritual intent for daily recitation.
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ओम जय जय श्री शनि महाराज (Shani Aarti) भगवान शनि को समर्पित एक भक्तिपूर्ण आरती है, जो हिंदू ज्योतिष में नौ प्राथमिक खगोलीय प्राणियों में से एक हैं, जिन्हें नवग्रह के रूप में जाना जाता है। भगवान शनि शनि ग्रह के अवतार हैं और न्याय, अनुशासन और कर्म पर उनके प्रभाव के लिए पूजनीय हैं।

आरती ओम जय जय श्री शनि महाराज भगवान शनि की स्तुति में गाया जाने वाला एक प्रार्थना गीत है, जिसमें उनका आशीर्वाद और सुरक्षा मांगी जाती है। इसे अक्सर शनि जयंती के दौरान गाया जाता है, जो भगवान शनि की जयंती है, साथ ही शनिवार को भी, जो पारंपरिक रूप से उनकी पूजा के लिए समर्पित दिन है।

आरती के बोल भगवान शनि के प्रति भक्ति और श्रद्धा व्यक्त करते हैं, उनकी शक्ति को स्वीकार करते हैं और बाधाओं को दूर करने, ग्रहों की गड़बड़ी के प्रभावों को कम करने और धार्मिकता और समृद्धि का जीवन जीने के लिए उनकी कृपा मांगते हैं। इस आरती के माध्यम से, भक्त भगवान शनि की दया और मार्गदर्शन की आशा करते हुए अपने सम्मान को व्यक्त करते हैं और अपने गलत कामों के लिए क्षमा मांगते हैं।



  • हिंदी / संस्कृत
  • English

|| श्री शनिदेव आरती ||

ॐ जय जय शनि महाराज,
स्वामी जय जय शनि महाराज ।
कृपा करो हम दीन रंक पर,
दुःख हरियो प्रभु आज ॥
॥ ॐ जय जय शनि महाराज ॥

सूरज के तुम बालक होकर,
जग में बड़े बलवान ।
सब देवताओं में तुम्हारा,
प्रथम मान है आज ॥
॥ ॐ जय जय शनि महाराज ॥

विक्रमराज को हुआ घमण्ड फिर,
अपने श्रेष्ठन का ।
चकनाचूर किया बुद्धि को,
हिला दिया सरताज ॥
॥ ॐ जय जय शनि महाराज ॥

प्रभु राम और पांडवजी को,
भेज दिया बनवास ।
कृपा होय जब तुम्हारी स्वामी,
बचाई उनकी लॉज ॥
॥ ॐ जय जय शनि महाराज ॥

शुर-संत राजा हरीशचंद्र का,
बेच दिया परिवार ।
पात्र हुए जब सत परीक्षा में,
देकर धन और राज ॥
॥ ॐ जय जय शनि महाराज ॥

गुरुनाथ को शिक्षा फाँसी की,
मन के गरबन को ।
होश में लाया सवा कलाक में,
फेरत निगाह राज ॥
॥ ॐ जय जय शनि महाराज ॥

माखन चोर वो कृष्ण कन्हाइ,
गैयन के रखवार ।
कलंक माथे का धोया उनका,
खड़े रूप विराज ॥
॥ ॐ जय जय शनि महाराज ॥

देखी लीला प्रभु आया चक्कर,
तन को अब न सतावे ।
माया बंधन से कर दो हमें,
भव सागर ज्ञानी राज ॥
॥ ॐ जय जय शनि महाराज ॥

मैं हूँ दीन अनाथ अज्ञानी,
भूल भई हमसे ।
क्षमा शांति दो नारायण को,
प्रणाम लो महाराज ॥
॥ ॐ जय जय शनि महाराज ॥

ॐ जय जय शनि महाराज,
स्वामी जय-जय शनि महाराज ।
कृपा करो हम दीन रंक पर,
दुःख हरियो प्रभु आज ॥
॥ ॐ जय जय शनि महाराज ॥

|| Shri Shani Aarti ||

Om Jay Jay Shani Maharaj,
Swami Jay Jay Shani Maharaj.
Kripa karo hum dein rank par,
Dukh hariyo Prabhu aaj.
Om Jay Jay Shani Maharaj…

Suraj ke tum balak hokar,
Jag mein bade balwan.
Sab devtaon mein tumhara,
Pratham maan hai aaj.
Om Jay Jay Shani Maharaj…

Vikramraj ko hua ghamand phir,
Apne shreshthn ka.
Chaknachur kiya buddhi ko,
Hila diya sartaj.
Om Jay Jay Shani Maharaj…

Prabhu Ram aur Pandavji ko,
Bhej diya banvaas.
Kripa hoye jab tumhari Swami,
Bachai unki laaj.
Om Jay Jay Shani Maharaj…

Shur-sant Raja Harishchandra ka,
Bech diya parivar.
Patra hue jab sat pareeksha mein,
Dekar dhan aur raj.
Om Jay Jay Shani Maharaj…

Gurunath ko shiksha faansi ki,
Man ke garban ko.
Hosh mein laya sava kalak mein,
Ferat nigaah raj.
Om Jay Jay Shani Maharaj…

Makhan chor wo Krishna Kanhai,
Gaiyan ke rakhwaar.
Kalank mathe ka dhoya unka,
Khade roop viraj.
Om Jay Jay Shani Maharaj…

Dekhi leela Prabhu aaya chakkar,
Tan ko ab na satawe.
Maya bandhan se kar do hamein,
Bhav sagar gyaani raj.
Om Jay Jay Shani Maharaj…

Main hoon deen anath agyaani,
Bhool bhai hamaase.
Kshama shaanti do Narayan ko,
Pranaam lo Maharaj.
Om Jay Jay Shani Maharaj…

Om Jay Jay Shani Maharaj,
Swami Jay Jay Shani Maharaj.
Kripa karo hum dein rank par,
Dukh hariyo Prabhu aaj.
Om Jay Jay Shani Maharaj…


ॐ जय जय शनि महाराज: श्री शनिदेव आरती के लाभ

शनि महाराज की आरती “ॐ जय जय शनि महाराज: श्री शनिदेव आरती” एक महत्वपूर्ण पूजा अर्चना है जो शनि ग्रह से संबंधित धार्मिक कार्यों में की जाती है। शनि देवता को न्याय का देवता माना जाता है, और उनकी पूजा का उद्देश्य जीवन में न्याय, कर्म और दंड के सिद्धांतों को समझना और अपने कर्मों को सुधारना होता है। इस आरती के कई लाभ होते हैं, जिनकी चर्चा हम यहाँ विस्तार से करेंगे:

शनि के प्रभाव से मुक्ति

शनि ग्रह का प्रभाव व्यक्ति के जीवन में गंभीर परिणाम ला सकता है, जो व्यक्ति के कर्मों पर निर्भर करता है। शनि की आरती करने से शनि ग्रह के दुष्प्रभावों को कम किया जा सकता है। यह आरती शनि देव को प्रसन्न करने का एक साधन है, जिससे शनि की कृपा प्राप्त होती है और उनके द्वारा दंडित किए जाने की संभावना कम हो जाती है।

पारिवारिक और आर्थिक समस्याओं का समाधान

शनि देवता की आरती करने से पारिवारिक और आर्थिक समस्याओं का समाधान संभव होता है। यह आरती विशेष रूप से उन लोगों के लिए लाभकारी होती है जो वित्तीय संकट या पारिवारिक कलह से जूझ रहे हैं। शनि देवता की पूजा से धन की कमी और पारिवारिक संघर्षों में सुधार होता है, और जीवन में सुख-शांति बनी रहती है।

स्वास्थ्य में सुधार

शनि देवता की आरती करने से स्वास्थ्य में सुधार की संभावनाएँ भी होती हैं। शनि के दुष्प्रभावों से उत्पन्न बीमारियों और शारीरिक समस्याओं से राहत मिल सकती है। आरती के माध्यम से मानसिक शांति प्राप्त होती है, जो स्वास्थ्य को बेहतर बनाती है।

कर्मों का फल

शनि देवता न्याय के प्रतीक हैं और उनके द्वारा किए गए कर्मों का फल दिया जाता है। जब व्यक्ति शनि महाराज की आरती करता है, तो वह अपने कर्मों की समीक्षा करता है और सकारात्मक कर्मों की ओर बढ़ने की कोशिश करता है। यह आरती व्यक्ति को अपने कर्मों के फल को समझने और सुधारने की प्रेरणा देती है।

मानसिक शांति और संतुलन

आरती के दौरान उच्च मनोबल और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है, जो मानसिक शांति और संतुलन को बनाए रखने में मदद करता है। शनि की आरती करने से व्यक्ति के मन में संतुलन बना रहता है, और मानसिक तनाव दूर होता है। यह आरती एक प्रकार की ध्यान साधना का भी कार्य करती है, जिससे मन को शांति मिलती है।

आध्यात्मिक उन्नति

शनि देवता की आरती करने से आध्यात्मिक उन्नति होती है। यह व्यक्ति को अपने आत्मा की गहराई को समझने और जीवन के उद्देश्यों को पहचानने में मदद करती है। शनि महाराज की पूजा से व्यक्ति का आध्यात्मिक ज्ञान बढ़ता है और आत्मा के साथ एक गहरा संबंध स्थापित होता है।

धैर्य और साहस की वृद्धि

शनि ग्रह को धैर्य और साहस का प्रतीक माना जाता है। जब व्यक्ति शनि देवता की आरती करता है, तो वह धैर्य और साहस को विकसित करने की दिशा में कदम बढ़ाता है। यह आरती व्यक्ति को जीवन की कठिनाइयों का सामना करने के लिए शक्ति और साहस प्रदान करती है।

संस्कार और आचरण में सुधार

शनि देवता की पूजा और आरती करने से व्यक्ति के आचरण और संस्कार में सुधार होता है। शनि के प्रभाव से व्यक्ति अपने जीवन में नैतिकता और ईमानदारी को अपनाने की प्रेरणा प्राप्त करता है। यह आरती व्यक्ति को जीवन के सही मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती है।

सामाजिक सम्मान और प्रतिष्ठा

शनि देवता की आरती करने से सामाजिक सम्मान और प्रतिष्ठा प्राप्त करने में भी मदद मिलती है। व्यक्ति की सामाजिक स्थिति में सुधार होता है और समाज में उसकी मान्यता बढ़ती है। यह आरती समाज में एक अच्छा स्थान बनाने में सहायक होती है।

प्रेरणा और उत्साह की प्राप्ति

शनि देवता की आरती से प्रेरणा और उत्साह प्राप्त होता है। यह आरती व्यक्ति को अपने लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए प्रेरित करती है और जीवन के प्रति उत्साह बढ़ाती है। शनि देवता की आरती के दौरान मन में सकारात्मक विचार आते हैं, जो जीवन को प्रेरणादायक बनाते हैं।

“ॐ जय जय शनि महाराज: श्री शनिदेव आरती” एक शक्तिशाली धार्मिक क्रिया है जो शनि देवता की कृपा और आशीर्वाद को प्राप्त करने का एक प्रभावी तरीका है। इसके माध्यम से व्यक्ति न केवल शनि के दुष्प्रभावों से मुक्ति प्राप्त कर सकता है, बल्कि जीवन के विभिन्न पहलुओं में सुधार भी देख सकता है। यह आरती मानसिक शांति, आध्यात्मिक उन्नति, और सामाजिक सम्मान प्राप्त करने में सहायक होती है। नियमित रूप से इस आरती को करने से जीवन में सुख, शांति, और संतुलन बना रहता है, और व्यक्ति अपने कर्मों को सुधारने की दिशा में कदम बढ़ा सकता है।


शनि देव का मूल मंत्र क्या है?

शनि देव का मूल मंत्र है:

“ॐ शम शनैश्चराय नमः”

यह मंत्र शनि देव की पूजा और उनके आशीर्वाद को प्राप्त करने के लिए अत्यंत प्रभावशाली माना जाता है।

कौन सा शनि मंत्र शक्तिशाली है?

एक शक्तिशाली शनि मंत्र है:

“ॐ शनैश्चराय नमः”

इसके अलावा, “ॐ शम शनैश्चराय नमः” भी शक्तिशाली माना जाता है। इन मंत्रों का जाप नियमित रूप से करने से शनि ग्रह के प्रभाव को कम किया जा सकता है और जीवन में शांति प्राप्त की जा सकती है।

शनिदेव को खुश करने का कौन सा मंत्र है?

शनिदेव को खुश करने के लिए निम्नलिखित मंत्रों का जाप किया जा सकता है:

“ॐ शं शनैश्चराय नमः”
“ॐ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः”

इन मंत्रों का जाप विशेष रूप से शनिवार के दिन और शनि व्रत के समय किया जाता है।

शनि देव को जल चढ़ाते समय कौन सा मंत्र बोला जाता है?

शनि देव को जल चढ़ाते समय निम्नलिखित मंत्र बोला जा सकता है:

“ॐ शनैश्चराय नमः”

जल अर्पित करते समय इस मंत्र का जाप करने से शनि देव की कृपा प्राप्त होती है और ग्रह की समस्याओं में राहत मिलती है।

शनि देव से क्षमा कैसे मांगे?

शनि देव से क्षमा प्राप्त करने के लिए निम्नलिखित उपाय किए जा सकते हैं:

मंत्र जाप: नियमित रूप से “ॐ शं शनैश्चराय नमः” मंत्र का जाप करें।

दान: शनिवार के दिन गरीबों को दान करें और पीपल के पेड़ की पूजा करें।

व्रत: शनिवार के दिन व्रत रखें और शनि देव की पूजा करें।

माफी: अपने कर्मों की सफाई के लिए पश्चाताप करें और नये कर्मों की दिशा सही करें।

सत्यनिष्ठा: अपने कार्यों में ईमानदारी और सत्यनिष्ठा बनाए रखें, जिससे शनि देव की कृपा प्राप्त हो।

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Hemlata is a practicing Hindu devotee with over 15 years of experience in daily recitation of Chalisas, Aartis, Mantras, and Stotras. She has studied devotional texts extensively and is committed to preserving authentic versions of traditional hymns. The Text on this page has been carefully verified with commonly accepted temple and devotional editions to ensure accuracy, readability, and adherence to traditional practice.

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