Durga Puja 2025 – धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां दुर्गा ने नौ दिनों तक राक्षस महिषासुर से घोर युद्ध किया और अंततः आश्विन शुक्ल पक्ष की दशमी को उसका वध कर उसे पराजित किया। यह कथा न केवल शक्ति और साहस का प्रतीक है, बल्कि यह राक्षसों और अधर्म पर धर्म की विजय का भी प्रतीक है।
Durga Puja Date (2025)
Sun, 28 Sept, 2025 – Thu, 2 Oct, 2025
हिंदू धर्म में दुर्गा पूजा का आयोजन विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, जिसमें नौ दिनों तक मां दुर्गा के नौ विभिन्न रूपों की पूजा की जाती है। इन नौ दिनों को “नवरात्रि” के नाम से जाना जाता है, और इस दौरान भक्तजन विभिन्न अनुष्ठान और उपवास रखते हैं। प्रत्येक दिन एक विशेष देवी की पूजा की जाती है, जो शक्ति, ज्ञान, और समृद्धि का प्रतीक है।
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दशमी, जिसे विजयादशमी के नाम से भी जाना जाता है, इस पर्व का अंतिम दिन होता है। इस दिन भक्तजन मां दुर्गा की मूर्तियों का विसर्जन करते हैं, जो उनकी धरती पर आगमन और फिर वापस कैलाश की यात्रा का प्रतीक है। विजयादशमी के दिन बुराई पर अच्छाई की जीत का जश्न मनाया जाता है, और लोग एक-दूसरे को बधाई देते हैं। यह पर्व न केवल धार्मिक आस्था को दर्शाता है, बल्कि समाज में एकता और भाईचारे की भावना को भी बढ़ावा देता है।
इस प्रकार, दुर्गा पूजा केवल एक त्योहार नहीं है, बल्कि यह शक्ति, विश्वास, और संस्कृति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जो हर साल करोड़ों भक्तों के दिलों में उल्लास और श्रद्धा का संचार करता है।
Durga Puja 2025: महत्वपूर्ण तिथियाँ और उनके महत्व
हिंदू धर्म में दुर्गा पूजा एक अत्यंत भव्य और महत्वपूर्ण त्योहार है, जिसे बड़े धूमधाम और श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। यह पर्व बुराई पर अच्छाई की जीत के प्रतीक के रूप में मनाया जाता है, जिसमें मां दुर्गा की नौ अलग-अलग रूपों में पूजा की जाती है। इस अवसर पर भक्तजन न केवल मां के प्रति अपनी भक्ति प्रकट करते हैं, बल्कि अपने समाज की एकता और भाईचारे का भी जश्न मनाते हैं।
दुर्गा पूजा का उत्सव महालय से आरंभ होता है, जब भक्तजन मां दुर्गा का आह्वान करते हैं। महालय के दिन, श्रद्धालु अपने पूर्वजों की आत्मा को शांति देने के लिए तर्पण करते हैं, और इसी दिन से नवरात्रि का पर्व प्रारंभ होता है। इसके बाद, दुर्गा पूजा का जश्न विजयादशमी तक जारी रहता है, जब भक्तजन मां दुर्गा की मूर्तियों का विसर्जन करते हैं, जो उनकी धरती पर आगमन और फिर कैलाश की यात्रा का प्रतीक है।
आइए जानते हैं कि इस वर्ष दुर्गा पूजा कब होगी। साथ ही, महालय से लेकर विजयादशमी तक की महत्वपूर्ण तिथियों के साथ-साथ उनके महत्व के बारे में विस्तार से जानते हैं। इन तिथियों का धार्मिक, सांस्कृतिक, और सामाजिक महत्व है, जो इस पर्व को और भी खास बनाता है। दुर्गा पूजा के दौरान विभिन्न अनुष्ठान, उपवास, और धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं, जिससे भक्तजन अपनी श्रद्धा और भक्ति का प्रदर्शन करते हैं।
इस प्रकार, दुर्गा पूजा केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं है, बल्कि यह एक सामूहिक उत्सव है, जो समाज के हर वर्ग को जोड़ता है और हर किसी के दिल में श्रद्धा और उल्लास का संचार करता है।

Durga Puja Kab Hai
दुर्गा पूजा का पर्व हर साल भारतीय पंचांग के अनुसार आश्विन माह में प्रतिपदा तिथि से लेकर शुक्ल दशमी तिथि तक मनाया जाता है। यह पर्व आमतौर पर सितंबर से अक्टूबर के बीच आता है, और इस दौरान भक्तजन मां दुर्गा की आराधना और पूजा करते हैं।
इस वर्ष, महालय 21 सितम्बर 2025 को मनाया जाएगा। महालय के दिन मां दुर्गा का आह्वान किया जाता है, जो इस पर्व की शुरुआत का प्रतीक है। इसके बाद, दुर्गा पूजा की शुरुआत 28 सितम्बर से होगी, जो भक्तों के लिए एक महत्वपूर्ण और उल्लासमय समय होगा। इस दौरान, विशेष रूप से षष्ठी से दशमी तक की तिथियों को विशेष महत्व दिया जाता है।
षष्ठी के दिन मां दुर्गा की मूर्ति का पंडाल में स्थापित किया जाता है, और इस दिन से पूजा का विधिवत आरंभ होता है। इसके बाद, सप्तमी, अष्टमी और नवमी के दिन विभिन्न अनुष्ठान किए जाते हैं, culminating in दशमी, जब भक्तजन मां दुर्गा की मूर्तियों का विसर्जन करते हैं।
इस प्रकार, दुर्गा पूजा केवल एक त्योहार नहीं है, बल्कि यह समर्पण, श्रद्धा, और शक्ति का प्रतीक है, जो भक्तों के बीच एकता और सांस्कृतिक पहचान को भी बढ़ावा देता है। इस पर्व के दौरान की जाने वाली सभी रस्में और अनुष्ठान इस पर्व को और भी खास बनाते हैं, जिससे हर साल लोग इसे बड़े उत्साह के साथ मनाते हैं।
महालय 2025 कब है?
महालय का पर्व भारतीय संस्कृति में विशेष महत्व रखता है। ऐसा माना जाता है कि महालय के दिन ही मां दुर्गा धरती पर आती हैं, जिससे भक्तजन अपनी आस्था और भक्ति को प्रकट करते हैं। यह दिन पितृ पक्ष के 15 दिनों के अंत का भी प्रतीक है, जो हमारे पूर्वजों की याद में समर्पित होता है।
इस दिन को सर्व पितृ अमावस्या या महालया अमावस्या के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन लोग अपने पूर्वजों की आत्मा को शांति देने के लिए तर्पण और विशेष अनुष्ठान करते हैं, और यह मां दुर्गा के आगमन की तैयारी का भी समय होता है।
2025 Durga Puja Date
दुर्गा पूजा के दौरान विभिन्न महत्वपूर्ण तिथियाँ हैं, जो इस पर्व के उत्सव का आनंद लेने के लिए भक्तों के लिए महत्वपूर्ण होती हैं। यहां दुर्गा पूजा 2025 के लिए महत्वपूर्ण तिथियाँ प्रस्तुत की गई हैं:
| Maha Panchami | Saturday | 27st September 2025 |
| Maha Shashthi | Sunday | 28th September 2025 |
| Maha Saptami | Monday | 29th September 2025 |
| Maha Ashtami | Tuesday | 30th September 2025 |
| Maha Navami | Wednesday | 1st October 2025 |
| Vijaya Dashami | Thursday | 2nd October 2025 |
इस प्रकार, महालय और दुर्गा पूजा के ये महत्वपूर्ण दिन भारतीय संस्कृति के समृद्ध त्योहारों का हिस्सा हैं, जो भक्ति, प्रेम, और एकता का प्रतीक बनाते हैं।

दुर्गा पूजा का महत्त्व
दुर्गा पूजा एक ऐसा पर्व है, जिसे लेकर कई कहानियाँ, मान्यताएँ और धार्मिक पौराणिक कथाएँ प्रचलित हैं। भारतीय संस्कृति में यह त्योहार अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। धार्मिक पौराणिक कथाओं के अनुसार, दुर्गा पूजा के दौरान देवी दुर्गा अपने मायके, अर्थात अपने पिता हिमवान और माता मैनावती के घर आती हैं। यह अवसर केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं है, बल्कि यह नारी शक्ति, आध्यात्मिकता, और समाज में एकता का प्रतीक भी है।
दुर्गा पूजा का महत्व अन्याय पर धर्म की विजय को दर्शाता है। यह पर्व न केवल मां दुर्गा की शक्ति और साहस का प्रतीक है, बल्कि यह सभी के लिए प्रेरणा स्रोत भी है। धार्मिक मान्यताएँ कहती हैं कि मां दुर्गा ने नौ दिनों तक राक्षस महिषासुर के साथ भयंकर युद्ध किया, जिसमें उन्होंने अपनी शक्ति और साहस का प्रदर्शन किया। अंततः, आश्विन शुक्ल पक्ष की दशमी को उन्होंने महिषासुर का वध कर बुराई पर अच्छाई की जीत सुनिश्चित की।
हिंदू धर्म में दुर्गा पूजा के इस अवसर पर नौ दिनों तक नौ देवियों दुर्गा की आराधना की जाती है। प्रत्येक दिन विशेष रूप से एक देवी का पूजन किया जाता है, जो विभिन्न शक्तियों का प्रतीक होती हैं। दसवें दिन, जिसे विजयादशमी के नाम से जाना जाता है, इस पर्व का समापन होता है, जब भक्तजन मां दुर्गा की मूर्तियों का विसर्जन करते हैं। यह दिन समाज में एकता, प्रेम, और भाईचारे का संदेश भी फैलाता है, जो हमें यह याद दिलाता है कि बुराई का अंत हमेशा अच्छाई से होता है।
इस प्रकार, दुर्गा पूजा केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं है, बल्कि यह भारतीय संस्कृति की समृद्धता, नारी शक्ति, और सामूहिक एकता का भी प्रतीक है।
माँ की पूजा: एक दिव्य उत्सव
माँ की पूजा भारतीय संस्कृति में एक महत्वपूर्ण स्थान रखती है। यह केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि आस्था, प्रेम और समर्पण का प्रतीक है। माँ दुर्गा की पूजा विशेष रूप से नवरात्रि और दुर्गा पूजा के दौरान होती है, जिसमें भक्तजन विभिन्न विधियों से माँ का पूजन करते हैं।
माँ की पूजा के महत्व
- आस्था और भक्ति: माँ की पूजा श्रद्धा और भक्ति का प्रदर्शन है। भक्तजन अपने हृदय से माँ को आह्वान करते हैं और उनकी कृपा के लिए प्रार्थना करते हैं।
- शक्ति का प्रतीक: माँ दुर्गा को शक्ति, साहस, और पराक्रम का प्रतीक माना जाता है। उनकी पूजा करने से भक्तों में आत्मविश्वास और साहस का संचार होता है।
- संस्कार और संस्कृति: माँ की पूजा भारतीय परंपराओं और संस्कारों का अभिन्न हिस्सा है। यह युवा पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़े रखती है।
माँ की पूजा के अनुष्ठान
माँ की पूजा के दौरान भक्तजन निम्नलिखित अनुष्ठान करते हैं:
- स्नान और स्वच्छता: पूजा से पहले स्नान कर स्वच्छता का ध्यान रखा जाता है। यह मान्यता है कि स्वच्छता से माँ प्रसन्न होती हैं।
- माँ का आमंत्रण: पूजा स्थल पर माँ की मूर्ति या तस्वीर स्थापित कर उन्हें आमंत्रित किया जाता है। इस समय “माँ की जय” के नारे लगाए जाते हैं।
- आरती और भोग: माँ की पूजा के दौरान भोग अर्पित किया जाता है, जिसमें फल, मिठाई, और अन्य खाद्य पदार्थ शामिल होते हैं। इसके बाद आरती की जाती है।
- नवमी का महत्व: नवरात्रि के अंतिम दिन नवमी पर विशेष पूजा होती है। इस दिन कुमारी पूजन किया जाता है, जिसमें युवा कन्याओं को देवी का स्वरूप मानकर उनकी पूजा की जाती है।
- अभिषेक और मंत्रोच्चारण: भक्तजन माँ के प्रति अपनी भक्ति प्रकट करने के लिए अभिषेक करते हैं और विभिन्न मंत्रों का जाप करते हैं।
माँ की पूजा का फल
माँ की पूजा करने से भक्तों को मानसिक शांति, समृद्धि, और सुरक्षा की प्राप्ति होती है। माँ की कृपा से कठिनाइयों का सामना करना आसान हो जाता है, और जीवन में सकारात्मकता का संचार होता है।
माँ की पूजा केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं है, बल्कि यह जीवन के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण और आस्था का प्रतीक है। यह हमें सिखाती है कि शक्ति, साहस और प्रेम के साथ जीवन में आगे बढ़ना चाहिए। माँ की पूजा में समर्पण और विश्वास के साथ भाग लेना चाहिए, जिससे हमें जीवन में सुख, शांति और समृद्धि प्राप्त हो सके।

पश्चिम बंगाल में दुर्गा पूजा: एक सांस्कृतिक महापर्व
दुर्गा पूजा पश्चिम बंगाल का सबसे प्रमुख और भव्य त्योहार है, जिसे हर साल बड़े धूमधाम से मनाया जाता है। यह न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि एक सामाजिक और सांस्कृतिक समारोह भी है, जिसमें लोग एकत्र होकर अपनी परंपराओं और संस्कृति का जश्न मनाते हैं।
इतिहास और महत्व
दुर्गा पूजा का पर्व मां दुर्गा की शक्ति और विजय का प्रतीक है, जो महिषासुर नामक राक्षस पर विजय प्राप्त करती हैं। पश्चिम बंगाल में यह त्योहार विशेष रूप से समाज के हर वर्ग के लोगों को एक साथ लाता है।
यह त्यौहार नवरात्रि के दौरान मनाया जाता है, लेकिन पश्चिम बंगाल में इसकी भव्यता और धूमधाम अद्वितीय होती है। यहाँ यह त्योहार न केवल धार्मिक बल्कि सांस्कृतिक पहचान का भी प्रतीक है।
दुर्गा पूजा की तैयारी
दुर्गा पूजा की तैयारियाँ कई महीने पहले से शुरू होती हैं। पंडालों की सजावट, मूर्तियों का निर्माण और विभिन्न प्रकार के सांस्कृतिक कार्यक्रमों की योजना बनाई जाती है।
- मूर्तियों का निर्माण: कुशल कारीगरों द्वारा मां दुर्गा की अद्भुत और कलात्मक मूर्तियाँ बनाई जाती हैं। हर साल, मूर्तियों में नवीनता और रचनात्मकता देखने को मिलती है।
- पंडाल सजावट: पंडालों को विभिन्न थीम्स पर सजाया जाता है, जो एक विशेष आकर्षण का केंद्र होते हैं। कुछ पंडाल तो पूरी तरह से कला के अद्वितीय नमूने होते हैं।
- सांस्कृतिक कार्यक्रम: दुर्गा पूजा के दौरान विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है, जिसमें नृत्य, संगीत, नाटक और लोक कला शामिल होती है।
दुर्गा पूजा के प्रमुख दिन
दुर्गा पूजा का पर्व मुख्यतः पांच दिनों तक मनाया जाता है, जिसमें निम्नलिखित दिन महत्वपूर्ण हैं:
- महालयाः इस दिन माँ दुर्गा का स्वागत किया जाता है। इसे दुर्गा पूजा की शुरुआत माना जाता है, जिसमें श्रद्धालु अपने पूर्वजों को याद करते हैं।
- सप्तमी: इस दिन माँ दुर्गा की मूर्ति का पंडाल में प्राण प्रतिष्ठा की जाती है।
- अष्टमी: यह दिन पूजा का मुख्य दिन होता है, जब कुमारी पूजन और विशेष अनुष्ठान किए जाते हैं।
- नवमी: इस दिन माँ की पूजा के साथ-साथ विजय का जश्न मनाया जाता है।
- दशमी: इसे विजयादशमी कहते हैं, जब माँ दुर्गा की मूर्तियों का विसर्जन किया जाता है। यह दिन मां के धरती पर आने और वापस लौटने का प्रतीक है।

दुर्गा पूजा (Durga Puja 2025) का सामाजिक पहलू
दुर्गा पूजा केवल एक धार्मिक उत्सव नहीं है, बल्कि यह पश्चिम बंगाल की सांस्कृतिक धरोहर का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इस दौरान लोग एक-दूसरे के साथ मिलकर पूजा करते हैं, मिठाइयाँ बाँटते हैं और खुशियों का आदान-प्रदान करते हैं।
पश्चिम बंगाल में दुर्गा पूजा एक जीवंत और सांस्कृतिक उत्सव है, जो लोगों के दिलों में श्रद्धा और भक्ति का संचार करता है। यह पर्व न केवल मां दुर्गा के प्रति समर्पण और आस्था का प्रतीक है, बल्कि समाज को एकजुट करने वाला भी है। यहाँ की जीवंतता, रंग-बिरंगे पंडाल, और भक्ति से भरे मन इस पर्व को और भी खास बनाते हैं।
नवरात्रि और दुर्गा पूजा का संबंध
नवरात्रि और दुर्गा पूजा भारतीय संस्कृति में महत्वपूर्ण पर्व हैं, जो शक्ति और भक्ति के प्रतीक हैं। दोनों का उद्देश्य मां दुर्गा की आराधना करना है, लेकिन ये पर्व अपनी विशेषताओं और रीति-रिवाजों में भिन्न हैं। आइए समझते हैं कि नवरात्रि और दुर्गा पूजा का आपस में क्या संबंध है।
नवरात्रि का महत्व
नवरात्रि, जिसे “नवदुर्गा” के नाम से भी जाना जाता है, एक नौ रातों का त्योहार है जो देवी दुर्गा की आराधना के लिए मनाया जाता है। यह पर्व आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से शुरू होता है और दशमी तक चलता है। नवरात्रि का अर्थ है ‘नौ रातें’, जिनमें भक्तजन देवी दुर्गा के नौ रूपों की पूजा करते हैं। प्रत्येक रात एक विशेष देवी की आराधना की जाती है, जो विभिन्न शक्तियों और गुणों का प्रतीक होती हैं।
नवरात्रि का यह पर्व केवल धार्मिक आस्था का ही प्रतीक नहीं है, बल्कि यह भारतीय संस्कृति में नारी शक्ति और उसके अधिकारों का भी प्रतिनिधित्व करता है। इस दौरान, भक्तजन उपवासी रहकर साधना करते हैं, माता की भक्ति में लीन रहते हैं, और विभिन्न अनुष्ठान करते हैं।
दुर्गा पूजा का महत्व
दुर्गा पूजा नवरात्रि का एक महत्वपूर्ण उत्सव है, जो मुख्यतः पश्चिम बंगाल और भारत के अन्य भागों में धूमधाम से मनाया जाता है। यह पर्व मां दुर्गा के धरती पर आगमन और उनके द्वारा राक्षस महिषासुर के वध की कथा के साथ जुड़ा हुआ है। दुर्गा पूजा का आयोजन नवरात्रि के समय ही होता है, लेकिन इसकी भव्यता और धार्मिकता इसे अलग बनाती है।
दुर्गा पूजा के दौरान, मां दुर्गा की प्रतिमाएँ स्थापित की जाती हैं, और भक्तजन पूजा-अर्चना करते हैं। यह पर्व विशेष रूप से दशमी के दिन समाप्त होता है, जब मां दुर्गा की मूर्तियों का विसर्जन किया जाता है। इस दिन को विजयादशमी के नाम से जाना जाता है, जो बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है।
नवरात्रि और दुर्गा पूजा का संबंध
नवरात्रि और दुर्गा पूजा के बीच का संबंध गहरा है। नवरात्रि के नौ दिनों में मां दुर्गा की आराधना की जाती है, जो दुर्गा पूजा का आधार है। नवरात्रि का पहला दिन महालया से शुरू होता है, जब भक्तजन अपने पूर्वजों की आत्मा को तर्पण देते हैं और मां दुर्गा का आह्वान करते हैं।
नवरात्रि के दौरान की गई पूजा और अनुष्ठान दुर्गा पूजा की तैयारियों का हिस्सा होते हैं। भक्तजन न केवल मां दुर्गा की मूर्तियों की स्थापना करते हैं, बल्कि इस दौरान विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों और उत्सवों का आयोजन भी किया जाता है।
दुर्गा पूजा की भव्यता और रौनक नवरात्रि के उपवास, अनुष्ठान और भक्ति का फल होती है। भक्तजन इन नौ दिनों में अपनी आस्था को और गहरा करते हैं, जिससे दुर्गा पूजा के समय मां दुर्गा की उपस्थिति का अनुभव और भी दिव्य महसूस होता है।
समाज में नवरात्रि और दुर्गा पूजा का प्रभाव
नवरात्रि और दुर्गा पूजा का पर्व समाज में एकता और भाईचारे का प्रतीक बनकर उभरता है। यह पर्व न केवल धार्मिक महत्व रखता है, बल्कि सामाजिक, सांस्कृतिक और पारिवारिक संबंधों को भी मजबूत करता है। इस दौरान लोग एकत्र होकर पूजा करते हैं, एक-दूसरे के साथ उत्सव मनाते हैं और आपसी संबंधों को और भी मधुर बनाते हैं।
समाज में नारी शक्ति का स्थान बढ़ाने के लिए नवरात्रि और दुर्गा पूजा महत्वपूर्ण हैं। इन पर्वों के माध्यम से लोग नारी की शक्ति, साहस और दृढ़ता को पहचानते हैं और सम्मानित करते हैं।
इस प्रकार, नवरात्रि और दुर्गा पूजा का संबंध गहरा और अर्थपूर्ण है। यह दोनों पर्व मां दुर्गा की शक्ति, भक्ति, और समाज में एकता का प्रतीक हैं। हर साल, ये पर्व लोगों को एकत्रित करते हैं, उनके दिलों में श्रद्धा और प्रेम का संचार करते हैं, और नारी शक्ति को एक नया आयाम प्रदान करते हैं।
Navratri 2025 Date
शरद नवरात्रि, हिंदू पंचांग के अनुसार अश्विन मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से प्रारंभ होकर दशमी तिथि तक चलने वाला एक महत्वपूर्ण नौ-दिवसीय उत्सव है। यह पर्व माँ दुर्गा के नौ रूपों की आराधना को समर्पित है और विशेष रूप से उत्तरी एवं पूर्वी भारत में अत्यधिक उत्साह और भक्ति के साथ मनाया जाता है। इन नौ दिनों में भक्त व्रत, पूजा-अर्चना और विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों का पालन करते हैं।
नवरात्रि का समापन दशमी तिथि को होता है, जिसे विजयादशमी या दशहरा के नाम से जाना जाता है। यह दिन बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक माना जाता है। शरद ऋतु में मनाए जाने के कारण इसे शरद नवरात्रि कहते हैं, और यह सर्दियों के आगमन का संकेत भी देता है।
सन 2025 में, शरद नवरात्रि का यह पावन पर्व सोमवार, 22 सितंबर से प्रारंभ होकर गुरुवार, 2 अक्टूबर को विजयादशमी मनाने के साथ समाप्त होगा। यह अवधि आध्यात्मिक साधना, आंतरिक शक्ति का संचय और समृद्धि की कामना करने का एक पवित्र समय है।
Navratri Colors 2025
Navratri Day 1
September 22, 2025, Monday
Navratri color of the day – White
White symbolizes purity and innocence. Wearing white on Monday is believed to invite the blessings of the Goddess and bring a sense of calm and inner peace.
Navratri Day 2
September 23, 2025, Tuesday
Navratri color of the day – Red
Wear red on Tuesday to celebrate Navratri. Red represents passion, love, and energy—and it’s also the most commonly offered color of Chunri to the Goddess. This vibrant shade is believed to fill you with strength, vitality, and enthusiasm.
Navratri Day 3
September 24, 2025, Wednesday
Navratri color of the day – Royal Blue
Wear royal blue on Wednesday to celebrate Navratri with grace and style. This rich, vibrant shade of blue symbolizes elegance, depth, and tranquility, adding a touch of sophistication to your festive spirit.
Navratri Day 4
September 25, 2025, Thursday
Navratri color of the day – Yellow
Wear yellow on Thursday to celebrate Navratri with bright optimism and joy. This warm, uplifting color is known to boost your mood and keep you feeling cheerful throughout the day.
Navratri Day 5
September 26, 2025, Friday
Navratri color of the day – Green
Green symbolizes nature, growth, and harmony—it brings a sense of peace, fertility, and serenity. Wear green on Friday to invite the blessings of the Goddess and embrace a fresh start filled with calm and balance.
Navratri Day 6
September 27, 2025, Saturday
Navratri color of the day – Grey
Grey symbolizes emotional balance and a grounded nature. It’s a great choice for those who want to celebrate Navratri with understated elegance, making a subtle yet stylish statement with this muted shade.
Navratri Day 7
September 28, 2025, Sunday
Navratri color of the day – Orange
Wearing orange on Sunday while worshipping Goddess Navdurga is believed to bring warmth, enthusiasm, and positivity. This vibrant color radiates energy and helps keep your spirits high throughout the day.
Navratri Day 8
September 29, 2025, Monday
Navratri color of the day – Peacock Green
Peacock green represents individuality and a unique sense of style. Celebrate this day of Navratri by standing out in this stunning blend of blue and green. The color reflects qualities like compassion, freshness, and a vibrant spirit.
Navratri Day 9
September 30, 2025, Tuesday
Navratri color of the day – Pink
Wear pink for your Navratri celebrations to embrace love, affection, and harmony. This charming and inviting color not only makes you more approachable but also adds a graceful, radiant touch to your personality.

