Wednesday, January 28, 2026
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नर्मदा चालीसा (Narmada Chalisa PDF)

By Dr. Hemlata | Reviewed by Vedic Scholar | Last Updated: January 2026 - This devotional text has been carefully verified against widely accepted traditional sources to preserve correct wording, pronunciation, and spiritual intent for daily recitation.
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नर्मदा चालीसा (Narmada Chalisa Pdf) एक भक्ति स्तोत्र है जो माँ नर्मदा को समर्पित है। माँ नर्मदा, जो नर्मदा नदी का देवता रूप मानी जाती हैं, को इस चालीसा के माध्यम से भक्तों द्वारा श्रद्धा और भक्ति के साथ स्मरण किया जाता है। नर्मदा चालीसा माँ नर्मदा की महिमा, उनकी दिव्यता और उनके आशीर्वाद का वर्णन करती है।

यह चालीसा उन भक्तों के लिए विशेष महत्व रखती है जो नर्मदा नदी के तट पर निवास करते हैं या जो माँ नर्मदा की पूजा और अराधना करते हैं। नर्मदा चालीसा के पाठ से भक्तों को मानसिक शांति, आध्यात्मिक शुद्धता और माँ नर्मदा की कृपा प्राप्त होती है।

इस चालीसा में माँ नर्मदा की उत्पत्ति, उनके विभिन्न रूपों, और उनके द्वारा की गई विभिन्न लीलाओं का वर्णन किया गया है। नर्मदा चालीसा के पाठ से भक्त माँ नर्मदा की दिव्यता का अनुभव करते हैं और उनके जीवन में सकारात्मकता और समृद्धि का संचार होता है।

नर्मदा चालीसा का नियमित पाठ करने से भक्तों को आंतरिक शांति मिलती है और वे माँ नर्मदा की अनुकंपा और आशीर्वाद से परिपूर्ण होते हैं। विशेष रूप से नर्मदा जयंती और अन्य पवित्र अवसरों पर इसका पाठ अत्यंत फलदायी माना जाता है।


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  • हिंदी / संस्कृत
  • English

|| श्री नर्मदा चालीसा – जय जय नर्मदा भवानी ||


॥ दोहा॥
देवि पूजित, नर्मदा,
महिमा बड़ी अपार ।
चालीसा वर्णन करत,
कवि अरु भक्त उदार॥

इनकी सेवा से सदा,
मिटते पाप महान ।
तट पर कर जप दान नर,
पाते हैं नित ज्ञान ॥

॥ चौपाई ॥
जय-जय-जय नर्मदा भवानी,
तुम्हरी महिमा सब जग जानी ।

अमरकण्ठ से निकली माता,
सर्व सिद्धि नव निधि की दाता ।

कन्या रूप सकल गुण खानी,
जब प्रकटीं नर्मदा भवानी ।

सप्तमी सुर्य मकर रविवारा,
अश्वनि माघ मास अवतारा ॥4॥

वाहन मकर आपको साजैं,
कमल पुष्प पर आप विराजैं ।

ब्रह्मा हरि हर तुमको ध्यावैं,
तब ही मनवांछित फल पावैं ।

दर्शन करत पाप कटि जाते,
कोटि भक्त गण नित्य नहाते ।

जो नर तुमको नित ही ध्यावै,
वह नर रुद्र लोक को जावैं ॥8॥

मगरमच्छा तुम में सुख पावैं,
अंतिम समय परमपद पावैं ।

मस्तक मुकुट सदा ही साजैं,
पांव पैंजनी नित ही राजैं ।

कल-कल ध्वनि करती हो माता,
पाप ताप हरती हो माता ।

पूरब से पश्चिम की ओरा,
बहतीं माता नाचत मोरा ॥12॥

शौनक ऋषि तुम्हरौ गुण गावैं,
सूत आदि तुम्हरौं यश गावैं ।

शिव गणेश भी तेरे गुण गवैं,
सकल देव गण तुमको ध्यावैं ।

कोटि तीर्थ नर्मदा किनारे,
ये सब कहलाते दु:ख हारे ।

मनोकमना पूरण करती,
सर्व दु:ख माँ नित ही हरतीं ॥16॥

कनखल में गंगा की महिमा,
कुरुक्षेत्र में सरस्वती महिमा ।

पर नर्मदा ग्राम जंगल में,
नित रहती माता मंगल में ।

एक बार कर के स्नाना,
तरत पिढ़ी है नर नारा ।

मेकल कन्या तुम ही रेवा,
तुम्हरी भजन करें नित देवा ॥20॥

जटा शंकरी नाम तुम्हारा,
तुमने कोटि जनों को है तारा ।

समोद्भवा नर्मदा तुम हो,
पाप मोचनी रेवा तुम हो ।

तुम्हरी महिमा कहि नहीं जाई,
करत न बनती मातु बड़ाई ।

जल प्रताप तुममें अति माता,
जो रमणीय तथा सुख दाता ॥24॥

चाल सर्पिणी सम है तुम्हारी,
महिमा अति अपार है तुम्हारी ।

तुम में पड़ी अस्थि भी भारी,
छुवत पाषाण होत वर वारि ।

यमुना मे जो मनुज नहाता,
सात दिनों में वह फल पाता ।

सरस्वती तीन दीनों में देती,
गंगा तुरत बाद हीं देती ॥28॥

पर रेवा का दर्शन करके
मानव फल पाता मन भर के ।

तुम्हरी महिमा है अति भारी,
जिसको गाते हैं नर-नारी ।

जो नर तुम में नित्य नहाता,
रुद्र लोक मे पूजा जाता ।

जड़ी बूटियां तट पर राजें,
मोहक दृश्य सदा हीं साजें ॥32॥

वायु सुगंधित चलती तीरा,
जो हरती नर तन की पीरा ।

घाट-घाट की महिमा भारी,
कवि भी गा नहिं सकते सारी ।

नहिं जानूँ मैं तुम्हरी पूजा,
और सहारा नहीं मम दूजा ।

हो प्रसन्न ऊपर मम माता,
तुम ही मातु मोक्ष की दाता ॥36॥

जो मानव यह नित है पढ़ता,
उसका मान सदा ही बढ़ता ।

जो शत बार इसे है गाता,
वह विद्या धन दौलत पाता ।

अगणित बार पढ़ै जो कोई,
पूरण मनोकामना होई ।

सबके उर में बसत नर्मदा,
यहां वहां सर्वत्र नर्मदा ॥40॥

॥ दोहा ॥
भक्ति भाव उर आनि के,
जो करता है जाप ।

माता जी की कृपा से,
दूर होत संताप॥


॥ इति श्री नर्मदा चालीसा ॥

|| Narmada Chalisa PDF ||

॥ Doha ॥
Devi Pujita Narmada,Mahima Badi Apara।
Chalisa Varnana Karata,Kavi Aru Bhakta Udara॥

Inaki Seva Se Sada,Mitate Papa Mahana।
Tata Para Kara Japa Dana Nara,Pate Hain Nita Gyana॥

॥ Chaupai ॥
Jai-Jai-Jai Narmada Bhavani।Tumhari Mahima Saba Jaga Jani॥
Amarakantha Se Nikalin Mata।Sarva Siddhi Nava Nidhi Ki Data॥

Kanya Rupa Sakala Guna Khani।Jaba Prakatin Narmada Bhavani॥
Saptami Surya Makara Ravivara।Ashwani Magha Masa Avatara॥

Vahana Makara Apako Sajain।Kamala Pushpa Para Apa Virajain॥
Brahma Hari Hara Tumako Dhyavain।Taba Hi Manavanchhita Phala Pavain॥

Darshana Karata Papa Kati Jate।Koti Bhakta Gana Nitya Nahate॥
Jo Nara Tumako Nita Hi Dhyavai।Vaha Nara Rudra Loka Ko Javain॥

Magaramachchha Tuma Mein Sukha Pavain।Antima Samaya Paramapada Pavain॥
Mastaka Mukuta Sada Hi Sajain।Panva Painjani Nita Hi Rajain॥

Kala-Kala Dhvani Karati Ho Mata।Papa Tapa Harati Ho Mata॥
Puraba Se Pashchima Ki Ora।Bahatin Mata Nachata Mora॥

Shaunaka Rishi Tumhrau Guna Gavain।Suta Adi Tumharau Yash Gavain॥
Shiva Ganesha Bhi Tere Guna Gavain।Sakala Deva Gana Tumako Dhyavain॥

Koti Tirtha Narmada Kinare।Ye Saba Kahalate Duhkha Hare॥
Manokamana Purana Karati।Sarva Duhkha Ma Nita Hi Haratin॥

Kanakhala Mein Ganga Ki Mahima।Kurukshetra Mein Saraswati Mahima॥
Para Narmada Grama Jangala Mein।Nita Rahati Mata Mangal Mein॥

Eka Bara Karake Asanana।Tarata Pidhi Hai Nara Nara॥
Mekala Kanya Tuma Hi Reva।Tumhari Bhajana Karein Nita Deva॥

Jata Shankari Nama Tumhara।Tumane Koti Janon Ko Tara॥
Samodbhava Narmada Tum Ho।Papa Mochani Reva Tuma Ho॥

Tuma Mahima Kahi Nahin Jai।Karata Na Banati Matu Badai॥
Jala Pratapa Tumamen Ati Mata।Jo Ramaniya Tatha Sukha Data॥

Chala Sarpini Sama Hai Tumhari।Mahima Ati Apara Hai Tumhari॥
Tuma Mein Padi Asthi Bhi Bhari।Chuvata Pashan Hota Vara Vari॥

Yamuna Me Jo Manuja Nahata।Sata Dinon Mein Vaha Phala Pata॥
Saraswati Tina Dinon Mein Deti।Ganga Turata Bada Hi Deti॥

Para Reva Ka Darshana Karake।Manava Phala Pata Mana Bhara Ke॥
Tumhari Mahima Hai Ati Bhari।Jisko Gate Hain Nara-Nari॥

Jo Nara Tuma Mein Nitya Nahata।Rudra Loka Me Puja Jata॥
Jadi Butiyan Tata Para Rajein।Mohaka Drishya Sada Hi Sajein॥

Vayu Sugandhita Chalati Tira।Jo Harati Nara Tana Ki Pira॥
Ghata-Ghata Ki Mahima Bhari।Kavi Bhi Ga Nahin Sakate Sari॥

Nahin Janun Main Tumhari Puja।Aura Sahara Nahin Mama Duja॥
Ho Prasanna Upara Mama Mata।Tuma Hi Matu Moksha Ki Data॥

Jo Manava Yaha Nita Hai Padhta।Uska Mana Sada Hi Badhata॥
Jo Shata Bara Ise Hai Gata।Vaha Vidya Dhana Daulata Pata॥

Aganita Bara Padhai Jo Koi।Purana Manokamana Hoi॥
Sabake Ura Mein Basata Narmada।Yaham Vaham Sarvatra Narmada॥

॥ Doha ॥
Bhakti Bhava Ura Ani Ke,Jo Karata Hai Japa।
Mata Ji Ki Kripa Se,Dura Hota Santapa॥


नर्मदा चालीसा के लाभ

नर्मदा चालीसा, जिसे ‘नर्मदा देवी चालीसा’ भी कहा जाता है, हिन्दू धर्म के महत्वपूर्ण भजन और स्तोत्रों में से एक है। यह चालीसा माँ नर्मदा के प्रति भक्तों की भक्ति और श्रद्धा को प्रकट करने का एक सशक्त साधन है। इसे 40 श्लोकों (चालीसा) के रूप में लिखा गया है, जिनके माध्यम से माँ नर्मदा की महिमा और उनके गुणों का वर्णन किया गया है। इस लेख में हम नर्मदा चालीसा के लाभों पर विस्तृत चर्चा करेंगे।

नर्मदा चालीसा के लाभ:

  1. आध्यात्मिक उन्नति:नर्मदा चालीसा का नियमित पाठ आध्यात्मिक उन्नति में सहायक होता है। इसमें माँ नर्मदा की महिमा का वर्णन किया गया है जो भक्तों को ध्यान और साधना में सहयोग करता है। यह चालीसा श्रद्धा और भक्ति को बढ़ावा देती है, जिससे व्यक्ति की आध्यात्मिक यात्रा में सहारा मिलता है।
  2. मन की शांति:नर्मदा चालीसा के पाठ से मन को शांति और स्थिरता मिलती है। माँ नर्मदा के नाम का जप और स्तुति मन को शांति प्रदान करती है और मानसिक तनाव को दूर करने में मदद करती है। यह पाठ दिनभर की व्यस्तता और तनावपूर्ण स्थिति से बाहर निकलने का एक अच्छा उपाय है।
  3. समस्याओं का समाधान:नर्मदा चालीसा का नियमित पाठ जीवन की समस्याओं का समाधान करने में सहायक हो सकता है। भक्तों का मानना है कि यह चालीसा आर्थिक, पारिवारिक और स्वास्थ्य समस्याओं को दूर करने में प्रभावी होती है। माँ नर्मदा की कृपा से कई भक्तों ने अपनी समस्याओं का समाधान पाया है।
  4. सुख और समृद्धि:नर्मदा चालीसा के पाठ से घर में सुख और समृद्धि बनी रहती है। यह माना जाता है कि माँ नर्मदा के आशीर्वाद से जीवन में सुख-शांति, धन और ऐश्वर्य का आगमन होता है। इस चालीसा के पाठ से घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और आर्थिक समृद्धि की संभावना बढ़ जाती है।
  5. स्वास्थ्य लाभ:नियमित नर्मदा चालीसा के पाठ से स्वास्थ्य लाभ भी हो सकता है। यह चालीसा मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में सहायक होती है। भक्तों का कहना है कि इस पाठ से शरीर में ऊर्जा और स्फूर्ति बनी रहती है, जो स्वस्थ जीवन के लिए आवश्यक है।
  6. कर्म सुधार:नर्मदा चालीसा का पाठ व्यक्ति के कर्मों को सुधारने में भी सहायक होता है। इसके माध्यम से व्यक्ति अपने पाप कर्मों से मुक्ति प्राप्त कर सकता है और पुण्य के रास्ते पर अग्रसर हो सकता है। यह चालीसा आत्म सुधार और कर्म सुधार के लिए एक महत्वपूर्ण साधन है।
  7. धार्मिक और सांस्कृतिक जागरूकता:नर्मदा चालीसा का पाठ धार्मिक और सांस्कृतिक जागरूकता को बढ़ावा देता है। यह चालीसा माँ नर्मदा की महिमा और उनके आशीर्वाद की कहानी को बताती है, जो भक्तों को हिन्दू धर्म और संस्कृति के प्रति जागरूक करती है। यह धार्मिक अनुशासन और सांस्कृतिक परंपराओं को बनाए रखने में सहायक होती है।
  8. भक्ति और श्रद्धा की वृद्धि:नर्मदा चालीसा भक्ति और श्रद्धा को बढ़ावा देती है। इसके पाठ से भक्तों की नर्मदा माता के प्रति भक्ति और प्रेम में वृद्धि होती है। यह चालीसा भक्तों को भगवान के प्रति एक गहरी श्रद्धा और विश्वास के साथ जोड़े रखती है।
  9. आध्यात्मिक शक्ति का संचार:नर्मदा चालीसा के पाठ से आध्यात्मिक शक्ति का संचार होता है। यह चालीसा नर्मदा माता की दिव्य ऊर्जा को भक्तों तक पहुँचाने का एक माध्यम है। इस शक्ति के प्रभाव से व्यक्ति अपने जीवन में आध्यात्मिक उन्नति और सुख-शांति प्राप्त कर सकता है।
  10. सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह:नर्मदा चालीसा के पाठ से घर और परिवेश में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह होता है। यह चालीसा नकारात्मकता को दूर करने और सकारात्मकता को बढ़ावा देने में सहायक होती है। यह घर के वातावरण को शांत और सुखद बनाने में मदद करती है।
  11. सामाजिक और पारिवारिक संबंधों में सुधार:नर्मदा चालीसा का पाठ सामाजिक और पारिवारिक संबंधों में सुधार लाने में भी सहायक होता है। यह चालीसा पारिवारिक सदस्यों के बीच प्रेम और सामंजस्य को बढ़ावा देती है और पारिवारिक जीवन को सुखमय बनाती है।
  12. संकट से मुक्ति:नर्मदा चालीसा का नियमित पाठ जीवन के संकटों से मुक्ति पाने में भी सहायक हो सकता है। माँ नर्मदा की कृपा से व्यक्ति कठिन परिस्थितियों का सामना करने में सक्षम हो जाता है और संकटों से उबरने का मार्ग प्राप्त करता है।
  13. प्रेरणा और उत्साह:नर्मदा चालीसा का पाठ व्यक्ति को प्रेरणा और उत्साह प्रदान करता है। यह चालीसा भक्तों को जीवन के लक्ष्यों की ओर अग्रसर करने और आत्म विश्वास को बढ़ावा देने में मदद करती है।
  14. सकारात्मक मानसिकता:नर्मदा चालीसा का नियमित पाठ सकारात्मक मानसिकता को प्रोत्साहित करता है। यह चालीसा व्यक्तित्व को सकारात्मक दिशा में विकसित करती है और मानसिक ताकत को बढ़ाती है।
  15. धार्मिक अनुष्ठान और पूजा:नर्मदा चालीसा का पाठ धार्मिक अनुष्ठानों और पूजा के अवसरों पर विशेष महत्व रखता है। यह चालीसा पूजा और अनुष्ठानों की सिद्धि में सहायक होती है और धार्मिक क्रियाओं को सफल बनाती है।
  16. भविष्यवाणी और मार्गदर्शन:नर्मदा चालीसा का पाठ भविष्यवाणी और मार्गदर्शन प्राप्त करने में सहायक हो सकता है। यह चालीसा माँ नर्मदा की कृपा से जीवन की दिशा और मार्गदर्शन प्रदान करती है।
  17. सामाजिक कल्याण:नर्मदा चालीसा का पाठ सामाजिक कल्याण के लिए भी सहायक हो सकता है। यह चालीसा समाज में भलाई और सुधार लाने में मदद करती है और सामाजिक जिम्मेदारियों को समझने में सहायक होती है।

नर्मदा चालीसा के अनेक लाभ हैं जो भक्तों के जीवन को सुखमय, समृद्ध और संतुलित बनाने में सहायक होते हैं। इसका नियमित पाठ आध्यात्मिक उन्नति, मानसिक शांति, समस्याओं का समाधान, सुख और समृद्धि, स्वास्थ्य लाभ, कर्म सुधार, धार्मिक जागरूकता, भक्ति वृद्धि, आध्यात्मिक शक्ति का संचार, सकारात्मक ऊर्जा, पारिवारिक संबंधों में सुधार, संकट से मुक्ति, प्रेरणा, सकारात्मक मानसिकता, धार्मिक अनुष्ठान, भविष्यवाणी, और सामाजिक कल्याण में योगदान करता है। माँ नर्मदा की कृपा से जीवन में सकारात्मक परिवर्तन और उन्नति संभव है।

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