Wednesday, February 25, 2026
HomeChalisaश्री भैरव चालीसा - Shri Bhairav Chalisa PDF 2026

श्री भैरव चालीसा – Shri Bhairav Chalisa PDF 2026

By Dr. Hemlata | Reviewed by Vedic Scholar | Last Updated: January 2026 - This devotional text has been carefully verified against widely accepted traditional sources to preserve correct wording, pronunciation, and spiritual intent for daily recitation.
- Advertisement -

भैरव चालीसा (Bhairav Chalisa Pdf) एक भक्ति स्तोत्र है जो भगवान भैरव को समर्पित है। भगवान भैरव, जिन्हें शिव भगवान के दसवें रूप में माना जाता है, को इस चालीसा के माध्यम से भक्तों द्वारा प्रशंसा और स्तुति की जाती है। भैरव चालीसा में भगवान भैरव की दिव्यता, महिमा, और उनके द्वारा समस्त भक्तों को दी जाने वाली कृपा का वर्णन होता है। आप हमारी वेबसाइट में हनुमान चालीसा | श्री काल भैरव अष्टकम् और हनुमान अमृतवाणी भी पढ़ सकते हैं।

यह चालीसा उन भक्तों के लिए विशेष महत्व रखती है जो भगवान भैरव की पूजा और अराधना में विश्वास रखते हैं। भैरव चालीसा के पाठ से भक्तों को संतोष, सुरक्षा, और भगवान के करुणा से प्राप्त आशीर्वाद की प्राप्ति होती है।

इस चालीसा में भगवान भैरव के दिव्य स्वरूप, उनके महाकाली और महाकाल रूप, और उनके द्वारा प्रदान की गई रक्षा और समृद्धि की महिमा का वर्णन किया गया है। भैरव चालीसा PDF के पाठ करने से भक्तों के मन में स्थिरता आती है, उन्हें भगवान के आशीर्वाद से प्राप्त सुरक्षा मिलती है और उनके जीवन में समृद्धि का संचार होता है।

भैरव चालीसा का नियमित पाठ विशेष रूप से भैरवाष्टमी और अन्य पवित्र अवसरों पर किया जाता है, जिससे भक्तों को भगवान भैरव की कृपा और अनुग्रह प्राप्त होते हैं।



  • हिंदी / संस्कृत
  • English

|| भैरव चालीसा ||

॥ दोहा ॥
श्री गणपति गुरु गौरी पद
प्रेम सहित धरि माथ ।
चालीसा वंदन करो
श्री शिव भैरवनाथ ॥

श्री भैरव संकट हरण
मंगल करण कृपाल ।
श्याम वरण विकराल वपु
लोचन लाल विशाल ॥

॥ चौपाई ॥
जय जय श्री काली के लाला ।
जयति जयति काशी-कुतवाला ॥

जयति बटुक-भैरव भय हारी ।
जयति काल-भैरव बलकारी ॥

जयति नाथ-भैरव विख्याता ।
जयति सर्व-भैरव सुखदाता ॥

भैरव रूप कियो शिव धारण ।
भव के भार उतारण कारण ॥

भैरव रव सुनि हवै भय दूरी ।
सब विधि होय कामना पूरी ॥

शेष महेश आदि गुण गायो ।
काशी-कोतवाल कहलायो ॥

जटा जूट शिर चंद्र विराजत ।
बाला मुकुट बिजायठ साजत ॥

कटि करधनी घुंघरू बाजत ।
दर्शन करत सकल भय भाजत ॥

जीवन दान दास को दीन्ह्यो ।
कीन्ह्यो कृपा नाथ तब चीन्ह्यो ॥

वसि रसना बनि सारद-काली ।
दीन्ह्यो वर राख्यो मम लाली ॥

धन्य धन्य भैरव भय भंजन ।
जय मनरंजन खल दल भंजन ॥

कर त्रिशूल डमरू शुचि कोड़ा ।
कृपा कटाक्ष सुयश नहिं थोडा ॥

जो भैरव निर्भय गुण गावत ।
अष्टसिद्धि नव निधि फल पावत ॥

रूप विशाल कठिन दुख मोचन ।
क्रोध कराल लाल दुहुं लोचन ॥

अगणित भूत प्रेत संग डोलत ।
बम बम बम शिव बम बम बोलत ॥

रुद्रकाय काली के लाला ।
महा कालहू के हो काला ॥

बटुक नाथ हो काल गंभीरा ।
श्वेत रक्त अरु श्याम शरीरा ॥

करत नीनहूं रूप प्रकाशा ।
भरत सुभक्तन कहं शुभ आशा ॥

रत्न जड़ित कंचन सिंहासन ।
व्याघ्र चर्म शुचि नर्म सुआनन ॥

तुमहि जाइ काशिहिं जन ध्यावहिं ।
विश्वनाथ कहं दर्शन पावहिं ॥

जय प्रभु संहारक सुनन्द जय ।
जय उन्नत हर उमा नन्द जय ॥

भीम त्रिलोचन स्वान साथ जय ।
वैजनाथ श्री जगतनाथ जय ॥

महा भीम भीषण शरीर जय ।
रुद्र त्रयम्बक धीर वीर जय ॥

अश्वनाथ जय प्रेतनाथ जय ।
स्वानारुढ़ सयचंद्र नाथ जय ॥

निमिष दिगंबर चक्रनाथ जय ।
गहत अनाथन नाथ हाथ जय ॥

त्रेशलेश भूतेश चंद्र जय ।
क्रोध वत्स अमरेश नन्द जय ॥

श्री वामन नकुलेश चण्ड जय ।
कृत्याऊ कीरति प्रचण्ड जय ॥

रुद्र बटुक क्रोधेश कालधर ।
चक्र तुण्ड दश पाणिव्याल धर ॥

करि मद पान शम्भु गुणगावत ।
चौंसठ योगिन संग नचावत ॥

करत कृपा जन पर बहु ढंगा ।
काशी कोतवाल अड़बंगा ॥

देयं काल भैरव जब सोटा ।
नसै पाप मोटा से मोटा ॥

जनकर निर्मल होय शरीरा ।
मिटै सकल संकट भव पीरा ॥

श्री भैरव भूतों के राजा ।
बाधा हरत करत शुभ काजा ॥

ऐलादी के दुख निवारयो ।
सदा कृपाकरि काज सम्हारयो ॥

सुन्दर दास सहित अनुरागा ।
श्री दुर्वासा निकट प्रयागा ॥

श्री भैरव जी की जय लेख्यो ।
सकल कामना पूरण देख्यो ॥

॥ दोहा ॥
जय जय जय भैरव बटुक स्वामी संकट टार ।
कृपा दास पर कीजिए शंकर के अवतार ॥

|| Bhairav Chalisa PDF ||

Bhairav Chalisa Lyrics PDF

॥ Doha
Shree Ganapati Guru Gauree Pad
Prem Dhari Sahit Maath ॥
Chaaleesa Vandan Karo
Shree Shiv Bhairavanaath ॥

Shreebhairav Sankat Haran
Mangal Karan Krpaal ॥
Shyaam Varan Vikaraal Vapu
Lochan Laal Vishaal ॥

॥ Chaupai ॥
Jay Jay Shree Kaalee Ke Laala ॥
Jayati Jayati Kaashee-Kutavaala ॥

Jayati Batuk-Bhairav Bhay Haaree ॥
Jayati Kaal-Bhairav Balakaaree ॥

Jayati Naath-Bhairav Vaibhava ॥
Jayati Sarv-Bhairav Sukhadaata ॥

Bhairav Roop Kiyo Dhaaran Shiv ॥
Bhav Ke Bhaar Jaaree Hone Ka Kaaran ॥

Bhairav Rav Suni Havai Bhay Doori ॥
Sab Vidhi Hoy Kaamana Poorn ॥

Shesh Mahesh Aadi Gun Gaayo ॥
Kaashee-Kotavaal Kahalaayo ॥

Jata Joot Shree Chandr Viraajat ॥
Baala Mukut Bijayath Saajat ॥

Kati Karadhanee Ghungharoo Baajat ॥
Darshan Karat Sakal Bhay Bhajat ॥

Jeevan Daan Daas Ko Dinahyo ॥
Kinhyo Krpa Naath Tab Chheenyo ॥

Vasi Rasana Bani Sarad-Kaalee ॥
Deenhyo Var Raakhyo Mam Laali ॥

Dhany Dhany Bhairav Bhay Bhanjan ॥
Jay Manoranjan Khal Dal Bhanjan ॥

Kar Trishool Damaroo Shuchi Koda ॥
Krpa Kataksh Suyash Nahin Thoda ॥

Jo Bhairav Nirbhay Gun Gaavat ॥
Ashtasiddhi Nav Nidhi Phal Paavat ॥

Roop Vishaal Kathin Duhkh Mochan ॥
Krodh Karaal Laal Duhun Lochan ॥

Aganit Bhoot Pret Sang Dolat ॥
Bam Bam Bam Shiv Bam Bam Bolat ॥

Rudrakaay Kaalee Ke Laala ॥
Maha Kaalhoo Ke Ho Kaala ॥

Batuk Naath Ho Kaal Gambheerata ॥
Shvet Rakt Aru Shyaam Shareera ॥

Karat Neenahoon Roop Prakaasha ॥
Bharat Subhaktan Kahan Shubh Aasha ॥

Ratnajatit Kanchanajanghaan ॥
Vyaaghr Charm Shuchi Narm Suanan ॥

Tumahi Jai Kaasheehin Jan Dhyaavahin ॥
Vishvanaath Kahan Darshan Paavahin ॥

Jay Prabhu Sanhaarak Sunand Jay ॥
Jay Unnat Har Uma Nand Jay ॥

Bheem Trilochan Svaan Saath Jay ॥
Vaijanaath Shree Jagatanaath Jay ॥

Maha Bheem Bheeshan Shareer Jay ॥
Rudr Trayambak Dheer Veer Jay ॥

Ashvanaath Jay Pretanaath Jay ॥
Svanaarudh Sayachandr Naath Jay ॥

Nimish Digambar Chakranaath Jay ॥
Gahat Anaathan Naath Haath Jay ॥

Trilesh Bhootesh Chandr Jay ॥
Krodh Vats Amaresh Nand Jay ॥

Shree Vaaman Nakulesh Chand Jay ॥
Krtau Kirati Prachand Jay ॥

Rudr Batuk Krodhesh Kaaladhar ॥
Chakr Tund Dash Paanivyaal Dhar ॥

Kari Mad Paan Shambhu Gunagaavat ॥
Chaunsath Yogin Sang Naachavat ॥

Karat Krpa Jan Par Bahuguna ॥
Kaashee Kotavaal Adabanga ॥

Dayan Kaal Bhairav Jab Sota ॥
Na Saee Paap Mote Se Mota ॥

Jaanakar Nirmal Hoy Shareera ॥
Mitai Sakal Sankat Bhav Peera ॥

Shree Bhairav Bhooton Ke Raaja ॥
Baadha Harat Karat Shubh Kaaja ॥

Ailaadee Ke Duhkh Nivaarayo ॥
Sada Krpaakari Kaaj Samhaarayo ॥

Sundar Daas Anuraag Sahita ॥
Shree Durvaasa Nikat Prayaaga ॥

Shree Bhairav Jee Kee Jay Lekho ॥
Sakal Kaamana Pooran Dekhyo ॥

॥ Doha
Jay Jay Jay Bhairav Batuk Svaamee Sankat Taar ॥
Krpa Daas Par Kij Shankar Ke Avataar ॥



Bhairav Chalisa Images

श्री भैरव चालीसा को एक अति शक्तिशाली साधना माना जाता है जो जीवन में आने वाले संकटों से मुक्ति दिलाती है। भैरव जी को हिंदू धर्म में संकट हरने वाले देवता के रूप में पूजा जाता है। उनकी पूजा करने से नकारात्मक ऊर्जा और भय दूर होते हैं और व्यक्ति को अद्भुत शक्ति प्राप्त होती है। श्री भैरव चालीसा पढ़ने से आत्मविश्वास और साहस में वृद्धि होती है, जो किसी भी कठिन परिस्थिति का सामना करने में मदद करता है। संकट के समय यह चालीसा एक सुरक्षा कवच का काम करती है। जो लोग नियमित रूप से इसका पाठ करते हैं, उनके जीवन में सकारात्मक बदलाव आते हैं। यह न केवल संकटों से मुक्ति दिलाती है, बल्कि जीवन में समृद्धि और सफलता भी लाती है।

भैरव जी की कृपा से व्यक्ति के जीवन से सभी प्रकार के कष्ट, बुराइयाँ और दुर्भाग्य दूर होते हैं। उन्हें काल भैरव भी कहा जाता है, जो समय और मृत्यु के स्वामी माने जाते हैं। इसलिए, जो लोग श्री भैरव चालीसा का पाठ करते हैं, उन्हें समय और जीवन की कठिनाइयों का सामना करने की अद्वितीय शक्ति प्राप्त होती है। यह चालीसा संकट के समय में मानसिक शांति प्रदान करती है और जीवन के संघर्षों में विजय प्राप्त करने का मार्ग दिखाती है। इसके नियमित पाठ से व्यक्ति का मन और शरीर दोनों शुद्ध होते हैं, और वह निडर होकर जीवन में आगे बढ़ सकता है।


श्री भैरव चालीसा पढ़ने की विधि अत्यंत सरल है, परन्तु इसे सही तरीके से पढ़ने पर ही इसका पूर्ण लाभ मिलता है। सबसे पहले, सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनें और पूजा स्थल को साफ-सुथरा रखें। फिर भगवान भैरव की मूर्ति या चित्र के सामने दीपक जलाएं। इसके बाद, भगवान भैरव को गुड़, तेल और उड़द का भोग लगाएं। यह भैरव जी के प्रिय माने जाते हैं और इन्हें चढ़ाने से उनकी कृपा जल्दी प्राप्त होती है।

श्री भैरव चालीसा का पाठ करते समय अपनी पूरी श्रद्धा और विश्वास के साथ भगवान भैरव का ध्यान करें। चालीसा पढ़ने के दौरान मन को एकाग्र रखें और किसी प्रकार के अन्य विचारों को आने न दें। पाठ के बाद भगवान भैरव से प्रार्थना करें कि वे आपकी सभी परेशानियों का नाश करें और जीवन में सुख-शांति प्रदान करें।

यदि संभव हो, तो किसी भी विशेष दिन, जैसे कि शनिवार या भैरव अष्टमी पर श्री भैरव चालीसा का पाठ करना अत्यंत शुभ माना जाता है। इससे भैरव जी की कृपा शीघ्र प्राप्त होती है और व्यक्ति के जीवन से सभी प्रकार के कष्ट दूर होते हैं। नियमित रूप से इस चालीसा का पाठ करने से व्यक्ति की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और जीवन में उन्नति के मार्ग खुलते हैं।


Bhairav Chalisa Image 2

श्री भैरव चालीसा का धार्मिक और आध्यात्मिक महत्त्व अत्यंत गहरा है। यह चालीसा भगवान भैरव की स्तुति है, जिनका रूप भयंकर होते हुए भी असीम करुणा से परिपूर्ण है। उन्हें कष्टों को हरने और भय से मुक्ति दिलाने वाले देवता के रूप में पूजा जाता है। श्री भैरव चालीसा के पाठ से जीवन के विभिन्न संकटों से मुक्ति मिलती है और मानसिक शांति प्राप्त होती है।

भैरव जी की कृपा से व्यक्ति के जीवन में आने वाली बाधाएं, शत्रु बाधाएं, कानूनी विवाद, या अन्य प्रकार के संकट दूर हो जाते हैं। इसके साथ ही, यह चालीसा उन लोगों के लिए भी अत्यंत लाभकारी है, जो आर्थिक संकट से जूझ रहे होते हैं। इसे पढ़ने से धन की प्राप्ति होती है और व्यापार में सफलता मिलती है।

इसके अतिरिक्त, श्री भैरव चालीसा का पाठ करने से व्यक्ति के जीवन में आध्यात्मिक उन्नति होती है। यह चालीसा न केवल बाहरी संकटों को दूर करती है, बल्कि आंतरिक शुद्धता भी प्रदान करती है। जो लोग अपने जीवन में नकारात्मक ऊर्जा या बुरी शक्तियों का सामना कर रहे होते हैं, उनके लिए यह चालीसा एक सुरक्षा कवच का काम करती है।

श्री भैरव चालीसा के नियमित पाठ से व्यक्ति का मनोबल बढ़ता है, और वह जीवन की हर चुनौती का सामना करने के लिए तैयार हो जाता है।



भैरव चालीसा के लाभ

भैरव चालीसा (Bhairav Chalisa Pdf) एक महत्वपूर्ण धार्मिक पाठ है, जो भगवान भैरव को समर्पित है। भगवान भैरव, भगवान शिव के अवतार के रूप में माने जाते हैं और उन्हें विशेष रूप से सुरक्षा, शक्तिशालीता और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। भैरव चालीसा का पाठ करने के कई लाभ होते हैं, जिन्हें इस लेख में विस्तार से समझाया गया है।

सुरक्षा और भय से मुक्ति

भैरव चालीसा (Bhairav Chalisa Pdf) का पाठ विशेष रूप से सुरक्षा और भय से मुक्ति के लिए किया जाता है। भगवान भैरव को भय और अशांति से राहत देने वाला देवता माना जाता है। यह चालीसा उन लोगों के लिए विशेष रूप से लाभकारी है जो मानसिक तनाव, अनिश्चितता या भय से जूझ रहे हैं। नियमित पाठ से मानसिक शांति और सुरक्षा की भावना प्राप्त होती है।

स्वास्थ्य में सुधार

भैरव चालीसा का नियमित पाठ करने से शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य में सुधार होता है। भैरव जी की पूजा से रोग, बीमारियाँ और शारीरिक कष्ट दूर हो सकते हैं। यह चालीसा आपके शरीर को ऊर्जा और शक्ति प्रदान करती है, जिससे आप स्वस्थ और सक्रिय रहते हैं। इसके अलावा, भैरव चालीसा के पाठ से शरीर के रोग प्रतिकारक तंत्र को भी बल मिलता है।

समृद्धि और धन की प्राप्ति

भैरव चालीसा का नियमित पाठ करने से धन और समृद्धि की प्राप्ति होती है। भगवान भैरव को धन और ऐश्वर्य का दाता माना जाता है। इस चालीसा के पाठ से आर्थिक स्थिति में सुधार होता है और धन-संपत्ति में वृद्धि होती है। यह विशेष रूप से उन लोगों के लिए फायदेमंद है जो आर्थिक कठिनाइयों का सामना कर रहे हैं या व्यापार में सफलता प्राप्त करना चाहते हैं।

शक्तिशालीता और आत्मविश्वास

भैरव चालीसा (Bhairav Chalisa Pdf) का पाठ करने से आत्मविश्वास और मानसिक शक्ति में वृद्धि होती है। भगवान भैरव को ताकत और शक्ति का प्रतीक माना जाता है। इस चालीसा के माध्यम से आप अपनी आंतरिक शक्ति को जागृत कर सकते हैं और आत्मविश्वास में वृद्धि कर सकते हैं। यह मानसिक दृढ़ता और साहस को भी बढ़ाता है, जिससे आप जीवन की चुनौतियों का सामना आत्म-विश्वास के साथ कर सकते हैं।

नकारात्मक ऊर्जा का नाश

भैरव चालीसा का नियमित पाठ नकारात्मक ऊर्जा और दोषों को दूर करने में सहायक होता है। इस चालीसा के पाठ से घर और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह होता है। भगवान भैरव की पूजा से घर में सुख-शांति और समृद्धि बनी रहती है, और नकारात्मक शक्ति का प्रभाव कम होता है। यह चालीसा घर को सुरक्षित और शांतिपूर्ण बनाने में मदद करती है।

मानसिक शांति और संतुलन

भैरव चालीसा का पाठ मानसिक शांति और संतुलन बनाए रखने में सहायक है। भगवान भैरव की पूजा से मन की अशांति और तनाव कम होता है। यह चालीसा मानसिक स्थिति को स्थिर करती है और जीवन में संतुलन बनाए रखने में मदद करती है। इसका नियमित पाठ करने से मानसिक स्पष्टता और शांति प्राप्त होती है।

पारिवारिक सुख और सौहार्द

भैरव चालीसा (Bhairav Chalisa Pdf) का पाठ पारिवारिक सुख और सौहार्द बढ़ाने में भी सहायक होता है। भगवान भैरव की पूजा से परिवार में प्रेम और एकता बढ़ती है। यह चालीसा परिवारिक विवादों को सुलझाने में मदद करती है और परिवार के सदस्यों के बीच सौहार्दपूर्ण संबंध बनाए रखने में सहायक होती है।

दुर्भाग्य और विघ्नों का नाश

भैरव चालीसा का नियमित पाठ दुर्भाग्य और विघ्नों को दूर करने में सहायक होता है। भगवान भैरव के आशीर्वाद से जीवन में आने वाली कठिनाइयों और विघ्नों को पार किया जा सकता है। यह चालीसा उन लोगों के लिए लाभकारी है जो जीवन में विघ्नों और अडचनों का सामना कर रहे हैं और सफलता की राह में बाधाएं महसूस कर रहे हैं।

सकारात्मक दृष्टिकोण और प्रेरणा

भैरव चालीसा का पाठ सकारात्मक दृष्टिकोण और प्रेरणा प्राप्त करने में मदद करता है। भगवान भैरव की पूजा से व्यक्ति में ऊर्जा और उत्साह की भावना बढ़ती है। यह चालीसा आपके मन को सकारात्मक दिशा में ले जाती है और जीवन के प्रति एक नया दृष्टिकोण प्रदान करती है। यह प्रेरणा देती है कि आप अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए मेहनत करें और संघर्ष करें।

आध्यात्मिक उन्नति

भैरव चालीसा का पाठ आध्यात्मिक उन्नति और आत्मा की शांति के लिए भी महत्वपूर्ण है। भगवान भैरव की पूजा से आप अपनी आध्यात्मिक यात्रा को प्रगति की दिशा में ले जा सकते हैं। यह चालीसा आपकी आत्मा को शांति और संतुलन प्रदान करती है, जिससे आप अपनी आध्यात्मिक उन्नति की ओर बढ़ सकते हैं।

सकारात्मक परिवर्तन और जीवन में सुधार

भैरव चालीसा का नियमित पाठ जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने में सहायक होता है। यह चालीसा जीवन में सुधार और उन्नति के रास्ते खोलती है। भगवान भैरव की कृपा से व्यक्ति की स्थिति में सुधार होता है और जीवन में नई संभावनाएँ खुलती हैं। यह चालीसा आपको अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए प्रेरित करती है और जीवन की समस्याओं को दूर करती है।

विवाह और संतान सुख

भैरव चालीसा का पाठ विवाह और संतान सुख के लिए भी लाभकारी हो सकता है। भगवान भैरव की पूजा से विवाह में आ रही बाधाओं को दूर किया जा सकता है और संतान सुख प्राप्त किया जा सकता है। यह चालीसा उन लोगों के लिए विशेष रूप से लाभकारी है जो विवाह और संतान के लिए कठिनाइयों का सामना कर रहे हैं।

भैरव चालीसा का नियमित पाठ करने से जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में लाभ प्राप्त होता है। यह चालीसा सुरक्षा, समृद्धि, स्वास्थ्य, मानसिक शांति, और आध्यात्मिक उन्नति प्रदान करती है। भगवान भैरव की पूजा से जीवन में सकारात्मक परिवर्तन और सुख-शांति प्राप्त होती है। इसलिए, इस चालीसा का नियमित पाठ करके आप अपने जीवन को बेहतर और सफल बना सकते हैं।


भैरव चालीसा कब पढ़ना है?

भैरव चालीसा को किसी भी समय पढ़ा जा सकता है, लेकिन विशेष रूप से इसे मंगलवार, रविवार, या शनिवार को पढ़ना शुभ माना जाता है। ये दिन काल भैरव के लिए विशेष होते हैं। इसके अलावा, व्यक्ति भैरव चालीसा का पाठ सुबह-सुबह या देर रात के समय कर सकता है। संकटों और नकारात्मक ऊर्जाओं से मुक्ति के लिए भैरव चालीसा का नियमित पाठ लाभकारी होता है।

काल भैरव और भैरवनाथ में क्या अंतर है?

काल भैरव और भैरवनाथ दोनों ही भगवान शिव के उग्र रूप हैं, लेकिन दोनों नाम भिन्न संदर्भ में उपयोग होते हैं। काल भैरव को समय और मृत्यु के स्वामी के रूप में पूजा जाता है, और उन्हें न्याय के देवता भी माना जाता है। भैरवनाथ नाम का उपयोग उत्तर भारत के कुछ क्षेत्रों में विशेष रूप से किया जाता है, लेकिन दोनों ही भगवान शिव के भयंकर रूप के प्रतीक हैं।

भैरव देवता कौन हैं?

भैरव देवता भगवान शिव के एक उग्र और भयंकर रूप माने जाते हैं। उन्हें विशेष रूप से तंत्र साधना में पूजनीय माना जाता है और वे जीवन की कठिनाइयों, भय, और नकारात्मक ऊर्जाओं को समाप्त करने वाले देवता हैं। भैरव का रूप न्यायप्रिय और अनुशासन प्रिय है, और वे अपने भक्तों को हर प्रकार की बुराई से सुरक्षा प्रदान करते हैं।

8 भैरव कौन कौन से हैं?

आठ भैरवों को अष्ट भैरव कहा जाता है, और ये भगवान शिव के विभिन्न रूपों का प्रतिनिधित्व करते हैं। इन आठ भैरवों के नाम हैं:

– असितांग भैरव
– रुद्र भैरव
– चंद्र भैरव
– क्रोध भैरव
– उन्मत्त भैरव
– कपाल भैरव
– भीषण भैरव
– संहार भैरव

भैरव के गुरु कौन हैं?

भैरव देवता स्वयं भगवान शिव के अवतार हैं, इसलिए उनकी कोई अलग गुरु नहीं मानी जाती है। परंतु, उनके आध्यात्मिक मार्गदर्शन के पीछे भगवान शिव की ही शक्ति है, जो तंत्र साधना और अन्य आध्यात्मिक प्रक्रियाओं के माध्यम से भैरव के रूप में प्रकट होती है। शिव ही भैरव के सर्वोच्च रूप माने जाते हैं।

भेरुजी का भगवान कौन है?

भेरुजी या भैरव जी का भगवान स्वयं भगवान शिव हैं। भेरुजी भगवान शिव के उग्र रूप हैं, जिन्हें नकारात्मक शक्तियों का नाश करने और अपने भक्तों की सुरक्षा के लिए पूजा जाता है। भेरुजी की पूजा मुख्य रूप से राजस्थान में होती है, और उन्हें शिव के ही रक्षक रूप में देखा जाता है।

- Advertisement -
Hemlata – Experienced Hindu Devotee and Devotional Text Expert
Hemlata – Experienced Hindu Devotee and Devotional Text Experthttps://www.chalisa-pdf.com
Hemlata is a practicing Hindu devotee with over 15 years of experience in daily recitation of Chalisas, Aartis, Mantras, and Stotras. She has studied devotional texts extensively and is committed to preserving authentic versions of traditional hymns. The Text on this page has been carefully verified with commonly accepted temple and devotional editions to ensure accuracy, readability, and adherence to traditional practice.

Devotional Expertise Statement

The content published on Chalisa-PDF.com is curated by individuals with long-standing involvement in devotional reading, temple traditions, and scripture-based worship practices. Texts are sourced from widely accepted traditional versions used in households, temples, and religious gatherings. Our role is to preserve clarity, accuracy, and devotional integrity while presenting content in an accessible PDF format.

Source Note:

Text based on traditional versions attributed to respected devotional literature and public-domain publications.

Published by:

Chalisa-PDF.com – A devotional platform providing free Hindu prayer PDFs for educational and spiritual reading.

Text Verification Note (For Chalisa PDF Pages):

The Chalisa text on this page has been carefully reviewed and verified against commonly accepted traditional versions used in temples and devotional households across India. Every verse is cross-checked to ensure accuracy, readability, and adherence to devotional tradition, so that devotees can use it for personal spiritual practice (bhakti) with confidence.

RELATED ARTICLES

Most Popular